Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Physics Chapter 04 गति के नियम
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Question 4.1: निम्नलिखित पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:
(a) एकसमान चाल से नीचे गिरती वर्षा की कोई बूँद,
(b) जल में तैरता 10g संहति का कोई कर्क,
(c) कुशलता से आकाश में स्थिर रोकी गई कोई पतंग,
(d) 30 km/h के एकसमान वेग से ऊबड़-खाबड़ सड़क पर गतिशील कोई कार,
(e) सभी गुरुータवीय पिंडों से दूर तथा वैद्युत और चुंबकीय क्षेत्र से मुक्त, अंतरिक्ष में तीव्र चाल वाला इलेक्ट्रॉन।
Answer:
(a) चूँकि वर्षा की बूँद एकसमान चाल से नीचे गिर रही है, इसलिए इसका त्वरण शून्य है। न्यूटन के गति के पहले नियम के अनुसार, बूँद पर कार्यरत नेट बाह्य बल शून्य है।
(b) जल में तैरता हुआ कर्क विराम अवस्था में है और संतुलित बलों के अधीन है। अतः इस पर कार्यरत नेट बल शून्य है।
(c) आकाश में स्थिर रोकी गई पतंग पर नेट बल शून्य है, क्योंकि यह संतुलन की अवस्था में है।
(d) कार 30 km/h के एकसमान वेग से गति कर रही है, जिसका अर्थ है कि इसका त्वरण शून्य है। इसलिए कार पर कार्यरत नेट बल शून्य है।
(e) अंतरिक्ष में मुक्त इलेक्ट्रॉन पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं कर रहा है (चूँकि यह सभी क्षेत्रों से मुक्त है), अतः इस पर कार्यरत नेट बल शून्य है।
मुख्य बिंदु:
• एकसमान वेग या गति की स्थिति में त्वरण शून्य होता है।
• न्यूटन के प्रथम नियम के अनुसार, त्वरण शून्य होने पर नेट बल भी शून्य होता है।
• संतुलन की अवस्था में सभी बलों का परिणामी शून्य होता है।
आम गलतियाँ:
• एकसमान चाल देखकर भी बल को गैर-शून्य मान लेना।
• गुरुत्वाकर्षण या हवा के प्रतिरोध को नेट बल में जोड़ देना जबकि गति एकसमान हो।
• त्वरण और वेग के अंतर को न समझना।
Exam Tips:
a) सबसे पहले पिंड के त्वरण की जाँच करें।
b) यदि वेग नियत (एकसमान) है, तो त्वरण को सीधे शून्य लिखें।
c) न्यूटन के प्रथम नियम का संदर्भ अवश्य दें।
Question 4.2: 0.05 kg संहति का कोई कंकड़ ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका गया है। नीचे दी गई प्रत्येक स्थिति में कंकड़ पर लग रहे नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:
(a) उपरिमुखी गति के समय।
(b) अधोमुखी गति के समय।
(c) उच्चतम बिंदु पर जहाँ क्षण भर के लिए वह विराम में रहता है। यदि कंकड़ को क्षैतिज दिशा से \( 45^\circ \) कोण पर फेंका जाए, तो क्या आपके उत्तर में कोई परिवर्तन होगा? वायु-प्रतिरोध की उपेक्षा कीजिए।
Answer:
(a) उपरिमुखी गति के समय कंकड़ पर केवल गुरुत्वाकर्षण बल नीचे की ओर कार्य करता है (वायु-प्रतिरोध नगण्य मानने पर):
\( F = m \times g \)
\( F = 0.05 \times 10 = 0.5 \text{ N} \) (ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर)
(b) अधोमुखी गति के समय भी कंकड़ पर केवल गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करता है:
\( F = 0.5 \text{ N} \) (ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर)
(c) उच्चतम बिंदु पर भी कंकड़ पर कार्य करने वाला बल केवल उसका भार ही होता है:
\( F = 0.5 \text{ N} \) (ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर)
यदि कंकड़ को \( 45^\circ \) कोण पर फेंका जाए, तब भी गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण और दिशा अपरिवर्तित (0.5 N, नीचे की ओर) रहेगी, क्योंकि वायु-प्रतिरोध को उपेक्षणीय माना गया है।
मुख्य बिंदु:
• हवा में फेंके गए पिंड पर गति की दिशा से स्वतंत्र केवल गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करता है।
• उच्चतम बिंदु पर वेग शून्य होने पर भी त्वरण (g) शून्य नहीं होता।
• प्रक्षेप्य गति में भी ऊर्ध्वाधर बल समान रहता है।
आम गलतियाँ:
• ऊपर जाते समय बल को ऊपर की ओर मान लेना।
• उच्चतम बिंदु पर वेग शून्य होने के कारण बल को भी शून्य मान लेना।
• कोण पर फेंकने से गुरुत्वाकर्षण बल बदल जाना समझ लेना।
Exam Tips:
a) याद रखें कि गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा नीचे की ओर कार्य करता है।
b) गणना करते समय \( g = 10 \text{ m/s}^2 \) का प्रयोग करें जब तक अन्यथा न कहा जाए।
c) दिशा स्पष्ट रूप से 'ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर' लिखें।
Question 4.3: 0.1 kg संहति के पत्थर पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा निम्नलिखित परिस्थितियों में ज्ञात कीजिए:
(a) पत्थर को स्थिर रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरंत पश्चात्,
(b) पत्थर को \( 36 \text{ km/h} \) के एकसमान वेग से गतिशील किसी रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरंत पश्चात्,
(c) पत्थर को \( 1 \text{ m/s}^2 \) के त्वरण से गतिशील किसी रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरंत पश्चात्,
(d) पत्थर \( 1 \text{ m/s}^2 \) के त्वरण से गतिशील किसी रेलगाड़ी के फर्श पर पड़ा है तथा वह रेलगाड़ी के सापेक्ष विराम में है। उपर्युक्त सभी स्थितियों में वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए।
Answer:
(a) पत्थर का द्रव्यमान \( m = 0.1 \text{ kg} \), त्वरण \( a = g = 10 \text{ m/s}^2 \)
\( F = m \times g = 0.1 \times 10 = 1 \text{ N} \) (ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर)
(b) रेलगाड़ी से गिराने के बाद पत्थर पर क्षैतिज दिशा में कोई बल कार्य नहीं करता। केवल गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करता है:
\( F = 1 \text{ N} \) (ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर)
(c) रेलगाड़ी के त्वरण का पत्थर पर कोई प्रभाव नहीं रहता जब वह हवा में गिर रहा हो। अतः बल:
\( F = m \times g = 1 \text{ N} \) (ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर)
(d) फर्श पर रखे होने के कारण पत्थर रेलगाड़ी के त्वरण से त्वरित होता है:
\( F = m \times a = 0.1 \times 1 = 0.1 \text{ N} \) (रेलगाड़ी की गति की दिशा में)
मुख्य बिंदु:
• हवा में स्वतंत्र रूप से गिरते हुए पिंड पर केवल गुरुत्वाकर्षण बल लगता है।
• संपर्क में होने पर ही पिंड रेलगाड़ी के त्वरण का अनुभव करता है।
• वायु प्रतिरोध न होने पर क्षैतिज गति का बल पर प्रभाव नहीं पड़ता।
आम गलतियाँ:
• रेलगाड़ी की चाल या त्वरण को हवा में गिरते पत्थर के बल में जोड़ देना।
• स्थिति (d) में भी बल को केवल गुरुत्वाकर्षण मान लेना।
• units (मात्रक) लिखना भूल जाना।
Exam Tips:
a) ध्यान दें कि कौन सा पिंड हवा में है और कौन सा संपर्क में।
b) हवा में मौजूद पिंड पर हमेशा \( mg \) बल ही नेट बल होता है।
c) दिशा का उल्लेख हर स्थिति में अनिवार्य रूप से करें।
Question 4.4: l लंबाई की एक डोरी का एक सिरा m संहति के किसी कण से तथा दूसरा सिरा चिकनी क्षैतिज मेज पर लगी खूँटी से बँधा है। यदि कण v चाल से वृत्त में गति करता है तो कण पर (केंद्र की ओर निर्देशित) नेट बल है:
(i) \( T \)
(ii) \( T - \frac{mv^2}{l} \)
(iii) \( T + \frac{mv^2}{l} \)
(iv) 0
[सही विकल्प चुनिए]
Answer:
सही विकल्प: (i) \( T \)
विवरण:
जब कण एक वृत्त में गति करता है, तो उसे आवश्यक अभिकेंद्र बल डोरी के तनाव \( T \) द्वारा प्राप्त होता है। इसलिए कण पर केंद्र की ओर कार्य करने वाला कुल नेट बल तनाव \( T \) के बराबर होता है।
मुख्य बिंदु:
• वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल किसी वास्तविक बल द्वारा प्रदान किया जाता है।
• यहाँ तनाव \( T \) ही एकमात्र बल है जो केंद्र की ओर कार्य करता है।
• नेट बल वही होता है जो केंद्र की ओर परिणामी बल बनाए।
आम गलतियाँ:
• अभिकेंद्र बल को एक अलग बल मानकर तनाव में जोड़ देना।
• विकल्पों में भ्रमित होकर गलत सूत्र चुनना।
Exam Tips:
a) वृत्तीय गति के प्रश्नों में अभिकेंद्र बल की पहचान करें।
b) यहाँ डोरी का तनाव ही अभिकेंद्र बल है, अतः नेट बल \( T \) होगा।
c) सही विकल्प (i) है।
Question 4.5: 15 m/s की आरंभिक चाल से गतिशील 20 kg संहति के किसी पिण्ड पर 50 N का स्थायी मंदन बल आरोपित किया गया है। पिण्ड को रोकने में कितना समय लगेगा?
Answer:
मंदन बल, \( F = -50 \text{ N} \)
पिंड का द्रव्यमान, \( m = 20 \text{ kg} \)
आरंभिक वेग, \( u = 15 \text{ m/s} \)
अंतिम वेग, \( v = 0 \)
त्वरण \( a \) की गणना:
\( F = ma \)
\( -50 = 20 \times a \)
\( a = \frac{-50}{20} = -2.5 \text{ m/s}^2 \)
गति के पहले समीकरण से समय (\( t \)) की गणना:
\( v = u + at \)
\( 0 = 15 + (-2.5)t \)
\( 2.5t = 15 \)
\( t = \frac{15}{2.5} = 6 \text{ s} \)
मुख्य बिंदु:
• मंदन बल होने के कारण त्वरण ऋणात्मक होता है।
• रुकने पर अंतिम वेग शून्य हो जाता है।
• न्यूटन के द्वितीय नियम से त्वरण ज्ञात करके गति के समीकरण का प्रयोग करते हैं।
आम गलतियाँ:
• बल या त्वरण का ऋण चिन्ह भूल जाना।
• गलत समीकरण का चयन करना।
Exam Tips:
a) दिए गए मानो को सूचीबद्ध करें।
b) मंदन के लिए बल और त्वरण को ऋणात्मक लें।
c) गणना की शुद्धता की जाँच अंत में अवश्य करें।
Question 4.6: 3.0 kg संहति के किसी पिण्ड पर आरोपित कोई बल 25 s में उसकी चाल को \( 2.0 \text{ m s}^{-1} \) से \( 3.5 \text{ m s}^{-1} \) कर देता है। पिण्ड की गति की दिशा अपरिवर्तित रहती है। बल का परिमाण व दिशा क्या हैं?
Answer:
पिंड का द्रव्यमान, \( m = 3 \text{ kg} \)
आरंभिक वेग, \( u = 2 \text{ m/s} \)
अंतिम वेग, \( v = 3.5 \text{ m/s} \)
समय, \( t = 25 \text{ s} \)
त्वरण \( a \) की गणना:
\( a = \frac{v - u}{t} \)
\( a = \frac{3.5 - 2}{25} = \frac{1.5}{25} = 0.06 \text{ m/s}^2 \)
बल \( F \) की गणना:
\( F = ma \)
\( F = 3 \times 0.06 = 0.18 \text{ N} \)
चूँकि बल लगाने से पिंड की गति की दिशा नहीं बदलती, अतः बल की दिशा वही है जो पिंड की गति की दिशा है।
मुख्य बिंदु:
• त्वरण वेग परिवर्तन की दर से निकाला जाता है।
• बल की दिशा गति की दिशा में होती है यदि चाल बढ़ती है।
• \( F = ma \) का सीधा अनुप्रयोग।
आम गलतियाँ:
• समय से भाग देना भूल जाना।
• दशमलव की गणना में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) इकाईयों को ध्यान से देखें (सभी SI मात्रک में होने चाहिए)।
b) बल की दिशा के बारे में थ्योरी में एक लाइन जरूर लिखें।
c) उत्तर को उचित मात्रक (N) के साथ लिखें।
Question 4.7: 5 kg संहति के किसी पिण्ड पर 8 N व 6 N के दो लंबवत बल आरोपित हैं। पिण्ड के त्वरण का परिमाण व दिशा ज्ञात कीजिए।
Answer:
पिंड का द्रव्यमान, \( m = 5 \text{ kg} \)
दो लंबवत बल हैं, अतः परिणामी बल \( R \):
\( R = \sqrt{8^2 + (-6)^2} = \sqrt{64 + 36} = \sqrt{100} = 10 \text{ N} \)
दिशा (\( \theta \)) की गणना:
\( \theta = \tan^{-1}\left(\frac{-6}{8}\right) = -36.87^\circ \)
त्वरण \( a \) की गणना:
\( F = ma \)
\( a = \frac{F}{m} = \frac{10}{5} = 2 \text{ m/s}^2 \)
मुख्य बिंदु:
• लंबवत बलों का परिणामी पाइथागोरस प्रमेय से निकाला जाता है।
• त्वरण निकालने के लिए कुल परिणामी बल का प्रयोग करते हैं।
• दिशा त्रिकोणमितीय अनुपात से निर्धारित होती है।
आम गलतियाँ:
• बलों को साधारण बीजगणित की तरह जोड़ देना।
• परिणामी बल के बजाय केवल एक बल से त्वरण निकाल लेना।
Exam Tips:
a) वेक्टर जोड़ के नियमों का पालन करें।
b) कोण निकालते समय इनवर्स ट्रिग्नोमेट्री का सही प्रयोग करें।
c) त्वरण के साथ उसकी दिशा का कोण भी दर्शाएं।
Question 4.8: \( 36 \text{ km/h} \) की चाल से गतिमान किसी आटो रिक्शा का चालक सड़क के बीच एक बच्चे को खड़ा देखकर अपने वाहन को ठीक 4.0 m में रोककर उस बच्चे को बचा लेता है। यदि आटो रिक्शा बच्चे के ठीक निकट रुकता है, तो वाहन पर लगा औसत मंदन बल क्या है? आटोरिक्शा तथा चालक की संहति क्रमशः 400 kg और 65 kg हैं।
Answer:
आरंभिक वेग, \( u = 36 \text{ km/h} = 36 \times \frac{5}{18} = 10 \text{ m/s} \)
अंतिम वेग, \( v = 0 \)
दूरी, \( s = 4 \text{ m} \)
निकाय का कुल द्रव्यमान, \( M = 400 + 65 = 465 \text{ kg} \)
गति के तीसरे समीकरण से त्वरण (\( a \)) की गणना:
\( v^2 = u^2 + 2as \)
\( 0 = 10^2 + 2 \times a \times 4 \)
\( 8a = -100 \)
\( a = -12.5 \text{ m/s}^2 \)
औसत मंदन बल \( F \) की गणना:
\( F = Ma = 465 \times (-12.5) = -5812.5 \text{ N} \)
मुख्य बिंदु:
• चाल को km/h से m/s में बदलना आवश्यक है।
• कुल द्रव्यमान निकालते समय वाहन और चालक दोनों को जोड़ना चाहिए।
• गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करके त्वरण ज्ञात किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• चालक के द्रव्यमान को छोड़ देना।
• मात्रक परिवर्तित किए बिना गणना करना।
Exam Tips:
a) सबसे पहले दी गई चाल को SI मात्रक में बदलें।
b) कुल द्रव्यमान स्पष्ट रूप से दिखाएं।
c) बल ऋणात्मक चिह्न के साथ मंदन को दर्शाता है।
Question 4.9: 20,000 kg उत्थापन संहति के किसी रॉकेट में \( 5.0 \text{ m s}^{-2} \) आरंभिक त्वरण के साथ ऊपर की ओर स्फोट किया जाता है। स्फोट का आरंभिक प्रणेोद (बल) परिकलित कीजिए।
Answer:
रॉकेट का द्रव्यमान, \( m = 20,000 \text{ kg} \)
आरंभिक त्वरण, \( a = 5 \text{ m/s}^2 \)
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण, \( g = 10 \text{ m/s}^2 \)
न्यूटन के द्वितीय नियम से कुल बल (\( F \)):
\( F - mg = ma \)
\( F = m(g + a) \)
\( F = 20,000 \times (10 + 5) \)
\( F = 20,000 \times 15 = 3 \times 10^5 \text{ N} \)
मुख्य बिंदु:
• रॉकेट पर नीचे की ओर गुरुत्वाकर्षण बल (\( mg \)) और ऊपर की ओर प्रणोद बल लगता है।
• प्रभावी समीकरण \( F - mg = ma \) होता है।
• प्रणोद बल भार और आवश्यक त्वरण दोनों को संतुलित करता है।
आम गलतियाँ:
• केवल \( ma \) लिखकर गुरुत्वाकर्षण बल को छोड़ देना।
• \( g \) का मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) रॉकेट प्रणोद के प्रश्नों में हमेशा मुक्त पिंड आरेख (FBD) का ध्यान रखें।
b) प्रणोद बल हमेशा भार से अधिक होता है जब रॉकेट ऊपरत्वरित होता है।
c) वैज्ञानिक संकेतन (Scientific notation) में उत्तर देना बेहतर होता है।
Question 4.10: उत्तर की ओर \( 10 \text{ m s}^{-1} \) की एकसमान आरंभिक चाल से गतिमान \( 0.40 \text{ kg} \) संहति के किसी पिण्ड पर दक्षिण दिशा के अनुदिश \( 8.0 \text{ N} \) का स्थायी बल 30 s के लिए आरोपित किया गया है। जिस क्षण बल आरोपित किया गया उसे \( t = 0 \), तथा उस समय पिण्ड की स्थिति \( x = 0 \), लीजिए। t = -5 s, 25 s, 100 s पर इस कण की स्थिति क्या होगी?
Answer:
पिंड का द्रव्यमान, \( m = 0.40 \text{ kg} \)
आरंभिक वेग, \( u = 10 \text{ m/s} \) (उत्तर की ओर)
बल, \( F = -8.0 \text{ N} \) (दक्षिण की ओर, अतः ऋणात्मक)
त्वरण \( a \):
\( a = \frac{F}{m} = \frac{-8.0}{0.40} = -20 \text{ m/s}^2 \)
(i) \( t = -5 \text{ s} \) पर:
इस समय बल आरोपित नहीं हुआ था, अतः वेग एकसमान था:
\( x = u \times t = 10 \times (-5) = -50 \text{ m} \)
(ii) \( t = 25 \text{ s} \) पर:
\( t = 0 \) से \( 30 \text{ s} \) तक बल कार्यरत है।
\( x = ut + \frac{1}{2}at^2 = 10 \times 25 + \frac{1}{2} \times (-20) \times (25)^2 = 250 - 6250 = -6000 \text{ m} \)
(iii) \( t = 100 \text{ s} \) पर:
\( 30 \text{ s} \) के बाद बल हटा लिया जाता है, अतः पिंड एकसमान वेग से चलता है।
\( 30 \text{ s} \) पर वेग: \( v = u + at = 10 + (-20) \times 30 = -590 \text{ m/s} \)
कुल दूरी गणना के पश्चात कुल स्थिति \( -50000 \text{ m} \) प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• समय अंतरालों को अलग-अलग विभाजित करके हल करना चाहिए।
• बल हटने के बाद वेग नियत रहता है।
• दिशा परिवर्तन के कारण चिह्न का विशेष ध्यान रखें।
आम गलतियाँ:
• पूरे समय के लिए एक ही समीकरण लगा देना जबकि बल केवल 30 सेकंड के लिए था।
• ऋणात्मक और धनात्मक दिशा में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) समय अंतराल (\( t \le 30 \text{ s} \) और \( t > 30 \text{ s} \)) को स्पष्ट रूप से अलग करें।
b) गति के समीकरणों का सावधानी से प्रयोग करें।
c) प्रत्येक भाग के लिए प्रारंभिक स्थितियाँ पुनः निकालें।
Question 4.11: कोई ट्रक विरामवस्था से गति आरंभ करके \( 2.0 \text{ m s}^{-2} \) के समान त्वरण से गतिशील रहता है। \( t = 10 \text{ s} \) पर, ट्रक के ऊपर खड़ा एक व्यक्ति धरती से 6 m की ऊँचाई से कोई पत्थर बाहर गिराता है। \( t = 11 \text{ s} \) पर, पत्थर का (a) वेग, तथा (b) त्वरण क्या है? (वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए)।
Answer:
(a) ट्रक का त्वरण \( a = 2 \text{ m/s}^2 \), समय \( t = 10 \text{ s} \)
ट्रक का वेग at \( t = 10 \text{ s} \):
\( v_x = u + at = 0 + 2 \times 10 = 20 \text{ m/s} \)
\( t = 11 \text{ s} \) पर, पत्थर को गिराए 1 सेकंड हो चुका है (\( \Delta t = 1 \text{ s} \))।
ऊर्ध्वाधर वेग: \( v_y = u_y + g\Delta t = 0 + 10 \times 1 = 10 \text{ m/s} \)
परिणामी वेग \( V \):
\( V = \sqrt{v_x^2 + v_y^2} = \sqrt{20^2 + 10^2} = \sqrt{400 + 100} = \sqrt{500} = 22.36 \text{ m/s} \)
क्षितिज के साथ कोण: \( \theta = \tan^{-1}\left(\frac{10}{20}\right) = 26.57^\circ \)
(b) त्वरण:
हाथ से छूटने के बाद पत्थर पर केवल गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करता है, अतः त्वरण \( a = 9.8 \text{ m/s}^2 \) (या लगभग \( 10 \text{ m/s}^2 \)) ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर होगा।
मुख्य बिंदु:
• वाहन से गिरने के बाद वस्तु के पास वाहन का क्षैतिज वेग बना रहता है।
• गुरुत्व के प्रभाव में ऊर्ध्वाधर वेग बढ़ता है।
• स्वतंत्र रूप से गिरते पिंड का त्वरण हमेशा 'g' होता है।
आम गलतियाँ:
• ट्रक के वेग को पत्थर का एकमात्र वेग मान लेना।
• हवा में त्वरण को शून्य मान लेना।
Exam Tips:
a) वेग के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटकों को अलग-अलग निकालें।
b) परिणामी वेग के लिए सदिश योग का प्रयोग करें।
c) त्वरण में केवल गुरुत्वीय त्वरण ही प्रभावी होता है।
Question 4.12: किसी कमरे की छत से 2m लंबी डोरी द्वारा 0.1 kg संहति के गोलक को लटकाकर दोलन आरंभ किए गए। अपनी माध्य स्थिति पर गोलक की चाल \( 1 \text{ m s}^{-1} \) है। गोलक का प्रक्षेप-पथ क्या होगा यदि डोरी को उस समय काट दिया जाता है जब गोलक अपनी (a) चरम स्थितियों में से किसी एक पर है, तथा (b) माध्य स्थिति पर है?
Answer:
(a) चरम स्थिति पर गोलक का वेग शून्य हो जाता है। यदि इस समय डोरी काट दी जाती है, तो गोलक गुरुत्वाकर्षण के कारण सीधे नीचे की ओर गिरेगा (सरल रेखा में)।
(b) माध्य स्थिति पर गोलक के पास अधिकतम चाल (\( 1 \text{ m/s} \)) होती है और वेग की दिशा स्पर्शरेखा के अनुदिश होती है। यदि डोरी इस समय काटी जाती है, तो गोलक क्षैतिज वेग के साथ प्रक्षेप्य गति (Parabolic path) करते हुए नीचे गिरेगा।
मुख्य बिंदु:
• चरम स्थिति पर वेग शून्य होता है, अतः पिंड स्वतंत्रतापूर्वक नीचे गिरता है।
• माध्य स्थिति पर वेग क्षैतिज दिशा में होता है, जिससे प्रक्षेप्य गति बनती है।
• डोरी कटने के बाद तनाव बल समाप्त हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• दोनों ही स्थितियों में पथ को एक जैसा मान लेना।
• माध्य स्थिति पर वेग की दिशा को अनदेखा करना।
Exam Tips:
a) स्थिति के अनुसार वेग की दिशा और मान स्पष्ट करें।
b) प्रक्षेप्य गति और सीधी गति के अंतर को समझें।
c) संक्षेप में सटीक उत्तर लिखें।
Question 4.13: किसी व्यक्ति की संहति 70 kg है। वह एक गतिमान लिफ्ट में तुला पर खड़ा है जो
(a) \( 10 \text{ m s}^{-1} \) की एकसमान चाल से ऊपर जा रही है,
(b) \( 5 \text{ m s}^{-2} \) के एकसमान त्वरण से नीचे जा रही है,
(c) \( 5 \text{ m s}^{-2} \) के एकसमान त्वरण से ऊपर जा रही है,
तो प्रत्येक प्रकरण में तुला के पैमाने का पाठ्यांक क्या होगा?
(d) यदि लिफ्ट की मशीन में खराबी आ जाए और वह गुरुत्वीय प्रभाव में मुक्त रूप से नीचे गिरे तो पाठ्यांक क्या होगा?
Answer:
व्यक्ति का द्रव्यमान \( m = 70 \text{ kg} \)
(a) एकसमान चाल से ऊपर जाने पर त्वरण \( a = 0 \):
पाठ्यांक = \( m = 70 \text{ kg} \)
(b) \( 5 \text{ m/s}^2 \) से नीचे जाने पर:
\( R = m(g - a) = 70(10 - 5) = 350 \text{ N} \)
पाठ्यांक = \( \frac{350}{10} = 35 \text{ kg} \)
(c) \( 5 \text{ m/s}^2 \) से ऊपर जाने पर:
\( R = m(g + a) = 70(10 + 5) = 1050 \text{ N} \)
पाठ्यांक = \( \frac{1050}{10} = 105 \text{ kg} \)
(d) मुक्त रूप से गिरने पर (\( a = g \)):
\( R = m(g - g) = 0 \)
पाठ्यांक = 0 (व्यक्ति भारहीनता की स्थिति में होगा)।
मुख्य बिंदु:
• एकसमान गति में आभासी भार वास्तविक भार के बराबर होता है।
• त्वरण ऊपर होने पर भार बढ़ता है, नीचे होने पर घटता है।
• मुक्त पतन में आभासी भार शून्य हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• चाल और त्वरण को एक ही समझ लेना।
• बल को किलोग्राम में बदलते समय 'g' से भाग देना भूल जाना।
Exam Tips:
a) सूत्र \( R = m(g \pm a) \) का सही प्रयोग करें।
b) उत्तर न्यूटन के साथ-साथ किलोग्राम (पाठ्यांक) में भी दें।
c) मुक्त पतन की स्थिति को भारहीनता कहें।
Question 4.14: चित्र 4.16 में 4 kg संहति के किसी पिण्ड का स्थिति-समय ग्राफ दर्शाया गया है।
(a) t < 0 के लिए, t > 4 s, 0 < t < 4 s के लिए पिण्ड पर आरोपित बल क्या है?
(b) t = 0 तथा t = 4s पर आवेग क्या है?
(केवल एकविमयी गति पर विचार कीजिए)
Answer:
(a) • \( t < 0 \) के लिए: ग्राफ समय अक्ष के संपाती है (\( x = 0 \)), अतः पिण्ड विराम में है और बल शून्य है।
• \( t > 4 \text{ s} \) के लिए: स्थिति नियत है (\( x = 3 \text{ m} \)), पिण्ड विराम में है, अतः बल शून्य है।
• \( 0 < t < 4 \text{ s} \) के लिए: ग्राफ की ढलान नियत है, अतः वेग नियत है और त्वरण शून्य है, इसलिए बल शून्य है।
(b) • \( t = 0 \) पर आवेग = संवेग में परिवर्तन = \( mv - mu \)
\( = 4 \times \left(\frac{3}{4}\right) - 4 \times 0 = 3 \text{ kg m/s} \)
• \( t = 4 \text{ s} \) पर आवेग = \( 4 \times 0 - 4 \times \left(\frac{3}{4}\right) = -3 \text{ kg m/s} \)
मुख्य बिंदु:
• स्थिति-समय ग्राफ की ढलान वेग देती है।
• वेग में परिवर्तन ही आवेग उत्पन्न करता है।
• नियत स्थिति या एकसमान वेग पर बल शून्य होता है।
आम गलतियाँ:
• ग्राफ के ढलान और सीधे विस्थापन में भ्रमित होना।
• आवेग की गणना में द्रव्यमान से गुणा करना भूल जाना।
Exam Tips:
a) ग्राफ के प्रत्येक खंड का विश्लेषण ध्यानपूर्वक करें।
b) संवेग परिवर्तन (\( \Delta p = m\Delta v \)) का उपयोग आवेग के लिए करें।
c) दिशा को दर्शाने के लिए ऋण चिह्न का सही प्रयोग करें।
Question 4.15: किसी घर्षणरहित मेज पर रखे 10 kg तथा 20 kg के दो पिण्ड किसी पतली डोरी द्वारा आपस में जुड़े हैं। 600 N का कोई क्षैतिज बल (i) A पर, (ii) डोरी के अनुदिश लगाया जाता है। प्रत्येक स्थिति में डोरी में तनाव क्या है?
Answer:
निकाय का कुल द्रव्यमान, \( m_1 + m_2 = 10 + 20 = 30 \text{ kg} \)
त्वरण \( a = \frac{F}{m_1 + m_2} = \frac{600}{30} = 20 \text{ m/s}^2 \)
(i) जब बल A पर लगाया जाता है:
डोरी में तनाव \( T = m_1 \times a = 10 \times 20 = 200 \text{ N} \)
(ii) जब बल B पर लगाया जाता है:
डोरी में तनाव \( T = m_2 \times a = 20 \times 20 = 400 \text{ N} \)
मुख्य बिंदु:
• निकाय का त्वरण दोनों द्रव्यमानों के योग पर निर्भर करता है।
• तनाव बल उस द्रव्यमान पर निर्भर करता है जिसे डोरी खींच रही है।
• घर्षणरहित सतह पर कुल बल सीधे गति उत्पन्न करता है।
आम गलतियाँ:
• दोनों स्थितियों में तनाव का मान समान समझ लेना।
• गलत द्रव्यमान को तनाव के सूत्र में रख देना।
Exam Tips:
a) पहले पूरे निकाय का त्वरण निकालें।
b) फ्री बॉडी डायग्राम (FBD) बनाकर तनाव समीकरण लिखें।
c) स्थिति (i) और (ii) के अंतर को स्पष्ट रखें।
Question 4.16: 8 kg तथा 12 kg के दो पिंडों को किसी हल्की अवितनय डोरी, जो घर्षणरहित घिरनी पर चढ़ी है, के दो सिरों से बँधा गया है। पिंडों को मुक्त छोड़ने पर उनके त्वरण तथा डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
Answer:
छोटा द्रव्यमान, \( m_1 = 8 \text{ kg} \)
बड़ा द्रव्यमान, \( m_2 = 12 \text{ kg} \)
त्वरण \( a \) का सूत्र:
\( a = \left(\frac{m_2 - m_1}{m_1 + m_2}\right)g \)
\( a = \left(\frac{12 - 8}{12 + 8}\right) \times 10 = \frac{4}{20} \times 10 = 2 \text{ m/s}^2 \)
तनाव \( T \) का सूत्र:
\( T = \frac{2m_1 m_2}{m_1 + m_2}g \)
\( T = \frac{2 \times 8 \times 12}{8 + 12} \times 10 = \frac{192}{20} \times 10 = 96 \text{ N} \)
मुख्य बिंदु:
• यह Atwood machine का मानक प्रश्न है।
• भारी द्रव्यमान नीचे की ओर और हल्का द्रव्यमान ऊपर की ओर त्वरित होता है।
• डोरी में तनाव दोनों सिरों पर समान होता है।
आम गलतियाँ:
• सूत्र में द्रव्यमानों के योग और अंतर को आपस में बदल देना।
• g का मान न रखना या गलत रखना।
Exam Tips:
a) सीधे मानक सूत्रों का उपयोग कर सकते हैं या गति समीकरण बना सकते हैं।
b) मात्रक लिखना न भूलें (\( \text{m/s}^2 \) और N)।
c) गणना की जाँच दो बार करें।
Question 4.17: प्रयोगशाला के निर्देश फ्रेम में कोई नाभिक विराम में है। यदि यह नाभिक दो छोटे नाभिकों में विघटित हो जाता है, तो यह दर्शाइए कि उत्पाद विपरीत दिशाओं में गति करने चाहिए।
Answer:
माना जनक नाभिक का द्रव्यमान विराम में है, अतः इसका प्रारंभिक संवेग शून्य है।
विघटन के बाद माना दो छोटे नाभिकों के द्रव्यमान \( m_1 \) व \( m_2 \) तथा वेग \( v_1 \) व \( v_2 \) हैं।
संवेग संरक्षण के नियम से:
कुल प्रारंभिक संवेग = कुल अंतिम संवेग
\( 0 = m_1 v_1 + m_2 v_2 \)
\( v_1 = -\frac{m_2}{m_2} v_2 \)
यहाँ ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि दोनों नए नाभिक एक-दूसरे के विपरीत दिशाओं में गति करेंगे।
मुख्य बिंदु:
• बाह्य बल की अनुपस्थिति में कुल संवेग संरक्षित रहता है।
• प्रारंभिक संवेग शून्य होने के कारण अंतिम संवेगों का योग भी शून्य होना चाहिए।
• विपरीत दिशा का संकेत ऋणात्मक चिह्न से मिलता है।
आम गलतियाँ:
• संवेग संरक्षण नियम का उल्लेख न करना।
• ऋणात्मक चिह्न के भौतिक महत्व को न समझाना।
Exam Tips:
a) सिद्धांत के रूप में 'संवेग संरक्षण का नियम' लिखें।
b) गणितीय पद स्पष्ट रूप سے दिखाएं।
c) निष्कर्ष को शब्दों में भी व्यक्त करें।
Question 4.18: दो बिलियर्ड गेंदें जिनमें प्रत्येक की संहति 0.05 kg है, \( 6 \text{ m s}^{-1} \) की चाल से विपरीत दिशाओं में गति करती हुई संघट्ट करती हैं और संघट्ट के पश्चात् उसी चाल से वापस लौटती हैं। प्रत्येक गेंद पर दूसरी गेंद कितना आवेग लगाती है?
Answer:
प्रत्येक गेंद का द्रव्यमान, \( m = 0.05 \text{ kg} \)
प्रारंभिक वेग, \( u = 6 \text{ m/s} \)
अंतिम वेग, \( v = -6 \text{ m/s} \) (वापس लौटने के कारण)
आवेग = संवेग में परिवर्तन (\( \Delta p \))
\( \Delta p = mv - mu = m(v - u) \)
\( = 0.05 \times (-6 - 6) = 0.05 \times (-12) = -0.6 \text{ kg m/s} \)
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि आवेग विपरीत दिशा में है।
मुख्य बिंदु:
• आवेग संवेग परिवर्तन के बराबर होता है।
• दिशा बदलने पर वेग का चिह्न बदल जाता है।
• टक्कर अल्प समय के लिए होती है।
आम गलतियाँ:
• अंतिम और प्रारंभिक वेग के बीच ऋण चिह्न न लगाना।
• आवेग का मात्रक गलत लिखना।
Exam Tips:
a) वेगों के सदिश स्वभाव (चिह्नों) का ध्यान रखें।
b) सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें।
c) अंतिम उत्तर के साथ मात्रक अवश्य लिखें।
Question 4.19: 100 kg संहति की किसी तोप द्वारा 0.020 kg का गोला दागा जाता है। यदि गोले की निकासमुखी चाल \( 80 \text{ m s}^{-1} \) है, तो तोप की प्रतिक्षेप चाल क्या है?
Answer:
तोप का द्रव्यमान, \( M = 100 \text{ kg} \)
गोले का द्रव्यमान, \( m = 0.020 \text{ kg} \)
गोले की चाल, \( v = 80 \text{ m/s} \)
तोप की प्रतिक्षेप चाल = \( V \)
संवेग संरक्षण के नियम से:
कुल प्रारंभिक संवेग = 0
कुल अंतिम संवेग = \( MV + mv = 0 \)
\( V = -\frac{mv}{M} \)
\( V = -\frac{0.020 \times 80}{100} = -\frac{1.6}{100} = -0.016 \text{ m/s} \)
मुख्य बिंदु:
• संवेग संरक्षण नियम का यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
• तोप और गोले का कुल प्रारंभिक संवेग शून्य होता है।
• प्रतिक्षेप चाल तोप को पीछे की ओर धकेलती है।
आम गलतियाँ:
• तोप और गोले के द्रव्यमान को आपस में मिला देना।
• प्रतिक्षेप चाल में ऋण चिह्न की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) संवेग संरक्षण का समीकरण सबसे पहले लिखें।
b) मान रखते समय मात्रकों की एकरूपता जाँचें।
c) प्रतिक्षेप वेग की दिशा को स्पष्ट करें।
Question 4.20: कोई बल्लेबाज किसी गेंद को \( 45^\circ \) के कोण पर विक्षेपित कर देता है। ऐसा करने में वह गेंद की आरंभिक चाल, जो \( 54 \text{ km/h} \) है, में कोई परिवर्तन नहीं करता। गेंद को कितना आवेग दिया जाता है? (गेंद की संहति 0.15 kg है)
Answer:
गेंद का द्रव्यमान, \( m = 0.15 \text{ kg} \)
चाल, \( v = 54 \text{ km/h} = 54 \times \frac{5}{18} = 15 \text{ m/s} \)
कोण, \( \theta = 45^\circ \) (प्रत्येक दिशा से \( 22.5^\circ \))
संवेग में परिवर्तन (आवेग) केवल ऊर्ध्वाधर घटक में होता है:
\( \text{आवेग} = 2mv \cos(\theta / 2) \)
\( = 2 \times 0.15 \times 15 \times \cos(22.5^\circ) \)
\( = 4.5 \times 0.9238 \approx 4.16 \text{ kg m/s} \)
मुख्य बिंदु:
• वेग का क्षैतिज घटक अपरिवर्तित रहता है।
• आवेग केवल लंबवत (ऊर्ध्वाधर) दिशा के संवेग परिवर्तन के कारण होता है।
• त्रिकोणमितीय मानों का सही उपयोग आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• कुल वेग में परिवर्तन को शून्य मान लेना।
• कोण का आधा किए बिना गणना करना।
Exam Tips:
a) घटकों (Components) में तोड़कर प्रश्न हल करना आसान होता है।
b) चाल को m/s में बदलना न भूलें।
c) गणना के चरणों को साफ-सुथरा लिखें।
Question 4.21: किसी डोरी के एक सिरे से बँधा 0.25 kg संहति का कोई पत्थर क्षैतिज तल में 1.5 m त्रिज्या के वृत्त पर 40 rev/min की चाल से चक्कर लगाता है? डोरी में तनाव कितना है? यदि डोरी 200 N के अधिकतम तनाव को सहन कर सकती है, तो वह अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए जिससे पत्थर को घुमाया जा सकता है।
Answer:
पत्थर का द्रव्यमान, \( m = 0.25 \text{ kg} \)
त्रिज्या, \( r = 1.5 \text{ m} \)
आवृत्ति, \( n = \frac{40}{60} = \frac{2}{3} \text{ rps} \)
कोणीय वेग, \( \omega = 2\pi n = 2 \times \frac{22}{7} \times \frac{2}{3} = 4.19 \text{ rad/s} \)
तनाव \( T \):
\( T = m \omega^2 r = 0.25 \times (4.19)^2 \times 1.5 \approx 65 \text{ N} \)
अधिकतम चाल (\( V_{\max} \)) जब \( T_{\max} = 200 \text{ N} \):
\( T_{\max} = \frac{m V_{\max}^2}{r} \)
\( V_{\max} = \sqrt{\frac{T_{\max} \times r}{m}} = \sqrt{\frac{200 \times 1.5}{0.25}} = \sqrt{1200} = 34.64 \text{ m/s} \)
मुख्य बिंदु:
• अभिकेंद्र बल ही डोरी का तनाव प्रदान करता है।
• आवृत्ति को प्रति सेकंड चक्कर (rps) में बदलना आवश्यक है।
• अधिकतम तनाव से अधिकतम चाल निकाली जाती है।
आम गलतियाँ:
• r/min को सीधे r/s मान लेना (60 से भाग न देना)।
• सूत्र में त्रिज्या का वर्ग कर देना।
Exam Tips:
a) \( \omega = 2\pi n \) का सही उपयोग करें।
b) अधिकतम तनाव वाले सूत्र को व्युत्पन्न करके मान रखें।
c) मात्रक सही लिखें।
Question 4.22: यदि अभ्यास 4.21, में पत्थर की चाल को अधिकतम निर्धारित सीमा से भी अधिक कर दिया जाए, तथा डोरी यकायक टूट जाए, तो डोरी के टूटने के पश्चात् पत्थर के प्रक्षेप का सही वर्णन निम्नलिखित में से कौन करता है:
(a) वह पत्थर झटके के साथ त्रिज्यातः बाहर की ओर जाता है।
(b) डोरी टूटने के क्षण पत्थर स्पर्शरेखीय पथ पर उड़ जाता है।
(c) पत्थर स्पर्शरी से किसी कोण पर, जिसका परिमाण पत्थर की चाल पर निर्भर करता है, उड़ जाता है।
Answer:
सही विकल्प: (b) डोरी टूटने के क्षण पत्थर स्पर्शरेखीय पथ पर उड़ जाता है।
विवरण:
जड़त्व के नियम के अनुसार, जब डोरी टूट जाती है तो अभिकेंद्र बल समाप्त हो जाता है। उस क्षण वेग सदिश की जो दिशा होती है, पत्थर उसी स्पर्शरेखीय दिशा में गति करना जारी रखता है।
मुख्य बिंदु:
• वृत्तीय गति में प्रत्येक बिंदु पर वेग की दिशा स्पर्शरेखा के अनुदिश होती है।
• बल हटने पर वस्तु जड़त्व के कारण सीधी रेखा (स्पर्शरेखा) में जाती है।
• बाहर की ओर 'अपकेन्द्रीय बल' जैसा कुछ वास्तविक बल पिंड पर कार्य नहीं करता।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि पत्थर त्रिज्या की दिशा में बाहर की ओर गिरेगा।
• चाल पर निर्भर कोण मान लेना।
Exam Tips:
a) न्यूटन के प्रथम नियम और जड़त्व की अवधारणा को याद रखें।
b) हमेशा लिखें कि वेग की दिशा स्पर्शरेखीय होती है।
c) सही विकल्प (b) चुनें।
Question 4.23: स्पष्ट कीजिए कि क्यों:
(a) कोई घोड़ा रिक्त दिखस्थान में किसी गाड़ी को खींचते हुए दौड़ नहीं सकता।
(b) किसी तीव्र गति से चल रही बस के यकायक रुकने पर यात्री आगे की ओर गिरते हैं।
(c) लान mower को धकेलने की तुलना में खींचना आसान होता है।
(d) क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को लपकते समय अपने हाथ गेंद के साथ पीछे को खींचता है।
Answer:
(a) घोड़ा जमीन पर बल लगाता है और बदले में जमीन घोड़े को आगे बढ़ाती है। रिक्त स्थान में गाड़ी का प्रतिक्रिया बल नहीं मिलता जिससे वह आगे नहीं बढ़ सकता।
(b) गति के जड़त्व के कारण, बस रुकने पर भी यात्री का शरीर गति में रहना चाहता है, जिससे वह आगे गिरता है।
(c) खींचते समय बल का ऊर्ध्वाधर घटक भार को कम करता है, जबकि धकेलने पर यह भार को बढ़ाता है।
(d) हाथ पीछे खींचने से संघट्ट का समय बढ़ जाता है, जिससे आवेग बल (चोट) कम लगता है।
मुख्य बिंदु:
• यह प्रश्न जड़त्व, न्यूटन के तीसरे नियम और आवेग पर आधारित है।
• बल के घटक प्रभावी भार को प्रभावित करते हैं।
• समय बढ़ाने से बल का प्रभाव घटता है।
आम गलतियाँ:
• कारणों को वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट न करना।
• केवल सामान्य बातें लिखना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक भाग का उत्तर संक्षिप्त और वैज्ञानिक शब्दावली में दें।
b) न्यूटन के नियमों का संदर्भ दें।
c) सभी चारों भागों को अलग-अलग स्पष्ट करें।
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