NCERT Solutions Class 11 Geography Chapter 06 Landforms and their Evolution (भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास) in Hindi

NCERT Solutions for Class 11 Geography: Chapter 06 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास

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Practice Class 11 Geography Solutions: Chapter 06 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास

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Question 1:
(i) स्थलरूप विकास की किस अवस्था में अधोमुख कटाव प्रमुख होता है?
(क) तरुणिमावस्था
(ग) अंतिम प्रौढावस्था
(ख) प्रथम प्रौढावस्था
(घ) वृद्धावस्था

Answer:

इस बहुविकल्पीय प्रश्न का सही उत्तर (क) तरुणिमावस्था है। नदी विकास की प्रारंभिक अवस्था या तरुणिमावस्था में नदी का मुख्य कार्य तली को गहरा करना यानी अधोमुख कटाव (vertical downcutting) करना होता है, जिससे गहरी घाटियों का निर्माण होता है।

मुख्य बिंदु:

• तरुणिमावस्था में नदी की ऊर्जा का अधिकांश भाग तली के कटाव में खर्च होता है।
• इस अवस्था में वी-आकार की घाटियाँ (V-shaped valleys) और गॉर्ज बनते हैं।
• पार्श्व कटाव की तुलना में अधोमुख कटाव बहुत अधिक तीव्र होता है।

आम गलतियाँ:

• प्रथम प्रौढावस्था और तरुणिमावस्था की प्रक्रियाओं को आपस में मिला देना।
• अधोमुख और पार्श्व कटाव की अवस्थाओं में भ्रमित होना।
• बिना सोचे-समझे किसी भी विकल्प का चयन करना।

Exam Tips:

a) नदी की विभिन्न अवस्थाओं (तरुणिमा, प्रौढ़, वृद्ध) के प्रमुख लक्षणों को याद रखें।
b) तरुणिमावस्था = अधोमुख कटाव (तली गहरी होना) - यह संबंध हमेशा ध्यान रखें।
c) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को पढ़कर ही सही उत्तर चुनें।

 

Question 2:
(ii) एक गहरी घाटी जिसकी विशेषता सीढ़ीनुमा खड़े ढाल होते हैं, किस नाम से जानी जाती है?
(क) U आकार घाटी
(ग) गॉर्ज
(ख) अंधी घाटी
(घ) कैनियन

Answer:

इस बहुविकल्पीय प्रश्न का सही उत्तर (घ) कैनियन है। कैनियन एक गहरी और संकीर्ण घाटी होती है जिसके किनारे सीढ़ीनुमा (step-like) और बहुत खड़े ढाल वाले होते हैं, जो मुख्य रूप से शुष्क प्रदेशों में क्षैतिज चट्टानों पर अपरदन के कारण बनते हैं।

मुख्य बिंदु:

• कैनियन की दीवारें सीढ़ी के समान सीधी और खड़ी होती हैं।
• यह संरचना क्षैतिज संस्तरों वाली चट्टानों में अधिक पाई जाती है।
• यह गॉर्ज का ही एक विस्तृत रूप है, लेकिन इसके किनारे सीढ़ीनुमा होते हैं।

आम गलतियाँ:

• गॉर्ज और कैनियन को एक ही मान लेना।
• यू-आकार की घाटी को सीढ़ीनुमा समझ लेना।
• भौगोलिक शब्दों की परिभाषाओं को स्पष्ट रूप से न समझना।

Exam Tips:

a) गॉर्ज और कैनियन के बीच का मुख्य अंतर (कैनियन में सीढ़ीनुमा ढाल) याद रखें।
b) स्थलरूपों की विशेषताओं वाले प्रश्नों का उत्तर देते समय मुख्य शब्दों पर ध्यान दें।
c) चित्र आधारित या विशेषता आधारित प्रश्नों के लिए नोट्स तैयार करें।

 

Question 3:
(iii) निम्न में से किन प्रदेशों में रासायनिक अपक्षय प्रक्रिया यांत्रिक अपक्षय प्रक्रिया की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली होती है?
(क) आर्द्र प्रदेश
(ग) चूना-पत्थर प्रदेश
(ख) शुष्क प्रदेश
(घ) हिमनद प्रदेश

Answer:

इस बहुविकल्पीय प्रश्न का सही उत्तर (ग) चूना-पत्थर प्रदेश है। चूना-पत्थर प्रदेशों में जल के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया (घुलनशीलता) बहुत तेजी से होती है, जिसके कारण वहाँ यांत्रिक अपक्षय की तुलना में रासायनिक अपक्षय अधिक प्रभावी और शक्तिशाली होता है।

मुख्य बिंदु:

• चूना-पत्थर जल में आसानी से घुल जाता है, जो एक रासायनिक प्रक्रिया है।
• ऐसे क्षेत्रों में कार्स्ट स्थलरूपों (Karst landforms) का निर्माण होता है।
• रासायनिक अपक्षय के लिए नमी और घुलनशील चट्टानें आवश्यक होती हैं।

आम गलतियाँ:

• शुष्क प्रदेशों को रासायनिक अपक्षय से जोड़ देना।
• यांत्रिक और रासायनिक अपक्षय के कारणों में अंतर न समझ पाना।
• विकल्पों को बिना पढ़े केवल अंदाजा लगाना।

Exam Tips:

a) चूना-पत्थर प्रदेश हमेशा रासायनिक अपक्षय (घुलन) से जुड़े होते हैं - इसे याद रखें।
b) जलवायु और चट्टանի प्रकार का अपक्षय पर प्रभाव स्पष्ट रूप से समझें।
c) ऐसे वैचारिक प्रश्नों के लिए NCERT पाठ्यपुस्तक के मुख्य पैराग्राफ पढ़ें।

 

Question 4:
(iv) निम्न में से कौन सा वक्तव्य लेपीज शब्द को परिभाषित करता है?
(क) छोटे से मध्यम आकार के उथले गर्त
(ख) ऐसे स्थलरूप जिनके ऊपरी मुख वृत्ताकार व नीचे से कीप के आकार के होते हैं।
(ग) ऐसे स्थलरूप जो धरातल से जल से टपकने पर बनते हैं।
(घ) अनियमित धरातल जिनके तीखे कटक व खाँच हों।

Answer:

इस बहुविकल्पीय प्रश्न का सही उत्तर (घ) अनियमित धरातल जिनके तीखे कटक व खाँच हों है। चूना-पत्थर क्षेत्रों में घोलरंध्रों और अन्य सतहों के ऊपर जब पानी बहता है, तो घुलन क्रिया के कारण अनियमित धरातल बनता है जिसमें तीखे कटक (ridges) और खाँच (grooves) बन जाते हैं, जिन्हें लेपीज कहा जाता है।

मुख्य बिंदु:

• लेपीज चूना-पत्थर क्षेत्रों में मिलने वाले विशिष्ट अपरदनकारी स्थलरूप हैं।
• इनमें धरातल बहुत ऊबड़-खाबड़ और तीखे किनारों वाला हो जाता है।
• यह भूतल पर विभिन्न घुलन क्रियाओं का परिणाम है।

आम गलतियाँ:

• लेपीज और घोलरंध्र की परिभाषाओं को आपस में मिला देना।
• निक्षेपण स्थलरूपों को अपरदनकारी लेपीज समझ लेना।
• विकल्पों में दिए गए विवरणों को ध्यान से न पढ़ना।

Exam Tips:

a) कार्स्ट प्रदेशों के सभी स्थलरूपों (घولरंध्र, doline, लेपीज) की परिभाषाएँ याद रखें।
b) 'तीखे कटक व खाँच' शब्द दिखते ही लेपीज पर टिक करें।
c) भौगोलिक शब्दावली की एक छोटी सूची बनाकर अभ्यास करें।

 

Question 5:
(v) गहरे, लंबे व विस्तृत गर्त या बेसिन जिनके शीर्ष दीवार खड़े ढाल वाले व किनारे व अवतल होते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?
(क) सर्क
(ग) घाटी हिमनद
(ख) पार्श्विक हिमोढ़
(घ) एस्कर

Answer:

इस बहुविकल्पीय प्रश्न का सही उत्तर (क) सर्क है। सर्क पर्वतीय क्षेत्रों में हिमनदों द्वारा निर्मित वे गहरे, लंबे और कटोरेनुमा गर्त होते हैं जिनके पिछले भाग या शीर्ष दीवारें बहुत खड़ी होती हैं और किनारे अवतल होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• सर्क पर्वतीय हिमनदों के प्रमुख अपरदनकारी स्थलरूप हैं।
• इन्हें आर्मचेयर या कुर्सी जैसी आकृति का भी माना जाता है।
• हिमनदी घाटियों के उद्गम स्थल आमतौर पर सर्क ही होते हैं।

आम गलतियाँ:

• सर्क और हिमोढ़ (Moraine) के बीच अंतर न कर पाना।
• एस्कर को गर्त समझ लेना, जबकि एस्कर निक्षेपण स्थलरूप है।
• हिमनदीय स्थलरूपों के वर्गीकरण में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) सर्क की आकृति (कुर्सी जैसी या कटोरेनुमा) को चित्र के माध्यम से समझें।
b) हिमनद द्वारा बनने वाले अपरदन और निक्षेपण स्थलरूपों की सूची अलग बनाएँ।
c) परिभाषा आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का नियमित अभ्यास करें।

 

Question 6: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) चट्टानों में अंतःकथित विसर्प और मैदानी भागों में जलोढ़ के सामान्य विसर्प क्या बताते हैं?

Answer:

चट्टानों में मिलने वाले अंतःकथित विसर्प (incised meanders) गहरे और उथले क्षेत्रों में नदी के लंबे समय तक लगातार उत्थान और गहरी घाटी बनाने की प्रक्रिया को दर्शाते हैं, जबकि मैदानी भागों के सामान्य जलोढ़ विसर्प समतल भूमि पर नदी के मंद ढाल और पार्श्व कटाव के कारण उत्पन्न बहाव के लचीलेपन को बताते हैं। अंतःकथित विसर्प भू-गर्भिक उत्थान का प्रमाण हैं, जबकि सामान्य विसर्प नदी की परिपक्व अवस्था और जलोढ़ निक्षेपण के फैलाव को प्रदर्शित करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• अंतःकथित विसर्प ऊँचे पठारों या चट्टानी क्षेत्रों में उत्थान के कारण बनते हैं।
• सामान्य विसर्प मैदानी भागों में मंद ढाल के कारण सर्पीले मार्ग बनाते हैं।
• दोनों प्रकार के विसर्प नदी के इतिहास और भू-आकृतिक विकास की कहानी बताते हैं।

आम गलतियाँ:

• दोनों प्रकार के विसर्पों को एक ही प्रक्रिया का परिणाम मान लेना।
• उत्थान और निक्षेपण के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• उत्तर को आवश्यकता से अधिक लंबा या बहुत संक्षिप्त लिखना।

Exam Tips:

a) 'अंतःकथित' शब्द का संबंध चट्टानी उत्थान से है - इसे हमेशा याद रखें।
b) मैदानी विसर्प नदी की प्रौढ़ावस्था से जुड़े होते हैं।
c) उत्तर लिखते समय दोनों के अंतर को स्पष्ट बिंदुओं या स्पष्ट भाषा में लिखें।

 

Question 7:
(ii) घाटी रंध्र अथवा युवाला का विकास कैसे होता है?

Answer:

चूना-पत्थर प्रदेशों में जब कई छोटे घोलरंध्र (sinkholes) आपस में मिल जाते हैं या घुलन क्रिया तथा छत के ढहने से बड़े गर्त बनते हैं, तो उन्हें युवाला (Uvala) या घाटी रंध्र कहा जाता है। भूतल का जल रंध्रों और विलय रंध्रों से गुजरता हुआ भूमिगत नदी में मिल जाता है, और समय के साथ इन कंदराओं की छत गिरने से लंबी तथा विस्तृत खाइयाँ या घाटियाँ बन जाती हैं।

मुख्य बिंदु:

• युवाला कई घोलरंध्रों के मिलने से बनने वाला बड़ा गर्त है।
• यह कार्स्ट प्रदेशों में रासायनिक घुलन और छत के पतन से बनता है।
• इसके विकास से भूमिगत जलमार्गों और कंदराओं का विस्तार होता है।

आम गलतियाँ:

• घोलरंध्र और युवाला के आकार के अंतर को न समझाना।
• रासायनिक घुलन क्रिया की भूमिका का उल्लेख न करना।
• उत्तर में केवल सतही बातें लिखना, प्रक्रिया न बताना।

Exam Tips:

a) घोलरंध्र (छोटा) से युवाला (बड़ा) बनने की क्रमिक प्रक्रिया को समझें।
b) कार्स्ट स्थलरूपों के निर्माण में भूमिगत जल की भूमिका जरूर लिखें।
c) मुख्य शब्दावली जैसे 'घोलरंध्र', 'विलयन रंध्र' का सही प्रयोग करें।

 

Question 8:
(iii) चूनायुक्त चट्टानी प्रदेशों में धरातलीय जल प्रवाह की अपेक्षा भौम जल प्रवाह अधिक पाया जाता है, क्यों?

Answer:

चूना-पत्थर (limestone) या डोलोमाइट जैसी चट्टानों में कैल्शियम कार्बोनेट की प्रधानता होती है, जो जल में आसानी से घुल जाता है। इस अत्यधिक घुलनशीलता के कारण सतह पर पड़ने वाला वर्षा जल तुरंत चट्टानों के छिद्रों और संधियों से रिसकर भूमि के अंदर चला जाता है, जिससे धरातल पर बहने के बजाय भौम जल (groundwater) का प्रवाह अधिक होता है।

मुख्य बिंदु:

• चूना-पत्थर जल में आसानी से घुल जाने वाला मुलायम पदार्थ है।
• सतही जल तुरंत संधियों के माध्यम से नीचे समा जाता है।
• इससे धरातलीय नदियाँ विलुप्त हो जाती हैं और भूमिगत जलतंत्र विकसित होता है।

आम गलतियाँ:

• चट्टान के रासायनिक संगठन (कैल्शियम कार्बोनेट) का उल्लेख न करना।
• सतही जल और भौम जल के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• केवल यह कहना कि बारिश कम होती है (जो कि गलत कारण है)।

Exam Tips:

a) चूना-पत्थर की घुलनशीलता को मुख्य कारण के रूप में लिखें।
b) कार्स्ट प्रदेशों की यह सबसे बड़ी विशेषता है - इसे अच्छे से तैयार करें।
c) वैज्ञानिक कारणों वाले प्रश्नों में सटीक शब्दावली का प्रयोग करें।

 

Question 9:
(iv) हिमनद घाटियों में कई रैखिक निक्षेपण स्थलरूप मिलते हैं। इनकी अवस्थिति व नाम बताएँ।

Answer:

हिमनदों द्वारा लाए गए मलबे (हिमोढ़ मृत्तिका) के निक्षेपण से कई रैखिक स्थलरूप बनते हैं। इनमें मुख्य रूप से पार्श्विक हिमोढ़ (lateral moraines) जो हिमनद के दोनों किनारों पर होते हैं, मध्य हिमोढ़ (medial moraines) जो दो हिमनदों के मिलने पर बीच में बनते हैं, और एस्कर (eskers) जो हिमनद के नीचे बहने वाले जल द्वारा बने लंबे वक्रकार कटक होते हैं, शामिल हैं।

मुख्य बिंदु:

• हिमोढ़ हिमनदीय निक्षेपों के लंबे और कटकनुमा रूप हैं।
• पार्श्विक और मध्य हिमोढ़ हिमनद की स्थिति के अनुसार बनते हैं।
• एस्कर हिमनद के नीचे पिघले पानी द्वारा जमा किए गए रेतीले कटक होते हैं।

आम गलतियाँ:

• अपरदन और निक्षेपण के स्थलरूपों को आपस में मिला देना।
• एस्कर और हिमोढ़ की स्थिति में अंतर न स्पष्ट करना।
• केवल नाम लिखकर उनकी अवस्थिति न बताना।

Exam Tips:

a) हिमनदीय निक्षेपों के नाम और उनकी सटीक स्थिति (किनारे, मध्य, नीचे) याद रखें।
b) एस्कर और ड्रमलिन दोनों के अंतर को समझें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और बिंदुओं के रूप में लिखने का अभ्यास करें।

 

Question 10:
(v) मरुस्थली क्षेत्रों में पवन कैसे अपना कार्य करती है? क्या मरुस्थलों में यही एक कारक अपरदित स्थलरूपों का निर्माण करता है?

Answer:

मरुस्थलीय क्षेत्रों में पवन अपने साथ उड़कर बालू और धूल के कणों को ले जाती है, जो आसपास की चट्टानों से टकराकर उन्हें घिसते और काटते हैं (अपघर्षण)। पवन मुख्य रूप से महीन मलबे का अपवहन कर सकती है, लेकिन मरुस्थलों में केवल पवन ही एकमात्र कारक नहीं है; यहाँ कभी-कभी होने वाली मूसलाधार वर्षा और अचानक आने वाली बाढ़ (अल्पकालिक नदियाँ) भी अपरदन और स्थलरूप निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मुख्य बिंदु:

• पवन अपघर्षण और अपवहन द्वारा मरुस्थलीय चट्टानों को काटती है।
• मरुस्थलों में जल (अचानक बाढ़) भी अपरदन का एक शक्तिशाली कारक है।
• दैनिक तापांतर के कारण यांत्रिक अपक्षय भी इसमें सहयोग करता है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि मरुस्थल में केवल हवा ही अपरदन करती है।
• जल की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज करना।
• पवन अपरदन की प्रक्रियाओं (अपघर्षण, अपवहन) को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) यह भ्रम दूर रखें कि मरुस्थलों में पानी का कोई काम नहीं होता।
b) पवन और अल्पकालिक वर्षा दोनों के संयुक्त प्रभाव को समझाएं।
c) मरुस्थलीय भू-आकृतियों के निर्माण के सभी कारकों का उल्लेख करें।

 

Question 11: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(i) आर्द्र व शुष्क जलवायु प्रदेशों में प्रवाहित जल ही सबसे महत्वपूर्ण भू-आकृतिक कारक हैं। विस्तार से वर्णन करें।

Answer:

प्रवाहित जल (बहता हुआ पानी) पृथ्वी के धरातल पर होने वाले अधिकांश अपरदन और निक्षेपण कार्यों के लिए सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण कारक है, चाहे वह आर्द्र जलवायु हो या शुष्क जलवायु। आर्द्र प्रदेशों में अत्यधिक वर्षा के कारण धरातल पर लगातार सतही जल प्रवाह बना रहता है, जिससे नदियाँ लगातार तली और किनारों को काटकर वी-आकार की घाटियाँ, गॉर्ज, जलोढ़ पंख और डेल्टा जैसी आकृतियों का निर्माण करती हैं। इसके विपरीत, शुष्क प्रदेशों में भले ही सामान्य दिनों में वर्षा बहुत कम होती है, लेकिन जब कभी मूसलाधार वर्षा होती है, तो जल बिना वनस्पति वाले शुष्क धरातल पर बहुत तेजी से बहता है। इस अल्पकालिक जल प्रवाह में भारी मात्रा में मलबा ले जाने की क्षमता होती है, जिससे पेडीप्लान, वेंटिफेक्ट और प्लाया जैसे विशिष्ट स्थलरूप बनते हैं। इस प्रकार, जलवायु की मात्रा भले ही भिन्न हो, लेकिन दोनों ही स्थितियों में प्रवाहित जल भू-आकृतियों के निर्माण और परिवर्तन में सर्वोपरि भूमिका निभाता है।

मुख्य बिंदु:

• आर्द्र प्रदेशों में प्रवाहित जल निरंतर और दीर्घकालिक रूप से कार्य करता है।
• शुष्क प्रदेशों में जल अल्पकालिक लेकिन अत्यधिक आक्रामक और मूसलाधार रूप में बहता है।
• दोनों जलवायु क्षेत्रों में नदियाँ या बहता पानी ढाल के अनुसार विभिन्न स्थलरूप बनाता है।
• वनस्पतिहीन शुष्क क्षेत्रों में जल का अपरदन प्रभाव बहुत तीव्र होता है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि शुष्क क्षेत्रों में केवल हवा ही भू-आकृतियाँ बनाती है, जल का कोई महत्व नहीं है।
• आर्द्र और शुष्क क्षेत्रों में प्रवाहित जल के कार्य करने के तरीके में अंतर न समझाना।
• उत्तर को बहुत संक्षिप्त लिख देना जबकि प्रश्न 150 शब्दों में विस्तार माँगता है।

Exam Tips:

a) दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में परिचय, मुख्य भाग और निष्कर्ष के रूप में उत्तर लिखें।
b) आर्द्र जलवायु (निरंतर प्रवाह) और शुष्क जलवायु (अचानक बाढ़) की तुलना करें।
c) प्रवाहित जल के अपरदनात्मक और निक्षेपात्मक दोनों रूपों का संक्षेप में उल्लेख करें।

 

Question 12:
(ii) चूना चट्टानें आर्द्र व शुष्क जलवायु में भिन्न व्यवहार करती हैं, क्यों? चूना प्रदेशों में प्रमुख व मुख्य भू-आकृतिक प्रक्रिया कौन-सी है और इसके क्या परिणाम हैं?

Answer:

चूना-पत्थर एक अत्यधिक घुलनशील चट्टान है, लेकिन इसका व्यवहार आर्द्र और शुष्क जलवायु में भिन्न होता है। आर्द्र जलवायु में पर्याप्त नमी और जल की उपलब्धता के कारण रासायनिक घुलन क्रिया (solution) बहुत प्रभावी होती है, जिससे चूना-पत्थर तेजी से घुल जाता है और बड़े पैमाने पर कार्स्ट स्थलरूप बनते हैं। इसके विपरीत, शुष्क प्रदेशों में नमी की कमी के कारण रासायनिक अपक्षय धीमा होता है और चूना-पत्थर अन्य कठोर चट्टानों की तरह अधिक समय तक प्रतिरोधक बना रहता है। चूना प्रदेशों में सबसे प्रमुख और मुख्य भू-आकृतिक प्रक्रिया 'घुलन क्रिया' (Solution/Corrosion) है, जो जल और कार्बन डाइऑक्साइड की रासायनिक प्रतिक्रिया से होती है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप धरातल पर घोलरंध्र (sinkholes), विलय रंध्र, लेपीज, युवाला, और भूमिगत रूप में कंदराएँ (caves), स्टैलेक्टाइट (stalactites) तथा स्टैलेग्माइट (stalagmites) जैसे सुंदर अपरदनात्मक और निक्षेपात्मक स्थलरूपों का निर्माण होता है।

मुख्य बिंदु:

• चूना-पत्थर के लिए जल और रासायनिक प्रतिक्रिया ही मुख्य आधार हैं।
• आर्द्र जलवायु में घुलन क्रिया सबसे तीव्र गति से काम करती है।
• मुख्य भू-आकृतिक प्रक्रिया रासायनिक अपक्षय (घुलन) है।
• इसके परिणामस्वरूप कार्स्ट स्थलरूपों का अनोखा संसार बनता है।

आम गलतियाँ:

• शुष्क और आर्द्र जलवायु में चूना-पत्थर के अपक्षय के अंतर को स्पष्ट न करना।
• रासायनिक प्रक्रिया की जगह यांत्रिक प्रक्रिया को मुख्य बता देना।
• कंदराओं और घोलरंध्रों के निर्माण की प्रक्रिया को न समझाना।

Exam Tips:

a) चूना प्रदेशों के अध्ययन के लिए 'कार्स्ट टोपोग्राफी' शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
b) रासायनिक घुलन और कार्बोनेशन प्रक्रिया को परिभाषित करें।
c) स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट के अंतर को ध्यान में रखें।

 

Question 13:
(iii) हिमनद ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों को निम्न पहाड़ियों और मैदानों में कैसे परिवर्तित करते हैं या किस प्रक्रिया से यह कार्य संपन्न होता है, बताएँ?

Answer:

हिमनद (glaciers) ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में अत्यधिक शक्तिशाली अपरदनकर्ता के रूप में कार्य करते हैं। यद्यपि प्रवाहित जल की तुलना में हिमनद का प्रवाह बहुत धीमा (प्रतिदिन कुछ सेंटीमीटर) होता है, लेकिन इसका द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण बल बहुत अधिक होता है। हिमनद जब पर्वतीय ढालों से नीचे सरकते हैं, तो उनके साथ जुड़े हुए बड़े-बड़े चट्टानी टुकड़े और मलबा नीचे की चट्टानों को लगातार रगड़ते और उघाड़ते रहते हैं, जिसे अपघर्षण (abrasion) और उत्खनन (plucking) कहते हैं। इस निरंतर चलने वाली प्रक्रिया के कारण नुकीले कटक, यू-आकार की घाटियाँ, सर्क और तीखे शिखर धीरे-धीरे कटते जाते हैं। हजारों-लाखों वर्षों में इन शक्तिशाली प्रक्रियाओं के कारण ऊँचे और बीहड़ पर्वतीय शिखर घिसकर नीचे हो जाते हैं, और तलटी में भारी मात्रा में मलबा निक्षेपित होने से मैदानों का निर्माण होता है, जिससे अंततः ऊँचा पर्वत क्षेत्र एक समतल या निम्न पहाड़ियों वाले भूदृश्य में बदल जाता है।

मुख्य बिंदु:

• हिमनद अपने भारी भार और गुरुत्वाकर्षण के कारण चट्टानों को काटते हैं।
• अपघर्षण और उत्खनन (Plucking) हिमनदीय अपरदन की मुख्य प्रक्रियाएँ हैं।
• यू-आकार की घाटियाँ और सर्क पर्वतीय कटाव के मुख्य प्रमाण हैं।
• लंबी अवधि में ऊँचे पर्वत घिसकर कम ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बदल जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• धीमी गति होने के कारण हिमनदों की अपरदन शक्ति को कम आंकना।
• उत्खनन और अपघर्षण प्रक्रियाओं के तकनीकी नामों का प्रयोग न करना।
• पर्वतों के घटने और मैदानों के बनने के पूरे चक्र को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) हिमनदीय अपरदन की दो मुख्य विधियाँ—अपघर्षण और उत्खनन—अवश्य लिखें।
b) वी-आकार (नदी) और यू-आकार (हिमनद) की घाटियों के अंतर को स्पष्ट रखें।
c) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में समय प्रबंधन का ध्यान रखते हुए मुख्य चरणों को पैराग्राफ में बाँटें।

 

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