Download NCERT Solutions for Class 11 Geography Chapter 05 भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ
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Question 1: निम्नलिखित में से कौन सी एक अनुक्रमिक प्रक्रिया है?
(क) निक्षेप
(ख) ज्वालामुखीता
(ग) पटल- विरूपण
(घ) अपरदन
Answer:
(घ) अपरदन सही उत्तर है। अपरदन एक क्रमिक (Sequential) और लंबी चलने वाली भू-आकृतिक प्रक्रिया है, जो पृथ्वी की सतह पर धीरे-धीरे विभिन्न कारकों जैसे जल, पवन, हिम आदि द्वारा होती है। इसके विपरीत ज्वालामुखीता और पटल-विरूपण आकस्मिक या तीव्र प्रक्रियाएँ हैं, जबकि निक्षेप अपरदन के बाद होने वाला परिणाम है।
मुख्य बिंदु:
• अपरदन एक क्रमिक और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
• यह प्राकृतिक कारकों के माध्यम से धीरे-धीरे घटित होती है।
• यह भू-आकृति विज्ञान में परिवर्तन का प्रमुख कारण है।
आम गलतियाँ:
• निक्षेप और अपरदन की प्रक्रियाओं को एक ही मान लेना।
• आकस्मिक और क्रमिक प्रक्रियाओं में अंतर न समझ पाना।
• विकल्पों को बिना पढ़े जल्दबाजी में उत्तर देना।
Exam Tips:
a) भू-आकृतिक प्रक्रियाओं के वर्गीकरण (क्रमिक बनाम आकस्मिक) को अच्छे से याद रखें।
b) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ने के बाद ही सही उत्तर चुनें।
c) अपरदन और निक्षेप के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 2: जलयोजन प्रक्रिया निम्नलिखित पदार्थों में से किसे प्रभावित करती है?
(क) ग्रेनाइट
(ख) क्वार्ट्ज
(ग) चिका (क्ले) मिट्टी
(घ) लवण
Answer:
(घ) लवण सही उत्तर है। जलयोजन (Hydration) रासायनिक अपक्षय की एक प्रक्रिया है जिसमें खनिज जल को अवशोषित करते हैं और सूज जाते हैं, जिससे खनिजों की संरचना में परिवर्तन होता है। लवण इस प्रक्रिया से अत्यधिक प्रभावित होते हैं, जिससे चट्टानों के कण ढीले हो जाते हैं और वे टूटने लगती हैं।
मुख्य बिंदु:
• जलयोजन रासायनिक अपक्षय का एक महत्वपूर्ण प्रकार है।
• यह खनिजों द्वारा रासायनिक रूप से जल ग्रहण करने की प्रक्रिया है।
• यह लवण जैसे पदार्थों को विशेष रूप से प्रभावित करती है।
आम गलतियाँ:
• जलयोजन और जलयोजन (Hydration) तथा जल अपघटन (Hydrolysis) में भ्रमित होना।
• ग्रेनाइट और क्वार्ट्ज को जलयोजन से प्रभावित होने वाला मुख्य खनिज मान लेना।
• रासायनिक अपक्षय के विभिन्न प्रकारों के उदाहरणों को मिला देना।
Exam Tips:
a) रासायनिक अपक्षय की प्रत्येक प्रक्रिया (ऑक्सीकरण, कार्बोनेटेशन, जलयोजन आदि) के विशिष्ट उदाहरण याद रखें।
b) खनिज संरचना पर जल के प्रभाव को समझकर उत्तर दें।
c) पाठ्यपुस्तक में दी गई रासायनिक अपक्षय की सारणी का अभ्यास करें।
Question 3: मलवा अवधाव को किस श्रेणी मेंसम्मिलित किया जा सकता है?
(क) भूस्खलन
(ख) तीव्र प्रभावी बृहत संचलन
(ग) मंद प्रभावी बृहत संचलन
(घ) अवतलन/धसकन
Answer:
(ख) तीव्र प्रभावी बृहत संचलन सही उत्तर है। मलवा अवधाव (Debris Avalanche) बृहत संचलन (Mass Movement) का एक रूप है जो बहुत तीव्र गति से होता है। यह आमतौर पर पहाड़ी ढालों पर भारी मात्रा में मलबे और पानी के अचानक नीचे खिसकने के रूप में प्रकट होता है, जो अत्यंत विनाशकारी होता है।
मुख्य बिंदु:
• मलवा अवधाव तीव्र गति से होने वाला बृहत संचलन है।
• यह मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों और तीव्र ढालों पर होता है।
• इसमें चट्टान के टुकड़े, मिट्टी और जल का मिश्रण तेजी से नीचे गिरता है।
आम गलतियाँ:
• इसे मंद प्रभावी संचलन समझ लेना।
• भूस्खलन और मलवा अवधाव को पूरी तरह भिन्न मान लेना जबकि यह उसी श्रेणी का तीव्र रूप है।
• बृहत संचलन के वेग के आधार पर वर्गीकरण को न समझना।
Exam Tips:
a) बृहत संचलन के विभिन्न प्रकारों (मंद, तीव्र, अवतलन) को उनकी गति के आधार पर वर्गीकृत करना सीखें।
b) मुख्य शब्दावली जैसे मलवा अवधाव, भूस्खलन और धसकन की परिभाषा स्पष्ट रखें।
c) परीक्षा में इस प्रकार के वर्गीकरण वाले प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 4: निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) अपक्षय पृथ्वी पर जैव विविधता के लिए उत्तरदायी है? कैसे?
Answer:
अपक्षय चट्टानों को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर मृदा निर्माण में सहायता करता है, जो वनस्पति के विकास के लिए अनिवार्य है। वनस्पति और जैव विविधता प्रत्यक्ष रूप से मृदा और आवरण प्रस्तर पर निर्भर करती है। यदि अपक्षय न हो तो मृदा का निर्माण नहीं होगा, जिससे पौधों का उगना असंभव हो जाएगा और परिणामस्वरूप पृथ्वी पर जैव विविधता का अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा।
मुख्य बिंदु:
• अपक्षय मृदा निर्माण की प्रक्रिया का आधार है।
• उपजाऊ मृदा ही विभिन्न प्रकार की वनस्पति और जीवों को पोषण देती है।
• वनस्पति पर ही संपूर्ण खाद्य श्रृंखला और जैव विविधता निर्भर करती है।
आम गलतियाँ:
• अपक्षय को केवल विनाशकारी प्रक्रिया मान लेना और उसके सर्जनात्मक पहलुओं को नजरअंदाज करना।
• मृदा निर्माण और जैव विविधता के सीधे संबंध को स्पष्ट न करना।
• उत्तर को 30 शब्दों की सीमा से बहुत अधिक बड़ा लिख देना।
Exam Tips:
a) लघु उत्तरीय प्रश्नों में उत्तर को संक्षिप्त और बिंदुवार या स्पष्ट पैराग्राफ में लिखें।
b) 'अपक्षय' और 'जैव विविधता' के बीच की कड़ी (मृदा) का उल्लेख अवश्य करें।
c) मुख्य अवधारणा को एक वाक्य में निष्कर्ष के साथ समाप्त करें।
Question 5: बृहत संचलन जो वास्तविक, तीव्र एवं गोचर (Perceptible) हैं, वे क्या हैं? सूचीबद्ध कीजिए।
Answer:
बृहत संचलन के अंतर्गत वे सभी संचलन आते हैं जिनमें चट्टानों के मलबे गुरुत्वाकर्षण के सीधे प्रभाव के कारण ढाल के अनुरूप नीचे खिसकते हैं। तीव्र और गोचर संचलन वे होते हैं जिन्हें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है और जो तेजी से घटित होते हैं। इसके प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं: (1) भूस्खलन (Landslides) - जिसमें चट्टानें और मलबा तेजी से गिरते हैं, (2) मलवा अवधाव (Debris Avalanche) - तीव्र ढालों पर अत्यधिक तीव्र गति से मलबे का खिसकना, और (3) मृदा प्रवाह (Earthflow) - संतृप्त मिट्टी का ढाल के सहारे तेजी से बहना।
मुख्य बिंदु:
• गोचर संचलन वे हैं जिन्हें आसानी से देखा जा सकता है।
• ये गुरुत्वाकर्षण बल के कारण तीव्र ढालों पर घटित होते हैं।
• भूस्खलन और मलवा अवधाव इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
आम गलतियाँ:
• मंद और अदृश्य संचलन (जैसे मृदा क्रीप) को तीव्र संचलन में मिला देना।
• गुरुत्वाकर्षण की भूमिका का उल्लेख करना भूल जाना।
• केवल एक ही प्रकार का उल्लेख करके सूची अधूरी छोड़ देना।
Exam Tips:
a) तीव्र और मंद संचलन के अंतर को स्पष्ट करने वाले उदाहरण याद रखें।
b) सूची बनाते समय बुलेट पॉइंट्स का प्रयोग करें ताकि उत्तर आकर्षक लगे।
c) गुरुत्वाकर्षण को बृहत संचलन का मुख्य चालक बल अवश्य बताएं।
Question 6: विभिन्न गतिशील एवं शक्तिशाली बहिर्जनिक भू-आकृतिक कारक क्या हैं तथा वे क्या प्रधान कार्य संपन्न करते हैं?
Answer:
बहिर्जनिक भू-आकृतिक कारक सूर्य से प्राप्त ऊर्जा और वायुमंडलीय ऊर्जा द्वारा संचालित होते हैं। इनमें बहता हुआ जल (नदियाँ), भू-जल, हिमानी (ग्लेशियर), पवन और लहरें प्रमुख हैं। ये कारक मुख्य रूप से तीन कार्य संपन्न करते हैं: अपरदन (Erosion) - चट्टानों को काटना और तोड़ना, परिवहन (Transportation) - टूटे हुए पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना, और निक्षेप (Deposition) - उन पदार्थों को निचले क्षेत्रों में जमा करना।
मुख्य बिंदु:
• बहिर्जनिक कारकों का मुख्य ऊर्जा स्रोत सौर ऊर्जा है।
• नदियाँ, पवन, हिमानी और लहरें इसके मुख्य अभिकर्ता हैं।
• ये तीनों मुख्य प्रक्रियाएं (अपरदन, परिवहन, निक्षेप) लगातार करती हैं।
आम गलतियाँ:
• बहिर्जनिक और अंतर्जनिक ऊर्जा स्रोतों में भ्रमित होना।
• केवल एक या दो कारकों का उल्लेख करना और बाकी को छोड़ देना।
• इनके द्वारा किए जाने वाले तीनों प्रमुख कार्यों को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) बहिर्जनिक कारकों के नाम (जल, पवन, हिमानी आदि) और उनके तीन मुख्य कार्यों (अपरदन, परिवहन, निक्षेप) को हमेशा एक साथ याद रखें।
b) उत्तर लिखते समय भौगोलिक शब्दावली का सटीक प्रयोग करें।
c) यह प्रश्न दीर्घ उत्तरीय या लघु उत्तरीय दोनों रूपों में आ सकता है, इसलिए पूरी तैयारी रखें।
Question 7: क्या मृदा निर्माण में अपक्षय एक आवश्यक अनिवार्यता है?
Answer:
हाँ, मृदा निर्माण में अपक्षय एक अत्यंत आवश्यक अनिवार्यता है। मृदा निर्माण की प्रक्रिया मूल शैलों के अपक्षय से ही शुरू होती है। अपक्षय चट्टानों को छोटे-छोटे कणों और टुकड़ों में तोड़ता है, जिससे आवरण प्रस्तर का निर्माण होता है। इसके बिना पौधों और जीवों के लिए आवश्यक पोषक तत्व और खनिज उपलब्ध नहीं हो सकते, जो उपजाऊ मृदा के निर्माण के लिए आधार प्रदान करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• अपक्षय के बिना मूल चट्टानों का टूटना संभव नहीं है।
• टूटे हुए चट्टानी कण मृदा के खनिज अंश का निर्माण करते हैं।
• यह मृदा निर्माण की प्रक्रिया का प्रथम और अनिवार्य चरण है।
आम गलतियाँ:
• मृदा निर्माण को केवल जैविक क्रिया मान लेना और अपक्षय की भूमिका को नकारना।
• अपक्षय और अपरदन को एक ही समझ लेना।
• उत्तर को बहुत लंबा खींचना जबकि यह एक सीधा तथ्यात्मक प्रश्न है।
Exam Tips:
a) प्रश्न की शुरुआत सीधे 'हाँ' या 'नहीं' और स्पष्ट कारण से करें।
b) मृदा निर्माण के कारकों में अपक्षय की स्थिति को स्पष्ट करें।
c) संक्षिप्त और सटीक वैज्ञानिक भाषा का प्रयोग करें।
Question 8: निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(i) "हमारी पृथ्वी भू-आकृतिक प्रक्रियाओं के दो विरोधाभासी वर्णों के खेल का मैदान है", विवेचना कीजिए।
Answer:
हमारी पृथ्वी की सतह पर लगातार परिवर्तन होते रहते हैं, और यह परिवर्तन दो विरोधी ताकतों—अंतर्जनिक (Endogenic) और बहिर्जनिक (Exogenic) बलों—की परस्पर क्रिया का परिणाम है। अंतर्जनिक बल पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न होते हैं और धरातल पर विभिन्न उच्चावच जैसे पर्वत, पठार और घाटियाँ उभारते हैं, जिससे असमानता पैदा होती है। इसके विपरीत, बहिर्जनिक बल धरातल पर रहकर लगातार इन उच्चावचों को काटने, समतल करने और घिसने का काम करते हैं, जिन्हें अपरदन और निक्षेप कहा जाता है। यदि अंतर्जनिक बल धरातल को ऊपर उठाते हैं, तो बहिर्जनिक बल उसे नीचे गिराकर समतल बनाने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार, इन दोनों विरोधाभासी बलों का संतुलन ही पृथ्वी के वर्तमान स्वरूप और विविध भू-दृश्यों का निर्माण करता है।
मुख्य बिंदु:
• अंतर्जनिक बल धरातल पर विषमता (पर्वत, पठार) पैदा करते हैं।
• बहिर्जनिक बल इन विषमताओं को मिटाकर समतल बनाने का कार्य करते हैं।
• दोनों बलों की आपसी खींचतान या संतुलन ही भू-आकृतियों को आकार देती है।
आम गलतियाँ:
• केवल एक प्रकार के बल (या तो अंतर्जनिक या बहिर्जनिक) का वर्णन करके उत्तर समाप्त कर देना।
• 'विरोधाभासी वर्णों के खेल' का अर्थ स्पष्ट न करना।
• उत्तर को निर्धारित शब्द सीमा (150 शब्दों) के भीतर न लिखकर बहुत छोटा कर देना।
Exam Tips:
a) दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में परिचय, मुख्य भाग और निष्कर्ष का प्रारूप अपनाएं।
b) अंतर्जनिक और बहिर्जनिक बलों के कार्यों की तुलनात्मक रूप से चर्चा करें।
c) आरेखों या शीर्षकों का मानसिक खाका तैयार करके लिखें ताकि उत्तर व्यवस्थित लगे।
Question 9: 'बहिर्जनिक भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ अपनी अंतिम ऊर्जा सूर्य की गर्मी से प्राप्त करती हैं', व्याख्या कीजिए।
Answer:
बहिर्जनिक भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ जैसे नदियाँ, पवन, हिमानी और लहरें सीधे तौर पर सौर ऊर्जा से संचालित होती हैं। सूर्य की गर्मी पृथ्वी के वायुमंडल को असमान रूप से गरम करती है, जिससे वायुदाब में अंतर पैदा होता है और पवनें चलती हैं। इसके अलावा, सौर ऊर्जा ही जल चक्र को चलाती है जिसके कारण वर्षा, हिमपात और नदियों का प्रवाह संभव होता है। तापमान में परिवर्तन से चट्टानों में तापीय अपक्षय भी होता है। चूँकि वायुमंडलीय परिसंचरण, जल चक्र और तापमान परिवर्तन सभी सौर ऊर्जा पर निर्भर हैं, इसलिए हम कह सकते हैं कि बहिर्जनिक प्रक्रियाएँ अपनी समस्त ऊर्जा सूर्य की गर्मी से ही प्राप्त करती हैं।
मुख्य बिंदु:
• सौर ऊर्जा वायुमंडलीय परिसंचरण (पवन) को चलाती है।
• यह जल चक्र (वर्षा, नदियाँ) का मुख्य संचालक है।
• तापमान में बदलाव से होने वाला अपक्षय भी सूर्य की गर्मी पर निर्भर है।
आम गलतियाँ:
• सूर्य की ऊर्जा को केवल प्रकाश से जोड़ना और वायुमंडलीय प्रक्रियाओं से न जोड़ना।
• जल चक्र और पवन संचलन की भूमिका को छोड़ देना।
• व्याख्या को अधूरा छोड़ना।
Exam Tips:
a) ऊर्जा के स्रोत के रूप में सूर्य की भूमिका को जल चक्र और पवन के संदर्भ में समझाएं।
b) वैज्ञानिक तर्कों के साथ उत्तर की पुष्टि करें।
c) मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से दर्शाएं ताकि परीक्षक को पढ़ने में आसानी हो।
Question 10: क्या भौतिक और रासायनिक अपक्षय प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं? यदि नहीं तो क्यों? सोदाहरण व्याख्या कीजिए।
Answer:
भौतिक और रासायनिक अपक्षय प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से स्वतंत्र नहीं हैं, बल्कि वे घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई हैं और साथ-साथ चलती हैं। भौतिक अपक्षय चट्टानों को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ता है, जिससे चट्टानों का कुल सतही क्षेत्रफल बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ क्षेत्रफल रासायनिक प्रतिक्रियाओं (जैसे ऑक्सीकरण, कार्बोनेटेशन और जलयोजन) के लिए अधिक खुली जगह प्रदान करता है, जिससे रासायनिक अपक्षय की गति तेज हो जाती है। इसके विपरीत, रासायनिक अपक्षय चट्टानों के खनिजों को कमजोर कर देता है, जिससे वे भौतिक रूप से आसानी से टूट जाती हैं। उदाहरण के लिए, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भौतिक और रासायनिक अपक्षय दोनों एक साथ मिलकर कार्य करते हैं और मूल चट्टानों को गहराई तक प्रभावित करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• भौतिक अपक्षय सतही क्षेत्रफल बढ़ाकर रासायनिक क्रियाओं को आसान बनाता है।
• रासायनिक अपक्षय खनिजों को कमजोर कर भौतिक टूटने में मदद करता है।
• दोनों प्रक्रियाएँ एक-दूसरे को बढ़ावा देती हैं और साथ-साथ चलती हैं।
आम गलतियाँ:
• दोनों को पूरी तरह से अलग और स्वतंत्र प्रक्रिया मान लेना।
• सतही क्षेत्रफल बढ़ने और रासायनिक प्रतिक्रिया के संबंध को न समझाना।
• उचित उदाहरण का अभाव होना।
Exam Tips:
a) 'भौतिक अपक्षय रासायनिक अपक्षय का मार्ग प्रशस्त करता है' - इस अवधारणा को स्पष्ट करें।
b) दोनों के बीच के अंतर्संबंध को तार्किक रूप से पैराग्राफ में लिखें।
c) उदाहरण देते समय क्षेत्रों (जैसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र) का उल्लेख अवश्य करें।
Question 11: आप किस प्रकार मृदा निर्माण प्रक्रियाओं तथा मृदा निर्माण कारकों के बीच अंतर करते हैं? जलवायु एवं जैविक क्रियाओं की मृदा निर्माण में दो महत्वपूर्ण कारकों के रूप में क्या भूमिका है?
Answer:
मृदा निर्माण कारक (Soil-forming Factors) वे मूल दशाएँ हैं जो मृदा के विकास को नियंत्रित करती हैं, जैसे मूल शैल, उच्चावच, जलवायु, समय और जैविक पदार्थ। इसके विपरीत, मृदा निर्माण प्रक्रियाएँ (Soil-forming Processes) वे रासायनिक, भौतिक और जैविक क्रियाएँ हैं जिनके माध्यम से मृदा वास्तव में बनती है, जैसे अपक्षय, ह्यूमस का संचयन, निक्षालन आदि। जलवायु और जैविक क्रियाएँ मृदा निर्माण के सबसे महत्वपूर्ण सक्रिय कारक हैं। जलवायु (तापमान और वर्षा) रासायनिक और भौतिक अपक्षय की गति को तय करती है और वनस्पति के प्रकार को निर्धारित करती है। जैविक क्रियाएँ (पेड़-पौधे और जीव-जंतु) मृत कार्बनिक पदार्थों को सड़ाकर ह्यूमस का निर्माण करते हैं और मृदा को उपजाऊ बनाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• कारक मृदा निर्माण की पृष्ठभूमि या स्थितियाँ हैं, जबकि प्रक्रियाएँ क्रियात्मक गतिविधियाँ हैं।
• जलवायु तापमान और वर्षा के जरिए अपक्षय और वनस्पति को नियंत्रित करती है।
• जैविक क्रियाएँ ह्यूमस जोड़कर मृदा को उपजाऊ और जीवंत बनाती हैं।
आम गलतियाँ:
• कारकों और प्रक्रियाओं को एक ही समझ लेना और उनमें अंतर स्पष्ट न करना।
• जलवायु और जैविक कारकों की भूमिका को अलग-अलग न समझाना।
• ह्यूमस और अपक्षय की भूमिका को भूल जाना।
Exam Tips:
a) अंतर स्पष्ट करने के लिए परिभाषा और उदाहरण का स्पष्ट विभाजन करें।
b) जलवायु और जैविक कारकों को 'सक्रिय कारक' के रूप में विशेष रूप से उल्लेख करें।
c) उत्तर को सुव्यवस्थित रूप से लिखकर 150 शब्दों की सीमा का पालन करें।
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