Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Geography Chapter 04 महासागरों और महाद्वीपों का वितरण
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Question 1: (i) निम्न में से किसने सर्वप्रथम यूरोप, अफ्रीका व अमेरिका के साथ स्थित होने की संभावना व्यक्त की?
(क) अल्फ्रेड वेगनर
(ख) अब्राहम आरटेलिअस
(ग) एनटोनियो पेलेग्रिनी
(घ) एडमंड हेस
Answer:
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (ख) अब्राहम आरटेलिअस है। डच मानचित्रवेत्ता अब्राहम आरटेलिअस ने सबसे पहले सन् 1596 में यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के एक साथ जुड़े होने की संभावना व्यक्त की थी। उनके अनुसार ये महाद्वीप पहले एक ही भूभाग का हिस्सा थे जो बाद में अलग हो गए।
मुख्य बिंदु:
• अब्राहम आरटेलिअस ने 1596 में महाद्वीपों के संचलन की परिकल्पना की थी।
• अल्फ्रेड वेगनर ने महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत को वैज्ञानिक आधार पर प्रस्तुत किया था।
• मानचित्रों की समानता के आधार पर सबसे पहले महाद्वीपों के जुड़ाव को पहचाना गया था।
आम गलतियाँ:
• छात्रों द्वारा इसे अल्फ्रेड वेगनर समझ लेना, जिन्होंने केवल इसका विस्तृत सिद्धांत दिया था।
• आरटेलिअस और पेलेग्रिनी के योगदान में भ्रमित होना।
• वर्ष और मानचित्रकार के नाम को गलत याद रखना।
Exam Tips:
a) सबसे पहले संभावना जताने वाले वैज्ञानिक का नाम अब्राहम आरटेलिअस याद रखें।
b) बहुविकल्पीय प्रश्नों में मानचित्रकारों और सिद्धांतकारों के नामों को ध्यान से पढ़ें।
c) यह प्रश्न एक अंक के वस्तुनिष्ठ प्रश्न के रूप में अक्सर पूछा जाता है।
Question 2: (ii) पोलर फ्लीइंग बल (Polar fleeing force) निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
(क) पृथ्वी का परिक्रमण
(ख) पृथ्वी का घूर्णन
(ग) गुरुत्वाकर्षण
(घ) ज्वारीय बल
Answer:
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (ख) पृथ्वी का घूर्णन है। अल्फ्रेड वेगनर के अनुसार पोलर फ्लीइंग बल पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन (Rotation) से उत्पन्न होता है। पृथ्वी की आकृति पूर्ण गोला नहीं है बल्कि भूमध्य रेखा पर यह उभरी हुई है, जिसके कारण घूर्णन बल महाद्वीपों को भूमध्य रेखा की ओर विस्थापित करने का प्रयास करता है।
मुख्य बिंदु:
• पोलर फ्लीइंग बल पृथ्वी के घूर्णन से जुड़ा हुआ है।
• यह बल महाद्वीपों को ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर धकेलता है।
• वेगनर ने महाद्वीपों के विस्थापन के लिए इसे एक मुख्य कारक माना था।
आम गलतियाँ:
• इसे पृथ्वी के परिक्रमण (Revolution) से संबंधित मान लेना।
• ज्वारीय बल और पोलर फ्लीइंग बल को एक ही समझ लेना।
• गुरुत्वाकर्षण को इसका मुख्य कारण मान लेना।
Exam Tips:
a) 'पोलर फ्लीइंग' शब्द को पृथ्वी के घूर्णन गति से जोड़कर याद रखें।
b) वेगनर द्वारा बताए गए दोनों बलों (ज्वारीय बल और फ्लीइंग बल) के अंतर को स्पष्ट समझें।
c) ऐसे वैचारिक बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास बार-बार करें।
Question 3: (iii) इनमें से कौन सी लघु (Minor) प्लेट नहीं है?
(क) नजका
(ख) फिलिपिन
(ग) अरब
(घ) अंटार्कटिक
Answer:
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (घ) अंटार्कटिक है। अंटार्कटिक प्लेट एक मुख्य (Major) विवर्तनिक प्लेट है, न कि लघु प्लेट। इसके विपरीत नजका, फिलिपिन और अरब प्लेटें क्षेत्रफल में छोटी होने के कारण लघु प्लेटों की श्रेणी में आती हैं।
मुख्य बिंदु:
• अंटार्कटिक और उसकी महासागरीय प्लेट एक बड़ी विवर्तनिक प्लेट है।
• नजका, फिलिपिन और अरब प्लेटें लघु प्लेटों के उदाहरण हैं।
• प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत में मुख्य और लघु प्लेटों का वर्गीकरण महत्वपूर्ण है।
आम गलतियाँ:
• सभी छोटी दिखने वाली प्लेटों को लघु प्लेट मान लेना।
• मुख्य प्लेटों और लघु प्लेटों की सूची को आपस में मिला देना।
• अंटार्कटिक को महाद्वीप समझकर लघु प्लेट मान लेना।
Exam Tips:
a) मुख्य प्लेटों (जैसे अंटार्कटिक, यूरेशियाई, अफ्रीकी आदि) के नाम अलग से याद कर लें।
b) लघु प्लेटों के उदाहरणों की सूची को अपनी उत्तर पुस्तिका में नोट करें।
c) प्लेटों के वर्गीकरण से संबंधित मानचित्र का अध्ययन अवश्य करें।
Question 4: (iv) सागरीय अधस्तल विस्तार सिद्धांत की व्याख्या करते हुए हेस ने निम्न में से किस अवधारणा पर विचार नहीं किया?
(क) मध्य- महासागरीय कटकों के साथ ज्वालामुखी क्रियाएँ।
(ख) महासागरीय नितल की चट्टानों में सामान्य व उत्क्रमण चुंबकत्व क्षेत्र की पत्तियों का होना।
(ग) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्म का वितरण।
(घ) महासागरीय तल की चट्टानों की आयु।
Answer:
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (ग) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्म का वितरण है। हैरी हेस द्वारा प्रतिपादित सागरीय अधस्तल विस्तार (Sea Floor Spreading) सिद्धांत में मध्य महासागरीय कटकों पर ज्वालामुखी, चट्टानों में चुंबकीय पट्टियों और नितल की चट्टानों की आयु पर विचार किया गया था, जबकि जीवाश्मों का वितरण वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत से संबंधित है।
मुख्य बिंदु:
• सागरीय अधस्तल विस्तार सिद्धांत हैरी हेस द्वारा दिया गया था।
• इसमें महासागरीय नितल की आयु और चुंबकीय गुणों का अध्ययन किया गया था।
• जीवाश्मों का वितरण महाद्वीपीय विस्थापन के प्रमाण से संबंधित है।
आम गलतियाँ:
• सभी भूवैज्ञानिक सिद्धांतों के प्रमाणों को एक ही मान लेना।
• हेस के सिद्धांत और वेगनर के सिद्धांत के साक्ष्यों में अंतर न समझ पाना।
• चुंबकीय पट्टियों की अवधारणा को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक वैज्ञानिक (वेगनर, हेस, मैक्केन्ज़ी) के सिद्धांतों के मुख्य बिंदुओं को अलग-अलग याद रखें।
b) जीवाश्म वितरण हमेशा महाद्वीपीय विस्थापन से जुड़ा होता है, इसे ध्यान रखें।
c) प्रश्न में 'किस पर विचार नहीं किया' पूछा गया है, इस पर विशेष ध्यान दें।
Question 5: (v) हिमालय पर्वतों के साथ भारतीय प्लेट की सीमा किस तरह की प्लेट सीमा है?
(क) महासागरीय- महाद्वीपीय अभिसरण
(ख) अपसारी सीमा
(ग) रूपांतर सीमा
(घ) महाद्वीपीय- महाद्वीपीय अभिसरण
Answer:
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (घ) महाद्वीपीय- महाद्वीपीय अभिसरण है। जब भारतीय प्लेट और यूरेशियाई प्लेट दोनों ही महाद्वीपीय प्लेटें आपस में टकराती हैं, तो उनके बीच महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण होता है, जिसके परिणामस्वरुप विशाल हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ है।
मुख्य बिंदु:
• भारतीय प्लेट और यूरेशियाई प्लेट दोनों महाद्वीपीय प्रकृति की हैं।
• इनके अभिसरण (Collision) से वलित पर्वतों (जैसे हिमालय) का निर्माण होता है।
• इस प्रकार की सीमा पर अत्यधिक दबाव और वलन की क्रिया होती है।
आम गलतियाँ:
• इसे महासागरीय और महाद्वीपीय प्लेट का अभिसरण समझ लेना।
• अपसारी और अभिसरण सीमाओं के बीच अंतर भूल जाना।
• हिमालय की उत्पत्ति को केवल एक प्लेट की गति मानना।
Exam Tips:
a) प्लेट सीमाओं के प्रकार (अभिसरण, अपसारी, रूपांतर) और उनके परिणामों को सारणीबद्ध करें।
b) हिमालय का निर्माण महाद्वीप-महाद्वीप टक्कर का सबसे अच्छा उदाहरण है।
c) मानचित्र की सहायता से प्लेटों की दिशा का अभ्यास करें।
Question 6: (i) महाद्वीपों के प्रवाह के वेगनर ने निम्नलिखित में से किन बलों का उल्लेख किया?
Answer:
महाद्वीपीय प्रवाह के संबंध में वेगनर ने मुख्य रूप से दो बलों का उल्लेख किया था। पहला बल 'पोलर फ्लीइंग बल' (Polar fleeing force) था जो पृथ्वी के घूर्णन से संबंधित है। पृथ्वी की आकृति पूर्ण गोलाकार नहीं है बल्कि भूमध्य रेखा पर उभरी हुई है, जिसके कारण घूर्णन के फलस्वरूप एक बल उत्पन्न होता है जो महाद्वीपों को ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर धकेलता है। दूसरा बल 'ज्वारीय बल' (Tidal force) था, जो सूर्य और चंद्रमा के आकर्षण के कारण उत्पन्न होता है और इसके कारण महासागरों में ज्वार आते हैं। वेगनर का मानना था कि करोड़ों वर्षों के दौरान ये बल इतने प्रभावी हो गए कि विशाल महाद्वीप पैंजिया का विभाजन और विस्थापन संभव हो सका।
मुख्य बिंदु:
• वेगनर ने पैंजिया के विस्थापन के लिए दो मुख्य बल बताए।
• पहला बल पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न पोलर फ्लीइंग बल था।
• दूसरा बल सूर्य और चंद्रमा के आकर्षण से उत्पन्न ज्वारीय बल था।
आम गलतियाँ:
• केवल एक ही बल का उल्लेख करना और दूसरे को भूल जाना।
• ज्वारीय बल के स्रोत को गलत तरीके से परिभाषित करना।
• पोलर फ्लीइंग बल को गुरुत्वाकर्षण से जोड़ देना।
Exam Tips:
a) दोनों बलों के नाम स्पष्ट रूप से लिखें - पोलर फ्लीइंग बल और ज्वारीय बल।
b) प्रत्येक बल के कार्य करने के कारण (घूर्णन और आकर्षण) को संक्षेप में बताएं।
c) उत्तर लिखते समय वेगनर के सिद्धांत के संदर्भ का उल्लेख अवश्य करें।
Question 7: (ii) मैंटल में संवहन धाराओं के आरंभ होने और बने रहने का क्या कारण है?
Answer:
मैंटल में संवहन धाराएँ (Convection Currents) रेडियोएक्टिव तत्वों के विखंडन और अत्यधिक ताप भिन्नता के कारण उत्पन्न होती हैं। पृथ्वी के आंतरिक भाग में रेडियोएक्टिव तत्वों के क्षय से लगातार ऊष्मा निकलती रहती है, जिससे मैंटल के निचले भाग का तापमान बहुत अधिक हो जाता है। यह गर्म और हल्की सामग्री ऊपर उठती है और ठंडी सामग्री नीचे बैठती है, जिससे एक निरंतर संवहन वृत्त बन जाता है। आर्थर होम्स ने सबसे पहले पूरे मैंटल में इस प्रकार की धाराओं के तंत्र का विचार प्रस्तुत किया था, जो प्लेट विवर्तनिकी के अध्ययन का आधार बना।
मुख्य बिंदु:
• रेडियोएक्टिव तत्वों का विखंडन मैंटल में ऊष्मा का मुख्य स्रोत है।
• तापमान में भिन्नता के कारण संवहन धाराएँ निरंतर चलती रहती हैं।
• आर्थर होम्स ने मैंटल संवहन धारा सिद्धांत का प्रतिपादन किया था।
आम गलतियाँ:
• संवहन धाराओं के उत्पन्न होने के मूल कारण (रेडियोएक्टिवता) को न लिखना।
• धाराओं के ऊपर उठने और नीचे बैठने की प्रक्रिया को स्पष्ट न करना।
• वैज्ञानिक आर्थर होम्स के योगदान का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) संवहन धाराओं के लिए 'रेडियोएक्टिव तत्व' और 'ताप भिन्नता' मुख्य शब्द हैं, इन्हें जरूर लिखें।
b) उत्तर को संक्षिप्त और वैज्ञानिक शब्दावली में लिखें।
c) यह प्रश्न दो या तीन अंकों के वैचारिक प्रश्नों में पूछा जाता है।
Question 8: (iii) प्लेट की रूपांतर सीमा, अभिसरण सीमा और अपसारी सीमा में मुख्य अंतर क्या है?
Answer:
प्लेट की तीनों मुख्य सीमाओं में उनकी गतियों और प्रभावों के आधार पर स्पष्ट अंतर होता है। अभिसरण सीमा वह है जहाँ दो प्लेटें एक-दूसरे के निकट आती हैं और एक प्लेट दूसरी के नीचे धंसती है, जिससे भूपर्पटी का विनाश होता है और वलित पर्वत बनते हैं। अपसारी सीमा वह होती है जहाँ प्लेटें एक-दूसरे से दूर हटती हैं, जिससे नई भूपर्पटी का निर्माण होता है और मध्य महासागरीय कटक बनते हैं, जैसे मध्य अटलांटिक कटक। इसके विपरीत, रूपांतर सीमा वह होती है जहाँ प्लेटें न तो एक-दूसरे के पास आती हैं और न दूर हटती हैं, बल्कि एक-दूसरे के समानांतर क्षैतिज दिशा में फिसलती हैं, जिससे न तो नई पर्पटी बनती है और न ही विनाश होता है, बल्कि केवल भ्रंश और भूकंप आते हैं।
मुख्य बिंदु:
• अभिसरण सीमा में प्लेटें टकराती हैं और पर्पटी का विनाश होता है।
• अपसारी सीमा में प्लेटें दूर हटती हैं और नई पर्पटी का निर्माण होता है।
• रूपांतर सीमा में प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर फिसलती हैं और विनाश नहीं होता।
आम गलतियाँ:
• तीनों सीमाओं के परिणामों (निर्माण और विनाश) में भ्रमित होना।
• रूपांतर सीमा को अपसारी सीमा समझ लेना।
• सही उदाहरणों का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) तीनों सीमाओं को अंतर स्पष्ट करते हुए बिंदुवार या पैराग्राफ के रूप में स्पष्ट लिखें।
b) प्रत्येक सीमा का एक उपयुक्त उदाहरण (जैसे सैन एंड्रियास भ्रंश या हिमालय) अवश्य दें।
c) 'निर्माण' और 'विनाश' शब्दों का प्रयोग मुख्य अंतर बताने के लिए करें।
Question 9: (iv) दक्खन ट्रैप के निर्माण के दौरान भारतीय स्थलखंड की स्थिति क्या थी?
Answer:
आज से लगभग 14 करोड़ वर्ष पहले भारतीय उपमहाद्वीप दक्षिणी गोलार्ध में लगभग 50 डिग्री दक्षिणी अक्षांश पर स्थित था और इसके उत्तर में टेथिस सागर तथा दक्षिण में तिब्बती खंड व यूरेशियाई स्थलखंड था। जब भारतीय प्लेट उत्तर की ओर यूरेशियाई प्लेट की तरफ गति कर रही थी, तब मार्ग में एक गर्म धब्बा (Hotspot) या मैंटल प्लूम से संपर्क हुआ, जिससे अत्यधिक मात्रा में लावा का प्रवाह हुआ और दक्खन ट्रैप का विशाल निर्माण हुआ। यह प्रक्रिया लगभग 6 करोड़ वर्ष पूर्व आरंभ हुई और लंबे समय तक जारी रही, जिसके दौरान उपमहाद्वीप भूमध्य रेखा के पास से गुजरा और वर्तमान स्थिति में पहुँचा।
मुख्य बिंदु:
• दक्खन ट्रैप का निर्माण लगभग 6 करोड़ वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था।
• उस समय भारतीय स्थलखंड दक्षिणी गोलार्ध में लगभग 50 डिग्री अक्षांश पर था।
• लावा के व्यापक प्रवाह के कारण इस बेसॉल्ट पठार का निर्माण हुआ।
आम गलतियाँ:
• भारतीय प्लेट की प्राचीन स्थिति और अक्षांश को गलत बताना।
• दक्खन ट्रैप के निर्माण के समय और प्रक्रिया में त्रुटि करना।
• टेथिस सागर की स्थिति को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) दक्खन ट्रैप के निर्माण का समय (लगभग 6 करोड़ वर्ष पूर्व) और अक्षांश (50° दक्षिण) याद रखें।
b) भारतीय प्लेट की उत्तर की ओर गति और लावा प्रवाह के संबंध को स्पष्ट करें।
c) यह प्रश्न भारत के भौगोलिक इतिहास से जुड़ा होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Question 10: (i) महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के पक्ष में दिए गए प्रमाणों का वर्णन करें।
Answer:
अल्फ्रेड वेगनर द्वारा प्रतिपादित महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के समर्थन में कई महत्वपूर्ण भौगोलिक और जैविक प्रमाण दिए गए। सबसे पहले, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के तटों की आमने-सामने की रेखाओं में अद्भुत जिक्सॉ फिट (Jigsaw fit) की समानता पाई जाती है। दूसरा, भूवैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार 47 करोड़ से 35 करोड़ वर्ष पुराने प्राचीन पर्वत क्रम अटलांटिक महासागर के दोनों किनारों पर एक जैसे पाए जाते हैं। तीसरा, ग्लोसोप्टेरिस नामक वनस्पति और मैसोसोरस जैसे जीवों के जीवाश्म आज एक-दूसरे से हज़ारों किलोमीटर दूर स्थित अलग महाद्वीपों (जैसे अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, भारत और अंटार्कटिका) पर मिलते हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि ये सभी स्थलखंड कभी एकजुड़े हुए थे। चौथा, ब्राजील के तट पर मिलने वाले सोने के निक्षेप अफ्रीका के घाना तट से मेल खाते हैं, और अंत में, कार्बोनिफेरस काल के हिमानी निक्षेपों में पाई जाने वाली समरूपता भी इस सिद्धांत की पुष्टि करती है कि सभी महाद्वीप कभी पैंजिया के रूप में एक ही भूभाग थे।
मुख्य बिंदु:
• महाद्वीपों के तटों में जिगसॉ फिट (आमने-सामने की समानता) पाई जाती है।
• दूर-दूर स्थित महाद्वीपों पर एक जैसे जीवाश्म और वनस्पतियाँ मिलती हैं।
• कार्बोनिफेरस काल के हिमानी निक्षेपों में अद्भुत एकरूपता दिखाई देती है।
आम गलतियाँ:
• केवल तटों की समानता लिखकर उत्तर समाप्त कर देना और अन्य प्रमाणों को छोड़ देना।
• जीवाश्मों और वनस्पतियों (जैसे ग्लोसोप्टेरिस) के नाम गलत लिखना।
• वैज्ञानिक तर्कों को स्पष्ट रूप से क्रमबद्ध न करना।
Exam Tips:
a) महाद्वीपीय विस्थापन के प्रमाणों को हेडिंग या बुलेट पॉइंट्स में स्पष्ट रूप से याद रखें।
b) जीवों और वनस्पतियों के उदाहरण (ग्लोसोप्टेरिस, मैसोसोरस) उत्तर में अवश्य लिखें।
c) यह दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है, इसलिए कम से कम चार से पाँच मजबूत प्रमाणों का विस्तार से वर्णन करें।
Question 11: (ii) महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत व प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत में मूलभूत अंतर बताइए।
Answer:
महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत और प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत दोनों ही पृथ्वी के धरातलीय स्वरूप को समझने के प्रयास हैं, लेकिन दोनों में मूलभूत अंतर है। महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत अल्फ्रेड वेगनर द्वारा 20वीं शताब्दी के आरंभ में दिया गया था, जिसके अनुसार सभी महाद्वीप एक बड़े भूभाग 'पैंजिया' के रूप में जुड़े थे और सियाल (Sial) सीमा पर बिना किसी बाधा के तैर रहे थे। इसके विपरीत, आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Plate Tectonics) 1967 में मैक्केन्ज़ी, पार्कर और मॉर्गन द्वारा प्रतिपादित किया गया, जिसके अनुसार संपूर्ण स्थलमंडल (Lithosphere) केवल महाद्वीपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सात प्रमुख और कुछ छोटी विवर्तनिक प्लेटों में विभक्त है। वेगनर के सिद्धांत में महाद्वीपों के तैरने का बल (जैसे ज्वारीय बल और पोलर फ्लीइंग बल) वैज्ञानिक रूप से अपर्याप्त और कमजोर पाया गया था, जबकि प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत मैंटल में उत्पन्न होने वाली संवहन धाराओं (Convection Currents) के वैज्ञानिक आधार पर पूरी तरह समर्थित और प्रमाणित है।
मुख्य बिंदु:
• वेगनर ने महाद्वीपों को सियाल पर तैरते हुए बताया था, जबकि प्लेट विवर्तनिकी में संपूर्ण स्थलमंडल प्लेटों के रूप में गति करता है।
• वेगनर द्वारा बताए गए विस्थापन बल (ज्वारीय बल आदि) बहुत कमजोर थे, जबकि प्लेट विवर्तनिकी में मैंटल की संवहन धाराएँ मुख्य बल हैं।
• प्लेट विवर्तनिकी आधुनिक और वैज्ञानिक रूप से सर्वमान्य सिद्धांत है, जबकि विस्थापन सिद्धांत इसका प्रारंभिक चरण था।
आम गलतियाँ:
• दोनों सिद्धांतों को एक ही मान लेना और अंतर स्पष्ट न कर पाना।
• विस्थापन के लिए जिम्मेदार बलों की व्याख्या में गलती करना।
• वैज्ञानिकों के योगदान (वेगनर बनाम मैक्केन्ज़ी व अन्य) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) दोनों सिद्धांतों के बीच तुलनात्मक अंतर को बिंदुओं के आधार पर तैयार करें।
b) बल के स्रोत (ज्वारीय बल बनाम संवहन धाराएँ) का अंतर मुख्य रूप से दर्शाएँ।
c) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण अवधारणा है।
Question 12: (iii) महाद्वीपीय सिद्धांत के उपरांत की प्रमुख खोज क्या है, जिसमें वैज्ञानिकों ने महासागर व महाद्वीप वितरण के अध्ययन में पुनः रुचि ली?
Answer:
अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के बाद, लंबे समय तक वैज्ञानिकों ने इस पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि उस समय विस्थापन के लिए बताए गए बल अपर्याप्त प्रतीत होते थे। परंतु 1950 और 1960 के दशक के बाद महासागरीय नितल की विस्तृत खोज (Mapping of ocean floor) और तकनीकी विकास ने वैज्ञानिकों का ध्यान इस ओर पुनः आकर्षित किया। महासागरीय नितल के चुंबकीय सर्वेक्षण (Magnetic surveys) से यह पता चला कि मध्य महासागरीय कटक के दोनों तरफ समान दूरी पर चट्टानों की आयु, संरचना और चुंबकत्व गुणों में अद्भुत समानता और समरूपता पाई जाती है। इसके साथ ही, गहरे समुद्रों में भूकंपों के उद्गम केंद्र और मध्य महासागरीय कटकों के साथ सक्रिय ज्वालामुखी क्रियाओं के साक्ष्यों ने यह सिद्ध कर दिया कि महासागरीय और महाद्वीपीय पट्टियाँ स्थिर नहीं हैं, बल्कि निरंतर गतिशील हैं। इन नई खोजों ने ही हैरी हेस के सागरीय अधस्तल विस्तार और अंततः आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत को जन्म दिया।
मुख्य बिंदु:
• महासागरीय नितल के मानचित्रण और चुंबकीय सर्वेक्षण ने नई खोजों को बढ़ावा दिया।
• मध्य महासागरीय कटकों के दोनों ओर चट्टानों की आयु और चुंबकीय पट्टियों की समानता पाई गई।
• भूकंपों और ज्वालामुखियों के वितरण ने प्लेटों की गतिशीलता को स्पष्ट किया।
आम गलतियाँ:
• केवल वेगनर के सिद्धांतों तक सीमित रहना और आधुनिक खोजों का उल्लेख न करना।
• चुंबकीय सर्वेक्षण और नितल की आयु के महत्व को नजरअंदाज करना।
• महासागरीय कटकों की भूमिका को स्पष्ट न कर पाना।
Exam Tips:
a) महासागरीय नितल मानचित्रण और चुंबकीय पट्टियों का अध्ययन आधुनिक खोजों का मुख्य आधार है, इसे जरूर लिखें।
b) यह समझाइए कि कैसे इन खोजों ने वेगनर के पुराने सिद्धांत को नया जीवन दिया।
c) उत्तर को क्रमबद्ध और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लिखें।
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