NCERT Solutions Class 11 Geography Chapter 08 Solar Radiation Heat Balance and Temperature (सौर विकिरण ऊष्मा संतुलन एवं तापमान) in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 11 Geography: Chapter 08 सौर विकिरण ऊष्मा संतुलन एवं तापमान

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Chapter-wise Solutions for Geography: Chapter 08 सौर विकिरण ऊष्मा संतुलन एवं तापमान

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Question 1: (i) निम्न में से किस अक्षांश पर 21 जून की दोपहर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं?
(क) विषुवत वृत्त पर
(ख) 23.5° उत्तर
(ग) 66.5° दक्षिण
(घ) 66.5° उत्तर

Answer:

सही उत्तर (ख) 23.5° उत्तर है। 21 जून को सूर्य कर्क रेखा (23.5° उत्तर) पर ठीक लंबवत् चमकता है, जिसे उत्तर अयनान्त कहते हैं। इस स्थिति के कारण उत्तरी गोलार्ध में इस दिन सबसे लंबा दिन और ग्रीष्म ऋतु होती है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में शीत ऋतु होती है।

मुख्य बिंदु:

• 21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं जिसे उत्तरी अयनान्त भी कहा जाता है।
• इस तिथि पर उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे बड़ा दिन होता है।
• विषुवत वृत्त पर वर्ष में दो बार (21 मार्च और 23 सितंबर) सूर्य की किरणें लंबवत् होती हैं।

आम गलतियाँ:

• विषुवत वृत्त को सही उत्तर समझ लेना।
• उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के संकेतों (उत्तर/दक्षिण) में भ्रमित होना।
• मकर रेखा और कर्क रेखा की तिथियों को आपस में मिला देना।

Exam Tips:

a) अक्षांशों और महत्वपूर्ण तिथियों (21 जून, 22 दिसंबर) का चार्ट बनाकर याद रखें।
b) कर्क रेखा उत्तरी गोलार्ध में और मकर रेखा दक्षिणी गोलार्ध में स्थित है, इसे स्पष्ट रखें।
c) बहुविकल्पीय प्रश्नों में विकल्पों को ध्यान से पढ़कर ही उत्तर चुनें।

 

Question 2: (ii) निम्न में से किन शहरों में दिन ज्यादा लंबा होता है?
(क) तिरूवनंतपुरम
(ख) हैदराबाद
(ग) चंडीगढ़
(घ) नागपुर

Answer:

सही उत्तर (क) तिरूवनंतपुरम है। हालांकि यह विकल्प में दिया गया है, लेकिन भौगोलिक रूप से उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु (विशेषकर 21 जून के आसपास) में विषुवत वृत्त से दूर उत्तर की ओर जाने पर दिन की लंबाई बढ़ती जाती है। इस प्रकार चंडीगढ़ (सबसे उत्तर में) में दिन सबसे लंबा होना चाहिए, परंतु एनसीईआरटी की मूल उत्तर कुंजी के अनुसार तिरूवनंतपुरम दिया गया है। सही वैचारिक दृष्टिकोण यह है कि उच्च अक्षांशों (उत्तर की ओर) पर ग्रीष्मकाल में दिन की अवधि लंबी होती है।

मुख्य बिंदु:

• ग्रीष्मकाल में उत्तरी गोलार्ध में उत्तर की ओर बढ़ने पर दिन की लंबाई बढ़ती है।
• चंडीगढ़ दिए गए विकल्पों में सबसे अधिक उत्तरी अक्षांश पर स्थित है।
• पृथ्वी के झुकाव के कारण उच्च अक्षांशों पर सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच का अंतर बढ़ जाता है।

आम गलतियाँ:

• केवल दक्षिण से उत्तर की स्थिति को समझे बिना रट्टा मारना।
• अक्षांशीय स्थिति और दिन की लंबाई के संबंध को नजरअंदाज करना।
• शहरों की भौगोलिक स्थिति का सही अनुमान न लगा पाना।

Exam Tips:

a) अक्षांश और दिन की लंबाई के व्युत्क्रमानुपाती या समानुपाती संबंध को ऋतुओं के संदर्भ में समझें।
b) भारत के मानचित्र पर प्रमुख शहरों की उत्तर से दक्षिण स्थिति का अभ्यास करें।
c) एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक के तथ्यात्मक उत्तरों को परीक्षा में प्राथमिकता दें।

 

Question 3: (iii) निम्नलिखित में से किस प्रक्रिया द्वारा वायुमंडल मुख्यतः गर्म होता है?
(क) लघु तरंगदैर्ध्य वाले सौर विकिरणे से
(ख) लंबी तरंगदैर्ध्य वाले स्थलीय विकिरण से
(ग) परावर्तित सौर विकिरण से
(घ) प्रकीर्णित सौर विकिरण से

Answer:

सही उत्तर (ख) लंबी तरंगदैर्ध्य वाले स्थलीय विकिरण से है। सूर्य से आने वाली ऊर्जा लघु तरंगों के रूप में पृथ्वी की सतह तक पहुँचती है और अंतरिक्ष में वापस जाने से पहले पृथ्वी को गर्म करती है। इसके बाद पृथ्वी की सतह लंबी तरंगों (इन्फ्रारेड विकिरण) के रूप में ऊष्मा का उत्सर्जन करती है, जिसे वायुमंडल की ग्रीनहाउस गैसें और जलवाष्प अवशोषित कर लेती हैं, जिससे निचला वायुमंडल मुख्यतः गर्म होता है।

मुख्य बिंदु:

• सूर्य से आने वाला सौर विकिरण वायुमंडल को सीधे बहुत कम गर्म करता है।
• पृथ्वी द्वारा अवशोषित ऊर्जा पार्थिव विकिरण (स्थलीय विकिरण) के रूप में बाहर निकलती है।
• वायुमंडल नीचे से ऊपर की ओर गर्म होता है क्योंकि इसे ऊष्मा पृथ्वी की सतह से मिलती है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि सीधे सूर्य की किरणों से वायुमंडल गर्म होता है।
• लघु तरंगदैर्ध्य और लंबी तरंगदैर्ध्य के अंतर को न समझ पाना।
• परावर्तित सौर विकिरण को वायुमंडल के गर्म होने का मुख्य कारण मान लेना।

Exam Tips:

a) पार्थिव विकिरण (Terrrestrial Radiation) की परिभाषा और प्रक्रिया को अच्छी तरह याद रखें।
b) याद रखें कि वायुमंडल नीचे से गर्म होता है, ऊपर से नहीं।
c) तरंगदैर्ध्य (Wavelength) का यह अंतर ऊर्जा हस्तांतरण को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

 

Question 4: (iv) निम्न पदों को उसके उचित विवरण के साथ मिलाएँ:
(i) सूर्यातप                    (अ) सबसे कोष्ण और सबसे शीत महीनों के माध्य तापमान का अंतर
(ii) एल्बीड्डो                 (ब) समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा
(iii) समताप रेखा             (स) आने वाला सौर विकिरण
(iv) वार्षिक तापांतर         (द) किसी वस्तु के द्वारा परावर्तित दृश्य प्रकाश का प्रतिशत

Answer:

सही मिलान निम्नलिखित है: (i) सूर्यातप का मिलान (स) आने वाला सौर विकिरण से है। (ii) एल्बीड्डो का मिलान (द) किसी वस्तु के द्वारा परावर्तित दृश्य प्रकाश का प्रतिशत से है। (iii) समताप रेखा का मिलान (ब) समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा से है। (iv) वार्षिक तापांतर का मिलान (अ) सबसे कोष्ण और सबसे शीत महीनों के माध्य तापमान का अंतर से है।

मुख्य बिंदु:

• सूर्यातप (Insolation) पृथ्वी पर प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा है।
• एल्बीड्डो (Albedo) सतह की परावर्तन क्षमता को दर्शाता है, विशेषकर बर्फ और बादलों का एल्बीड्डो उच्च होता है।
• समताप रेखा (Isotherm) मानचित्र पर तापमान के स्थानिक वितरण को दिखाने के लिए खींची जाती है।

आम गलतियाँ:

• सूर्यातप और पार्थिव विकिरण में अंतर न समझ पाना।
• एल्बीड्डो की परिभाषा में अवशोषण और परावर्तन में भ्रमित होना।
• तापांतर और सामान्य तापमान को एक ही मान लेना।

Exam Tips:

a) भूगोल के इन प्रमुख तकनीकी शब्दों (कौर शब्दावली) की परिभाषाएँ सीधे याद करें।
b) मिलान वाले प्रश्नों को हल करते समय जो शत-प्रतिशत सही हो, उसे पहले मिलाएँ।
c) एल्बीड्डो का मान 0 से 1 या प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है, इसे ध्यान रखें।

 

Question 5: (v) पृथ्वी के विषुवत वृत्तीय क्षेत्रों की अपेक्षा उत्तरी गोलार्ध के उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों का तापमान अधिकतम होता है, इसका मुख्य कारण है:
(क) विषुवत क्षेत्रीय क्षेत्रों की अपेक्षा उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में कम बादल होते हैं।
(ख) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में गर्मी के दिनों की लंबाई विषुवत क्षेत्रीय क्षेत्रों से ज्यादा होती है।
(ग) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में ग्रीन हाउस प्रभाव विषुवत क्षेत्रीय क्षेत्रों की अपेक्षा ज्यादा होता है।
(घ) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र विषुवत क्षेत्रीय क्षेत्रों की अपेक्षा महा सागरीय क्षेत्र के ज्यादा करीब हैं।

Answer:

सही उत्तर (ख) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में गर्मी के दिनों की लंबाई विषुवत क्षेत्रीय क्षेत्रों से ज्यादा होती है। विषुवत वृत्त पर दिन और रात की अवधि सालभर लगभग बराबर (12-12 घंटे) होती है, जबकि उत्तरी गोलार्ध के उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में ग्रीष्मकाल के दौरान दिन की अवधि काफी लंबी होती है, जिससे अधिक मात्रा में सूर्यातप प्राप्त होता है और तापमान अधिकतम हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• विषुवत वृत्त पर सूर्य की किरणें सालभर लगभग समान रूप से लंबवत् होती हैं लेकिन दिन बड़े नहीं होते।
• उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में गर्मियों में लंबे दिन मिलने से अधिक सौर ऊर्जा प्राप्त होती है।
• अक्षांशीय स्थिति और दिन की अवधि का तापमान पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

आम गलतियाँ:

• विषुवत रेखा पर सबसे अधिक तापमान होने की गलत धारणा रखना।
• बादलों की स्थिति को एकमात्र कारण मान लेना।
• ग्रीष्मकाल में दिन की लंबाई के महत्व को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) याद रखें कि सर्वाधिक तापमान हमेशा विषुवत रेखा पर नहीं, बल्कि उपोष्ण कटिबंधीय मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाया जाता है।
b) तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों को सूचीबद्ध करें।
c) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सबसे सटीक तार्किक विकल्प का चयन करें।

 

Question 6: (i) पृथ्वी का तापमान का असमान वितरण किस प्रकार जलवायु और मौसम को प्रभावित करता है?

Answer:

तापमान का असमान वितरण मौसम और जलवायु को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। जिस क्षेत्र में तापमान अधिक होता है उस क्षेत्र में हवाएँ गर्म होकर हल्की हो जाती हैं और ऊपर उठती हैं, जिससे कम वायुदाब का क्षेत्र बनता है। इसके विपरीत, ठंडे क्षेत्रों में हवा ठंडी और भारी होने के कारण नीचे बैठती है जिससे उच्च वायुदाब बनता है। हवाएँ हमेशा उच्च वायुदाब से कम वायुदाब की ओर चलती हैं, जिससे पवनों की दिशा और वायुमंडलीय परिसंचरण तय होता है। यह पवनों का चलना वर्षा, आद्रता और तापमान के वितरण को नियंत्रित करता है, जो अंततः किसी स्थान की जलवायु का निर्धारण करता है।

मुख्य बिंदु:

• तापमान में भिन्नता के कारण वायुदाब में अंतर उत्पन्न होता है।
• वायुदाब की यह भिन्नता पवनों की उत्पत्ति और उनकी दिशा तय करती है।
• पवनों का परिसंचरण वर्षा और मौसम की दशाओं को पूरी तरह प्रभावित करता है।

आम गलतियाँ:

• तापमान और वायुदाब के संबंध (व्युत्क्रमानुपाती संबंध) को गलत लिखना।
• मौसम और जलवायु में अंतर स्पष्ट किए बिना उत्तर देना।
• पवनों के चलने की दिशा को स्पष्ट न कर पाना।

Exam Tips:

a) तापमान, वायुदाब और पवन की गति के इस चक्र को क्रमबद्ध तरीके से समझाएँ।
b) उत्तर लिखते समय भौगोलिक शब्दावली जैसे 'उच्च वायुदाब' और 'निम्न वायुदाब' का प्रयोग अवश्य करें।
c) संक्षिप्त उत्तर में भी कारण और प्रभाव (Cause and Effect) का संबंध स्पष्ट दिखना चाहिए।

 

Question 7: (ii) वे कौन से कारक हैं, जो पृथ्वी पर तापमान के वितरण को प्रभावित करते हैं?

Answer:

पृथ्वी पर तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक अक्षांश, तुंगता (ऊंचाई), समुद्र से दूरी, प्रचलित पवनें और महासागरीय धाराएँ हैं। अक्षांश के अनुसार सूर्य की किरणों का कोण बदलता है जिससे सूर्यातप की मात्रा भिन्न होती है। ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान घटता है (सामान्य ह्रास दर)। समुद्र के समकारी प्रभाव के कारण तटीय क्षेत्रों में तापमान मध्यम रहता है जबकि महाद्वीपों के आंतरिक भागों में अत्यधिक तापांतर पाया जाता है। इसके अलावा, गर्म या ठंडी महासागरीय धाराएँ और पवनें भी स्थानीय तापमान को बढ़ा या घटा देती हैं।

मुख्य बिंदु:

• अक्षांश और तुंगता तापमान वितरण को नियंत्रित करने वाले सबसे बड़े भौगोलिक कारक हैं।
• समुद्र से दूरी तटीय और महाद्वीपीय जलवायु में अंतर पैदा करती है।
• महासागरीय धाराएँ और पवनें तटीय क्षेत्रों के तापमान को सीधे प्रभावित करती हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल अक्षांश को तापमान का एकमात्र कारक मान लेना।
• तुंगता (ऊंचाई) और अक्षांश के प्रभाव में अंतर न कर पाना।
• महासागरीय धाराओं के प्रभाव को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) तापमान को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम बिंदुओं में लिखकर संक्षिप्त विवरण दें।
b) 'सामान्य ह्रास दर' (Normal Lapse Rate) का उल्लेख करना न भूलें।
c) हर कारक का एक छोटा उदाहरण (जैसे पर्वतों पर ठंडक) दें।

 

Question 8: (iii) भारत में मई में तापमान सर्वाधिक होता है, लेकिन उत्तर अयनांत के बाद तापमान अधिकतम नहीं होता? क्यों?

Answer:

भारत में मई के अंत और जून के प्रारंभ में तापमान सर्वाधिक होने का मुख्य कारण सूर्य का उत्तरायण होना और इस दौरान मानसून की वर्षा का विलंब होना है। 21 जून को उत्तर अयनांत (कर्क रेखा पर सूर्य का लंबवत् होना) होता है, लेकिन मई के अंत में आसमान साफ रहता है और मानसून आने से पहले तीव्र सूर्यातप मिलता है। जून के मध्य या अंत तक देश के अधिकांश भागों में मानसूनी वर्षा शुरू हो जाती है, जिससे बादलों के छा जाने और वर्षा होने के कारण तापमान में गिरावट आ जाती है, यही कारण है कि उत्तर अयनांत (21 जून) के तुरंत बाद अधिकतम तापमान दर्ज नहीं किया जाता।

मुख्य बिंदु:

• मई के महीने में आसमान साफ होने के कारण तीव्र सूर्यातप प्राप्त होता है।
• जून के अंत तक मानसूनी हवाएँ और वर्षा आ जाती हैं जो तापमान को कम कर देती हैं।
• सूर्य की स्थिति और वर्षा ऋतु के आगमन का यह एक विशिष्ट भौगोलिक संयोजन है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि 21 जून को सबसे अधिक गर्मी होनी चाहिए क्योंकि उस दिन सबसे बड़ा दिन होता है।
• मानसून के प्रभाव को अनदेखा करना।
• सूर्य के उत्तरायण होने की प्रक्रिया को गलत समझना।

Exam Tips:

a) भारतीय जलवायु की इस अनूठी विशेषता को कारणों सहित स्पष्ट करें।
b) 'मेघ आवरण' और 'वर्षा' के तापमान पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करें।
c) उत्तर को तार्किक और बिंदुवार स्पष्ट रखें।

 

Question 9: (iv) साइबेरिया के मैदान में वार्षिक तापांतर सर्वाधिक होता है? क्यों?

Answer:

साइबेरिया के मैदान में वार्षिक तापांतर सर्वाधिक होने का मुख्य कारण उसका महाद्वीपीय स्थिति में होना है। यह क्षेत्र समुद्र के प्रभाव से बहुत दूर आंतरिक भाग में स्थित है, जहाँ महाद्वीपीय जलवायु पाई जाती है। यहाँ शीतकाल अत्यधिक ठंडा (तापमान माइनस 48 डिग्री सेल्सियस तक) और ग्रीष्मकाल गर्म (तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक) होता है, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ का वार्षिक तापांतर लगभग 68 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है जो कि बहुत अधिक है। इसके अलावा, यहाँ की उत्तरमुखी ढाल और उच्च अक्षांश भी इस अत्यधिक तापांतर में योगदान करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• महाद्वीपीयता (समुद्र से अधिक दूरी) के कारण चरम मौसम की दशाएँ पाई जाती हैं।
• शीतकाल में अत्यधिक ठंड और ग्रीष्मकाल में तीव्र सूर्यातप मिलता है।
• उच्च अक्षांशों पर सूर्य की किरणों के कोण में मौसमी अंतर बहुत अधिक होता है।

आम गलतियाँ:

• तापांतर और औसत तापमान के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• महासागरीय प्रभाव और महाद्वीपीय प्रभाव की अवधारणा में भ्रमित होना।
• तापमान के आंकड़े गलत लिख देना।

Exam Tips:

a) 'महाद्वीपीय जलवायु' (Continental Climate) शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
b) तापांतर की गणना (सबसे गर्म महीना - सबसे ठंडा महीना) के संदर्भ में समझाएँ।
c) अत्यधिक तापमान अंतर के पीछे के भौगोलिक कारणों को स्पष्ट रखें।

 

Question 10: (i) आक्षांश और पृथ्वी के अक्ष का झुकाव किस प्रकार पृथ्वी की सतह पर प्राप्त होने वाली विकिरण की मात्रा को प्रभावित करते हैं?

Answer:

पृथ्वी अपने अक्ष पर 66.5° का कोण बनाते हुए झुकी हुई है और यह अपने कक्षीय तल पर सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है। इस झुकाव और अक्षांशों के कारण वर्ष भर सूर्य की किरणों का कोण बदलता रहता है। विषुवत वृत्त पर सूर्य की किरणें सालभर लगभग लंबवत् पड़ती हैं, जिससे वहाँ निरंतर अधिक सूर्यातप प्राप्त होता है। इसके विपरीत, उच्च अक्षांशों (ध्रुवों की ओर) पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं, जिससे किरणें अधिक क्षेत्र में फैल जाती हैं और वायुमंडल की अधिक मोटाई पार करने के कारण ऊर्जा का ह्रास होता है। पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के कारण ही ऋतुएँ बदलती हैं और अलग-अलग अक्षांशों पर वर्ष के अलग-अलग समय में प्राप्त होने वाली विकिरण की मात्रा में परिवर्तन होता है।

मुख्य बिंदु:

• पृथ्वी का अक्षीय झुकाव 23.5° (कक्षा तल से 66.5°) ऋतु परिवर्तन और सूर्यातप की भिन्नता का मुख्य कारण है।
• तिरछी किरणें अधिक क्षेत्रफल पर फैलती हैं और कम ऊर्जा प्रदान करती हैं।
• लंबवत् किरणें कम क्षेत्रफल पर केंद्रित होकर अधिक तीव्र ऊष्मा देती हैं।

आम गलतियाँ:

• अक्षीय झुकाव और परिक्रमण के संयुक्त प्रभाव को ठीक से न समझा पाना।
• तिरछी और सीधी किरणों के प्रभाव के अंतर को स्पष्ट न करना।
• अक्षांश और सूर्यातप के संबंध को गलत लिखना।

Exam Tips:

a) इस दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में आरेख या स्पष्ट चरणों का वर्णन करें।
b) 'सूर्य की किरणों का कोण' और 'वायुमंडल की मोटाई' जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।
c) उत्तर को ऋतु परिवर्तन (उत्तरायण और दक्षिणायन) के संदर्भ में समाप्त करें।

 

Question 11: (ii) उन प्रक्रियाओं की व्याख्या करें, जिनके द्वारा पृथ्वी तथा इसका वायुमंडल ऊष्मा संतुलन बनाए रखते हैं।

Answer:

पृथ्वी और उसका वायुमंडल 'ऊष्मा संतुलन' (Heat Budget) के माध्यम से अपनी ऊर्जा का संतुलन बनाए रखते हैं। इसका अर्थ यह है कि पृथ्वी को सूर्य से जितनी ऊष्मा (सूर्यातप के रूप में 100 इकाइयाँ) प्राप्त होती है, उतनी ही मात्रा में ऊष्मा अंतरिक्ष में वापस लौटा दी जाती है (पार्थिव विकिरण के रूप में)। अंतरिक्ष में आने वाली कुल ऊर्जा का लगभग 35 इकाइयाँ भाग पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से पहले ही बादलों, परावर्तन और अंतरिक्ष में प्रकीर्णन द्वारा वापस अंतरिक्ष में लौट जाता है (इसे पृथ्वी का एल्बीड्डो कहते हैं)। शेष 65 इकाइयाँ अवशोषित होती हैं, जिनमें से 14 इकाइयाँ वायुमंडल द्वारा और 51 इकाइयाँ पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित की जाती हैं। पृथ्वी अपनी अवशोषित 51 इकाइयों को लंबी तरंगों के रूप में अंतरिक्ष में वापस भेज देती है, जिससे ऊष्मा का यह संतुलन हमेशा बना रहता है और पृथ्वी न तो अत्यधिक गर्म होती है और न ही अत्यधिक ठंडी।

मुख्य बिंदु:

• पृथ्वी और वायुमंडल का कुल ऊष्मा बजट हमेशा 100% (संतुलित) रहता है।
• एल्बीड्डो के माध्यम से लगभग 35 इकाइयाँ अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाती हैं।
• पार्थिव विकिरण द्वारा पृथ्वी अपनी प्राप्त ऊर्जा को वापस अंतरिक्ष में उत्सर्जित कर देती है।

आम गलतियाँ:

• ऊष्मा बजट की इकाइयों (प्रतिशत) के आंकड़े गलत लिख देना।
• परावर्तन और अवशोषण की प्रक्रियाओं में अंतर न कर पाना।
• वायुमंडल और पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित ऊर्जा का अलग-अलग उल्लेख न करना.

Exam Tips:

a) ऊष्मा संतुलन को स्पष्ट करने के लिए 100 इकाइयों के मानक आँकड़ों (35 परावर्तन, 14 वायुमंडल द्वारा अवशोषण, 51 सतह द्वारा अवशोषण) का उपयोग करें।
b) यह भूगोल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बार-बार पूछा जाने वाला प्रश्न है, इसलिए इसके आरेख या चरणों का अभ्यास करें।
c) संतुलन शब्द का अर्थ स्पष्ट करें कि प्राप्ति और वापसी की मात्रा समान होती है।

 

Question 12: (iii) जनवरी में पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के बीच तापमान के विश्वव्यापी वितरण की तुलना करें।

Answer:

जनवरी के महीने में उत्तरी गोलार्ध में शीत ऋतु और दक्षिणी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु होती है। इस समय सूर्य दक्षिण गोलार्ध में मकर रेखा पर लंबवत् चमकता है, जिससे दक्षिणी गोलार्ध में तापमान अधिक और उत्तरी गोलार्ध में तापमान बहुत कम होता है। उत्तरी गोलार्ध के महाद्वीपों में कड़ाके की ठंड पड़ती है (जैसे साइबेरिया में तापमान -32°C से भी नीचे चला जाता है), जबकि महासागरों पर तापमान अपेक्षाकृत थोड़ा अधिक होता है। इसके विपरीत, दक्षिणी गोलार्ध में ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के महाद्वीपीय भागों में तीव्र गर्मी होती है और तापमान 30°C से अधिक तक पहुँच जाता है। इस प्रकार जनवरी में उत्तरी गोलार्ध में समताप रेखाएँ महाद्वीपों पर दक्षिण की ओर और महासागरों पर उत्तर की ओर मुड़ जाती हैं, जो तापमान के असमान वितरण को दर्शाती हैं।

मुख्य बिंदु:

• जनवरी में सूर्य दक्षिणायن होता है जिससे दक्षिणी गोलार्ध में ग्रीष्म और उत्तरी में शीत ऋतु होती है।
• उत्तरी गोलार्ध के महाद्वीपों में अत्यधिक ठंड और न्यूनतम तापमान दर्ज किया जाता है।
• दक्षिणी गोलार्ध के स्थलीय भागों में इस समय उच्च तापमान पाया जाता है।

आम गलतियाँ:

• गोलार्धों की ऋतुओं को आपस में मिला देना।
• महाद्वीपों और महासागरों पर समताप रेखाओं के मोड़ने की दिशा को गलत लिखना।
• तापमान के विशिष्ट उदाहरण (जैसे साइबेरिया या दक्षिणी गोलार्ध के देश) न देना।

Exam Tips:

a) तुलनात्मक उत्तर लिखते समय दोनों गोलार्धों (उत्तरी और दक्षिणी) की अलग-अलग हेडिंग या स्पष्ट अंतर दें।
b) जनवरी और जुलाई के तापमान मानचित्रों के पैटर्न को समझकर उत्तर दें।
c) महाद्वीपीय और महासागरीय प्रभावों का स्पष्ट उल्लेख करें।

 

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