Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Biology Chapter 17 गमन एवं संचलन
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Question 1: कंकाल पेशी के एक साकोमियर का चित्र बनाएं और विभिन्न भागों को चिह्नित करें।
Answer:
आकृति का विवरण: साकोमियर (Sarcomere) कंकाल पेशी की संकुचनशील इकाई का नामांकित आरेख है जिसमें दो क्रमिक Z-रेखाओं के बीच A-बैंड, I-बैंड, H-क्षेत्र और मायोसिन तथा एक्टिन तंतुओं की व्यवस्था प्रदर्शित की गई है।
कंकाल पेशी का प्रत्येक रेखित पेशी रेशा कई समानांतर तंतुओं से बना होता है जिन्हें मायोफिब्रिल (Myofibril) कहते हैं। प्रत्येक मायोफिब्रिल में हल्के और गहरे रंग के एकांतर पट्ट या बैंड होते हैं। दो क्रमिक Z-रेखाओं (Z-lines) के बीच के मायोफिब्रिल के भाग को साकोमियर कहा जाता है, जो संकुचन की कार्यात्मक इकाई है। साकोमियर के मध्य में एक घना A-बैंड होता है जिसमें मायोसिन तंतु होते हैं, तथा इसके दोनों सिरों पर I-बैंड होते हैं जिनमें एक्टिन तंतु होते हैं। A-बैंड के मध्य भाग में हल्का H-क्षेत्र होता है, जहाँ एक्टिन तंतु अतिव्यापित नहीं होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• साकोमियर दो क्रमिक Z-रेखाओं के बीच का भाग होता है जो पेशी संकुचन की मूल इकाई है।
• A-बैंड में मोटे मायोसिन तंतु होते हैं और I-बैंड में पतले एक्टिन तंतु होते हैं।
• H-क्षेत्र A-बैंड का केंद्रीय भाग है जहाँ केवल मायोसिन तंतु होते हैं।
आम गलतियाँ:
• Z-रेखा और M-रेखा की स्थिति को आपस में मिला देना।
• A-बैंड और I-बैंड में मौजूद तंतुओं (एक्टिन व मायोसिन) के नाम उल्टे लिखना।
• साकोमियर की परिभाषा में Z-रेखाओं का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) साकोमियर का नामांकित चित्र बनाते समय Z-रेखा, A-बैंड, I-बैंड और H-क्षेत्र को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
b) याद रखें कि A-बैंड एनिसोट्रॉपिक (असमदैशिक) और I-बैंड आइसोट्रॉपिक (समदैशिक) होता है।
c) चित्र अभ्यास से परीक्षा में अच्छे अंक मिलते हैं क्योंकि यह संरचनात्मक प्रश्न है।
Question 2: पेशी संकुचन के सर्पी तंतु सिद्धांत को परिभाषित करें।
Answer:
पेशी संकुचन का सर्पी तंतु सिद्धांत (Sliding Filament Theory) यह बताता है कि कंकाल पेशियों का संकुचन कैसे होता है। इस सिद्धांत के अनुसार, पेशी का संकुचन पतले एक्टिन तंतुओं (Actin filaments) के मोटे मायोसिन तंतुओं (Myosin filaments) के ऊपर फिसलने (sliding) के कारण होता है। जब तंत्रिका तंत्र से उद्दीपन प्राप्त होता है, तो मायोसिन सिर एक्टिन तंतुओं से जुड़कर क्रॉस-ब्रिज (Cross-bridge) बनाते हैं। इसके बाद ATP से ऊर्जा प्राप्त करके मायोसिन सिर एक्टिन तंतुओं को अपनी ओर खींचते हैं, जिससे साकोमियर छोटा हो जाता है। इस प्रक्रिया में A-बैंड की लंबाई में कोई परिवर्तन नहीं होता, लेकिन I-बैंड छोटा हो जाता है और H-क्षेत्र गायब हो जाता है।
मुख्य बिंदु:
• संकुचन के दौरान पतले एक्टिन तंतु मोटे मायोसिन तंतुओं के ऊपर फिसलते हैं।
• A-बैंड की लंबाई स्थिर रहती है जबकि I-बैंड छोटा हो जाता है और H-क्षेत्र लुप्त हो जाता है।
• इस प्रक्रिया में ऊर्जा ATP के जल अपघटन (hydrolysis) से प्राप्त होती है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि संकुचन के दौरान मायोसिन तंतु भी अपनी जगह से खिसकते हैं।
• यह भ्रम होना कि A-बैंड की लंबाई भी कम हो जाती है।
• क्रॉस-ब्रिज निर्माण में कैल्शियम आयनों और ATP की भूमिका को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) सिद्धांत का नाम लिखते समय 'सर्पी तंतु सिद्धांत' या 'Sliding Filament Theory' स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
b) संकुचन के दौरान बैंड्स (A और I) पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन जरूर करें।
c) यह दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के रूप में पूछा जा सकता है, इसलिए चरणों को क्रमित रूप से याद रखें।
Question 3: पेशी संकुचन के प्रमुख चरणों का वर्णन करें।
Answer:
कंकाल पेशी के संकुचन की प्रक्रिया एक क्रमिक और चक्रीय प्रक्रिया है जो निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है: प्रथम चरण में, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से एक मोटर तंत्रिका के माध्यम से संकेत पेशी तंतु की सार्कोलेमा तक पहुँचता है, जिससे एसिटाइलकोलीन मुक्त होता है और सार्कोप्लाज्म में क्रिया विभव उत्पन्न होता है। दूसरे चरण में, यह क्रिया विभव सार्कोप्लाज्मिक reticulum से कैल्शियम आयनों (Ca⁺⁺) को सार्कोप्लाज्म में मुक्त करता है। तीसरे चरण में, कैल्शियम आयन एक्टिन तंतु पर स्थित ट्रोपोनिन से बंध जाते हैं, जिससे ट्रोपोसिन हट जाता है और मायोसिन के जुड़ने के लिए सक्रिय साइट उजागर हो जाती है। चौथे चरण में, मायोसिन सिर ATP के उपयोग से एक्टिन से जुड़कर क्रॉस-ब्रिज बनाता है। पाँचवें चरण में, मायोसिन सिर एक्टिन तंतु को खींचता है जिससे ADP और अकार्बनिक फॉस्फेट मुक्त होते हैं। छठे चरण में, नया ATP जुड़ने पर क्रॉस-ब्रिज टूट जाता है और प्रक्रिया दोहराई जाती है, जिससे पेशी छोटी होती है।
मुख्य बिंदु:
• संकुचन की शुरुआत मोटर न्यूरॉन से आने वाले संकेत और एसीटाइलकोलीन के स्राव से होती है।
• कैल्शियम आयन ट्रोपोनिन से जुड़कर मायोसिन बाइंडिंग साइट को खोलते हैं।
• ATP का उपयोग क्रॉस-ब्रिज के बनने और टूटने दोनों चरणों में होता है।
आम गलतियाँ:
• चरणों के क्रम को उलट-पुलट कर लिखना।
• कैल्शियम आयनों की मुख्य भूमिका (ट्रोपोनिन से जुड़ना) को भूल जाना।
• ATP और ADP की मुक्ति के समय को गलत दर्शाना।
Exam Tips:
a) सभी चरणों को संख्या (चरण 1 से चरण 6) के रूप में क्रमानुसार लिखें।
b) कैल्शियम आयन और ATP के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित करें।
c) यह शारीरिक क्रिया विज्ञान का महत्वपूर्ण प्रश्न है, इसे आरेख के साथ समझकर याद करें।
Question 4: 'सही' या 'गलत' लिखें:
(क) एक्टिन पतले तंतु में स्थित होता है।
(ख) रेखित पेशियों का H-क्षेत्र मोटे और पतले, दोनों तंतुओं को प्रदर्शित करता है।
(ग) मानव कंकाल में 206 अस्थियाँ होती हैं।
(घ) मनुष्य में 11 जोड़ी पसलियाँ होती हैं।
(ङ) उरोस्थि शरीर के अधर भाग में स्थित होती है।
Answer:
(क) सही - एक्टिन तंतु पतले तंतु होते हैं जो I-बैंड बनाते हैं।
(ख) गलत - H-क्षेत्र केवल मोटे मायोसिन तंतुओं को प्रदर्शित करता है, वहाँ पतले तंतु नहीं होते।
(ग) सही - एक वयस्क मानव कंकाल में कुल 206 हड्डियाँ होती हैं।
(घ) गलत - मनुष्य में 12 जोड़ी (कुल 24) पसलियाँ होती हैं, 11 जोड़ी नहीं।
(ङ) सही - उरोस्थि (Sternum) छाती के अधर (ventral) भाग में मध्य में स्थित होती है।
मुख्य बिंदु:
• एक्टिन पतले तंतु हैं और मायोसिन मोटे तंतु हैं।
• पसलियों की कुल संख्या 12 जोड़ी (24) होती है।
• उरोस्थि वक्षीय पिंजर के अधर भाग की चपटी अस्थि है।
आम गलतियाँ:
• पसलियों की संख्या 11 जोड़ी लिखना (जो कि गलत है, सही संख्या 12 है)।
• H-क्षेत्र में पतले तंतुओं की उपस्थिति मान लेना।
• अधर और पृष्ठीय भागों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) सत्य/असत्य प्रश्नों के उत्तर देने से पहले कथन को ध्यानपूर्वक पूरा पढ़ें।
b) संख्यात्मक तथ्य जैसे पसलियों की संख्या (12 जोड़ी) और हड्डियों की संख्या (206) कंठस्थ रखें।
c) शरीर के शरीर-रचना संबंधी स्थान (अधर बनाम पृष्ठीय) को स्पष्ट समझें।
Question 5: इनके बीच अंतर बताएं:
(क) एक्टिन और मायोसिन
(ख) लाल और श्वेत पेशियाँ
(ग) अंश एवं श्रोणि मेखला
Answer:
(क) एक्टिन और मायोसिन में अंतर: एक्टिन एक पतला संकुचित प्रोटीन है जो I-बैंड में मौजूद होता है और हल्के रंग का दिखता है, जबकि मायोसिन एक घना संकुचित प्रोटीन है जो A-बैंड में मौजूद होता है और गहरे रंग का दिखता है।
(ख) लाल और श्वेत पेशियों में अंतर: लाल पेशियों में मायोग्लोबिन की मात्रा अधिक होती है और माइटोकॉन्ड्रिया बहुतायत में होते हैं जिससे वे एरोबिक श्वसन द्वारा लंबे समय तक कार्य करती हैं, जबकि श्वेत पेशियों में मायोग्लोबिन और माइटोकॉन्ड्रिया कम होते हैं और वे एनएरोबिक श्वसन द्वारा कम समय के लिए तेजी से संकुचित होती हैं।
(ग) अंश एवं श्रोणि मेखला में अंतर: अंश मेखला (Pectoral girdle) ऊपरी अंगों को अक्षीय कंकाल से जोड़ती है जिसमें प्रत्येक अर्धांश में क्लेविकल और स्कैपुलस होते हैं, जबकि श्रोणि मेखला (Pelvic girdle) निचले अंगों को जोड़ती है जो तीन संलयित अस्थियों (इलियम, इश्चियम और प्यूबिस) से बनी होती है।
मुख्य बिंदु:
• एक्टिन पतला व हल्का बैंड बनाता है; मायोसिन मोटा व गहरा बैंड बनाता है।
• लाल पेशियों में मायोग्लोबिन अधिक होने से रंग लाल होता है और सहनशक्ति अधिक होती है।
• अंश मेखला कंधे का निर्माण करती है और श्रोणि मेखला कूल्हे का निर्माण करती है।
आम गलतियाँ:
• लाल और श्वेत पेशियों के मायोग्लोबिन स्तर को आपस में मिला देना।
• अंश मेखला और श्रोणि मेखला की अस्थियों के नाम गलत लिख देना।
• एक्टिन और मायोसिन के बैंड (I और A) की स्थिति को उल्टे बताना।
Exam Tips:
a) अंतर स्पष्ट करते समय हमेशा तालिका (Table) बनाकर तुलना करें ताकि उत्तर स्पष्ट लगे।
b) मुख्य अंतरों जैसे मायोग्लोबिन, माइटोकॉन्ड्रिया और स्थिति को अवश्य शामिल करें।
c) जीव विज्ञान में तुलनात्मक प्रश्न अक्सर परीक्षा में आते हैं, अतः इन्हें बिंदुवार याद करें।
Question 6: स्तंभ I का स्तंभ II से मिलान करें:
स्तंभ I
(i) चिकनी पेशी
(ii) ट्रोपोमायोसिन
(iii) लाल पेशी
(iv) कपाल
स्तंभ II
(क) मायोग्लोबिन
(ख) पतले तंतु
(ग) सीवन (suture)
(घ) अनैच्छिक
Answer:
सही मिलान इस प्रकार है:
(i) चिकनी पेशी - (घ) अनैच्छिक
(ii) ट्रोपोमायोसिन - (ख) पतले तंतु
(iii) लाल पेशी - (क) मायोग्लोबिन
(iv) कपाल - (ग) सीवन (suture)
मुख्य बिंदु:
• चिकनी पेशियाँ अनैच्छिक प्रकृति की होती हैं जो आंतरिक अंगों की दीवारों में पाई जाती हैं।
• ट्रोपोमायोसिन और ट्रोपोनिन एक्टिन (पतले) तंतुओं के घटक हैं।
• कपाल की हड्डियाँ रेशेदार जोड़ों द्वारा आपस में जुड़ी होती हैं जिन्हें सीवन (suture) कहते हैं।
आम गलतियाँ:
• कपाल की संधियों को कंदुक-खलिका जोड़ समझ लेना।
• ट्रोपोमायोसिन को मायोसिन (मोटे) तंतु से जोड़ देना।
• चिकनी पेशियों को ऐच्छिक मान लेना।
Exam Tips:
a) मिलान करते समय दोनों स्तंभों को ध्यान से पढ़ें और निश्चित उत्तरों को पहले हल करें।
b) कपाल की संधियाँ (Sutures) अचल संधियों का उदाहरण हैं, इसे याद रखें।
c) पेशियों के प्रकार और उनके नियंत्रण (ऐच्छिक/अनेच्छिक) को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 7: मानव शरीर की कोशिकाओं द्वारा प्रदर्शित विभिन्न गतियाँ कौन सी हैं?
Answer:
मानव शरीर की विभिन्न कोशिकाएँ आवश्यकतानुसार विभिन्न प्रकार की गतियाँ प्रदर्शित करती हैं। मुख्य गतियाँ निम्नलिखित हैं: (1) अमीबीय संचलन (Amoeboid movement): रक्त में मौजूद ल्यूकोसाइट्स (श्वेत रक्त कोशिकाएं) और मैक्रोफेज अमीबा की तरह कूटपाद (pseudopodia) बनाकर गति करते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में सहायक है। (2) सिलिअरी मूवमेंट (Ciliary movement): आंतरिक नलिकाओं जैसे श्वास नली और फैलोपियन ट्यूब के स्तर पर मौजूद पक्षाभ (cilia) की गति से पदार्थों या युग्मकों का परिवहन होता है। (3) पेशीय गति (Muscular movement): कंकाल पेशियों, हृदय पेशियों और आंत की पेशियों के संकुचन व शिथिलन द्वारा अंगों और पूरे शरीर की गति संभव होती है।
मुख्य बिंदु:
• शरीर की कोशिकाएँ मुख्य रूप से अमीबीय, सिलिअरी और पेशीय गतियाँ प्रदर्शित करती हैं।
• अमीबीय गति डब्ल्यूबीसी द्वारा कूटपाद के माध्यम से होती है।
• सिलिअरी गति श्वास नली और जनन मार्ग में पदार्थों को आगे बढ़ाने का कार्य करती है।
आम गलतियाँ:
• केवल पेशीय गति को ही शरीर की एकमात्र गति मान लेना।
• अमीबीय और सिलिअरी गतियों के शारीरिक स्थानों (जैसे फैलोपियन ट्यूब या रक्त) को भूल जाना।
• पक्षाभ (Cilia) और कूटपाद (Pseudopodia) की संरचना में अंतर न समझ पाना।
Exam Tips:
a) गतियों के तीनों प्रकारों के नाम लिखकर उनके एक-एक उदाहरण अवश्य दें।
b) श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) में अमीबीय गति का उदाहरण सबसे महत्वपूर्ण है।
c) यह प्रश्न संक्षिप्त उत्तर या अंतर के रूप में पूछा जा सकता है।
Question 8: आप किस प्रकार से एक कंकाल पेशी और हृदय पेशी में विभेद करेंगे?
Answer:
कंकाल पेशी और हृदय पेशी दोनों रेखित पेशियाँ हैं, किंतु उनकी संरचना और कार्य में अंतर होता है। कंकाल पेशियाँ अनशाखित (unbranched) होती हैं, ऐच्छिक होती हैं, और उनमें इंटरकेलेटेड डिस्क (Intercalated discs) अनुपस्थित होती हैं। ये मुख्य रूप से शरीर के अस्थियों से जुड़ी होती हैं और तेजी से थक जाती हैं। इसके विपरीत, हृदय पेशियाँ (Cardiac muscles) साखित (branched) होती हैं, अनैच्छिक होती हैं, और उनमें इंटरकेलेटेड डिस्क पाई जाती हैं जो हृदय की धड़कन के समन्वय में मदद करती हैं। हृदय पेशियाँ जीवनभर बिना थके निरंतर लयबद्ध रूप से संकुचित होती रहती हैं।
मुख्य बिंदु:
• कंकाल पेशियाँ ऐच्छिक और अनशाखित होती हैं; हृदय पेशियाँ अनैच्छिक और साखित होती हैं।
• हृदय पेशियों में विशिष्ट संरचना 'इंटरकेलेटेड डिस्क' पाई जाती है जो कंकाल पेशियों में नहीं होती।
• कंकाल पेशियाँ थक जाती हैं जबकि हृदय पेशियाँ जीवनभर बिना थके काम करती हैं।
आम गलतियाँ:
• दोनों को रेखित होने के कारण एक ही मान लेना।
• इंटरकेलेटेड डिस्क की उपस्थिति को कंकाल पेशी में दर्शा देना।
• पेशियों के नियंत्रण (ऐच्छिक बनाम अनैच्छिक) को भ्रमित करना।
Exam Tips:
a) दोनों पेशियों में अंतर को तालिका बनाकर (शाखन, नियंत्रण, डिस्क, थकान) दर्शाएँ।
b) 'इंटरकेलेटेड डिस्क' हृदय पेशी का मुख्य पहचान बिंदु है, इसे अवश्य लिखें।
c) यह एक अति महत्वपूर्ण तुलनात्मक प्रश्न है जो परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
Question 9: निम्नलिखित जोड़ों के प्रकार बताएं:
(क) एटलस/अक्ष (एक्सिस)
(ङ) अंगूठे का कार्पल/मेटाकार्पल
(ग) फैलैंज के बीच
(घ) फीमर/एसिटाबुलम
(च) कपाल हड्डियों के बीच
(छ) श्रोणि मेखला की प्यूबिक अस्थियों के बीच
Answer:
(क) एटलस/अक्ष (एक्सिस) - निर्णयाक जोड़ (Pivot joint)
(ख) अंगूठे का कार्पल/मेटाकार्पल - सैडल संयुक्त (Saddle joint)
(ग) फैलैंज के बीच - हिंग संयुक्त (Hinge joint)
(घ) फीमर/एसिटाबुलम - बॉल और सॉकेट संयुक्त (Ball and socket joint)
(ङ) कपाल हड्डियों के बीच - रेशेदार जोड़ या सीवन (Fibrous joint / Suture)
(च) श्रोणि मेखला की प्यूबिक अस्थियों के बीच - उपास्थिल जोड़ (Cartilaginous joint / Symphysis)
मुख्य बिंदु:
• एटलस और एक्सिस के बीच की संधि गर्दन को घुमाने के लिए धुराग्र (Pivot) संधि होती है।
• कंधे और कूल्हे में बॉल और सॉकेट जोड़ होते हैं जो बहुदिशीय गति देते हैं।
• कपाल की हड्डियाँ अचल रेशेदार संधियों द्वारा जुड़ी होती हैं।
आम गलतियाँ:
• अंगूठे के जोड़ को साधारण हिंग जोड़ समझ लेना (जबकि यह सैडल जोड़ है)।
• प्यूबिक सिंफाइसिस को चल जोड़ मान लेना।
• कंदुक-खलिका (Ball and socket) और धुराग्र (Pivot) जोड़ों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) मानव शरीर के सभी प्रमुख जोड़ों और उनके उदाहरणों की सूची याद रखें।
b) जोड़ों के अंग्रेजी और हिंदी दोनों नाम (जैसे Hinge joint = हिंज संधि) ध्यान में रखें।
c) यह बहुविकल्पीय या मिलान वाले प्रश्नों में बहुत पूछा जाता है।
Question 10: रिक्त स्थानों में उचित शब्दों को भरें:
(क) सभी स्तनधारियों (कुछ को छोड़कर) में सात ग्रीवा कशेरु क होते हैं।
(ख) प्रत्येक मानव पाद में फैलैंज की संख्या 14 होती है।
(ग) मायोफिब्रिल के पतले तंतु में 2 'F' एक्टिन और दो अन्य प्रोटीन होते हैं, अर्थात् ट्रोपोनिन और ट्रोपोमायोसिन।
(घ) एक पेशी रेशे में, Ca⁺⁺ सार्कोप्लाज्मिक रेटिकुलम में संग्रहित होता है।
(ङ) 11वीं और 12वीं जोड़ी पसलियों को तैरती पसलियाँ कहते हैं।
(च) मनुष्य का कपाल आठ हड्डियों से बना होता है।
Answer:
(क) ग्रीवा (Cervical)
(ख) 14 (चौदह)
(ग) ट्रोपोनिन, ट्रोपोमायोसिन
(घ) सार्कोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Sarcoplasmic reticulum)
(ङ) तैरती (Floating)
(च) आठ (8)
मुख्य बिंदु:
• अधिकांश स्तनधारियों में ग्रीवा कशेरुकों की संख्या निश्चित रूप से 7 होती है।
• मानव हाथ या पैर दोनों में उंगलियों की हड्डियों (फैलैंज) की कुल संख्या 14 होती है।
• अंतिम दो जोड़ी पसलियाँ (11वीं और 12वीं) आगे से जुड़ी नहीं होतीं इसलिए उन्हें तैरती पसलियाँ कहते हैं।
आम गलतियाँ:
• कशेरुकों की कुल संख्या और ग्रीवा कशेरुकों की संख्या में भ्रमित होना।
• तैरती पसलियों के जोड़े 10वीं, 11वीं और 12वीं लिख देना (सही उत्तर केवल 11वीं और 12वीं है)।
• कपाल की हड्डियों की संख्या चेहरे की हड्डियों (14) के साथ मिला देना।
Exam Tips:
a) रिक्त स्थान भरते समय NCERT की मुख्य पंक्तियों (Key lines) को याद रखें।
b) हड्डियों की संख्या (कपाल = 8, चेहरे की = 14, फैलैंज = 14) के आँकड़े पक्के करें।
c) कैल्शियम संचय करने वाले अंग (सार्कोप्लाज्मिक रेटिकुलम) का नाम सही वर्तनी के साथ लिखें।
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NCERT Solutions for Class 11 Biology Chapter 17 गमन एवं संचलन
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