CBSE Class 10 Hindi A Question Paper 2025 Solved Code 3-1-2

Official CBSE Exam Papers for Class 10 Hindi A

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Solved Previous Year Papers for Hindi A

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खण्ड क

(अपठित बोध)

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्न : दिनकर जी ने माना है कि उन पर प्रारम्भ से ही जितना प्रभाव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रहा उतना ही मोहम्मद इक़बाल का। बाद में इलियट की काव्य-शैली और विचार-दृष्टि ने उनके कवि मानस को छूकर दूर भीतर तक उन्मथित कर दिया। दिनकर जी अपने युग के एक प्रमुख कवि ही नहीं, सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे। ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने के बाद अप्रैल 1974 में तिरुपति यात्रा के दौरान मद्रास में ही उनका निधन हो गया।

1.(i) [1 mark] निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : पुरस्कार प्राप्त कर मन अभिभूत हो जाता है।
कारण : पुरस्कार विद्वज्जनों द्वारा दी जाने वाली सराहना और सम्मान का प्रतीक है।
(A) कथन ग़लत है और कारण भी पूरी तरह ग़लत ही है।
(B) कथन सही है परंतु कारण आंशिक रूप से सही है।
(C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या भी है।
(D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं है।

उत्तर : (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या भी है।

Teacher's Note:
कथन-कारण वाले प्रश्नों में पहले दोनों को अलग-अलग सही/गलत जाँचें।
फिर देखें कि कारण, कथन की सही व्याख्या करता है या नहीं।

1.(ii) [1 mark] दिनकर जी के लेखन पर किन-किन कवियों का प्रभाव रहा है ?
I. इलियट
II. रवीन्द्रनाथ ठाकुर
III. मोहम्मद इक़बाल
IV. गंगाशरण सिंह
(A) I, III और IV
(B) I, II और III
(C) II, III और IV
(D) I, II और IV

उत्तर : (B) I, II और III (इलियट, रवीन्द्रनाथ ठाकुर और मोहम्मद इक़बाल का दिनकर जी पर प्रभाव पड़ा था)।

Teacher's Note:
गद्यांश में नाम आने के क्रम को ध्यान से देखें।
गंगाशरण सिंह उनके मित्र थे, प्रभाव डालने वाले कवि नहीं।

1.(iii) [1 mark] दिनकर जी के बारे में कौन-सा तथ्य असत्य है ?
(A) वे एक प्रमुख कवि थे परंतु असफल गद्य लेखक भी थे।
(B) उनकी शैली प्रांजल थी तथा वे साहित्यिक निबंध लिखते थे।
(C) ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके जीवन के अंतिम अध्याय का स्वर्णिम पन्ना है।
(D) बोधकथा, डायरी, संस्मरण के अतिरिक्त दिनकर जी ने इतिहास के विषय में भी लिखा है।

उत्तर : (A) वे एक प्रमुख कवि थे परंतु असफल गद्य लेखक भी थे - यह तथ्य असत्य है, क्योंकि दिनकर जी सफल और प्रभावपूर्ण गद्य लेखक भी थे।

Teacher's Note:
गद्यांश में सीधे लिखा है कि वे सफल गद्य लेखक थे, असफल नहीं।
ऐसे प्रश्नों में विपरीतार्थक शब्द पर ध्यान दें।

1.(iv) [2 marks] दिनकर जी की रचनाशीलता की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तर :

दिनकर जी को कविता और गद्य दोनों पर समान अधिकार प्राप्त था, वे केवल महत्त्वपूर्ण कवि ही नहीं बल्कि गद्य की विविध शैलियों में भी लिखते थे। उन्होंने निबंध, बोधकथा, डायरी-संस्मरण और ऐतिहासिक-दार्शनिक विवेचन जैसी कई विधाओं में लेखन किया और सीधी-सरल तथा प्रांजल भाषा का प्रयोग किया।

Teacher's Note:
उदाहरण के रूप में निबंध, डायरी, संस्मरण जैसे शब्दों का उल्लेख जरूर करें।
दो अलग-अलग बिंदु लिखना जरूरी है, एक ही बात को दोहराएँ नहीं।

1.(v) [2 marks] ज्ञानपीठ पुरस्कार का दिनकर जी के जीवन में क्या महत्त्व रहा ?

उत्तर :

ज्ञानपीठ पुरस्कार दिनकर जी के जीवन के अंतिम अध्याय का स्वर्णिम क्षण सिद्ध हुआ। साहित्य जगत द्वारा दी गई यह मान्यता उनके लिए अत्यंत हर्ष और संतोष का विषय थी, क्योंकि इससे उनकी रचनाओं को विद्वानों की प्रशंसा और सम्मान मिला, जिसे वे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते थे।

Teacher's Note:
'प्रशंसा और सम्मान' तथा 'गौरव का भाव' जैसे शब्द अवश्य प्रयोग करें।
गद्यांश के अंतिम भाग से सीधे बिंदु उठाकर लिखें।

निम्नलिखित काव्यांश पर आधारित प्रश्न : संध्या ने मेघों के कितने चित्र बनाये - हाथी, घोड़े, पेड़, आदमी, जंगल, क्या-क्या नहीं रच दिया और कभी रंगों से क्रीड़ा की, आकृतियाँ नहीं बनायीं। जाते-जाते क्षितिज-पटी पर सूरज ने सोना बरसाया। छाया काली बढ़ने लगी, रंग धीरे-धीरे फिर बदले, पेंसिल के रेखा-चित्रों से बादल छाए। रात उतर आयी, दिखलायी दिये सितारे, पेड़, गाँव अस्पष्ट दिखे, मानव-दृग हारे।

2.(i) [1 mark] संध्या के आसमान के बारे में कवि का क्या कहना है ?
(A) आसमान को काले मेघों ने आच्छादित कर लिया है।
(B) चारों तरफ रंगों और आकृतियों की भीड़ है।
(C) आसमान में मेघों ने विभिन्न आकृतियाँ बनाईं।
(D) पशुओं की आकृतियों को बना उनमें रंग भरा।

उत्तर : (C) आसमान में मेघों ने विभिन्न आकृतियाँ बनाईं।

Teacher's Note:
काव्यांश की पहली पंक्तियों में ही उत्तर छिपा होता है।
हाथी, घोड़े, पेड़ आदि आकृतियों का उल्लेख ध्यान से पढ़ें।

2.(ii) [1 mark] क्षितिज-पटी का रूप बार-बार क्यों बदलता रहा ?
I. प्रकाश और छाया के बदलते स्वरूप के कारण
II. संध्या के सूर्य की बदलती रोशनी और रंगों के कारण
III. आसमान में बादलों से बनी हाथी, घोड़े, पेड़ आदि आकृतियों के कारण
(A) केवल I और II
(B) I, II और III सभी
(C) केवल II और III
(D) केवल I और III

उत्तर : (A) केवल I और II (प्रकाश-छाया के बदलते स्वरूप तथा सूर्य की बदलती रोशनी और रंगों के कारण)।

Teacher's Note:
आकृतियों का बनना रंग बदलने का कारण नहीं, बल्कि परिणाम है।
ऐसे प्रश्नों में कारण और परिणाम में अंतर समझें।

2.(iii) [1 mark] कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए :
कथन : आसमान में छाए बादलों को कवि ने पेंसिल से बनाए रेखा-चित्र कहा है।
कारण : उनमें डूबते सूर्य की लाली भर गई है।
(A) कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है।
(B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
(C) कथन सही है और कारण ग़लत है।
(D) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।

उत्तर : (C) कथन सही है और कारण ग़लत है, क्योंकि सूर्य ढल जाने के बाद बादल काले पड़ गए थे, उनमें लाली नहीं थी।

Teacher's Note:
काव्यांश के अंत में 'छाया काली बढ़ने लगी' पंक्ति पर ध्यान दें।
समय-क्रम को ध्यान में रखकर कथन जाँचें।

2.(iv) [2 marks] काव्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए और उस शीर्षक को चुनने का तर्क भी लिखिए।

उत्तर :

इस काव्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक 'मेघों का सौंदर्य' या 'संध्या का सौंदर्य' हो सकता है। यह शीर्षक इसलिए उपयुक्त है क्योंकि पूरी कविता में मेघों द्वारा बनाई गई रंग-बिरंगी आकृतियों और संध्या के बदलते दृश्य के सौंदर्य का ही वर्णन किया गया है।

Teacher's Note:
शीर्षक छोटा और काव्यांश के मूल भाव से जुड़ा होना चाहिए।
तर्क में जरूर बताएँ कि शीर्षक क्यों चुना गया।

2.(v) [2 marks] काव्यांश के आधार पर संध्या के सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर :

संध्या के समय आसमान में मेघों ने हाथी, घोड़े, पेड़ जैसी अनेक आकृतियाँ बनाईं और रंगों से खेला। डूबते सूरज ने क्षितिज पर सोना बिखेर दिया, जिससे बादलों में सुनहरी-लाल छटा भर गई। धीरे-धीरे अँधेरा बढ़ने लगा और बादल पेंसिल से बने रेखा-चित्रों जैसे दिखने लगे, अंत में रात उतरी और तारे चमक उठे।

Teacher's Note:
उत्तर में क्रमबद्ध ढंग से दिन से रात में बदलाव को दिखाएँ।
काव्यांश के मूल शब्दों (सोना बरसाया, रेखा-चित्र) का प्रयोग करें।

खण्ड ख

(व्यावहारिक व्याकरण)

3.(क) [1 mark] पत्र पढ़ते ही पिताजी खुशी से झूम उठे। (मिश्र वाक्य में बदलिए)

उत्तर : जैसे ही पत्र पढ़ा, पिताजी खुशी से झूम उठे।

Teacher's Note:
मिश्र वाक्य में 'जैसे ही... वैसे ही' जैसे जोड़क शब्दों का प्रयोग होता है।
एक प्रधान उपवाक्य और एक आश्रित उपवाक्य होना जरूरी है।

3.(ख) [1 mark] हमारे बीच से वह चला गया जो हममें से सबसे अधिक छायादार फल-फूल गंध से भरा था। (सरल वाक्य में बदलिए)

उत्तर : हममें से सबसे अधिक छायादार फल-फूल गंध से भरा वह चला गया।

Teacher's Note:
सरल वाक्य में केवल एक ही क्रिया और एक ही उद्देश्य-विधेय होता है।
'जो... वह' जैसे संबंधवाचक जोड़क हटाकर वाक्य को एक करें।

3.(ग) [1 mark] उनके मन में अपनी माँ और बड़ी बहन के लिए बहुत स्नेह था। (रचना की दृष्टि से वाक्य का भेद पहचानकर लिखिए)

उत्तर : सरल वाक्य।

Teacher's Note:
एक ही क्रिया और एक ही उद्देश्य वाले वाक्य सरल वाक्य कहलाते हैं।
समुच्चयबोधक 'और' के आने मात्र से वाक्य संयुक्त नहीं बनता।

3.(घ) [1 mark] वे इलाहाबाद में रहते हुए बार-बार दिल्ली आते-जाते थे। (संयुक्त वाक्य में बदलिए)

उत्तर : वे इलाहाबाद में रहते थे और बार-बार दिल्ली आते-जाते थे।

Teacher's Note:
संयुक्त वाक्य में दो स्वतंत्र उपवाक्य समुच्चयबोधक (और, तथा, पर) से जुड़ते हैं।
दोनों उपवाक्य अपने आप में पूर्ण वाक्य होने चाहिए।

3.(ङ) [1 mark] माँ ने बचपन में ही घोषित कर दिया था कि लड़का हाथ से गया। (आश्रित उपवाक्य पहचानिए और उसका भेद भी लिखिए)

उत्तर : 'कि लड़का हाथ से गया' - यह संज्ञा आश्रित उपवाक्य है।

Teacher's Note:
'कि' से शुरू होने वाला उपवाक्य प्रायः संज्ञा आश्रित उपवाक्य होता है।
यह मुख्य क्रिया के कर्म का काम करता है।

4.(क) [1 mark] मैं उस पवित्र ज्योति की याद में श्रद्धांत हूँ। (वाच्य को पहचानकर उसका भेद लिखिए)

उत्तर : कर्तृवाच्य।

Teacher's Note:
जिस वाक्य में क्रिया का रूप कर्ता के अनुसार बदलता है, वह कर्तृवाच्य है।
कर्ता स्वयं क्रिया करता हुआ दिखाई देता है।

4.(ख) [1 mark] नवाब साहब ने एक पल खिड़की से बाहर देखकर गौर किया। (कर्मवाच्य में बदलिए)

उत्तर : नवाब साहब द्वारा एक पल खिड़की से बाहर देखकर गौर किया गया।

Teacher's Note:
कर्मवाच्य में कर्ता के साथ 'द्वारा' लगता है और क्रिया कर्म के अनुसार बदलती है।
क्रिया का रूप प्रायः 'गया/गई' में बदलता है।

4.(ग) [1 mark] मुझसे सुबह जल्दी नहीं उठा जाता है। (कर्तृवाच्य में बदलिए)

उत्तर : मैं सुबह जल्दी नहीं उठ पाता।

Teacher's Note:
कर्तृवाच्य में कर्ता स्पष्ट रूप से क्रिया करने वाला होता है, 'से' चिह्न हट जाता है।
भाववाच्य से कर्तृवाच्य में बदलते समय क्रिया का मूल रूप प्रयोग करें।

4.(घ) [1 mark] वह हर वर्ष गंगा-स्नान के लिए जाते थे। (वाच्य-भेद पहचानकर लिखिए)

उत्तर : कर्तृवाच्य।

Teacher's Note:
कर्ता स्वयं क्रिया कर रहा है, इसलिए यह कर्तृवाच्य है।
भूतकालिक क्रिया देखकर वाच्य का भ्रम न करें।

4.(ङ) [1 mark] मैं अपने-आप नहीं जा सकता। (भाववाच्य में बदलिए)

उत्तर : मुझसे अपने आप नहीं जाया जा सकता।

Teacher's Note:
भाववाच्य में कर्ता के साथ 'से' लगता है और क्रिया सदैव अन्यपुरुष, एकवचन में रहती है।
अकर्मक क्रिया वाले वाक्यों में ही भाववाच्य बनता है।

5.(क) [1 mark] पूरब में लोही लग गई थी। (रेखांकित पद 'पूरब' का पद-परिचय दीजिए)

उत्तर : पूरब - संज्ञा, व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, अधिकरण कारक।

Teacher's Note:
पद-परिचय में शब्द-भेद, उपभेद, लिंग, वचन और कारक जरूर लिखें।
दिशाओं के नाम व्यक्तिवाचक संज्ञा मानी जाती हैं।

5.(ख) [1 mark] हालदार साहब भावुक हैं। (रेखांकित पद 'भावुक' का पद-परिचय दीजिए)

उत्तर : भावुक - विशेषण, गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, विशेष्य 'हालदार साहब'।

Teacher's Note:
विशेषण का पद-परिचय देते समय विशेष्य पद अवश्य बताएँ।
गुणवाचक विशेषण किसी गुण, दोष या अवस्था को बताता है।

5.(ग) [1 mark] उसे नेताजी की बगैर चश्मे वाली मूर्ति बुरी लगती है। (रेखांकित पद 'उसे' का पद-परिचय दीजिए)

उत्तर : उसे - सर्वनाम, पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्यपुरुष, एकवचन, कर्म कारक।

Teacher's Note:
सर्वनाम का पद-परिचय देते समय पुरुष (उत्तम/मध्यम/अन्य) जरूर बताएँ।
'उसे' में कारक चिह्न 'को' निहित है, इसलिए कर्म कारक होता है।

5.(घ) [1 mark] वह एक काला, मोटा और खुशमिज़ाज आदमी था। (रेखांकित पद 'और' का पद-परिचय दीजिए)

उत्तर : और - अव्यय, समुच्चयबोधक अव्यय, यह 'मोटा' और 'खुशमिज़ाज' पदों को जोड़ रहा है।

Teacher's Note:
अव्यय में लिंग, वचन, कारक नहीं बताया जाता, केवल भेद और कार्य बताएँ।
समुच्चयबोधक दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने का काम करता है।

5.(ङ) [1 mark] उनके चेहरे पर एक कौतुकभरी मुस्कान फैल गई। (रेखांकित पद 'फैल गई' का पद-परिचय दीजिए)

उत्तर : फैल गई - क्रिया, सकर्मक क्रिया, स्त्रीलिंग, एकवचन, भूतकाल, कर्तृवाच्य।

Teacher's Note:
क्रिया का पद-परिचय देते समय काल और वाच्य अवश्य बताएँ।
क्रिया का लिंग-वचन कर्ता (मुस्कान) के अनुसार तय होता है।

6.(क) [1 mark] कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। व्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा॥ (रेखांकित 'कोटि कुलिस सम बचनु' में कौन-सा अलंकार है ?)

उत्तर : उपमा अलंकार।

Teacher's Note:
उपमा अलंकार में उपमेय की तुलना 'सम' जैसे वाचक शब्द से उपमान से की जाती है।
यहाँ वचन की तुलना करोड़ों वज्रों से की गई है।

6.(ख) [1 mark] चरण-कमल बंदौ हरि राई। (पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार की पहचान कीजिए)

उत्तर : रूपक अलंकार।

Teacher's Note:
रूपक में उपमेय और उपमान में अभेद (एकरूपता) दिखाई जाती है, 'जैसे/सम' नहीं आता।
यहाँ चरणों को सीधे कमल कहा गया है।

6.(ग) [1 mark] मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के। (पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार की पहचान कीजिए)

उत्तर : मानवीकरण अलंकार।

Teacher's Note:
जब प्रकृति या निर्जीव वस्तु में मनुष्य जैसे भाव-व्यवहार दिखाए जाएँ, वहाँ मानवीकरण होता है।
यहाँ बादलों को बन-ठन कर आते मानव की तरह दिखाया गया है।

6.(घ) [1 mark] अतिशयोक्ति अलंकार का एक उपयुक्त उदाहरण किसी काव्य पंक्ति के द्वारा दीजिए।

उत्तर : 'एक साथ रघु ने पैरों से चाँपा अविकल। पितृ-दत्त सिंहासन और सकल अरिमंडल॥' - इस पंक्ति में अतिशयोक्ति अलंकार है क्योंकि यहाँ बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा गया है।

Teacher's Note:
अतिशयोक्ति में कार्य को लोकसीमा से बहुत बढ़ाकर वर्णित किया जाता है।
कोई भी सही व उपयुक्त उदाहरण देने पर पूरे अंक मिलते हैं।

6.(ङ) [1 mark] उत्प्रेक्षा अलंकार का एक उपयुक्त उदाहरण कविता की पंक्तियों द्वारा समझाइए।

उत्तर : 'उस काल मारे क्रोध के तनु काँपने उसका लगा। मानो हवा के वेग से सोता हुआ सागर जगा॥' - यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है क्योंकि उपमेय में उपमान की संभावना 'मानो' शब्द से व्यक्त की गई है।

Teacher's Note:
उत्प्रेक्षा में 'मानो, जनु, जानो' जैसे वाचक शब्दों से संभावना व्यक्त होती है।
उपमा और उत्प्रेक्षा में अंतर याद रखें - उपमा में तुलना, उत्प्रेक्षा में कल्पना।

खण्ड ग

(पाठ्य-पुस्तक एवं पूरक पाठ्य-पुस्तक पर आधारित)

निम्नलिखित पठित काव्यांश पर आधारित प्रश्न : मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी, मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी। तब भी कहते हो - कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे - यह गागर रीती। यह विडंबना ! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं। भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।

7.(i) [1 mark] कवि ने इन पंक्तियों में 'मधुप' का प्रयोग किस अर्थ में किया है ?
(A) संसार रूपी भ्रमर
(B) मन रूपी भ्रमर
(C) लोलुप मित्रगण
(D) कविता के पाठक

उत्तर : (B) मन रूपी भ्रमर।

Teacher's Note:
'आत्मपरिचय' कविता में मधुप कवि के अपने मन का प्रतीक है।
प्रतीकों के अर्थ को कविता के संदर्भ में ही समझें।

7.(ii) [1 mark] 'मुरझाकर गिर रहीं हैं पत्तियाँ देखो' - के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
I. कवि के जीवन से सुख रूपी पत्तियाँ गिर रही हैं।
II. संसार में जीवन नश्वर है और एक न एक दिन सबको नष्ट होना है।
III. कवि के मित्र एक-एक कर साथ छोड़ते हुए जा रहे हैं।
(A) केवल II सही है।
(B) I, II और III तीनों सही हैं।
(C) I और II सही हैं।
(D) I और III सही हैं।

उत्तर : (C) I और II सही हैं।

Teacher's Note:
पत्तियों का गिरना जीवन की नश्वरता और कवि के दुख दोनों का प्रतीक है।
मित्रों के छूटने का सीधा उल्लेख यहाँ नहीं है, इसलिए III गलत है।

7.(iii) [1 mark] कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए :
कथन : कवि अपनी आत्मकथा नहीं लिखना चाहता है।
कारण : महान लोगों की असंख्य आत्मकथाएँ इस साहित्य संसार में पहले से ही मौजूद हैं।
(A) कथन सही है, परंतु कारण ग़लत है।
(B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
(C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
(D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।

उत्तर : (D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।

Teacher's Note:
कवि आत्मकथा इसलिए नहीं लिखना चाहता क्योंकि उसकी दुर्बलताओं का उपहास हो सकता है, महान लोगों की आत्मकथाओं की संख्या इसका सही कारण नहीं है।
दोनों कथनों के तथ्यात्मक सही होने और तार्किक संबंध में फर्क समझें।

7.(iv) [1 mark] कवि ने अपने मित्रों/पाठकों से क्या-क्या सवाल किए हैं ?
I. क्या तुम मेरे जीवन का खालीपन देख सुखी हो पाओगे ?
II. आत्मकथाओं का व्यंग्य और उपहास उड़ाया जाता है, ऐसे में तुम क्यों चाहते हो कि मैं अपनी दुर्बलता लिखूँ ?
III. क्या मेरे जीवन का सुख लेकर तुमने अपने जीवन को भर लिया है ?
(A) I, II और III तीनों
(B) केवल I और III
(C) केवल I और II
(D) केवल II और III

उत्तर : (A) I, II और III तीनों।

Teacher's Note:
कविता में कवि बार-बार प्रश्नात्मक शैली में मित्रों/पाठकों को संबोधित करता है।
पूरी कविता को ध्यान से पढ़कर सभी प्रश्नों को खोजें।

7.(v) [1 mark] कवि विडंबना किसे कह रहा है ?
(A) इस संसार में सीधेपन का मज़ाक उड़ाया जाता है।
(B) दोस्त-मित्र ही अक्सर छल करते हैं।
(C) सच्ची आत्मकथाओं का भी उपहास उड़ाया जाता है।
(D) जीवन अपनी भूलों और दूसरों की प्रवंचनाओं का मिश्रण मात्र होता है।

उत्तर : (A) इस संसार में सीधेपन का मज़ाक उड़ाया जाता है।

Teacher's Note:
'अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं' पंक्ति में सीधेपन (सरलता) की ही विडंबना है।
अन्य विकल्प आगे की पंक्तियों से भ्रमित करने वाले हैं।

8.(क) [2 marks] गोपियों के जीवन पर कृष्ण का क्या प्रभाव दिखता है ? 'सूर के पदों' के आधार पर दो बिंदुओं में अपनी बात लिखिए।

उत्तर :

गोपियाँ कृष्ण के एकनिष्ठ प्रेम में पूरी तरह डूबी हुई हैं और उन्हें कृष्ण के प्रेम के अतिरिक्त कोई और मार्ग स्वीकार्य नहीं है। कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद वे उनके विरह में अत्यंत व्याकुल हो जाती हैं और उद्धव के सामने अपने प्रेम तथा विरह की पीड़ा को खुलकर व्यक्त करती हैं।

Teacher's Note:
'एकनिष्ठ प्रेम' और 'विरह-व्याकुलता' - दोनों बिंदु जरूर लिखें।
उद्धव प्रसंग का संक्षिप्त संदर्भ उत्तर को पूर्ण बनाता है।

8.(ख) [2 marks] फ़सल प्रकृति और मानव की सहभागिता का सर्वोत्कृष्ट रूप है - कैसे ? 'फ़सल' कविता के संदर्भ में लिखिए।

उत्तर :

फ़सल के उपजने में केवल प्रकृति के तत्त्वों - मिट्टी, पानी, हवा और धूप - का ही योगदान नहीं होता, बल्कि उतना ही योगदान किसान के परिश्रम का भी होता है। इस प्रकार फ़सल प्रकृति और मनुष्य के परिश्रम के मेल का सुंदर परिणाम है, यही इसे सहभागिता का सर्वोत्कृष्ट रूप बनाता है।

Teacher's Note:
प्रकृति के तत्त्व (मिट्टी, जल, हवा, धूप) गिनाना न भूलें।
मनुष्य के परिश्रम को प्रकृति के तत्त्वों के बराबर महत्त्व दें।

8.(ग) [2 marks] 'संगतकार' की भूमिका क्या होती है ? कवि मंगलेश डबराल उस भूमिका में 'मनुष्यता' को क्यों देखते हैं ?

उत्तर :

संगतकार मुख्य गायक के साथ स्वर मिलाकर उसका साथ देता है, वह कठिन जगहों पर मुख्य गायक को सहारा देता है। कवि उसमें मनुष्यता इसलिए देखते हैं क्योंकि वह सच्चे मन से अपनी भूमिका निभाता है और जान-बूझकर अपने स्वर को मुख्य गायक के स्वर से ऊँचा नहीं उठाने देता, यह उसकी विनम्रता और त्याग को दर्शाता है।

Teacher's Note:
'सहारा देना' और 'स्वर ऊँचा न करना' - दोनों बिंदु जरूर लिखें।
त्याग और विनम्रता को ही 'मनुष्यता' कहा गया है, यह समझाना जरूरी है।

8.(घ) [2 marks] 'अट नहीं रही है' कविता का कवि किन भावों में डूबा हुआ है ? उसके भावों के लिए उत्तरदायी कारक कौन-से हैं ?

उत्तर :

कवि प्रसन्नता, उत्साह, उमंग और कल्पना के भावों में डूबा हुआ है। इसके लिए उत्तरदायी कारक हैं - फागुन माह में वसंत ऋतु का भरपूर प्राकृतिक सौंदर्य, चारों ओर बहती सुवासित हवा तथा रंग-बिरंगे फूलों और नए कोमल लाल-हरे पत्तों से भरी प्रकृति।

Teacher's Note:
भाव और कारण दोनों को अलग-अलग स्पष्ट करके लिखें।
वसंत ऋतु और फागुन माह का उल्लेख करना न भूलें।

निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित प्रश्न : ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे। नहीं, बिलकुल गृहस्थ! उनकी गृहिणी की तो मुझे याद नहीं, उनके बेटे और पतोहू को तो मैंने देखा था। थोड़ी खेती-बारी भी थी, एक अच्छा साफ़-सुथरा मकान भी था। किंतु, खेती-बारी करते, परिवार रखते भी, बालगोबिन भगत साधु थे - साधु की सब परिभाषाओं में खरे उतरने वाले। कबीर को 'साहब' मानते थे, उन्हीं के गीतों को गाते, उन्हीं के आदेशों पर चलते। जो कुछ खेत में पैदा होता, सिर पर लादकर पहले उसे साहब के दरबार में ले जाते।

9.(i) [1 mark] लेखक के अनुसार बालगोबिन भगत 'बिलकुल गृहस्थ' कैसे थे ?
I. उनके पास खेती-बारी थी।
II. उनका एक अच्छा और साफ़-सुथरा मकान था।
III. उनके परिवार में बेटे और बहू के साथ-साथ उनकी गृहिणी भी मौजूद थी।
IV. वे एक पारिवारिक व्यक्ति थे।
(A) I, II और III
(B) II, III और IV
(C) III, IV और I
(D) I, II और IV

उत्तर : (D) I, II और IV।

Teacher's Note:
लेखक ने स्पष्ट लिखा है कि उसे गृहिणी की याद नहीं, इसलिए III गलत है।
गद्यांश को बारीकी से पढ़कर ही सही विकल्प चुनें।

9.(ii) [1 mark] कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए :
कथन : गृहस्थ होते हुए भी बालगोबिन भगत साधु थे।
कारण : क्योंकि वे अपनी पारिवारिक भूमिका नहीं निभाते थे।
(A) कथन सही है, परंतु कारण ग़लत है।
(B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
(C) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
(D) कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।

उत्तर : (A) कथन सही है, परंतु कारण ग़लत है।

Teacher's Note:
बालगोबिन भगत अपनी पारिवारिक भूमिका पूरी तरह निभाते थे, फिर भी साधु के समान आचरण करते थे।
उनका साधुपन कबीर के प्रति उनकी सच्ची भक्ति और सिद्धांतों में था।

9.(iii) [1 mark] 'बालगोबिन भगत कबीर को 'साहब' मानते थे' - पंक्ति का आशय है :
(A) बालगोबिन भगत कबीर को बड़ा संत मानते थे।
(B) बालगोबिन भगत कबीर को ईश्वर-तुल्य मानते थे।
(C) बालगोबिन भगत कबीर को पिता-तुल्य मानते थे।
(D) बालगोबिन भगत कबीर को समाज-सुधारक मानते थे।

उत्तर : (B) बालगोबिन भगत कबीर को ईश्वर-तुल्य मानते थे।

Teacher's Note:
'साहब' शब्द यहाँ स्वामी/ईश्वर के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है।
भगत की पूरी फसल कबीर के दरबार में चढ़ाना इसी भक्ति भावना को दिखाता है।

9.(iv) [1 mark] गद्यांश में वर्णित उदाहरणों में से किस उदाहरण को हम सबसे बड़ा प्रमाण बता सकते हैं, जिससे यह साबित हो कि बालगोबिन भगत कबीर को सबसे अधिक मानते थे ?
(A) सुबह-शाम, खेती-किसानी के समय भी कबीर के पदों को गाते रहना।
(B) कभी झूठ न बोलना और सबसे खरा व्यवहार करना।
(C) दूसरे के खेत में निवृत्त होने के लिए भी न जाना और सबसे दो-टूक व्यवहार करना।
(D) अपनी पूरी फ़सल को कबीर-दरबार में चढ़ाना और प्रसाद स्वरूप जो मिले उसे स्वयं के लिए लाना।

उत्तर : (D) अपनी पूरी फ़सल को कबीर-दरबार में चढ़ाना और प्रसाद स्वरूप जो मिले उसे स्वयं के लिए लाना।

Teacher's Note:
अपनी पूरी कमाई अर्पित करना सबसे बड़ा और ठोस त्याग है।
अन्य विकल्प उनकी ईमानदारी दिखाते हैं, पर कबीर के प्रति भक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण यही है।

9.(v) [1 mark] अनुच्छेद में भगत के विषय में जो जानकारियाँ हैं, उस आधार पर वे हैं :
I. सत्यवादी
II. स्पष्टतावादी
III. सच्चे भक्त
(A) I, II और III तीनों
(B) केवल III
(C) केवल I और III
(D) केवल II और III

उत्तर : (A) I, II और III तीनों।

Teacher's Note:
'कभी झूठ नहीं बोलते' सत्यवादी, 'दो-टूक बात' स्पष्टतावादी और कबीर के प्रति समर्पण सच्चे भक्त होने को दिखाता है।
गद्यांश के हर वाक्य को एक-एक गुण से जोड़कर देखें।

10.(क) [2 marks] 'भारत रत्न' से सम्मानित बिस्मिल्ला खाँ की उपलब्धियों के पीछे कौन-से कारण हैं ?

उत्तर :

बिस्मिल्ला खाँ की उपलब्धियों के पीछे संगीत के प्रति उनका संपूर्ण समर्पण और शहनाई वादन में उनकी विशिष्ट प्रतिभा मुख्य कारण थे। इसके साथ ही उनका अथक परिश्रम, निरंतर और नियमित रियाज़ तथा सीखते रहने की लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया।

Teacher's Note:
'समर्पण' और 'नियमित रियाज़' - दोनों शब्द उत्तर में जरूर आएँ।
केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि निरंतर परिश्रम पर भी बल दें।

10.(ख) [2 marks] 'लखनवी अंदाज़' के दोनों पात्र नवाबी संस्कृति के ही प्रतिनिधि हैं - उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए।

उत्तर :

नवाब साहब अपनी झूठी शान बनाए रखने के लिए खीरा खाने के बजाय उसे सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक देते हैं, यह उनके दिखावे में विश्वास को दिखाता है। वहीं लेखक भी संभ्रांत वर्ग से होने के कारण नवाब साहब की खीरा खाने की पेशकश को शिष्टाचारवश विनम्रता से ठुकरा देता है, इस तरह दोनों पात्र औपचारिकता और दिखावे की नवाबी संस्कृति के प्रतिनिधि सिद्ध होते हैं।

Teacher's Note:
दोनों पात्रों - नवाब साहब और लेखक - दोनों के उदाहरण देना जरूरी है।
'दिखावा' और 'शिष्टाचार' दोनों शब्दों का प्रयोग करें।

10.(ग) [2 marks] हालदार साहब ने मूर्ति पर चश्मा लगाने वाले का नाम 'कैप्टन' सुनकर उसके बारे में क्या अनुमान लगाया ? उन्हें उन अनुमानों के ग़लत साबित होने पर कैसा लगा ?

उत्तर :

हालदार साहब ने अनुमान लगाया था कि 'कैप्टन' नेताजी सुभाष चंद्र बोस का कोई साथी या आज़ाद हिंद फौज का भूतपूर्व सैनिक अथवा कोई प्रभावशाली, महत्त्वपूर्ण और प्रतिष्ठित व्यक्ति होगा। जब उन्हें पता चला कि कैप्टन तो एक साधारण, गरीब चश्मा बेचने वाला दुकानदार है, तो वे यह जानकर अवाक् रह गए।

Teacher's Note:
पहले अनुमान और बाद की वास्तविकता, दोनों बिंदु उत्तर में जरूर आने चाहिए।
'अवाक् रह जाना' शब्द से उनका आश्चर्य स्पष्ट करें।

10.(घ) [2 marks] 'माता-पिता के व्यक्तित्व और व्यवहार दोनों से बच्चों का बचपन प्रभावित होता है।' - 'एक कहानी यह भी' पाठ के आधार पर दो उदाहरणों से इस कथन को सिद्ध कीजिए।

उत्तर :

लेखिका अपनी माँ के दब्बू और असहाय व्यक्तित्व को देखकर उनके जैसा न बनने का निर्णय लेती हैं, जिससे स्पष्ट है कि माता के व्यवहार का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा। दूसरी ओर पिता के प्रभावी व्यक्तित्व के कारण, न चाहते हुए भी, लेखिका में उनके स्वभाव की झलक आ गई, साथ ही पिता ने ही उन्हें देश की तत्कालीन स्थितियों पर चर्चा में शामिल होने और पढ़ाई-लिखाई के लिए प्रोत्साहित किया।

Teacher's Note:
माता और पिता दोनों के प्रभाव का अलग-अलग उदाहरण देना जरूरी है।
'प्रेरणा' और 'प्रभाव' दोनों पक्षों को छूना बेहतर उत्तर बनाता है।

11.(क) [4 marks] 'माता का अँचल' पाठ में बच्चों का पशु-पक्षियों के प्रति कैसा व्यवहार दिखता है ? उदाहरण सहित लिखिए। पशु-पक्षियों के प्रति हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए ? अपने विचारों के आधार पर लिखिए।

उत्तर :

'माता का अँचल' पाठ में बच्चे अनजाने में पशु-पक्षियों के प्रति निर्दयी व्यवहार करते हैं और उन्हें खेल का सामान समझ लेते हैं, जैसे खेत में चिड़ियों-तितलियों के पीछे भागकर उन्हें पकड़ने की कोशिश करना और चूहों के बिल में पानी डालना। हमें पशु-पक्षियों के प्रति करुणा और सहानुभूति से भरा व्यवहार रखना चाहिए तथा उन्हें कभी सताना या तंग नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे भी हमारी ही तरह प्रकृति का हिस्सा हैं।

Teacher's Note:
बच्चों की निर्दयता को केवल अबोधता, दुष्टता नहीं मानें, दोनों पक्ष लिखें।
अपने विचार वाले भाग में करुणा, संरक्षण जैसे शब्द जरूर प्रयोग करें।

11.(ख) [4 marks] 'पत्थर तोड़ती मज़दूर पहाड़ी महिलाओं के भीतर जीवन का उल्लास मौजूद था' - यह कथन किस आधार पर कहा जा सकता है ? उन स्त्रियों और उनकी जीवन स्थितियों का वर्णन करते हुए बताइए कि आप उनसे क्या सीख सकते हैं।

उत्तर :

यह कथन इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि कठिन परिश्रम के बीच भी वे स्त्रियाँ अचानक किसी बात पर ठहाका लगाकर हँस पड़ती थीं। वे पत्थर तोड़ने जैसा अथक परिश्रम करते हुए मातृत्व और श्रम-साधना का संतुलन बनाए रखती थीं, छोटे बच्चों को साथ रखकर काम करती थीं, गरीबी और विषम प्राकृतिक परिस्थितियों में जीती थीं। इनसे हमें यह सीख मिलती है कि हमें परिश्रमी होना चाहिए और जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी आनंद और उल्लास बनाए रखना चाहिए।

Teacher's Note:
'ठहाका लगाकर हँसना' उदाहरण उत्तर की जान है, इसे जरूर लिखें।
सीख वाले भाग में स्वतंत्र और व्यक्तिगत विचार लिखें।

11.(ग) [4 marks] 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर प्रत्यक्ष अनुभव और अनुभूति का अंतर स्पष्ट करते हुए बताइए कि अगर आप कभी लेखन के क्षेत्र में गए तो दोनों में से किसे महत्त्व देंगे और क्यों ?

उत्तर :

प्रत्यक्ष अनुभव वह है जिसे हमने स्वयं घटित होते हुए देखा हो, जबकि अनुभूति वह है जो घटना हमारे साथ नहीं घटी परंतु आंतरिक स्तर पर हमने उसे भोगने वाले की तरह महसूस किया हो। यदि मैं कभी लेखन के क्षेत्र में गया तो मैं अनुभूति आधारित लेखन को अधिक महत्त्व दूँगा, क्योंकि यह अधिक प्रामाणिक और संवेदनशील होता है तथा पाठक के मन को गहराई से छू पाता है।

Teacher's Note:
पहले भाग में अंतर बिल्कुल स्पष्ट परिभाषा जैसा लिखें।
दूसरे भाग में अपनी राय स्वतंत्र रूप से तर्क सहित लिखें, कोई भी उत्तर सही मान्य है।

खण्ड घ

(रचनात्मक लेखन)

12.(क) [6 marks] डिजिटल दौर में मानवीय संपर्क - विषय पर संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए।

उत्तर :

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसे सुख-दुख बाँटने के लिए वास्तविक मानवीय संपर्कों और संबंधों की आवश्यकता सदा से रही है। परंतु आज के बढ़ते डिजिटल दौर में मोबाइल और सोशल मीडिया ने वास्तविक संबंधों की जगह वायवीय अर्थात् वर्चुअल संबंधों को बढ़ावा दिया है। लोग एक-दूसरे के साथ बैठकर बात करने की बजाय स्क्रीन पर संदेश भेजना अधिक पसंद करते हैं, जिससे आपसी संवाद और भावनात्मक जुड़ाव कम होता जा रहा है। वर्तमान समय की माँग यह है कि हम तकनीक का उपयोग तो करें परंतु अपने परिवार और मित्रों के साथ प्रत्यक्ष संपर्क बनाए रखें, समय निकालकर उनसे मिलें और बातचीत करें। इस प्रकार डिजिटल साधनों का संतुलित उपयोग करके ही हम अपने रिश्तों की गर्माहट बचा सकते हैं।

Teacher's Note:
अनुच्छेद में भूमिका, विषयवस्तु और निष्कर्ष तीनों भाग स्पष्ट रखें।
लगभग 120 शब्दों की सीमा का ध्यान रखें, बहुत छोटा या बहुत लंबा न लिखें।
भाषा शुद्ध और रचनात्मक रखें, ज़्यादा अशुद्धियों पर ही अंक कटते हैं।

12.(ख) [6 marks] पारंपरिक खान-पान के लाभ - विषय पर संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए।

उत्तर :

पारंपरिक खान-पान से आशय है वह भोजन जो हमारे पूर्वज सदियों से स्थानीय संसाधनों की सहायता से बनाते और खाते आए हैं, जैसे मोटे अनाज, दालें, मौसमी फल-सब्जियाँ आदि। भोजन में स्थानीय पदार्थों का महत्त्व इसलिए है क्योंकि ये आसानी से उपलब्ध होते हैं, ताज़े होते हैं और हमारे शरीर की प्रकृति के अनुकूल होते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी पारंपरिक भोजन बहुत लाभकारी है, क्योंकि इसमें पोषक तत्त्व भरपूर मात्रा में होते हैं और प्रिज़रवेटिव या कृत्रिम रसायनों का प्रयोग नहीं होता, जिससे पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और अनेक बीमारियों से बचाव होता है। इसलिए हमें फास्ट फूड की जगह पारंपरिक खान-पान को अपने जीवन में प्राथमिकता देनी चाहिए।

Teacher's Note:
स्थानीय पदार्थों और स्वास्थ्य-लाभ दोनों बिंदुओं को जरूर छुएँ।
उदाहरण के रूप में मोटे अनाज, दाल जैसे शब्द प्रयोग करें।
निष्कर्ष में अपनी राय संक्षेप में दें।

12.(ग) [6 marks] पुस्तकें आज भी हमारी सबसे अच्छी मित्र हैं - विषय पर संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए।

उत्तर :

पुस्तकें हमें ज्ञान देती हैं, हमारा मनोरंजन करती हैं और अकेलेपन में हमारा साथ देती हैं, ठीक उसी तरह जैसे एक सच्चा मित्र करता है। एक अच्छी पुस्तक हमें कभी धोखा नहीं देती, न ही हमसे कुछ अपेक्षा रखती है, बल्कि निःस्वार्थ भाव से हमारा मार्गदर्शन करती है। आज इंटरनेट और मोबाइल के युग में भी पुस्तकों की जगह पूरी तरह से नहीं भर सकी है, क्योंकि पुस्तक पढ़ने से जो गहराई और एकाग्रता मिलती है, वह स्क्रीन पर नहीं मिलती। उम्र के हर मोड़ पर अलग-अलग तरह की पुस्तकें हमारी सहायक होती हैं, बचपन में कहानियाँ हमारा मनोरंजन करती हैं तो बड़े होने पर ज्ञानवर्धक और प्रेरक पुस्तकें हमें जीवन जीने की राह दिखाती हैं। इसलिए पुस्तकें आज भी हमारी सच्ची मित्र हैं।

Teacher's Note:
पुस्तक और मित्र के बीच तुलना को स्पष्ट रूप से दिखाएँ।
अलग-अलग उम्र में पुस्तकों की भूमिका का उदाहरण दें।
शब्द-सीमा का उल्लंघन होने पर भी प्रस्तुतिकरण अच्छा होने पर अंक नहीं कटते।

13.(क) [5 marks] आपका नाम हिमानी/हेमराज है। नगर-निगम ने आपके मोहल्ले में स्थित पार्क का सौंदर्यीकरण करवाया है साथ ही बच्चों के लिए झूलों की व्यवस्था की है। इस संदर्भ में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए नगर-निगम अध्यक्ष को लगभग 100 शब्दों में एक पत्र लिखिए।

उत्तर (a) :

सेवा में,
अध्यक्ष महोदय,
नगर-निगम, (स्थान का नाम)

विषय : पार्क के सौंदर्यीकरण हेतु धन्यवाद-पत्र

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं हिमानी, आपके नगर-निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले (मोहल्ले का नाम) की निवासी हूँ। मैं यह पत्र आपको हमारे मोहल्ले के पार्क का सुंदरीकरण करवाने तथा बच्चों के लिए झूलों की व्यवस्था करने के लिए धन्यवाद देने हेतु लिख रही हूँ। पहले यह पार्क उपेक्षित अवस्था में था, परंतु अब हरी-भरी घास, सुंदर पौधों और साफ़-सुथरे रास्तों के कारण यह मोहल्ले के लोगों के लिए सुबह-शाम टहलने की बेहतरीन जगह बन गया है। बच्चों के लिए झूले लग जाने से उन्हें भी खेलने के लिए एक अच्छी जगह मिल गई है। इस सराहनीय कार्य के लिए मैं और मेरे मोहल्ले के सभी लोग आपके आभारी हैं।

धन्यवाद सहित।

भवदीय,
हिमानी

Teacher's Note:
औपचारिक पत्र में प्रारूप (सेवा में, विषय, भवदीय आदि) सही रखना जरूरी है।
धन्यवाद पत्र में सुधार से पहले और बाद की स्थिति की तुलना जरूर करें।

13.(ख) [5 marks] आपका नाम हिमानी/हेमराज है। आपने अपने माता-पिता को बातचीत करते सुना कि वे आपकी मोबाइल फोन में डूबे रहने और गेमिंग की दुनिया में खोने की आदतों से परेशान होकर आपको एक आवासीय विद्यालय (बोर्डिंग स्कूल) में भेजना चाह रहे हैं। अपने पिता को लगभग 100 शब्दों में एक पत्र लिखकर अनुरोध कीजिए कि वे ऐसा न करें। तर्कपूर्ण बिंदुओं में यह भी स्पष्ट कीजिए कि आप स्वयं में किस प्रकार सुधार लाएँगे।

उत्तर (b) :

पूज्य पिताजी,

सादर चरण-स्पर्श। मुझे कल संयोगवश पता चला कि आप और माँ मेरी मोबाइल तथा गेमिंग की आदत से परेशान होकर मुझे आवासीय विद्यालय भेजने के बारे में सोच रहे हैं। पिताजी, मैं आपसे विनम्र निवेदन करना चाहता हूँ कि मुझे घर से दूर बोर्डिंग स्कूल न भेजें, क्योंकि परिवार से दूर रहना मेरे लिए बहुत कठिन होगा। मैं वादा करता हूँ कि अब से अपने मोबाइल के उपयोग का समय निश्चित करूँगा, प्रतिदिन पढ़ाई के लिए निश्चित समय निकालूँगा और गेमिंग की बजाय खेल-कूद व अन्य रचनात्मक गतिविधियों में समय लगाऊँगा। कृपया मुझे एक अवसर दें, मैं अपनी आदतों में सुधार लाकर दिखाऊँगा।

आपका प्रिय पुत्र,
हेमराज

Teacher's Note:
अनौपचारिक पत्र में आत्मीयता और भावनात्मक स्पर्श जरूरी है।
सुधार के ठोस बिंदु (समय-सीमा, वैकल्पिक गतिविधि) जरूर लिखें।

14.(क) [5 marks] आप आमना/अमन हैं। अ.ब.स. बैंक के प्रबंधक को, एक शहर से दूसरे शहर में बचत खाता स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जानने हेतु लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल लिखिए।

उत्तर (a) :

प्रति : manager.absbank@example.com
विषय : बचत खाता स्थानांतरण की प्रक्रिया जानने हेतु

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मेरा नाम अमन है और मेरा बचत खाता आपकी शाखा में है। मेरा स्थानांतरण दूसरे शहर में हो गया है, इसलिए मुझे अपना बचत खाता वहाँ की शाखा में स्थानांतरित करवाना है। कृपया मुझे इस प्रक्रिया की पूरी जानकारी दें कि मुझे कौन-से प्रपत्र भरने होंगे, कौन-से दस्तावेज़ जमा करने होंगे और इसमें कितना समय लगेगा। शीघ्र उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी।

धन्यवाद सहित,
अमन
खाता संख्या : (उदाहरण संख्या)

Teacher's Note:
ई-मेल में विषय-पंक्ति (Subject) लिखना अनिवार्य है।
भाषा औपचारिक और सीधी होनी चाहिए, अनावश्यक विस्तार न करें।

14.(ख) [5 marks] आप अमन/आमना हैं और अभी-अभी आपने 'पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल' से एम.बी.बी.एस. की डिग्री पूरी की है। वहाँ पर इंटर्न डॉक्टर के पद पर आवेदन करने के लिए लगभग 80 शब्दों में एक स्ववृत्त तैयार कीजिए।

उत्तर (b) :

स्ववृत्त (Resume)

नाम : आमना
पिता का नाम : (नाम)
जन्म तिथि : (तिथि)
पता : (पूरा पता)
संपर्क सूत्र : (मोबाइल नंबर/ई-मेल)

शैक्षणिक योग्यताएँ :
एम.बी.बी.एस., पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, (वर्ष)
उच्चतर माध्यमिक (विज्ञान वर्ग), (विद्यालय का नाम), (वर्ष)

अन्य योग्यताएँ : टीम भावना, परिश्रमी स्वभाव, रोगी-सेवा में रुचि

उद्देश्य : पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इंटर्न डॉक्टर के पद पर कार्य करते हुए अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग रोगियों की सेवा में करना।

दिनांक : (दिनांक)
हस्ताक्षर : आमना

Teacher's Note:
स्ववृत्त में व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और उद्देश्य - तीनों भाग जरूर रखें।
जानकारी क्रमबद्ध और बिंदुवार रूप में लिखने पर अच्छे अंक मिलते हैं।

15.(क) [4 marks] आपकी बहन ने 'दियारा' नाम से पॉल्ट्री (मुर्गीपालन) का व्यवसाय ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से शुरू किया है। इस कंपनी की खूबियों को दर्शाने वाला एक आकर्षक विज्ञापन लगभग 40 शब्दों में बनाइए।

उत्तर (a) :

"दियारा पॉल्ट्री फार्म"
ताज़ा, स्वच्छ और शुद्ध अंडे व मुर्गी उत्पाद अब आपके घर तक!
ऑनलाइन ऑर्डर करें या नज़दीकी दुकान पर आएँ। स्वास्थ्यवर्धक, किफ़ायती और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की गारंटी।
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"दियारा - जहाँ मिले सेहत और स्वाद का भरोसा!"

Teacher's Note:
विज्ञापन में उत्पाद की खूबियाँ आकर्षक और संक्षिप्त शब्दों में लिखें।
कंपनी का नाम और संपर्क विवरण देना अनिवार्य है, चित्र-रंग जरूरी नहीं।

15.(ख) [4 marks] आपका नाम सोमा/सोमप्रभ है। अपने मामा-मामी को नए घर की बधाई देते हुए गृहप्रवेश के अवसर पर शुभकामना संदेश लगभग 40 शब्दों में लिखिए।

उत्तर (b) :

प्रिय मामा-मामी जी,

आप दोनों को नए घर में गृहप्रवेश की हार्दिक बधाई ! यह घर आपके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियाँ लेकर आए, ऐसी मेरी शुभकामना है। ईश्वर से प्रार्थना है कि आपका यह नया घर सदा हँसी-खुशी से गुलज़ार रहे।

आपकी प्रिय,
सोमा

Teacher's Note:
संदेश छोटा, आत्मीय और भावनापूर्ण होना चाहिए।
अभिवादन और हस्ताक्षर के साथ प्रारूप पूरा रखें, शब्द-सीमा से बहुत अधिक न लिखें।

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