Official NCERT Solutions for Class 4 Hindi: Veena Chapter 12 Shatranj Mein Maat
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Chapter-wise Solutions for Hindi: Veena Chapter 12 Shatranj Mein Maat
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बातचीत के लिए
Question 1. आपको यह नाटक कैसा लगा और क्यों ?
Answer: इस नाटक की कहानी मुझे बहुत अच्छी लगी। नाटक में तेनालीरामन की बुद्धिमानी और सूझबूझ को बहुत अच्छे ढंग से दर्शाया गया है। उन्होंने जिस तरह चतुराई से अपनी रक्षा की और सजा से खुद को बचाया, वह बहुत प्रेरणादायक और मनोरंजक है।
In simple words: मुझे यह नाटक बहुत पसंद आया क्योंकि तेनालीरामन ने अपनी अकल का इस्तेमाल करके खुद को बड़ी ही चालाकी से सजा मिलने से बचा लिया।
Exam Tip: अपनी पसंद बताते समय कहानी के किसी खास हिस्से या पात्र के गुण (जैसे बुद्धिमानी, हाजिरजवाबी) का उल्लेख जरूर करें।
Question 2. आपने तेनालीरामन के किस्सों की तरह और किसके बुद्धिमानी के किस्से सुने हैं? उनमें से कोई एक सुनाइए ।
Answer: तेनालीरामन की तरह बीरबल की बुद्धिमानी के किस्से भी बहुत प्रसिद्ध और रोचक हैं। बीरबल की चतुराई की एक कहानी इस प्रकार है - एक बार अकबर ने दरबारियों से पूछा कि शहर में कितने कौवे हैं। बीरबल ने तुरंत जवाब दिया कि पच्चीस हजार तीन सौ अड़तालीस कौवे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई संदेह हो, तो गिनती करवा ली जाए। यदि संख्या अधिक हुई तो बाहरी रिश्तेदार आए होंगे, और यदि कम हुई तो कुछ कौवे घूमने गए होंगे। अकबर बीरबल की इस हाजिरजवाबी से बेहद प्रसन्न हुए।
In simple words: बीरबल की चतुराई की कहानियाँ भी तेनालीरामन जैसी होती हैं। बीरबल हमेशा अपनी होशियारी से राजा अकबर के कठिन सवालों के मजेदार जवाब देते थे।
Exam Tip: किसी प्रसिद्ध व्यक्ति (जैसे बीरबल, मुल्ला नसीरुद्दीन या गोपाल भार) का नाम लेकर उनकी एक छोटी सी हास्यास्पद कहानी लिखें।
Question 3. तेनालीरामन की तरह क्या आपने भी कभी किसी कठिन परिस्थिति को सँभाला है? यदि सँभाला है तो कैसे?
Answer: एक बार परीक्षा के दिन सुबह मेरी साइकिल अचानक खराब हो गई थी। घबराने के बजाय मैंने तुरंत अपने पड़ोसी से मदद मांगी और उनके साथ समय पर स्कूल पहुँच गया। शांत मन से काम लेकर मैंने परीक्षा भी अच्छे से दी।
In simple words: यदि कभी कोई परेशानी आए, तो घबराने की जगह ठंडे दिमाग से उसका हल ढूंढना चाहिए।
Exam Tip: ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय शांत रहने और तुरंत सही निर्णय लेने की प्रक्रिया को स्पष्ट करें।
Question 4. यदि तेनालीरामन शतरंज का खेल जानते तो नाटक का अंत क्या होता?
Answer: यदि तेनालीरामन को शतरंज खेलना आता, तो वे राजा को बहुत ही रोमांचक मात देते। वे खेल में अपनी गहरी बुद्धिमत्ता से राजा को हरा देते और नाटक का अंत उनके जीतने के साथ खुशी-खुशी होता।
In simple words: अगर तेनालीरामन को खेल पता होता, तो वे खुद जीतकर राजा को हरा देते और उन्हें कोई सजा नहीं मिलती।
Exam Tip: नाटक के पात्रों के स्वभाव को ध्यान में रखते हुए एक कल्पित और सकारात्मक अंत की रचना करें।
सोचिए और लिखिए
Question 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाठ के आधार पर दीजिए-
(क) सभी दरबारी तेनालीरामन से ईर्ष्या क्यों करते थे?
Answer: दरबार के अन्य सभी लोग तेनालीरामन से इसलिए चिढ़ते थे क्योंकि महाराज हमेशा तेनालीरामन के काम की बहुत प्रशंसा करते थे। वे तेनालीरामन को बहुत मान-सम्मान देते थे, जो दूसरे दरबारियों को पसंद नहीं आता था।
In simple words: राजा तेनालीरामन को बहुत चाहते थे और हमेशा उनकी तारीफ करते थे, इसी वजह से बाकी दरबारी उनसे जलते थे।
Exam Tip: दरबारियों के जलन के पीछे राजा के स्नेह और तेनालीरामन के प्रति सम्मान को मुख्य कारण के रूप में लिखें।
Question 1. (ख) दरबारियों ने राजा से तेनालीरामन के बारे में क्या कहा ?
Answer: दरबारियों ने राजा से तेनालीरामन की झूठी बड़ाई करते हुए कहा कि वे शतरंज के बेहद अद्भुत खिलाड़ी हैं और इस खेल में बड़े-बड़े धुरंधरों को भी आसानी से हरा देते हैं।
In simple words: दरबारियों ने राजा से कहा कि तेनालीरामन शतरंज खेलने में बहुत होशियार हैं और सबको हरा देते हैं।
Exam Tip: दरबारियों द्वारा तेनालीरामन को फंसाने के लिए किए गए षड्यंत्र को अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
Question 1. (ग) शतरंज खेलते समय राजा को तेनालीरामन पर क्रोध क्यों आ रहा था ?
Answer: जब शतरंज का खेल चल रहा था, तब राजा को तेनालीरामन की गलत चालों पर गुस्सा आ रहा था क्योंकि उन्हें लग रहा था कि तेनालीरामन जानबूझकर बेवकूफी कर रहे हैं और खेल को सही से नहीं खेल रहे हैं।
In simple words: तेनालीरामन को खेलना नहीं आता था, इसलिए वे गलत चालें चल रहे थे। यह देखकर राजा को गुस्सा आने लगा।
Exam Tip: राजा के क्रोध का मुख्य कारण तेनालीरामन का खेल के नियमों से अनभिज्ञ होना था, इसे उत्तर में अवश्य दर्शाएं।
Question 1. (घ) तेनालीरामन ने मुंडन से बचने के लिए क्या चाल चली ?
Answer: सिर मुंडवाने की सजा से बचने के लिए तेनालीरामन ने महाराज से निवेदन किया कि हमारे शास्त्रों में माता-पिता की मृत्यु के बाद ही मुंडन कराने का नियम है। उन्होंने राजा से कहा कि अब वे ही उनके माता-पिता हैं, इसलिए यदि वे उनके जीवित रहते मुंडन करवाएंगे, तो महाराज पर कोई बड़ी आफत आ जाएगी।
In simple words: तेनालीरामन ने कहा कि जीवित माता-पिता के रहते मुंडन कराना अशुभ होता है। राजा उनके माता-पिता जैसे हैं, इसलिए ऐसा करने से राजा पर संकट आ जाएगा।
Exam Tip: तेनालीरामन द्वारा राजा को 'माता-पिता' बताने और सजा टालने की चतुर दलील को प्रमुखता से लिखें।
Question 1. (ङ) घर में खेले जाने वाले खेलों में आपको सबसे अच्छा खेल कौन-सा लगता है? वह खेल कैसे खेला जाता है?
Answer: घर के अंदर खेले जाने वाले खेलों में मुझे कैरम खेलना सबसे प्रिय लगता है। इसे खेलने के लिए एक चौकोर बोर्ड की आवश्यकता होती है। इसमें लाल, काली और सफेद गोटियाँ होती हैं, जिन्हें स्ट्राइकर की मदद से बोर्ड के चारों कोनों में बने छेदों में डालना होता है।
In simple words: मुझे घर में कैरम बोर्ड खेलना पसंद है। इसे गोटियों और एक बड़ी गोटी (स्ट्राइकर) से बोर्ड पर खेला जाता है।
Exam Tip: खेल के नाम के साथ-साथ उसकी बुनियादी नियमावली और आवश्यक सामग्री (जैसे बोर्ड, गोटी, डाइस आदि) का परिचय जरूर दें।
Question 2. किसने, किससे कहा ?
Answer: पाठ में दिए गए संवादों के बोलने वाले और सुनने वाले व्यक्तियों की सूची इस प्रकार है:
| कथन | किसने | किससे |
|---|---|---|
| (क) शतरंज ? क्या तेनालीरामन शतरंज के शौकीन हैं? | राजा ने | दरबारियों से |
| (ख) और यह है मेरा दाँव । | तेनालीरामन ने | राजा से |
| (ग) अरे, इतने महान आदमी का मुंडन ! | नाई ने | राजा से |
| (घ) हाँ महाराज, बड़े-बड़ों को मात दी है तेनाली ने । | पहले दरबारी ने | राजा से |
| (ङ) उठो, उठो ! तुम्हें कोई दंड नहीं मिल रहा है। | राजा ने | नाई से |
Exam Tip: संवादों को ध्यान में रखने के लिए कहानी पढ़ते समय पात्रों की बातचीत को विशेष ध्यान से देखें।
भाषा की बात
Question 1. दिए गए शब्दों का मिलान उनके समान अर्थ वाले शब्दों से कीजिए-
Answer: शब्दों का उनके पर्यायवाची (समान अर्थ वाले) शब्दों के साथ सही मिलान निम्नलिखित है:
| शब्द | समानार्थी शब्द (अर्थ) |
|---|---|
| प्रशंसा | बड़ाई |
| युक्ति | उपाय |
| मात | हार |
| घाघ | चालाक |
| माहिर | कुशल |
| न्योता | आमंत्रण |
Exam Tip: समानार्थी शब्द हमेशा समान भाव व्यक्त करते हैं। पाठ में आए कठिन शब्दों के अर्थ अच्छी तरह याद करें।
Question 2. मटके में से उपयुक्त विशेषण चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
Answer: विशेषण शब्दों के सहयोग से रिक्त स्थानों की पूर्ति इस प्रकार है:
(क) कुशल खिलाड़ी
(ख) गूढ़ चाल
(ग) नई चाल
(घ) चतुर तेनाली
(ङ) महान आदमी
(च) पाँच हज़ार अशर्फियाँ
In simple words: संज्ञा शब्दों की विशेषता बताने वाले उपयुक्त विशेषण चुनकर खाली स्थानों को भरा गया है।
Exam Tip: विशेषण हमेशा संज्ञा की विशेषता बताते हैं। संज्ञा के साथ सही मेल खाने वाले विशेषण का ही चुनाव करें।
Question 3. हर संवाद किसी-न-किसी मनोभाव को अभिव्यक्त करता है। उदाहरण के लिए- तेनाली – (चकित) शतरंज और मैं ! शतरंज के विषय में मैं कुछ नहीं जानता, महाराज। राजा – (क्रोधित) मुझे सब पता है तेनाली । बात अब छिप नहीं सकती । (दरबारियों से ) क्यों? आप भी निम्नलिखित मनोभावों को संवाद के रूप में लिखिए-
प्रसन्न – ...........
चकित – ...........
शांत – ...........
दुखी – ...........
Answer: विभिन्न मनोभावों को दर्शाने वाले वाक्य निम्नलिखित हैं:
• प्रसन्न: "वाह! आज तो मेरी मनपसंद मिठाई बन गई, मज़ा आ गया!"
• चकित: "अरे! तुम अचानक बिना बताए इतनी दूर से कैसे आ गए?"
• शांत: "चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा। हमें धैर्य से काम लेना चाहिए।"
• दुखी: "ओह! मेरी सबसे प्यारी कहानी की किताब फट गई।"
In simple words: हमारे मन के अलग-अलग भावों जैसे खुशी, आश्चर्य, धीरज और दुःख को इन वाक्यों द्वारा प्रकट किया गया है।
Exam Tip: विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का प्रयोग आश्चर्य, हर्ष या शोक जैसे मनोभावों को प्रकट करने के लिए आवश्यक रूप से करें।
Question 4. नीचे दी गई सूचना के आधार पर नए शब्दों का निर्माण कीजिए-
(क) किसी को आने के लिए कहना
(ख) जाना का विपरीत अर्थ वाला शब्द
(ग) किसी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना
(घ) किसी व्यक्ति या वस्तु का आना या पहुँचना
(ङ) जो बहुत ज़रूरी हो
Answer: 'आ' से शुरू होने वाले नए शब्दों का निर्माण इस प्रकार है:
(क) किसी को आने के लिए कहना – आ
(ख) जाना का विपरीत अर्थ वाला शब्द – आना (आ + ना)
(ग) किसी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना – आभार (आ + भा + र)
(घ) किसी व्यक्ति या वस्तु का आना या पहुँचना – आगमन (आ + ग + म + न)
(ङ) जो बहुत ज़रूरी हो – आवश्यक (आ + व + श्य + क)
In simple words: दी गई हिंट की मदद से 'आ' अक्षर से शुरू होने वाले नए सार्थक शब्द बनाए गए हैं।
Exam Tip: हिन्दी में उपसर्ग (जैसे यहाँ 'आ') जोड़कर नए शब्द बनाने का अभ्यास शब्द-ज्ञान को समृद्ध करता है।
पाठ से आगे
Question 1. शतरंज के प्रत्येक मोहरे की चाल अलग-अलग होती है। शतरंज के मोहरों की चाल पता कीजिए और लिखिए-
घोड़े की चाल – ...........
हाथी की चाल – ...........
मंत्री की चाल – ...........
'तिरछी चाल – ...........
राजा की चाल – ...........
ऊँट की चाल – ...........
प्यादे (सिपाही) की चाल – ...........
Answer: शतरंज के मोहरों की चालें इस प्रकार होती हैं:
• घोड़े की चाल – ढाई चाल (L-शेप)
• हाथी की चाल – सीधी चाल (आगे, पीछे या दाएं-बाएं)
• मंत्री की चाल – सभी दिशाओं में चाल (सीधी व तिरछी दोनों)
• ऊँट की चाल – तिरछी चाल (केवल तिरछे वर्ग पर)
• राजा की चाल – सभी दिशाओं में केवल एक कदम (एक चाल)
• प्यादे (सिपाही) की चाल – आगे की तरफ़ केवल एक कदम (पहली बार दो कदम)
In simple words: शतरंज के खेल में सभी गोटियों को चलाने के अलग नियम होते हैं; जैसे घोड़ा ढाई घर चलता है और हाथी हमेशा सीधा चलता है।
Exam Tip: शतरंज की गोटियों जैसे राजा, वजीर (मंत्री), प्यादा आदि की चालों को संक्षेप में याद रखें क्योंकि यह खेल की बुनियादी समझ के लिए जरूरी है।
Question 2. चित्र के साथ खेल के नाम का मिलान कीजिए। साथ ही यह भी लिखिए कि आप की स्थानीय भाषा में इस खेल को क्या कहते हैं-
Answer: चित्रों और पाठ के आधार पर खेलों के स्थानीय नाम निम्नलिखित हैं:
| खेल का नाम | खेल का विवरण | स्थानीय भाषा में नाम (सामान्य उदाहरण) |
|---|---|---|
| लट्टू | रस्सी की मदद से घुमाया जाने वाला काष्ठ-खिलौना | भौंहरा / लट्टू |
| साँप-सीढ़ी | बोर्ड पर पासे की मदद से खेला जाने वाला खेल | साँप-सीढ़ी |
| राजा-मंत्री-चोर-सिपाही | पर्चियों पर अंक लिखकर खेला जाने वाला खेल | चिट खेल / राजा-वजीर |
| गुट्टे | पाँच छोटे पत्थरों को हवा में उछालने वाला खेल | गिट्टे / पाँच पत्थर |
| अष्टा-चक्कन | कौड़ियों से खेला जाने वाला पारंपरिक बोर्ड खेल | चौपड़ / चंगापो |
Exam Tip: पारंपरिक भारतीय खेलों और उनके क्षेत्रीय नामों की सामान्य जानकारी आपके व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाती है।
पुस्तकालय या अन्य स्रोत से
Question 1. तेनालीरामन के किस्सों की पुस्तक अपने पुस्तकालय या किसी अन्य स्रोत से लेकर पढ़िए ।
Answer: विद्यार्थी अपने स्कूल के पुस्तकालय से 'तेनालीरामन की कहानियाँ' नामक पुस्तक प्राप्त कर सकते हैं और उनकी मनोरंजक कहानियों को पढ़ सकते हैं।
In simple words: छात्र स्कूल की लाइब्रेरी से तेनालीरामन की चतुर कहानियों की किताब लेकर खुद पढ़ें।
Exam Tip: कहानियाँ पढ़ने की आदत डालने से आपकी भाषा शैली और सोचने की क्षमता बेहतर होती है।
Question 2. ‘तेनालीरामन के किस्से’ नाम से मित्र-मंडली की एक बैठक आयोजित कर तेनालीरामन की बुद्धिमत्ता के किस्से सुनाइए ।
Answer: सभी छात्र अपने मित्रों के साथ मिलकर एक छोटा समूह बना सकते हैं और छुट्टी के दिन बारी-बारी से तेनालीरामन की मजेदार और चतुर कहानियाँ सुनाने का खेल खेल सकते हैं।
In simple words: अपने दोस्तों के साथ इकट्ठा होकर तेनालीरामन की कहानियाँ एक-दूसरे को सुनाएँ।
Exam Tip: समूह गतिविधियों में भाग लेने से आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और अभिव्यक्ति की क्षमता निखरती।
शतरंज की भूल भुलैया
Question. केवल नाम वाले शब्दों (संज्ञा) को एक-दूसरे से मिलाते हुए मंत्री को राजा तक पहुँचाँइए। ध्यान रहे कि आपको संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया को आपस में नहीं मिलाना है।
Answer: मंत्री को राजा तक पहुँचाने के लिए केवल संज्ञा (नाम वाले शब्दों) के सही मार्ग को नीचे दी गई तालिका में पीले रंग से दर्शाया गया है:
| मंत्री (शुरुआत) → | केरल ↓ | दस | वे | प्रभु → | घोड़ा ↓ | उस |
| पहला | कृष्णदेव राय ↓ | मीठा | दूसरा | वीणा ↑ | शेर → | हाथी ↓ |
| माता ← | तेनाली-रामन ← | हम | जहाज → | महल ↑ | इस | बंदर ↓ |
| घर ↓ | पुस्तक → | तुम | यमुना ↑ | मेरा | एक | सिपाही ↓ |
| मैं | आदमी ↓ | यह | नर्मदा ↑ | पीला | पढ़ना | पिता ↓ |
| आप | दरबार ↓ | पढ़ना | गंगा ↑ | नीला | लिखना | ऊँट ↓ |
| इस | अशर्फी → | भवन → | नदी ↑ | हमारा | मुझे | राजा (अंत) |
मंत्री → केरल → कृष्णदेव राय → तेनाली-रामन → माता → घर → पुस्तक → आदमी → दरबार → अशर्फी → भवन → नदी → गंगा → नर्मदा → यमुना → जहाज → महल → वीणा → प्रभु → घोड़ा → शेर → हाथी → बंदर → सिपाही → पिता → ऊँट → राजा
In simple words: इस खेल में हमें केवल नाम वाले शब्दों (संज्ञा) पर कदम बढ़ाते हुए रास्ता खोजना था। सर्वनाम या क्रिया शब्दों को छोड़कर सिर्फ संज्ञा के पीले रास्ते से होकर राजा तक पहुँचना है।
Exam Tip: 'संज्ञा' किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव के नाम को कहते हैं। सर्वनाम (वह, मैं), विशेषण (नीला, मीठा) और क्रिया (पढ़ना, लिखना) वाले शब्दों को रास्ते में शामिल न करें।
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