Get the most accurate NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 12 घर की याद here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest NCERT textbooks for Class 9 Hindi. Our expert-created answers for Class 9 Hindi are available for free download in PDF format.
Detailed Ganga Chapter 12 घर की याद NCERT Solutions for Class 9 Hindi
For Class 9 students, solving NCERT textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 9 Hindi solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Ganga Chapter 12 घर की याद solutions will improve your exam performance.
Class 9 Hindi Ganga Chapter 12 घर की याद NCERT Solutions PDF
Question 1. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क्यों लिखी?
(a) विदेश से मित्र के लिए
(b) युद्धभूमि से जनता के लिए
(c) जेल से परिवार के लिए
(d) यात्रा से किसी संबंधी के लिए
Answer: (c) जेल से परिवार के लिए
इस कविता में भवानीप्रसाद मिश्र अपने माता-पिता, भाई-बहनों और घर की मीठी यादों को संजोते हुए उनके प्रति अपना स्नेह और दूर रहने का कष्ट व्यक्त करते हैं। वे बार-बार कहते हैं कि "घर नजर में तिर रहा है" जो यह दर्शाता है कि वे बहुत अकेले और दूर हैं। कविता में स्पष्ट संकेत हैं कि वे किसी ऐसी मजबूरी या कैद में हैं जहाँ से वे घर नहीं लौट सकते, जो कि जेल की स्थिति को दर्शाता है। इसलिए, उन्होंने यह कविता जेल की सजा के दौरान अपने प्रियजनों को याद करते हुए लिखी थी।
In simple words: कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता जेल में बंद रहने के दौरान अपने परिवार की याद में लिखी थी।
Exam Tip: Remember that Bhawani Prasad Mishra was imprisoned during the Quit India Movement of 1942, which inspired him to write this poem.
Question 2. लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है?
(a) उत्साह और आवेग
(b) भय और क्रोध
(c) साहस और उमंग
(d) चिंता और बेचैनी
Answer: (d) चिंता और बेचैनी
कवि लगातार होने वाली बारिश के माध्यम से अपने अंदर उठने वाले दुखों और यादों को बयां करते हैं। "बहुत पानी गिर रहा है" और "प्राण मन घिरता रहा है" जैसी पंक्तियों से पता चलता है कि वे जेल के अकेलेपन में अत्यधिक du-khi और बेचैन हैं। यह बरसात उन्हें खुशी देने के बजाय उनके घर और परिवार की यादों को और ताजा कर देती है, जिससे उनकी तड़प काफी बढ़ जाती है। इसलिए, यह बरसता पानी उनकी चिंता और उदासी को साफ दर्शाता है।
In simple words: लगातार गिरती हुई बारिश कवि को उनके घर की याद दिलाकर उनके मन को बहुत उदास और बेचैन कर देती है।
Exam Tip: Rain in this poem serves as a powerful symbol (Uddipana) of the poet's emotional longing and sadness for his home.
Question 3. कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है?
(a) कमजोर और निष्क्रिय
(b) स्नेहमयी और दृढ़
(c) शिक्षित और अनुशासनप्रिय
(d) सरल और उदासीन
Answer: (b) स्नेहमयी और दृढ़
कवि ने अपनी माता के चरित्र को ममता से भरा और मानसिक रूप से बेहद मजबूत दर्शाया है। वे याद करते हैं कि माँ की गोद में सिर धरते ही उनके सारे कष्ट हवा हो जाते थे, जो माँ के निश्छल प्यार को दिखाता है। इसके साथ ही, जब भी उनके पिता निराश होते हैं, तो माँ उन्हें सांत्वना देती हैं और उनके अंदर ढांढस बंधाती हैं। यह बात साबित करती है कि उनकी माँ केवल कोमल और प्यारी ही नहीं, बल्कि गंभीर परिस्थितियों में बेहद मजबूत और धैर्यवान भी हैं।
In simple words: कविता में माँ को बहुत प्यार करने वाली और मुश्किल समय में हिम्मत बंधाने वाली एक मजबूत महिला के रूप में दिखाया गया है।
Exam Tip: Highlight both aspects of her character: her immense motherly affection and her strength in consoling the father.
Question 4. “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” पंक्ति के माध्यम से पिता के व्यक्तित्व की कैसी छवि प्रस्तुत की गई है?
(a) कर्मठ और सृजनशील
(b) साहसी और पराक्रमी
(c) दृढ़ और संवेदनशील
(d) प्रसन्नचित्त और सक्रिय
Answer: (c) दृढ़ और संवेदनशील
कवि ने पिता के व्यक्तित्व के दो विरोधी लेकिन सुंदर पक्षों को दर्शाने के लिए "वज्र-भुज" (फौलादी ताकत) और "नवनीत-सा उर" (मक्खन जैसा दिल) विशेषणों का उपयोग किया है। जहाँ "वज्र-भुज" उनके बाहरी बल, सेहत और फौलादी मजबूती को दर्शाता है, वहीं "नवनीत-सा उर" उनके भीतर छुपे मक्खन जैसे कोमल और ममतामयी मन को दिखाता है। यह विरोधाभास स्पष्ट करता है कि उनके पिता शरीर से जितने बलवान हैं, अंदर से उतने ही दयालु और संवेदनशील हैं।
In simple words: कवि के पिता शरीर से जितने फौलाद की तरह मजबूत हैं, मन से वे उतने ही मक्खन की तरह कोमल और दयालु हैं।
Exam Tip: This line uses contrast (Virodhabhasa) to establish that his father possessed physical strength alongside deep emotional tenderness.
Question 5. “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” पंक्ति किस ओर संकेत करती है?
(a) पिता की कठोरता
(b) पिता की भावुकता
(c) वर्षा की तीव्रता
(d) पिता की निर्बलता
Answer: (b) पिता की भावुकता
इस पंक्ति के जरिए कवि भवानीप्रसाद मिश्र अपने पिता के कोमल और स्नेही स्वभाव को उजागर करते हैं। "एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए" का तात्पर्य यह है कि वे छोटी सी भावुक बात पर भी अपनी आँखों के आंसुओं को रोक नहीं पाते। यह उनकी किसी तरह की कमजोरी को नहीं दिखाता, बल्कि यह उनके बच्चों के प्रति उनके असीम और कोमल प्रेम तथा भावुक स्वभाव का सुंदर प्रमाण है।
In simple words: यह पंक्ति दर्शाती है कि कवि के पिता दिल से बहुत भावुक हैं और ज़रा सी संवेदनशील बात पर भी रो पड़ते हैं।
Exam Tip: The 'Banyan tree' metaphor used by the poet shows that while the father is giant and strong, even a tiny leaf's fall (a minor worry) can move him to tears.
Question 6. “बिहन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर” पंक्ति में ‘परिताप’ शब्द से क्या संकेत मिलता है?
(a) घर का समृद्ध होना
(b) घर की सजावट
(c) घर में दुख का वातावरण
(d) घर की शांति
Answer: (c) घर में दुख का वातावरण
कवि ने "परिताप" शब्द का उपयोग भारी दुख, मानसिक क्लेश और गहन निराशा को दर्शाने के लिए किया है। जब विवाहित बहन अपने मायके (पिता के घर) बड़ी उमंग और खुशी के साथ आती है, तो उसे वहाँ भाई की कैद (जेल की सजा) की खबर मिलती है। इस दुखद समाचार के कारण पिता का घर खुशी के बजाय आंसुओं और संताप का घर बन जाता है। इसलिए, यह शब्द घर में फैले दुखद माहौल को दर्शाता है।
In simple words: 'परिताप' शब्द का अर्थ है भारी कष्ट। भाई के जेल में होने के कारण बहन के लिए मायका खुशियों के बजाय दुखों का घर बन गया है।
Exam Tip: Understand that 'Paritapa' indicates extreme psychological suffering or grief within the household due to the poet's absence.
Question 7. “और कहना मस्त हूँ मैं” पंक्ति में कवि का ऐसा कहना किस बात की ओर संकेत करता है?
(a) कवि अपने जीवन में बहुत खुश है।
(b) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।
(c) घर के लोगों के प्रति उदासीन है।
(d) कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है।
Answer: (b) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।
कवि सावन के बादलों को अपना संदेशवाहक बनाकर बार-बार कहते हैं कि घर जाकर मेरे कुशल-मंगल होने की बात कहना। वे जेल की तन्हाई और यातनाओं को छुपाकर अपने माता-पिता से झूठ बोलने को कहते हैं कि मैं यहाँ मस्त हूँ। वे वास्तव में अंदर से बेहद du-khi और टूटे हुए हैं, लेकिन वे नहीं चाहते कि उनके दुख के कारण उनके बूढ़े माता-पिता चिंता करें और बीमार पड़ें। इसलिए, वे अपने कष्टों को छिपाकर उन्हें तसल्ली देना चाहते हैं।
In simple words: कवि जेल में बहुत du-khi हैं, लेकिन वे नहीं चाहते कि उनका परिवार उनके लिए परेशान हो, इसलिए वे अपनी तकलीफों को छिपाते हैं।
Exam Tip: This line illustrates the poet's selflessness (Tyaga) and deep family love, choosing to suffer silently to protect his parents from worry.
Question 8. इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है?
(a) घर की शांति और सुरक्षा
(b) घर के सदस्यों के बीच का संबंध
(c) घर के निर्माण की प्रक्रिया
(d) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा
Answer: (d) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा
पूरी कविता के केंद्र में कवि की अपने घर से बिछड़ने की वेदना और जेल का सूनापन है। सावन के महीने में जब बाहर मूसलाधार बारिश होती है, तो जेल की कोठरी में अकेले बैठे कवि को अपने परिवार की याद घेर लेती है। वे अपनी कविता में घर के हर सदस्य के साथ अपने आत्मीय रिश्ते और घर से दूर रहने के असहनीय दर्द को बयां करते हैं। इसलिए, यह कविता मुख्य रूप से घर की याद और एकाकी जीवन के दर्द को प्रमुखता से दर्शाती है।
In simple words: इस कविता में कवि ने जेल में रहते हुए अपने घर की मीठी यादों और अकेलेपन की असहनीय पीड़ा को बहुत खूबसूरती से बयां किया है।
Exam Tip: The main theme (Kavya-Samyog) of the poem revolves around the nostalgia for home and the psychological torment of isolation in prison.
पेज 200 के प्रश्न उत्तर
मेरी समझ मेरे विचार
Question 1. कविता में वर्णित पिता के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिनसे उनका बहुआयामी रूप सामने आता है।
Answer: कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने अपने पूज्य पिता के चरित्र को कई सुंदर रूपों में हमारे सामने रखा है। उनके पिता शरीर से वज्र की तरह बहुत मजबूत और तंदुरुस्त हैं। वे रोज़ नियमित रूप से कसरत करते हैं और धार्मिक गीता का पाठ भी करते हैं, जो उनके अनुशासन को दिखाता है। वे बहुत निडर और साहसी हैं, उनके मन में मौत या शेर का भी कोई डर नहीं है। लेकिन इस कड़े स्वभाव के पीछे उनका दिल मक्खन की तरह बहुत नरम और दयालु है। वे अपने परिवार और बच्चों से बहुत गहरा प्यार करते हैं और छोटी सी चिंता होने पर भी उनकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं। वे बहुत खुशमिजाज इंसान हैं और घर में हमेशा खुशियाँ फैलाते हैं। इस प्रकार, उनके पिता का चरित्र बल, साहस, नियम, ममता और हंसी का एक बहुत सुंदर संगम है।
In simple words: कवि के पिता बहुत साहसी और अनुशासित हैं, लेकिन साथ ही वे बहुत दयालु, हंसमुख और अपने बच्चों से बेहद प्यार करने वाले इंसान हैं।
Exam Tip: Combine both physical aspects (like exercise, lack of fear) and emotional traits (like kindness, deep love for his children) to write a comprehensive answer.
Question 2. “दुख डटकर ठेलता हूँ” यह कथन मनुष्य के संघर्षशील स्वभाव को उजागर करता है। कविता के आधार पर बताइए कि कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?
Answer: कवि जेल के अकेलेपन और यातनाओं को सहन करते हुए भी अपने घरवालों को हिम्मत और सब्र का संदेश भेजते हैं। वे जेल की कोठरी में रहकर भी अपनी तकलीफों को छिपाते हैं, ताकि उनके माता-पिता को दुख न हो, जो उनके गहरे धैर्य को दर्शाता है। वे बादलों से कहते हैं कि घर जाकर कहना "मैं मजे में हूँ," जो उनके असीम साहस का परिचय देता है। अपने प्यारे परिवार और खुशियों भरे घर को देश की आजादी के लिए छोड़ देना उनका सबसे बड़ा त्याग है। "दुख डटकर ठेलता हूँ" की भावना यह साबित करती है कि वे मुसीबतों से डरकर भागते नहीं, बल्कि उनका बहादुरी से सामना करते हैं।
In simple words: कवि जेल के दुखों को हंसकर सहते हैं, देश की आजादी के लिए अपने घर का त्याग करते हैं, और अपने परिवार को चिंता से बचाने के लिए अत्यधिक साहस और धैर्य दिखाते हैं।
Exam Tip: Use keywords like 'self-reliance,' 'moral strength,' and 'patriotism' (Deshbhakti) to describe how the poet conquers his sorrow.
Question 3. कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?
Answer: कविता में लगातार गिरने वाली बारिश का वर्णन कवि के मन की उदासी और घर की यादों को बहुत गहरे रूप से जोड़ता है। बाहर जितनी अधिक बारिश होती है, कवि के दिल में अपने माता-पिता और भाई-बहनों की यादें उतनी ही गहरी होने लगती हैं। बारिश का पानी उनके बहते हुए आंसुओं और उनके अंदर की तड़प को दर्शाता है। लेकिन वे इस दुख से भागते नहीं, बल्कि सावन के बादलों से कहते हैं कि वे घर जाकर उनका कुशल संदेश दें। वे अपने परिवार को खुश रखना चाहते हैं, इसलिए वे बादलों के जरिए झूठी तसल्ली भेजते हैं। इस प्रकार, वर्षा उनके गहरे अकेलेपन, परिवार के प्रति उनके असीम स्नेह और विपरीत समय में उनके अडिग धैर्य को दर्शाता है।
In simple words: बाहर की तेज बारिश कवि के आंसुओं और उनके अंदर के गहरे दुख को दिखाती है, जिससे उनकी अपने परिवार के लिए याद और भी बढ़ जाती है।
Exam Tip: Explain how rain serves as an emotional catalyst (Uddipana Vibhava) that intensifies the poet's feelings of nostalgia (Ghar ki Yaad) and loneliness.
Question 4. कविता से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए और भाव स्पष्ट कीजिए जिनसे माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय मिलता है।
Answer: कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने अपनी माता के चरित्र को बहुत ही भावुक और मजबूत दिखाया है। माँ की भावनात्मक ताकत इन पंक्तियों में दिखाई देती है: "और माँ ने कहा होगा, दुख कितना बहा होगा, आँख में किसलिए पानी, वहाँ अच्छा है भवानी, वह तुम्हारा मन समझकर, और अपनापन समझकर, गया है सो ठीक ही है, यह तुम्हारी लीक ही है।"
इन पंक्तियों का भाव यह है कि जब कवि के पिता अपने बेटे को याद करके रोते हैं, तो माँ खुद का दुख भूलकर उन्हें दिलासा देती हैं। वे कहती हैं कि भवानी अपने परिवार और देश के आदर्शों को मानकर ही जेल गया है, इसलिए उसका ऐसा करना बिल्कुल सही है। अपने कलेजे के टुकड़े को दूर भेजने के दर्द को चुपचाप सहते हुए भी वे उसे सही बताती हैं। यह दिखाता है कि माँ अंदर से कितनी साहसी और धैर्यवान हैं, जो खुद du-khi होकर भी पूरे परिवार को ढांढस बंधाती हैं।
In simple words: माँ अपने बेटे के दूर जाने के दर्द को सहती हैं और रोते हुए पिता को समझाती हैं कि उनके बेटे ने देश के लिए जेल जाकर बिल्कुल सही काम किया है।
Exam Tip: Focus on how the mother utilizes the family's traditions (Leeka) of patriotism to comfort her grieving husband.
Question 5. कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?
Answer: मुझे इस कविता का यह हिस्सा सबसे अधिक भावुक और दिल को छूने वाला लगता है:
"माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर,"
यह पंक्ति माँ की असीम ममता और उनके अनमोल प्यार को बहुत ही सीधे शब्दों में बयां करती है। माँ की गोद एक ऐसा सुरक्षित और पावन स्थान है, जहाँ सिर धरते ही बच्चे के सारे दुख और परेशानियाँ गायब हो जाती हैं। यह हिस्सा हर व्यक्ति के दिल को छूता है क्योंकि यह हमारे असली जीवन के अनुभव जैसा है। जब भी हम किसी मुसीबत या चिंता में होते हैं, तो माँ का प्यार ही हमें सबसे ज्यादा तसल्ली और शांति देता है। कवि ने बहुत कम शब्दों में बहुत गहरी भावना व्यक्त की है, जो हर पाठक को अपने घर और माँ की याद दिला देती है।
In simple words: माँ की गोद में सिर रखते ही सारे दुख दूर हो जाते हैं, यह हिस्सा सबसे प्यारा है क्योंकि यह माँ के सच्चे और गहरे प्यार को दिखाता है।
Exam Tip: This line utilizes simple, everyday words to evoke a highly universal emotion of motherly security (Vatsalya Rasa).
कवि परिचय – भवानीप्रसाद मिश्र
- जन्म एवं समय: भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म साल 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (जिसे अब नर्मदापुरम कहा जाता है) में हुआ था। उनका निधन वर्ष 1985 में हुआ।
- आजादी की लड़ाई में योगदान: वे उन कवियों में से एक थे जिन्होंने हिंदी साहित्य रचने के साथ-साथ देश की आजादी के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष किया। उन्होंने 1942 के ऐतिहासिक 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग लिया, जिसके कारण अंग्रेजों ने उन्हें तीन साल की कैद की सजा सुनाई थी।
- मुख्य कृतियाँ: उनकी प्रमुख रचनाओं में 'गीत-फ़रोश', 'खुशबू के शिलालेख', 'चकित है दुख', 'अँधेरी कविताएँ', 'बुनी हुई रस्सी', 'कवितांतर', 'शतदल', 'गांधी-पंचशती' and 'त्रिकाल संध्या' शामिल हैं। उनके काव्य संग्रह 'बुनी हुई रस्सी' के लिए उन्हें प्रसिद्ध 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था।
- संपादन कार्य: मिश्र जी ने राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के लिए अपना योगदान दिया और साल 1952 से 1955 के दौरान हैदराबाद से निकलने वाली प्रसिद्ध पत्रिका 'कल्पना' का संपादन संभाला। वे 1955 से 1958 तक आकाशवाणी के हिंदी कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे और उन्होंने पूरे 'गांधी वाङ्मय' के संपादन का काम भी बखूबी किया।
- पाठ की पृष्ठभूमि: उन्होंने 'घर की याद' कविता 1942 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल में सजा काटने के समय लिखी थी। इस कविता में कवि सावन के बरसते बादलों को अपने घर संदेश भेजने के लिए माध्यम बनाते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्रस्तुत कविता की रचना वर्ष 1942 के ऐतिहासिक 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान कारागार में की गई थी। ब्रिटिश शासन द्वारा कवि को तीन वर्ष के कारावास का दंड दिया गया था। जेल की एकांत कोठरी में सावन की वर्षा को देखकर कवि के हृदय में अपने परिजनों की मधुर यादें उमड़ने लगती हैं।
- प्रथम खंड - वर्षा और घर की याद: कविता का प्रारंभ सावन की एक वर्षा वाली रात में कारागार की कोठरी से होता है। रातभर लगातार पानी गिरता रहता है, जिससे कवि के प्राण और मन अपने परिवार की स्मृतियों से घिर जाते हैं। सवेरा कब हुआ, इसका आभास कवि को ठीक से नहीं मिल पाता क्योंकि चारों ओर बादलों का सघन अंधकार छाया रहता है। “गििर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर।” यह ध्वन्यात्मक वर्षा-चित्रण कवि की व्याकुलता को और गहरा करता है। भारी बरसात के कारण घर की छवि उनकी आँखों में तैरने लगती है - वह सुखी घर जो अपनों से भरपूर है लेकिन आज उनसे बहुत दूर है।
- द्वितीय खंड - परिवार की स्मृति: कवि के सुखी परिवार में चार भाई और चार बहनें हैं। उनकी बहन मायके आई हुई है - “बहििन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर!” यह पंक्ति अत्यंत कारुणिक है क्योंकि पुत्र के कारागार में होने के कारण पिता का घर प्रसन्नता के बजाय संताप का केंद्र बन गया है। जेल में बीतने वाला हर एक क्षण कवि के लिए अत्यधिक लंबा हो गया है - “एक छििन सौ बरस है रे।” आज उनके स्नेहपूर्ण परिवार के सभी सदस्य अपनी गहरी आत्मीयता के साथ आपस में जुड़े हुए हैं।
- तृतीय खंड - माँ की छवि: कवि की माता अनपढ़ हैं और अत्यधिक कष्टों को सहने के कारण दुःख में डूबी रहती हैं। वे ममता की प्रतिमूर्ति हैं, जिनकी गोद में सिर रख लेने मात्र से मनुष्य के सारे संताप दूर हो जाते हैं। उनकी वात्सल्यमयी स्नेह-धारा का प्रभाव जेल की कोठरी तक भी महसूस किया जा सकता है। परंतु अशिक्षित होने के कारण वे पत्र नहीं लिख सकतीं, इसलिए उनका कोई संदेश कवि तक नहीं आ पाता।
- चतुर्थ खंड - पिता की छवि: कवि के पिता अत्यंत साहसी और बलशाली हैं - “पिताजी भोले बहादुर, वज्र-भुज नवनीत-सा उर”। उनकी भुजाओं में वज्र जैसी कठोर शक्ति है, लेकिन उनका हृदय मक्खन के समान अत्यंत कोमल और संवेदनशील है। वृद्धावस्था के बावजूद उनमें गजब की फुर्ती है; वे आज भी तेजी से दौड़ सकते हैं और बच्चों की तरह खिलखिलाकर हँस सकते हैं। वे मृत्यु या संकटों के सामने कभी विचलित नहीं होते। नियमित रूप से गीता का पाठ करने, व्यायाम में दो सौ साठ दंड बैठक लगाने और मुगदर घुमाने के बाद जब वे नीचे आते हैं, तो अपने पाँचवें पुत्र (कवि) की अनुपस्थिति देखकर उनकी आँखें भर आती हैं।
- पंचम खंड - पाँचवें पुत्र की पीड़ा: पिता जी अपने सभी बेटों में पाँचवें पुत्र (कवि) को सर्वाधिक प्रिय मानते हुए उसे सदैव 'सोने पर सुहागा' कहकर पुकारते थे। आज अपने उस लाडले पुत्र को सामने न पाकर वे अत्यंत भावुक होकर रो पड़े होंगे। उधर जेल में बंद कवि स्वयं को अत्यंत भाग्यहीन महसूस करता है कि वह अपने स्नेही परिवार से अलग अकेला बैठा है।
- षष्ठ खंड - माँ की कल्पित बातें: कवि कल्पना करता है कि उनके पिता को रोता देखकर माता ने ढांढस बंधाते हुए कहा होगा - “आँख में किसलिए पानी, वहाँ अच्छा है भवानी।” माँ समझाती हैं कि उनका पुत्र अपनी पारिवारिक मर्यादा और देश के प्रति कर्तव्य निभाने के लिए ही जेल गया है। यदि वह कदम पीछे हटाता तो वह अपनी माता की कोख को लज्जित करता। इसलिए वे पिता से कहती हैं कि वे अपने दिल को कमजोर न करें, अन्यथा उन्हें रोता देखकर घर के अन्य बच्चे भी रोने लगेंगे।
- सप्तम खंड - पिता की कल्पित बातें: माँ की बात सुनकर पिता जी ने स्वयं को संभालते हुए कहा होगा - “कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ, धीर मैं खोता कहाँ हूँ।” परंतु कवि जानता है कि बाहर हो रही बारिश को देखकर उन्हें अपने उस भवानी की याद सता रही होगी जिसे वर्षा ऋतु अत्यंत प्रिय थी। वह उन्मुक्त स्वभाव से खुले बदन घूमता था और बगीचे में लौकी के बीज बोया करता था। पिता जी ने हिम्मत दिखाने के लिए कहा तो होगा कि वे नहीं रोएंगे, परंतु भीतर ही भीतर उनकी आँखों से अश्रु बह निकले होंगे।
- अष्टम खंड - परिवार का दृश्य: घर में भाई और बहनों का आपस में प्रगाढ़ स्नेह है और माता-पिता उनके रक्षक हैं। लेकिन पुत्र के वियोग के कारण घर के सभी सदस्य अत्यंत दुखी हैं और समाज के सामने अपने आँसू भी नहीं बहा पा रहे हैं, जिससे उनका मन अंदर ही अंदर छटपटा रहा है।
- नवम खंड - पानी थमने के बाद: बाहर की बरसात थमने के बाद कवि का मन अत्यंत भावुक हो जाता है। आसमान में बादलों का डेरा इस प्रकार प्रतीत होता है जैसे माँ ने अपने आँगन को लिपा-पुताकर तैयार किया हो। इसी बीच किसी पक्षी का चहकना कवि के हृदय के गहरे घावों को हरा कर देता है।
- दशम खंड - पिता का विस्तृत चित्रण: पिता का व्यक्तित्व बरगद के विशाल वृक्ष के समान दृढ़ और संरक्षक है - “देह एक पहाड़ जैसे, मन कि बड़ का झाड़ जैसे।” उनका हृदय इतना संवेदनशील है कि जरा सी विपत्ति आने पर उनका ममत्व उमड़ पड़ता है। उनके व्यक्तित्व में जितनी गंभीरता और अनुशासन है, उतनी ही उनके भीतर अपनों के प्रति गहरी चिंता भी छिपी है।
- अंतिम खंड - बादल को संदेश: कवि सावन के कल्याणकारी बादलों को संबोधित करते हुए कहता है - “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन।” वे बादलों से प्रार्थना करते हैं कि वे खूब बरसें, लेकिन उनके माता-पिता की आँखों से आँसू न बहें और वे अपने पाँचवें पुत्र के लिए तड़पें नहीं। कवि बादलों से आग्रह करता है कि वे घर जाकर कहें कि उनका बेटा मजे में है, लिख-पढ़ रहा है और स्वस्थ है। वे बादलों को सचेत करते हैं कि वे पिता जी को कारागार के कष्टों के बारे में कुछ न बताएं और यह भी न जाहिर होने दें कि उनका पुत्र अंदर से टूट चुका है और मौन व निराश रहता है।
पंक्तियों का भावार्थ
- “आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, रात-भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है।”
भावार्थ: जेल की एकांत रात में जब बाहर सावन की वर्षा लगातार बरसती रहती है, तब केवल पानी ही नहीं बरसता बल्कि कवि का हृदय और मन भी अपने घर-परिवार की मधुर यादों से घिर जाता है। यह बाह्य वर्षा उनके मन की आंतरिक व्याकुलता और छटपटाहट का प्रतीक बन जाती है। - “गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर।”
भावार्थ: अत्यंत काव्यात्मक शैली में रचित इस पंक्ति में वर्षा की बूंदों के गिरने, पत्तों के हिलने और हवा के बहने की नादात्मक ध्वनियों का सुंदर संयोजन है। ये प्राकृतिक घटनाएँ कारागार में बंद कवि के एकाकीपन और उनकी आंतरिक पीड़ा को और अधिक सघन बना देती हैं। - “घर कि मुझसे दूर है जो, घर खुशी का पूर है जो।”
भावार्थ: कवि अपने उस घर को याद करता है जो खुशियों से सराबोर रहता था, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम के कारण आज वह उस सुखद वातावरण से अत्यंत दूर जेल की सलाखों के पीछे रहने को विवश है। यहाँ 'पूर' शब्द पूर्णता, प्रचुरता और हर्ष की अधिकता को दर्शाता है। - “बहििन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर!”
भावार्थ: सामान्यतः किसी विवाहित बहन का अपने मायके आना अत्यंत हर्ष का विषय होता है। परंतु वर्तमान में उनका भाई जेल में बंद है, जिसके कारण खुशियों का वह घर अब अत्यंत गहरे दुःख, शोक और मानसिक संताप के केंद्र में बदल गया है। यह पंक्ति अत्यंत मार्मिक है। - “माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर।”
भावार्थ: कवि अपनी माता के असीम वात्सल्य को याद करते हुए कहता है कि माँ का आँचल और उनकी गोद इस संसार का सबसे सुरक्षित और सुखद आश्रय है। उनकी गोद में सिर रखते ही मनुष्य जीवन की बड़ी से बड़ी पीड़ा और कष्टों को पलभर में भूल जाता है। - “पिताजी भोले बहादुर, वज्र-भुज नवनीत-सा उर।”
भावार्थ: इस पंक्ति में कवि के पिता के बहुआयामी व्यक्तित्व के विरोधी लेकिन पूरक गुणों का अनूठा चित्रण है। जहाँ बाहरी रूप से उनकी भुजाओं में वज्र जैसी सुदृढ़ता, शक्ति और वीरता है, वहीं आंतरिक रूप से उनका हृदय मक्खन (नवनीत) के समान अत्यंत संवेदनशील, कोमल और दयालु है। - “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए, एक हल्की चोट लग ले, दूध की नदी उमग ले।”
भावार्थ: यह पंक्ति पिता के अत्यंत भावुक और स्नेहमयी स्वभाव को प्रकट करती है। वे बरगद के विशाल वृक्ष के समान मजबूत हैं, लेकिन यदि उनके बच्चों को थोड़ी सी भी तकलीफ (पत्ता टूटना) होती है, तो उनकी आँखों से ममता और आँसुओं की अजस्र धारा फूट पड़ती है। - “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन, तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें।”
भावार्थ: कवि सावन के कल्याणकारी बादलों को संबोधित करते हुए कहता है कि तुम प्रकृति को तृप्त करने के लिए जितना चाहो उतना बरसो, लेकिन मेरे घर जाकर ऐसी सुखद परिस्थितियाँ बनाना कि मेरे माता-पिता की आँखों से वियोग के आँसू न बहें और वे अपने पाँचवें पुत्र के लिए व्याकुल न हों। - “मैं मजे में हूँ सही है, घर नहीं हूँ बस यही है, किंतु यह बस बड़ा बस है, इसी बस से सब विरस है।”
भावार्थ: कवि बादलों से कहता है कि वे घर पर संदेश दें कि मैं यहाँ कुशल से हूँ, बस केवल घर पर उपस्थित नहीं हूँ। परंतु कवि स्वयं स्वीकार करता है कि यह 'बस' कोई छोटा शब्द नहीं है, बल्कि अपनों से दूर होने की यह विवशता इतनी बड़ी है कि इसके कारण जीवन का सारा आनंद समाप्त हो गया है और सब कुछ नीरस लगने लगा है। - “और कहना मस्त हूँ मैं, कातने में व्यस्त हूँ मैं, वजन सत्तर सेर मेरा, और भोजन ढेर मेरा।”
भावार्थ: कवि बादलों के माध्यम से अपने परिवार को आश्वस्त करना चाहता है कि वे कारागार में पूरी तरह स्वस्थ, प्रसन्न और व्यस्त हैं। वे चरखा कातकर अपना समय सार्थक कर रहे हैं और उनका स्वास्थ्य भी उत्तम है। यह सब झूठ केवल उनके परिवार को अत्यधिक चिंता और मानसिक आघात से बचाने की एक ममतामयी कोशिश है। 'कातना' यहाँ महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन के प्रति उनकी निष्ठा को भी दर्शाता है।
कठिन शब्द और उनके अर्थ
| कठिन शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| घनेरा/घना | गाढ़ा, सघन, जिसके अवयव अत्यंत समीप हों |
| तिर/तिरना | तैरना, ऊपर आना, पार होना |
| परिताप | अत्यधिक दुःख, गहरा शोक, मानसिक कष्ट |
| चतुर्दिक् | चारों दिशाओं में, चारों ओर |
| वज्र | अत्यंत कठोर धातु, जिस पर किसी चोट का प्रभाव न पड़े |
| उर | हृदय, अंतःकरण, मन |
| झंझा | तीव्र आंधी-तूफान, तेज हवा के साथ वर्षा |
| लरजता/लरजना | काँपना, हिलना-डुलना, भयभीत होना |
| धीर | धैर्यवान, जिसका मन अशांत परिस्थितियों में भी विचलित न हो |
| झारी | जल छिड़कने के काम आने वाला टोंटीदार पात्र |
| बेला | एक सुगंधित फूल, मोगरा |
| फलानी/फलाना | कोई निश्चित व्यक्ति या वस्तु, अमुक |
| क्षितिज | वह काल्पनिक स्थान जहाँ धरती और आकाश आपस में मिलते हुए प्रतीत होते हैं |
| तृषा | तीव्र प्यास, प्रबल इच्छा, अभिलाषा |
| विरस | स्वादहीन, नीरस, नीरसता से भरा हुआ, अरुचिकर |
| अस्त | डूबा हुआ, ओझल, जीवन का अंत या पतन |
व्याकरण - ध्वन्यात्मक शब्द
इस कविता की सबसे बड़ी भाषाई विशेषता इसकी नादात्मकता अथवा ध्वन्यात्मकता है। यहाँ शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि वे श्रवण मात्र से ही मन-मस्तिष्क में एक सजीव चित्र उपस्थित कर देते हैं।
- झरा-झर - पानी के तेज बहाव की ध्वनि
- हरा-हर - पत्तों के हिलने की आवाज
- सर-सर - हवा के बहने की आवाज
- थर-थर - काँपने की ध्वनि
“गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर।” इस पंक्ति में प्रकृति की चार ध्वनियाँ और कवि की भावनाएँ एक साथ व्यक्त हुई हैं।
व्याकरण - शब्दों की व्याकरणिक पहचान
- “पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा”
- 'बुढ़ापा' शब्द है - संज्ञा (भाववाचक)
- 'व्यापा' शब्द है - क्रिया
- 'जिनको' शब्द है - सर्वनाम
- “खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह”
- 'खुले' शब्द है - विशेषण
- 'वह' शब्द है - सर्वनाम
- 'बदन' शब्द है - संज्ञा
- 'फिरता' शब्द है - क्रिया
- “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए”
- 'एक' शब्द है - संख्यावाचक विशेषण
- 'फूट जाए' है - क्रिया
- 'पत्ता' शब्द है - संज्ञा
- “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन”
- 'सजीले' शब्द है - विशेषण
- 'मेरे' शब्द है - सर्वनाम
- 'सावन' शब्द है - संज्ञा
परीक्षा के लिए अतिरिक्त प्रश्न उत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
Question 1. भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म कब और कहाँ हुआ?
Answer: प्रसिद्ध कवि भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म वर्ष 1913 में मध्य प्रदेश राज्य के होशंगाबाद जिले (जिसे वर्तमान में नर्मदापुरम के नाम से जाना जाता है) में हुआ था।
In simple words: कवि भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (नर्मदापुरम) में हुआ था।
Exam Tip: जन्म के वर्ष और स्थान (राज्य सहित) का स्पष्ट उल्लेख अवश्य करें।
Question 2. “घर की याद” कविता किस अवसर पर और कब लिखी गई?
Answer: इस कविता की रचना वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान जेल में की गई थी, जब सावन की रिमझिम वर्षा को देखकर कवि को अपने घर और परिजनों की स्मृतियों ने घेर लिया था।
In simple words: यह कविता 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के समय जेल में लिखी गई, जब बारिश देखकर कवि को अपने घर की याद आई।
Exam Tip: उत्तर में 'भारत छोड़ो आंदोलन' और 'वर्ष 1942' के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करना अनिवार्य है।
Question 3. भवानीप्रसाद मिश्र को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस रचना पर मिला?
Answer: भवानीप्रसाद मिश्र जी को उनकी प्रसिद्ध काव्य कृति 'बुनी हुई रस्सी' के लिए प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
In simple words: उन्हें 'बुनी हुई रस्सी' नाम के कविता संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
Exam Tip: रचना का नाम 'बुनी हुई रस्सी' उद्धरण चिह्नों के साथ सही वर्तनी में लिखें।
Question 4. “परिताप” शब्द का क्या अर्थ है?
Answer: साहित्यिक भाषा में 'परिताप' शब्द का अर्थ अत्यंत कष्ट, गहरा दुख, संताप, शोक अथवा अत्यधिक मानसिक या शारीरिक वेदना से होता है।
In simple words: 'परिताप' का अर्थ बहुत ज्यादा दुःख, शोक या कष्ट होता है।
Exam Tip: अर्थ के रूप में 'अत्यधिक दुःख' और 'शोक' जैसे सटीक पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग करें।
Question 5. “नवनीत” शब्द का क्या अर्थ है?
Answer: 'नवनीत' शब्द का मूल अर्थ नव-निर्मित या ताजा मक्खन होता है। इस काव्य रचना में कवि ने अपने पिता के स्नेहमयी हृदय की कोमलता की तुलना मक्खन से करने के लिए इस शब्द का प्रयोग किया है।
In simple words: 'नवनीत' का अर्थ ताजा मक्खन होता है। कविता में पिता के दिल को मक्खन जैसा कोमल बताया गया है।
Exam Tip: शब्दार्थ के साथ कविता में उसके संदर्भ (पिता के हृदय की कोमलता) को स्पष्ट करने से उत्तर उत्कृष्ट बनता है।
Question 6. कवि परिवार में कुल कितने भाई-बहन हैं?
Answer: कवि के गृह-संसार में कुल चार भाई और चार बहनें हैं, जिनमें स्वयं कवि भवानीप्रसाद मिश्र अपने माता-पिता की पाँचवीं संतान के रूप में स्थान रखते हैं।
In simple words: कवि के परिवार में चार भाई और चार बहनें हैं। वे खुद अपने माता-पिता के पाँचवें बच्चे हैं।
Exam Tip: कुल संख्या के साथ कवि के पाँचवें स्थान (पाँचवें पुत्र) का उल्लेख अवश्य करें।
Question 7. “वज्र” शब्द का क्या अर्थ है?
Answer: 'वज्र' शब्द का अभिप्राय अत्यधिक कठोर, अभेद्य अथवा अत्यंत शक्तिशाली धातु या अस्त्र से है। कविता में पिता की भुजाओं की शक्ति और उनकी शारीरिक सुदृढ़ता को दर्शाने के लिए उनकी तुलना वज्र से की गई है।
In simple words: 'वज्र' का अर्थ बहुत कठोर और मजबूत होता है। कविता में पिता के हाथों को वज्र जैसा बलवान कहा गया है।
Exam Tip: 'अत्यंत कठोर' अर्थ लिखने के साथ पिता के संदर्भ को जोड़ना न भूलें।
Question 8. कविता में कवि ने किसे दूत (संदेशवाहक) बनाया है?
Answer: इस कविता के अंतर्गत कवि ने वर्षा ऋतु के सजीले बादलों को अपना दूत (संदेशवाहक) नियुक्त किया है, जिसके माध्यम से वे कारागार से अपने घर-परिवार तक सकुशलता का संदेश पहुँचाना चाहते हैं।
In simple words: कवि ने बारिश के बादलों को अपना संदेशवाहक बनाया है ताकि वे घर पर उनकी खबर पहुँचा सकें।
Exam Tip: 'सजीले सावन के बादलों' को संदेशवाहक के रूप में उल्लेखित करें।
Question 9. “अभागा” शब्द का क्या अर्थ है?
Answer: 'अभागा' शब्द का सामान्य अर्थ भाग्यहीन या बदकिस्मत होता है। प्रस्तुत काव्य में कवि स्वयं को अपने पिता का अत्यंत लाडला पुत्र होने के बाद भी कारावास में बंदी होने के कारण 'अभागा' कहकर अपनी विवशता को प्रकट करते हैं।
In simple words: 'अभागा' का अर्थ बदकिस्मत होता है। कवि खुद को अभागा कहते हैं क्योंकि वे अपने पिता के प्यारे बेटे होकर भी जेल में बंद हैं।
Exam Tip: इस उत्तर में विडंबना (पिता के प्रिय होने के बावजूद जेल में होना) को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
Question 10. “धीर” शब्द का क्या अर्थ है?
Answer: 'धीर' शब्द का अर्थ अत्यंत धैर्यवान, शांत चित्त अथवा गंभीर व्यक्ति से है, जो विपरीत और अशांत परिस्थितियों में भी अपने मानसिक संतुलन और संकल्प को डगमगाने नहीं देता।
In simple words: 'धीर' का मतलब होता है धैर्य रखने वाला, जो बड़ी मुसीबत में भी शांत और मजबूत बना रहे।
Exam Tip: अर्थ में 'धैर्यवान' और 'विपरीत परिस्थितियों में विचलित न होने वाला' दोनों भावों को स्पष्ट करें।
Question 11. कवि पाँचवाँ पुत्र है - पिता जी उसे क्या कहते रहे हैं?
Answer: कवि के पिता उन्हें सदैव अपने अन्य पुत्रों में 'सोने पर सुहागा' कहकर संबोधित करते थे, जिसका अर्थ है कि वे अपने पिता के जीवन के परम गौरव, सबसे लाडले और अत्यंत प्रिय पुत्र थे।
In simple words: पिता जी कवि को 'सोने पर सुहागा' कहते थे, जिसका मतलब है कि वे अपने सभी भाइयों में सबसे प्यारे और पिता की सबसे बड़ी खुशी थे।
Exam Tip: 'सोने पर सुहागा' मुहावरे का उल्लेख करते हुए उसके अर्थ (परम प्रिय होना) को अवश्य स्पष्ट करें।
Question 12. “विरस” शब्द का क्या अर्थ है?
Answer: 'विरस' शब्द का अभिप्राय पूरी तरह से रसहीन, फीका, अरुचिकर अथवा दुःखदायी होने से है। कविता के संदर्भ में, घर और परिवार से दूर रहने के कारण कवि का जीवन पूर्णतः उत्साहहीन और नीरस (विरस) हो गया है।
In simple words: 'विरस' का अर्थ नीरस या बेस्वाद होता है। जेल में घर से दूर रहने के कारण कवि को सब कुछ फीका और उदास लगता है।
Exam Tip: शब्दार्थ के साथ 'घर की अनुपस्थिति में जीवन के नीरस होने' वाले संदर्भ को अवश्य जोड़ें।
Question 13. कविता में “कातने” का क्या संदर्भ है?
Answer: कविता में प्रयुक्त 'कातने' शब्द का तात्पर्य चरखे के माध्यम से सूत कातने की प्रक्रिया से है। यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन और आत्मनिर्भरता का एक प्रमुख प्रतीक था, जिसे जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानी स्वाधीनता के प्रति अपनी निष्ठा के रूप में करते थे।
In simple words: 'कातने' का मतलब चरखे पर सूत बनाना है, जो गांधी जी के स्वदेशी आंदोलन और आजादी की लड़ाई का एक बड़ा प्रतीक था।
Exam Tip: 'स्वदेशी आंदोलन' और 'गांधीवादी दर्शन' के संदर्भ में चरखा कातने के महत्व को रेखांकित करें।
Question 14. “बड़” शब्द का क्या अर्थ है?
Answer: लोक भाषा में 'बड़' शब्द का अर्थ वटवृक्ष या बरगद के पेड़ से है। प्रस्तुत कविता में कवि ने अपने पिता के विशाल, छायादार और संरक्षक स्वभाव की तुलना बरगद के मजबूत पेड़ से की है।
In simple words: 'बड़' का अर्थ बरगद का पेड़ होता है। कविता में पिता के विशाल और छाया देने वाले दिल की तुलना बरगद से की गई है।
Exam Tip: वटवृक्ष की विशालता और छाया देने के गुण को पिता के संरक्षक स्वभाव से जोड़ें।
Question 15. “चतुर्दिक्” शब्द का क्या अर्थ है?
Answer: संस्कृत निष्ठ 'चतुर्दिक्' शब्द का अर्थ चारों दिशाओं में अथवा चारों ओर से होता है। कविता के परिप्रेक्ष्य में, इसका अर्थ है कि घर की स्मृतियाँ कवि को हर दिशा से पूरी तरह से घेरे हुए हैं।
In simple words: 'चतुर्दिक्' का अर्थ चारों तरफ या चारों दिशाओं में होता है। कविता में घर की यादें कवि को चारों ओर से घेर लेती हैं।
Exam Tip: 'चारों दिशाओं' और 'चारों ओर' जैसे सटीक हिंदी अर्थों का स्पष्ट रूप से प्रयोग करें।
लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
Question 1. “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” पंक्ति में पिता के व्यक्तित्व का कौन-सा पहलू उभरता है?
Answer: इस पंक्ति के माध्यम से पिता के चरित्र की दो विरोधाभासी परंतु सुंदर और पूरक विशेषताओं का पता चलता है। 'वज्र-भुज' का अर्थ है कि उनकी भुजाएँ वज्र की भाँति अत्यधिक सुदृढ़, शक्तिशाली और कर्मठ हैं, जो उनके बाहरी पराक्रम और कठोर अनुशासन को दर्शाती हैं। वहीं दूसरी ओर 'नवनीत-सा उर' उनके आंतरिक ममत्व, स्नेह और दयालु स्वभाव को प्रदर्शित करता है, जो मक्खन के समान अत्यंत कोमल और संवेदनशील है। यह विरोधाभास उनके बहुआयामी और आदर्श पिता के रूप को व्यक्त करता है।
In simple words: इस पंक्ति से पता चलता है कि पिता जी शरीर से बहुत मजबूत और वीर थे, लेकिन उनका दिल मक्खन की तरह बहुत कोमल और दयालु था।
Exam Tip: उत्तर में पिता के बाहरी सुदृढ़ व्यक्तित्व (वज्र-भुज) और आंतरिक कोमलता (नवनीत-सा उर) दोनों का अलग-अलग विश्लेषण करें।
Question 2. कविता में वर्षा किस प्रकार कवि के भावों का प्रतीक बनती है?
Answer: कविता में बाहर हो रही सावन की बरसात कवि के मन की आंतरिक पीड़ा और व्याकुलता का सजीव प्रतीक बन जाती है। जिस तीव्रता के साथ जल की बूंदें बाहर गिर रही हैं, उतनी ही सघनता से कवि के मानस-पटल पर उनके घर-परिवार की स्मृतियाँ उभर रही हैं। बारिश का पानी थम जाने के बाद भी बादलों का छाया रहना उनके हृदय में बनी हुई वियोग की नमी को प्रदर्शित करता है। यह संयोजन बाह्य प्रकृति और कवि के संवेदनशील अंतर्मन के बीच एक गहरा आत्मीय संबंध स्थापित करता है।
In simple words: बाहर होने वाली बारिश कवि के दिल की उदासी का प्रतीक है। जितनी तेज बारिश होती है, उतनी ही ज्यादा कवि को अपने परिवार की याद सताती है।
Exam Tip: बाह्य प्रकृति (वर्षा) और कवि के आंतरिक मन (स्मृतियों की नमी) के अंतर्संबंध को स्पष्टता से उत्तर में व्यक्त करें।
Question 3. “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन” - इस पंक्ति में बादल को “पुण्य पावन” क्यों कहा गया है?
Answer: कवि ने सावन के बादलों को 'पुण्य पावन' इसलिए संबोधित किया है क्योंकि कारागार के एकांत और बंद वातावरण में उनके पास अपने घर तक संदेश पहुँचाने का कोई अन्य साधन उपलब्ध नहीं है। ऐसे समय में बादल ही एकमात्र पवित्र और विश्वसनीय माध्यम बनते हैं जो उनके संदेश को सुरक्षित रूप से उनके परिवार तक पहुँचा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सावन का बादल प्राकृतिक रूप से संपूर्ण सृष्टि को नवजीवन देने वाला और अत्यंत पावन माना जाता है, इसलिए कवि उनके प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
In simple words: बादलों को बहुत पवित्र और अच्छा इसलिए कहा गया है क्योंकि वे ही कवि का संदेश उनके घर तक पहुँचाने वाले एकमात्र संदेशवाहक हैं।
Exam Tip: बादलों के 'संदेशवाहक की पवित्र भूमिका' और 'सृष्टि के कल्याणकारी स्वरूप' दोनों पक्षों का उत्तर में उल्लेख करें।
Question 4. कविता में माँ की कौन-सी विशेषताएँ उभरती हैं?
Answer: कविता में कवि की माता को एक अत्यंत स्नेहमयी, सहनशील और भावनात्मक रूप से सुदृढ़ महिला के रूप में चित्रित किया गया है। भले ही वे निरक्षर हैं और दुखों को सहते-सहते उनका जीवन बीता है, परंतु उनके भीतर ममता का असीम भंडार है, जिसकी गोद में सिर रखते ही सारे कष्ट मिट जाते हैं। वे विषम परिस्थितियों में भी अपने पति को ढांढस बंधाती हैं और पुत्र के देशप्रेम के निर्णय का समर्थन करती हैं। उनका यह रुख उनके अद्भुत नैतिक साहस और असाधारण देशप्रेम को प्रकट करता है।
In simple words: कवि की माँ अनपढ़ और दुखों को सहने वाली हैं, लेकिन वे बहुत ममतामयी हैं। वे हिम्मत से अपने पति को संभालती हैं और बेटे के जेल जाने के फैसले को सही मानती हैं।
Exam Tip: माँ के ममतामयी स्वभाव के साथ-साथ उनकी 'भावनात्मक दृढ़ता' और 'नैतिक साहस' को विशेष रूप से रेखांकित करें।
Question 5. “गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर” - इन पंक्तियों में कौन-सा काव्य-गुण है?
Answer: इन पंक्तियों में प्रमुख रूप से 'नाद सौंदर्य' और 'ध्वन्यात्मकता' का काव्य-गुण विद्यमान है। कवि ने यहाँ शब्दों का चुनाव अत्यंत सूझबूझ से किया है, जिससे पंक्तियों को पढ़ते ही पानी के गिरने की (झरा-झर), पत्तों के हिलने की (हरा-हर) और हवा के चलने की सरसराहट का जीवंत अनुभव कानों में गूँजने लगता है। इसके साथ ही इन पंक्तियों में 'झ-झ', 'ह-ह' और 'स-स' वर्णों के दोहराव के कारण अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग देखने को मिलता है।
In simple words: इन पंक्तियों में बहुत सुंदर नाद-सौंदर्य और संगीत है। शब्दों को सुनकर ही बारिश के पानी और पत्तों के हिलने की आवाज का अहसास हो जाता है।
Exam Tip: 'नाद सौंदर्य', 'ध्वन्यात्मकता' और 'अनुप्रास अलंकार' जैसे तकनीकी काव्य-शास्त्र के शब्दों का प्रयोग उत्तर में जरूर करें।
Question 6. “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” - इस पंक्ति में क्या बिंब है?
Answer: इस काव्य पंक्ति में कवि ने एक अत्यंत मार्मिक और संवेदनशील 'दृश्य बिंब' का सृजन किया है। यहाँ पिता के विशाल व्यक्तित्व की तुलना बरगद (वटवृक्ष) के पेड़ से की गई है, जो अपनी असंख्यों मजबूत डालियों के साथ अडिग खड़ा है। परंतु उनके हृदय में अपने बच्चों के प्रति इतनी कोमल ममता है कि तनिक भी दुःख (पत्ता टूटने) की सूचना मिलने पर उनकी आँखों से आँसुओं की अजस्र धारा बह निकलती है। यह बिंब पिता के अनुशासनप्रिय बाहरी आवरण और उनके कोमल अंतर्मन के सुंदर अंतर्संबंध को उद्घाटित करता है।
In simple words: इस पंक्ति में बरगद के पेड़ का बिंब है। जैसे बरगद का एक पत्ता टूटने पर रस बहता है, वैसे ही बच्चों को थोड़ी सी चोट लगने पर पिता की आँखों से ममता के आँसू बह जाते हैं।
Exam Tip: बरगद के पेड़ के प्रतीक के जरिए पिता के 'संरक्षक रूप' और 'ममत्व के प्रवाह' को दृश्य बिंब के रूप में स्पष्ट करें।
Question 7. कवि बादल से क्या-क्या बातें परिवार को बताने के लिए कहता है?
Answer: कवि बादलों से अनुरोध करता है कि वे उनके माता-पिता के पास जाकर कहें कि उनका पाँचवाँ बेटा कारागार में पूरी तरह से मस्त और आनंदित है। वह नियमित रूप से पढ़ाई-लिखाई करता है, चरखा कातने में व्यस्त रहता है और उसका स्वास्थ्य भी अत्यंत उत्तम (वजन सत्तर सेर) है। परंतु कवि बादलों को यह बताने से सख्ती से मना करता है कि वह अंदर से निराश और व्याकुल है, रातभर जागता रहता है, मौन रहता है और लोगों से दूर भागता है। यह सब छिपाने का उद्देश्य केवल माता-पिता को मानसिक आघात से बचाना है।
In simple words: कवि बादलों से कहता है कि वे घर जाकर कहें कि मैं जेल में खूब पढ़ता-लिखता हूँ, चरखा चलाता हूँ और बहुत खुश हूँ। वे बादलों को मना करते हैं कि वे जेल के दुखों और उनकी उदासी के बारे में घर पर कुछ न बताएं।
Exam Tip: उत्तर में कवि द्वारा बताए जाने वाले 'सकारात्मक झूठ' और छिपाए जाने वाले 'कड़वे सच' दोनों पक्षों को स्पष्ट करें।
Question 8. “और माँ बिन-पढ़ी मेरी, दुख में वह गढ़ी मेरी” - इन पंक्तियों में “बिन-पढ़ी” और “गढ़ी” में क्या भाव है?
Answer: इन पंक्तियों में 'बिन-पढ़ी' शब्द माँ की निरक्षरता की यथार्थपूर्ण स्थिति को दर्शाता है, जिसके कारण वे अपने पुत्र को पत्र नहीं लिख पातीं और न ही उसके संदेश पढ़ सकती हैं। वहीं 'गढ़ी' शब्द का अर्थ है कि उनका संपूर्ण जीवन अत्यंत दुखों और कठिनाइयों के थपेड़े सहते हुए निर्मित हुआ है। इन दुखों ने उनके चरित्र को अत्यंत सुदृढ़ और मजबूत बनाया है। यह समन्वय माँ की बाहरी सादगी, कोमलता और उनके अंतर्मन की अपूर्व सहनशक्ति व व्यावहारिक दृढ़ता को एक साथ उजागर करता है।
In simple words: 'बिन-पढ़ी' का मतलब है कि माँ अनपढ़ हैं जिससे वे पत्र नहीं लिख सकतीं, और 'गढ़ी' का मतलब है कि दुखों ने उनके व्यक्तित्व को बहुत मजबूत और सहनशील बना दिया है।
Exam Tip: माँ के 'व्यावहारिक चरित्र' और 'सहनशीलता' के संदर्भ में इन दोनों शब्दों के गहरे अर्थ को स्पष्ट करें।
Question 9. “मैं मजे में हूँ सही है, घर नहीं हूँ बस यही है” - इन पंक्तियों की विशेषता क्या है?
Answer: इन पंक्तियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें कवि की वास्तविक मानसिक वेदना और परिवार के प्रति उनका स्नेहपूर्ण दिखावा दोनों एक साथ प्रकट होते हैं। पहली पंक्ति में वे अपनी कुशलता का जो दावा करते हैं, वह केवल परिवार को तसल्ली देने के लिए है। परंतु दूसरी पंक्ति में प्रयुक्त 'बस' शब्द एक बहुत बड़ा अर्थ रखता है। घर से दूर होने की यह साधारण सी दिखने वाली विवशता वास्तव में उनके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी और नीरसता का कारण है। यहाँ 'बस' शब्द का अनेकार्थी प्रयोग कविता को अत्यंत मार्मिक बनाता है।
In simple words: इन पंक्तियों में कवि का दर्द और उनका परिवार के लिए दिखावा दोनों दिखते हैं। वे कहते हैं कि वे मजे में हैं, लेकिन घर न होने का छोटा सा दुःख वास्तव में उनके जीवन की सबसे बड़ी उदासी है।
Exam Tip: 'बस' शब्द के अनेकार्थी प्रयोग और इसके पीछे छिपे गहरे 'वियोग के दर्द' को विशेष रूप से स्पष्ट करें।
Question 10. कविता में किस प्रसंग से पिता की पुत्र के प्रति भावनाओं का पता चलता है?
Answer: कविता में ऐसे कई संवेदनशील प्रसंग हैं जो पिता की पुत्र के प्रति अगाध आत्मीयता को दर्शाते हैं। पहला प्रसंग सावन की बरसात के समय पिता को अचानक अपने लाडले पाँचवें पुत्र 'भवानी' की याद आने का है, जिससे उनकी आँखों में नमी आ जाती है। दूसरा प्रसंग वह है जब पिता जी अपने अन्य पुत्रों के होते हुए भी केवल पाँचवें पुत्र का नाम लेकर भावुक होकर रो पड़ते हैं। यह दर्शाता है कि वे अपने वीर और देशभक्त पुत्र को अत्यधिक स्नेह करते थे और उसका वियोग उनके वज्र जैसे मजबूत हृदय को भी पिघला देता है।
In simple words: जब बारिश होती है तो पिता जी को अपने प्यारे पाँचवें बेटे की याद आती है। वे अपने अन्य बेटों के बीच उसका नाम लेकर रो पड़ते हैं, जिससे उनके गहरे प्यार का पता चलता है।
Exam Tip: पिता की वियोगजन्य पीड़ा और 'सोने पर सुहागा' जैसे संबोधनों के संदर्भ का उल्लेख करते हुए उत्तर लिखें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर
Question 1. “घर की याद” कविता में पिता के चरित्र का विस्तृत विश्लेषण कीजिए।
Answer: भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित 'घर की याद' कविता में पिता का चरित्र हिंदी साहित्य के सबसे सशक्त और ममत्वपूर्ण पिताओं के उदाहरणों में से एक है। उनके व्यक्तित्व का विस्तृत विश्लेषण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से किया जा सकता है:
1. अद्वितीय शारीरिक सुदृढ़ता और ऊर्जा: पिता जी का शरीर बरगद के विशाल पेड़ के समान अडिग और पहाड़ की तरह सुदृढ़ है। बुढ़ापे के इस पड़ाव पर भी उनमें युवाओं जैसी अद्भुत ऊर्जा है। वे नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, दो सौ साठ दंड बैठक लगाते हैं, मुगदर घुमाते हैं और बच्चों की तरह खिलखिलाकर दौड़ सकते हैं।
2. निडरता और वीरता: उनके व्यक्तित्व में एक सच्चे योद्धा का साहस है। वे मृत्यु के सामने भी संकोच नहीं करते और शेर के सामने आने पर भी विचलित नहीं होते। उनकी वाणी में बादलों जैसी गर्जना और कार्य में तूफान जैसी गतिशीलता है।
3. अत्यंत कोमल और संवेदनशील हृदय: पिता जी जितने कठोर अनुशासनप्रिय और शारीरिक रूप से मजबूत हैं, उनका अंतर्मन उतना ही कोमल और दयालु है। कवि ने उनके हृदय की तुलना मक्खन (नवनीत) से की है। वे अपने बच्चों के प्रति असीम संवेदनशील हैं और जरा सी विपत्ति आने पर उनकी ममता अश्रु बनकर बह उठती है।
4. पुत्र के प्रति अनन्य प्रेम: वे अपने पाँचवें पुत्र (कवि) को अत्यधिक स्नेह करते थे और उसे सदैव 'सोने पर सुहागा' कहते थे। पुत्र के कारावास की खबर पाकर उनका मजबूत हृदय भी वियोग के कारण रो पड़ता है।
5. प्रकृति और जीवन के प्रति लगाव: उन्हें वर्षा ऋतु, खुले मैदान और प्रकृति से गहरा लगाव है। वे खुले बदन खेतों में घूमते हैं और सब्जियां उगाना पसंद करते हैं।
इस प्रकार, पिता का चरित्र दृढ़ता और संवेदनशीलता का एक अनूठा समन्वय है।
In simple words: कविता में पिता जी को बहुत मजबूत और वीर दिखाया गया है जो बुढ़ापे में भी कसरत करते हैं और दौड़ सकते हैं। वे बहुत निडर हैं, लेकिन अपने बच्चों के लिए उनका दिल मक्खन की तरह बेहद नरम और प्यार से भरा है। अपने प्रिय बेटे के जेल जाने पर वे बहुत रोते हैं।
Exam Tip: पिता के चरित्र चित्रण में 'शारीरिक दृढ़ता', 'कोमल हृदय (नवनीत)', 'निडरता' और 'पुत्र-प्रेम' जैसे मुख्य उप-शीर्षकों का प्रयोग करके उत्तर प्रस्तुत करें।
Question 2. कविता में कवि ने बादल को दूत क्यों बनाया? इस संदेश-परंपरा का क्या महत्व है?
Answer: 'घर की याद' कविता में कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने सावन के सजीले बादलों को अपना संदेशवाहक (दूत) बनाया है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण और सांस्कृतिक संदर्भ निहित हैं:
1. कारागार के एकाकी वातावरण की विवशता: जेल में बंद होने के कारण कवि पर बाहरी दुनिया और परिवार से संपर्क करने पर कड़े प्रतिबंध थे। ऐसे समय में प्रकृति का यह मुक्त अंग ही एकमात्र ऐसा पवित्र माध्यम बचता है जो जेल की दीवारों को पार करके उनके घर तक पहुँच सकता है।
2. बादलों का सर्वव्यापी स्वभाव: बादल बिना किसी भेदभाव के सभी स्थानों तक पहुँचते हैं। वे कवि की कोठरी से उठकर सीधे उनके माता-पिता के आँगन तक जा सकते हैं और सबको अपने स्नेह से भिगो सकते हैं।
3. काव्यात्मक और भावनात्मक अभिव्यक्ति: बादलों को दूत बनाने से कविता का स्वरूप अत्यंत संवेदनात्मक, लयबद्ध और करुणामयी हो जाता है, जो पाठकों के हृदय को गहराई से छूता है।
संदेश-परंपरा का महत्व: भारतीय संस्कृत साहित्य में प्रकृति को संदेशवाहक बनाने की परंपरा बहुत प्राचीन और समृद्ध है। महाकवि कालिदास के विख्यात महाकाव्य 'मेघदूत' में यक्ष ने अपनी प्रेमिका तक संदेश पहुँचाने के लिए बादलों का ही सहारा लिया था। भवानीप्रसाद मिश्र ने इसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक संदर्भों (स्वतंत्रता संग्राम) के साथ जोड़कर एक नया आयाम दिया है। यह परंपरा मनुष्य और प्रकृति के बीच के उस अटूट और आत्मीय संबंध को दर्शाती है जहाँ संकट के समय प्रकृति मूक दर्शक न रहकर मानव की सच्ची सहभागी और सहायक बन जाती है।
In simple words: जेल में बंद होने के कारण कवि के पास घर संदेश भेजने का कोई और साधन नहीं था, इसलिए उन्होंने बादलों को दूत बनाया। बादलों को संदेशवाहक बनाने की यह परंपरा हमारे देश में कालिदास के समय से चली आ रही है, जो इंसानों और प्रकृति के गहरे रिश्ते को दर्शाती है।
Exam Tip: उत्तर में कालिदास के 'मेघदूत' के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख अवश्य करें और समझाएं कि कैसे प्रकृति यहाँ एक सक्रिय भागीदार की भूमिका निभाती है।
Question 3. “घर की याद” कविता की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: भवानीप्रसाद मिश्र की कविता 'घर की याद' अपनी विशिष्ट और सहज भाषा-शैली के कारण आधुनिक हिंदी काव्य की एक अत्यंत अनूठी रचना मानी जाती है। इसकी मुख्य भाषा-शैलीगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सहजता और लोकभाषा का सुंदर संगम: इस कविता की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और आम बोलचाल के करीब है। कवि ने क्लिष्ट शब्दों के स्थान पर सीधे और मर्मस्पर्शी शब्दों का प्रयोग किया है। साथ ही, मध्य प्रदेश की आंचलिक बोली के अनूठे शब्दों जैसे 'चुआ' (चूना) तथा 'छिन' (क्षण) और 'रे' जैसे लोक-प्रबोधन वाले शब्दों का अत्यंत घरेलू ढंग से प्रयोग किया है, जो एक बेहद आत्मीय वातावरण तैयार करता है।
2. अद्भुत नाद सौंदर्य और ध्वन्यात्मकता: कविता में शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि वे वर्षा ऋतु की आवाजों का सजीव प्रभाव उत्पन्न करते हैं। “झरा-झर”, “हरा-हर”, “सर-सर”, “थर-थर” जैसी ध्वनियों की आवृत्ति न केवल कानों में गूँजती है, बल्कि घर की यादों की तीव्रता को भी गहराई प्रदान करती है।
3. पंक्तियों का गीतात्मक दोहराव: “बहुत पानी गिर रहा है” और “घर नजर में तिर रहा है” जैसी महत्वपूर्ण पंक्तियों की बार-बार पुनरावृत्ति कविता में एक सुंदर संगीतात्मक लय का निर्माण करती है, जो वियोग के दर्द को और अधिक मार्मिक बनाती है।
4. अनूठा अलंकारिक विधान: कवि ने बहुत ही स्वाभाविक अलंकारों का प्रयोग किया है। जैसे - 'वज्र-भुज नवनीत-सा उर' में विरोधाभास और उपमा अलंकार का प्रयोग तथा 'देह एक पहाड़ जैसे, मन कि बड़ का झाड़ जैसे' में सुंदर उपमा अलंकार का विधान किया गया है।
5. संवादात्मक और संवेदनात्मक शैली: बादलों को सीधे संबोधित करके संवाद स्थापित करना कविता को संवादात्मक, जीवंत और भावपूर्ण बनाता है।
In simple words: इस कविता की भाषा बहुत आसान और घरेलू है, जिसे आम लोग आसानी से समझ सकते हैं। इसमें शब्दों को इस तरह चुना गया है कि पढ़ते समय बारिश और हवा की आवाजें महसूस होती हैं। पंक्तियों का दोहराव कविता को एक मीठे गीत की तरह सुंदर बना देता है।
Exam Tip: शैली के विश्लेषण में 'नाद सौंदर्य (झरा-झर)', 'लोकोक्तियाँ/आंचलिक शब्द (चुआ)', 'गीतात्मक दोहराव' और 'उपमा अलंकारों' के उदाहरणों के साथ तकनीकी रूप से उत्तर स्पष्ट करें।
Question 4. 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के संदर्भ में “घर की याद” कविता का महत्व क्या है?
Answer: वर्ष 1942 का 'भारत छोड़ो आंदोलन' भारत के स्वाधीनता संग्राम का सबसे निर्णायक और उग्र आंदोलन था, जिसमें समाज के हर वर्ग ने अपनी आहुति दी थी। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में 'घर की याद' कविता का महत्व केवल व्यक्तिगत यादों तक सीमित न रहकर एक महान राष्ट्रीय दस्तावेज के रूप में उभरता है:
1. स्वतंत्रता संग्राम के मानवीय और वियोगजन्य पक्ष का सजीव चित्रण: इतिहास की पुस्तकों में हम अक्सर स्वाधीनता सेनानियों की वीरता और उनके संघर्षों को पढ़ते हैं। परंतु यह कविता उस कड़े संघर्ष के पीछे छिपे उनके मानवीय कष्टों, वियोग के दर्द और पारिवारिक बलिदानों को अत्यंत गहराई से सामने लाती है। यह दर्शाती है कि देश के लिए लड़ने वाले नायक भी हाड़-मांस के बने संवेदनशील इंसान थे, जिन्हें अपने घर की बहुत याद सताती थी।
2. संपूर्ण परिवार के मूक बलिदान का प्रामाणिक दस्तावेज: यह कविता बताती है कि देश की आजादी की लड़ाई में केवल जेल जाने वाला सेनानी ही कष्ट नहीं सहता था, बल्कि उसका संपूर्ण परिवार पीछे से तिल-तिल कर गलता था। माँ का रोना, बहनों का छटपटाना और पिता का वियोग में अश्रु बहाना इस बात का गवाह है कि स्वाधीनता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक सामूहिक और पारिवारिक त्याग का परिणाम थी।
3. गांधीवादी मूल्यों और आदर्शों की अभिव्यक्ति: कविता में प्रयुक्त 'कातने में व्यस्त हूँ मैं' जैसी पंक्तियाँ महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन, स्वावलंबन और सत्याग्रह के प्रति कवि की अटूट निष्ठा को दर्शाती हैं। जेल में भी स्वस्थ और मस्त रहना तथा देश की मर्यादा के लिए कदम पीछे न हटाना गांधीवादी अहिंसा और नैतिक साहस का जीवंत उदाहरण है।
इस प्रकार, यह कविता भारत छोड़ो आंदोलन के मानवीय संघर्ष और हमारी अमूल्य आजादी की कीमत को समझने में मदद करती है।
In simple words: 1942 के आंदोलन में कई लोग जेल गए। यह कविता दिखाती है कि देश की आजादी के लिए केवल जेल जाने वाले ही नहीं, बल्कि उनके घरवाले भी पीछे से कितना दुःख सहते थे और बलिदान देते थे। यह कविता हमें आजादी की असली कीमत सिखाती है।
Exam Tip: उत्तर में 'स्वाधीनता सेनानियों के मानवीय पक्ष', 'पारिवारिक वियोग' और 'गांधीवादी दर्शन (चरखा)' को भारत छोड़ो आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में जोड़कर विस्तार से प्रस्तुत करें।
Question 5. “घर की याद” कविता में ‘घर’ केवल एक भौतिक स्थान नहीं है, बल्कि भावनाओं और संबंधों का केंद्र है। इस कथन की समीक्षा कीजिए।
Answer: प्रस्तुत कविता 'घर की याद' में कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने 'घर' की जो परिकल्पना प्रस्तुत की है, वह केवल चारदीवारी या ईंट-पत्थर से बने किसी मकान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मानवीय संवेदनाओं, अटूट रिश्तों और गहरी सुरक्षा की भावनाओं का एक अत्यंत सजीव संसार है। इस कथन की समीक्षा निम्नलिखित पहलुओं के आधार पर की जा सकती है:
1. स्मृतियों और आत्मीयता का सागर: कवि जब जेल की सलाखों के पीछे से अपने घर को याद करते हैं, तो उनकी आँखों में कोई भौतिक ढांचा नहीं, बल्कि उनके परिजनों की आत्मीयता तैरती है - “घर नजर में तिर रहा है।” यह घर खुशियों और अपनों के गहरे प्रेम से भरपूर है।
2. रिश्तों की गर्माहट और स्नेह का संगम: उनके लिए घर का अर्थ है - पिता की बादलों जैसी गर्जना और बच्चों जैसी हँसी, माँ की ममतामयी और दुखों को हरने वाली गोद, भाइयों का अटूट सहारा (भुजा) और बहनों का स्नेहपूर्ण व्यवहार। यह घर केवल एक भौतिक स्थान नहीं, बल्कि रिश्तों के आपसी लगाव और उनकी गर्माहट का जीवंत संगम है।
3. परम सुरक्षा और खुशहाली का प्रतीक: कारागार के कष्टों और अकेलेपन के बीच कवि का घर उनके लिए सबसे सुरक्षित, शांत और खुशहाल संसार का प्रतीक है। वे उस सुखद वातावरण को याद करके ही जेल की यातनाओं को सहने का संबल प्राप्त करते हैं।
4. संबंधों के अभाव में जीवन की नीरसता: कवि कहते हैं कि घर न होने की यह छोटी सी कमी वास्तव में इतनी बड़ी है कि इसके बिना बाकी की पूरी दुनिया पूरी तरह से बेस्वाद और व्यर्थ लगने लगती है - “इसी बस से सब विरस है।”
वर्तमान संदर्भ में, आज जब एकल परिवारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है, यह कविता हमें याद दिलाती है कि घर की वास्तविक पहचान उसकी सुंदर दीवारों से नहीं, बल्कि उसमें रहने वाले लोगों के आपसी प्रेम, आत्मीय संबंधों और माता-पिता के स्नेह से होती है। जहाँ ये भावनाएँ हैं, वही वास्तव में सच्चा घर है।
In simple words: इस कविता में घर का मतलब ईंट-पत्थर का मकान नहीं है, बल्कि माता-पिता का प्यार, भाई-बहनों का साथ और आपस का अटूट स्नेह है। घर वह जगह है जहाँ इंसान को सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस होता है और जिसके बिना जीवन नीरस लगने लगता है।
Exam Tip: 'घर' की परिकल्पना को मकान और आत्मीय संबंधों के अंतर के रूप में स्पष्ट करते हुए आज के वर्तमान परिप्रेक्ष्य (एकल परिवार) से जोड़कर एक प्रभावशाली निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
Free study material for Hindi
NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 12 घर की याद
Students can now access the NCERT Solutions for Ganga Chapter 12 घर की याद prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 9 Hindi textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest NCERT syllabus.
Detailed Explanations for Ganga Chapter 12 घर की याद
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 9 Hindi chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 9 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these NCERT Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Hindi Class 9 Solved Papers
Using our Hindi solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 9 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Ganga Chapter 12 घर की याद to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 12 घर की याद is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Hindi are as per latest NCERT curriculum.
Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 12 घर की याद as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 12 घर की याद will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 9 Hindi. You can access NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 12 घर की याद in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 12 घर की याद in printable PDF format for offline study on any device.