NCERT Solutions for Class 6 Sanskrit Chapter 13 पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि

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पेज 124 - अभ्यास कार्य

 

Question 1. एतानि सर्वाणि सुभाषितानि उच्चैः पठन्तु स्मरन्तु लिखन्तु च।

Answer:
छात्राः स्वयमेव एतानि सर्वाणि सुभाषितानि उच्चैः पठन्तु, स्मरन्तु, लिखन्तु च।

In simple words: इस प्रश्न में छात्रों को पाठ में दिए गए सभी सुंदर वचनों (सुभाषितां) को जोर से पढ़ने, उन्हें याद करने और अपनी कॉपी में लिखने का निर्देश दिया गया है।

Exam Tip: प्रत्येक सुभाषित को लिखकर याद करने से उसकी वर्तनी (spelling) शुद्ध होती है और परीक्षा में पूरे अंक मिलते हैं।

 

Question 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु -
(क) पृथिव्यां कति रत्नानि सन्ति ?
(ख) अयं निजः परो वा इति गणना केषां भवति ?
(ग) कार्याणि केन सिद्ध्यन्ति ?
(घ) विद्या किं ददाति ?
(ङ) जननी जन्मभूमिश्च कस्मात् गरीयसी ?
(च) लङ्का कीदृशी आसीत् ?

Answer:
(क) त्रीणि
(ख) लघुचेतसाम्
(ग) उद्यमेन
(घ) विनयम्
(ङ) स्वर्गात्
(च) स्वर्णमयी

In simple words: इस प्रश्न में पाठ के श्लोकों के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर केवल एक शब्द में देने हैं, जैसे पृथ्वी पर ३ रत्न हैं और मेहनत से सारे काम पूरे होते हैं।

Exam Tip: एकपदेन उत्तर लिखते समय उत्तर सटीक और सही विभक्ति में होना चाहिए, जैसे 'कस्मात्' के उत्तर में पञ्चमी विभक्ति 'स्वर्गात्' का प्रयोग होगा।

 

Question 3. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु -
(क) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि कानि सन्ति ?
(ख) उदारचरितानां भावः कः भवति ?
(ग) मृगाः स्वयमेव कस्य मुखे न प्रविशन्ति ?
(घ) अभिवादन शीलस्य नित्यं कानि वर्धन्ते ?
(ङ) मनुष्यः धनात् किम् आप्नोति ?
(च) उत्पन्नेषु कार्येषु कीदृशं धनम् उपयोगाय न भवति ?

Answer:
(क) पृथिव्यां जलम्, अन्नम्, सुभाषितम् इति त्रीणि रत्नानि सन्ति।
(ख) उदारचरितानां 'वसुधैव कुटुम्बकम्' इति भावः भवति।
(ग) मृगाः स्वयमेव सुप्तस्य सिंहस्य मुखे न प्रविशन्ति।
(घ) अभिवादन शीलस्य नित्यं आयुः, विद्या, यशः, बलं च वर्धन्ते।
(ङ) मनुष्यः धनात् धर्मम् आप्नोति।
(च) परहस्तगतं धनम् उत्पन्नेषु कार्येषु उपयोगाय न भवति।

In simple words: इस अभ्यास में प्रश्नों के उत्तर पूरे एक वाक्य में संस्कृत में देने हैं, जैसे बड़ों को प्रणाम करने वाले व्यक्ति की उम्र, विद्या, यश और बल बढ़ता है।

Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखते समय व्याकरण का ध्यान रखें. क्रिया और कर्ता का पुरुष तथा वचन हमेशा समान होना चाहिए.

 

Question 4. चित्रं दृष्ट्वा वाक्यानि रचयन्तु -
यथा - वृक्षः फलानि यच्छति। | त्वं फलानि स्वीकरोषि। | अहं फलानि स्वीकरोमि।
(क) पुष्पाणि (फूल)
(ख) पत्राणि (पत्ते)
(ग) काष्ठानि (लकड़ी)
(घ) कागदम् (कागज)
(ङ) छायाम् (छाया)

Answer:
(क) वृक्षः पुष्पाणि यच्छति। | त्वं पुष्पाणि स्वीकरोषि। | अहं पुष्पाणि स्वीकरोमि।
(ख) वृक्षः पत्राणि यच्छति। | त्वं पत्राणि स्वीकरोषि। | अहं पत्राणि स्वीकरोमि।
(ग) वृक्षः काष्ठानि यच्छति। | त्वं काष्ठानि स्वीकरोषि। | अहं काष्ठानि स्वीकरोमि।
(घ) वृक्षः कागदं यच्छति। | त्वं कागदं स्वीकरोषि। | अहं कागदं स्वीकरोमि।
(ङ) वृक्षः छायां यच्छति। | त्वं छायां स्वीकरोषि। | अहं छायां स्वीकरोमि।

In simple words: इस प्रश्न में पेड़ से मिलने वाली चीजों (जैसे फूल, पत्ते, लकड़ी) के आधार पर 'यच्छति' (देता है), 'स्वीकरोषि' (तुम स्वीकार करते हो) और 'स्वीकरोमि' (मैं स्वीकार करता हूँ) का प्रयोग करके वाक्य बनाने हैं।

Exam Tip: उत्तम पुरुष 'अहम्' के साथ हमेशा 'मी' (स्वीकरोमि) और मध्यम पुरुष 'त्वम्' के साथ हमेशा 'षि' (स्वीकरोषि) प्रत्यय का प्रयोग करें।

 

Question 5. अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा 'आम्' अथवा 'न' इति लिखन्तु -
यथा - किं पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि सन्ति ? - आम्
(क) त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नं पाषाणः च सन्ति ?
(ख) किं धर्मेण सुखं प्राप्यते ?
(ग) किं विद्या विनयं ददाति ?
(घ) किम् अभिवादन शीलस्य विद्या वर्धते ?
(ङ) किम् उद्यमेन कार्याणि नश्यन्ति ?
(च) किं जन्मभूमिः स्वर्गात् गरीयसी भवति ?

Answer:
(क) न
(ख) आम्
(ग) आम्
(घ) आम्
(ङ) न
(च) आम्

In simple words: इस प्रश्न में सही वाक्यों के सामने 'आम्' (हाँ) और गलत वाक्यों के सामने 'न' (नहीं) लिखना है, जैसे मेहनत करने से काम नष्ट नहीं होते बल्कि पूरे होते हैं.

Exam Tip: पाठ के श्लोकों के अर्थ को अच्छी तरह समझकर ही आम् या न का चयन करें, जल्दबाजी में त्रुटि होने की संभावना रहती है।

 

Question 6. चित्रे दर्शितस्य नाम लिङ्गं च निर्दिशन्तु -
(क) गुलाब का फूल (Rose)
(ख) शेर (Lion)
(ग) सेब (Apple)
(घ) लड़की (Girl)
(ङ) पेड़ (Tree)
(च) पुस्तकें (Books)

Answer:
(क) पुष्पम् - नपुंसकलिङ्गम्
(ख) सिंहः - पुंलिङ्गम्
(ग) सेवफलम् - नपुंसकलिङ्गम्
(घ) बालिका - स्त्रीलिङ्गम्
(ङ) वृक्षः - पुंलिङ्गम्
(च) पुस्तकम् - नपुंसकलिङ्गम्

In simple words: इस अभ्यास में दिए गए चित्रों को देखकर संस्कृत में उनके नाम और उनका लिंग (पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग या नपुंसकलिङ्ग) लिखना है।

Exam Tip: संस्कृत में लिंग निर्धारण शब्दों के स्वरूप पर निर्भर करता है, जैसे 'म्' पर समाप्त होने वाले सामान्यतः नपुंसकलिङ्ग (पुष्पम्) और विसर्ग वाले पुंलिङ्ग (वृक्षः) होते हैं।

 

Question 7. वलये पदानि विलिख्य सुभाषितं पूरयन्तु -
सुभाषितम्: "विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्। पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्।"

Answer:
वलय चक्र के रिक्त स्थानों की पूर्ति क्रमवार इस प्रकार है:
• विद्या → ददाति → विनयम् → विनयात् → याति
• पात्रताम् → पात्रत्वात् → धनम् → आप्नोति → धनात्
धर्मम् → ततः → सुखम्

In simple words: इस चक्र में सुप्रसिद्ध श्लोक 'विद्या ददाति विनयं...' के शब्दों को क्रम से भरकर चक्र को पूरा करना है।

Exam Tip: इस श्लोक को अच्छे से याद कर लें, यह न केवल रिक्त स्थान बल्कि श्लोक पूर्ति के रूप में भी परीक्षा में अवश्य पूछा जाता है।

 

Question 8. पट्टिकातः पदानि चित्वा निर्देशानुसारं पदानि लिखन्तु -
मञ्जूषा: जननी, धैर्यम्, विद्या, विनयः, निजः, पत्रम्, बुद्धिः, मूलम्, पराक्रमः, शक्तिः, धनम्, उद्यमः

Answer:
(क) प्रथमान्त पुंलिङ्गपदानि सन्ति:
1. उद्यमः
2. विनयः
3. पराक्रमः
4. निजः

(ख) प्रथमान्त-स्त्रीलिङ्गपदानि सन्ति:
1. वसुधा
2. जननी
3. विद्या
4. शक्तिः / बुद्धिः

(ग) प्रथमान्त-नपुंसकलिङ्गपदानि सन्ति:
1. साहसम्
2. धैर्यम्
3. पत्रम्
4. धनम् / मूलम्

In simple words: इस प्रश्न में बॉक्स में दिए गए शब्दों को उनके सही लिंग (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) के आधार पर अलग-अलग करके लिखना है।

Exam Tip: शब्दों के अंतिम वर्ण और विसर्ग या 'म्' की उपस्थिति से लिंग की पहचान आसानी से की जा सकती है (जैसे 'उद्यमः' पुल्लिंग, 'धैर्यम्' नपुंसकलिंग)।

 

Question 9. पाठगतानि सुभाषितानि स्मृत्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु -
(क) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि _________ सुभाषितम्।
(ख) उदारचरितानां तु _________ कुटुम्बकं भवति।
(ग) उद्यमेन हि _________ सिध्यन्ति।
(घ) अभिवादन शीलस्य वृद्धोपसेविनः _________ वर्धन्ते।
(ङ) उद्यमः _________ बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः।
(च) विद्या _________ ददाति।
(छ) जननी जन्मभूमिश्च _________ गरीयसी भवति।

Answer:
(क) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्।
(ख) उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकं भवति।
(ग) उद्यमेन हि कार्याणि सिध्यन्ति।
(घ) अभिवादन शीलस्य वृद्धोपसेविनः चत्वारि वर्धन्ते।
(ङ) उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः।
(च) विद्या विनयम् ददाति।
(छ) जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी भवति।

In simple words: इस प्रश्न में पाठ के श्लोकों को याद करके उनके बीच के छूटे हुए शब्दों को भरकर श्लोक की पंक्तियों को पूरा करना है।

Exam Tip: श्लोक की पंक्तियों को पूरा करते समय संधि-विच्छेद का विशेष ध्यान रखें, जैसे 'स्वर्गादपि' दो शब्दों 'स्वर्गात् + अपि' से मिलकर बना है।

 

Question 10. चित्राणि दृष्ट्वा उचितान् श्लोकांशान् लिखन्तु -
(क) पत्थर तोड़ने वाले का चित्र
(ख) पानी का नल, अन्न और पुस्तक का चित्र
(ग) भारत का मानचित्र
(घ) बुजुर्ग को प्रणाम करते बालक का चित्र
(ङ) पृथ्वी (ग्लोब) का चित्र

Answer:
(क) मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते॥
(ख) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नम् सुभाषितम्।
(ग) उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
(घ) चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥
(ङ) अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।

In simple words: इस अभ्यास में दिए गए चित्रों को देखकर यह पहचानना है कि वे पाठ के किस श्लोक की पंक्ति को दर्शाते हैं और उस पंक्ति को लिखना है।

Exam Tip: प्रत्येक श्लोक का अर्थ और उसका व्यावहारिक महत्त्व अच्छी तरह समझें, इससे चित्र आधारित प्रश्नों को हल करना अत्यंत आसान हो जाता है।

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