NCERT Solutions Class 11 Political Science Political Theory Chapter 06 Citizenship (नागरिकता) in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 11 Political Science: Chapter 06 नागरिकता

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Chapter-wise Solutions for Political Science: Chapter 06 नागरिकता

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Question 1: राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता के रूप में नागरिकता में अधिकार और दायित्व दोनों शामिल हैं। समकालीन लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिक किन अधिकारों के उपभोग की अपेक्षा कर सकते हैं? नागरिकों के राज्य और अन्य नागरिकों के प्रति क्या दायित्व हैं?

Answer:

नागरिक आज जिन अधिकारों का प्रयोग करते हैं, उन्हें बहुत संघर्ष के बाद हासिल किया गया है। नागरिकता सिर्फ राज्यसत्ता और उसके सदस्यों के बीच के संबंधों का निरूपण नहीं करती, बल्कि उससे बढ़कर है। इसमें नागरिकों के आपसी संबंधों के बारे में भी जानकारी मिलती है। टी. एच. मार्शल के फॉर्मूले के अनुसार नागरिकों को अधिकार और कर्तव्य प्रदान किए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:
• नागरिक अधिकार: ये अधिकार व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित हैं।
• राजनीतिक अधिकार: ये अधिकार व्यक्ति को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देते हैं।
• सामाजिक अधिकार: ये अधिकार व्यक्ति की शैक्षिक उपलब्धियों एवं रोजगार से संबंधित हैं।
नागरिकों के राज्य और अन्य नागरिकों के प्रति दायित्व यह हैं कि वे केवल अपने अधिकारों की मांग न करें, बल्कि समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का भी पालन करें तथा दूसरों के अधिकारों का सम्मान करें।

मुख्य बिंदु:

• नागरिकता में अधिकार और दायित्व दोनों शामिल होते हैं।
• टी. एच. मार्शल ने नागरिकता को तीन भागों (नागरिक, राजनीतिक और सामाजिक अधिकार) में बांटा है।
• नागरिकों का यह दायित्व है कि वे समाज के अन्य सदस्यों के अधिकारों में बाधा न डालें।

आम गलतियाँ:

• छात्र केवल अधिकारों का उल्लेख करते हैं और दायित्वों को लिखना भूल जाते हैं।
• मार्शल के वर्गीकरण को स्पष्ट रूप से नहीं समझाना।
• समकालीन लोकतंत्र की बदलती परिस्थितियों को उत्तर में शामिल न करना।

Exam Tips:

a) टी. एच. मार्शल के तीनों अधिकारों के प्रकारों को अलग-अलग बिंदुओं में लिखें।
b) उत्तर लिखते समय अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का संतुलन अवश्य दिखाएं।
c) परिभाषा को सटीक और संक्षिप्त रखें।

 

Question 2: सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए तो जा सकते हैं लेकिन हो सकता है कि वे इन अधिकारों का प्रयोग समानता से न कर सकें। इस कथन की व्याख्या कीजिए।

Answer:

सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर देने पर विचार करना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं होता। विभिन्न समूहों के लोगों की आवश्यकताएं और समस्याएं अलग-अलग होती हैं और एक समूह के अधिकार दूसरे समूह के अधिकारों के प्रतिकूल हो सकते हैं। नागरिकों के समान अधिकार का आशय यह नहीं होता कि सभी लोगों पर समान नीतियां लागू कर दी जाएं क्योंकि विभिन्न समूह के लोगों की आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं। नीति निर्माण के समय विभिन्न आवश्यकताओं का ध्यान रखना होगा, जैसे:
• कानूनी उपायों तक पहुंच का अभाव।
• सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार।
• सामाजिक तथा आर्थिक असमानता जो अवसर की समानता को रोकती है।
इसके परिणाम ये हो सकते हैं कि उदाहरण के तौर पर बहुत-सी महिलाओं को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि उनके पति द्वारा शारीरिक तथा मानसिक उत्पीड़न घरेलू हिंसा के अंतर्गत आता है। इसीलिए वे कानूनी उपायों की तलाश करने में समर्थ नहीं हैं।

मुख्य बिंदु:

• कानूनी समानता का व्यावहारिक जीवन में समान रूप से लागू न हो पाना।
• सामाजिक और आर्थिक असमानताओं के कारण अधिकारों के प्रयोग में बाधा आना।
• महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए विशेष कानूनी उपायों की आवश्यकता।

आम गलतियाँ:

• केवल सैद्धांतिक समानता की बात करना और व्यावहारिक कठिनाइयों को नजरअंदाज करना।
• घरेलू हिंसा और महिलाओं के उदाहरण को सही से न जोड़ पाना।
• उत्तर को बहुत अधिक लंबा या अस्पष्ट लिखना।

Exam Tips:

a) व्यावहारिक समस्याओं (जैसे भ्रष्टाचार, गरीबी, सामाजिक असमानता) के बिंदुओं को स्पष्ट करें।
b) वास्तविक जीवन के उदाहरणों जैसे घरेलू हिंसा का संदर्भ अवश्य दें।
c) प्रश्न के मूल भाव यानी 'कानूनी समानता बनाम वास्तविक समानता' को स्पष्ट करें।

 

Question 3: भारत में नागरिक अधिकार के लिए हाल के वर्षों में किए गए किन्हीं दो संघर्षों पर टिप्पणी लिखिए। इन संघर्षों में किन अधिकारों की मांग की गई थी?

Answer:

भारत में नागरिक अधिकारों के लिए कई संघर्ष हुए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
• झुग्गीपट्टी और अवैध कब्जों की जमीन की समस्या: भारत के प्रत्येक शहर में बहुत बड़ी संख्या में झुग्गीपट्टी और अवैध कब्जे की जमीन पर बसे लोगों की बहुत बड़ी समस्या है। ये लोग अनिवार्य और उपयोगी काम अक्सर कम मजदूरी पर करते हैं। फिर भी शहर की बाकी आबादी उन्हें अवर्चनीय मेहमानों की तरह देखती है। उन पर शहर के संसाधनों पर बोझ बनने या अपराध और बीमारी फैलाने का आरोप डाला जाता है।
• आदिवासी तथा वनवासी समूह का संघर्ष: ये लोग अपने जीवनयापन के लिए जंगल तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। बढ़ती आबादी, जमीन और संसाधनों की कमी के दबाव के कारण उनमें से अनेक की जीवन पद्धति और आजीविका संकट में है। जंगल और तराई-क्षेत्र में मौजूद खनिज संसाधनों का खनन करने के इच्छुक उद्यमियों के हितों का दबाव आदिवासी और वनवासी लोगों के जीवन और आजीविका पर एक खतरा है।

मुख्य बिंदु:

• झुग्गीवासियों और शहरी गरीबों के आवास तथा आजीविका के अधिकार की मांग।
• आदिवासियों के जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर पारंपरिक अधिकारों की रक्षा।
• विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापित लोगों के पुनर्वास का मुद्दा।

आम गलतियाँ:

• संघर्षों के नाम सही से न लिखना या उनकी मांगों को स्पष्ट न करना।
• केवल झुग्गी-झोपड़ी की समस्या लिखना और आदिवासी संघर्ष को छोड़ देना।
• अधिकारों की मांग की बजाय केवल समस्या का वर्णन करना।

Exam Tips:

a) दोनों संघर्षों (शहरी गरीब/झुग्गीवासी और आदिवासी) की अलग-अलग हेडिंग बनाकर लिखें।
b) सुप्रीम कोर्ट के आदेशों या जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का संदर्भ जोड़ सकते हैं।
c) उत्तर में आजीविका और आवास के मौलिक अधिकारों की मांग को प्रमुखता दें।

 

Question 4: शरणार्थियों की समस्याएं क्या हैं? वैश्विक नागरिकता की अवधारणा किस प्रकार उनकी सहायता कर सकती है?

Answer:

जब हम शरणार्थियों या अवैध प्रवासियों के विषय में सोचते हैं तो मन में अनेक छवियाँ उभरती हैं। इसमें एशिया या अफ्रीका के ऐसे लोगों की छवि हो सकती है जिन्होंने यूरोप या अमेरिका में चोरी-छिपे घुसने के लिए दलाल को पैसे का भुगतान किया हो। इसमें जोखिम बहुत है लेकिन वे प्रयास में तत्पर दिखते हैं। एक अन्य छवि युद्ध या अकाल से विस्थापित लोगों की हो सकती है। इस प्रकार के बहुत से दृश्य हमें दूरदर्शन पर दिखाई देते हैं। सूडान डर्फर क्षेत्र के शरणार्थी, फ़िलिस्तीनी, बर्मी या बांग्लादेशी शरणार्थी जैसे कई उदाहरण हैं। ये सभी लोग ऐसे हैं जो अपने ही देश या पड़ोसी देश में शरणार्थी बनने के लिए मजबूर किए गए हैं। शरणार्थी और अवैध प्रवासियों के सामने अनेक समस्याएं होती हैं:
• कानूनी रूप से काम न कर पाना और बच्चों को पढ़ा-लिखा न पाना।
• संपत्ति अर्जित करने में असमर्थ होना।
• राज्यविहीन या शरणार्थी के रूप में शिविरों में जीवन बिताने की मजबूरी।
वैश्विक नागरिकता की अवधारणा इन लोगों की सहायता इस प्रकार कर सकती है कि यह सीमाओं के पार मानवीय दृष्टिकोण अपनाती है और उन्हें एक वैश्विक समाज का हिस्सा मानकर उनके बुनियादी अधिकारों की रक्षा की वकालत करती है।

मुख्य बिंदु:

• शरणार्थियों और अवैध प्रवासियों की दयनीय स्थिति तथा उनके कारण।
• युद्ध, अकाल और राजनीतिक उत्पीड़न के कारण विस्थापन की समस्या।
• वैश्विक नागरिकता द्वारा राष्ट्रीय सीमाओं से परे मानवीय अधिकारों को प्राथमिकता देना।

आम गलतियाँ:

• केवल शरणार्थियों की समस्याओं का वर्णन करना और वैश्विक नागरिकता के समाधान को छोड़ देना।
• वैश्विक नागरिकता के अर्थ को गलत समझ लेना।
• वास्तविक दुनिया के उदाहरणों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) शरणार्थियों की समस्याओं को बिंदुओं में लिखकर स्पष्ट करें।
b) वैश्विक नागरिकता कैसे मदद करती है, इसे वैचारिक रूप से समझाएं।
c) उत्तर को संतुलित रखें और मानवीय दृष्टिकोण पर जोर दें।

 

Question 5: देश के अंदर एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में लोगों के अप्रवासी का आमतौर पर स्थानीय लोग विरोध करते हैं। प्रवासी लोग स्थानीय अर्थव्यवस्था में क्या योगदान दे सकते हैं?

Answer:

आमतौर पर वे लोग जो अपने देश या प्रांत/राज्य को छोड़कर रोजगार की तलाश में दूसरे मुल्कों/राज्यों/प्रांतों में जाकर रहते हैं, उन्हें प्रवासी कहा जाता है। प्रवासी लोग स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये प्रवासी फेरीवाले, घरेलू नौकर, मिस्त्री, सफाईकर्मी तथा छोटे व्यापारी होते हैं। देश के अंदर एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र के अप्रवासी का आमतौर पर स्थानीय लोग विरोध करते हैं क्योंकि स्थानीय लोगों को यह अनुभव होने लगता है कि यदि प्रवासी लोगों की संख्या स्थानीय लोगों की संख्या से अधिक होतु तो वे अपने ही घर में अल्पसंख्याक बन जाएंगे। अधिक संख्या में रोजगार बाहर के लोगों के हाथ में जाने के खिलाफ अक्सर स्थानीय लोगों में प्रतिरोध की भावना पैदा हो जाती है। इसके बावजूद प्रवासी लोग स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में अमूल्य योगदान देते हैं:
• असंगठित क्षेत्र में श्रम की पूर्ति करना (जैसे सब्जी के ठेले, सफाई कार्य)।
• भवन निर्माण, बुनाई और छपाई जैसे उद्योगों में कुशल श्रम प्रदान करना।
• शहर की दैनिक आजीविका और अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाए रखना।

मुख्य बिंदु:

• स्थानीय लोगों द्वारा प्रवासियों का विरोध करने के कारण (रोजगार और सांस्कृतिक पहचान का डर)।
• प्रवासियों द्वारा अर्थव्यवस्था (विशेषकर असंगठित क्षेत्र) में दिया जाने वाला योगदान।
• देश के भीतर आंतरिक प्रवासन की बढ़ती प्रवृत्ति।

आम गलतियाँ:

• केवल प्रवासियों के विरोध के कारणों को लिखना और अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को भूल जाना।
• प्रवासियों को केवल समस्या के रूप में चित्रित करना।
• असंगठित क्षेत्र और दैनिक मजदूरी के योगदान का जिक्र न करना।

Exam Tips:

a) प्रवासियों के विरोध के सामाजिक-आर्थिक कारणों को स्पष्ट करें।
b) स्थानीय अर्थव्यवस्था में उनके सकारात्मक योगदान (जैसे श्रम और सेवाएं) के बिंदु अवश्य लिखें।
c) आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार के प्रवासन के अंतर को समझें।

 

Question 6: भारत जैसे समान नागरिकता देने वाले देशों में भी लोकतांत्रिक नागरिकता एक पूर्ण स्थापित तथ्य नहीं वरन एक परियोजना है। नागरिकता से जुड़े मुद्दों की चर्चा कीजिए जो आजकल भारत में उठाए जा रहे हैं?

Answer:

समान नागरिकता का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 4 के अनुच्छेद 44 में है। इसमें नीति-निर्देश दिया गया है कि समान नागरिक कानून लागू करना हमारा लक्ष्य होगा। नागरिकता से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 2 में अनुच्छेद 5 से 11 में किया गया है। संविधान में नागरिकों के अधिकार और दायित्वों का उल्लेख है। यह प्रावधान भी है कि राज्य को नस्ल/जाति/लिंग में से किसी भी आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों को भी संरक्षित किया गया है। इस प्रकार के सामाजिक प्रावधानों ने संघर्ष और विवादों को जन्म दिया है। महिला आंदोलन, दलित आंदोलन तथा विकास योजनाओं से विस्थापित लोगों का संघर्ष ऐसे लोगों द्वारा चलाया जा रहा रहे संघर्ष के उदाहरण हैं जो मानते हैं कि उनकी नागरिकता को पूर्ण अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। भारत में जन्म, वंश, भूमि के अर्जन द्वारा, देशीकरण तथा पंजीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त की जा सकती है। वर्तमान में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), एनआरसी (NRC) और विभिन्न सामाजिक समूहों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे भारत में प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं।

मुख्य बिंदु:

• भारतीय संविधान में नागरिकता से संबंधित प्रावधान (अनुच्छेद 5 से 11 और भाग 4)।
• नागरिकता को एक 'सतत परियोजना' (Ongoing Project) के रूप में देखना।
• वर्तमान में विस्थापितों, महिलाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों द्वारा उठाए जा रहे नागरिकता के मुद्दे।

आम गलतियाँ:

• संविधान के अनुच्छेदों का गलत उल्लेख करना।
• 'नागरिकथा एक परियोजना है' इस कथन के गहरे अर्थ को न समझा पाना।
• समकालीन मुद्दों (जैसे विभिन्न सामाजिक आंदोलनों) को उत्तर में शामिल न करना।

Exam Tips:

a) भारतीय संविधान के प्रासंगिक भागों और अनुच्छेदों का सटीक उल्लेख करें।
b) नागरिकता को एक विकासशील प्रक्रिया या परियोजना के रूप में तार्किक ढंग से समझाएं।
c) हालिया आंदोलनों और विस्थापितों के संघर्षों का उदाहरण देकर उत्तर को प्रभावी बनाएं।

 

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