Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Political Science Chapter 07 राष्ट्रवाद
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Question 1: राष्ट्र किस प्रकार से बाकी सामूहिक संबद्धताओं से अलग है?
Answer:
राष्ट्र जनता का कोई आकस्मिक समूह नहीं है। लेकिन यह मानव समाज में पाए जाने वाले अन्य समूहों अथवा समुदायों से अलग है। यह परिवार से भी अलग है। परिवार से प्रत्यक्ष संबंधों पर आधारित होता है जिसका प्रत्येक सदस्य दूसरे सदस्यों के व्यक्तित्व और चरित्र के बारे में व्यक्तिगत जानकारी रखता है। यह जनजातीय, जातीय और अन्य संगोत्रिय समूहों से भी भिन्न है। इन समूहों में विवाह और वंश परंपरा सदस्यों को आपस में बाँधती है। इसलिए यदि हम सभी सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से नहीं भी जानते हों तो भी आवश्यकता पड़ने पर हम उन सूत्रों को खोज लेते हैं। परंतु राष्ट्र के सदस्य के रूप में हम अपने राष्ट्र के अधिकतर सदस्यों को प्रत्यक्ष रूप से कभी नहीं जान पाते और न ही उनसे वंशानुगत रिश्ता जोड़ पाने की आवश्यकता पड़ती है। लोग राष्ट्र में रहते हैं और उनका सम्मान भी करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• राष्ट्र अन्य समूहों जैसे परिवार या जनजाति की तरह प्रत्यक्ष व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित नहीं होता है।
• राष्ट्र के अधिकांश सदस्यों को लोग व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते हैं और न ही उनके बीच वंशानुगत संबंध होते हैं।
• राष्ट्र के सदस्य केवल भौगोलिक क्षेत्र में साथ रहने के साथ-साथ एक सामूहिक पहचान का बोध रखते हैं।
आम गलतियाँ:
• राष्ट्र को केवल एक सामान्य परिवार या जनजाति मान लेना।
• यह सोचना कि राष्ट्र के सभी सदस्य एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं।
• सामूहिक पहचान और व्यक्तिगत संबंधों के अंतर को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) उत्तर में राष्ट्र और अन्य समूहों (जैसे परिवार और जाति) के बीच के अंतर को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
b) 'अज्ञात लोगों का काल्पनिक समुदाय' इस अवधारणा को संक्षिप्त रूप से समझाएँ।
c) मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करें ताकि परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़े।
Question 2: राष्ट्रीय आत्म-निर्णय के अधिकार से आप क्या समझते हैं? किस प्रकार यह विचार राष्ट्र-राज्यों के निर्माण और उनको मिल रही चुनौतियों में परिणत होता है?
Answer:
राष्ट्र अन्य सामाजिक समूहों से अलग शासन अपने आप करने का अधिकार चाहता है। राष्ट्र आत्म-निर्णय का अधिकार चाहता है। आत्म-निर्णय के अपने दावे में राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय समुदाय से माँग करता है कि उसके अलग राजनीतिक इकाई के दर्जे की मान्यता दी जाए। कई बार ऐसी माँग उन लोगों की तरफ़ से आती है जो लंबे समय से किसी निश्चित भू-भाग पर साथ-साथ रहते आए हों और उनमें साझी पहचान का बोध हो। कुछ मसलों में आत्म-निर्णय के ऐसे दावे एक स्वतंत्र राज्य बनाने की उस इच्छा से भी संबंधित होते हैं। इन दावों का संबंध किसी समूह की संस्कृति के संरक्षण से होता है।
मुख्य बिंदु:
• आत्म-निर्णय का अधिकार हर राष्ट्र को अपनी राजनीतिक पहचान और शासन खुद तय करने का अधिकार देता है।
• इसके कारण विश्व में कई नए राष्ट्र-राज्यों का उदय हुआ है।
• वर्तमान समय में यह विचार कई राज्यों के भीतर अलगाववाद और संघर्षों को भी जन्म दे रहा है।
आम गलतियाँ:
• केवल सांस्कृतिक अधिकारों को ही आत्म-निर्णय समझ लेना।
• राष्ट्र-निर्माण और उसे मिलने वाली चुनौतियों के दोहरे पक्ष को न लिखना।
• अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) आत्म-निर्णय के अधिकार की परिभाषा सटीक शब्दों में दें।
b) इसके सकारात्मक (राज्य निर्माण) और नकारात्मक (चुनौतियों/संघर्ष) दोनों पक्षों की चर्चा करें।
c) उत्तर को तार्किक और व्यवस्थित क्रम में प्रस्तुत करें।
Question 3: हम देख चुके हैं कि राष्ट्रवाद लोगों को जोड़ भी सकता है और तोड़ भी सकता है। उन्हें मुक्त कर सकता है और उनमें कटुता और संघर्ष भी पैदा कर सकता है। उदाहरणों के साथ उत्तर दीजिए।
Answer:
यह कथन सत्य है कि राष्ट्रवाद लोगों को जोड़ भी सकता है और तोड़ भी सकता है। राष्ट्रवाद का विचार लोगों को अलग-अलग छोटे समूहों के बंधन से मुक्त राष्ट्रों के एक व्यापक तथा सामान्य समूह में कर सकता है जहाँ वे समान हितों और लक्ष्यों को साझा करते हैं। 19वीं सदी के यूरोप में इसने छोटी-छोटी रियासतों के एकीकरण से राष्ट्रों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। राष्ट्रवादी संघर्षों ने राष्ट्रों की सीमाओं के निर्धारण में योगदान दिया। इसने अत्याचारी शासन से मुक्ति दिलाने में मदद की तो इसके साथ ही यह विरोध, कटुता और युद्ध का कारण भी रहा है। साम्राج्यों और राष्ट्रों के ध्वस्त होने का यह भी एक कारण रहा है। राष्ट्रवाद बड़े-बड़े साम्राज्यों के पतन में हिस्सेदार भी रहा है। यूरोप में बीसवीं शताब्दी के शुरुआत में ऑस्ट्रिया-हंगरी और रूसी साम्राज्य तथा इनके साथ एशिया और अफ्रीका में ब्रिटिश, डच और पुर्तगाली साम्राज्य के विघटन के मूल में राष्ट्रवाद ही था।
मुख्य बिंदु:
• राष्ट्रवाद ने यूरोप में बिखरी हुई रियाساतों को जोड़कर एकीकृत राष्ट्र-राज्यों का निर्माण किया।
• इसने औपनिवेशिक शासन और साम्राज्यवाद के विरुद्ध स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरित किया।
• अत्यधिक राष्ट्रवाद ने आपसी कटुता, युद्ध और बड़े साम्राज्यों के विघटन का मार्ग भी प्रशस्त किया।
आम गलतियाँ:
• केवल राष्ट्रवाद के सकारात्मक पहलू को लिखना और नकारात्मक पहलू को छोड़ देना।
• ऐतिहासिक उदाहरणों जैसे यूरोपीय एकीकरण या साम्राज्यों के पतन का उल्लेख न करना।
• प्रश्न के दोनों भागों (जोड़ना और तोड़ना) को संतुलित रूप से न समझाना।
Exam Tips:
a) उत्तर में राष्ट्रवाद की दोहरी भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
b) 19वीं सदी के यूरोप और साम्राज्यों के पतन के उचित ऐतिहासिक उदाहरण दें।
c) भाषा को प्रवाहमयी और मानक हिंदी में रखें।
Question 4: वंश भाषा, धर्म या नस्ल में से कोई भी पूरे विश्व में राष्ट्रवाद के लिए साझा कारण होने का दावा नहीं कर सकता। टिप्पणी कीजिए।
Answer:
कई राष्ट्रों की अपनी कोई एक सामान्य भाषा नहीं है। अधिकतर समाज सांस्कृतिक रूप से विविधता से भरे हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि हम जैसा राज्य या समाज बनाना चाहते हैं। उसके बारे में साझी राजनीतिक दृष्टि व्यक्तियों को एक राष्ट्र के रूप में बाँधने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके स्थान पर वह एक समान भाषा या जातीय वंश परंपरा जैसी साझी सांस्कृतिक पहचान चाहते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि एक ही भाषा बोलना आपसी संवाद को काफ़ी आसान बना देते हैं। जैसे कि कनाडा में अंग्रेज़ी और फ्रांसीसी भाषी लोग साथ रहते हैं। भारत में अनेक भाषाएँ हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में और अलग-अलग समुदायों द्वारा बोली जाती हैं। उपर्युक्त कारणों से यह स्पष्ट है कि वंश, भाषा, नस्ल तथा धर्म में से कोई भी पूरे विश्व में राष्ट्रवाद के लिए साझा कारण होने का दावा नहीं कर सकता।
मुख्य बिंदु:
• विश्व के अधिकांश राष्ट्र सांस्कृतिक और भाषाई रूप से बहुसांस्कृतिक व विविधतापूर्ण हैं।
• कनाडा और भारत जैसे देशों के उदाहरण सिद्ध करते हैं कि एक भाषा या धर्म के बिना भी राष्ट्र बन सकते हैं।
• साझी राजनीतिक इच्छाशक्ति और मूल्य राष्ट्र निर्माण के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि एक भाषा या एक धर्म होना राष्ट्रवाद के लिए अनिवार्य शर्त है।
• भारत या कनाडा जैसे बहुसांस्कृतिक देशों के उदाहरणों का प्रयोग न करना।
• प्रश्न के सभी तत्वों (वंश, भाषा, धर्म, नस्ल) पर अलग-अलग विचार न करना।
Exam Tips:
a) वंश, भाषा और धर्म की सीमाओं को तार्किक रूप से समझाएँ।
b) बहुसांस्कृतिक राष्ट्रों के उदाहरण देकर अपने उत्तर को पुष्ट करें।
c) निष्कर्ष में राजनीतिक पहचान के महत्व को रेखांकित करें।
Question 5: राष्ट्रवादी भावनाओं को प्रेरित करने वाले कारकों पर सोदाहरण रोशनी डालिए।
Answer:
राष्ट्रवादी भावनाओं को प्रेरित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
1. इतिहास: जो लोग अपने आप को राष्ट्र मानते हैं उनके अंदर अपने बारे में स्थायी ऐतिहासिक पहचान की भावना होती है। अर्थात् स्वयं को इस रूप में देखते हैं जैसे वे बीते अतीत के साथ-साथ आने वाले भविष्य को समेटे हुए हैं।
2. भूक्षेत्र: बहुत सारे राष्ट्रों की पहचान एक खास भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी हुई है। किसी खास भूक्षेत्र पर लंबे समय तक साथ रहना और उससे जुड़ी साझी अतीत की यादें लोगों को एक सामूहिक पहचान का बोध देती हैं। ये उन्हें एक होने का अहसास भी कराती हैं।
3. साझी राजनीतिक आदर्श: अपना भूक्षेत्र और साझी ऐतिहासिक पहचान लोगों में एक होने का बोध पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोकतंत्र में कुछ राजनीतिक मूल्यों और आदर्श के लिए साझी प्रतिबद्धता ही किसी राजनीतिक समुदाय या राष्ट्र का सबसे अधिक वांछित आधार होता है। इसके अंतर्गत राजनीतिक समुदाय के सदस्य कुछ कर्तव्यों से बंधे होते हैं।
4. साझी विश्वास: राष्ट्र विश्वास के ज़रिए बनता है। राष्ट्र पहाड़, नदी, भवनों की तरह नहीं होते, जिन्हें हम देख सकते हैं और जिनका स्पर्श महसूस कर सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• साझी ऐतिहासिक विरासत और अतीत की स्मृतियाँ राष्ट्रवाद को जन्म देती हैं।
• एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र (भूक्षेत्र) लोगों में अपनेपन का भाव जगाता है।
• समान राजनीतिक आदर्श, मूल्य और आपसी विश्वास राष्ट्र को सुदृढ़ बनाते हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल एक या दो कारकों का उल्लेख करना और बाकी को छोड़ देना।
• प्रत्येक कारक को उचित उदाहरणों या तर्कों के साथ स्पष्ट न करना।
• इतिहास और भूक्षेत्र के अंतर को ठीक से न समझाना।
Exam Tips:
a) सभी कारकों (इतिहास, भूक्षेत्र, राजनीतिक आदर्श, साझी विश्वास) की हेडिंग बनाकर उत्तर लिखें।
b) प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट और संक्षिप्त भाषा में समझाएँ।
c) प्रस्तुतिकरण को बेहतर बनाने के लिए बुलेट पॉइंट्स का प्रयोग करें।
Question 6: संघर्षरत राष्ट्रवादी आकांक्षाओं के साथ बर्ताव करने में तानाशाही की अपेक्षा लोकतंत्र अधिक समर्थ होता है? कैसे?
Answer:
लोकतंत्र में कुछ राजनीतिक आदर्श के लिए साझी प्रतिबद्धता ही किसी राजनीतिक समुदाय का सर्वाधिक वांछित आधार है। दायित्व सभी नागरिकों के रूप में अधिकारों को पहचान लेने से पैदा होते हैं। लोकतंत्र राष्ट्रवादी की भावना को समझता है। इसलिए संघर्षरत राष्ट्रवादी आकांक्षाओं के साथ बर्ताव करने में तानाशाही की अपेक्षा लोकतंत्र अधिक समर्थ होता है।
मुख्य बिंदु:
• लोकतंत्र नागरिकों के अधिकारों और विविधताओं का सम्मान करता है।
• तानाशाही बल प्रयोग से राष्ट्रवादी आकांक्षाओं को दबाने का प्रयास करती है, जो बाद में और अधिक हिंसक होती हैं।
• लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ संवाद और सहमति के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजती हैं।
आम गलतियाँ:
• तानाशाही और लोकतंत्र के मूल अंतर को राष्ट्रवाद के संदर्भ में न समझाना।
• यह मान लेना कि तानाशाही दीर्घकालिक रूप से राष्ट्र को एकजुट रख सकती है।
• लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे संवाद और सहिष्णुता की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) लोकतंत्र की संवाद शैली और तानाशाही की दमनकारी नीति की तुलना करें।
b) स्पष्ट करें कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ विविध आकांक्षाओं को बेहतर ढंग से समायोजित कर सकती हैं।
c) उत्तर को तार्किक और संतुलित बनाए रखें।
Question 7: आपकी राय में राष्ट्रवाद की सीमाएँ क्या हैं?
Answer:
राष्ट्रवाद की सीमाएँ निम्नलिखित हैं: राष्ट्रवादी अधिकतर स्वतंत्र राज्य को अधिकार के रूप में मानने लगते हैं। परंतु यह संभव नहीं कि प्रत्येक राष्ट्रीय समूह को स्वतंत्र राज्य प्रदान किया जाए। यह अवांछनीय भी होगा। यह ऐसे राज्यों के गठन की ओर ले जा सकता है जो राजनीतिक तथा आर्थिक क्षमता की दृष्टि से अत्यंत छोटे हों तथा इससे अल्पसंख्यक समूहों की समस्याएँ और बढ़े। हमें राष्ट्रवाद के एक जातीय रूपों के साथ कोई सहानुभूति नहीं रखनी चाहिए।
मुख्य बिंदु:
• हर भाषाई या जातीय समूह के लिए अलग राष्ट्र-राज्य बनाना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
• अत्यधिक राष्ट्रवाद अति-छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों को जन्म दे सकता है।
• यह अल्पसंख्यक समूहों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
आम गलतियाँ:
• राष्ट्रवाद की सीमाओं को केवल वैचारिक रूप से देखना, व्यावहारिक कठिनाइयों को न लिखना।
• जातीय राष्ट्रवाद के खतरों का उल्लेख न करना।
• उत्तर को बहुत लंबा या अस्पष्ट लिखना।
Exam Tips:
a) राष्ट्रवाद की सीमाओं को बिंदुओं के रूप में स्पष्ट लिखें।
b) व्यावहारिक कठिनाइयों (जैसे हर समूह के लिए अलग राज्य असंभव होना) का विशेष उल्लेख करें।
c) संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए अंत में सुधार के उपाय या विचार दें।
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