Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Political Science Chapter 06 न्यायपालिका
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Question 1:
(क) न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के विभिन्न तरीके कौन-कौन से हैं? निम्नलिखित में जो बेमेल हो उसे छाँटें।
(ख) सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से सलाह ली जाती है।
(ग) न्यायाधीशों को अमूमन अवकाश प्राप्ति की आयु से पहले नहीं हटाया जाता।
(घ) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में नहीं किया जा सकता।
(ङ) न्यायाधीशों की नियुक्ति में संसद की दखल नहीं है।
Answer:
(घ) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में नहीं किया जा सकता।
मुख्य बिंदु:
• न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
• तबादला नीति न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए बनाई गई है।
• उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का तबादला एक राज्य से दूसरे राज्य में किया जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• बेमेल विकल्प को पहचानते समय न्यायपालिका के प्रावधानों को न समझना।
• सभी कथनों को सही मान लेना।
• संवैधानिक अनुच्छेदों की जानकारी का अभाव होना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) न्यायाधीशों के तबादले से संबंधित प्रावधानों को याद रखें।
c) संविधान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता के उपायों को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 2: क्या न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ यह है कि न्यायपालिका किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है? अपना उत्तर अधिकतम 100 शब्दों में लिखें।
Answer:
नहीं, न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि न्यायपालिका किसी के प्रति जवाबदेह न हो। न्यायपालिका भी संविधान का ही भाग है न कि संविधान से ऊपर है। न्यायपालिका का उद्देश्य भी संविधान व लोकतंत्र के उद्देश्य को पूरा करना है। अतः, न्यायपालिका की स्वतंत्रता के निर्णयों को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाए। न्यायपालिका अपनी नियुक्ति के लिए, सेवाकाल के लिए व सेवा शर्तों से सेवा सुविधाओं के लिए कार्यपालिका व विधानपालिका पर निर्भर न हो। न्यायाधीश को हटाने का तरीका भी पक्षपातरहित हो। भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त है।
मुख्य बिंदु:
• न्यायपालिका संविधान के दायरे में रहकर काम करती है।
• स्वतंत्रता का अर्थ स्वेच्छाचारिता नहीं है।
• न्यायपालिका संविधान और जनता के प्रति उत्तरदायी है।
आम गलतियाँ:
• स्वतंत्रता को निरंकुशता मान लेना।
• यह सोचना कि न्यायपालिका पर किसी का नियंत्रण नहीं है।
• शब्द सीमा का ध्यान न रखना।
Exam Tips:
a) उत्तर में संवैधानिक सीमाओं का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) छोटे और स्पष्ट वाक्यों का प्रयोग करें।
c) निर्धारित शब्द सीमा के भीतर उत्तर समाप्त करें।
Question 3: न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए संविधान के विभिन्न प्रावधान कौन-कौन से हैं?
Answer:
न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए भारतीय संविधान में निम्न प्रावधान हैं:
(क) न्यायाधीशों की नियुक्ति में संसद की कोई भूमिका नहीं होती है।
(ख) न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए निश्चित योग्यताएं नहीं होती है।
(ग) न्यायाधीशों के अपने वेतन भत्तों व अन्य आर्थिक सुविधाओं के लिए कार्यपालिका अथवा संसद पर निर्भर नहीं है। उनके खर्चों से संबंधित बिल पर बहस व मतदान नहीं होता।
(घ) न्यायाधीशों का सेवा काल लम्बा व सुरक्षित होता है यद्यपि कुछ परिस्थितियों में इनको हटाया भी जा सकता है परंतु महाभियोग की प्रक्रिया काफी लम्बी व मुश्किल होती है।
(ङ) न्यायाधीशों के कार्यों व निर्णयों के आधार पर उनकी व्यक्तिगत आलोचना नहीं की जा सकती।
(च) जो न्यायालय का व उनके निर्णयों का अपमान करते हैं न्यायालय उनको दण्डित कर सकता है।
(छ) न्यायालय के निर्णयों बाध्यकारी होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• नियुक्ति प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप का अभाव।
• सेवा की सुरक्षा और निश्चित कार्यकाल।
• वित्तीय स्वतंत्रता और न्यायालय की अवमानना पर दंड की शक्ति।
आम गलतियाँ:
• सभी बिंदुओं को आपस में मिला देना।
• महाभियोग प्रक्रिया को सरल समझना।
• वित्तीय स्वतंत्रता के बिंदु को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) बिंदुओं को क्रमानुसार (क, ख, ग...) लिखें।
b) प्रत्येक बिंदु को एक-दो पंक्तियों में स्पष्ट करें।
c) मुख्य संवैधानिक अनुच्छेदों का संदर्भ दें यदि याद हो।
Question 4: नीचे दी गई समाचार-रिपोर्ट पढ़ें और उनमें निम्नलिखित पहलुओं की पहचान करें।
सर्वोच्च न्यायालय ने रिलायंस से दड़ाहू के किसानों को 300 करोड़ रूपए देने को कहा- निजी कारपोरेट ब्यूरो, 24 मार्च 2005.
मुम्बई - सर्वोच्च न्यायालय ................ रिलायंस से 300 करोड़ रूपए की बैंक-गारंटी देने को कहा।
(क) मामला किस बारे में है?
(ख) इस मामले में लाभार्थी कौन हैं?
(ग) इस मामले में फरियादी कौन है?
(घ) सोच कर बताइए कि कंपनी की तरफ से कौन कौन से तर्क दिए जायेंगें?
(ङ) किसानों की तरफ से कौन से तर्क दिए जायेंगें?
Answer:
(क) यह मामला दड़ाहू क्षेत्र के चीकू पैदा करने वाले किसानों को मुआवजा देने के बारे में है जिनका थर्मल पावर प्लांट के नुकसानदायक रिसाव के कारण भारी नुकसान हुआ है।
(ख) सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से दड़ाहू तालुका के चीकू पैदा करने वाले किसानों को लाभ हुआ।
(ग) इस केस में दड़ाहू क्षेत्र के चीकू पैदा करने वाले किसान वादी हैं।
(घ) रिलायंस कंपनी ने न्यायालय में यह दलील दी कि थर्मल पावर प्लांट के नुकसानदायक रिसाव को नियंत्रित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र का निर्माण करेगा।
(ङ) किसानों की तरफ से यह तर्क दिया जाएगा कि थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख एवं जहरीली गैसों की वजह से उनकी खेती नष्ट हो गई है तथा आस-पास के जंगल भी खत्म होते जा रहे हैं। इस नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी की ओर से पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए।
मुख्य बिंदु:
• जनहित याचिका और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामले।
• कारपोरेट उत्तरदायित्व और नागरिक अधिकार।
• न्यायपालिका द्वारा पर्यावरण की रक्षा के लिए दिए गए निर्देश।
आम गलतियाँ:
• मामले के तथ्यों को गलत समझना।
• वादी और प्रतिवादी के तर्कों को मिला देना।
• केवल एक पक्ष को ध्यान में रखकर उत्तर लिखना।
Exam Tips:
a) प्रश्न के सभी उप-भागों (क, ख, ग आदि) के उत्तर अलग-अलग स्पष्ट लिखें।
b) समाचार-रिपोर्ट के संदर्भ को ध्यान से पढ़ें।
c) तर्कों को व्यावहारिक और तार्किक रूप से प्रस्तुत करें।
Question 5: नीचे की समाचार-रिपोर्ट पढ़ें और, चिन्हित करें कि रिपोर्ट में किस-किस स्तर की सरकार सक्रिय दिखाई देती है।
(क) सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका की निशानदेही करें।
(ख) कार्यपालिका और न्यायालय के कामकाज की कौन-कौन सी बातें आप इसमें पहचान सकते हैं?
(ग) इस प्रकरण से संबंधित नीतिगत मुद्दे, कानून बनाने से संबंधित बातें, क्रियान्वयन तथा कानून की व्याख्या से जुड़ी बातों की पहचान करें।
(घ) सीएनजी-मुद्दे पर केन्द्र और दिल्ली सरकार एक साथ - स्टाफ रिपोर्ट, द हिन्दू, सितंबर 23, 2001.
राजधानी के सभी गैर-सीएनजी व्यावसायिक वाहनों को यातायात से बाहर करने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार यातायात प्रणाली अस्त-व्यस्त हो जाएगी।
Answer:
(क) इस केस में केंद्रीय सरकार व दिल्ली सरकार शामिल हैं।
(ख) यातायात के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निश्चित मापदंड के आधार पर इस वाद की सही व्याख्या करने में सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
(ग) कार्यपालिका प्रदूषण नियंत्रण की नीति का सही ढंग से क्रियान्वयन करेगी तथा न्यायालय यह तय करेगी कि कार्यपालिका की बनाई नीति का कितनी कारगर है तथा कहाँ उसका उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।
(घ) इस प्रकरण में नीतिगत निर्णय दिल्ली सरकार का यह है कि दिल्ली में सी.एन.जी. के प्रयोग वाली बसें ही चलेंगी। इस स्थिति के अनुसार दिल्ली सरकार कानून बनाएगी। नीति व कानून की व्याख्या के संबंध में यह निर्णय लिया गया कि ऐसा करते समय प्रदूषण से सुरक्षा को मुख्य रूप से ध्यान में रखा जाए।
मुख्य बिंदु:
• केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय।
• प्रदूषण नियंत्रण और न्यायपालिका के निर्देश।
• नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में अंतर।
आम गलतियाँ:
• कार्यपालिका और न्यायपालिका के कार्यों को एक मान लेना।
• सीएनजी नीति के मुख्य उद्देश्य को न समझना।
• रिपोर्ट के संदर्भ से हटकर उत्तर देना।
Exam Tips:
a) सरकारी स्तरों (केंद्र और राज्य) को स्पष्ट रूप से पहचानें।
b) नीतिगत मुद्दों और कानून की व्याख्या में अंतर स्पष्ट करें।
c) उत्तर को बिंदुवार लिखकर स्पष्टता बढ़ाएं।
Question 6: निम्नलिखित कथन इक्वाडोर के बारे में हैं। इस उदाहरण और भारत की न्यायपालिका के बीच आप क्या समानता अथवा असमानता पाते हैं? सामान्य कानूनों की कोई संहिता अथवा पहले सुनाया गया न्यायिक फैसला मौजूद होता तो पत्रकार के अधिकारों को स्पष्ट करने में मदद मिलती। दुर्भाग्य से इक्वाडोर की अदालत इस रीति से काम नहीं करती है पिछले मामलों में उच्चतर अदालत के न्यायाधीशों ने जो फैसले दिए हैं उन्हें कोई न्यायाधीश उदाहरण के रूप में मानने के लिए बाध्य नहीं है। राज्य अमेरिका के विपरीत इक्वाडोर (अथवा दक्षिण अमेरिका में किसी और देश में जिस न्यायपालिका के सामने अपील की गई है उसे अपना फैसला और इसका कानूनी आधार लिखित रूप में नहीं देना होता। कोई न्यायाधीश आज आज्ञा में कोई फैसला सुनाकर कल उसी मामले में दूसरा फैसला दे सकता है और इसमें उसे बताने की जरूरत नहीं कि वह ऐसा क्यों कर रहा है?
Answer:
भारतीय न्याय प्रणाली में किसी विषय पर उच्च न्यायालयों के द्वारा दिए गए निर्णय आगे आने वाले निर्णयों के लिए मार्गदर्शक होते हैं हैं जो बाध्यकारी भी होते हैं। यह स्थिति इक्वाडोर के उदाहरण से भिन्न है क्योंकि वहाँ पर न्यायाधीश उसी विषय पर दिए गए निर्णय को मानने के लिए बाध्य नहीं होता है भारतीय न्याय व्यवस्था व इक्वाडोर की न्याय व्यवस्था में एक समानता यह है कि न्यायाधीश नई परिस्थिति में अपना पहला निर्णय किसी विषय पर बदल सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• दृष्टांत निर्णय (Precedents) का भारतीय न्याय व्यवस्था में महत्व।
• लिखित निर्णयों और तर्कों की अनिवार्यता।
• न्यायिक निर्णयों में स्थिरता और लचीलेपन का संतुलन।
आम गलतियाँ:
• इक्वाडोर और भारत की न्याय व्यवस्था की तुलना को ठीक से न समझ पाना।
• दृष्टांत निर्णयों के महत्व को नजरअंदाज करना।
• लिखित फैसलों के औचित्य को न समझ पाना।
Exam Tips:
a) दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करते समय समानता और असमानता दोनों बिंदुओं को लिखें।
b) भारतीय संदर्भ में दृष्टांत निर्णयों की कानूनी बाध्यता को स्पष्ट करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।
Question 7: निम्नलिखित कथनों को पढ़िए और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अमल में लाए जाने वाले विभिन्न क्षेत्राधिकार मसलन-मूल, अपीलीय और सलाहकारिकी-से इनका मिलान कीजिए।
(क) सरकार जानना चाहती थी कि क्या वह पाकिस्तान-अधिग्रहीत जम्मू-कश्मीर के निवासियों की नागरिकता के संबंध में कानून पारित कर सकती है।
(ख) कावेरी नदी के जल विवाद के समाधान के लिए तमिलनाडु सरकार अदालत की शरण लेना चाहती है।
(ग) बाँध स्थल से हटाए जाने के विरुद्ध लोगों द्वारा की गई अपील को अदालत ने ठुकरा दिया।
Answer:
(क) परामर्श, संबंधित अधिकार।
(ख) प्रारंभिक क्षेत्राधिकार।
(ग) अपीलीय क्षेत्राधिकार।
मुख्य बिंदु:
• सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न क्षेत्राधिकार (मूल, अपीलीय, सलाहकार)।
• प्रारंभिक क्षेत्राधिकार के अंतर्गत केंद्र-राज्य या राज्यों के आपसी विवाद आते हैं।
• सलाहकार क्षेत्राधिकार के तहत राष्ट्रपति कानूनी मामलों पर सलाह मांग सकते हैं।
आम गलतियाँ:
• क्षेत्राधिकार के प्रकारों में भ्रमित होना।
• नदी जल विवाद और परामर्श संबंधी मामलों को गलत मिलाना।
• अपीलीय क्षेत्राधिकार को न पहचान पाना।
Exam Tips:
a) मिलान करते समय प्रत्येक क्षेत्राधिकार की परिभाषा याद रखें।
b) प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही विकल्प चुनें।
c) उत्तर को स्पष्ट रूप से (क, ख, ग) के सामने लिखें।
Question 8: जनहित याचिका किस तरह गरीबों की मदद कर सकती है?
Answer:
न्याय वितरण की प्रक्रिया में जनहित याचिका की व्यवस्था एक महत्वपूर्ण कदम है। इन याचिकाओं के माध्यम से उन व्यक्तियों को न्याय दिलाया जा सकता है जो स्वयं अपने हित की रक्षा अशिक्षा के कारण या आर्थिक स्रोतों के अभाव के कारण करने में असमर्थ हैं। ऐसे व्यक्तियों के हितों के लिए कोई दयालु व्यक्ति या संस्थाएं याचिका दायर करती हैं तथा आवश्यक प्रमाण व तथ्य प्रदान करती हैं हैं तथा जनहित को प्राप्त करने का प्रयास करती हैं। सबसे पहले इस दिशा में न्यायाधीश पी.एन. भगवती ने इस प्रकार की याचिका स्वीकार करके पहल की जिससे गरीब व असहाय लोगों को न्याय दिलाने में जनहित याचिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। न्यायाधीश पी.एन. भगवती ने सबसे पहले 1984 में बंधुआ मुक्ति मोर्चा बनाया। भारत सरकार ने केस में जनहित याचिका स्वीकार की जिससे अनेक मजदूरों को न्याय मिला।
मुख्य बिंदु:
• जनहित याचिका (PIL) गरीबों और असहायों के लिए वरदान है।
• इसमें औपचारिक कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।
• न्यायाधीश पी.एन. भगवती का इसमें ऐतिहासिक योगदान रहा है।
आम गलतियाँ:
• जनहित याचिका की परिभाषा स्पष्ट न करना।
• यह भूल जाना कि कोई दूसरा व्यक्ति भी पीड़ित की ओर से याचिका दायर कर सकता है।
• ऐतिहासिक संदर्भ (जैसे पी.एन. भगवती का योगदान) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) जनहित याचिका के लाभों को बिंदुओं में समझाएं।
b) न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती का नाम अवश्य लिखें।
c) सामान्य याचिका और जनहित याचिका के अंतर को स्पष्ट करें।
Question 9: क्या आप मानते हैं कि न्यायिक सक्रियता से न्यायपालिक और कार्यपालिका में विरोध पनप सकता है? क्यों?
Answer:
भारतीय न्यायपालिका को न्याय पुनः निरीक्षण की शक्ति प्राप्त है जिसके आधार पर न्यायपालिका, विधानपालिका के द्वारा पारित कानूनों तथा कार्यपालिका के द्वारा जारी आदेशों की संवैधानिक वैधता की जाँच कर सकता है, अगर ये संविधान के विपरीत पाए जाते हैं, तो न्यायपालिका उनको अवैध घोषित कर सकती है। परंतु न्यायपालिका की यह शक्ति सीमित है।
मुख्य बिंदु:
• न्यायिक सक्रियता और शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत।
• न्यायपालिका द्वारा कार्यपालिका के क्षेत्र में हस्तक्षेप की संभावना।
• संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहकर ही न्यायपालिका कार्य करती है।
आम गलतियाँ:
• न्यायिक सक्रियता को तानाशाही समझ लेना।
• शक्तियों के संतुलन के सिद्धांत को नजरअंदाज करना।
• केवल विरोध के कारणों पर ध्यान देना, सीमाओं पर नहीं।
Exam Tips:
a) शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लेख करें।
b) न्यायिक पुनरावलोकन की सीमा को स्पष्ट करें।
c) संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए उत्तर लिखें।
Question 10: न्यायिक सक्रियता मौलिक अधिकारों की सुरक्षा से किस रूप में जुड़ी है? क्या इससे मौलिक अधिकारों के विषय-क्षेत्र को बढ़ाने में मदद मिलती है?
Answer:
न्याय सक्रियता भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में चर्चा का विषय है जिसको आम जनता ने स्वीकार भी किया है तथा सराहा भी है क्योंकि इससे नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा भी हुई है, एवं कार्यपालिका, विधानपालिका व नौकरशाही पर नियंत्रण करने में भी सहायता मिली है। भारतीय न्यायपालिका विभिन्न राजनीतिक सामाजिक व आर्थिक नीतिगत विषयों पर टिप्पणी करती है, जिनको वह गलत मानती है।
मुख्य बिंदु:
• न्यायिक सक्रियता ने मौलिक अधिकारों के दायरे को विस्तृत किया है।
• जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के अंतर्गत पर्यावरण, शिक्षा आदि को शामिल किया गया है।
• यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का एक प्रभावी साधन बन गई है।
आम गलतियाँ:
• न्यायिक सक्रियता और मौलिक अधिकारों के संबंध को न समझ पाना।
• केवल नकारात्मक पहलुओं पर चर्चा करना।
• उदाहरणों का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) मौलिक अधिकारों के व्यापक अर्थ को समझाएं।
b) जनहित याचिका और न्यायिक सक्रियता के आपसी संबंध को स्पष्ट करें।
c) उत्तर में सकारात्मक निष्कर्ष दें।
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