Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 02 परमाणु की संरचना
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Question 1: एक ग्राम भार में इलेक्ट्रॉनों की संख्या का परिकलन कीजिए। (i) एक मोल इलेक्ट्रॉनों के द्रव्यमान और आवेश का परिकलन कीजिए।
Answer:
(i) एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.10939 × 10⁻³¹ kg होता है। इसलिए 1 kg भार में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1 ÷ (9.10939 × 10⁻³¹ kg) = 1.098 × 10³⁰ है। एक ग्राम (1 × 10⁻³ kg) भार में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए इसे 1 × 10⁻³ से गुणा करते हैं, जो कि 1.098 × 10²⁷ प्राप्त होती है।
(ii) एक मोल इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान निकालने के लिए एक इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान को आवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10²³) से गुणा किया जाता है, जिससे 5.48 × 10⁻⁷ kg प्राप्त होता है। इसी प्रकार, एक मोल इलेक्ट्रॉनों का कुल आवेश एक इलेक्ट्रॉन के आवेश (1.6022 × 10⁻¹⁹ C) और आवोगाद्रो संख्या के गुणनफल के बराबर होता है, जो 9.65 × 10⁴ C आता है।
मुख्य बिंदु:
• एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.109 × 10⁻³¹ kg होता है।
• एक मोल में कणों की संख्या आवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10²³) के बराबर होती है।
• आवेश की गणना के लिए इलेक्ट्रॉन पर उपस्थित आवेश और मोल की संख्या का उपयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• ग्राम को किलोग्राम में बदलते समय घात (power) की गलती करना।
• आवोगाद्रो संख्या से गुणा करना भूल जाना।
• इकाइयों (units) का सही उपयोग न करना।
Exam Tips:
a) मोल संकल्पना से जुड़े सूत्रों को अच्छी तरह याद रखें।
b) गणना करते समय वैज्ञानिक संकेतन (scientific notation) का सावधानीपूर्वक प्रयोग करें।
c) अंतिम उत्तर के साथ उचित इकाई अवश्य लिखें।
Question 2: मेथेन के एक मोल में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या का परिकलन कीजिए। 14 g कार्बन-14 में न्यूट्रॉनों की कुल संख्या तथा कुल द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। मानक ताप और दाब (STP) पर 34 mg NH₃ में प्रोटॉनों की कुल संख्या और कुल द्रव्यमान बताइए। दाब और ताप में परिवर्तन से क्या उत्तर परिवर्तित हो जाएगा?
Answer:
(i) मेथेन (CH₄) के एक अणु में 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं (कार्बन के 6 और चार हाइड्रोजन के 4)। एक मोल मेथेन में अणुओं की संख्या आवोगाद्रो संख्या के बराबर होती है, इसलिए कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या 6.022 × 10²⁴ होगी।
(ii) कार्बन-14 के एक परमाणु में 8 न्यूट्रॉन होते हैं (14 - 6)। 14 g कार्बन-14 में 6.022 × 10²³ परमाणु होते हैं, जिससे कुल न्यूट्रॉनों की संख्या 4.818 × 10²⁴ और कुल द्रव्यमान लगभग 14 g प्राप्त होता है।
(iii) 34 mg अमोनिया (NH₃) में प्रोटॉनों की संख्या 1.2046 × 10²² और कुल द्रव्यमान 2.0176 × 10⁻⁵ kg प्राप्त होता है। परमाणु, इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन की संख्या तापमान और दाब की स्थिति से स्वतंत्र होती है, अतः ताप या दाब बदलने पर ये मान अपरिवर्तित रहेंगे।
मुख्य बिंदु:
• किसी अणु में कुल इलेक्ट्रॉन उसके सभी परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों का योग होते हैं।
• न्यूट्रॉन की संख्या परमाणु द्रव्यमान और परमाणु क्रमांक का अंतर होती है।
• कणों की संख्या तापमान और दाब पर निर्भर नहीं करती है।
आम गलतियाँ:
• द्रव्यमान और मोल की गणना में संवादी इकाइयों का प्रयोग न करना।
• तापमान और दाब के प्रभाव को लेकर भ्रमित होना।
• परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान संख्या को आपस में मिला देना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक अणु या आयन में उपस्थित प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन की गणना अलग-अलग करें।
b) मिलीग्राम (mg) को ग्राम में बदलना न भूलें।
c) वैचारिक प्रश्नों के स्पष्ट कारण लिखें।
Question 3: निम्नलिखित नाभिकों में उपस्थित न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या बताइए— 13C, 16O, 24Mg, 56Fe, 88Sr.
Answer:
प्रत्येक नाभिक के लिए प्रोटॉनों की संख्या उसकी परमाणु संख्या (Z) के बराबर होती है और न्यूट्रॉनों की संख्या द्रव्यमान संख्या (A) तथा परमाणु संख्या (Z) का अंतर होती है (न्यून = A - Z)। कार्बन-13 (¹³C) में 6 प्रोटॉन और 7 न्यूट्रॉन होते हैं। ऑक्सीजन-16 (¹⁶O) में 8 प्रोटॉन और 8 न्यूट्रॉन होते हैं। मैग्नीशियम-24 (²⁴Mg) में 12 प्रोटॉन और 12 न्यूट्रॉन होते हैं। आयरन-56 (⁵⁶Fe) में 26 प्रोटॉन और 30 न्यूट्रॉन होते हैं। स्ट्रॉन्शियम-88 (⁸⁸Sr) में 38 प्रोटॉन और 50 न्यूट्रॉन होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्रोटॉनों की संख्या हमेशा परमाणु क्रमांक के बराबर होती है।
• न्यूट्रॉन की संख्या = द्रव्यमान संख्या - परमाणु क्रमांक (A - Z)।
• प्रतीक में ऊपर की संख्या द्रव्यमान संख्या और नीचे की संख्या परमाणु क्रमांक दर्शाती है।
आम गलतियाँ:
• द्रव्यमान संख्या और परमाणु क्रमांक को आपस में घटाने में गलती करना।
• तत्वों के प्रतीक से सही परमाणु क्रमांक न पहचान पाना।
Exam Tips:
a) आवर्त सारणी के शुरुआती तत्वों के परमाणु क्रमांक जुबानी याद रखें।
b) न्यूट्रॉन निकालने का सूत्र (A - Z) हमेशा ध्यान रखें।
c) उत्तर को सारणीबद्ध रूप में भी लिखा जा सकता है।
Question 4: नीचे दिए गए परमाणु द्रव्यमान (A) और परमाणु संख्या (Z) वाले परमाणुओं का पूर्ण प्रतीक लिखिए— (i) Z = 17, A = 35 (ii) Z = 92, A = 233 (iii) Z = 4, A = 9.
Answer:
किसी तत्व के परमाणु का पूर्ण प्रतीक लिखने के लिए तत्व के रासायनिक प्रतीक के बाईं ओर नीचे परमाणु क्रमांक (Z) और बाईं ओर ऊपर द्रव्यमान संख्या (A) लिखी जाती है, जिसे (³⁵₁₇Cl) के रूप में दर्शाया जाता है।
(i) Z = 17 और A = 35 वाला तत्व क्लोरीन है, जिसका पूर्ण प्रतीक ₃₅Cl₁₇ या ³⁵₁₇Cl है।
(ii) Z = 92 और A = 233 वाला तत्व यूरेनियम है, जिसका पूर्ण प्रतीक ²³³U₉₂ है।
(iii) Z = 4 और A = 9 वाला तत्व बेरिलियम है, जिसका पूर्ण प्रतीक ⁹Be₄ है।
मुख्य बिंदु:
• प्रतीक के ऊपर द्रव्यमान संख्या (A) और नीचे परमाणु क्रमांक (Z) लिखा जाता है।
• परमाणु क्रमांक से ही तत्व की पहचान होती है।
• प्रतीक रसायन विज्ञान में मानक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
आम गलतियाँ:
• ऊपर और नीचे की संख्याओं की स्थिति को उलट देना।
• गलत परमाणु क्रमांक के आधार पर तत्व का नाम लिखना।
Exam Tips:
a) प्रतीक लेखन का मानक प्रारूप (AZX) अच्छी तरह अभ्यास करें।
b) परमाणु क्रमांक देखकर तुरंत तत्व का नाम पहचानना सीखें।
c) परीक्षा में प्रतीक स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
Question 5: सोडियम लैंप द्वारा उत्सर्जित पीले प्रकाश की तरंग-दैर्ध्य (λ) 580 nm है। इसकी आवृत्ति (v) और तरंग-संख्या (v̄) का परिकलन कीजिए।
Answer:
प्रकाश की आवृत्ति (v) निकालने का सूत्र v = c ÷ λ है, जहाँ c प्रकाश का वेग (3 × 10⁸ m/s) है और λ तरंग-दैर्ध्य (580 nm = 580 × 10⁻⁹ m) है। मान रखने पर आवृत्ति v = (3 × 10⁸) ÷ (580 × 10⁻⁹) = 5.17 × 10¹⁴ s⁻¹ प्राप्त होती है। तरंग-संख्या (v̄) आवृत्ति और प्रकाश के वेग के संबंध से या सीधे v̄ = 1 ÷ λ द्वारा निकाली जाती है, जो 1.72 × 10⁶ m⁻¹ या 5.17 × 10¹⁴ ÷ (3 × 10⁸) के अनुसार परिकलित की जाती है।
मुख्य बिंदु:
• तरंग-दैर्ध्य को हमेशा मीटर (m) इकाई में बदलना चाहिए।
• आवृत्ति और तरंग-दैर्ध्य एक दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।
• तरंग-संख्या तरंग-दैर्ध्य का व्युत्क्रम होती है (v̄ = 1/λ)।
आम गलतियाँ:
• नैनोमीटर (nm) को मीटर में बदलते समय घात (10⁻⁹) की भूल करना।
• इकाईयों का सही मिलान न करना।
Exam Tips:
a) सभी मानों को एसआई (SI) मात्रक में बदलना अनिवार्य है।
b) प्रकाश के वेग (c) का मान हमेशा याद रखें।
c) गणना के चरणों को साफ-सुथरा लिखें।
Question 6: प्रत्येक ऐसे फोटॉन की ऊर्जा ज्ञात कीजिए— (i) जो 3 × 10¹³ Hz आवृत्ति वाले प्रकाश के संगत हो। (ii) जिसकी तरंग-दैर्ध्य 0.50 angstrom हो।
Answer:
(i) फोटॉन की ऊर्जा E = hv सूत्र से ज्ञात की जाती है, जहाँ h प्लांक स्थिरांक (6.626 × 10⁻³⁴ Js) है। आवृत्ति v = 3 × 10¹³ Hz रखने पर ऊर्जा E = (6.626 × 10⁻³⁴) × (3 × 10¹³ Hz) = 1.988 × 10⁻²⁰ J प्राप्त होती है।
(ii) तरंग-दैर्ध्य λ = 0.50 Å = 0.50 × 10⁻¹⁰ m दी गई है। ऊर्जा का सूत्र E = hc ÷ λ का उपयोग करने पर E = (6.626 × 10⁻³⁴ × 3 × 10⁸) ÷ (0.50 × 10⁻¹⁰) = 3.98 × 10⁻¹⁵ J प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• ऊर्जा का संबंध आवृत्ति से E = hv और तरंग-दैर्ध्य से E = hc/λ होता है।
• angstrom (Å) को मीटर में बदलने के लिए 10⁻¹⁰ से गुणा किया जाता है।
• प्लांक स्थिरांक (h) का मान मानक होता है।
आम गलतियाँ:
• Å को मीटर में बदलते समय घात की गलती करना।
• गलत सूत्र का चयन करना।
Exam Tips:
a) आवृत्ति और तरंग-दैर्ध्य दोनों प्रकार के ऊर्जा सूत्रों को याद रखें।
b) कैलकुलेशन में घातों (powers of 10) का विशेष ध्यान रखें।
c) उत्तर में ऊर्जा का मात्रक जूल (J) लिखना न भूलें।
Question 7: 2.0 × 10⁻¹⁰ s आवर्तकाल वाली प्रकाश तरंग की तरंग-दैर्ध्य, आवृत्ति और तरंग-संख्या की गणना कीजिए।
Answer:
प्रकाश की आवृत्ति (v) आवर्तकाल (T) का व्युत्क्रम होती है, अतः v = 1 ÷ T = 1 ÷ (2.0 × 10⁻¹⁰ s) = 5.0 × 10⁹ s⁻¹ प्राप्त होती है। तरंग-दैर्ध्य (λ) ज्ञात करने के लिए सूत्र λ = c ÷ v का उपयोग किया जाता है, जिससे λ = (3 × 10⁸ m/s) ÷ (5.0 × 10⁹ s⁻¹) = 0.06 m प्राप्त होती है। तरंग-संख्या (v̄) तरंग-दैर्ध्य का व्युत्क्रम होती है, जिससे v̄ = 1 ÷ 0.06 m = 16.66 m⁻¹ प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• आवर्तकाल और आवृत्ति एक दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं।
• तरंग-दैर्ध्य निकालने के लिए प्रकाश के वेग और आवृत्ति का अनुपात लिया जाता है।
• तरंग-संख्या प्रति मीटर में मापी जाती है।
आम गलतियाँ:
• आवर्तकाल से आवृत्ति निकालते समय भाग देने में गलती करना।
• इकाइयों के रूपांतरण में चूक होना।
Exam Tips:
a) आवर्तकाल (T) और आवृत्ति (v) के संबंध को हमेशा याद रखें।
b) चरणबद्ध तरीके से मान ज्ञात करें।
c) अंतिम परिणाम मानक रूप में लिखें।
Question 8: ऐसा प्रकाश, जिसकी तरंग-दैर्ध्य 4000 pm हो और जो 1 J ऊर्जा दे, के फोटॉनों की संख्या बताइए।
Answer:
एक फोटॉन की ऊर्जा E = hc ÷ λ सूत्र से निकाली जाती है, जहाँ λ = 4000 pm = 4000 × 10⁻¹² m = 4 × 10⁻⁹ m है। मान रखने पर एक फोटॉन की ऊर्जा प्राप्त होती है। कुल ऊर्जा 1 J है, इसलिए फोटॉनों की संख्या कुल ऊर्जा को एक फोटॉन की ऊर्जा से भाग देकर निकाली जाती है। गणना करने पर फोटॉनों की कुल संख्या लगभग 2.012 × 10¹⁶ प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• पिकोमीटर (pm) को मीटर में बदलने के लिए 10⁻¹² से गुणा करते हैं।
• फोटॉनों की कुल संख्या = कुल ऊर्जा ÷ एक फोटॉन की ऊर्जा।
• यह ऊर्जा संरक्षण और क्वांटम सिद्धांत पर आधारित प्रश्न है।
आम गलतियाँ:
• पिकोमीटर की इकाई को गलत बदलना।
• भाग देने में व्युत्क्रम का नियम भूल जाना।
Exam Tips:
a) इकाइयों का रूपांतरण बहुत सावधानी से करें।
b) सूत्र को पहले बीजगणितीय रूप में हल करें, फिर मान रखें।
c) परिणाम को वैज्ञानिक संकेतन में व्यक्त करें।
Question 9: यदि 4 × 10⁻⁷ m तरंग-दैर्ध्य वाला एक फोटॉन 2.13 eV कार्यफलन वाली धातु की सतह से टकराता है, तो (i) फोटॉन की ऊर्जा (eV में) (ii) उत्सर्जन की गतिज ऊर्जा और (iii) प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन के वेग का परिकलन कीजिए। (1 eV = 1.6020 × 10⁻¹⁹ J)।
Answer:
(i) फोटॉन की ऊर्जा E = hc ÷ λ से निकाली जाती है, जिससे जूल में ऊर्जा मिलती है और उसे eV में बदलने के लिए 1.602 × 10⁻¹⁹ से भाग देते हैं, जो लगभग 3.10 eV आती है।
(ii) उत्सर्जन की गतिज ऊर्जा (K.E.) = E - W₀ होती है, जहाँ W₀ कार्यफलन (2.13 eV) है। गतिज ऊर्जा K.E. = 3.10 eV - 2.13 eV = 0.97 eV प्राप्त होती है, जिसे जूल में बदलकर वेग निकाला जाता है।
(iii) फोटोइलेक्ट्रॉन का वेग v = sqrt(2 × K.E. ÷ m) सूत्र से निकाला जाता है, जिससे वेग लगभग 5.84 × 10⁵ ms⁻¹ प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• आइंस्टीन का प्रकाश विद्युत समीकरण E = W₀ + K.E. का उपयोग होता है।
• जूल और इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) के बीच का संबंध याद रखना आवश्यक है।
• इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (m) 9.109 × 10⁻³¹ kg होता है।
आम गलतियाँ:
• जूल को eV में बदलते समय गुणा या भाग में भ्रम होना।
• वेग के सूत्र में वर्गमूल लेना भूल जाना।
Exam Tips:
a) प्रकाश विद्युत प्रभाव से जुड़े सभी समीकरण याद रखें।
b) इकाइयों का एकरूपता से ध्यान रखें।
c) तीनों भागों को क्रमानुसार हल करें।
Question 10: सोडियम परमाणु के आयनन के लिए 242 nm तरंग-दैर्ध्य की विद्युत-चुंबकीय विकिरण पर्याप्त होती है। सोडियम की आयनन ऊर्जा kJ mol⁻¹ में ज्ञात कीजिए।
Answer:
एक मोल सोडियम परमाणुओं के आयनन के लिए आवश्यक ऊर्जा (आयनन ऊर्जा) E = N_A × hc ÷ λ सूत्र से ज्ञात की जाती है। यहाँ N_A आवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10²³ mol⁻¹) है, h प्लांक स्थिरांक है, c प्रकाश का वेग है और λ तरंग-दैर्ध्य (242 nm = 242 × 10⁻⁹ m) है। सभी मानों को सूत्र में रखने पर ऊर्जा लगभग 494 kJ mol⁻¹ प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• एक मोल के लिए गणना करते समय आवोगाद्रो संख्या से गुणा किया जाता है।
• आयनन ऊर्जा प्रति मोल जूल या किलोजूल में व्यक्त की जाती है।
• तरंग-दैर्ध्य को मीटर में बदलना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• एक फोटॉन की ऊर्जा और एक मोल फोटॉन की ऊर्जा में अंतर न समझना।
• J को kJ में बदलते समय 1000 से भाग देना भूल जाना।
Exam Tips:
a) मोलर ऊर्जा के लिए N_A का उपयोग करना न भूलें।
b) गणना को सरल बनाने के लिए घातों को पहले हल करें।
c) अंतिम उत्तर की इकाई kJ mol⁻¹ स्पष्ट लिखें।
Question 11: 25 वाट का एक बल्ब 0.57 um तरंग-दैर्ध्य वाले पीले रंग का एकवर्णी प्रकाश उत्पन्न करता है। प्रति सेकंड क्वांटा के उत्सर्जन की दर ज्ञात कीजिए।
Answer:
बल्บบ की शक्ति 25 Watt का अर्थ है कि प्रति सेकंड 25 J ऊर्जा उत्सर्जित होती है। एक फोटॉन की ऊर्जा E = hc ÷ λ से निकाली जाती है, जहाँ λ = 0.57 µm = 0.57 × 10⁻⁶ m है। प्रति सेकंड उत्सर्जित होने वाले फोटॉनों (क्वांटा) की दर कुल शक्ति को एक फोटॉन की ऊर्जा से भाग देकर प्राप्त की जाती है, जो लगभग 7.169 × 10¹⁹ s⁻¹ आती है।
मुख्य बिंदु:
• 1 Watt = 1 J/s होता है।
• माइक्रोन (µm) को मीटर में बदलने के लिए 10⁻⁶ से गुणा करते हैं।
• उत्सर्जन की दर प्रति सेकंड फोटॉनों की संख्या है।
आम गलतियाँ:
• वाट और जूल के संबंध को गलत समझना।
• माइक्रोन के रूपांतरण में गलती करना।
Exam Tips:
a) शक्ति और ऊर्जा के मात्रकों को समझें।
b) गणना के चरणों को स्पष्ट रखें।
c) सही वैज्ञानिक संकेतन का प्रयोग करें।
Question 12: किसी धातु की सतह पर 6800 angstrom तरंग-दैर्ध्य वाली विकिरण डालने से शून्य वेग वाले इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। धातु की देहली आवृत्ति (v₀) और कार्यफलन (W₀) ज्ञात कीजिए।
Answer:
देहली तरंग-दैर्ध्य (λ₀) = 6800 Å = 6800 × 10⁻¹⁰ m दी गई है। देहली आवृत्ति v₀ = c ÷ λ₀ सूत्र से निकाली जाती है, जिससे v₀ = (3 × 10⁸) ÷ (6800 × 10⁻¹⁰) = 4.41 × 10¹⁴ s⁻¹ प्राप्त होती है। धातु का कार्यफलन W₀ = hv₀ सूत्र से निकाला जाता है, जहाँ h प्लांक स्थिरांक है। मान रखने पर कार्यफलन W₀ = 2.922 × 10⁻¹⁹ J प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• शून्य वेग का अर्थ है कि विकिरण की ऊर्जा केवल कार्यफलन के बराबर है।
• देहली आवृत्ति प्रकाश के वेग और देहली तरंग-दैर्ध्य का अनुपात होती है।
• कार्यफलन न्यूनतम ऊर्जा है जो इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए चाहिए।
आम गलतियाँ:
• देहली आवृत्ति और सामान्य आवृत्ति में अंतर न कर पाना।
• कार्यफलन की इकाई जूल या eV में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) देहली आवृत्ति और कार्यफलन के बीच का संबंध (W₀ = hv₀) याद रखें।
b) Å को मीटर में बदलना न भूलें।
c) परिणाम को सही मात्रक के साथ लिखें।
Question 13: जब हाइड्रोजन परमाणु के n = 4 ऊर्जा स्तर से n = 2 ऊर्जा स्तर में इलेक्ट्रॉन जाता है, तो किस तरंग-दैर्ध्य का प्रकाश उत्सर्जित होगा?
Answer:
रिडबर्ग समीकरण का उपयोग करके ऊर्जा परिवर्तन ΔE निकाला जाता है, जहाँ ΔE = 2.18 × 10⁻¹⁸ [(1/n₁²) - (1/n₂²)] J होता है। यहाँ n₁ = 2 और n₂ = 4 रखने पर ऊर्जा का अंतर प्राप्त होता है। इसके बाद उत्सर्जित प्रकाश की तरंग-दैर्ध्य λ = hc ÷ ΔE सूत्र से निकाली जाती है। गणना करने पर तरंग-दैर्ध्य लगभग 486 nm (बालमर श्रेणी) प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• n = 4 से n = 2 का संक्रमण बालमर श्रेणी के अंतर्गत आता है।
• ऊर्जा परिवर्तन का मान हमेशा धनात्मक रूप में तरंग-दैर्ध्य के लिए उपयोग होता है।
• रिडबर्ग समीकरण परमाणु स्पेक्ट्रम को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आम गलतियाँ:
• n₁ और n₂ के मानों को उल्टा रख देना।
• ऊर्जा और तरंग-दैर्ध्य के सूत्र में मान रखते समय गलती करना।
Exam Tips:
a) हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की विभिन्न श्रेणियों (लाइमन, बालमर आदि) के n के मान याद रखें।
b) गणना के दौरान कोष्ठक के अंदर के भिन्नों को सावधानी से हल करें।
c) अंतिम उत्तर नैनोमीटर या मीटर में स्पष्ट दें।
Question 14: यदि इलेक्ट्रॉन n = 5 कक्षक में उपस्थित हो, तो H परमाणु के आयनन के लिए कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होगी? अपने उत्तर की तुलना हाइड्रोजन परमाणु के आयनन एन्थैल्पी से कीजिए।
Answer:
हाइड्रोजन परमाणु के nवें कक्षक में उपस्थित इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा E_n = -2.18 × 10⁻¹⁸ (Z² ÷ n²) J होती है। n = 5 से इलेक्ट्रॉन को अनंत (n = ∞) तक ले जाने के लिए आवश्यक ऊर्जा ΔE = E_∞ - E₅ होती है। चूंकि E_∞ शून्य होता है, इसलिए आवश्यक ऊर्जा -E₅ के बराबर यानी 0.0872 × 10⁻¹⁸ J प्राप्त होती है। यह ऊर्जा मूल अवस्था (n = 1) के आयनन के लिए आवश्यक ऊर्जा की तुलना में काफी कम होती है।
मुख्य बिंदु:
• आयनन का अर्थ इलेक्ट्रॉन को n = 1 से n = ∞ तक पहुँचाना है।
• उच्च ऊर्जा स्तरों पर इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होता है, अतः उसे निकालने के लिए कम ऊर्जा चाहिए।
• बोर मॉडल के अनुसार ऊर्जा ऋणात्मक होती है जो नाभिक के साथ आकर्षण दर्शाती है।
आम गलतियाँ:
• n = 5 और n = 1 की ऊर्जा की तुलना करते समय चिह्न की गलती करना।
• अनंत पर ऊर्जा का मान शून्य न मानना।
Exam Tips:
a) ऊर्जा के सूत्र में n के मान का वर्ग नीचे होता है, इसका ध्यान रखें।
b) तुलनात्मक प्रश्नों में तार्किक स्पष्टीकरण अवश्य दें।
c) वैज्ञानिक संकेतन का सही प्रयोग करें।
Question 15: जब हाइड्रोजन परमाणु में उत्तेजित इलेक्ट्रॉन n = 6 से मूल अवस्था में जाता है, तो प्राप्त उत्सर्जित रेखाओं की अधिकतम संख्या क्या होगी?
Answer:
जब कोई इलेक्ट्रॉन n स्तर से मूल अवस्था में गिरता है, तो उत्पन्न होने वाली वर्णक्रमीय रेखाओं की कुल संख्या का सूत्र [n(n - 1)] ÷ 2 होता है। यहाँ n = 6 दिया गया है। इस सूत्र में मान रखने पर रेखाओं की संख्या [6(6 - 1)] ÷ 2 = 15 प्राप्त होती है। अतः n = 6 से मूल अवस्था (n = 1) में संक्रमण के दौरान कुल 15 उत्सर्जित रेखाएँ प्राप्त होंगी।
मुख्य बिंदु:
• रेखाओं की संख्या ज्ञात करने का मानक सूत्र n(n-1)/2 है।
• यह विभिन्न ऊर्जा स्तरों के बीच संभावित सभी संक्रमणों को दर्शाता है।
• n का मान जितना अधिक होगा, स्पेक्ट्रम में रेखाएँ उतनी ही अधिक होंगी।
आम गलतियाँ:
• सूत्र में 2 से भाग देना भूल जाना।
• n के स्थान पर गलत ऊर्जा स्तर रखना।
Exam Tips:
a) वर्णक्रमीय रेखाओं की संख्या निकालने का यह शॉर्टकट सूत्र याद रखें।
b) परीक्षा में सूत्र लिखकर ही मान रखें।
c) छोटी गणनाओं को मौखिक या रफ में सही से जाँच लें।
Question 16: (i) हाइड्रोजन के प्रथम कक्षक से संबंधित ऊर्जा -2.18 × 10⁻¹⁸ J atom⁻¹ है। पाँचवें कक्षक से संबंधित ऊर्जा बताइए। (ii) हाइड्रोजन परमाणु के पाँचवें बोर कक्षक की त्रिज्या की गणना कीजिए।
Answer:
(i) पाँचवें कक्षक से जुड़ी ऊर्जा निकालने के लिए सूत्र E_n = -2.18 × 10⁻¹⁸ ÷ n² का उपयोग करते हैं। n = 5 रखने पर E₅ = -2.18 × 10⁻¹⁸ ÷ 25 = -8.72 × 10⁻²⁰ J प्राप्त होती है।
(ii) बोर कक्षक की त्रिज्या का सूत्र r_n = 0.529 × n² ÷ Z angstrom या nm में होता है। हाइड्रोजन (Z = 1) के लिए n = 5 रखने पर r₅ = 0.529 × (5)² = 13.225 nm या 1.3225 nm प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• ऊर्जा n के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
• त्रिज्या n के वर्ग के समानुपाती होती है।
• हाइड्रोजन परमाणु के लिए Z का मान 1 होता है।
आम गलतियाँ:
• n के मान का वर्ग करना भूल जाना।
• त्रिज्या और ऊर्जा के सूत्रों को आपस में मिला देना।
Exam Tips:
a) बोर मॉडल के सभी प्रमुख सूत्र (त्रिज्या, वेग, ऊर्जा) याद रखें।
b) इकाइयों का विशेष ध्यान रखें (nm या angstrom)।
c) गणना को साफ-सुथरा प्रदर्शित करें।
Question 17: हाइड्रोजन परमाणु की बामर श्रेणी में अधिकतम तरंग-दैर्ध्य संक्रमण की तरंग-संख्या की गणना कीजिए।
Answer:
बामर श्रेणी के लिए n₁ = 2 होता है। अधिकतम तरंग-दैर्ध्य प्राप्त करने के लिए न्यूनतम ऊर्जा परिवर्तन होना चाहिए, जिसके लिए n₂ का मान ठीक अगला यानी 3 होना चाहिए। तरंग-संख्या (v̄) का सूत्र v̄ = R_H [(1/n₁²) - (1/n₂²)] है। मान रखने पर v̄ = 1.097 × 10⁷ [(1/2²) - (1/3²)] = 1.5236 × 10⁶ m⁻¹ प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• अधिकतम तरंग-दैर्ध्य का अर्थ न्यूनतम आवृत्ति और न्यूनतम ऊर्जा है।
• बामर श्रेणी दृश्य क्षेत्र में पाई जाती है।
• रिडबर्ग नियतांक (R_H) का मान 1.097 × 10⁷ m⁻¹ होता है।
आम गलतियाँ:
• अधिकतम तरंग-दैर्ध्य के लिए n₂ का मान गलत चुनना।
• भिन्नों को हल करते समय लघुत्तम (LCM) की गलती करना।
Exam Tips:
a) अधिकतम तरंग-दैर्ध्य मतलब न्यूनतम ऊर्जा (n₂ = n₁ + 1) - यह नियम याद रखें।
b) रिडबर्ग समीकरण का सही प्रयोग करें।
c) उत्तर की इकाई m⁻¹ लिखना न भूलें।
Question 18: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन को पहली कक्षा से पाँचवीं कक्षा तक ले जाने के लिए आवश्यक ऊर्जा की जूल में गणना कीजिए। जब यह इलेक्ट्रॉन तलस्थ अवस्था में लौटता है, तो किस तरंग-दैर्ध्य का प्रकाश उत्सर्जित होगा?
Answer:
पहली कक्षा (n = 1) से पाँचवीं कक्षा (n = 5) में इलेक्ट्रॉन को भेजने के लिए ऊर्जा परिवर्तन ΔE = E₅ - E₁ से निकाला जाता है। मान रखने पर आवश्यक ऊर्जा 2.0928 × 10⁻¹⁸ J प्राप्त होती है। जब इलेक्ट्रॉन वापस तलस्थ अवस्था में लौटता है, तो उत्सर्जित प्रकाश की तरंग-दैर्ध्य λ = hc ÷ ΔE सूत्र से निकाली जाती है, जो गणना करने पर लगभग 9.498 × 10⁻⁸ m प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• ऊर्जा परिवर्तन दोनों कक्षाओं की ऊर्जाओं का अंतर होता है।
• तलस्थ अवस्था का अर्थ n = 1 होता है।
• उत्सर्जित विकिरण की तरंग-दैर्ध्य ऊर्जा के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
आम गलतियाँ:
• ऊर्जा स्तरों के सूत्रों में मान रखते समय चिह्न की अशुद्धि करना।
• तरंग-दैर्ध्य निकालते समय प्लांक स्थिरांक और वेग के मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) संक्रमण से जुड़े दोनों भागों को क्रमानुसार हल करें।
b) वैज्ञानिक संकेतन का सही उपयोग करें।
c) अंतिम परिणाम स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
Question 19: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा E_n = (-2.18 × 10⁻¹⁸ / n²) J द्वारा दी जाती है। n = 2 कक्षा से इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए। प्रकाश की सबसे लंबी तरंग-दैर्ध्य (cm में) क्या होगी, जिसका उपयोग इस संक्रमण में किया जा सके?
Answer:
n = 2 से इलेक्ट्रॉन को अनंत (n = ∞) तक निकालने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता ΔE = E_∞ - E₂ से निकाली जाती है। मान रखने पर ΔE = 0.545 × 10⁻¹⁸ J प्राप्त होती है। सबसे लंबी तरंग-दैर्ध्य के लिए λ = hc ÷ ΔE सूत्र का उपयोग किया जाता है, जिससे तरंग-दैर्ध्य लगभग 3.647 × 10⁻⁵ cm प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह निकालने का अर्थ उसे n = अनंत तक पहुँचाना है।
• सबसे लंबी तरंग-दैर्ध्य न्यूनतम ऊर्जा संक्रमण से संबंधित होती है।
• सेंटीमीटर (cm) में उत्तर देने के लिए मीटर को 100 से गुणा करना पड़ता है।
आम गलतियाँ:
• मीटर को सेंटीमीटर में बदलना भूल जाना।
• अनंत पर ऊर्जा का मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) प्रश्न में पूछी गई इकाई (cm या m) का विशेष ध्यान रखें।
b) ऊर्जा और तरंग-दैर्ध्य का संबंध स्पष्ट रूप से लिखें।
c) गणना के प्रत्येक चरण को दिखाएँ।
Question 20: 2.05 × 10⁷ ms⁻¹ वेग से गति कर रहे किसी इलेक्ट्रॉन का तरंग-दैर्ध्य क्या होगा?
Answer:
ड्री ब्रोग्ली समीकरण λ = h ÷ (mv) के अनुसार तरंग-दैर्ध्य निकाली जाती है। यहाँ h प्लांक स्थिरांक (6.626 × 10⁻³⁴ Js) है, m इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (9.10939 × 10⁻³¹ kg) है और v वेग (2.05 × 10⁷ ms⁻¹) है। सभी मानों को सूत्र में रखने पर तरंग-दैर्ध्य λ = 3.548 × 10⁻¹¹ m प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• डी ब्रोग्ली समीकरण द्रव्य की द्वैत प्रकृति को समझाता है (λ = h/mv)।
• इसमें कण का द्रव्यमान किलोग्राम में और वेग m/s में होना चाहिए।
• वेग बढ़ने पर तरंग-दैर्ध्य कम हो जाती है।
आम गलतियाँ:
• इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का गलत मान रखना।
• घातों की गणना में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) डी ब्रोग्ली का सूत्र हर जगह लागू होता है जहाँ गतिमान कण हो।
b) मात्रकों की एकरूपতা सुनिश्चित करें।
c) उत्तर को मीटर या पिकोमीटर में व्यक्त करें।
Question 21: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1 × 10⁻³¹ kg है। यदि इसकी गतिज ऊर्जा 3.0 × 10⁻²⁵ J हो, तो इसकी तरंग-दैर्ध्य की गणना कीजिए।
Answer:
गतिज ऊर्जा (K.E.) दिए होने पर वेग v = sqrt(2 × K.E. ÷ m) सूत्र से निकाला जाता है। मान रखने पर वेग प्राप्त होता है। इसके बाद डी ब्रोग्ली समीकरण λ = h ÷ (mv) का उपयोग करके तरंग-दैर्ध्य निकाली जाती है। सभी गणनाओं के पश्चात इलेक्ट्रॉन की तरंग-दैर्ध्य लगभग 8.9625 × 10⁻⁷ m प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• गतिज ऊर्जा से वेग निकालने के लिए v = sqrt(2E/m) का प्रयोग होता है।
• डी ब्रोग्ली तरंग-दैर्ध्य कण की गति और द्रव्यमान पर निर्भर करती है।
• सभी मान SI मात्रक में होने चाहिए।
आम गलतियाँ:
• वेग निकालते समय वर्गमूल लेना भूल जाना।
• गणना में छोटी संख्या की भूल करना।
Exam Tips:
a) गतिज ऊर्जा वाले प्रश्नों में पहले वेग ज्ञात करना आसान होता है।
b) सूत्र को क्रमानुसार हल करें।
c) अंतिम उत्तर के साथ उचित इकाई लिखें।
Question 22: निम्नलिखित में से कौन सम-आएनी स्पीशीज हैं, अर्थात् किनमें इलेक्ट्रॉनों की समान संख्या है? Na⁺, K⁺, Mg²⁺, Ca²⁺, S²⁻, Ar
Answer:
सम-आएनी स्पीशीज वे होती हैं जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। दिए गए आयनों और परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या इस प्रकार है: Na⁺ में 10, K⁺ में 18, Mg²⁺ में 10, Ca²⁺ में 18, S²⁻ में 18 और Ar में 18 इलेक्ट्रॉन हैं। अतः इनमें दो समूह बनते हैं: पहला समूह (Na⁺, Mg²⁺) जिसमें 10 इलेक्ट्रॉन हैं, और दूसरा समूह (K⁺, Ca²⁺, S²⁻, Ar) जिसमें 18 इलेक्ट्रॉन हैं।
मुख्य बिंदु:
• सम-आएनी (Isoelectronic) स्पीशीज में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बराबर होती है।
• धन आवेश का अर्थ इलेक्ट्रॉन का निकलना है, और ऋण आवेश का अर्थ जुड़ना है।
• आर्गन (Ar) एक निष्क्रिय गैस है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 18 इलेक्ट्रॉनों वाला होता है।
आम गलतियाँ:
• आवेश को देखकर इलेक्ट्रॉनों की संख्या उलटी घटाना या जोड़ना।
• परमाणु क्रमांक को ही इलेक्ट्रॉन मान लेना जबकि आयन में आवेश होता है।
Exam Tips:
a) धनायन के लिए परमाणु क्रमांक में से आवेश घटाएँ।
b) ऋणयन के लिए परमाणु क्रमांक में आवेश जोड़ें।
c) समान इलेक्ट्रॉन वाले युग्मों को अलग छाँटकर लिखें।
Question 23: (i) निम्नलिखित आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए— (क) H⁻ (ख) Na⁺ (ग) O²⁻ (घ) F⁻ (ii) उन तत्वों की परमाणु-संख्या बताइए, जिनके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों को निम्नलिखित रूप में दर्शाया जाता है— (क) 3s¹ (ख) 2p³ (ग) 3p⁵ (iii) निम्नलिखित विन्यासों वाले परमाणुओं के नाम बताइए— (क) [He] 2s¹ (ख) [Ne] 3s² 3p³ (ग) [Ar] 4s² 3d¹
Answer:
(i) (क) H⁻ का विन्यास 1s² है। (ख) Na⁺ का विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ है। (ग) O²⁻ का विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ है। (घ) F⁻ का विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ है।
(ii) (क) 3s¹ वाले तत्व की कुल संख्या 11 (सोडियम) है। (ख) 2p³ वाले तत्व की परमाणु संख्या 7 (नाइट्रोजन) है। (ग) 3p⁵ वाले तत्व की परमाणु संख्या 17 (क्लोरीन) है।
(iii) (क) [He] 2s¹ वाला तत्व लीथियम (Li) है। (ख) [Ne] 3s² 3p³ वाला तत्व फॉस्फोरस (P) है। (ग) [Ar] 4s² 3d¹ वाला तत्व स्कैंडियम (Sc) है।
मुख्य बिंदु:
• आयनों का विन्यास उनके कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या के आधार पर लिखा जाता है।
• उत्कृष्ट गैस क्रोड (core) का उपयोग विบ्यास को संक्षिप्त करने के लिए किया जाता है।
• अंतिम उपकोश के इलेक्ट्रॉन तत्व की स्थिति तय करते हैं।
आम गलतियाँ:
• आयन बनाते समय इलेक्ट्रॉनों की सही संख्या न जोड़ना-घटाना।
• उपकोशों के भरने के क्रम (आफbau नियम) को भूल जाना।
Exam Tips:
a) सभी तत्वों के परमाणु क्रमांक याद रखें।
b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखते समय आफbau नियम का पालन करें।
c) उपभागों (क, ख, ग) के अनुसार स्पष्ट उत्तर दें।
Question 24: किस न्यूनतम n मान द्वारा g कक्षक का अस्तित्व अनुमत होगा?
Answer:
दिग्लंशी क्वांटम संख्या (l) का मान g कक्षक के लिए 4 होता है। मुख्य क्वांटम संख्या n के किसी मान के लिए l के मान 0 से (n - 1) तक हो सकते हैं। चूँकि g कक्षक के लिए l = 4 है, इसलिए n - 1 का न्यूनतम मान 4 होने के लिए n का न्यूनतम मान 5 होना चाहिए। अतः g कक्षक के अस्तित्व के लिए n का न्यूनतम मान 5 है।
मुख्य बिंदु:
• कक्षक के प्रकार: s (l=0), p (l=1), d (l=2), f (l=3), g (l=4)।
• l का अधिकतम मान n - 1 होता है।
• g कक्षक n = 5 से शुरू होते हैं।
आम गलतियाँ:
• l और n के संबंधों को भ्रमित करना।
• g कक्षक के लिए l का गलत मान मानना।
Exam Tips:
a) क्वांटम संख्याओं के नियम (n, l, m) अच्छी तरह याद रखें।
b) उपकोश और l के मान का क्रम याद रखें (s=0, p=1, d=2, f=3, g=4)।
c) संक्षिप्त और सटीक कारण दें।
Question 25: एक इलेक्ट्रॉन किसी 3d कक्षक में है। इसके लिए n, l और m_l के संभव मान दीजिए।
Answer:
3d कक्षक के लिए मुख्य क्वांटम संख्या (n) का मान 3 है। d कक्षक के लिए दिग्लंशी क्वांटम संख्या (l) का मान 2 होता है। चुंबकीय क्वांटम संख्या (m_l) के मान -l से +l तक होते हैं, अतः l = 2 के लिए m_l के संभव मान -2, -1, 0, 1, 2 हैं। इस प्रकार n = 3, l = 2 और m_l = -2, -1, 0, 1, 2 होंगे।
मुख्य बिंदु:
• n कक्षक की मुख्य ऊर्जा स्तर बताता है।
• l कक्षक की आकृति (उपकोश) बताता है (d के लिए l=2)।
• m_l कक्षक के अभिविन्यास को दर्शाता है जिसकी संख्या (2l + 1) होती है।
आम गलतियाँ:
• d कक्षक के लिए l का मान 3 या कुछ और लिख देना।
• m_l के मानों की सीमा गलत लिखना।
Exam Tips:
a) कक्षक के नाम से सीधे n और l पहचानना सीखें।
b) m_l के मान हमेशा -l से +l तक शून्य सहित लिखे जाते हैं।
c) उत्तर को स्पष्ट रूप से अलग-अलग दर्शाएँ।
Question 26: किसी तत्त्व के परमाणु में 29 इलेक्ट्रॉन और 35 न्यूट्रॉन हैं। (i) इसमें प्रोटॉनों की संख्या बताइए। (ii) तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास बताइए।
Answer:
(i) एक उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है, इसलिए इस परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या 29 है (जो कि कॉपर/ताँबा तत्व है)।
(ii) 29 इलेक्ट्रॉनों वाले इस कॉपर परमाणु का आफbau नियम के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s¹ 3d¹⁰ होता है (जो कि अर्ध-पूर्ण और पूर्ण भरे कक्षकों के स्थायित्व के कारण 4s² 3d⁹ का अपवाद है)।
मुख्य बिंदु:
• उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या।
• कॉपर (Cu, Z=29) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में अपवाद प्रदर्शित करता है।
• 3d¹⁰ 4s¹ विन्यास अधिक स्थायी होता है।
आम गलतियाँ:
• कॉपर या क्रोमियम का सामान्य विन्यास लिख देना और अपवाद को भूल जाना।
• न्यूट्रॉन की संख्या से प्रोटॉन निकालने की कोशिश करना।
Exam Tips:
a) Cr और Cu के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के अपवादों को विशेष रूप से याद रखें।
b) न्यूट्रॉन का उपयोग केवल द्रव्यमान संख्या निकालने के लिए होता है।
c) विन्यास को उपकोश के क्रम में लिखें।
Question 27: H_2⁺, H_2 और O_2⁺ स्पीशीज में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए।
Answer:
हाइड्रोजन अणु आयन (H_2⁺) में कुल 1 इलेक्ट्रॉन होता है (दो प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन)। हाइड्रोजन अणु (H_2) में कुल 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं। ऑक्सीजन आयन (O_2⁺) में कुल 15 इलेक्ट्रॉन होते हैं (प्रत्येक ऑक्सीजन में 8 इलेक्ट्रॉन, कुल 16 में से 1 धन आवेश के कारण 1 कम यानी 15)।
मुख्य बिंदु:
• धन आवेश (⁺) का अर्थ है कि कुल इलेक्ट्रॉनों में से एक इलेक्ट्रॉन कम हो गया है।
• उदासीन अणु में परमाणु के कुल इलेक्ट्रॉनों का योग होता है。
• आणविक स्पीशीज में इलेक्ट्रॉनों की गणना उनके घटकों से की जाती है।
आम गलतियाँ:
• धन आवेश होने पर इलेक्ट्रॉन जोड़ देना।
• परमाणु और अणु के इलेक्ट्रॉनों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) आयनों पर लगे आवेश (+ या -) का ध्यान रखें।
b) प्रत्येक परमाणु के इलेक्ट्रॉन जोड़कर कुल संख्या निकालें।
c) सरल और संक्षिप्त उत्तर दें।
Question 28: (i) किसी परमाणु कक्षक का n = 3 है। उसके लिए l और m_l के संभव मान क्या होंगे? (ii) 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉनों के लिए m_l और l क्वांटम संख्याओं के मान बताइए। (iii) निम्नलिखित में से कौन से कक्षक संभव हैं: 1p, 2s, 2p और 3f
Answer:
(i) n = 3 के लिए l के मान 0, 1, 2 हो सकते हैं। प्रत्येक l के लिए m_l के मान -l से +l तक होंगे (जैसे l=0 के लिए 0; l=1 के लिए -1, 0, 1; l=2 के लिए -2, -1, 0, 1, 2)।
(ii) 3d कक्षक के लिए l = 2 तथा m_l के मान -2, -1, 0, 1, 2 होते हैं।
(iii) दिए गए कक्षकों में से केवल 2s और 2p संभव हैं। 1p और 3f संभव नहीं हैं क्योंकि n = 1 के लिए l = 1 (p) संभव नहीं है (l का अधिकतम मान n-1 होता है) और n = 3 के लिए l = 3 (f) संभव नहीं है।
मुख्य बिंदु:
• कक्षक के अस्तित्व के लिए l का मान (n - 1) से अधिक नहीं हो सकता।
• 1p और 3f जैसी अवस्थाएँ भौतिक रूप से विद्यमान नहीं होतीं।
• m_l के कुल मान (2l + 1) होते हैं।
आम गलतियाँ:
• अमान्य कक्षकों को संभव मान लेना।
• n और l के नियमों को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) यह याद रखें कि 1p, 2d, 3f कक्षक कभी अस्तित्व में नहीं होते।
b) क्वांटम संख्याओं के सभी प्रतिबंधों को अच्छी तरह समझें।
c) प्रत्येक भाग का उत्तर अलग-अलग बिंदुओं में लिखें।
Question 29: s, p, d संकेतčan द्वारा निम्नलिखित क्वांटम संख्याओं वाले कक्षकों को बताइए— (a) n = 1, l = 0 (b) n = 3, l = 1 (c) n = 4, l = 2 (d) n = 4, l = 3
Answer:
(a) n = 1 और l = 0 के लिए कक्षक 1s है।
(b) n = 3 और l = 1 के लिए कक्षक 3p है।
(c) n = 4 और l = 2 के लिए कक्षक 4d है।
(d) n = 4 और l = 3 के लिए कक्षक 4f है।
मुख्य बिंदु:
• मुख्य क्वांटम संख्या (n) संख्यात्मक मान को दर्शाती है।
• दिग्लंशी क्वांटम संख्या (l) अक्षर को दर्शाती है (0=s, 1=p, 2=d, 3=f)।
• दोनों को मिलाकर कक्षक का नाम बनता है (जैसे 3p)।
आम गलतियाँ:
• l के मान और अक्षर के मेल को उल्टा करना।
• मुख्य संख्या (n) को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) l के मानों की सारणी (0 से 3) कंठस्थ रखें।
b) n को आगे लिखकर कक्षक का पूरा नाम लिखें।
c) यह बहुत सरल और अंकदायी प्रश्न है।
Question 30: कारण देते हुए बताइए कि निम्नलिखित क्वांटम संख्या के कौन से मान संभव नहीं हैं— (क) n = 0, l = 0, m_l = 0, m_s = +1/2 (ख) n = 1, l = 0, m_l = 0, m_s = -1/2 (ग) n = 1, l = 1, m_l = 0, m_s = +1/2 (घ) n = 2, l = 1, m_l = 0, m_s = -1/2 (ङ) n = 3, l = 3, m_l = -3, m_s = +1/2 (च) n = 3, l = 1, m_l = 0, m_s = +1/2
Answer:
(क) संभव नहीं है क्योंकि मुख्य क्वांटम संख्या (n) का मान कभी शून्य नहीं हो सकता।
(ख) संभव है।
(ग) संभव नहीं है क्योंकि n = 1 के लिए l का मान 1 नहीं हो सकता (l का अधिकतम मान n-1 यानी 0 है)।
(घ) संभव है।
(ङ) संभव नहीं है क्योंकि n = 3 के लिए l का मान 3 नहीं हो सकता (l का अधिकतम मान 2 है)।
(च) संभव है।
मुख्य बिंदु:
• n का मान हमेशा 1 से शुरू होने वाला पूर्णांक होता है।
• l का मान 0 से (n - 1) तक होता है।
• m_l का मान -l से +l तक होता है।
आम गलतियाँ:
• n के शून्य होने को स्वीकार कर लेना।
• n और l के प्रतिबंधों को ध्यान से न पढ़ना।
Exam Tips:
a) क्वांटम संख्याओं की वैधता जाँचने के तीनों नियमों को क्रम से लगाएँ।
b) कारण स्पष्ट रूप से लिखें।
c) प्रत्येक विकल्प की स्वतंत्र रूप से समीक्षा करें।
Question 31: किसी परमाणु में निम्नलिखित क्वांटम संख्याओं वाले कितने इलेक्ट्रॉन होंगे? (क) n = 4, m_s = -1/2 (ख) n = 3, l = 0
Answer:
(क) किसी n कोष में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n² होती है। n = 4 के लिए कुल इलेक्ट्रॉन 2(4)² = 32 होंगे। इनमें से आधे इलेक्ट्रॉनों का चक्रण (spin) m_s = -1/2 होगा, अतः ऐसे इलेक्ट्रॉनों की संख्या 16 होगी।
(ख) n = 3 और l = 0 का अर्थ 3s उपकोश है। इस उपकोश में केवल एक कक्षक होता है जिसमें अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• किसी कोष में कुल इलेक्ट्रॉन 2n² होते हैं, और प्रत्येक चक्रण के आधे इलेक्ट्रॉन होते हैं।
• l = 0 का अर्थ s उपकोश है जिसमें 2 इलेक्ट्रॉन आते हैं।
• पाउली का अपवर्जन नियम यहाँ उपयोगी है।
आम गलतियाँ:
• चक्रण क्वांटम संख्या के आधे हिस्से को न समझना और पूरे 32 इलेक्ट्रॉन लिख देना।
• l = 0 को p या d समझ लेना।
Exam Tips:
a) 2n² सूत्र का प्रयोग कुल इलेक्ट्रॉनों के लिए करें।
b) चक्रण (m_s) के लिए हमेशा कुल संख्या को आधा करें।
c) उपकोश की पहचान सही से करें।
Question 32: यह दर्शाइए कि हाइड्रोजन परमाणु की बोर कक्षा की परिधि उस कक्षा में गतिमान इलेक्ट्रॉन की दे-ब्रॉग्ली तरंग-दैर्ध्य का पूर्ण गुणक होती है।
Answer:
बोर के अभिधारणा के अनुसार इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग mvr = nh ÷ (2π) होता है। इसे पुनर्व्यवस्थित करने पर 2πr = n(h ÷ mv) प्राप्त होता है। चूँकि डी ब्रोग्ली समीकरण के अनुसार λ = h ÷ (mv) होता है, इस मान को रखने पर 2πr = nλ प्राप्त होता है। यह समीकरण सिद्ध करता है कि कक्षा की परिधि (2πr) डी ब्रॉग्ली तरंग-दैर्ध्य का पूर्ण गुणक (nλ) होती है।
मुख्य बिंदु:
• बोर का क्वांटमीकरण प्रतिबंध और डी ब्रोग्ली समीकरण का संयोजन।
• 2πr कक्षा की परिधि को दर्शाता है।
• यह स्थायी कक्षाओं के अस्तित्व को समझाता है।
आम गलतियाँ:
• समीकरण को व्यवस्थित करते समय π या 2 की गलती करना।
• डी ब्रोग्ली संबंध को प्रतिस्थापित न करना।
Exam Tips:
a) व्युत्पत्ति के चरणों को स्पष्ट रूप से लिखें।
b) दोनों मूल समीकरण (बोर और डी ब्रोग्ली) पहले दर्शाएँ।
c) अंतिम निष्कर्ष वाक्य अवश्य लिखें।
Question 33: He⁺ स्पेक्ट्रम के n = 4 से n = 2 बामर संक्रमण से प्राप्त तरंग-दैर्ध्य के बराबर वाला संक्रमण हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में क्या होगा?
Answer:
हीडियम आयन (He⁺) के लिए तरंग संख्या का सूत्र v̄ = R_H Z² [(1/n₁²) - (1/n₂²)] होता है। n = 4 से n = 2 संक्रमण के लिए हीलियम (Z=2) का मान रखकर तरंग-दैर्ध्य निकाली जाती है। हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में समान तरंग-दैर्ध्य प्राप्त करने के लिए हिट और ट्रायल विधि या समीकरण की तुलना करने पर यह ज्ञात होता है कि हाइड्रोजन में n = 2 से n = 1 का संक्रमण समान तरंग-दैर्ध्य देगा।
मुख्य बिंदु:
• He⁺ हाइड्रोजन जैसी स्पीशीज है जिसके लिए Z = 2 होता है।
• तरंग-दैर्ध्य समान होने का अर्थ है कि ऊर्जा परिवर्तन (ΔE) दोनों में समान है।
• परमाणु क्रमांक (Z) का प्रभाव ऊर्जा समीकरण पर पड़ता है।
आम गलतियाँ:
• हीलियम के लिए Z = 2 रखना भूल जाना।
• हाइड्रोजन और हीलियम के समीकरणों की तुलना न कर पाना।
Exam Tips:
a) हाइड्रोजन सदृश स्पीशीज के लिए Z² गुणक का हमेशा प्रयोग करें।
b) तुलनात्मक प्रश्नों को चरणबद्ध हल करें।
c) अंतिम संक्रमण स्तर स्पष्ट रूप से बताएँ।
Question 34: He⁺(g) → He²⁺(g) + e⁻ प्रक्रिया के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए। हाइड्रोजन परमाणु की तलस्थ अवस्था में आयनन ऊर्जा 2.18 × 10⁻¹⁸ J atom⁻¹ है।
Answer:
हाइड्रोजन जैसी स्पीशीज की ऊर्जा E_n = -2.18 × 10⁻¹⁸ × (Z² ÷ n²) J होती है। He⁺ आयन से एक इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह निकालने (n = 1 से n = ∞) के लिए आवश्यक ऊर्जा ΔE = E_∞ - E₁ होगी। हीलियम के लिए Z = 2 है। मान रखने पर आवश्यक ऊर्जा ΔE = 2.18 × 10⁻¹⁸ × (2)² ÷ (1)² = 8.72 × 10⁻¹⁸ J प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• He⁺ में एक इलेक्ट्रॉन होता है, अतः यह हाइड्रोजन सदृश प्रणाली है।
• आयनन ऊर्जा n = 1 से n = ∞ के बीच का ऊर्जा अंतर होती है।
• Z का मान 2 होने के कारण ऊर्जा हाइड्रोजन से चार गुना हो जाती है।
आम गलतियाँ:
• Z² के मान (2 का वर्ग = 4) से गुणा करना भूल जाना।
• आयनन प्रक्रिया को गलत समझना।
Exam Tips:
a) हाइड्रोजन सदृश आयनों के लिए सूत्र में Z² जोड़ना न भूलें।
b) गणना को सरल रखें और मात्रक जूल (J) लिखें।
c) प्रक्रिया के समीकरण को समझें।
Question 35: यदि कार्बन परमाणु का व्यास 0.15 nm है, तो उन की गणना कीजिए, जिन्हें 20 cm स्केल की लंबाई में एक-एक करके व्यवस्थित किया जा सकता है।
Answer:
कार्बन परमाणु का व्यास d = 0.15 nm = 0.15 × 10⁻⁹ m = 1.5 × 10⁻¹⁰ m है। स्केल की कुल लंबाई 20 cm = 0.20 m = 20 × 10⁻² m है। स्केल पर व्यवस्थित किए जा सकने वाले कार्बन परमाणुओं की कुल संख्या स्केल की लंबाई को एक परमाणु के व्यास से भाग देकर निकाली जाती है। गणना करने पर परमाणुओं की संख्या लगभग 1.33 × 10⁹ प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• नैनोमीटर को मीटर में बदलना आवश्यक है।
• सेंटीमीटर को मीटर में बदलकर दोनों इकाइयों को एक समान करें।
• परमाणुओं की कुल संख्या = कुल लंबाई ÷ एक परमाणु का व्यास।
आम गलतियाँ:
• मीटर और नैनोमीटर के बीच इकाई रूपांतरण की गलती।
• भाग देने में घातों का सही संयोजन न करना।
Exam Tips:
a) ऐसे व्यावहारिक प्रश्नों में इकाइयों को सबसे पहले SI पद्धति में बदलें।
b) गणना सावधानी से करें।
c) परिणाम को वैज्ञानिक रूप में लिखें।
Question 36: कार्बन के 2 × 10⁸ परमाणु एक कतार में व्यवस्थित हैं। यदि इस व्यवस्था की लंबाई 2.4 cm है, तो कार्बन परमाणु के व्यास की गणना कीजिए।
Answer:
व्यवस्था की कुल लंबाई 2.4 cm = 2.4 × 10⁻² m है। कतार में उपस्थित कुल कार्बन परमाणुओं की संख्या 2 × 10⁸ है। एक कार्बन परमाणु का व्यास निकालने के लिए कुल लंबाई को कुल परमाणुओं की संख्या से भाग दिया जाता है। व्यास = (2.4 × 10⁻² m) ÷ (2 × 10⁸) = 1.2 × 10⁻¹⁰ m प्राप्त होता है, जिससे त्रिज्या इसकी आधी यानी 6.0 × 10⁻¹¹ m (0.6 Å) होगी।
मुख्य बिंदु:
• परमाणु का व्यास = कुल कतार की लंबाई ÷ कुल परमाणुओं की संख्या।
• त्रिज्या व्यास की आधी होती है।
• लंबाई को मीटर में रखना मानक है।
आम गलतियाँ:
• व्यास और त्रिज्या के अंतर को भूल जाना।
• भाग देते समय घातों (powers) का हिसाब गलत लगाना।
Exam Tips:
a) सूत्र को स्पष्ट रूप से लिखकर मान रखें।
b) अंत में व्यास के साथ-साथ यदि त्रिज्या पूछी हो तो उसे भी निकालें।
c) मात्रक का विशेष ध्यान रखें।
Question 37: जिंक परमाणु का व्यास 2.6 angstrom है— (क) जिंक परमाणु की त्रिज्या pm में तथा (ख) 1.6 cm की लंबाई में कतार में लगातार उपस्थित परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए।
Answer:
(क) जिंक परमाणु का व्यास 2.6 Å है, इसलिए इसकी त्रिज्या व्यास की आधी यानी 1.3 Å होगी। इसे पिकोमीटर (pm) में बदलने पर 130 pm प्राप्त होता है (1 Å = 100 pm)।
(ख) 1.6 cm की लंबाई में उपस्थित परमाणुओं की संख्या निकालने के लिए लंबाई (1.6 × 10⁻² m) को जिंक परमाणु के व्यास (2.6 × 10⁻¹⁰ m) से भाग दिया जाता है, जिससे परमाणुओं की कुल संख्या लगभग 6.157 × 10⁷ प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• 1 angstrom = 100 pm होता है।
• त्रिज्या = व्यास ÷ 2।
• परमाणुओं की संख्या = कुल लंबाई ÷ व्यास।
आम गलतियाँ:
• angstrom को पिकोमीटर में बदलते समय गुणा या भाग की भूल करना।
• व्यास के बजाय त्रिज्या से परमाणुओं की संख्या निकालना।
Exam Tips:
a) दोनों भागों (क और ख) को अलग-अलग स्पष्ट हल करें।
b) इकाई रूपांतरण के मानक मान याद रखें।
c) गणना को दो दशमलव स्थान तक शुद्ध निकालें।
Question 38: किसी कण का स्थिर विद्युत् आवेश 2.5 × 10⁻¹⁶ C है। इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या कीजिए।
Answer:
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश 1.6022 × 10⁻¹⁹ C होता है। कण में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या निकालने के लिए कुल आवेश को एक इलेक्ट्रॉन के आवेश से भाग दिया जाता है। इलेक्ट्रॉनों की संख्या = (2.5 × 10⁻¹⁶ C) ÷ (1.6022 × 10⁻¹⁹ C) = 1560 प्राप्त होती है। अतः कण पर 1560 इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं।
मुख्य बिंदु:
• इलेक्ट्रॉनों की संख्या = कुल आवेश ÷ एक इलेक्ट्रॉन का आवेश।
• एक इलेक्ट्रॉन का आवेश 1.602 × 10⁻¹⁹ C होता है।
• यह मिलिकन के तेल बूँद प्रयोग से संबंधित मूल गणना है।
आम गलतियाँ:
• भाग देने में ऋणात्मक और धनात्मक घातों का भ्रम होना।
• इलेक्ट्रॉन के आवेश का मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) आवेश वाले प्रश्नों में सीधा सूत्र प्रयोग करें।
b) उत्तर हमेशा एक पूर्ण संख्या में आना चाहिए क्योंकि इलेक्ट्रॉनों की संख्या पूर्णांक होती है।
c) चरण स्पष्ट लिखें।
Question 39: मिलिकन के प्रयोग में तेल की बूँद पर चमकती X-किरणों द्वारा प्राप्त स्थैतिक विद्युत्-आवेश प्राप्त किया जाता है। तेल की बूँद पर यदि स्थैतिक विद्युत् आवेश -1.282 × 10⁻¹⁸ C है, तो इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
Answer:
तेल की बूँद पर कुल आवेश q = -1.282 × 10⁻¹⁸ C है। एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश e = -1.6022 × 10⁻¹⁹ C होता है। इलेक्ट्रॉनों की संख्या n = q ÷ e सूत्र से निकाली जाती है। मान रखने पर n = (-1.282 × 10⁻¹⁸) ÷ (-1.6022 × 10⁻¹⁹) = 8.0 प्राप्त होती है। अतः तेल की बूँद पर कुल 8 इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं।
मुख्य बिंदु:
• इलेक्ट्रॉनों की संख्या कुल आवेश और एक इलेक्ट्रॉन के आवेश का अनुपात होती है।
• बूँद पर ऋण आवेश इलेक्ट्रॉनों की अधिकता को दर्शाता है।
• परिणाम एक पूर्ण संख्या (8) प्राप्त होता है।
आम गलतियाँ:
• घातों के भाग में चिह्न या संख्या की गलती करना।
• दशमलव में उत्तर छोड़ देना जबकि यह पूर्ण संख्या होनी चाहिए।
Exam Tips:
a) मिलिकन प्रयोग के सिद्धांतों पर आधारित प्रश्न सरल होते हैं, बस भाग सही करें।
b) ऋण चिह्न केवल आवेश की प्रकृति बताता है।
c) अंतिम उत्तर स्पष्ट लिखें।
Question 40: रदरफोर्ड के प्रयोग में सोने, प्लैटिनम आदि भारी परमाणुओं की पतली पत्ती को α-कणों द्वारा बमबारी की जाती है। यदि ऐलुमिनियम आदि जैसे हल्के परमाणु की पतली पन्नी ली जाए, तो उपरोक्त परिणामों में क्या अंतर होगा?
Answer:
हल्के परमाणुओं (जैसे ऐलुमिनियम) वाली पतली पन्नी से वे परिणाम नहीं मिलेंगे जो भारी परमाणुओं (सोना या प्लैटिनम) वाली पन्नी से मिलते हैं। हल्का परमाणु बहुत कम धनात्मक आवेश ले जाने में सक्षम होगा क्योंकि उसका नाभिक छोटा और कम आवेश वाला होता है। इस कारण, हल्के परमाणु α-कणों (जो स्वयं धनावेशित होते हैं) का पर्याप्त विक्षेपण या प्रकीर्णन नहीं कर पाएँगे।
मुख्य बिंदु:
• भारी नाभिक α-कणों को अधिक बल से प्रतिकर्षित करते हैं।
• हल्के नाभिक का धन आवेश कम होने के कारण प्रकीर्णन बहुत कम होता है।
• रदरफोर्ड के प्रयोग में भारी धातुओं का चुनाव उच्च नाभिकीय आवेश के कारण किया गया था।
आम गलतियाँ:
• हल्के और भारी परमाणुओं के नाभिकीय आवेश के प्रभाव को न समझ पाना।
• α-कणों की प्रकृति को भूल जाना।
Exam Tips:
a) वैचारिक प्रश्नों में नाभिक के आकार और आवेश का तर्क दें।
b) भारी बनाम हल्के तत्वों का स्पष्ट अंतर बताएँ।
c) उत्तर को बिंदुवार या स्पष्ट पैराग्राफ में लिखें।
Question 41: ⁷⁹Br तथा ⁸¹Br प्रतीक मान्य है, जबकि ⁷⁹Br तथा ⁸¹Br मान्य नहीं हैं। संक्षेप में कारण बताइए।
Answer:
किसी तत्व को उसके परमाणु द्रव्यमान (A) और परमाणु संख्या (Z) के साथ निरूपित करने की सामान्य परिपाटी X_Z^A या A_Z X होती है। प्रतीक ⁷⁹Br और ⁸१Br में द्रव्यमान संख्या ऊपर बाईं ओर लिखी जाती है, जो कि सही है; परंतु यदि किसी प्रतीक में केवल द्रव्यमान संख्या लिखी हो और परमाणु क्रमांक न हो या गलत स्थिति में हो, तो उसे मानक नहीं माना जाता। (नोट: सामान्यतः समस्थानिकों को दर्शाने के लिए दोनों संख्याएँ या केवल ऊपर द्रव्यमान संख्या लिखी जाती है, यहाँ मानक निरूपण नियम के अनुसार सही प्रारूप की बात की गई है।)
मुख्य बिंदु:
• परमाणु प्रतीक का मानक प्रारूप ₛῡZ X होता है।
• द्रव्यमान संख्या हमेशा ऊपर और परमाणु क्रमांक नीचे लिखा जाता है।
• ब्रोमीन के दोनों समस्थानिक प्रकृति में पाए जाते हैं।
आम गलतियाँ:
• प्रतीक लिखने के मानक नियमों की उपेक्षा करना।
• समस्थानिकों के अंकन में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) तत्वों के प्रतीक और उनकी संख्याएँ लिखने का सही तरीका याद रखें।
b) कारण स्पष्ट और वैज्ञानिक भाषा में दें।
Question 42: एक 81 द्रव्यमान संख्या वाले तत्त्व में प्रोटॉनों की तुलना में 31.7% न्यूट्रॉन अधिक हैं। इसका परमाणु प्रतीक लिखिए।
Answer:
माना तत्व में प्रोटॉनों की संख्या x है। प्रश्न के अनुसार न्यूट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से 31.7% अधिक है, यानी न्यूट्रॉन = x + 0.317x = 1.317x है। द्रव्यमान संख्या (A) प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का योग होती है, इसलिए x + 1.317x = 81 होगा। इसे हल करने पर 2.317x = 81 प्राप्त होता है, जिससे x (प्रोटॉनों की संख्या) लगभग 35 आती है। 35 परमाणु क्रमांक वाला तत्व ब्रोमीन (Br) है। अतः इसका परमाणु प्रतीक ⁸¹Br₃₅ है।
मुख्य बिंदु:
• द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या।
• प्रतिशत अधिक होने पर मान में (1 + प्रतिशत/100) से गुणा करते हैं।
• प्रोटॉनों की संख्या ही परमाणु क्रमांक (Z) होती है।
आम गलतियाँ:
• प्रतिशत निकालते समय 100 से भाग देना भूल जाना।
• समीकरण हल करने में गलती करना।
Exam Tips:
a) बीजगणितीय समीकरण बनाकर चरणबद्ध हल करें।
b) प्रोटॉनों की संख्या आते ही आवर्त सारणी से तत्व पहचानें।
c) प्रतीक सही प्रारूप में लिखें।
Question 43: 37 द्रव्यमान संख्या वाले एक आयन पर ऋणवेश की एक इकाई है। यदि आयन में इलेक्ट्रॉन की तुलना में न्यूट्रॉन 11.1% अधिक हैं, तो आयन का प्रतीक लिखिए।
Answer:
माना ऋणायन में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या x है। न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉनों से 11.1% अधिक हैं, अतः न्यूट्रॉन = x + 0.111x = 1.111x है। चूँकि आयन पर एक ऋण आवेश है, उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन (x - 1) होंगे और प्रोटॉन भी (x - 1) होंगे। द्रव्यमान संख्या 37 दी गई है, यानी प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = 37। समीकरण (x - 1) + 1.111x = 37 को हल करने पर x = 18 प्राप्त होता है, जिससे प्रोटॉन 17 और तत्व क्लोरीन (Cl) बनता है। अतः आयन का प्रतीक ³⁷Cl⁻ है।
मुख्य बिंदु:
• ऋणायन में इलेक्ट्रॉन = प्रोटॉन + आवेश की संख्या।
• द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का योग होती है।
• 17 परमाणु क्रमांक क्लोरीन का होता है।
आम गलतियाँ:
• ऋण आवेश होने पर प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या में गलत संबंध बनाना।
• प्रतिशत गणना में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) आयनों के मामले में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या का अंतर समझें।
b) समीकरण बनाकर x का मान सावधानी से निकालें।
c) आयन का प्रतीक आवेश सहित (जैसे Cl⁻) लिखें।
Question 44: 56 द्रव्यमान संख्या वाले एक आयन पर धनवेश की 3 इकाइयाँ हैं, और इसमें इलेक्ट्रॉन की तुलना में 30.4% न्यूट्रॉन अधिक हैं। इस आयन का प्रतीक लिखिए।
Answer:
माना आयन में उपस्थित इलेक्ट्रॉन x हैं। न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉनों से 30.4% अधिक हैं, अतः न्यूट्रॉन = x + 0.304x = 1.304x है। चूँकि आयन पर 3 धन आवेश हैं, परमाणु में प्रोटॉन (x + 3) होंगे। द्रव्यमान संख्या 56 दी गई है, अतः प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = 56 यानी (x + 3) + 1.304x = 56 है। इसे हल करने पर x = 23 प्राप्त होता है, जिससे प्रोटॉन 23 + 3 = 26 बनते हैं। 26 परमाणु क्रमांक आयरन (Fe) का है। अतः आयन का प्रतीक ⁵⁶Fe³⁺ है।
मुख्य बिंदु:
• धनायन में प्रोटॉन = इलेक्ट्रॉन + आवेश की संख्या।
• द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का योग होती है।
• 26 परमाणु क्रमांक आयरन का होता है।
आम गलतियाँ:
• धनायन और ऋणायन में प्रोटॉन-इलेक्ट्रॉन के संबंधों को आपस में मिला देना।
• समीकरण हल करते समय जोड़-घटाव की गलती करना।
Exam Tips:
a) धन आवेश का अर्थ है कि परमाणु से इलेक्ट्रॉन निकले हैं (प्रोटॉन अधिक हैं)।
b) चरणबद्ध समीकरण हल करके तत्व पहचानें।
c) प्रतीक में द्रव्यमान संख्या और आवेश दोनों दर्शाएँ।
Question 45: निम्नलिखित विकिरणों के प्रकारों को आवृत्ति के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए— (क) माइक्रोवेव ओवन से विकिरण (ख) यातायात-संकेत से त्रवर्णि (amber) प्रकाश (ग) एफ.एम. रेडियो से प्राप्त विकिरण (घ) बाहरी दिक् से कौसमिक किरणें (च) X-किरणें
Answer:
विकिरणों की आवृत्ति का बढ़ता हुआ क्रम इस प्रकार है: एफ.एम. रेडियो से विकिरण < माइक्रोवेव ओवन से विकिरण < यातायात-संकेत से त्रवर्णि (amber) प्रकाश < X-किरणें < बाहरी दिक् से कौसमिक किरणें। (तरंग-दैर्ध्य का क्रम इसका बिल्कुल उल्टा होता है)।
मुख्य बिंदु:
• विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम में रेडियो तरंगों की आवृत्ति सबसे कम और कॉस्मिक किरणों की सबसे अधिक होती है।
• आवृत्ति और तरंग-दैर्ध्य एक दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।
• दृश्य प्रकाश (amber प्रकाश) रेडियो और माइक्रोवेव के बाद आता है।
आम गलतियाँ:
• आवृत्ति और तरंग-दैर्ध्य के क्रम को आपस में मिला देना।
• स्पेक्ट्रम के घटते और बढ़ते क्रम में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के सभी भागों का क्रम याद रखें।
b) प्रश्न में पूछे गए 'बढ़ते हुए क्रम' (Increasing order) पर विशेष ध्यान दें।
c) तीर के निशान (<) का सही प्रयोग करें।
Question 46: नाइट्रोजन लेज़र 337.1 nm. की तरंग-दैर्ध्य पर एक विकिरण उत्पन्न करती है। यदि उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या 5.6 × 10²⁴ हो, तो इस लेज़र की क्षमता की गणना कीजिए।
Answer:
लेज़र की क्षमता (शक्ति) E_total ÷ समय होती है, जहाँ कुल ऊर्जा E = N × (hc ÷ λ) से निकाली जाती है। यहाँ N फोटॉनों की संख्या (5.6 × 10²⁴), h प्लांक स्थिरांक, c प्रकाश का वेग और λ = 337.1 nm = 337.1 × 10⁻⁹ m है। मानों को सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर कुल ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे लेज़र की क्षमता लगभग 3.33 × 10⁵ J प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• लेज़र की शक्ति कुल ऊर्जा और फोटॉनों की संख्या पर निर्भर करती है।
• नैनोमीटर को मीटर में बदलना अनिवार्य है।
• E = Nhc/λ का उपयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• फोटॉनों की कुल संख्या (N) से गुणा करना भूल जाना।
• इकाई रूपांतरण में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) बहु-फोटॉन ऊर्जा के लिए N से गुना करने का सूत्र याद रखें।
b) गणना के चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) शक्ति का मात्रक सही लिखें।
Question 47: निऑन गैस को सामान्यतः संकेत बोर्डों में प्रयुक्त किया जाता है। यदि यह 616 nm पर प्रबलता से विकिरण-उत्सर्जन करती है, तो (क) उत्सर्जन की आवृत्ति (ख) 30 सेकंड में इस विकिरण द्वारा तय की गई दूरी (ग) क्वाంటम की ऊर्जा तथा (घ) उपस्थित क्वाण्टम की संख्या की गणना कीजिए (यदि यह 2 J की ऊर्जा उत्पन्न करती है)।
Answer:
(क) आवृत्ति v = c ÷ λ सूत्र से निकाली जाती है, जहाँ λ = 616 nm = 616 × 10⁻⁹ m है, जिससे आवृत्ति लगभग 4.87 × 10¹⁴ s⁻¹ प्राप्त होती है।
(ख) 30 सेकंड में तय की गई दूरी = प्रकाश का वेग × समय = (3 × 10⁸ m/s) × 30 s = 9.0 × 10⁹ m प्राप्त होती है।
(ग) एक क्वाण्टम (फोटॉन) की ऊर्जा E = hv से निकाली जाती है, जो लगभग 3.227 × 10⁻¹⁹ J आती है।
(घ) 2 J ऊर्जा में क्वाण्टम की संख्या कुल ऊर्जा को एक फोटॉन की ऊर्जा से भाग देकर निकाली जाती है, जो लगभग 6.19 × 10¹⁸ प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• तरंग-दैर्ध्य से आवृत्ति निकालने का सीधा सूत्र v = c/λ है।
• दूरी = वेग × समय (भौतिकी का मूल नियम)।
• फोटॉन की ऊर्जा E = hv होती है।
आम गलतियाँ:
• चारों भागों में अलग-अलग सूत्र न पहचान पाना।
• इकाई बदलने में गलती करना।
Exam Tips:
a) बहु-भाग वाले प्रश्नों को (क, ख, ग, घ) डालकर क्रमानुसार हल करें।
b) प्रत्येक भाग के लिए उपयुक्त सूत्र स्पष्ट लिखें।
c) गणना की शुद्धता की जाँच करें।
Question 48: खगोलीय प्रेक्षणों ’में दूरस्थ तारों से मिलने वाले संकेत बहुत कमजोर होते हैं। यदि फोटॉन संसूचक 600 nm के विकिरण से कुल 3.15 × 10⁻¹⁸ J प्राप्त करता है, तो संसूचक द्वारा प्राप्त फोटॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
Answer:
एक फोटॉन की ऊर्जा E = hc ÷ λ सूत्र से निकाली जाती है, जहाँ λ = 600 nm = 600 × 10⁻⁹ m है। मान रखने पर एक फोटॉन की ऊर्जा लगभग 3.313 × 10⁻¹⁹ J प्राप्त होती है। संसूचक द्वारा प्राप्त कुल ऊर्जा 3.15 × 10⁻¹⁸ J है। फोटॉनों की संख्या कुल ऊर्जा को एक फोटॉन की ऊर्जा से भाग देकर निकाली जाती है, जो लगभग 9.5 यानी 10 फोटॉन प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• फोटॉनों की संख्या = कुल प्राप्त ऊर्जा ÷ एक फोटॉन की ऊर्जा।
• तरंग-दैर्ध्य को मीटर में बदलना आवश्यक है।
• खगोलीय संकेतों की ऊर्जा बहुत कम होती है।
आम गलतियाँ:
• एक फोटॉन की ऊर्जा निकाले बिना कुल ऊर्जा को भाग देना।
• तरंग-दैर्ध्य की इकाई गलत रखना।
Exam Tips:
a) ऐसे प्रश्नों में हमेशा पहले एक फोटॉन की ऊर्जा निकालें।
b) भाग देते समय घातों का सही हिसाब रखें।
c) संख्या को निकटतम पूर्णांक में व्यक्त कर सकते हैं।
Question 49: उत्तेजित अवस्था में अणुओं के जीवनकाल का माप प्रायः लगभग नैनो सेकंड paras वाले विकिरण स्रोत का उपयोग करके किया जाता है। यदि विकिरण स्रोत का काल 2 ns और स्पंदित विकिरण स्रोत के दौरान उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या 2.5 × 10¹⁵ है, तो स्रोत की ऊर्जा की गणना कीजिए।
Answer:
विकरण की आवृत्ति v आवर्तकाल (T = 2 ns = 2 × 10⁻⁹ s) का व्युत्क्रम होती है, जिससे v = 1 ÷ (2 × 10⁻⁹) = 5.0 × 10⁸ s⁻¹ प्राप्त होती है। स्रोत की कुल ऊर्जा E = N × h × v सूत्र से निकाली जाती है, जहाँ N फोटॉनों की संख्या (2.5 × 10¹⁵) है। मानों को सूत्र में रखने पर स्रोत की कुल ऊर्जा लगभग 8.282 × 10⁻¹⁰ J प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• आवर्तकाल से आवृत्ति निकालने के लिए v = 1/T का उपयोग होता है।
• कुल ऊर्जा E = Nhv होती है।
• नैनो सेकंड (ns) को सेकंड में बदलने के लिए 10⁻⁹ से गुणा करते हैं।
आम गलतियाँ:
• ns को सेकंड में बदलते समय घात की भूल करना।
• N से गुणा करना भूल जाना।
Exam Tips:
a) समय से आवृत्ति निकालने के सूत्र का अभ्यास करें।
b) बहु-फोटॉन ऊर्जा के सूत्र का सही प्रयोग करें।
c) इकाई जूल (J) लिखना न भूलें।
Question 50: सबसे लंबी द्विगुणि तंग-दैर्ध्य जिंक अवशोषण संक्रमण 589 और 589.6 nm पर देखा जाता है। प्रत्येक संक्रमण की आवृत्ति और दो उत्तेजित अवस्थाओं के बीच ऊर्जा के अंतर की गणना कीजिए।
Answer:
प्रथम संक्रमण की आवृत्ति v₁ = c ÷ λ₁ सूत्र से निकाली जाती है, जहाँ λ₁ = 589 nm है, जिससे v₁ = 5.093 × 10¹⁴ s⁻¹ प्राप्त होती है। दूसरे संक्रमण की आवृत्ति v₂ = c ÷ λ₂ से, जहाँ λ₂ = 589.6 nm है, v₂ = 5.088 × 10¹⁴ s⁻¹ प्राप्त होती है। दोनों आवृत्तियों का अंतर Δv निकालकर ऊर्जा का अंतर ΔE = h(v₁ - v₂) सूत्र से निकाला जाता है, जो गणना करने पर लगभग 3.313 × 10⁻²² J प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• दो संक्रमणों की आवृत्तियों का अंतर ऊर्जा के अंतर ΔE = hΔv से जुड़ा होता है।
• तरंग-दैर्ध्य को मीटर में बदलना अनिवार्य है।
• प्लांक स्थिरांक का मान 6.626 × 10⁻³४ Js होता है।
आम गलतियाँ:
• आवृत्तियों का अंतर निकालते समय गलत मान घटाना।
• तरंग-दैर्ध्य की इकाइयों में चूक करना।
Exam Tips:
a) दो अवस्थाओं के बीच ऊर्जा का अंतर निकालने के लिए ΔE = hΔv का प्रयोग करें।
b) गणना के चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) वैज्ञानिक संकेतन का सही उपयोग करें।
Question 51: सीजियम परमाणु का कार्यफलन 1.9 eV है, तो (क) उत्सर्जित विकिरण की देहली तरंग-दैर्ध्य (ख) देहली आवृत्ति की गणना कीजिए। यदि सीजियम तत्त्व को 500 nm की तरंग-दैर्ध्य के साथ विकीर्णित किया जाए, तो निकले हुए फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा और वेग की गणना कीजिए।
Answer:
(क) कार्यफलन W₀ = 1.9 eV = 1.9 × 1.602 × 10⁻¹⁹ J है। देहली तरंग-दैर्ध्य λ₀ = hc ÷ W₀ सूत्र से निकाली जाती है, जो लगभग 6.53 × 10⁻⁷ m (653 nm) प्राप्त होती है।
(ख) देहली आवृत्ति v₀ = W₀ ÷ h सूत्र से निकाली जाती है, जो लगभग 4.593 × 10¹⁴ s⁻¹ प्राप्त होती है। 500 nm विकिरण डालने पर गतिज ऊर्जा K.E. = E - W₀ से निकाली जाती है, जो जूल में प्राप्त होती है और इसके बाद वेग v = sqrt(2 × K.E. ÷ m) से निकाला जाता है, जो लगभग 4.52 × 10⁵ ms⁻¹ प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• eV को जूल में बदलने के लिए 1.602 × 10⁻¹⁹ से गुणा करते हैं।
• देहली तरंग-दैर्ध्य λ₀ = hc/W₀ होती है।
• प्रकाश विद्युत समीकरण से गतिज ऊर्जा और वेग निकाला जाता है।
आम गलतियाँ:
• कार्यफलन को eV से जूल में बदलना भूल जाना।
• वेग निकालते समय इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का सही उपयोग न करना।
Exam Tips:
a) प्रकाश विद्युत प्रभाव के सभी चरणों (कार्यफलन, देहली आवृत्ति, गतिज ऊर्जा, वेग) को क्रमानुसार हल करें।
b) मात्रकों का विशेष ध्यान रखें।
c) कैलकुलेशन साफ-सुथरी करें।
Question 52: जब सोडियम धातु को विभिन्न तरंग-दैर्ध्यों के साथ विकीर्णित किया जाता है, तो निम्नलिखित परिणाम प्राप्त होते हैं— λ (nm): 500, 450, 400; v × 10⁵ (cm s⁻¹): 2.55, 4.35, 5.35. देहली तरंग-दैर्ध्य की गणना कीजिए।
Answer:
ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार hc(1/λ - 1/λ₀) = (1/2)mv² समीकरण का उपयोग किया जाता है। दिए गए तीन अलग-अलग मानों (500 nm, 450 nm, 400 nm) के लिए समीकरण बनाकर उनके अनुपातों या समीकरणों को आपस में विभाजित करके देहली तरंग-दैर्ध्य (λ₀) की गणना की जाती है। सभी समीकरणों को हल करने पर देहली तरंग-दैर्ध्य का मान लगभग 540 nm प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• इस प्रकार के प्रायोगिक आँकड़ों वाले प्रश्नों में ऊर्जा समीकरण के युग्म बनाए जाते हैं।
• समीकरणों को आपस में भाग देकर अज्ञात (λ₀) को हल किया जाता है।
• वेग की इकाई cm/s को m/s में बदलना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• समीकरणों के अनुपात निकालते समय गणितीय त्रुटि करना।
• इकाइयों के रूपांतरण में गलती करना।
Exam Tips:
a) दो अलग-अलग तरंग-दैर्ध्य के समीकरणों को भाग देकर λ₀ निकालने की विधि सीखें।
b) गणना लंबी हो सकती है, इसलिए धैर्यपूर्वक हल करें।
c) अंत में सही मात्रक (nm) लिखें।
Question 53: प्रकाश विद्युत् प्रभाव प्रयोग में सिल्वर धातु से फोटोइलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन 0.35 V की वोल्टता द्वारा रोका जा सकता है। जब 256.7 nm के विकिरण का उपयोग किया जाता है, तो सिल्वर धातु के लिए कार्यफलन की गणना कीजिए।
Answer:
निरोधी विभव (stopping potential) V_0 = 0.35 V दिया गया है, जिससे अधिकतम गतिज ऊर्जा K.E.(max) = e × V_0 = 0.35 eV प्राप्त होती है। आपतित फोटॉन की ऊर्जा E = hc ÷ λ सूत्र से निकाली जाती है, जहाँ λ = 256.7 nm = 256.7 × 10⁻⁹ m है, जिससे फोटॉन की ऊर्जा लगभग 4.83 eV प्राप्त होती है। कार्यफलन W₀ = E - K.E. सूत्र से निकाला जाता है, जिससे W₀ = 4.83 eV - 0.35 eV = 4.48 eV प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• निरोधी विभव से अधिकतम गतिज ऊर्जा eV में सीधी प्राप्त होती है (0.35 eV)।
• कार्यफलन = फोटॉन की ऊर्जा - अधिकतम गतिज ऊर्जा।
• ऊर्जा को eV में रखकर गणना करना आसान होता है।
आम गलतियाँ:
• निरोधी विभव को सीधे गतिज ऊर्जा न मानकर जूल में बदलने में उलझना।
• कार्यफलन के सूत्र में मानों का गलत संयोजन।
Exam Tips:
a) निरोधी विभव (V_0) और गतिज ऊर्जा का सीधा संबंध (K.E. = eV_0) याद रखें।
b) eV इकाइयों में गणना करना समय बचाता है।
c) उत्तर स्पष्ट रूप से eV या J में दें।
Question 54: यदि 150 pm तरंग-दैर्ध्य का फोटॉन एक परमाणु से टकराता है और इसके अंदर बँधा हुआ इलेक्ट्रॉन 1.5 × 10⁷ ms⁻¹ वेग से बाहर निकलता है तो उस ऊर्जा की गणना कीजिए, जिससे यह नाभिक से बँधा हुआ है।
Answer:
आपतित फोटॉन की ऊर्जा E = hc ÷ λ सूत्र से निकाली जाती है, जहाँ λ = 150 pm = 150 × 10⁻¹² m है। मान रखने पर फोटॉन की ऊर्जा लगभग 1.3252 × 10⁻¹⁵ J प्राप्त होती है। उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा K.E. = (1/2)mv² सूत्र से निकाली जाती है, जो लगभग 1.025 × 10⁻¹६ J प्राप्त होती है। नाभिक से बंधन ऊर्जा E_bind = E - K.E. होगी, जिससे गणना करने पर बंधन ऊर्जा लगभग 1.2227 × 10⁻¹⁵ J प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• बंधन ऊर्जा = फोटॉन की ऊर्जा - इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा।
• पिकोमीटर को मीटर में बदलना अनिवार्य है।
• इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.109 × 10⁻³¹ kg है।
आम गलतियाँ:
• गतिज ऊर्जा निकालते समय वेग का वर्ग करना भूल जाना।
• घटाव में घातों का ध्यान न रखना।
Exam Tips:
a) ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत के आधार पर यह प्रश्न हल होता है।
b) प्रत्येक पद की गणना अलग से करके अंत में घटाएँ।
c) वैज्ञानिक संकेतन का सही प्रयोग करें।
Question 55: पाश्चन श्रेणी का उत्सर्जन संक्रमण n कक्षा से आरंभ होता है। कक्ष n = 3 में खत्म होता है तथा इसे v = 3.29 × 10¹⁵ (Hz) [1/3² - 1/n²] से दर्शाया जाता है। यदि संक्रमण 1285 nm पर प्रेक्षित होता है, तो n के मान की गणना कीजिए तथा स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए।
Answer:
आवृत्ति v = c ÷ λ सूत्र से निकाली जाती है, जहाँ λ = 1285 nm = 1285 × 10⁻⁹ m है, जिससे v = 2.33 × 10¹⁴ s⁻¹ प्राप्त होती है। इस मान को दिए गए समीकरण में रखने पर v = 3.29 × 10¹⁵ [(1/3²) - (1/n²)] प्राप्त होता है। समीकरण को हल करने पर 1/n² का मान 1/25 प्राप्त होता है, जिससे n = 5 प्राप्त होता है। पाश्चन श्रेणी अवरक्त (Infrared) क्षेत्र में स्थित होती है।
मुख्य बिंदु:
• पाश्चन श्रेणी के लिए n₁ = 3 होता है और संक्रमण उच्च कक्षाओं से n = 3 पर होता है।
• आवृत्ति और तरंग-दैर्ध्य का संबंध v = c/λ है।
• यह श्रेणी अवरक्त (IR) क्षेत्र में आती है।
आम गलतियाँ:
• समीकरण को हल करते समय बीजगणितीय भूल करना।
• स्पेक्ट्रम का क्षेत्र पहचान न पाना।
Exam Tips:
a) स्पेक्ट्रम की विभिन्न श्रेणियाँ (लाइमन-पराबैंगनी, बामर-दृश्य, पाश्चन-अवरक्त) याद रखें।
b) समीकरण को सावधानीपूर्वक हल करें।
c) n का मान हमेशा एक पूर्णांक आना चाहिए।
Question 56: उस उत्सर्जन संक्रमण के तरंग-दैर्ध्य की गणना कीजिए, जो 1.3225 nm त्रिज्या वाले कक्ष से आरंभ और 211.6 pm पर समाप्त होता है। इस संक्रमण की श्रेणी का नाम और स्पेक्ट्रम का क्षेत्र भी बताइए।
Answer:
हाइड्रोजन परमाणु के कक्ष की त्रिज्या r_n = 0.529 × (n²/Z) angstrom या pm में होती है। पहली त्रिज्या r₁ = 1.3225 nm = 1322.5 pm से n₁ निकाला जाता है, जो 5 प्राप्त होता है। दूसरी त्रिज्या r₂ = 211.6 pm से n₂ निकाला जाता है, जो 2 प्राप्त होता है। अतः संक्रमण n = 5 से n = 2 (बामर श्रेणी) में हो रहा है। रिडबर्ग समीकरण से तरंग-दैर्ध्य निकालने पर λ = 434 nm प्राप्त होती है, जो दृश्य (Visible) क्षेत्र में आती है।
मुख्य बिंदु:
• त्रिज्या और मुख्य क्वांटम संख्या का संबंध r ∝ n² होता है।
• n = 5 से n = 2 का संक्रमण बामर श्रेणी और दृश्य क्षेत्र से संबंधित है।
• रिडबर्ग समीकरण का प्रयोग करके तरंग-दैर्ध्य निकाली जाती है।
आम गलतियाँ:
• त्रिज्या से n का मान निकालते समय वर्गमूल लेना भूल जाना।
• इकाइयों (nm और pm) में अंतर न समझना।
Exam Tips:
a) त्रिज्या के सूत्र से n निकालने की विधि का अभ्यास करें।
b) n = 5 से 2 बामर श्रेणी (दृश्य क्षेत्र) को इंगित करता है।
c) तरंग-दैर्ध्य सही मात्रक में निकालें।
Question 57: देइ ब्रॉग्ली द्वारा प्रतिपादित द्रव्य के दोहरे व्यवहार से इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज हुई, जिसे जैव अणुओं और अन्य प्रकार के पदार्थों की अति आवर्धित प्रतिबिंब के लिए उपयोग में लाया जाता है। यदि इलेक्ट्रॉन का वेग 1.6 × 10⁶ ms⁻¹ है, तो इस इलेक्ट्रॉन से संबंधित दे ब्रॉग्ली तरंग-दैर्ध्य की गणना कीजिए।
Answer:
ड्री ब्रोग्ली समीकरण λ = h ÷ (mv) का उपयोग किया जाता है, जहाँ h प्लांक स्थिरांक (6.626 × 10⁻³⁴ Js), m इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (9.10939 × 10⁻³¹ kg) और v वेग (1.6 × 10⁶ ms⁻¹) है। मानों को सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर तरंग-दैर्ध्य λ = 4.55 × 10⁻¹⁰ m यानी 455 pm प्राप्त होती है। अतः इलेक्ट्रॉन से जुड़ी दे ब्रॉग्ली तरंग-दैर्ध्य 455 pm है।
मुख्य बिंदु:
• इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी तरंग-दैर्ध्य की इस द्वैत प्रकृति का उपयोग करती है।
• λ = h/mv सीधा और उपयोगी सूत्र है।
• वेग बढ़ने पर तरंग-दैर्ध्य छोटी हो जाती है।
आम गलतियाँ:
• द्रव्यमान या वेग के मान में घात की गलती करना।
• मीटर को पिकोमीटर में बदलते समय भूल होना।
Exam Tips:
a) डी ब्रोग्ली समीकरण पर आधारित प्रश्न परीक्षा में अवश्य आते हैं, इसे पक्का करें।
b) मात्रकों की एकरूपता रखें।
c) उत्तर को angstrom या pm में भी व्यक्त कर सकते हैं।
Question 58: इलेक्ट्रॉन विवर्तन के समान न्यूट्रॉन विवर्तन सूक्ष्मदर्शी को अणुओं की संरचना के निर्धारण में प्रयुक्त किया जाता है। यदि यहाँ 800 pm की तरंग-दैर्ध्य ली जाए, तो न्यूट्रॉन से संबंधित अभिलाक्षणिक वेग की गणना कीजिए।
Answer:
ड्री ब्रोग्ली समीकरण v = h ÷ (mλ) का उपयोग वेग निकालने के लिए किया जाता है। यहाँ h प्लांक स्थिरांक (6.626 × 10⁻³४ Js), m न्यूट्रॉन का द्रव्यमान (लगभग 1.6749 × 10⁻²⁷ kg) और λ = 800 pm = 800 × 10⁻¹² m है। मानों को सूत्र में रखने पर न्यूट्रॉन का वेग v = 494 ms⁻¹ प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• न्यूट्रॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से बहुत अधिक होता है (1.675 × 10⁻²⁷ kg)।
• वेग का सूत्र v = h/mλ होता है।
• पिकोमीटर को मीटर में बदलना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• न्यूट्रॉन के स्थान पर इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान रख देना।
• तरंग-दैर्ध्य की इकाई न बदलना।
Exam Tips:
a) न्यूट्रॉन और प्रोटॉन का द्रव्यमान लगभग समान होता है, इसे याद रखें।
b) सूत्र को वेग के लिए पुनर्व्यवस्थित करना सीखें।
c) उत्तर की इकाई ms⁻¹ लिखें।
Question 59: यदि बोर के प्रथम कक्ष में इलेक्ट्रॉन का वेग 2.9 × 10⁸ ms⁻¹ है, तो इससे संबंधित दे ब्रॉग्ली तरंग-दैर्ध्य की गणना कीजिए।
Answer:
ड्री ब्रोग्ली समीकरण λ = h ÷ (mv) के अनुसार तरंग-दैर्ध्य निकाली जाती है। यहाँ h प्लांक स्थिरांक (6.626 × 10⁻³⁴ Js), m इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (9.10939 × 10⁻³१ kg) और वेग v = 2.19 × 10⁶ ms⁻¹ (नोट: प्रश्न में 2.9 × 10⁸ गलत छपा हो सकता है क्योंकि यह प्रकाश के वेग के बराबर है, वास्तविक प्रथम बोर कक्षा वेग 2.19 × 10⁶ ms⁻¹ होता है) का उपयोग करने पर तरंग-दैर्ध्य λ = 332 pm प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• प्रथम बोर कक्षा में इलेक्ट्रॉन का वास्तविक वेग लगभग 2.19 × 10⁶ ms⁻¹ होता है।
• λ = h/mv समीकरण से तरंग-दैर्ध्य पिकोमीटर में निकाली जाती है।
• यह तरंग-दैर्ध्य प्रथम कक्षा की परिधि के बराबर होती है (2πr = λ)।
आम गलतियाँ:
• प्रकाश के वेग और कक्षा में इलेक्ट्रॉन के वेग में अंतर न समझना।
• इकाई रूपांतरण की गलती करना।
Exam Tips:
a) बोर कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का वेग याद रखें (प्रकाश के वेग का लगभग 1/137 भाग)।
b) गणना में सही मानों का प्रयोग करें।
c) परिणाम को pm में व्यक्त करें।
Question 60: एक प्रोटॉन, जो 1000 V के विभवांतर में गति कर रहा है, से संबंधित वेग 4.37 × 10⁵ ms⁻¹ है। यदि 0.1 kg द्रव्यमान की हॉकी की गेंद इस वेग से गतिमान है, तो इससे संबंधित दे ब्रॉग्ली तरंग-दैर्ध्य की गणना कीजिए।
Answer:
ड्री ब्रोग्ली समीकरण λ = h ÷ (mv) का उपयोग किया जाता है। यहाँ m गेंद का द्रव्यमान (0.1 kg), v वेग (4.37 × 10⁵ ms⁻¹) और h प्लांक स्थिरांक (6.626 × 10⁻³⁴ Js) है। मानों को सूत्र में रखने पर λ = (6.626 × 10⁻³⁴) ÷ (0.1 × 4.37 × 10⁵) = 1.52 × 10⁻³⁸ m प्राप्त होती है। यह तरंग-दैर्ध्य इतनी छोटी है कि इसे प्रयोगात्मक रूप से महसूस नहीं किया जा सकता।
मुख्य बिंदु:
• macroscopic (बड़ी) वस्तुओं के लिए दे ब्रॉग्ली तरंग-दैर्ध्य नगण्य होती है।
• सूत्र λ = h/mv में सभी मान SI पद्धति में रखे जाते हैं।
• द्रव्यमान किलोग्राम में होना चाहिए।
आम गलतियाँ:
• प्रोटॉन के वेग और दिए गए गेंद के द्रव्यमान का गलत संयोजन करना।
• घातों की गणना में भूल होना।
Exam Tips:
a) यह प्रश्न यह समझाने के लिए है कि दे ब्रॉग्ली तरंगें केवल सूक्ष्म कणों (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन) के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।
b) गणना सावधानी से करें।
c) उत्तर की इकाई मीटर (m) लिखें।
Question 61: यदि एक इलेक्ट्रॉन की स्थिति को ±0.002 nm की शुद्धता से मापी जाती है, तो इलेक्ट्रॉन के संवेग में अनिश्चितता की गणना कीजिए। यदि इलेक्ट्रॉन का संवेग h/(4π × 0.05nm) है, तो क्या इस मान को निकालने में कोई कठिनाई होगी?
Answer:
हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार Δx × Δp ≥ h ÷ (4π) होता है। स्थिति में अनिश्चितता Δx = 0.002 nm = 0.002 × 10⁻⁹ m दी गई है। संवेग में अनिश्चितता Δp = h ÷ (4π × Δx) सूत्र से निकाली जाती है। मान रखने पर Δp = 2.637 × 10⁻²³ kgms⁻¹ प्राप्त होती है। वास्तविक संवेग का मान अनिश्चितता के मान से छोटा है, इसलिए इस मान को परिभाषित नहीं किया जा सकता क्योंकि यह अनिश्चितता सीमा के भीतर है।
मुख्य बिंदु:
• हाइजेनबर्ग का सिद्धांत Δx × Δp ≥ h/4π है।
• स्थिति की अनिश्चितता जितनी कम होगी, संवेग की अनिश्चितता उतनी ही अधिक होगी।
• वास्तविक मान यदि अनिश्चितता से कम है तो वह प्रायोगिक रूप से अर्थहीन है।
आम गलतियाँ:
• हाइजेनबर्ग समीकरण में 4π का भाग देना भूल जाना।
• नैनोमीटर को मीटर में न बदलना।
Exam Tips:
a) हाइजेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत का सूत्र हमेशा याद रखें।
b) वैचारिक भाग का तार्किक उत्तर दें।
c) मात्रक kgms⁻¹ लिखें।
Question 62: छः इलेक्ट्रॉन की क्वांटम संख्या नीचे दी गई है। इन्हें ऊर्जा के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए। इनमें से किसी की ऊर्जा समान है? 1. n = 4, l = 2, m_l = -2, m_s = -1/2 | 2. n = 3, l = 2, m_l = 1, m_s = +1/2 | 3. n = 4, l = 1, m_l = 0, m_s = +1/2 | 4. n = 3, l = 2, m_l = -2, m_s = -1/2 | 5. n = 3, l = 1, m_l = -1, m_s = +1/2 | 6. n = 4, l = 1, m_l = 0, m_s = +1/2
Answer:
दी गई क्वांटम संख्याओं से कक्षक इस प्रकार हैं: 1. 4d, 2. 3d, 3. 4p, 4. 3d, 5. 3p, 6. 4p। (n + l) नियम के अनुसार ऊर्जा का क्रम तय होता है: 3p (n+l=4), 3d (n+l=5), 4p (n+l=5), 4d (n+l=6)। समान (n + l) वाले कक्षकों (जैसे 3d और 4p) में कम n वाले कक्षक (3d) की ऊर्जा कम होती है। ऊर्जा का बढ़ता हुआ क्रम: 5 < (2 और 4) < (3 और 6) < 1 है, जहाँ 2 और 4 (दोनों 3d) तथा 3 और 6 (दोनों 4p) की ऊर्जाएँ आपस में समान हैं।
मुख्य बिंदु:
• (n + l) नियम से कक्षकों की ऊर्जा तय होती है।
• (n + l) समान होने पर कम n वाले कक्षक की ऊर्जा कम होती है।
• एक ही उपकोश के सभी कक्षकों की ऊर्जा समान (degenerating) होती है।
आम गलतियाँ:
• (n + l) योग समान होने पर गलत कक्षक को उच्च ऊर्जा का मान लेना।
• क्वांटम संख्याओं से उपकोश पहचानने में गलती करना।
Exam Tips:
a) पहले प्रत्येक क्वांटम संख्या युग्म से कक्षक (जैसे 3p, 4d) पहचानें।
b) (n + l) का मान निकालकर तुलना करें।
c) समान ऊर्जा वाले कक्षकों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
Question 63: ब्रोमीन परमाणु में 35 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसके 2p कक्षक में छः इलेक्ट्रॉन, 3p कक्षक में छः इलेक्ट्रॉन तथा 4p कक्षक में पाँच इलेक्ट्रॉन होते हैं। इनमें से कौन सा इलेक्ट्रॉन न्यूनतम प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करता है?
Answer:
एक बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन द्वारा अनुभव किया जाने वाला प्रभावी नाभिकीय आवेश नाभिक और कक्षा के बीच की दूरी पर निर्भर करता है, जिसमें इलेक्ट्रॉन नाभिक से जितना दूर होता है, उतना कम प्रभावी आवेश अनुभव करता है। 4p कक्षक ब्रोमीन परमाणु के नाभिक से सबसे दूर है (n = 4)। इसलिए, 4p कक्षक में उपस्थित इलेक्ट्रॉन न्यूनतम प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेंगे क्योंकि वे 2p और 3p कक्षकों के इलेक्ट्रॉनों द्वारा सबसे अधिक परिरक्षित (shielded) होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• नाभिक से दूरी बढ़ने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश घटता है।
• आंतरिक कक्षकों के इलेक्ट्रॉन बाह्य कक्षकों के इलेक्ट्रॉनों को परिरक्षित (shield) करते हैं।
• मुख्य क्वांटम संख्या n जितनी अधिक होगी, इलेक्ट्रॉन उतना बाहर होगा।
आम गलतियाँ:
• आंतरिक कक्षकों (2p) और बाह्य कक्षकों (4p) के प्रभाव को उल्टा समझ लेना।
• परिरक्षण प्रभाव (shielding effect) के नियम को भूल जाना।
Exam Tips:
a) नाभिक से दूरी (n का मान) प्रभावी नाभिकीय आवेश का मुख्य निर्धारक है।
b) बाहरी कक्षकों के इलेक्ट्रॉन हमेशा कम प्रभावी आवेश अनुभव करते हैं।
c) उत्तर को तार्किक और स्पष्ट रूप में लिखें।
Question 64: निम्नलिखित में से कौन सा कक्षक उच्चप्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा? (i) 2s और 3s (ii) 4d और 4f (iii) 3d और 3p
Answer:
(i) 2s कक्षा में मौजूद इलेक्ट्रॉन 3s कक्षा में मौजूद इलेक्ट्रॉन की तुलना में अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश (नाभिक के करीब होने के कारण) अनुभव करेगा।
(ii) 4d, 4f की अपेक्षा अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश का अनुभव करेगा क्योंकि f कक्षकों का परिरक्षण प्रभाव कमजोर होता है और 4d नाभिक के अधिक करीब होता है।
(iii) 3p की अपेक्षा 3d नहीं बल्कि 3p कक्षक अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा क्योंकि 3p कक्षक नाभिक के अधिक समीप होता है।
मुख्य बिंदु:
• जो कक्षक नाभिक के जितना समीप होगा, वह उतना अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा।
• कक्षकों की वेधन क्षमता (penetration power) का क्रम s > p > d > f होता है।
• परिरक्षण प्रभाव (shielding effect) प्रभावी नाभिकीय आवेश को प्रभावित करता है।
आम गलतियाँ:
• n के बड़े मान को देखकर सीधे उच्च आवेश मान लेना जबकि दूरी और वेधन क्षमता भी महत्वपूर्ण हैं।
• s, p, d, f की वेधन क्षमता का क्रम भूल जाना।
Exam Tips:
a) वेधन क्षमता का क्रम (s > p > d > f) अच्छी तरह याद रखें।
b) नाभिक के करीब वाले कक्षक हमेशा अधिक आकर्षण महसूस करते हैं।
c) तीनों भागों का अलग-अलग तार्किक कारण दें।
Question 65: Al तथा Si में 3p कक्षक में युग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। कौन-सा इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा?
Answer:
परमाणु आवेश का एक बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन द्वारा अनुभव किए गए शुद्ध धनात्मक आवेश के रूप में परिभाषित किया जाता है। परमाणु क्रमांक जितना अधिक होगा, प्रभावी नाभिकीय आवेश उतना ही अधिक होगा। सिलिकॉन (Z = 14) में 14 प्रोटॉन होते हैं जबकि एल्युमीनियम (Z = 13) में 13 प्रोटॉन होते हैं। इसलिए, सिलिकॉन के 3p कक्षक में इलेक्ट्रॉन एल्युमीनियम की तुलना में अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश का अनुभव करेंगे क्योंकि सिलिकॉन का नाभिकीय प्रभार बड़ा होता है।
मुख्य बिंदु:
• आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है।
• सिलिकॉन का परमाणु क्रमांक एल्युमीनियम से अधिक होता है।
• प्रोटॉनों की संख्या बढ़ने से आकर्षण बढ़ता है।
आम गलतियाँ:
• परमाणु क्रमांक के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
• इलेक्ट्रॉनों के युग्मन (pairing) को मुख्य कारण मान लेना।
Exam Tips:
a) आवर्त में आगे बढ़ने पर Z बढ़ने के साथ प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है।
b) Al और Si की तुलना करते समय प्रोटॉनों की संख्या का हवाला दें।
c) संक्षिप्त और सटीक उत्तर लिखें।
Question 66: इन युग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए— (क) P (ख) Si (ग) Cr (घ) Fe (ङ) Kr
Answer:
(क) फॉस्फोरस (P, Z=15) के 3p उपकोश में 3 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
(ख) सिलिकॉन (Si, Z=14) के 3p उपकोश में 2 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
(ग) क्रोमियम (Cr, Z=24) में कुल 6 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं (4s में 1 और 3d में 5)।
(घ) आयरन (Fe, Z=26) में कुल 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं (3d में 4)।
(ङ) क्रिप्टन (Kr, Z=36) एक उत्कृष्ट गैस है, इसके सभी कक्षक पूरी तरह भरे होते हैं, अतः इसमें कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता (शून्य)।
मुख्य बिंदु:
• हुंड के अधिकतम बहुलकता नियम के अनुसार कक्षकों में इलेक्ट्रॉन पहले अयुग्मित रूप से भरते हैं।
• इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखकर कक्षीय चित्र (orbital diagram) बनाकर अयुग्मित इलेक्ट्रॉन गिने जाते हैं।
• उत्कृष्ट गैसों में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं।
आम गलतियाँ:
• क्रोमियम या कॉपर का सामान्य विन्यास लिखकर अयुग्मित इलेक्ट्रॉन गलत गिनना।
• हंड के नियम का पालन न करना।
Exam Tips:
a) कक्षीय आरेख (orbital boxes) बनाकर अयुग्मित इलेक्ट्रॉन गिनना सबसे सुरक्षित तरीका है।
b) क्रोमियम (Cr) और कॉपर (Cu) के अपवादों का विशेष ध्यान रखें।
c) प्रत्येक तत्व के लिए अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या स्पष्ट लिखें।
Question 67: (i) n = 4 से संबंधित उपकोश हैं? (ii) उस उपकोश में कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित होंगे, जिसके लिए m_s = -1/2 एवं n = 4 हैं?
Answer:
(i) n = 4 मुख्य ऊर्जा स्तर के लिए l के चार मान संभव हैं (0, 1, 2, 3), जिससे संबंधित चार उपकोश 4s, 4p, 4d और 4f हैं।
(ii) n = 4 कोष में कुल कक्षकों की संख्या n² = (4)² = 16 होती है, और कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n² = 32 होती है। इनमें से आधे इलेक्ट्रॉनों के लिए चक्रण m_s = -1/2 होता है, अतः ऐसे इलेक्ट्रॉनों की संख्या 16 होगी।
मुख्य बिंदु:
• n = 4 कोष में s, p, d, f चारों उपकोश होते हैं।
• किसी कोष में कुल कक्षकों की संख्या n² होती है।
• चक्रण m_s = -1/2 वाले इलेक्ट्रॉन कुल कक्षकों की संख्या के बराबर होते हैं।
आम गलतियाँ:
• कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या को ही चक्रण विशेष इलेक्ट्रॉन मान लेना।
• उपकोशों के नाम लिखने में गलती करना।
Exam Tips:
a) n के मान से उपकोशों की संख्या और नाम तुरंत पहचानना सीखें।
b) चक्रण (m_s) से संबंधित गणनाओं में हमेशा आधा करने का नियम याद रखें।
c) दोनों भागों का उत्तर स्पष्ट दें।
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