NCERT Solutions Class 11 Chemistry Chapter 03 Classification of Elements and Periodicity in Properties (तत्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता) in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 11 Chemistry: Chapter 03 तत्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

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Chapter-wise Solutions for Chemistry: Chapter 03 तत्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

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Question 1: आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?

Answer:

आवर्त सारणी में तत्वों के संगठन का मूल विषय तत्वों को उनके गुणों के अनुसार आवर्त और समूहों में वर्गीकृत करना है। यह व्यवस्था तत्वों और उनके यौगिकों के अध्ययन को सरल और व्यवस्थित बनाती है। आवर्त सारणी में समान गुणों वाले तत्वों को एक ही वर्ग में रखा गया है। आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु क्रमांक के आधार पर व्यवस्थित किया गया है, जो उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करता है।

मुख्य बिंदु:

• आवर्त सारणी में तत्वों का भौतिक आधार उनके परमाणु क्रमांक और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित है।
• समान गुणधर्म वाले तत्व एक ही समूह में रखे जाते हैं।
• यह तत्वों के अध्ययन को आसान और व्यवस्थित बनाता है।

आम गलतियाँ:

• केवल परमाणु भार को आवर्त सारणी का आधुनिक आधार बताना।
• इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की भूमिका को नजरअंदाज करना।
• समूहों और आवर्तों के वर्गीकरण में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) आधुनिक आवर्त सारणी का आधार हमेशा परमाणु क्रमांक (Atomic Number) लिखें।
b) भौतिक और रासायनिक गुणों की पुनरावृत्ति का कारण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को बताएं।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।

 

Question 2: मेंडेलीफ ने किस महत्वपूर्ण गुणधर्म को अपनी आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया? क्या वे उसपर दृढ़ रह पाए?

Answer:

मेंडेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में तत्वों को परमाणु भार या द्रव्यमान के अनुसार व्यवस्थित किया। उन्होंने तत्वों को आवर्त और समूहों में उनके बढ़ते परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया और समान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखा। हालाँकि, वह इस व्यवस्था पर अधिक समय तक टिके नहीं रहे। उन्होंने पाया कि यदि तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु भार के क्रम में सख्ती से व्यवस्थित किया जाता है, तो कुछ तत्व वर्गीकरण की इस योजना में व्यवस्थित नहीं होते हैं। इसलिए, उन्होंने कुछ मामलों में परमाणु भार के क्रम की उपेक्षा की। उदाहरण के लिए, आयोडीन का परमाणु भार टेल्यूरियम की तुलना में कम होता है, फिर भी मेंडेलीफ ने आयोडीन को टेल्यूरियम से पहले रखा क्योंकि आयोडीन के गुण फ्लोरीन, क्लोरीन और ब्रोमीन के समान हैं।

मुख्य बिंदु:

• मेंडेलीफ की आवर्त सारणी का मुख्य आधार परमाणु भार था।
• समान गुणों को प्राथमिकता देने के लिए उन्होंने कई जगहों पर परमाणु भार के क्रम की उपेक्षा की।
• आयोडीन और टेल्यूरियम इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि मेंडेलीफ परमाणु क्रमांक का उपयोग करते थे।
• यह मान लेना कि वे अपनी सारणी के नियमों पर पूरी तरह दृढ़ रहे।
• विसंगतियों के उदाहरण न दे पाना।

Exam Tips:

a) मेंडेलीफ के समय परमाणु क्रमांक ज्ञात नहीं था, इसलिए परमाणु भार मुख्य आधार था - यह स्पष्ट लिखें।
b) अपवाद के रूप में टेल्यूरियम और आयोडीन का उदाहरण अवश्य दें।
c) वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सीमा को उत्तर में दर्शाएं।

 

Question 3: मेंडेलीफ के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अंतर क्या है?

Answer:

मेंडेलीफ का आवर्त नियम कहता है कि तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु भार के आवर्त फलन होते हैं। दूसरी ओर, आधुनिक आवर्त नियम कहता है कि तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्त फलन होते हैं। मेंडेलीफ की सारणी परमाणु द्रव्यमान पर आधारित थी जिसमें कुछ विसंगतियां थीं, जबकि मोजले द्वारा प्रतिपादित आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक पर आधारित है जो तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को सीधे दर्शाती है और अधिक सटीक है।

मुख्य बिंदु:

• मेंडेलीफ का नियम परमाणु भार पर आधारित है।
• आधुनिक आवर्त नियम परमाणु क्रमांक पर आधारित है।
• आधुनिक नियम तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को बेहतर ढंग से स्पष्ट करता है।

आम गलतियाँ:

• दोनों नियमों में परमाणु भार और परमाणु क्रमांक की अदला-बदली करना।
• मौलिक अंतर को स्पष्ट रूप से न लिख पाना।
• वैज्ञानिकों के योगदान को न बताना।

Exam Tips:

a) परिभाषाओं को सटीक और अलग-अलग पैराग्राफ या बिंदुओं में लिखें।
b) 'परमाणु भार' बनाम 'परमाणु क्रमांक' शब्दों का स्पष्ट अंतर दर्शाएं।
c) यह एक अति महत्वपूर्ण प्रश्न है, इसे अच्छी तरह याद रखें।

 

Question 4: क्वांटम संख्याओं के आधार पर यह सिद्ध कीजिए कि आवर्त सारणी के छठे आवर्त में 32 तत्व होने चाहिए।

Answer:

तत्वों की आवर्त सारणी में, एक आवर्त सबसे बाहरी कोशों के लिए मुख्य क्वांटम संख्या (n) के मान को इंगित करता है। छठे आवर्त के लिए n = 6 है। n = 6 के लिए, अजीमुथल क्वांटम संख्या (l) के मान 0, 1, 2, 3, 4, 5 हो सकते हैं। आफबाऊ के सिद्धांत के अनुसार, इलेक्ट्रॉनों को उनकी बढ़ती ऊर्जाओं के क्रम में विभिन्न कक्षकों में जोड़ा जाता है। छठे आवर्त में 6s, 4f, 5d और 6p उपकोशों में इलेक्ट्रॉन भरे जाते हैं। इन उपकोशों में कुल 16 कक्षक होते हैं (1 + 7 + 5 + 3 = 16)। चूँकि प्रत्येक कक्षक में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं, इसलिए 16 कक्षक कुल 32 इलेक्ट्रॉनों को समाहित कर सकते हैं। अतः आवर्त सारणी के छठे आवर्त में 32 तत्व होने चाहिए।

मुख्य बिंदु:

• छठे आवर्त के लिए मुख्य क्वांटम संख्या n = 6 होती है।
• भरे जाने वाले उपकोश 6s, 4f, 5d और 6p हैं।
• कुल 16 कक्षकों में 32 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं, जिससे 32 तत्व बनते हैं।

आम गलतियाँ:

• उपकोशों के सही क्रम या उनकी संख्या को भूल जाना।
• कक्षकों की कुल संख्या की गणना में गलती करना।
• क्वांटम संख्याओं के नियमों का गलत प्रयोग करना।

Exam Tips:

a) चरणबद्ध तरीके से गणना दिखाएं (n का मान → उपकोश → कक्षक → इलेक्ट्रॉन)।
b) पाउली के अपवर्जन सिद्धांत और आफबाऊ नियम का संदर्भ दें।
c) गणितीय गणना स्पष्ट होनी चाहिए।

 

Question 5: आवर्त और वर्ग के पदों में यह बताइए कि Z = 14 कहाँ स्थित होगा?

Answer:

सिलिकॉन, जिसका परमाणु क्रमांक Z = 14 है, उसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p² होता है। इसका बाह्यतम कोश (मुख्य क्वांटम संख्या n) 3 है, इसलिए यह तीसरे आवर्त में स्थित है। इसके संयोजी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन (3s² 3p²) हैं, और यह एक p-ब्लॉक तत्व है। p-ब्लॉक के तत्वों के लिए वर्ग संख्या 12 + संयोजरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या होती है, या इसे 2 + 10 + 2 = 14वें समूह (वर्ग 14) के रूप में देखा जा सकता है। अतः Z = 14 वाला तत्व तीसरे आवर्त और 14वें वर्ग में स्थित है।

मुख्य बिंदु:

• Z = 14 सिलिकॉन तत्व है जिसका विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p² है।
• मुख्य क्वांटम संख्या 3 होने के कारण यह तीसरे आवर्त में है।
• संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के आधार पर यह वर्ग 14 में आता है।

आम गलतियाँ:

• इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखने में त्रुटि करना।
• आवर्त और वर्ग की पहचान करने में भ्रमित होना।
• ब्लॉक की पहचान गलत करना।

Exam Tips:

a) सबसे पहले दिए गए परमाणु क्रमांक का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखें।
b) अधिकतम n का मान आवर्त बताता है और अंतिम इलेक्ट्रॉन का प्रवेश ब्लॉक तय करता है।
c) p-ब्लॉक के लिए वर्ग की सही गणना का अभ्यास करें।

 

Question 6: उस तत्व का परमाणु क्रमांक लिखिए, जो आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त और 17वें वर्ग में स्थित होता है।

Answer:

तीसरे आवर्त का अर्थ है कि मुख्य क्वांटम संख्या n = 3 है और 17वां वर्ग यह दर्शाता है कि यह एक हैलोजन तत्व है जिसके बाह्यतम कोश में 7 संयोजी इलेक्ट्रॉन (3s² 3p⁵) हैं। पहले आवर्त में 2 तत्व, दूसरे आवर्त में 8 तत्व होते हैं। तीसरे आवर्त की शुरुआत Z = 11 (सोडियम) से होती है। तीसरे आवर्त के अंत में 18वें वर्ग का तत्व Z = 18 (आर्गन) होता है। चूँकि यह 17वें वर्ग में है, इसलिए आर्गन से ठीक पहले वाला तत्व इसका उत्तर होगा। अतः इस तत्व का परमाणु क्रमांक 17 है, जो क्लोरीन (Cl) है।

मुख्य बिंदु:

• तीसरा आवर्त Z = 11 से शुरू होकर Z = 18 पर समाप्त होता है।
• 17वां वर्ग हैलोजन परिवार को दर्शाता है।
• गणना करने पर परमाणु क्रमांक Z = 17 प्राप्त होता है।

आम गलतियाँ:

• आवर्त और वर्ग की स्थिति से परमाणु क्रमांक की गणना में गलती करना।
• क्लोरीन के स्थान को गलत समझना।
• इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

a) आवर्त सारणी के तत्वों की सामान्य स्थिति याद रखें।
b) विन्यास लिखकर भी इसकी पुष्टि की जा सकती है (1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁵)।
c) उत्तर में तत्व का नाम और प्रतीक (क्लोरीन, Cl) भी लिख सकते हैं।

 

Question 7: कौन से तत्व का नाम निम्नलिखित द्वारा दिया गया है?
(i) लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा
(ii) सी बोग समूह द्वारा

Answer:

आधुनिक आवर्त सारणी में कुछ भारी कृत्रिम तत्वों के नाम विशिष्ट अनुसंधान प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिकों के सम्मान में रखे गए हैं। (i) लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा खोजे गए और नाम दिए गए तत्वों में लॉरेन्सियम (Lr, परमाणु क्रमांक 103) और बर्कलेम (Bk, परमाणु क्रमांक 97) प्रमुख हैं। (ii) ग्लेन टी. सीबॉर्ग (C. Seaborg) और उनके सहयोगियों द्वारा खोजे गए तत्व का नाम उनके सम्मान में सीबोरगियम (Sg, परमाणु क्रमांक 106) रखा गया है।

मुख्य बिंदु:

• लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला ने लॉरेन्सियम (Lr) और बर्कलेम (Bk) जैसे तत्वों के नाम दिए।
• सीबॉर्ग समूह ने सीबोरगियम (Sg) तत्व की खोज की और नाम दिया।
• ये सभी अति-भारी और कृत्रिम (actinoids/transuranic) तत्व हैं।

आम गलतियाँ:

• प्रयोगशाला और वैज्ञानिक के नामों में संलयन या भ्रम होना।
• परमाणु क्रमांक या प्रतीकों को गलत लिखना।
• तत्वों के नाम याद न रख पाना।

Exam Tips:

a) वैज्ञानिकों और प्रयोगशालाओं के नाम से जुड़े तत्वों की सूची बनाएं।
b) तत्वों के प्रतीक (Symbol) सही रूप में लिखें।
c) यह सामान्य ज्ञान और आवर्त सारणी के इतिहास से जुड़ा तथ्यात्मक प्रश्न है।

 

Question 8: एक ही वर्ग में उपस्थित तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान क्यों होते हैं?

Answer:

तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या और विन्यास पर निर्भर करते हैं। एक ही समूह या वर्ग में मौजूद सभी तत्वों के बाह्यतम कोश में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। चूँकि रासायनिक अभिक्रियाओं में मुख्य रूप से संयोजी इलेक्ट्रॉन ही भाग लेते हैं, इसलिए एक ही समूह के तत्वों के रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं। इसके अलावा, उनके भौतिक गुण जैसे घनत्व, गलनांक और क्वथनांक में भी एक क्रमिक नियमितता पाई जाती है।

मुख्य बिंदु:

• एक ही वर्ग के सभी तत्वों के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
• रासायनिक गुण संयोजी इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करते हैं।
• संयम और समानता के कारण रासायनिक व्यवहार एक जैसा होता है।

आम गलतियाँ:

• कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या को समान मान लेना (जो कि भिन्न होती है)।
• केवल भौतिक गुणों को ही आधार बताना।
• संयोजकता की अवधारणा को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) 'संयोजी इलेक्ट्रॉन' (Valence Electrons) शब्द का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।
b) स्पष्ट करें कि वर्ग में नीचे जाने पर कोश बढ़ते हैं लेकिन संयोजी इलेक्ट्रॉन वही रहते हैं।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।

 

Question 9: 'परमाणु त्रिज्या' और 'आयनी त्रिज्या' से आप क्या समझते हैं?

Answer:

परमाणु त्रिज्या किसी परमाणु के आकार को मापती है। इसे नाभिक के केंद्र से उस बाह्यतम कोश की दूरी के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं। इसे धात्विक त्रिज्या या सहसंयोजक त्रिज्या के रूप में व्यक्त किया जाता है। दूसरी ओर, आयनी त्रिज्या किसी आयन (धनायन या ऋणयन) के आकार की माप है। जब कोई उदासीन परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाता है, तो उसका आकार घट जाता है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है; वहीं इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाने पर इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षित बल के कारण आकार बढ़ जाता है।

मुख्य बिंदु:

• परमाणु त्रिज्या उदासीन परमाणु के नाभिक से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन की दूरी है।
• आयनी त्रिज्या आयनों (धनायन/ऋणायन) के प्रभावी आकार को दर्शाती है।
• धनायन अपने जनक परमाणु से छोटे और ऋणायन बड़े होते हैं।

आम गलतियाँ:

• परमाणु त्रिज्या और आयनी त्रिज्या को एक ही मान लेना।
• धनायन और ऋणायन के आकार में अंतर के कारणों को गलत बताना।
• त्रिज्या मापने की विधियों (सहसंयोजक, धात्विक) का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) दोनों की परिभाषाएं अलग-अलग पैराग्राफ में स्पष्ट करें।
b) धनायन और ऋणायन के आकार में परिवर्तन का कारण अवश्य बताएं।
c) सही वैज्ञानिक शब्दावली (प्रभावी नाभिकीय आवेश, परिरक्षण प्रभाव) का प्रयोग करें।

 

Question 10: किसी वर्ग या आवर्त में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार परिवर्तित होती है? इस परिवर्तन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?

Answer:

किसी आवर्त में बाएं से दाएँ जाने पर आमतौर पर परमाणु त्रिज्या घटती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक आवर्त के भीतर, जैसे-जैसे हम बाएं से दाएँ जाते हैं, परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ नाभिकीय आवेश बढ़ता जाता है जबकि नए कोश नहीं जुड़ते। इससे प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है जो इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से खींचता है। इसके विपरीत, किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है क्योंकि प्रत्येक नए आवर्त के साथ एक नया मुख्य ऊर्जा कोश जुड़ जाता है, जिससे नाभिक और संयोजी इलेक्ट्रॉनों के बीच की दूरी बढ़ जाती है और परिरक्षण प्रभाव भी बढ़ जाता है।

मुख्य बिंदु:

• आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है (नाभिकीय आवेश बढ़ने के कारण)।
• वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है (कोशों की संख्या बढ़ने के कारण)।
• प्रभावी नाभिकीय आवेश और परिरक्षण प्रभाव इस प्रवृत्ति के मुख्य कारक हैं।

आम गलतियाँ:

• आवर्त और वर्ग केTrends को आपस में मिला देना।
• कोशों की संख्या और नाभिकीय आवेश के प्रभावों की उल्टी व्याख्या करना।
• अपवादों को मुख्य नियम मान लेना।

Exam Tips:

a) आवर्त और वर्ग के परिवर्तनों को अलग-अलग शीर्षकों के तहत समझाएं।
b) कारण में 'प्रभावी नाभिकीय आवेश' और 'कोशों की संख्या' शब्दों का प्रयोग करें।
c) आरेखीय या प्रतीकात्मक रूप (घटती/बढ़ती) से भी स्पष्ट कर सकते हैं।

 

Question 11: समइलेक्ट्रॉनी स्पीशीज़ से आप क्या समझते हैं? एक ऐसी स्पीशीज़ का नाम लिखिए, जो निम्नलिखित परमाणुओँ या आयनों के साथ समइलेक्ट्रॉनी होगी-
(i) F⁻
(ii) Ar
(iii) Mg²⁺
(iv) Rb⁺

Answer:

वे परमाणु, आयन या स्पीशीज़ जिनमें इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या समान होती है, समइलेक्ट्रॉनी (Isoelectronic) स्पीशीज़ कहलाती हैं। इनके नाभिकीय आवेश (परमाणु क्रमांक Z) भिन्न होते हैं जिसके कारण इनके आकार और गुण अलग होते हैं। (i) F⁻ आयन में 9 + 1 = 10 इलेक्ट्रॉन हैं, इसके साथ समइलेक्ट्रॉनी स्पीशीज़ O²⁻, Na⁺ आदि हैं। (ii) Ar में 18 इलेक्ट्रॉन हैं, इसके साथ समइलेक्ट्रॉनी स्पीशीज़ Cl⁻, K⁺, Ca²⁺ आदि हैं। (iii) Mg²⁺ आयन में 12 - 2 = 10 इलेक्ट्रॉन हैं, इसके साथ F⁻, Ne आदि हैं। (iv) Rb⁺ आयन में 37 - 1 = 36 इलेक्ट्रॉन हैं, इसके साथ Kr, Sr²⁺ आदि हैं।

मुख्य बिंदु:

• समइलेक्ट्रॉनी स्पीशीज़ वे हैं जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
• इलेक्ट्रॉनों की समान संख्या होने पर भी नाभिकीय आवेश (Z) भिन्न होता है।
• उदाहरण: F⁻, Ne और Na⁺ सभी में 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

आम गलतियाँ:

• प्रोटॉन या न्यूट्रॉन की संख्या को समान मान लेना।
• ऋणायनों और धनायनों में इलेक्ट्रॉनों की गणना करते समय आवेश (+/-) भूल जाना।
• गलत स्पीशीज़ का उदाहरण देना।

Exam Tips:

a) समइलेक्ट्रॉनी की परिभाषा स्पष्ट रूप से लिखें (समान इलेक्ट्रॉन)।
b) प्रत्येक आयन के इलेक्ट्रॉनों की गणना (जैसे Z - आवेश या Z + आवेश) करके दिखाएं।
c) एक से अधिक उदाहरण याद रखें ताकि विकल्प चुनने में आसानी हो।

 

Question 12: निम्नलिखित स्पीशीज़ पर विचार कीजिए- N³⁻, O²⁻, F⁻, Na⁺, Mg²⁺ और Al³⁺
(क) इनमें क्या समानता है?
(ख) इन्हें आयनी त्रिज्या के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

Answer:

(क) दी गई सभी स्पीशीज़ (आयन) में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान (10 इलेक्ट्रॉन) है, इसलिए ये सभी समइलेक्ट्रॉनी (Isoelectronic) प्रजातियाँ हैं। (ख) समइलेक्ट्रॉनी स्पीशीज़ में, जैसे-जैसे परमाणु क्रमांक (नाभिकीय आवेश Z) बढ़ता है, नाभिक का इलेक्ट्रॉनों पर आकर्षण बढ़ता है जिससे आकार (आयनी त्रिज्या) घटता है। दिए गए आयनों का परमाणु क्रमांक इस प्रकार है: N³⁻ (7), O²⁻ (8), F⁻ (9), Na⁺ (11), Mg²⁺ (12), Al³⁺ (13)। अतः आयनी त्रिज्या का बढ़ता हुआ क्रम (सबसे छोटा पहले) होगा: Al³⁺ < Mg²⁺ < Na⁺ < F⁻ < O²⁻ < N³⁻।

मुख्य बिंदु:

• दी गई सभी स्पीशीज़ समइलेक्ट्रॉनी हैं क्योंकि सबमें 10 इलेक्ट्रॉन हैं।
• नाभिकीय आवेश (Z) बढ़ने पर आयनी त्रिज्या घटती है।
• ऋणायनों की त्रिज्या सबसे बड़ी और उच्च धनायनों की सबसे छोटी होती है।

आम गलतियाँ:

• बढ़ते क्रम (Increasing order) को घटते क्रम में लिख देना।
• परमाणु क्रमांक और आकार के संबंध को उल्टा समझ लेना।
• आवेश के प्रभाव की सही गणना न करना।

Exam Tips:

a) पहले सभी के प्रोटॉन (Z) और इलेक्ट्रॉन की संख्या लिखकर दिखाएं।
b) नियम याद रखें: अधिक धन आवेश = छोटा आकार, अधिक ऋण आवेश = बड़ा आकार।
c) क्रम लिखते समय (<) चिन्ह का सही प्रयोग करें।

 

Question 13: धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे क्यों होते हैं और ऋणायनों की त्रिज्या उनके जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।

Answer:

एक धनायन में अपने मूल परमाणु की तुलना में कम संख्या में इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि इसका नाभिकीय आवेश (प्रोटॉनों की संख्या) समान रहता है। नतीजतन, नाभिक का आकर्षण बल मूल परमाणु की तुलना में धनायन में अधिक हो जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉन नाभिक के अधिक निकट खिंच आते हैं और धनायन आकार में छोटा हो जाता है। इसके विपरीत, एक ऋणायन में अपने मूल परमाणु की तुलना में एक या अधिक इलेक्ट्रॉन अधिक होते हैं। इससे इलेक्ट्रॉनों के बीच पारस्परिक प्रतिकَرर्षण बढ़ जाता है और प्रभावी नाभिकीय प्रभाव प्रति इलेक्ट्रॉन कम हो जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉन दूर हो जाते हैं और ऋणायन अपने मूल परमाणु की तुलना में आकार में बड़ा हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• धनायन में इलेक्ट्रॉन कम और प्रोटॉन समान होने से आकर्षण बढ़ता है, जिससे आकार घटता है।
• ऋणायन में इलेक्ट्रॉन बढ़ने से प्रतिकर्षण बढ़ता है, जिससे आकार बढ़ता है।
• नाभिकीय आवेश और इलेक्ट्रॉनों के बीच संतुलन इस परिवर्तन का कारण है।

आम गलतियाँ:

• धनायन और ऋणायन के आकार के कारणों को आपस में उलटा लिख देना।
• प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• प्रतिकर्षण और आकर्षण बलों का गलत उल्लेख करना।

Exam Tips:

a) धनायन के लिए 'अधिक आकर्षण' और ऋणायन के लिए 'अधिक प्रतिकर्षण' मुख्य बिंदु बनाएं।
b) दोनों को अलग-अलग पैराग्राफ में स्पष्ट रूप से समझाएं।
c) यह बहुत ही बार पूछा जाने वाला वैचारिक प्रश्न है।

 

Question 14: आयनन एंथैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी को परिभाषित करने में 'विलगित गैसीय परमाणु' और 'आदर्श अवस्था' पदों का क्या महत्व है?

Answer:

आयनन एंथैल्पी वह ऊर्जा है जो किसी पृथक गैसीय परमाणु से उसकी मूल अवस्था में एक इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक होती है। यद्यपि परमाणु गैसीय अवस्था में व्यापक रूप से अलग-अलग होते हैं, परमाणुओं के बीच कुछ मात्रा में आकर्षण बल होते हैं। आयनन एंथैल्पी का निर्धारण करने के लिए, एक परमाणु को अलग करना असंभव है, लेकिन दबाव को कम करके आकर्षण बल को और कम किया जा सकता है। इस कारण से, आयनन एंथैल्पी की परिभाषा में 'पृथक गैसीय परमाणु' शब्द का प्रयोग किया जाता है। एक परमाणु की जमीनी अवस्था एक परमाणु की सबसे स्थिर अवस्था को संदर्भित करती है। यदि कोई विलगित गैसीय परमाणु अपनी मूल अवस्था में है, तो उससे से एक इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए कम मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी। इसलिए, तुलनात्मक उद्देश्यों के लिए, एक 'पृथक गैसीय परमाणु' और इसकी 'आधार अवस्था' के लिए आयनन एंथैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी का निर्धारण किया जाना चाहिए।

मुख्य बिंदु:

• 'विलगित गैसीय परमाणु' शब्द परमाणुओं के बीच अंतर-परमाणु आकर्षण बलों को समाप्त करने के लिए आवश्यक है।
• 'आदर्श अवस्था' या 'मूल अवस्था' न्यूनतम ऊर्जा और अधिकतम स्थिरता को दर्शाती है।
• इन शर्तों के बिना ऊर्जा के मानों की सटीक तुलना संभव नहीं है।

आम गलतियाँ:

• गैसीय अवस्था और मूल अवस्था के महत्व को नजरअंदाज करना।
• अंतर-आणविक बलों के प्रभाव को न समझना।
• परिभाषाओं को अधूरा लिखना।

Exam Tips:

a) परिभाषा लिखते समय 'विलगित गैसीय परमाणु' और 'मूल अवस्था' शब्दों को विशेष रूप से रेखांकित करें।
b) कारण स्पष्ट करें कि ठोस या द्रव अवस्था में पड़ोसी परमाणुओं का प्रभाव ऊर्जा मान को बदल देता है।
c) उत्तर वैज्ञानिक रूप से सटीक होना चाहिए।

 

Question 15: हाइड्रोजन परमाणु की आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा -2.18 × 10⁻¹⁸ J होती है। परमाणु हाइड्रोजन की आयनन एंथैल्पी kJ mol⁻¹ के पदों में कीजिए।
संकेत: उत्तर प्राप्त करने के लिए मोल अवधारणा के विचार को लागू करें।

Answer:

हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था में एक इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा = -2.18 × 10⁻¹⁸ J है।
अतः उस इलेक्ट्रॉन को हाइड्रोजन परमाणु की आद्य अवस्था से हटाने के लिए आवश्यक ऊर्जा = 2.18 × 10⁻¹⁸ J है।
हाइड्रोजन परमाणु की आयनन एंथैल्पी प्रति मोल निकालने के लिए, इसे आवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10²³) से गुणा किया जाता है:
आयनन एंथैल्पी प्रति मोल = 2.18 × 10⁻¹⁸ J × 6.022 × 10²³ mol⁻¹
= 13.13 × 10⁵ J mol⁻¹
= 1313 kJ mol⁻¹ (या 1.31 × 10⁶ J mol⁻¹)

मुख्य बिंदु:

• एक परमाणु से इलेक्ट्रॉन निकालने की ऊर्जा को एक मोल परमाणुओं के लिए परिवर्तित किया जाता है।
• आवोगाद्रो स्थिरांक (6.022 × 10²³) का प्रयोग किया जाता है।
• जूल को किलोसूल (kJ) में बदलने के लिए 1000 से भाग दिया जाता है।

आम गलतियाँ:

• चिह्न (+/-) की गलती करना या मोलर मान से गुणा करना भूल जाना।
• इकाई (J से kJ) बदलते समय घात (power) में गलती करना।
• आवोगाद्रो संख्या का गलत मान रखना।

Exam Tips:

a) हर चरण को स्पष्ट रूप से लिखें - पहले एक परमाणु की ऊर्जा, फिर एक मोल के लिए गणना।
b) अंत में इकाई (kJ mol⁻¹) लिखना न भूलें।
c) गणितीय गणना की सावधानीपूर्वक जांच करें।

 

Question 16: द्वितीय आवर्त के तत्वों में वास्तविक आयनन एंथैल्पी का क्रम निम्न होता है: Li < B < Be < C < O < N < F < Ne.
व्याख्या कीजिए कि: (i) Be की ΔᵢH, B से अधिक क्यों है? (ii) O की ΔᵢH, N और F से कम क्यों है?

Answer:

(i) बेरिलियम (Be, Z=4) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² है, जबकि बोरॉन (B, Z=5) का 1s² 2s² 2p¹ है। Be में इलेक्ट्रॉन पूरी तरह भरे हुए 2s-कक्षक से निकाला जाता है जो नाभिक से अधिक मजबूती से बंधा होता है, जबकि बोरॉन में इलेक्ट्रॉन अपेक्षाकृत दूर और कम प्रभावी 2p-कक्षक से निकलता है। पूर्णतः भरे हुए कक्षकों का स्थायित्व अधिक होने के कारण Be से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
(ii) नाइट्रोजन (N, Z=7) का विन्यास 1s² 2s² 2p³ है, जिसमें 2p-कक्षक अर्ध-पूरित (half-filled) है, जो अत्यधिक स्थिर होता है। ऑक्सीजन (O, Z=8) का विन्यास 1s² 2s² 2p⁴ है। ऑक्सीजन में एक 2p-कक्षक में युग्मन (pairing) होने के कारण इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ जाता है, जिससे ऑक्सीजन से इलेक्ट्रॉन निकालना आसान हो जाता है, अतः इसकी आयनन एंथैल्पी नाइट्रोजन से कम होती है। फ्लोरीन (F) का प्रभावी नाभिकीय आवेश ऑक्सीजन से अधिक होने के कारण उसकी आयनन एंथैल्पी ऑक्सीजन से अधिक होती है।

मुख्य बिंदु:

• Be की आयनन एंथैल्पी B से अधिक है क्योंकि Be में पूर्णतः भरा हुआ 2s-कक्षक होता है।
• N की आयनन एंथैल्पी O से अधिक है क्योंकि N में 2p-कक्षक अर्ध-पूरित (stable half-filled) होता है।
• अर्ध-पूरित और पूर्णतः भरे कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व इस अपवाद का मुख्य कारण है।

आम गलतियाँ:

• इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखे बिना उत्तर देना।
• अर्ध-पूरित और पूर्णतः भरे कक्षकों के स्थायित्व के नियम को भूल जाना।
• प्रभावी नाभिकीय आवेश के प्रभाव को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) दोनों तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखकर उनकी तुलना करें।
b) 'पूर्णतः भरा कक्षक' (fully-filled) और 'अर्ध-पूरित कक्षक' (half-filled) शब्दों का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) यह आवर्त सारणी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तार्किक प्रश्न है।

 

Question 17: आप इस तथ्य की व्याख्या कैसे करेंगे कि सोडियम की प्रथम आयनन एंथैल्पी मैग्नीशियम की तुलना में कम है लेकिन इसकी द्वितीय आयनन एंथैल्पी मैग्नीशियम की तुलना में अधिक है?

Answer:

सोडियम (Na) की प्रथम आयनन एंथैल्पी मैग्नीशियम (Mg) से कम होती है क्योंकि सोडियम का आकार बड़ा होता है और इसका प्रभावी नाभिकीय आवेश मैग्नीशियम से कम होता है, जिससे सोडियम से पहला इलेक्ट्रॉन आसानी से निकल जाता है। हालांकि, एक इलेक्ट्रॉन खोने के बाद सोडियम (Na⁺) एक स्थिर उत्कृष्ट गैस (नियोन जैसा) विन्यास प्राप्त कर लेता है। इसके विपरीत, मैग्नीशियम (Mg⁺) एक इलेक्ट्रॉन खोने के बाद भी अपने 3s-कक्षक में एक इलेक्ट्रॉन रखता है जिसे स्थायी उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए अभी एक और इलेक्ट्रॉन खोना पड़ता है। परिणामस्वरूप, सोडियम के मामले में दूसरे इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा मैग्नीशियम के दूसरे इलेक्ट्रॉन को निकालने की तुलना में बहुत अधिक होती है।

मुख्य बिंदु:

• प्रथम आयनन एंथैल्पी सोडियम की कम होती है क्योंकि आकार बड़ा और नाभिकीय आवेश कम होता है।
• एक इलेक्ट्रॉन निकालने के बाद सोडियम उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त कर लेता है (अत्यंत स्थायी)।
• मैग्नीशियम को दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा चाहिए क्योंकि वह अभी अर्ध-स्थायी स्थिति में है।

आम गलतियाँ:

• प्रथम और द्वितीय आयनन एंथैल्पी के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• उत्कृष्ट गैस विन्यास (Noble gas configuration) की स्थिरता के महत्व को न समझना।
• आकार और नाभिकीय आवेश की तुलना में गलती करना।

Exam Tips:

a) पहले दोनों तत्वों के प्रथम आयनन का कारण (आकार और आवेश) बताएं।
b) फिर Na⁺ और Mg⁺ के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखकर द्वितीय आयनन का कारण समझाएं।
c) उत्तर को चरणों में विभाजित करके लिखें।

 

Question 18: वे कौन से विभिन्न कारक हैं जिनके कारण मुख्य वर्ग के तत्वों की आयनन एंथैल्पी एक समूह में नीचे जाने पर घट जाती है?

Answer:

मुख्य समूह तत्वों की आयनन एंथैल्पी के समूह में नीचे जाने पर घटने के लिए उत्तरदायी मुख्य कारक निम्नलिखित हैं: (i) तत्वों के परमाणु आकार में वृद्धि: जैसे-जैसे हम एक समूह में नीचे जाते हैं, नए कोश जुड़ने के कारण कक्षाओं की संख्या बढ़ती जाती है, जिससे परमाणु आकार धीरे-धीरे बढ़ता है। नाभिक से संयोजी इलेक्ट्रॉनों की दूरी बढ़ने के कारण आकर्षण बल कमजोर हो जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉन को आसानी से हटाया जा सकता है। (ii) परिरक्षण प्रभाव में वृद्धि: समूह में नीचे जाने पर आंतरिक कोर इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है, जो नाभिक के आवेश से संयोजी इलेक्ट्रॉनों को आवरण या परिरक्षण (shielding) प्रदान करते हैं। इससे वैलेंस इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण और कम हो जाता है, अतः आयनन ऊर्जा घट जाती है।

मुख्य बिंदु:

• परमाणु आकार में वृद्धि होने से नाभिक की दूरी बढ़ती है।
• आंतरिक इलेक्ट्रॉनों द्वारा परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect) में वृद्धि होती है।
• दोनों कारकों के मिले-जुले प्रभाव से आयनन एंथैल्पी घटती है।

आम गलतियाँ:

• केवल आकार को कारण बताना और परिरक्षण प्रभाव को भूल जाना।
• समूह में ऊपर जाने और नीचे जाने के प्रभावों को आपस में उलटा करना।
• स्पष्ट बिंदुओं में उत्तर न लिखना।

Exam Tips:

a) दोनों कारकों को उप-शीर्षक (i) और (ii) के रूप में अलग-अलग समझाएं।
b) 'परिरक्षण प्रभाव' और 'परमाणु आकार' प्रमुख शब्दावली का प्रयोग करें।
c) यह आवर्त सारणी के आवर्ती गुणों का एक मौलिक प्रश्न है।

 

Question 19: वर्ग 13 के तत्वों के प्रथम आयनन एंथैल्पी के मान (kJ mol⁻¹) में इस प्रकार हैं:
B: 801, Al: 577, Ga: 579, In: 558, Tl: 589
आप इस विचलन को सामान्य प्रवृत्ति से कैसे समझाएंगे?

Answer:

सामान्यतः समूह में नीचे जाने पर परमाणु आकार और परिरक्षण में वृद्धि के कारण आयनन एंथैल्पी घटनी चाहिए, जिसके अनुसार Al की तुलना में Ga की मान कम होना चाहिए। परन्तु वर्ग 13 में Al (577) से Ga (579) की आयनन एंथैल्पी अधिक होती है। इसका कारण यह है कि गैलियम (Ga) से पहले d-उपकोश के तत्व आते हैं। d-इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव बहुत प्रभावी नहीं होता है, जिसके परिणामस्वरूप Ga के संयोजी इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है और आकार छोटा हो जाता है। इसी प्रकार, Tl (थैलियम) में f और d कक्षकों के कम परिरक्षण प्रभाव के कारण इसकी आयनन एंथैल्पी इंडियम (In) से अधिक हो जाती है।

मुख्य बिंदु:

• Ga की आयनन एंथैल्पी Al से अधिक होती है, जो सामान्य प्रवृत्ति के विपरीत है।
• d और f कक्षकों के इलेक्ट्रॉनों का दुर्बल परिरक्षण प्रभाव इसका मुख्य कारण है।
• प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने से इलेक्ट्रॉन अधिक मजबूती से बंध जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• इस विचलन को नजरअंदाज कर देना और केवल घटती प्रवृत्ति मानना।
• d-ब्लॉक और f-ब्लॉक के संक्रमण प्रभावों को स्पष्ट न कर पाना।
• आंकड़ों के अंतर के कारणों को गलत बताना।

Exam Tips:

a) आंकड़ों के असामान्य व्यवहार (विशेषकर Al और Ga के बीच) को स्पष्ट करें।
b) 'दुर्बल परिरक्षण प्रभाव' (Poor shielding effect) शब्द का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।
c) यह विश्लेषणात्मक प्रश्न परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 20: तत्वों के निम्नलिखित युग्मों में किस तत्व की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी अधिक ऋणात्मक होगी?
(i) O या F
(ii) F या Cl

Answer:

(i) आवर्त सारणी के एक ही आवर्त में ऑक्सीजन (O) और फ्लोरीन (F) उपस्थित हैं। एक F परमाणु में O से एक प्रोटॉन और एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन अधिक होता है और जैसे ही एक इलेक्ट्रॉन को एक ही कोश में जोड़ा जाता है, F का परमाणु आकार O की तुलना में छोटा होता है। चूँकि F में O से एक प्रोटॉन अधिक होता है, इसलिए नाभिक आने वाले इलेक्ट्रॉन को अधिक प्रबलता से आकर्षित करता है। अतः F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी O की अपेक्षा अधिक ऋणात्मक होती है।
(ii) फ्लोरीन (F) और क्लोरीन (Cl) दोनों एक ही समूह (हالوجन) से संबंधित हैं। समूह में नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी आमतौर पर कम ऋणात्मक हो जाती है। हालांकि, F का आकार Cl की तुलना में बहुत छोटा होता है। F में, जोड़े जाने वाले इलेक्ट्रॉन का घनत्व n = 2 स्तर में जोड़ा जाता है, लेकिन Cl में, इलेक्ट्रॉन का क्वांटम स्तर n = 3 में जोड़ा जाता है। इसलिए, Cl में कम इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण होते हैं और एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को आसानी से समाहित किया जा सकता है। अतः Cl की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी F की अपेक्षा अधिक ऋणात्मक होती है।

मुख्य बिंदु:

• O और F में, F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश अधिक होता है।
• F और Cl में, Cl की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है क्योंकि F का आकार बहुत छोटा होने के कारण उच्च इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण होता है।
• फ्लोरीन का अपवाद हैलोजन समूह में बहुत महत्वपूर्ण है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि समूह में नीचे जाने पर हमेशा इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है।
• फ्लोरीन के छोटे आकार और प्रतिकर्षण के प्रभाव को भूल जाना।
• O और F के मानों में अंतर को न समझ पाना।

Exam Tips:

a) दोनों युग्मों के उत्तर अलग-अलग बिंदुओं (i) और (ii) में लिखें।
b) F और Cl के केस में 'आकार की अधिकता' और 'इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण' का तर्क दें।
c) इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी के अपवादों को अच्छे से तैयार करें।

 

Question 21: आप क्या सोचते हैं कि O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी के समान धनात्मक, अधिक ऋणात्मक या कम ऋणात्मक होगी? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

Answer:

जब ऑक्सीजन परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन जोड़कर O⁻ आयन बनाया जाता है, तो ऊर्जा मुक्त होती है, अतः O की प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी ऋणात्मक होती है:
O(g) + e⁻ → O⁻(g) [ऋणात्मक]
दूसरी ओर, जब O²⁻ आयन बनाने के लिए O⁻ आयन में एक और इलेक्ट्रॉन जोड़ा जाता है, तो मजबूत इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण को दूर करने के लिए ऊर्जा को जोड़ना पड़ता है (ऊर्जा देनी पड़ती है)। अतः O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी धनात्मक होती है:
O⁻(g) + e⁻ → O²⁻(g) [धनात्मक]

मुख्य बिंदु:

• प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी ऋणात्मक होती है क्योंकि ऊर्जा निकलती है।
• द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी धनात्मक होती है क्योंकि ऋणावेशित आयन में दूसरा इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर प्रतिकर्षण होता है।
• प्रतिकर्षण बल को पार करने के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है।

आम गलतियाँ:

• द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि को भी ऋणात्मक मान लेना।
• O⁻ और आने वाले इलेक्ट्रॉन के बीच के प्रतिकर्षण बल को नजरअंदाज करना।
• रासायनिक समीकरण सही प्रकार से न लिखना।

Exam Tips:

a) दोनों चरणों के लिए रासायनिक समीकरण (Equations) अवश्य लिखें।
b) 'प्रतिकर्षण' (Repulsion) शब्द को स्पष्ट रूप से समझाएं।
c) यह एक वैचारिक और महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 

Question 22: इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी और इलेक्ट्रॉन ऋणकता में क्या मूल अंतर क्या है?

Answer:

इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी किसी विलगित गैसीय परमाणु द्वारा एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को स्वीकार करने की प्रवृत्ति या माप है, जिसमें ऊर्जा का परिवर्तन होता है (यह ऊर्जा निकल भी सकती है और दी भी जा सकती है)। इसके विपरीत, विद्युत ऋणता (Electronegativity) किसी रासायनिक यौगिक में एक परमाणु द्वारा सहसंयोजक बंध के साझा किए गए इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता या प्रवृत्ति का माप है। इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी एक एकल पृथक परमाणु का गुण है, जबकि विद्युत ऋणता बंधित अवस्था में परमाणु से संबंधित होती है।

मुख्य बिंदु:

• इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी गैसीय परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी है।
• विद्युत ऋणता सहसंयोजक बंध में इलेक्ट्रॉन युग्म को आकर्षित करने की क्षमता है।
• इलेक्ट्रॉन लब्धि एक ऊर्जा का माप है, जबकि विद्युत ऋणता केवल एक आपेक्षिक प्रवृत्ति (tendency) है।

आम गलतियाँ:

• दोनों पदों को एक ही मान लेना।
• ऊर्जा परिवर्तन और आकर्षण क्षमता के अंतर को स्पष्ट न करना।
• विलगित परमाणु और बंधित परमाणु की स्थिति में अंतर न बताना।

Exam Tips:

a) दोनों की परिभाषा और प्रकृति का अंतर एक स्पष्ट तुलनात्मक भाषा में लिखें।
b) उदाहरण के साथ स्पष्ट करें कि एक ऊर्जा है और दूसरी प्रवृत्ति।
c) संक्षिप्त और सटीक उत्तर दें।

 

Question 23: सभी नाइट्रोजन यौगिकों में N की विद्युत ऋणता पावलिंग पैमाने पर 3.0 है। आप इस कथन पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देंगे?

Answer:

किसी तत्व की विद्युत ऋणता एक परिवर्तनशील गुण है। यह विभिन्न यौगिकों में भिन्न होती है। इसलिए, यह कहना कि पावलिंग पैमाने पर N की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी सभी नाइट्रोजन यौगिकों में 3.0 है, गलत है। N की विद्युत ऋणता NH₃, NO₂ आदि विभिन्न यौगिकों में भिन्न होती है क्योंकि परमाणु की संकरण अवस्था, उस पर जुड़ा अन्य समूह और उसका ऑक्सीकरण अवस्था बदलती रहती है, जिससे उसकी इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने की क्षमता भी बदल जाती है।

मुख्य बिंदु:

• विद्युत ऋणता कोई स्थिर मान नहीं है, यह यौगिक के अनुसार बदलती है।
• पावलिंग पैमाना केवल एक औसत या आपेक्षिक मान देता है।
• संकरण और जुड़े समूहों का प्रभाव विद्युत ऋणता पर पड़ता है।

आम गलतियाँ:

• विद्युत ऋणता को एक निश्चित और अपरिवर्तनीय स्थिरांक मान लेना।
• यौगिकों की प्रकृति के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
• कथन को पूरी तरह सही मान लेना।

Exam Tips:

a) स्पष्ट रूप से बताएं कि विद्युत ऋणता एक 'नियत मान' नहीं है।
b) यौगिक बदलने पर इसके बदलने का कारण (जैसे संकरण) बताएं।
c) वैज्ञानिक रूप से सटीक प्रतिक्रिया दें।

 

Question 24: उस सिद्धांत का वर्णन कीजिए, जो परमाणु की त्रिज्या से संबंधित होता है-
(i) जब वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है।
(ii) जब वह इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।

Answer:

(i) जब कोई परमाणु एक इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है, तो ऋणायन बनता है। इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन प्रोटॉनों की संख्या (नाभिकीय आवेश) समान रहती है। इससे इलेक्ट्रॉनों के बीच पारस्परिक प्रतिकर्षण बढ़ जाता है और प्रभावी नाभिकीय प्रभाव प्रति इलेक्ट्रॉन कम हो जाता है, जिससे आकार बढ़ जाता है।
(ii) जब कोई परमाणु एक इलेक्ट्रॉन खोता है, तो धनायन बनता है। इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनों की संख्या घट जाती है जबकि प्रोटॉनों की संख्या समान रहती है। इससे नाभिक का शेष इलेक्ट्रॉनों पर आकर्षण बढ़ जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉन नाभिक के पास खिंच आते हैं और परमाणु की त्रिज्या घट जाती है।

मुख्य बिंदु:

• इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने पर प्रतिकर्षण बढ़ने से आकार बढ़ता है (ऋणायन)।
• इलेक्ट्रॉन त्यागने पर आकर्षण बढ़ने से आकार घटता है (धनायन)।
• प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन का अनुपात आकार निर्धारण का मुख्य सिद्धांत है।

आम गलतियाँ:

• दोनों स्थितियों में आकर्षण और प्रतिकर्षण के नियमों को मिला देना।
• आकार में परिवर्तन के कारणों को स्पष्ट रूप से न लिखना।
• (i) और (ii) भागों के उत्तरों को आपस में उलटना।

Exam Tips:

a) दोनों भागों को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट रूप से समझाएं।
b) 'प्रतिकर्षण' (Repulsion) और 'आकर्षण' (Attraction) मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।
c) यह बहुत ही सामान्य और महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न है।

 

Question 25: किसी तत्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एंथैल्पी समान होगी या भिन्न? आप क्या मानते हैं? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

Answer:

किसी तत्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एंथैल्पी लगभग समान होनी चाहिए। समस्थानिक वे परमाणु होते हैं जिनके परमाणु क्रमांक (प्रोटॉनों की संख्या और इलेक्ट्रॉनों की संख्या) समान होते हैं, लेकिन द्रव्यमान संख्या (न्यूट्रॉनों की संख्या) भिन्न होती है। चूँकि किसी परमाणु की आयनन एंथैल्पी उसके इलेक्ट्रॉनों की संख्या, आकार और प्रभावी नाभिकीय आवेश पर निर्भर करती है, और समस्थानिकों में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन समान होते हैं, इसलिए उनकी रासायनिक और आयनन संबंधी विशेषताएं लगभग एक समान होती हैं।

मुख्य बिंदु:

• समस्थानिकों के परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन) समान होते हैं।
• आयनन एंथैल्पी इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था और नाभिकीय आवेश पर निर्भर करती है।
• न्यूट्रॉनों के अंतर का इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा पर नगण्य प्रभाव पड़ता है, अतः मान समान होते हैं।

आम गलतियाँ:

• द्रव्यमान संख्या भिन्न होने के कारण आयनन एंथैल्पी को भी भिन्न मान लेना।
• समस्थानिकों की परिभाषा में इलेक्ट्रॉनों की भूमिका को न समझना।
• गलत निष्कर्ष निकालना।

Exam Tips:

a) समस्थानिक की परिभाषा (समान परमाणु क्रमांक, भिन्न द्रव्यमान) से उत्तर शुरू करें।
b) स्पष्ट करें कि रासायनिक गुण मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करते हैं, न्यूट्रॉनों पर नहीं।
c) उत्तर को संक्षिप्त और तार्किक रखें।

 

Question 26: धातु और अधातु में मुख्य अंतर क्या है?

Answer:

धातु और अधातु के भौतिक और रासायनिक गुणों में निम्नलिखित मुख्य अंतर हैं: धातुएँ आसानी से इलेक्ट्रॉन त्याग सकती हैं (कम आयनन एंथैल्पी), विद्युत और ऊष्मा की सुचालक होती हैं, इनकी प्रकृति क्षारीय होती है और ये आमतौर पर धनायन बनाती हैं। इसके विपरीत, अधातुएँ आसानी से इलेक्ट्रॉन नहीं त्यागतीं बल्कि इलेक्ट्रॉन प्राप्त करती हैं (उच्च इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी), विद्युत और ऊष्मा की कुचालक होती हैं (ग्रेफाइट को छोड़कर), इनकी प्रकृति अम्लीय या उदासीन होती है और ये आमतौर पर ऋणायन या सहसंयोजक यौगिक बनाती हैं।

मुख्य बिंदु:

• धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं और उनकी आयनन एंथैल्पी कम होती है।
• अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती हैं और उनकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी उच्च होती है।
• धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय और अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल भौतिक गुणों (जैसे चमक या चालकता) तक सीमित रहना और रासायनिक गुणों को छोड़ना।
• आयनन एंथैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि के अंतर को गलत बताना।
• ऑक्साइड की प्रकृति में भ्रम होना।

Exam Tips:

a) अंतर को बिंदुओं के रूप में लिखें ताकि स्पष्टता बनी रहे।
b) इलेक्ट्रॉन त्यागने/ग्रहण करने और ऑक्साइड की प्रकृति का उल्लेख अवश्य करें।
c) यह बुनियादी और महत्वपूर्ण रासायनिक अवधारणा है।

 

Question 27: आवर्त सारणी का उपयोग करते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) उस तत्व का नाम बताइए, जिसके बाह्य उप-कोश में पाँच इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(ख) उस तत्व का नाम बताइए, जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को त्यागने की हो।
(ग) उस तत्व का नाम बताइए, जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करने की हो।
(घ) उस वर्ग का नाम बताइए, जिसमें सामान्य ताप पर धातु, अधातु, द्रव और गैस उपस्थित हैं।

Answer:

(क) बाह्य उपकोश में पाँच इलेक्ट्रॉन होने का अर्थ है कि उसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns² np³ है, जो नाइट्रोजन परिवार (वर्ग 15) के तत्वों (जैसे N, P, As, Sb, Bi) का लक्षण है।
(ख) दो संयोजी इलेक्ट्रॉन वाले तत्व (जैसे Mg, Ca, Sr, Ba) आसानी से दो इलेक्ट्रॉन त्यागकर स्थिर उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त कर सकते हैं, ये क्षारीय मृदा धातुएँ (वर्ग 2) हैं।
(ग) ऑक्सीजन परिवार (वर्ग 16) के तत्वों को अपना अष्टक पूरा करने के लिए दो इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करने की प्रवृत्ति होती है।
(घ) वर्ग 17 (हैलोजन समूह) में कमरे के ताप पर फ्लोरीन और क्लोरीन गैस हैं, ब्रोमीन द्रव है, और आयोडीन तथा एस्टाटीन ठोस धातु/अधातु के रूप में उपस्थित हैं।

मुख्य बिंदु:

• ns² np³ विन्यास वाले तत्व वर्ग 15 के होते हैं (5 संयोजी इलेक्ट्रॉन)।
• दो इलेक्ट्रॉन त्यागने वाले तत्व वर्ग 2 (क्षारीय मृदा धातु) के होते हैं।
• वर्ग 17 (हैलोजन) में ठोस, द्रव और गैस तीनों भौतिक अवस्थाएँ पाई जाती हैं।

आम गलतियाँ:

• उपकोश के इलेक्ट्रॉनों और वर्ग संख्या में भ्रमित होना।
• वर्गों के नाम (जैसे हैलोजन, क्षारीय मृदा धातु) गलत बताना।
• भौतिक अवस्थाओं के उदाहरण गलत देना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक भाग (क से घ) का उत्तर अलग-अलग स्पष्ट रूप से लिखें।
b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और आवर्त सारणी के समूहों की जानकारी का प्रयोग करें।
c) वर्ग 17 के भौतिक अवस्थाओं का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 28: प्रथम वर्ग के तत्वों के लिए अभिक्रियाशीलता का बढ़ता हुआ क्रम इस प्रकार है-
Li < Na < K < Rb < Cs जबकि वर्ग 17 के तत्वों में क्रम F > Cl > Br > I है। इसकी व्याख्या कीजिए।

Answer:

वर्ग 1 के तत्व (क्षार धातुएँ) इलेक्ट्रॉन त्यागकर अभिक्रिया करते हैं। जैसे-जैसे समूह में नीचे जाते हैं, आयनन एंथैल्पी घटती जाती है, जिसका अर्थ है कि इलेक्ट्रॉन को खोने के लिए आवश्यक ऊर्जा कम हो जाती है। इसलिए, समूह में नीचे जाने पर इनकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता बढ़ती जाती है (Li < Na < K < Rb < Cs)। इसके विपरीत, वर्ग 17 के तत्व (हैलोजन) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अभिक्रिया करते हैं। इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी नीचे जाने पर कम ऋणात्मक होती जाती है और बंध वियोजन ऊर्जा भी घटती है, जिससे इनकी ऑक्सीकरण क्षमता और अभिक्रियाशीलता ऊपर से नीचे जाने पर घटती है (F > Cl > Br > I)।

मुख्य बिंदु:

• वर्ग 1 (धातुएँ) में नीचे जाने पर आयनन ऊर्जा कम होने से अभिक्रियाशीलता बढ़ती है।
• वर्ग 17 (अधातुएँ) में नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कम होने से अभिक्रियाशीलता घटती है।
• दोनों वर्गों की अभिक्रियाशीलता के विपरीत प्रवृत्तियों का कारण उनके इलेक्ट्रॉन त्यागने और ग्रहण करने का स्वभाव है।

आम गलतियाँ:

• दोनों वर्गों की अभिक्रियाशीलता के कारणों को एक ही मान लेना।
• आयनन एंथैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि के प्रभावों को आपस में मिलाना।
• बढ़ता और घटता क्रम गलत लिखना।

Exam Tips:

a) वर्ग 1 और वर्ग 17 के लिए अलग-अलग कारण (इलेक्ट्रॉन त्यागना बनाम ग्रहण करना) दें।
b) 'आयनन एंथैल्पी' और 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी' शब्दों का सही संदर्भ दें।
c) यह एक तुलनात्मक और महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न है।

 

Question 29: s-, p-, d- और f-ब्लॉक तत्वों का सामान्य बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।

Answer:

विभिन्न ब्लॉकों के तत्वों के सामान्य बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित हैं:
• s-ब्लॉक तत्व: ns¹⁻², जहाँ n = 2-7
• p-ब्लॉक तत्व: ns² np¹⁻⁶, जहाँ n = 2-6
• d-ब्लॉक तत्व: (n-1) d¹⁻¹⁰ ns⁰⁻², जहाँ n = 4-7
• f-ब्लॉक तत्व: (n-2) f¹⁻¹⁴ (n-1) d⁰⁻¹ ns², जहाँ n = 6-7

मुख्य बिंदु:

• s-ब्लॉक में अंतिम इलेक्ट्रॉन ns कक्षकों में प्रवेश करता है।
• p-ब्लॉक में अंतिम इलेक्ट्रॉन np कक्षकों में प्रवेश करता है (कुल 6 समूह)।
• d-ब्लॉक (संक्रमण तत्व) में (n-1)d कक्षकों में और f-ब्लॉक (आंतरिक संक्रमण तत्व) में (n-2)f कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरे जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• मुख्य क्वांटम संख्या n और (n-1) या (n-2) के अंतर को गलत लिखना।
• इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या (जैसे d में 10, p में 6) गलत दर्शाना।
• ब्लॉकों के विन्यास को आपस में बदलना।

Exam Tips:

a) तालिका के रूप में चारों ब्लॉकों के विन्यास साफ-साफ लिखें।
b) मुख्य क्वांटम संख्या (n) की सीमा (range) का उल्लेख अवश्य करें।
c) यह आवर्त सारणी का एक बहुत ही स्कोरिंग तथ्यात्मक प्रश्न है।

 

Question 30: तत्व, जिसका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न है, का स्थान आवर्त सारणी में बताइए-
(i) ns² np⁴ जिसके लिए n = 3 है
(ii) (n-1) d⁵ ns¹ जिसके लिए n = 4 है
(iii) (n-2) f⁷ (n-1) d¹ ns² जब n = 6 है

Answer:

(i) चूँकि n = 3 है, यह तीसरा आवर्त है। विन्यास ns² np⁴ (अर्थात् 3s² 3p⁴) है, जो p-ब्लॉक का तत्व है। p-ब्लॉक में समूह संख्या 12 + संयोजी इलेक्ट्रॉन (2 + 4 = 6) + 10 = 16 होती है। अतः यह तीसरे आवर्त और 16वें वर्ग (सल्फर, S) का तत्व है।
(ii) चूँकि n = 4 है, यह चौथा आवर्त है। विन्यास 3d⁵ 4s¹ है, जो d-ब्लॉक (संक्रमण तत्व) का है। समूह संख्या (d के इलेक्ट्रॉन + s के इलेक्ट्रॉन) = 5 + 1 = 6 है। अतः यह चौथे आवर्त और छठे वर्ग (क्रोमियम, Cr) का तत्व है।
(iii) चूँकि n = 6 है, यह छठा आवर्त है। विन्यास 4f⁷ 5d¹ 6s² है, जो f-ब्लॉक (लैंथेनाइड/ऐक्टिनाइड श्रेणी, विशेष रूप से गॅडोलिनियम, Gd) से संबंधित है। f-ब्लॉक के सभी तत्व आवर्त सारणी के तीसरे वर्ग में स्थित होते हैं। अतः यह छठे आवर्त और तीसरे वर्ग का तत्व है।

मुख्य बिंदु:

• n का मान सीधे आवर्त की संख्या बताता है।
• संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या से वर्ग की पहचान की जाती है।
• d और f ब्लॉक तत्वों के लिए समूह निर्धारण के विशेष नियम लागू होते हैं।

आम गलतियाँ:

• वर्ग संख्या की गणना करते समय p-ब्लॉक में 10 जोड़ना भूल जाना।
• f-ब्लॉक तत्वों की वर्ग संख्या को गलत बताना (सभी f-ब्लॉक तत्व वर्ग 3 में आते हैं)।
• n के मान से आवर्त पहचानने में गलती करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक उपभाग को चरणबद्ध तरीके से हल करें (n से आवर्त, विन्यास से ब्लॉक और वर्ग)।
b) सूत्र और गणना को साफ शब्दों में दर्शाएं।
c) यह आवर्त सारणी की स्थिति ज्ञात करने का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 

Question 31: कुछ तत्वों की पहली (ΔᵢH₁), दूसरी (ΔᵢH₂) आयनीकरण एंथैल्पी (kJ mol⁻¹) में और (ΔₑH) इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी (kJ mol⁻¹) नीचे दी गई है:
तत्व: I (520, 7300, -60), II (419, 3051, -48), III (1681, 3374, -328), IV (1008, 1846, -295), V (2372, 5251, +48), VI (738, 1451, -40)
उपरोक्त में से कौन सा तत्व होने की संभावना है:
(a) सबसे कम अभिक्रियाशील तत्व
(b) सबसे अभिक्रियाशील धातु
(c) सर्वाधिक अभिक्रियाशील अधातु
(d) सबसे कम अभिक्रियाशील गैर-धातु
(e) धातु जो सूत्र MX₂ (X = हैलोजन) के स्थिर द्विअंगी हैलाइड बना सकता है
(f) वह धातु जो सूत्र MX (X = हैलोजन) का मुख्य रूप से स्थिर सहसंयोजक हैलाइड बना सकती है?

Answer:

(a) तत्व V सबसे कम अभिक्रियाशील तत्व होने की संभावना है क्योंकि इसकी प्रथम आयनन एंथैल्पी सबसे अधिक है और एक धनात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी है (उत्कृष्ट गैस)।
(b) तत्व II सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु होने की संभावना है क्योंकि इसमें सबसे कम प्रथम आयनीकरण एंथैल्पी है और कम ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी है (क्षार धातु)।
(c) तत्व III के सबसे अधिक प्रतिक्रियाशील गैर-धातु होने की संभावना है क्योंकि इसमें उच्च प्रथम आयनीकरण एंथैल्पी और उच्चतम ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी है (हैलोजन)।
(d) तत्व V सबसे कम अभिक्रियाशील गैर-धातु होने की संभावना है क्योंकि इसमें बहुत उच्च प्रथम आयनन एंथैल्पी (ΔᵢH₁) और एक धनात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी है।
(e) तत्व VI की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी कम ऋणात्मक है, अतः यह एक धातु है। इसकी द्वितीय आयनन एंथैल्पी सबसे कम होती है इसलिए यह सूत्र MX₂ (क्षारीय मृदा धातु जैसी) के स्थिर द्विअंगी हैलाइड बना सकता है।
(f) तत्व I की प्रथम आयनन ऊर्जा कम और द्वितीय आयनन ऊर्जा उच्च है, इसलिए यह सूत्र MX (क्षार धातु जैसी) के रूप में स्थिर सहसंयोजक हैलाइड बना सकता है।

मुख्य बिंदु:

• उच्च आयनन ऊर्जा और धनात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि वाले तत्व उत्कृष्ट गैस होते हैं।
• कम आयनन ऊर्जा वाली धातुएँ अत्यधिक अभिक्रियाशील होती हैं (वर्ग 1 और 2)।
• उच्च ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि वाले तत्व सबसे अच्छे अधातु (हैलोजन) होते हैं।

आम गलतियाँ:

• दी गई तालिकाओं के आंकड़ों का गलत अर्थ निकालना।
• धातु और अधातु के गुणों को आपस में मिला देना।
• हैलाइडों के सूत्रों (MX और MX₂) की पहचान में भूल करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक भाग (a से f) के लिए दिए गए आंकड़ों (आयनन ऊर्जा और इलेक्ट्रॉन लब्धि) का तर्क दें।
b) मानों के उच्च और निम्न होने के आधार पर तत्वों के वर्ग की पहचान करें।
c) यह विश्लेषणात्मक और केस-आधारित प्रश्न है, इसे ध्यान से समझें।

 

Question 32: तत्वों के निम्नलिखित युग्मों के संयोजन से बने स्थायी द्विअंगी यौगिकों के सूत्रों की प्रवृत्ति कीजिए:
(क) लीथियम और ऑक्सीजन
(ख) मैग्नीशियम और नाइट्रोजन
(ग) एल्यूमीनियम और आयोडीन
(घ) सिलिकॉन और ऑक्सीजन
(ङ) फास्फोरस और फ्लोरीन
(च) 71वाँ तत्व और फ्लोरीन

Answer:

(क) लीथियम (Li, वर्ग 1) की संयोजकता 1 है और ऑक्सीजन (O, वर्ग 16) की संयोजकता 2 है, अतः यौगिक का सूत्र Li₂O होगा।
(ख) मैग्नीशियम (Mg, वर्ग 2) की संयोजकता 2 है और नाइट्रोजन (N, वर्ग 15) की संयोजकता 3 है, अतः यौगिक का सूत्र Mg₃N₂ होगा।
(ग) एल्यूमीनियम (Al, वर्ग 13) की संयोजकता 3 है और आयोडीन (I, वर्ग 17) की संयोजकता 1 है, अतः यौगिक का सूत्र All₃ होगा।
(घ) सिलिकॉन (Si, वर्ग 14) की संयोजकता 4 है और ऑक्सीजन (O, वर्ग 16) की संयोजकता 2 है, अतः यौगिक का सूत्र SiO₂ होगा।
(ङ) फास्फोरस (P, वर्ग 15) की संयोजकता 3 या 5 हो सकती है और फ्लोरीन (F, वर्ग 17) की संयोजकता 1 है, अतः यौगिक PF₃ या PF₅ होंगे।
(च) 71वाँ तत्व ल्यूटेटियम (Lu) है जिसकी संयोजकता 3 होती है और फ्लोरीन की संयोजकता 1 है, अतः यौगिक का सूत्र LuF₃ होगा।

मुख्य बिंदु:

• द्विअंगी यौगिकों के सूत्र बनाने के लिए तत्वों की संयोजकता (Valency) का क्रॉस-मल्टीप्लिकेशन किया जाता है।
• वर्ग संख्या के आधार पर तत्वों की सामान्य संयोजकता ज्ञात की जाती है।
• 71वाँ तत्व ल्यूटेटियम (Lu) है जिसकी संयोजकता 3 होती है।

आम गलतियाँ:

• तत्वों की संयोजकताएं गलत लिखना या उनका अनुपात गलत निकालना।
• 71वें तत्व की पहचान न कर पाना।
• सूत्रों को संतुलित न करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक युग्म के लिए दोनों तत्वों की संयोजकता अलग से लिखें।
b) क्राइसिस विधि (Cross method) से सही रासायनिक सूत्र बनाएं।
c) आवर्त सारणी के समूहों से संयोजकता याद रखना बहुत उपयोगी है।

 

Question 33: आधुनिक आवर्त सारणी में, आवर्त मान दर्शाता है:
(a) परमाणु संख्या
(b) परमाणु भार
(c) मुख्य क्वांटम संख्या
(d) अज़ीमुथल क्वांटम संख्या

Answer:

आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त का मान मुख्य क्वांटम संख्या (Principal Quantum Number, n) को दर्शाता है, जो सबसे बाहरी कोश या संयोजन कोश को इंगित करता है। अतः सही विकल्प (c) है।

मुख्य बिंदु:

• आवर्त मुख्य क्वांटम संख्या (n) के मान के बराबर होता है।
• यह बाह्यतम कोश की स्थिति को दर्शाता है।
• सही विकल्प (c) मुख्य क्वांटम संख्या है।

आम गलतियाँ:

• परमाणु संख्या या परमाणु भार को आवर्त का अर्थ समझ लेना।
• क्वांटम संख्याओं के अर्थ में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) सीधा और स्पष्ट उत्तर लिखें।
b) आवर्त = मुख्य क्वांटम संख्या (n) - यह संबंध हमेशा याद रखें।
c) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प का चयन सावधानी से करें।

 

Question 34: आधुनिक आवर्त सारणी से संबंधित निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
(a) p-कक्षक में 6 स्तंभ होते हैं, क्योंकि p-कोश के सभी कक्षकों में अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।
(b) d-कक्षक में 8 स्तंभ हैं, क्योंकि अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन d-उपकोश में सभी कक्षकों को भर सकते हैं।
(c) प्रत्येक कक्षक में उन इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर संख्या में स्तंभ हैं जो उस उपकोश को भर सकते हैं।
(d) कक्षक इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के निर्माण में इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करने वाले अंतिम उपकोश के अज़ीमुथल क्वांटम संख्या (l) का मान इंगित करता है।

Answer:

कथन (b) गलत है क्योंकि d-उपकोश में 5 कक्षक होते हैं और उनमें अधिकतम 10 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं, इसलिए d-ब्लॉक में 10 स्तंभ होते हैं न कि 8। अतः सही उत्तर विकल्प (b) है।

मुख्य बिंदु:

• d-उपकोश में 5 कक्षक और अधिकतम 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिससे 10 स्तंभ बनते हैं।
• कथन (b) में 8 स्तंभ बताए गए हैं जो कि गलत है।
• अन्य सभी कथन सत्य हैं।

आम गलतियाँ:

• उपकोशों में कक्षकों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या (s=2, p=6, d=10, f=14) में भूल करना।
• गलत कथन की जगह सही कथन चुन लेना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या याद रखें (p=6, d=10)।
b) आवर्त सारणी के स्तंभों (groups) की संख्या उपकोश के इलेक्ट्रॉनों के बराबर होती है।
c) प्रश्न को ध्यान से पढ़कर गलत कथन छांटें।

 

Question 35: जो कुछ भी संयोज इलेक्ट्रॉन को प्रभावित करता है वह तत्व के रसायन शास्त्र को प्रभावित करेगा। निम्नलिखित में से कौन सा कारक संयोजकता कोश को प्रभावित नहीं करता है?
(a) संयोजक मुख्य क्वांटम संख्या (n)
(b) नाभिकीय आवेश (Z)
(c) नाभिकीय द्रव्यमान
(d) क्रोड इलेक्ट्रॉनों की संख्या।

Answer:

नाभिकीय द्रव्यमान (Nuclear mass) संयोजी इलेक्ट्रॉनों को या रासायनिक गुणों को प्रभावित नहीं करता है, क्योंकि रासायनिक व्यवहार इलेक्ट्रॉनों की संख्या और आवेश पर निर्भर करता है, न कि न्यूट्रॉनों और द्रव्यमान पर। अतः सही विकल्प (c) है।

मुख्य बिंदु:

• नाभिकीय द्रव्यमान रासायनिक गुणों को प्रभावित नहीं करता है।
• मुख्य क्वांटम संख्या, नाभिकीय आवेश और क्रोड इलेक्ट्रॉन रसायन शास्त्र को प्रभावित करते हैं।
• सही विकल्प (c) है।

आम गलतियाँ:

• द्रव्यमान और आवेश के प्रभावों में अंतर न समझ पाना।
• सही विकल्प चुनने में जल्दबाजी करना।

Exam Tips:

a) याद रखें कि रसायन विज्ञान पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनों के आदान-प्रदान और नाभिकीय आवेश पर आधारित है।
b) द्रव्यमान संख्या भौतिक गुणों (जैसे घनत्व) को प्रभावित करती है, रासायनिक गुणों को नहीं।
c) सटीक विकल्प का चयन करें।

 

Question 36: समइलेक्ट्रॉनी प्रजातियों का आकार - F⁻, Ne और Na⁺ का आकार इनमें से किससे प्रभावित होता है?
(a) नाभिकीय आवेश (Z)
(b) मुख्य संयोजी क्वांटम संख्या (n)
(c) बाहरी कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन अन्योन्य क्रिया
(d) कारकों में से कोई भी नहीं क्योंकि उनका आकार समान है।

Answer:

समइलेक्ट्रॉनी प्रजातियों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, लेकिन उनके नाभिकीय आवेश (Z, प्रोटॉनों की संख्या) अलग-अलग होते हैं। नाभिकीय आवेश बढ़ने से आकर्षण बढ़ता है और आकार घटता है। अतः इनका आकार नाभिकीय आवेश (Z) से प्रभावित होता है। सही विकल्प (a) है।

मुख्य बिंदु:

• समइलेक्ट्रॉनी प्रजातियों में इलेक्ट्रॉन समान होते हैं पर प्रोटॉन (Z) भिन्न होते हैं।
• नाभिकीय आवेश आकार को नियंत्रित करता है।
• सही विकल्प (a) है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि समइलेक्ट्रॉनी का आकार भी पूरी तरह समान होता है।
• नाभिकीय आवेश के प्रभाव को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) समइलेक्ट्रॉनी प्रजातियों के आकार का मुख्य निर्धारक नाभिकीय आवेश (Z) होता है।
b) विकल्प (a) को टिक करें और कारण स्पष्ट रखें।
c) यह एक संकल्पनात्मक बहुविकल्पीय प्रश्न है।

 

Question 37: आयनन एंथैल्पी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
(a) प्रत्येक क्रमिक इलेक्ट्रॉन के लिए आयनन एंथैल्पी बढ़ जाती है।
(b) क्रोड उत्कृष्ट गैस विन्यास से इलेक्ट्रॉन को हटाने पर सबसे बड़ी वृद्धि अनुभव की जाती है।
(c) आयनन एंथैल्पी के मान में अत्यधिक तीव्र वृद्धि संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के विलोपन को व्यक्त करता है।
(d) कम n मान वाले कक्षकों से अधिक n मान वाले कक्षकों की तुलना में इलेक्ट्रॉनों को आसानी से निकाला जा सकता है।

Answer:

कथन (d) गलत है क्योंकि कम n मान वाले कक्षक नाभिक के बहुत समीप होते हैं और नाभिक द्वारा अधिक मजबूती से आकर्षित होते हैं, इसलिए कम n मान वाले कक्षकों से इलेक्ट्रॉनों को निकालना अधिक कठिन होता है, आसान नहीं। अतः सही उत्तर विकल्प (d) है।

मुख्य बिंदु:

• कम n मान वाले कक्षक नाभिक के पास होते हैं, अतः उनसे इलेक्ट्रॉन निकालना कठिन होता है।
• कथन (d) में इसके विपरीत दिया गया है जो गलत है।
• अन्य सभी कथन आयनन एंथैल्पी के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं।

आम गलतियाँ:

• n के मान और नाभिकीय दूरी के संबंध में भ्रमित होना।
• गलत कथन की जगह सही कथन चुन लेना।

Exam Tips:

a) n का मान जितना कम होगा, नाभिक से आकर्षण उतना ही अधिक होगा।
b) विकल्पों को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
c) सही विकल्प (d) का चयन करें।

 

Question 38: तत्वों B, Al, Mg और K को ध्यान में रखते हुए, उनके धात्विक अभिलक्षण का सही क्रम है:
(a) B > Al > Mg > K
(b) Al > Mg > B > K
(c) Mg > Al > K > B
(d) K > Mg > Al > B

Answer:

आवर्त में बाएं से दाएँ जाने पर धात्विक गुण घटता है, और समूह में नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ता है। K वर्ग 1 का है, Mg वर्ग 2 का है, Al वर्ग 13 का है और B वर्ग 13 में ऊपर है। अतः सही धात्विक अभिलक्षण का क्रम K > Mg > Al > B होगा। सही विकल्प (d) है।

मुख्य बिंदु:

• वर्ग में नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ता है (K सबसे अधिक धात्विक है)।
• आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर धात्विक गुण घटता है (B सबसे कम धात्विक है)।
• सही विकल्प (d) है।

आम गलतियाँ:

• धात्विक और अधात्विक गुणों की प्रवृत्तियों को आपस में मिला देना।
• तत्वों के आवर्त सारणी में स्थान को गलत पहचानना।

Exam Tips:

a) आवर्त सारणी में तत्वों की स्थिति (बाएं-दाएं, ऊपर-नीचे) का ध्यान रखें।
b) क्षार धातुएँ सबसे अधिक धात्विक होती हैं।
c) सही विकल्प (d) चुनें।

 

Question 39: B, C, N, F तथा Si के लिए अधातु अभिलक्षण का इनमें से सही क्रम कौन सा है?
(a) B > C > Si > N > F
(b) Si > C > B > N > F
(c) F > N > C > B > Si
(d) F > N > C > Si > B

Answer:

आवर्त में बाएं से दाएँ जाने पर तत्वों का अधात्विक गुण बढ़ता है, अतः अधात्विक लक्षण का घटता क्रम F > N > C > B है। इसके अतिरिक्त, C और Si के अधात्विक लक्षणों का घटता क्रम C > Si है। हालाँकि, Si, B की तुलना में कम अधातु है, अर्थात् B > Si। इसलिए, सबसे उपयुक्त धात्विक/अधात्विक वर्णों का सही क्रम F > N > C > B > Si है (विकल्प c)।

मुख्य बिंदु:

• आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर अधात्विक गुण बढ़ता है (F सबसे अधिक अधात्विक है)।
• समूह में नीचे जाने पर अधात्विक गुण घटता है (C > Si)।
• सही विकल्प (c) है।

आम गलतियाँ:

• धात्विक और अधात्विक प्रवृत्तियों के नियमों में भ्रम होना।
• तत्वों के सही क्रम का आकलन न कर पाना।

Exam Tips:

a) फ्लोरीन (F) आवर्त सारणी में सबसे अधिक अधात्विक तत्व है, अतः यह क्रम की शुरुआत में होगा।
b) समूह और आवर्त के नियमों को संयोजित करें।
c) सही विकल्प (c) का चयन करें।

 

Question 40: तत्वों F, Cl, O और N को ध्यान में रखते हुए, ऑक्सीकरण गुण के संदर्भ में उनकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता का सही क्रम है:
(a) F > Cl > O > N
(b) F > O > Cl > N
(c) Cl > F > O > N
(d) O > F > N > Cl

Answer:

आवर्त में बाएं से दाएँ जाने पर तत्वों का ऑक्सीकरण गुण बढ़ता है, इस प्रकार, हमें ऑक्सीकरण गुण का घटता हुआ क्रम F > O > N के रूप में प्राप्त होता है। फिर से, तत्वों का ऑक्सीकरण अभिलक्षण एक समूह में कम हो जाता है। इस प्रकार, हमें F > Cl प्राप्त होता है। हालांकि, O का ऑक्सीकरण गुण Cl से अधिक है, अर्थात् O > Cl। इसलिए, ऑक्सीकरण गुणों के संदर्भ में F, Cl, O और N की रासायनिक अभिक्रियाशीलता का सही क्रम F > O > Cl > N है (विकल्प b)।

मुख्य बिंदु:

• फ्लोरीन (F) सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है।
• ऑक्सीजन (O) और क्लोरीन (Cl) के ऑक्सीकरण गुणों का सही तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक है।
• सही विकल्प (b) है।

आम गलतियाँ:

• F और O की तुलना में Cl के स्थान को गलत समझना।
• ऑक्सीकरण क्षमता और विद्युत ऋणता के अंतर को न समझना।

Exam Tips:

a) प्रबलतम ऑक्सीकारक फ्लोरीन (F) को सबसे आगे रखें।
b) ऑक्सीजन और क्लोरीन के बीच के सूक्ष्म अंतर का ध्यान रखें।
c) सही विकल्प (b) को चुनें।

 

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