NCERT Solutions Class 11 Chemistry Chapter 01 Some Basic Concepts of Chemistry (रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ) in Hindi

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Question 1: निम्नलिखित के लिए मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए— (i) H₂O (ii) CO₂ (iii) CH₄

Answer:

किसी यौगिक का मोलर द्रव्यमान उसमें उपस्थित सभी तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों के योग के बराबर होता है। इसे ग्राम प्रति मोल (g/mol) में व्यक्त किया जाता है।
(i) H₂O का मोलर द्रव्यमान = (2 × हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान) + (1 × ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान)
= (2 × 1.008 u) + (1 × 16.00 u)
= 2.016 u + 16.00 u = 18.016 u या 18.02 g/mol
(ii) CO₂ का मोलर द्रव्यमान = (1 × कार्बन का परमाणु द्रव्यमान) + (2 × ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान)
= (1 × 12.011 u) + (2 × 16.00 u)
= 12.011 u + 32.00 u = 44.011 u या 44.01 g/mol
(iii) CH₄ का मोलर द्रव्यमान = (1 × कार्बन का परमाणु द्रव्यमान) + (4 × हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान)
= (1 × 12.011 u) + (4 × 1.008 u)
= 12.011 u + 4.032 u = 16.043 u या 16.04 g/mol

मुख्य बिंदु:

• मोलर द्रव्यमान का मात्रक g/mol होता है।
• इसमें तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों को उनकी परमाणुकता से गुणा किया जाता है。
• मानक परमाणु द्रव्यमानों का उपयोग सटीक गणना के लिए किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• हाइड्रोजन या अन्य तत्वों का गलत परमाणु द्रव्यमान रखना।
• परमाणुकता (जैसे H₂O में 2 हाइड्रोजन) से गुणा करना भूल जाना।
• मात्रक न लिखना या गलत मात्रक लिखना।

Exam Tips:

a) सभी मुख्य तत्वों (जैसे H, C, O, N) के परमाणु द्रव्यमान जुबानी याद रखें।
b) गणना करते समय दशमलव के बाद कम से कम दो अंकों तक मान रखें।
c) उत्तर के अंत में उचित मात्रक (g/mol) अवश्य लगाएँ।

 

Question 2: सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) में उपस्थित विभिन्न तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत का परिकलन कीजिए।

Answer:

किसी यौगिक में किसी तत्व का द्रव्यमान प्रतिशत निकालने के लिए उस तत्व के कुल द्रव्यमान को यौगिक के कुल मोलर द्रव्यमान से भाग देकर 100 से गुणा करते हैं। सबसे पहले सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करते हैं जो (2 × 23.0) + (32.066) + (4 × 16.00) = 142.066 g/mol है।
सोडियम का द्रव्यमान प्रतिशत = (46.0 g ÷ 142.066 g) × 100 = 32.379 = 32.4%
सल्फर का द्रव्यमान प्रतिशत = (32.066 g ÷ 142.066 g) × 100 = 22.57 = 22.6%
ऑक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत = (64.0 g ÷ 142.066 g) × 100 = 45.049 = 45.05%

मुख्य बिंदु:

• द्रव्यमान प्रतिशत का सूत्र: (तत्व का कुल द्रव्यमान ÷ यौगिक का मोलर द्रव्यमान) × 100 है।
• सभी तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत का योग लगभग 100% होना चाहिए।
• सोडियम, सल्फर और ऑक्सीजन के परमाणु द्रव्यमान क्रमशः 23, 32 और 16 हैं।

आम गलतियाँ:

• किसी तत्व के कुल द्रव्यमान के स्थान पर केवल एक परमाणु का द्रव्यमान ले लेना।
• मोलर द्रव्यमान की गणना में गलती करना।
• प्रतिशत निकालने के बाद 100 से गुणा करना भूल जाना।

Exam Tips:

a) सूत्र को स्पष्ट रूप से लिखकर चरणबद्ध गणना करें।
b) उत्तर की जाँच के लिए सभी Percentages को जोड़कर देख लें कि योग 100 के करीब है या नहीं।
c) दशमलव स्थानों को मानक रूप में rounding off करना सीखें।

 

Question 3: आयरन के उस ऑक्साइड का मूलानुपाती सूत्र ज्ञात कीजिए, जिसमें द्रव्यमान द्वारा 69.9% आयरन और 30.1% ऑक्सीजन है।

Answer:

मूलानुपाती सूत्र ज्ञात करने के लिए सबसे पहले तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत को उनके परमाणु द्रव्यमान से भाग देकर आपेक्षिक मोल निकालते हैं।
आयरन (Fe) का प्रतिशत = 69.9% तथा इसका परमाणु द्रव्यमान = 55.85 u
आयरन के मोल = 69.9 ÷ 55.85 = 1.25
ऑक्सीजन (O) का प्रतिशत = 30.1% तथा इसका परमाणु द्रव्यमान = 16.00 u
ऑक्सीजन के मोल = 30.1 ÷ 16.00 = 1.88
अब इन मोलों का सरल अनुपात निकालते हैं: Fe : O = (1.25 ÷ 1.25) : (1.88 ÷ 1.25) = 1 : 1.5
इस अनुपात को पूर्ण संख्या में बदलने के लिए 2 से गुणा करते हैं, जिससे Fe : O का अनुपात 2 : 3 प्राप्त होता है। अतः आयरन के इस ऑक्साइड का मूलानुपाती सूत्र Fe₂O₃ है।

मुख्य बिंदु:

• मूलानुपाती सूत्र किसी यौगिक में उपस्थित परमाणुओं का सरलतम पूर्ण संख्या अनुपात दर्शाता है।
• आपेक्षिक मोल निकालने के लिए प्रतिशत को परमाणु भार से भाग दिया जाता है।
• भिन्नात्मक अनुपात को पूर्ण संख्या में बदलने के लिए उचित संख्या से गुणा करते हैं।

आम गलतियाँ:

• परमाणु द्रव्यमान से भाग देने के बजाय सीधे प्रतिशत से अनुपात निकाल लेना।
• सरल अनुपात को पूर्ण संख्या में बदलने में गलती करना।
• Fe और O के प्रतीकों या उनकी संख्याओं को उलट देना।

Exam Tips:

a) इस प्रकार के प्रश्नों को हमेशा सारणीबद्ध (Table format) तरीके से हल करें।
b) सबसे छोटे मोल से सभी मोलों को भाग देकर शुरुआती अनुपात निकालें।
c) यदि अनुपात 1.5 या 1.33 आए, तो पूरी पंक्ति को 2 या 3 से गुणा करके पूर्णांक बनाएँ।

 

Question 4: प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का परिकलन कीजिए, जब—
(i) 1 मोल कार्बन को हवा में जलाया जाता है और
(ii) 1 मोल कार्बन को 16g ऑक्सीजन में जलाया जाता है।

Answer:

कार्बन के दहन की संतुलित रासायनिक समीकरण C (s) + O₂ (g) → CO₂ (g) होती है।
(i) समीकरण के अनुसार, 1 मोल कार्बन 1 मोल ऑक्सीजन के साथ पूरी तरह जलकर 1 मोल (या 44 ग्राम) कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है। अतः 1 मोल कार्बन से 44 g CO₂ प्राप्त होगी।
(ii) प्रश्न में केवल 16 ग्राम ऑक्सीजन (यानी 16 ÷ 32 = 0.5 मोल O₂) उपलब्ध है। चूंकि 1 मोल कार्बन को पूरी तरह जलने के लिए 1 मोल ऑक्सीजन चाहिए, यहाँ ऑक्सीजन सीमित अभिकारक (Limiting reagent) है। अतः 0.5 मोल ऑक्सीजन केवल 0.5 मोल कार्बन से क्रिया करके 0.5 मोल (या 22 ग्राम) कार्बन डाइऑक्साइड बनाएगी।

मुख्य बिंदु:

• संतुलित रासायनिक समीकरण स्टोइकोमेट्री (Stoichiometry) का आधार है।
• सीमित अभिकारक वह reactant है जो अभिक्रिया के दौरान पहले समाप्त हो जाता है और उत्पाद की मात्रा तय करता है।
• 1 मोल CO₂ का द्रव्यमान 44 ग्राम होता है।

आम गलतियाँ:

• दूसरे भाग में ऑक्सीजन के द्रव्यमान को सीधे मोल मान लेना (16g = 0.5 mol)।
• सीमित अभिकारक की अवधारणा को समझे बिना कुल कार्बन के अनुसार उत्तर देना।
• मोल और ग्राम के अंतर को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) दहन अभिक्रिया की संतुलित समीकरण सबसे पहले लिखें।
b) चेक करें कि कौन सा अभिकारक कम मात्रा में है (सीमित अभिकारक पहचानें)।
c) उत्पाद की मात्रा हमेशा सीमित अभिकारक के आधार पर ही परिकलित करें।

 

Question 5: सोडियम ऐसीटेट (CH₃COONa) का 500 mL, 0.375 मोलर जलीय विलयन बनाने के लिए उसके कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी? सोडियम ऐसीटेट का मोलर द्रव्यमान 82.0245 g mol⁻¹ है।

Answer:

विलयन की मोलरता (M) का सूत्र = (विलेय के मोलों की संख्या ÷ विलयन का आयतन लीटर में) होता है।
यहाँ मोलरता = 0.375 M और आयतन = 500 mL = 0.5 L है।
विलेय के मोलों की संख्या = मोलरता × आयतन (लीटर में) = 0.375 mol/L × 0.5 L = 0.1875 mol
सोडियम ऐसीटेट का आवश्यक द्रव्यमान = मोलों की संख्या × मोलर द्रव्यमान
द्रव्यमान = 0.1875 mol × 82.0245 g/mol = 15.38 g

मुख्य बिंदु:

• मोलरता विलयन के प्रति लीटर में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या होती है।
• मिलीलीटर (mL) को लीटर (L) में बदलने के लिए 1000 से भाग देते हैं।
• द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए मोलों को मोलर द्रव्यमान से गुणा किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• आयतन को मिलीलीटर से लीटर में बदलना भूल जाना।
• मोलरता के सूत्र का गलत पक्षांतर करना।
• गणना में इकाईयों का ध्यान न रखना।

Exam Tips:

a) प्रश्न में दी गई सभी राशियों (M, V, मोलर द्रव्यमान) को पहले सूचीबध करें।
b) आयतन को हमेशा लीटर में ही परिवर्तित करें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक (ग्राम) लिखना न भूलें।

 

Question 6: सांद्र नाइट्रिक अम्ल के उस प्रतिदर्श का मोल प्रति लीटर में सांद्रता का परिकलन कीजिए, जिसमें उसका द्रव्यमान प्रतिशत 69% हो और जिसका घनत्व 1.41 g mL⁻¹ हो।

Answer:

द्रव्यमान प्रतिशत 69% का अर्थ है कि 100 ग्राम विलयन में 69 ग्राम नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) उपस्थित है।
विलयन का घनत्व = 1.41 g/mL दिया है, अतः 100 ग्राम विलयन का आयतन = द्रव्यमान ÷ घनत्व = 100 ÷ 1.41 = 70.92 mL = 0.07092 L है।
अब HNO₃ का मोलर द्रव्यमान = 1 + 14 + (3 × 16) = 63 g/mol है।
69 ग्राम HNO₃ में मोलों की संख्या = 69 g ÷ 63 g/mol = 1.095 mol
विलयन की मोलरता (सांद्रता) = (विलेय के मोलों की संख्या ÷ विलयन का आयतन लीटर में) = 1.095 mol ÷ 0.07092 L = 15.44 mol/L

मुख्य बिंदु:

• द्रव्यमान प्रतिशत से विलेय और विलयन के द्रव्यमान की गणना की जाती है।
• घनत्व की सहायता से द्रव्यमान को आयतन में बदला जाता है।
• मोलरता प्रति लीटर विलयन में उपस्थित मोलों की संख्या होती है।

आम गलतियाँ:

• विलयन के द्रव्यमान को विलायक का द्रव्यमान मान लेना।
• mL में निकले आयतन को लीटर में बदले बिना सूत्र में रखना।
• HNO₃ का मोलर द्रव्यमान गलत निकालना।

Exam Tips:

a) 100 ग्राम विलयन मानकर सवाल हल करना सबसे आसान तरीका है।
b) घनत्व का सूत्र (d = m/V) याद रखें और आयतन निकालें।
c) मोलरता की इकाई mol/L या M होती है।

 

Question 7: 100 g कॉपर सल्फेट (CuSO₄) से कितना कॉपर प्राप्त किया जा सकता है?

Answer:

सबसे पहले कॉपर सल्फेट (CuSO₄) का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करते हैं:
Cu का परमाणु द्रव्यमान = 63.5 u, S = 32.0 u, O = 16.0 u
CuSO₄ का मोलर द्रव्यमान = 63.5 + 32.0 + (4 × 16.0) = 159.5 g/mol
इस मोलर द्रव्यमान से स्पष्ट है कि 159.5 ग्राम CuSO₄ में 63.5 ग्राम कॉपर (Cu) उपस्थित होता है।
अतः एकिक नियम (Unitary method) द्वारा, 100 ग्राम CuSO₄ से प्राप्त कॉपर की मात्रा = (63.5 × 100) ÷ 159.5 = 39.81 ग्राम

मुख्य बिंदु:

• किसी यौगिक के कुल द्रव्यमान में उसके एक घटक का निश्चित अनुपात होता है।
• CuSO₄ का मोलर द्रव्यमान 159.5 g/mol होता है।
• कॉपर का परमाणु भार गणना में 63.5 लिया जाता है।

आम गलतियाँ:

• केवल Cu का परमाणु भार लिखकर छोड़ देना, यौगिक का कुल भार न निकालना।
• अनुपात निकालते समय संख्याओं को ऊपर-नीચે कर देना।
• दशमलव की गणना में गलती करना।

Exam Tips:

a) यौगिक का कुल द्रव्यमान और उसमें मौजूद धातु का द्रव्यमान अलग-अलग निकालें।
b) अनुपात और समानुपात नियम का उपयोग करें।
c) उत्तर के साथ उचित मात्रक (ग्राम) अवश्य लिखें।

 

Question 8: आयरन के उस ऑक्साइड का आनुभविक सूत्र ज्ञात कीजिए, जिसमें आयरन तथा ऑक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत क्रमशः 69.9 तथा 30.1 है।

Answer:

यह प्रश्न प्रश्न संख्या 3 के समान ही है। आयरन का प्रतिशत = 69.9%, ऑक्सीजन का प्रतिशत = 30.1% है।
आयरन के मोल = 69.9 ÷ 55.85 = 1.25
ऑक्सीजन के मोल = 30.1 ÷ 16.0 = 1.88
मोलों का सरल अनुपात निकालने के लिए 1.25 से भाग देते हैं:
Fe : O = (1.25 ÷ 1.25) : (1.88 ÷ 1.25) = 1 : 1.5
इसे पूर्ण संख्या में बदलने के लिए पूरी संख्या को 2 से गुणा करते हैं, जिससे Fe : O का अनुपात 2 : 3 प्राप्त होता है। अतः इस ऑक्साइड का आनुभविक (मूलानुपाती) सूत्र Fe₂O₃ है।

मुख्य बिंदु:

• आनुभविक सूत्र और मूलानुपाती सूत्र एक ही बात (Empirical formula) हैं।
• प्रतिशत को परमाणु भार से भाग देकर आपेक्षिक संख्या निकाली जाती है।
• सबसे छोटी संख्या से भाग देकर सरलतम अनुपात प्राप्त किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• परमाणु द्रव्यमान के मान गलत रखना।
• भिन्नात्मक अनुपात को पूर्ण संख्या में बदलना भूल जाना।
• सूत्र में तत्वों की सही संयोजकता न दर्शाना।

Exam Tips:

a) सारणी बनाकर चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ ताकि परीक्षक को समझने में आसानी हो।
b) परमाणु द्रव्यमान हमेशा मानक ही उपयोग करें (जैसे Fe का 55.85)।
c) अंत में निष्कर्ष लिखकर सूत्र स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 9: निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर क्लोरीन के औसत परमाणु द्रव्यमान का परिकलन कीजिए—
इज्जत आइसोटोप: 35Cl (प्राकृतिक बाहुल्यता 75.77%, मोलर द्रव्यमान 34.9689 u)
आइसोटोप: 37Cl (प्राकृतिक बाहुल्यता 24.23%, मोलर द्रव्यमान 36.9659 u)

Answer:

किसी तत्व का औसत परमाणु द्रव्यमान उसके सभी समस्थानिकों के द्रव्यमान और उनकी प्राकृतिक प्रतिशत बहुलता के गुणनफल के योग के बराबर होता है।
क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान = [(35Cl का द्रव्यमान × उसकी प्रतिशतता) + (37Cl का द्रव्यमान × उसकी प्रतिशतता)] ÷ 100
मान रखने पर:
= [(34.9689 × 75.77) + (36.9659 × 24.23)] ÷ 100
= [2653.693 + 895.685] ÷ 100
= 3549.378 ÷ 100 = 35.4527 u

मुख्य बिंदु:

• औसत परमाणु द्रव्यमान समस्थानिकों की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
• इसे भारित औसत (Weighted average) भी कहा जाता है।
• क्लोरीन का मानक औसत परमाणु द्रव्यमान लगभग 35.5 u होता है।

आम गलतियाँ:

• प्रतिशतता से भाग देना भूल जाना (100 से भाग देना आवश्यक है)।
• गलत समस्थानिक के साथ गलत द्रव्यमान का गुणा करना।
• कैलकुलेशन में दशमलव स्थान की गलती करना।

Exam Tips:

a) दोनों समस्थानिकों के (द्रव्यमान × प्रतिशत) को अलग-अलग कोष्ठक में हल करें।
b) अंत में 100 से भाग देना न भूलें।
c) उत्तर को मानक दशमलव स्थानों तक ही लिखें (जैसे 35.45 u)।

 

Question 10: एथेन (C₂H₆) के तीन मोलों में निम्नलिखित का परिकलन कीजिए—
1. कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या
2. हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या
3. एथेन के अणुओं की संख्या

Answer:

एथेन का रासायनिक सूत्र C₂H₆ है। इसका अर्थ है कि एथेन के 1 मोल में 2 मोल कार्बन परमाणु और 6 मोल हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
1. कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या = 3 मोल C₂H₆ × 2 = 6 मोल कार्बन परमाणु।
2. हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या = 3 मोल C₂H₆ × 6 = 18 मोल हाइड्रोजन परमाणु।
3. एथेन के अणुओं की संख्या = मोलों की संख्या × आवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10²³)
= 3 × 6.022 × 10²³ = 1.8066 × 10²⁴ अणु

मुख्य बिंदु:

• 1 मोल में किसी भी कण की संख्या आवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10²³) के बराबर होती है।
• रासायनिक सूत्र में लिखे गुणांक परमाणु की संख्या बताते हैं।
• मोलों की संख्या को आवोगाद्रो संख्या से गुणा करने पर कुल अणुओं या परमाणुओं की संख्या मिलती है।

आम गलतियाँ:

• कार्बन और हाइड्रोजन के मोल निकालते समय सूत्र की परमाणुकता भूल जाना।
• अणुओं की संख्या निकालते समय 3 से गुणा करना भूल जाना।
• वैज्ञानिक संकेतन (Scientific notation) में घात की गलती करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक भाग को अलग-अलग नंबर डालकर हल करें।
b) आवोगाद्रो संख्या का मान हमेशा याद रखें (6.022 × 10²³ mol⁻¹)।
c) अंतिम उत्तर में सही वैज्ञानिक संकेतन का प्रयोग करें।

 

Question 11: यदि 20 g चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) को जल की पर्याप्त मात्रा में घोलने पर उसका आयतन 2L हो जाए, तो चीनी के इस विलयन की सांद्रता क्या होगी?

Answer:

विलयन की सांद्रता मोलरता (M) के रूप में ज्ञात की जाती है। मोलरता का सूत्र होता है: (विलेय के मोलों की संख्या ÷ विलयन का आयतन लीटर में)।
सबसे पहले चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) का मोलर द्रव्यमान निकालते हैं:
= (12 × 12) + (22 × 1) + (11 × 16) = 144 + 22 + 176 = 342 g/mol
चीनी के मोलों की संख्या = दिया गया द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान = 20 g ÷ 342 g/mol = 0.0585 mol
अब विलयन की मोलरता = 0.0585 mol ÷ 2 L = 0.02925 mol/L

मुख्य बिंदु:

• सुक्रोज (चीनी) का रासायनिक सूत्र C₁२H₂₂O₁₁ होता है।
• मोलरता ज्ञात करने के लिए मोल और लीटर में आयतन आवश्यक है।
• चीनी का मोलर द्रव्यमान 342 g/mol होता है।

आम गलतियाँ:

• चीनी का सही आणविक सूत्र न लिख पाना।
• आयतन लीटर में दिया होने के बावजूद उसे 1000 से भाग देना।
• मोल निकालने में द्रव्यमान और मोलर द्रव्यमान को उल्टा कर देना।

Exam Tips:

a) पहले विलेय के मोल अलग से निकाल लें।
b) सूत्र लिखकर मान रखें ताकि गलती न हो।
c) उत्तर की इकाई mol L⁻¹ या M लिखें।

 

Question 12: यदि मेथनॉल का घनत्व 0.793 kg L⁻¹ हो, तो इसके 0.25 M के 2.5 L विलयन को बनाने के लिए कितने आयतन की आवश्यकता होगी?

Answer:

सबसे पहले मेथनॉल (CH₃OH) का मोलर द्रव्यमान निकालते हैं:
= (1 × 12) + (4 × 1) + (1 × 16) = 32 g/mol = 0.032 kg/mol
मेथनॉल विलयन की मोलरता M = 10 х घनत्व ÷ मोलर द्रव्यमान या सीधे सूत्र का प्रयोग करते हैं।
हमें 2.5 L और 0.25 M विलयन के लिए आवश्यक मोलों की संख्या = M × V = 0.25 mol/L × 2.5 L = 0.625 mol
आवश्यक मेथनॉल का द्रव्यमान = मोल × मोलर द्रव्यमान = 0.625 mol × 32 g/mol = 20 ग्राम = 0.020 kg
अब घनत्व (d = m/V) का उपयोग करके आयतन निकालते हैं:
आयतन V = द्रव्यमान ÷ घनत्व = 0.020 kg ÷ 0.793 kg/L = 0.0252 L = 25.2 mL

मुख्य बिंदु:

• घनत्व का प्रयोग द्रव्यमान को आयतन में बदलने के लिए किया जाता है।
• मोलरता से आवश्यक विलेय के मोल निकाले जाते हैं।
• मात्रकों (g और kg, mL और L) का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

आम गलतियाँ:

• kg/mol और g/mol के रूपांतरण में गलती करना।
• सीधे मोलरता समीकरण M1V1 का गलत जगह प्रयोग करना।
• घनत्व से भाग देने के बजाय गुणा कर देना।

Exam Tips:

a) प्रश्न को दो भागों में बांटें - पहले मोल निकालें, फिर द्रव्यमान और अंत में आयतन।
b) इकाई परिवर्तन (Conversion) बहुत सावधानी से करें।
c) उत्तर mL या L दोनों में सही मात्रक के साथ लिखें।

 

Question 13: दाब को प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया जाता है। दाब का SI मात्रक पास्कल नीचे दिया गया है— 1 Pa = 1 N m⁻²
यदि समुद्र तल पर हवा का द्रव्यमान 1034 g cm⁻² हो, तो पास्कल में दाब का परिकलन कीजिए।

Answer:

दाब का सूत्र P = F/A होता है। यहाँ बल (F) द्रव्यमान के कारण लगने वाला भार है, जो F = m × g होता है।
दिया है: प्रति इकाई क्षेत्रफल द्रव्यमान m = 1034 g cm⁻² = 1034 g / cm²
त्वरण g = 9.8 m s⁻²
इसे SI मात्रक (kg और m) में बदलते हैं:
द्रव्यमान m = 1034 g = 1.034 kg
क्षेत्रफल A = 1 cm² = 10⁻⁴ m²
अतः दाब P = (1.034 kg × 9.8 m s⁻²) ÷ (10⁻⁴ m²)
P = 1.01332 × 10⁵ kg m⁻¹ s⁻² = 1.01332 × 10⁵ Pa

मुख्य बिंदु:

• दाब का SI मात्रक पास्कल (Pa) या N m⁻² है।
• g cm⁻² को kg m⁻² में बदलने के लिए उचित रूपांतरण गुणांक का उपयोग करते हैं।
• गुरुत्वीय त्वरण g का मान 9.8 m/s² होता है।

आम गलतियाँ:

• cm² को m² में बदलते समय घात (10⁻⁴) की गलती करना।
• ग्राम को किलोग्राम में बदलना भूल जाना।
• सूत्र में मान रखते समय मात्रकों की एकरूपता न रखना।

Exam Tips:

a) सभी राशियों को गणना से पहले SI पद्धति में बदल लें।
b) वैज्ञानिक संकेतन (Scientific notation) का सही प्रयोग करें।
c) पास्कल और N m⁻² एक ही बात है, इसे स्पष्ट रखें।

 

Question 14: द्रव्यमान का SI मात्रक क्या है? इसे किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?

Answer:

द्रव्यमान का SI मात्रक किलोग्राम (kg) है। 1 किलोग्राम को अंतरराष्ट्रीय बाट और माप ब्यूरो (International Bureau of Weights and Measures) द्वारा रखे गए प्लैटिनम-इरीडियम मिश्रधातु के बेलन के द्रव्यमान के रूप में परिभाषित किया जाता था। हाल ही में (2019 से) इसे प्लांक नियतांक (Planck's constant, h) के सटीक संख्यात्मक मान के आधार पर पुनर्गठित किया गया है, जहाँ सेकंड और मीटर के संदर्भ में इसकी सटीक परिभाषा दी जाती है।

मुख्य बिंदु:

• द्रव्यमान का SI मात्रक किलोग्राम (kg) है।
• यह पदार्थ की मात्रा का मूलभूत गुण है जो स्थान बदलने पर नहीं बदलता।
• आधुनिक परिभाषा मूल भौतिकीय नियतांकों पर आधारित है।

आम गलतियाँ:

• द्रव्यमान और भार को एक ही समझ लेना (भार गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है, द्रव्यमान नहीं)।
• केवल ग्राम लिखना जबकि SI मात्रक किलोग्राम है।
• परिभाषा में प्रोटोटाइप या प्लांक नियतांक का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) परिभाषा स्पष्ट और संक्षिप्त लिखें।
b) SI मात्रक का नाम और उसका प्रतीक (kg) दोनों स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) द्रव्यमान और भार का मूलभूत अंतर हमेशा याद रखें।

 

Question 15: निम्नलिखित पूर्व-लग्नों को उनके गुणांकों के साथ मिलाइए—
(i) माइक्रो (ii) डेका (iii) मेगा (iv) गिगा (v) फेम्टा

Answer:

विभिन्न पूर्व-लग्न (Prefixes) विज्ञान में बहुत छोटी या बहुत बड़ी संख्याओं को दर्शाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इनके सही गुणांक इस प्रकार हैं:
(i) माइक्रो (Micro) = 10⁻⁶
(ii) डेका (Deca) = 10¹ (या 10)
(iii) मेगा (Mega) = 10⁶
(iv) गिगा (Giga) = 10⁹
(v) फेम्टा (Femto) = 10⁻¹⁵

मुख्य बिंदु:

• पूर्व-लग्न SI मात्रकों के आगे लगकर उनके मान को गुणा या भाग करते हैं।
• ऋणात्मक घातें छोटी संख्याओं (जैसे माइक्रो, नैनो, फेम्टा) के लिए होती हैं।
• धनात्मक घातें बड़ी संख्याओं (जैसे किलो, मेगा, गिगा) के लिए होती हैं।

आम गलतियाँ:

• मेगा (10⁶) और माइक्रो (10⁻⁶) की घातों के चिन्ह में भ्रमित होना।
• डेका और डेसी के मानों में अंतर न समझ पाना।
• फेम्टा और पिको के मानों को आपस में मिला देना।

Exam Tips:

a) सभी प्रमुख पूर्व-लग्न (किलो, मेगा, गिगा, मिली, माइक्रो, नैनो, पिको, फेम्टा) की एक सूची बनाकर याद करें।
b) घातों के धनात्मक और ऋणात्मक चिन्हों पर विशेष ध्यान दें।
c) मिलान वाले प्रश्नों में तीर के निशान से स्पष्ट उत्तर दिखाएं।

 

Question 16: सार्थक अंकों से आप क्या समझते हैं?

Answer:

सार्थक अंक वे सभी निश्चित अंक होते हैं किसी माप में जिनके साथ एक अनिश्चित (अंतिम) अंक भी शामिल होता है। ये किसी प्रयोग या गणना में माप की यथार्थता (Precision) को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी मापन का परिणाम 15.6 mL है, तो इसमें 15 निश्चित है और 6 अनिश्चित है, अतः सार्थक अंकों की कुल संख्या 3 है। सार्थक अंक हमें यह बताते हैं कि किसी संख्या में कितनी विश्वसनीयता है।

मुख्य बिंदु:

• सभी अशून्य अंक सार्थक होते हैं।
• दो अशून्य अंकों के बीच आने वाले सभी शून्य सार्थक होते हैं।
• संख्या के प्रारंभ के शून्य सार्थक नहीं होते, वे केवल दशमलव की स्थिति बताते हैं।

आम गलतियाँ:

• दशमलव संख्या में शुरुआती शून्यों को सार्थक अंक मान लेना।
• वैज्ञानिक संकेतन में घातों को सार्थक अंकों में गिन लेना।
• अंतिम अनिश्चित अंक को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) सार्थक अंक निकालने के सभी नियम (Rules) उदाहरण सहित याद रखें।
b) परीक्षा में परिभाषा के साथ एक स्पष्ट उदाहरण जरूर लिखें।
c) गणना में उत्तर को न्यूनतम सार्थक अंकों तक राउंड ऑफ करना सीखें।

 

Question 17: पेय जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म, जो कैंसरजनक है, से अत्यधिक संदूषित पाया गया। संदूषण का स्तर 15 ppm (द्रव्यमान के रूप में) था।
(i) इसे द्रव्यमान प्रतिशतता में दर्शाइए।
(ii) जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म की मोललता ज्ञात कीजिए।

Answer:

(i) ppm (Parts per million) का अर्थ प्रति दस लाख भागों में उपस्थित भाग होता है। 15 ppm का अर्थ है कि 10⁶ ग्राम विलयन में 15 ग्राम क्लोरोफॉर्म उपस्थित है।
द्रव्यमान प्रतिशतता = (क्लोरोफॉर्म का द्रव्यमान ÷ विलयन का कुल द्रव्यमान) × 100
= (15 ÷ 10⁶) × 100 = 15 × 10⁻⁴ = 0.0015%
(ii) चूँकि विलयन बहुत dilute है, 1 लीटर जल का द्रव्यमान लगभग 1000 ग्राम माना जा सकता है।
क्लोरोफॉर्म (CHCl₃) का मोलर द्रव्यमान = 12.0 + 1.0 + (3 × 35.5) = 119.5 g/mol
1000 ग्राम जल में क्लोरोफॉर्म के मोल = 15 g ÷ 119.5 g/mol = 0.1255 mol
अतः विलयन की मोललता = (विलेय के मोल ÷ विलायक का द्रव्यमान kg में) = 0.1255 mol ÷ 1 kg = 0.125 mol kg⁻¹ (या 1.25 × 10⁻⁴ m)

मुख्य बिंदु:

• ppm का सूत्र: (अवयव के भाग ÷ कुल भाग) × 10⁶ होता है।
• मोललता (m) प्रति किलोग्राम विलायक में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या है।
• CHCl₃ का मोलर द्रव्यमान 119.5 g/mol होता है।

आम गलतियाँ:

• ppm को प्रतिशत में बदलते समय 10⁶ के बजाय 100 से भाग देना।
• मोललता और मोलरता को एक ही समझ लेना।
• विलायक के द्रव्यमान को ग्राम में ही रखकर मोललता निकालना (इसे kg में बदलना अनिवार्य है)।

Exam Tips:

a) ppm का अर्थ स्पष्ट रूप से समझें (parts per million = 10⁶)।
b) तनु विलयनों के लिए विलयन का द्रव्यमान लगभग विलायक के बराबर माना जा सकता है।
c) मोललता की इकाई mol kg⁻¹ (या m) होती है।

 

Question 18: निम्नलिखित को वैज्ञानिक संकेतन में लिखिए—
(i) 0.0048 (ii) 234,000 (iii) 8008 (iv) 500.0 (v) 6.0012

Answer:

वैज्ञानिक संकेतन (Scientific notation) में किसी संख्या को N × 10ⁿ के रूप में लिखा जाता है, जहाँ N एक अंक (1 से 10 के बीच) और n एक पूर्णांक है।
(i) 0.0048 = 4.8 × 10⁻³
(ii) 234,000 = 2.34 × 10⁵
(iii) 8008 = 8.008 × 10³
(iv) 500.0 = 5.000 × 10²
(v) 6.0012 = 6.0012 × 10⁰ (या बिना 10 की घात के)

मुख्य बिंदु:

• दशमलव बिंदु को पहले अशून्य अंक के बाद खिसकाया जाता है।
• यदि दशमलव दाईं ओर जाता है, तो 10 की घात ऋणात्मक होती है।
• यदि दशमलव बाईं ओर जाता है, तो 10 की घात धनात्मक होती है।

आम गलतियाँ:

• 1 से 10 के बीच की शर्त भूलकर संख्या को 48 × 10⁻⁴ लिख देना।
• दाईं और बाईं ओर दशमलव खिसकाते समय घात के चिन्ह की गलती करना।
• सार्थक शून्यों को छोड़ देना (जैसे 500.0 में शून्यों को हटा देना)।

Exam Tips:

a) दशमलव को हमेशा पहले सार्थक अंक के बाद ही स्थापित करें।
b) गिने कि दशमलव कितने स्थान चला है, वही 10 की घात बनेगी।
c) सार्थक अंकों की संख्या वैज्ञानिक संकेतन में भी समान रहती है।

 

Question 19: निम्नलिखित में सार्थक अंकों की संख्या बताइए—
(i) 0.0025 (ii) 208 (iii) 5005 (iv) 126,000 (v) 500.0 (vi) 2.0034

Answer:

सार्थक अंकों के नियमों के अनुसार दी गई संख्याओं में सार्थक अंकों की संख्या निम्नलिखित है:
(i) 0.0025 में 2 सार्थक अंक हैं (शुरुआती शून्य सार्थक नहीं होते)।
(ii) 208 में 3 सार्थक अंक हैं (दो अशून्य अंकों के बीच का शून्य सार्थक होता है)।
(iii) 5005 में 4 सार्थक अंक हैं।
(iv) 126,000 में मानक रूप से 3 सार्थक अंक माने जाते हैं (यदि दशमलव न हो), लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसे स्पष्ट किया जाता है (यहाँ 3 या 6 हो सकते हैं, सामान्यतः 3)।
(v) 500.0 में 4 सार्थक अंक हैं (दशमलव के बाद के शून्य भी सार्थक होते हैं)।
(vi) 2.0034 में 5 सार्थक अंक हैं।

मुख्य बिंदु:

• दशमलव के बाद और अंत में आने वाले शून्य सार्थक होते हैं।
• संख्या के प्रारंभ के शून्य कभी सार्थक नहीं होते।
• पूर्ण संख्याओं में अंत के शून्यों को लेकर अस्पष्टता हो सकती है जिसे वैज्ञानिक संकेतन दूर करता है।

आम गलतियाँ:

• 0.0025 में सभी अंकों को गिन लेना।
• 500.0 में दशमलव के बाद के शून्य को न गिनना।
• बीच के शून्यों को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) नियम याद रखें: आगे के शून्य नहीं गिने जाते, बीच के और पीछे (दशमलव के साथ) के शून्य गिने जाते हैं।
b) बोर्ड परीक्षा में ऐसे प्रश्न बहुविकल्पीय या एक अंक में पूछे जाते हैं।
c) संदेह होने पर संख्या को वैज्ञानिक संकेतन में बदलकर सार्थक अंक देखें।

 

Question 20: निम्नलिखित को तीन सार्थक अंकों तक निक्रटित (Round off) कीजिए—
(i) 34.216 (ii) 10.4107 (iii) 0.04597 (iv) 2808

Answer:

राउंडिंग ऑफ करने के नियम के अनुसार, यदि हटाया जाने वाला अंक 5 से अधिक है तो पूर्ववर्ती अंक में 1 जोड़ देते हैं, और यदि 5 से कम है तो उसे वैसे ही छोड़ देते हैं:
(i) 34.216 को तीन सार्थक अंकों तक निक्रटित करने पर 34.2 होगा (चूंकि अगला अंक 1 है, जो 5 से कम है)।
(ii) 10.4107 का निक्रटित मान 10.4 होगा।
(iii) 0.04597 का निक्रटित मान 0.0460 होगा (चूंकि 9 के बाद 7 है, जो 5 से अधिक है, अतः 9 बढ़कर 10 हो जाता है)।
(iv) 2808 का निक्रटित मान 2.81 × 10³ (या 2810) होगा।

मुख्य बिंदु:

• निक्रटण (Rounding off) करते समय चौथे अंक को देखा जाता है।
• यदि चौथा अंक 5 से बड़ा हो, तो तीसरे अंक में 1 जोड़ दिया जाता है।
• यदि चौथा अंक 5 से छोटा हो, तो तीसरा अंक अपरिवर्तित रहता है।

आम गलतियाँ:

• 0.04597 को गलत तरीके से 0.045 लिख देना (सही मान 0.046 है)।
• बड़ी संख्याओं (जैसे 2808) में दहाई या सैकड़े के स्थान को गलत राउंड करना।
• सार्थक अंकों की गिनती में शुरुआती शून्यों को शामिल करना।

Exam Tips:

a) जितने अंकों तक कहा जाए, उसके ठीक बाद वाले अंक पर नजर रखें।
b) यदि अंक 5 हो और उसके आगे कोई अशून्य अंक हो, तो पिछला अंक बढ़ा दें।
c) बड़ी संख्याओं में वैज्ञानिक संकेतन का प्रयोग करें ताकि भ्रम न हो।

 

Question 21: (क) जब डाइनाइट्रोजन और डाइऑक्सीजन अभिक्रिया द्वारा भिन्न यौगिक बनाती हैं, तो निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त होते हैं—
[नाइट्रोजन का द्रव्यमान 14g, 14g, 28g, 28g तथा ऑक्सीजन का द्रव्यमान 16g, 32g, 32g, 80g]
ये प्रायोगिक आँकड़े रासायनिक संयोजन के किस नियम के अनुरूप हैं?
(ख) निम्नलिखित में रिक्त स्थान को भरिए—
(i) 1 km = ............ mm = ............ pm
(ii) 1 mg = ............ kg = ............ ng
(iii) 1 mL = ............ L = ............ dm³

Answer:

(क) यहाँ नाइट्रोजन के निश्चित द्रव्यमान (मान लीजिए 28 g) के साथ संयोग करने वाली ऑक्सीजन की मात्राओं का अनुपात 32 g, 64 g, 32 g और 80 g है, जो कि 1 : 2 : 1 : 2.5 या सरल पूर्ण संख्या अनुपात 2 : 4 : 2 : 5 है। यह आँकड़ा 'गुणित अनुपात का नियम' (Law of Multiple Proportions) को दर्शाता है, जो जॉन डाल्टन द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
(ख) रिक्त स्थानों की पूर्ति:
(i) 1 km = 10⁶ mm = 10¹⁵ pm
(ii) 1 mg = 10⁻⁶ kg = 10⁶ ng
(iii) 1 mL = 10⁻³ L = 10⁻³ dm³

मुख्य बिंदु:

• गुणित अनुपात का नियम कहता है कि जब दो तत्व मिलकर दो या अधिक यौगिक बनाते हैं, तो एक तत्व के निश्चित द्रव्यमान से मिलने वाले दूसरे तत्व के द्रव्यमान सरल गुणक अनुपात में होते हैं।
• 1 km = 1000 m = 10⁶ mm होता है।
• 1 mL और 1 cm³ आयतन में बराबर होते हैं, अतः 1 mL = 10⁻³ dm³ होता है।

आम गलतियाँ:

• रासायनिक संयोजन के नियमों (स्थिर अनुपात, गुणित अनुपात आदि) में भ्रमित होना।
• इकाई रूपांतरण में घातों (+ और -) की गलती करना।
• dm³ और L के संबंध को गलत समझना।

Exam Tips:

a) रासायनिक संयोजन के पाँचों नियमों की परिभाषा और एक-एक उदाहरण याद रखें।
b) इकाई परिवर्तन के लिए मीट्रिक प्रणाली की घातें अच्छे से कंठस्थ करें।
c) भाग (क) में पहले किसी एक तत्व का द्रव्यमान स्थिर करके अनुपात निकालें।

 

Question 22: यदि प्रकाश का वेग 3.0 × 10⁸ m s⁻¹ हो, तो 2.00 ns में प्रकाश कितनी दूरी तय करेगा?

Answer:

दूरी ज्ञात करने का सूत्र है: दूरी = वेग × समय
दिया है: प्रकाश का वेग (v) = 3.0 × 10⁸ m s⁻¹
समय (t) = 2.00 ns = 2.00 × 10⁻⁹ s (चूंकि 1 ns = 10⁻⁹ s होता है)
अतः तय की गई दूरी = (3.0 × 10⁸ m s⁻¹) × (2.00 × 10⁻⁹ s)
दूरी = 3.0 × 2.00 × 10⁸⁻⁹ m = 6.0 × 10⁻¹ m = 0.60 m (या 60 cm)

मुख्य बिंदु:

• नैनोसेकंड (ns) को सेकंड में बदलने के लिए 10⁻⁹ से गुणा करते हैं।
• दूरी, वेग और समय का मूल संबंध: दूरी = वेग × समय है।
• उत्तर को उचित सार्थक अंकों (दो सार्थक अंक) में व्यक्त किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• नैनोसेकंड को सीधे सेकंड मानकर गणना करना (10⁻⁹ भूल जाना)।
• 10 की घातों को गुणा करते समय घातांकों के नियम गलत लगाना (8 + (-9) = -1)।
• मात्रक लिखना भूल जाना।

Exam Tips:

a) मान रखते समय सभी राशियों को SI मात्रक में बदलें।
b) घातांकों की गणना सावधानी से करें।
c) अंतिम उत्तर के साथ मीटर (m) मात्रक अवश्य लिखें।

 

Question 23: किसी अभिक्रिया A + B₂ → AB₂ में निम्नलिखित अभिक्रिया मिश्रणों में सीमांत अभिकर्मक (यदि कोई हो, तो) ज्ञात कीजिए—
(i) A के 300 परमाणु + B के 200 अणु
(ii) 2 मोल A + 3 मोल B
(iii) A के 100 परमाणु + B के 100 अणु
(iv) A के 5 मोल + B के 2.5 मोल
(v) A के 2.5 मोल + B के 5 मोल

Answer:

संतुलित समीकरण A + B₂ → AB₂ के अनुसार, A का 1 परमाणु B₂ के 1 अणु के साथ पूरी तरह संयोग करता है।
(i) 300 परमाणु A और 200 अणु B₂ दिए हैं। चूँकि 200 अणु B₂ के लिए केवल 200 परमाणु A चाहिए, A के 100 परमाणु शेष बच जाएंगे। अतः B₂ सीमांत अभिकर्मक है।
(ii) 2 मोल A और 3 मोल B₂ में, A पूरी तरह उपभोग हो जाएगा। अतः A सीमांत अभिकर्मक है।
(iii) 100 परमाणु A और 100 अणु B₂ में दोनों पूर्ण रूप से क्रिया कर लेंगे। यहाँ कोई सीमांत अभिकर्मक नहीं है।
(iv) A के 5 मोल और B के 2.5 मोल में, B₂ कम मात्रा में है (2.5 मोल)। अतः B₂ सीमांत अभिकर्मक है।
(v) A के 2.5 मोल और B के 5 मोल में, A कम मात्रा में है (2.5 मोल)। अतः A सीमांत अभिकर्मक है।

मुख्य बिंदु:

• सीमांत अभिकर्मक वह पदार्थ है जो अभिक्रिया में पहले समाप्त हो जाता है।
• यह उत्पाद की मात्रा को नियंत्रित करता है।
• संतुलित समीकरण के स्टोइकोमेट्रिक गुणांक यह तय करते हैं कि कौन सीमांत है।

आम गलतियाँ:

• जिसकी मात्रा अधिक हो, उसे सीमांत अभिकर्मक समझ लेना।
• समीकरण के अनुपात (1:1) को ध्यान में न रखना।
• मोल और परमाणुओं की तुलना में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) हमेशा संतुलित समीकरण का अनुपात पहले देखें।
b) जो अभिकारक stoichiometry अनुपात से कम मात्रा में हो, वही सीमांत होता है।
c) यदि दोनों सही अनुपात में हों, तो लिखें कि 'कोई सीमांत अभिकर्मक नहीं है'।

 

Question 24: डाइनाइट्रोजन और डाइहाइड्रोजन निम्नलिखित रासायनिक समीकरण के अनुसार अमोनिया बनाते हैं— N₂(g) + 3H₂(g) → 2NH₃(g)
(i) यदि 2.00 × 10³ g डाइनाइट्रोजन 1.00 × 10³ g डाइहाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करती है, तो प्राप्त अमोनिया के द्रव्यमान का परिकलन कीजिए।
(ii) क्या दोनों में से कोई अभिकर्मक शेष बचेगा?
(iii) यदि हाँ, तो कौन-सा उसका द्रव्यमान क्या होगा?

Answer:

समीकरण N₂ (g) + 3H₂ (g) → 2NH₃ (g) के अनुसार, 28 g N₂ पूरी तरह 6 g H₂ के साथ क्रिया करके 34 g NH₃ बनाती है।
(i) दिया है: N₂ का द्रव्यमान = 2000 g (या 71.43 mol), H₂ का द्रव्यमान = 1000 g (या 500 mol)। गणना करने पर N₂ सीमांत अभिकर्मक है क्योंकि यह पहले समाप्त होगी। 2000 g N₂ से निर्मित अमोनिया का द्रव्यमान = (34 g ÷ 28 g) × 2000 g = 2428.57 g.
(ii) हाँ, डाइहाइड्रोजन (H₂) आधिक्य अभिकर्मक है अतः यह शेष बचेगी जबकि N₂ पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
(iii) शेष बची डाइहाइड्रोजन का द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए: 2000 g N₂ के साथ क्रिया करने वाली H₂ की मात्रा = (6 ÷ 28) × 2000 = 428.6 g. अतः शेष H₂ = 1000 g - 428.6 g = 571.4 g.

मुख्य बिंदु:

• सीमांत अभिकर्मक उत्पाद की मात्रा निर्धारित करता है।
• N₂ का मोलर द्रव्यमान 28 g/mol और H₂ का 2 g/mol है।
• अमोनिया (NH₃) का मोलर द्रव्यमान 17 g/mol है।

आम गलतियाँ:

• H₂ को सीमांत मान लेना जबकि N₂ पहले समाप्त होती है।
• शेष बचे अभिकारक का द्रव्यमान निकालते समय प्रारंभिक मात्रा से गलत घटाना।
• स्टोइकोमेट्रिक गुणांकों (जैसे 3H₂) को भूल जाना।

Exam Tips:

a) दोनों अभिकारकों के मोल निकालकर सीमांत अभिकर्मक की सटीक पहचान करें।
b) उत्पाद की गणना हमेशा सीमांत अभिकर्मक के आधार पर ही करें।
c) शेष बचे अभिकारक के लिए (प्रारंभिक मात्रा - प्रयुक्त मात्रा) का सूत्र लगाएँ।

 

Question 25: 0.50 mol Na₂CO₃ और 0.50 M Na₂CO₃ में क्या अंतर है?

Answer:

0.50 mol Na₂CO₃ का अर्थ है सोडियम कार्बोनेट के मोलों की निश्चित संख्या, जिसका द्रव्यमान 0.50 × 106 = 53 ग्राम होता है (चूँकि Na₂CO₃ का मोलर द्रव्यमान 106 g/mol है)। दूसरी ओर, 0.50 M Na₂CO₃ विलयन की मोलरता को दर्शाता है, जिसका अर्थ है कि सोडियम कार्बोनेट के 0.50 मोल 1 लीटर (1000 mL) जलीय विलयन में घुले हुए हैं। संक्षेप में, पहला पद पदार्थ की निश्चित मात्रा (मोल) को बताता है जबकि दूसरा पद विलयन की सांद्रता को व्यक्त करता है।

मुख्य बिंदु:

• mol किसी पदार्थ के कणों या मात्रा की निरपेक्ष संख्या बताता है।
• M (मोलरता) विलयन के आयतन पर निर्भर करती है (mol L⁻¹)।
• Na₂CO₃ का मोलर द्रव्यमान 106 g mol⁻¹ होता है।

आम गलतियाँ:

• मोल और मोलरता को एक ही समझ लेना।
• यह सोचना कि 0.50 M का मतलब भी 53 ग्राम पदार्थ ही होता है (आयतन की उपेक्षा करना)।
• मात्रकों के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।

Exam Tips:

a) परिभाषा स्पष्ट रूप से लिखें - एक मात्रा है और दूसरा सांद्रता है।
b) दोनों के गणितीय अर्थ (जैसे 1 लीटर विलयन) का उल्लेख करें।
c) अंतर स्पष्ट करने के लिए उदाहरण दें।

 

Question 26: यदि डाइहाइड्रोजन गैस के 10 आयतन डाइऑक्सीजन गैस के 5 आयतन के साथ अभिक्रिया करें, तो जलवाष्प के कितने आयतन प्राप्त होंगे?

Answer:

गेलुसैक का गैसीय आयतन का नियम (Gay Lussac's Law of Gaseous Volumes) के अनुसार, जब गैसें आपस में अभिक्रिया करती हैं तो उनके आयतनों में सरल पूर्ण संख्या अनुपात होता है।
अभिक्रिया की संतुलित समीकरण है: 2H₂ (g) + O₂ (g) → 2H₂O (g)
समीकरण स्पष्ट करती है कि डाइहाइड्रोजन के 2 आयतन, डाइऑक्सीजन के 1 आयतन के साथ क्रिया करके जलवाष्प के 2 आयतन बनाते हैं।
अतः डाइहाइड्रोजन के 10 आयतन, डाइऑक्सीजन के 5 आयतन के साथ पूरी तरह क्रिया करके जलवाष्प के 10 आयतन उत्पन्न करेंगे।

मुख्य बिंदु:

• गैसीय अभिक्रियाओं में आयतन का अनुपात स्टोइकोमेट्रिक गुणांकों के अनुपात के बराबर होता है।
• 2 आयतन H₂ और 1 आयतन O₂ मिलकर 2 आयतन H₂O बनाते हैं।
• यहाँ कोई भी गैस शेष नहीं बचेगी क्योंकि वे सही stoichiometric अनुपात में हैं।

आम गलतियाँ:

• आयतनों को सीधे जोड़ देना (10 + 5 = 15 मान लेना)।
• संतुलित समीकरण के गुणांकों को ध्यान में न रखना।
• जलवाष्प की भौतिक अवस्था (गैसीय) को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) गेलुसैक का नियम याद रखें - गैसीय आयतन सीधे मोल अनुपात के समानुपाती होते हैं।
b) समीकरण लिखकर गुणांकों से मिलान करें।
c) उत्तर स्पष्ट शब्दों में (जैसे '10 आयतन') लिखें।

 

Question 27: निम्नलिखित को मूल मात्रकों में परिवर्तित कीजिए— (i) 28.7 pm (ii) 15.15 pm (iii) 25365 mg

Answer:

मूल मात्रक (SI units) लंबाई के लिए मीटर (m) और द्रव्यमान के लिए किलोग्राम (kg) होता है।
(i) 28.7 pm = 28.7 × 10⁻¹² m = 2.87 × 10⁻¹¹ m (चूंकि 1 pm = 10⁻¹² m)
(ii) 15.15 pm = 15.15 × 10⁻¹² m = 1.515 × 10⁻¹¹ m
(iii) 25365 mg = 25365 × 10⁻³ g = 25365 × 10⁻⁶ kg = 2.5365 × 10⁻² kg (चूंकि 1 mg = 10⁻⁶ kg)

मुख्य बिंदु:

• पिकोमीटर (pm) को मीटर में बदलने के लिए 10⁻¹२ से गुणा करते हैं।
• मिलिग्राम (mg) को किलोग्राम (kg) में बदलने के लिए 10⁻⁶ से गुणा करते हैं।
• वैज्ञानिक संकेतन (Scientific notation) का प्रयोग मानक रूप में दर्शाने के लिए किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• पिकोमीटर में 10⁻⁹ (नैनो) या 10⁻⁶ (माइक्रो) लिख देना।
• मिलिग्राम को ग्राम में बदलकर छोड़ देना, जबकि द्रव्यमान का SI मात्रक किलोग्राम है।
• दशमलव खिसकाते समय 10 की घात की गलती करना।

Exam Tips:

a) सभी पूर्व-लग्रों के मान (जैसे pico = 10⁻¹², milli = 10⁻³) याद रखें।
b) SI मात्रक का विशेष ध्यान रखें (लंबाई → m, द्रव्यमान → kg)।
c) वैज्ञानिक संकेतन में उत्तर लिखकर समाप्त करें।

 

Question 28: निम्नलिखित में से किसमें परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक होगी?
(i) 1 g Au(s) (ii) 1 g Na(s) (iii) 1 g Li(s) (iv) 1 g Cl₂(g)

Answer:

किसी पदार्थ में परमाणुओं की संख्या = (दو दिया गया द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान) × आवोगाद्रो संख्या (N_A) × परमाणुकता होती है। जिसका मोलर द्रव्यमान सबसे कम होगा, उसके 1 ग्राम में मोलों की संख्या सबसे अधिक होगी और परिणामस्वरूप परमाणुओं की संख्या भी सबसे अधिक होगी।
(i) Au के 1 g में परमाणु = (1 ÷ 197) × 6.022 × 10²³ = 0.0306 × 10²³
(ii) Na के 1 g में परमाणु = (1 ÷ 23) × 6.022 × 10²³ = 0.262 × 10²³
(iii) Li के 1 g में परमाणु = (1 ÷ 7) × 6.022 × 10²³ = 0.860 × 10²³
(iv) Cl₂ के 1 g में परमाणु = (1 ÷ 71) × 2 × 6.022 × 10²³ = 0.169 × 10²³
स्पष्ट है कि (iii) 1 g Li(s) में परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक होगी क्योंकि लिथियम का परमाणु द्रव्यमान सबसे कम (7 u) है।

मुख्य बिंदु:

• दिए गए द्रव्यमान के लिए, हल्का तत्व होने पर मोलों की संख्या अधिक होती है।
• द्विपरमाणुक गैस (जैसे Cl₂) के लिए मोलों को 2 से गुणा करके परमाणु निकालते हैं।
• आवोगाद्रो संख्या सभी के लिए समान होती है।

आम गलतियाँ:

• केवल मोलर द्रव्यमान देखकर यह मान लेना कि भारी तत्व में परमाणु ज्यादा होंगे।
• Cl₂ को परमाणु मान लेना, जबकि यह द्विपरमाणुक अणु है।
• गणना किए बिना सीधा तुक्का लगाना।

Exam Tips:

a) यह अवधारणा याद रखें: 'मोल = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान'। जिसका मोलर द्रव्यमान सबसे कम, उसके मोल सबसे ज्यादा।
b) धातुओं (Au, Na, Li) की परमाणुकता 1 होती है, लेकिन Cl₂ की 2 होती है।
c) संक्षिप्त गणना करके सही विकल्प चुनें।

 

Question 29: एथनॉल के ऐसे जलीय विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिए, जिसमें एथनॉल का मोल-अंश 0.040 है। (मान लें कि जल का घनत्व 1 है।)

Answer:

मान लेते हैं विलयन में एथनॉल (C₂H₅OH) के मोल n₁ और जल (H₂O) के मोल n₂ हैं।
एथनॉल का मोल-अंश X₁ = n₁ ÷ (n₁ + n₂) = 0.040 दिया है। इसका अर्थ है कि n₂ ÷ (n₁ + n₂) = 0.960 है।
1 लीटर (1000 g) जल में मोलों की संख्या n₂ = 1000 ÷ 18 = 55.55 mol.
मोल-अंश के सूत्र से एथनॉल के मोल n₁ निकाले जा सकते हैं: n₁ = (0.040 × 55.55) ÷ (1 - 0.040) = 2.222 ÷ 0.96 = 2.314 mol.
चूँकि विलयन का आयतन लगभग 1 लीटर है, इस विलयन की मोलरता 2.314 M (mol L⁻¹) होगी।

मुख्य बिंदु:

• मोल-अंश (Mole fraction) किसी घटक के मोलों और कुल मोलों का अनुपात होता है।
• जल का मोलर द्रव्यमान 18 g/mol होता है।
• तनु जलीय विलयनों में 1 लीटर जल के मोल लगभग 55.55 होते हैं।

आम गलतियाँ:

• मोल-अंश और मोलरता के संबंधों में भ्रमित होना।
• 1 लीटर जल के मोल (55.55) का सही उपयोग न करना।
• गणना में दशमलव स्थानों की गलती करना।

Exam Tips:

a) जल के मोल (55.55) को एक मानक मान के रूप में याद रखें।
b) मोल-अंश के समीकरण को पक्षांतर करके विलेय के मोल निकालें।
c) मोलरता की इकाई mol L⁻¹ या M लिखें।

 

Question 30: एक ¹²C कार्बन परमाणु का ग्राम (g) में द्रव्यमान क्या होगा?

Answer:

एक मोल ¹²C कार्बन परमाणु का द्रव्यमान 12 ग्राम होता है और एक मोल में उपस्थित परमाणुओं की संख्या आवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10²³) के बराबर होती है।
अतः एक ¹²C परमाणु का द्रव्यमान = (1 मोल कार्बन का द्रव्यमान) ÷ (आवोगाद्रो संख्या)
= 12 g ÷ (6.022 × 10²³ परमाणु)
= 1.993 × 10⁻²³ ग्राम

मुख्य बिंदु:

• 1 मोल = 6.022 × 10²³ कण होता है।
• कार्बन-12 समस्थानिक का मोलर द्रव्यमान ठीक 12 g/mol माना जाता है।
• एक परमाणु का द्रव्यमान बहुत सूक्ष्म होता है, इसलिए घात ऋणात्मक (10⁻²³) आती है।

आम गलतियाँ:

• आवोगाद्रो संख्या से गुणा कर देना जबकि यहाँ भाग देना होता है।
• 12 ग्राम को सीधे एक परमाणु का द्रव्यमान समझ लेना।
• वैज्ञानिक संकेतन में घातांक का चिन्ह गलत लगाना।

Exam Tips:

a) यह बहुत महत्वपूर्ण और बार-बार पूछा जाने वाला एक-नंबरिया प्रश्न है।
b) सूत्र याद रखें: एक परमाणु का द्रव्यमान = मोलर द्रव्यमान ÷ N_A
c) उत्तर हमेशा ग्राम (g) में 1.99 × 10⁻²³ के रूप में याद रखें।

 

Question 31: निम्नलिखित परिकलनों के उत्तर में कितने सार्थक अंक होने चाहिए?
(i) (0.02856 × 298.15 × 0.112) ÷ 0.5785
(ii) 5 × 5.364
(iii) 0.0125 + 0.7864 + 0.0215

Answer:

गुणा, भाग, जोड़ और घटाव के लिए सार्थक अंकों के नियम निम्नलिखित हैं:
(i) गुणा और भाग में उत्तर में उतने ही सार्थक अंक होने चाहिए जितने सबसे कम सार्थक अंकों वाली संख्या में हैं। यहाँ 0.112 में 3 सार्थक अंक सबसे कम हैं, अतः उत्तर में 3 सार्थक अंक होने चाहिए।
(ii) 5 एक पूर्ण संख्या (Exact number) है, और 5.364 में 4 सार्थक अंक हैं। यहाँ गुणनफल में 4 सार्थक अंक होंगे।
(iii) जोड़ और घटाव में उत्तर में दशमलव के बाद उतने ही अंक होने चाहिए जितने सबसे कम दशमलव स्थानों वाली संख्या में हैं। यहाँ प्रत्येक संख्या में दशमलव के बाद 4 अंक हैं, अतः उत्तर में भी दशमलव के बाद 4 सार्थक अंक (यानी कुल 4 सार्थक अंक) होंगे।

मुख्य बिंदु:

• गुणा/भाग में 'न्यूनतम सार्थक अंकों' का नियम लागू होता है।
• जोड़/घटाव में 'न्यूनतम दशमलव स्थानों' का नियम लागू होता है।
• पूर्ण संख्या (जैसे 5 या 2) के असीमित सार्थक अंक माने जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• जोड़ और गुणा के नियमों को आपस में मिला देना।
• पूर्ण संख्याओं को साधारण संख्या मानकर सार्थक अंक सीमित कर देना।
• दशमलव स्थानों और सार्थक अंकों को एक ही समझ लेना।

Exam Tips:

a) प्रश्न देखते ही पहचानें कि संक्रिया गुणा-भाग है या जोड़-घटाव।
b) न्यूनतम वाले पद को रेखांकित करके उत्तर के सार्थक अंक तय करें।
c) अंतिम परिणाम को हमेशा नियमों के अनुसार राउंड ऑफ करें।

 

Question 32: प्रकृति में उपलब्ध आर्गन के मोलर द्रव्यमान की गणना के लिए निम्नलिखित तालिका में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए—
[³⁶Ar: 35.96755 g mol⁻¹, 0.337%]
[³⁸Ar: 37.96272 g mol⁻¹, 0.063%]
[⁴⁰Ar: 39.9624 g mol⁻¹, 99.600%]

Answer:

आर्गन का औसत मोलर द्रव्यमान इसके सभी समस्थानिकों के मोलर द्रव्यमान और उनकी प्रतिशत बहुलता के गुणनफल के योग को 100 से भाग देकर निकाला जाता है:
आर्गन का मोलर द्रव्यमान = [(35.96755 × 0.337) + (37.96272 × 0.063) + (39.9624 × 99.600)] ÷ 100
= [12.121 + 2.392 + 3980.255] ÷ 100
= 3994.768 ÷ 100 = 39.947 g/mol

मुख्य बिंदु:

• यह भारित औसत (Weighted average) निकालने का मानक तरीका है।
• ⁴⁰Ar की प्रचुरता सबसे अधिक (99.6%) है, इसलिए आर्गन का औसत द्रव्यमान इसके बहुत करीब होगा।
• प्रतिशतता का योग 100% होना चाहिए।

आम गलतियाँ:

• 100 से भाग देना भूल जाना।
• द्रव्यमान और प्रतिशतता का गलत गुणा करना।
• दशमलव की गणना में त्रुटि करना।

Exam Tips:

a) तीनों समस्थानिकों के मानों को अलग-अलग कोष्ठक में हल करें।
b) उत्तर की प्रामाणिकता की जाँच करें (मान सबसे बड़े समस्थानिक के पास आना चाहिए)।
c) मात्रक g/mol लिखना न भूलें।

 

Question 33: निम्नलिखित में से प्रत्येक में परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए—
(i) 52 moles of Ar
(ii) 52 u He
(iii) 52 g He

Answer:

(i) आर्गन (Ar) के 52 मोल में परमाणुओं की संख्या = मोल × आवोगाद्रो संख्या
= 52 × 6.022 × 10²³ = 3.131 × 10²⁵ परमाणु
(ii) 52 u हीलियम (He) में हीलियम का 1 परमाणु 4 u का होता है, अतः परमाणुओं की संख्या = 52 u ÷ 4 u = 13 परमाणु
(iii) 52 g हीलियम में मोलों की संख्या = 52 g ÷ 4 g/mol = 13 मोल
अतः परमाणुओं की संख्या = 13 × 6.022 × 10²३ = 7.8286 × 10²⁴ परमाणु

मुख्य बिंदु:

• 'u' (परमाणु द्रव्यमान इकाई) एक परमाणु का भार बताता है, जबकि 'g' ग्राम में मोलर द्रव्यमान बताता है।
• मोलों की संख्या को आवोगाद्रो संख्या से गुणा करने पर कुल परमाणु मिलते हैं。
• हीलियम (He) एकपरमाणुक गैस है।

आम गलतियाँ:

-'52 u' और '52 g' को एक ही समझ लेना।
- u वाले भाग में आवोगाद्रो संख्या से गुणा कर देना (जो गलत है)।
- हीलियम का परमाणु द्रव्यमान 4 u के स्थान पर कुछ और रखना।

Exam Tips:

a) प्रश्न में इकाई ('u' या 'mol' या 'g') को बहुत ध्यान से पढ़ें।
b) u दिया हो तो सीधे परमाणु भार से भाग दें।
c) gram दिया हो तो पहले मोल निकालें, फिर आवोगाद्रो संख्या से गुणा करें।

 

Question 34: एक वेल्डिंग ईधन गैस में केवल कार्बन और हाइड्रोजन उपस्थित हैं। इसके नमूने की कुछ मात्रा ऑक्सीजन से जलाने पर 3.38 g कार्बन डाइऑक्साइड, 0.690 g जल के अतिरिक्त और कोई उत्पाद नहीं बनाती। इस गैस के 10.0 L (STP पर मापित) आयतन का भार 11.69 g पाया गया। इसके—
(i) मूलानुपाती सूत्र
(ii) अणु द्रव्यमान और
(iii) अणुसूत्र की गणना कीजिए।

Answer:

(i) CO₂ के 44 g में 12 g कार्बन होता है, अतः 3.38 g CO₂ में कार्बन का द्रव्यमान = (12 ÷ 44) × 3.38 = 0.9217 g.
जल (H₂O) के 18 g में 2 g हाइड्रोजन होता है, अतः 0.690 g H₂O में हाइड्रोजन का द्रव्यमान = (2 ÷ 18) × 0.690 = 0.0767 g.
कार्बन के मोल = 0.9217 ÷ 12 = 0.0768; हाइड्रोजन के मोल = 0.0767 ÷ 1 = 0.0768. अनुपात 1:1 है, अतः मूलानुपाती सूत्र CH है।
(ii) STP पर 10.0 L गैस का भार 11.69 g है, अतः 22.4 L (एक मोल) गैस का भार = (11.69 ÷ 10.0) × 22.4 = 26.18 g ≈ 26 g/mol (अणु द्रव्यमान)।
(iii) मूलानुपाती सूत्र भार (CH) = 12 + 1 = 13 है। n = अणु द्रव्यमान ÷ मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान = 26 ÷ 13 = 2.। अतः अणुसूत्र = (CH)₂ = C₂H₂ (एसिटिलीन)।

मुख्य बिंदु:

• दहन उत्पादों से कार्बन और हाइड्रोजन की मात्रा निकालकर मूलानुपाती सूत्र निकाला जाता है।
• STP पर किसी गैस के 1 मोल का आयतन 22.4 L होता है।
• अणुसूत्र = n × (मूलानुपाती सूत्र) होता है।

आम गलतियाँ:

• CO₂ और H₂O से सीधे C और H का द्रव्यमान निकालते समय अनुपातों (12/44 और 2/18) की गलती करना।
• STP पर मोलर आयतन (22.4 L) का उपयोग न करना।
• n का मान पूर्णांक न निकालकर सीधे सूत्र में रखना।

Exam Tips:

a) इस बड़े प्रश्न को तीनों भागों (मूलानुपाती सूत्र, मोलर द्रव्यमान, अणुसूत्र) में अलग-अलग हल करें।
b) दहन विश्लेषण के मानक सूत्रों का उपयोग करें।
c) अंत में जाँच लें कि C₂H₂ (एसिटिलीन) सही बैठता है या नहीं।

 

Question 35: CaCO₃, जलीय HCl के साथ निम्नलिखित अभिक्रिया कर CaCl₂ और CO₂ बनाता है:
CaCO₃(s) + 2HCl(aq) → CaCl₂(aq) + CO₂(g) + H₂O(l)
0.75 M HCl के 25 mL के साथ पूर्णतः अभिक्रिया करने के लिए CaCO₃ की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?

Answer:

सबसे पहले 0.75 M HCl के 25 mL में उपस्थित HCl के मोलों की संख्या ज्ञात करते हैं:
मोल्स = (मोलरता × आयतन mL में) ÷ 1000 = (0.75 mol/L × 25 mL) ÷ 1000 = 0.01875 mol HCl
समीकरण CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + CO₂ + H₂O के अनुसार, 2 मोल HCl पूरी तरह 1 मोल CaCO₃ (यानी 100 ग्राम) के साथ क्रिया करता है।
अतः 0.01875 mol HCl के साथ क्रिया करने वाले CaCO₃ के मोल = 0.01875 ÷ 2 = 0.009375 mol
CaCO₃ का मोलर द्रव्यमान = 40 + 12 + (3 × 16) = 100 g/mol
आवश्यक CaCO₃ का द्रव्यमान = मोल × मोलर द्रव्यमान = 0.009375 mol × 100 g/mol = 0.9375 ग्राम

मुख्य बिंदु:

• स्टोइकोमेट्रिक गुणांक यह बताते हैं कि 2 मोल HCl के लिए 1 मोल CaCO₃ चाहिए।
• मिलीलीटर को लीटर में बदलने के लिए 1000 से भाग दिया जाता है।
• CaCO₃ का मोलर द्रव्यमान 100 g/mol होता है।

आम गलतियाँ:

• समीकरण के गुणांक (2HCl) को ध्यान में रखे बिना सीधे 1:1 अनुपात मान लेना।
• आयतन को mL से L में बदलते समय भूल जाना।
• CaCO₃ का आणविक द्रव्यमान गलत निकालना।

Exam Tips:

a) रासायनिक समीकरण को संतुलित रूप में सबसे पहले लिखें।
b) मोल-मोल विश्लेषण (Mole-mole analysis) का उपयोग करें।
c) अंत में मोल को द्रव्यमान (ग्राम) में बदलना न भूलें।

 

Question 36: प्रयोगशाला में क्लोरीन का विरचन मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO₂) को जलीय HCl विलयन के साथ अभिक्रिया द्वारा निम्नलिखित समीकरण के अनुसार किया जाता है:
4HCl(aq) + MnO₂(s) → 2H₂O(l) + MnCl₂(aq) + Cl₂(g)
5.0 g मैंगनीज डाइऑक्साइड के साथ HCl के कितने ग्राम अभिक्रिया करेंगे?

Answer:

सबसे पहले MnO₂ का मोलर द्रव्यमान निकालते हैं:
Mn का परमाणु द्रव्यमान = 55 u, O = 16 u
MnO₂ का मोलर द्रव्यमान = 55 + (2 × 16) = 87 g/mol
दिए गए MnO₂ का द्रव्यमान = 5.0 g, अतः इसके मोल = 5.0 ÷ 87 = 0.0575 mol
संतुलित समीकरण के अनुसार, 1 मोल MnO₂ पूरी तरह 4 मोल HCl के साथ अभिक्रिया करता है।
अतः 0.0575 mol MnO₂ के साथ अभिक्रिया करने वाले HCl के मोल = 0.0575 × 4 = 0.230 mol
HCl का मोलर द्रव्यमान = 1 + 35.5 = 36.5 g/mol
आवश्यक HCl का द्रव्यमान = मोल × मोलर द्रव्यमान = 0.230 mol × 36.5 g/mol = 8.395 ग्राम (लगभग 8.4 g)

मुख्य बिंदु:

• संतुलित समीकरण के अनुसार 1 मोल MnO₂ के लिए 4 मोल HCl आवश्यक हैं।
• MnO₂ का मोलर द्रव्यमान 87 g/mol और HCl का 36.5 g/mol होता है।
• सीमांत अभिकर्मक अवधारणा की तरह यहाँ भी स्टोइकोमेट्री का प्रयोग होता है।

आम गलतियाँ:

• समीकरण के गुणांक (4HCl) को भूल जाना और 1:1 अनुपात मान लेना।
• मोल निकालने के बाद उसे HCl के ग्राम में बदलते समय मोलर द्रव्यमान से भाग दे देना (गुणा करना होता है)।
• परमाणु भार गलत रखना।

Exam Tips:

a) समीकरण लिखकर देखें कि किस पदार्थ के कितने मोल आपस में क्रिया कर रहे हैं।
b) पहले दिए गए पदार्थ के मोल निकालें, फिर समीकरण के अनुपात से दूसरे पदार्थ के मोल ज्ञात करें।
c) अंत में मोल को ग्राम में बदलकर उचित मात्रक लिखें।

 

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