Download NCERT Solutions for Class 10 Science Chapter 12 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
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Question 1: चुंबक के निकट लाने पर दिक् सूचक की सुई क्यों विक्षेपित हो जाती है?
Answer:
दिक् सूचक (compass) की सुई एक छोटा छड़ चुंबक होती है। जब हम किसी चुंबक को दिक् सूचक के निकट लाते हैं, तो चुंबक का अपना चुंबकीय क्षेत्र होता है जो दिक् सूचक की सुई के चुंबकीय क्षेत्र के साथ अन्योन्यक्रिया (interaction) करता है। चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव के कारण चुंबकीय बल सुई पर कार्य करता है, जिससे वह विक्षेपित हो जाती है।
मुख्य बिंदु:
• दिक् सूचक की सुई एक स्वतंत्र रूप से घूमने वाली छोटी छड़ चुंबक होती है。
• चुंबक का चुंबकीय क्षेत्र दिक् सूचक की सुई पर बल लगाता है।
• आकर्षण या प्रतिकर्षक बल के कारण सुई अपनी मूल स्थिति से विक्षेपित हो जाती है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि दिक् सूचक केवल पृथ्वी के चुंबकत्व से प्रभावित होता है और बाहरी चुंबक का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।
• विक्षेपण का कारण चुंबकीय बल के बजाय स्थिर वैद्युत बल बताना।
Exam Tips:
a) उत्तर में स्पष्ट करें कि दिक् सूचक स्वयं एक चुंबक है।
b) चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव और अन्योन्यक्रिया शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
c) यह एक सामान्य संकपनात्मक प्रश्न है, इसे छोटे और सटीक वाكتبों में लिखें।
Question 2: किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय रेखाएँ खींचिए?
आकृति का विवरण: इस आरेख में एक छड़ चुंबक को दर्शाया गया है जिसके उत्तरी ध्रुव (N) से चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं और चुंबक के भीतर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर जाती हैं।
Answer:
किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ खींचने के लिए हम दिक् सूचक का उपयोग कर सकते हैं। छड़ चुंबक के उत्तर ध्रुव से चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ निकलती हैं और वक्र बनाते हुए दक्षिण ध्रुव में प्रवेश करती हैं। चुंबक के भीतर क्षेत्र रेखाओं की दिशा दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर होती है, जिससे ये एक बंद वक्र का निर्माण करती हैं।
मुख्य बिंदु:
• चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ हमेशा उत्तर ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव में समाहित होती हैं。
• चुंबक के अंदर इनकी दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है।
• ये रेखाएँ कभी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।
आम गलतियाँ:
• तीर के निशानों की दिशा गलत बनाना (जैसे चुंबक के बाहर दक्षिण से उत्तर दिखाना)।
• रेखाओं को खुला छोड़ देना जबकि वे बंद वक्र बनाती हैं।
Exam Tips:
a) चित्र बनाते समय तीर के निशान (arrows) अवश्य दर्शाएँ।
b) चुंबक के अंदर और बाहर की दिशाओं में अंतर स्पष्ट रखें।
c) रेखाओं को एक-दूसरे के समांतर और सुडौल बनाएँ।
Question 3: चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों की सूची बनाइए।
Answer:
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं: (1) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ सदैव बंद वक्र होती हैं जो चुंबक के बाहर उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव तथा चुंबक के भीतर दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर जाती हैं। (2) जहाँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ सघन (पास-पास) होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है। (3) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद (काटती) नहीं करती हैं। (4) क्षेत्र रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है।
मुख्य बिंदु:
• चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र बनाती हैं।
• सघनता चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता को दर्शाती है।
• प्रतिच्छेद न करने का नियम यह सुनिश्चित करता है कि एक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ न हों।
आम गलतियाँ:
• चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को सीधी रेखा मान लेना।
• यह भूल जाना कि चुंबक के अंदर भी क्षेत्र रेखाएँ होती हैं।
Exam Tips:
a) गुणों को बिंदुओं (points) में लिखकर स्पष्ट करें।
b) प्रत्येक गुण का वैज्ञानिक कारण भी संक्षिप्त में दें।
c) यह परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण दीर्घ या लघु उत्तरीय प्रश्न है।
Question 4: दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करती हैं?
Answer:
दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं क्योंकि यदि वे ऐसा करें, तो इसका अर्थ होगा कि प्रतिच्छेद बिंदु पर दिक् सूचक की सुई को रखने पर उसकी सुई दो अलग-अलग दिशाओं की ओर संकेत करेगी, जो कि भौतिक रूप से असंभव है। किसी भी एक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की केवल एक ही निश्चित दिशा हो सकती है।
मुख्य बिंदु:
• प्रतिच्छेद बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ संभव नहीं हैं।
• दिक् सूचक की सुई एक समय में दो दिशाओं में संकेत नहीं कर सकती।
• यह चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का एक मौलिक गुण है।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि रेखाएँ एक-दूसरे को काट सकती हैं।
• दिक् सूचक की स्थिति और चुंबकीय दिशा के संबंध को ठीक से न समझा पाना।
Exam Tips:
a) कारण स्पष्ट रूप से लिखें कि एक बिंदु पर दो दिशाएँ असंभव हैं।
b) यह एक बहु चर्चित कारण आधारित (reasoning) प्रश्न है।
c) उत्तर को दो से तीन वाक्यों में सटीक रूप में समाप्त करें।
Question 5: मेज के तल में पड़े तार के वृत्ताकार पाश पर विचार कीजिए। मान लीजिए इस पाश में दक्षिणावर्त विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम को लागू करके पाश के भीतर तथा बाहर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात कीजिए।
आकृति का विवरण: इस आरेख में वृत्ताकार पाश में प्रवाहित दक्षिणावर्त विद्युत धारा और दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम के अनुसार पाश के अंदर व बाहर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाया गया है।
Answer:
दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम के अनुसार, यदि हम अपने दाहिने हाथ की उंगलियों को दक्षिणावर्त दिशा में मोड़ें, तो अंगूठा मेज के तल की ओर संकेत करेगा। चूँकि पाश में धारा दक्षिणावर्त प्रवाहित हो रही है, इसलिए पाश के अंदर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा नीचे की ओर (मेज के तल में अंदर की ओर) होगी तथा पाश के बाहर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ऊपर की ओर (मेज के तल से बाहर की ओर) होगी।
मुख्य बिंदु:
• दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम का सही प्रयोग करना आवश्यक है।
• दक्षिणावर्त धारा के लिए अंदर की दिशा नीचे और बाहर की दिशा ऊपर होती है।
• वृत्ताकार पाश के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र लंबवत होता है।
आम गलतियाँ:
• अंदर और बाहर की चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को आपस में मिला देना।
• दाहिने हाथ के बजाय बाएं हाथ का उपयोग करना।
Exam Tips:
a) नियम का नाम (दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम) स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
b) अंदर और बाहर की दिशाओं को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें।
c) व्यावहारिक रूप से हाथ की उंगलियों को मोड़कर दिशा की जाँच कर लें।
Question 6: किसी दिए गए क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र एकसमान है। इसे निरूपित करने के लिए आरेख खींचिए।
आकृति का विवरण: इस आरेख में एकसमान चुंबकीय क्षेत्र को एक-दूसरे के समांतर और समान दूरी पर स्थित सीधी रेखाओं द्वारा दर्शाया गया है।
Answer:
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र को दर्शाने के लिए ऐसी क्षेत्र रेखाओं का उपयोग किया जाता है जो परस्पर समांतर होती हैं और जिनके बीच की दूरी समान होती है। आरेख में इन समांतर रेखाओं पर तीर के निशान यह दर्शाते हैं कि पूरे क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण और दिशा हर जगह समान है।
मुख्य बिंदु:
• एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में सभी रेखाएँ समांतर होती हैं।
• रेखाओं के बीच की समान दूरी एकसमान परिमाण को दर्शाती है।
• तीर के निशान क्षेत्र की एक ही दिशा को बताते हैं।
आम गलतियाँ:
• समांतर रेखाओं के बीच की दूरी को असमान बना देना।
• तीर के निशान न लगाना।
Exam Tips:
a) रेखाएँ बिल्कुल सीधी और समांतर खींचें।
b) पैमाना या स्केल का उपयोग करके इसे साफ-सुथरा बनाएँ।
c) यह एक सरल आरेख आधारित प्रश्न है जिसमें पूरे अंक मिल सकते हैं।
Question 7: सही विकल्प चुनिए:
किसी विद्युत धारावाही सीधी लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र –
(a) शून्य होता है।
(b) इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है।
(c) इसके सिरे की ओर जाने पर बढ़ता है।
(d) सभी बिंदुओं पर समान होता है।
Answer:
(d) सभी बिंदुओं पर समान होता है।
स्पष्टीकरण: एक लंबी धारावाही परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान होता है, जिसका अर्थ है कि परिनालिका के अंदर प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का मान और दिशा एक जैसी होती है। परिनालिका के अंदर क्षेत्र रेखाएँ समांतर सरल रेखाओं के रूप में होती हैं।
मुख्य बिंदु:
• परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान होता है।
• अंदर की रेखाएँ समांतर होती हैं जो एकसमानता दर्शाती हैं।
• सिरों पर चुंबकीय क्षेत्र कुछ कम हो जाता है लेकिन भीतर एकसमान रहता है।
आम गलतियाँ:
• सिरों की ओर जाने पर मान घटने का भ्रम होना।
• शून्य मान चुन लेना।
Exam Tips:
a) परिनालिका और छड़ चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र की तुलना याद रखें।
b) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प के साथ उसका कारण भी मन में सोच लें।
c) विकल्प (d) सबसे सटीक उत्तर है।
Question 8: किसी प्रोटॉन का निम्नलिखित में से कौन-सा गुण किसी चुंबकीय क्षेत्र में मुक्त गति करते समय परिवर्तित हो जाता है? (यहाँ एक से अधिक सही उत्तर हो सकते हैं)
(a) द्रव्यमान
(b) चाल
(c) वेग
(d) संवेग
Answer:
(c) वेग और (d) संवेग
स्पष्टीकरण: जब कोई आवेशित कण (जैसे प्रोटॉन) चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो चुंबकीय बल के कारण उसकी गति की दिशा लगातार बदलती रहती है। दिशा बदलने के कारण उसका वेग (velocity) और संवेग (momentum) परिवर्तित हो जाते हैं, किंतु चुंबकीय बल कण द्वारा किए गए कार्य के शून्य होने के कारण उसकी चाल (speed) और द्रव्यमान (mass) अपरिवर्तित रहते हैं।
मुख्य बिंदु:
• चुंबकीय क्षेत्र आवेशित कण की चाल नहीं बदलता, केवल दिशा बदलता है।
• वेग एक सदिश राशि है, अतः दिशा बदलने से वेग बदल जाता है।
• संवेग वेग पर निर्भर करता है, इसलिए संवेग भी बदल जाता है।
आम गलतियाँ:
• चाल को भी वेग के साथ बदलता हुआ मान लेना।
• द्रव्यमान को परिवर्तित समझ लेना।
Exam Tips:
a) प्रश्न में ध्यान दें कि एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।
b) सदिश (vector) और अदिश (scalar) राशियों का अंतर समझें।
c) वेग और संवेग दोनों दिशा पर निर्भर करते हैं।
Question 9: क्रियाकलाप 12.7 में हमारे विचार से छड़ AB का विस्थापन किस प्रकार प्रभावित होगा यदि
(i) छड़ AB में प्रवाहित विद्युत धारा में वृद्धि हो जाए;
(ii) अधिक प्रबल नाल चुंबक प्रयोग किया जाए; और
(iii) छड़ AB की लंबाई में वृद्धि कर दी जाए?
Answer:
(i) यदि छड़ AB में प्रवाहित विद्युत धारा में वृद्धि हो जाए, तो छड़ AB का विस्थापन भी बढ़ जाएगा क्योंकि धारा बढ़ने से चुंबकीय बल बढ़ता है। (ii) यदि अधिक प्रबल नाल चुंबक प्रयोग किया जाए, तो चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता बढ़ने के कारण छड़ AB का विस्थापन बढ़ जाएगा। (iii) यदि छड़ AB की लंबाई में वृद्धि कर दी जाए, तो चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में आने वाले चालक की लंबाई बढ़ने से उसपर लगने वाला बल बढ़ जाएगा, जिससे विस्थापन भी बढ़ जाएगा। अत: तीनों ही स्थितियों में चुंबकीय बल बढ़ने के कारण विस्थापन बढ़ जाता है।
मुख्य बिंदु:
• चालक पर लगने वाला बल धारा, चुंबकीय क्षेत्र और लंबाई के समानुपाती होता है।
• धारा या चुंबक की प्रबलता बढ़ाने से बल बढ़ता है।
• चालक की प्रभावी लंबाई बढ़ाने से भी बल में वृद्धि होती है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि लंबाई या धारा बढ़ाने से विस्थापन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
• तीनों कारकों के प्रभावों को अलग-अलग न समझ पाना।
Exam Tips:
a) फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम या बल के सूत्र को ध्यान में रखें।
b) तीनों भागों के उत्तर अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट रूप से लिखें।
c) सभी स्थितियों में विस्थापन के बढ़ने का कारण चुंबकीय बल में वृद्धि है।
Question 10: पश्चिम की ओर प्रेषित कोई धनावेशित कण (अल्फा कण) किसी चुंबकीय क्षेत्र द्वारा उत्तर की ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
(a) दक्षिण की ओर
(b) पूर्व की ओर
(c) अधोमुखी
(d) उपरिमुखी
Answer:
(d) उपरिमुखी
स्पष्टीकरण: फ्लेमिंग के वाम-हस्त (왼हैंड) नियम के अनुसार, यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा, मध्यमा विद्युत धारा की दिशा (धनात्मक आवेश की गति की दिशा) और अंगूठा बल की दिशा को दर्शाए; यहाँ धनावेशित कण पश्चिम की ओर गति कर रहा है (यानी धारा पश्चिम की ओर है) और बल उत्तर की ओर लग रहा है, तो वाम-हस्त नियम लागू करने पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा उपरिमुखी (ऊपर की ओर) प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• धनावेश की गति की दिशा ही विद्युत धारा की दिशा होती है।
• फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम का सही अनुप्रयोग करें।
• तर्जनी, मध्यमा और अंगूठे को परस्पर लंबवत रखें।
आम गलतियाँ:
• फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम का गलती से प्रयोग करना।
• दिशाओं को आपस में भ्रमित करना।
Exam Tips:
a) परीक्षा में अपने बाएं हाथ की उंगलियों का अभ्यास करके दिशा निकालें।
b) याद रखें कि धनावेश की गति की दिशा ही धारा की दिशा होती है।
c) सही विकल्प (d) उपरिमुखी है।
Question 11: विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यतः उपयोग होने वाले दो सुरक्षा उपायों के नाम लिखिए।
Answer:
विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यतः उपयोग होने वाले दो प्रमुख सुरक्षा उपाय निम्नलिखित हैं: (1) भूसंपर्क तार (Earth wire) का उपयोग करना, जिससे विद्युत उपकरणों के धात्विक आवरण में धारा आने पर करंट न लगे। (2) विद्युत फ्यूज (Electric fuse) का उपयोग करना, जो अतिभारण या लघुपथन की स्थिति में पिघلकर परिपथ को तोड़ देता है और उपकरणों को सुरक्षित रखता है।
मुख्य बिंदु:
• भूसंपर्क तार धात्विक आवरण वाले उपकरणों को सुरक्षित रखता है।
• फ्यूज तार उच्च धारा बहने पर पिघलकर परिपथ को काट देता है।
• ये दोनों उपाय घरेलू परिपथों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं।
आम गलतियाँ:
• सुरक्षा उपायों में केवल स्विच या बोर्ड का नाम लिख देना।
• फ्यूज और भूसंपर्क तार के कार्यों को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) दोनों उपायों के नाम स्पष्ट और सटीक रूप से लिखें।
b) प्रत्येक का एक-एक लाइन में कार्य भी संक्षेप में बताएँ।
c) यह बहुत ही सामान्य और बार-बार पूछा जाने वाला प्रश्न है।
Question 12: 2 kW शक्ति अनुमतांक का एक विद्युत तंदूर (oven) किसी घरेलू विद्युत परिपथ (220 V) में प्रचालित किया जाता है जिसका विद्युत धारा अनुमतांक 5 A है, इससे आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer:
दिया है:
शक्ति (P) = 2 kW = 2000 W
विभवांतर (V) = 220 V
हम जानते हैं कि सूत्र P = VI होता है, इसलिए परिपथ में प्रवाहित धारा:
I = P ÷ V
I = 2000 W ÷ 220 V = 9.09 A
परिपथ का विद्युत अनुमतांक = 5 A
चूँकि परिकलित धारा (9.09 A) अनुमतांक (5 A) से बहुत अधिक है, अत: इस साधित्र में अतिभारण के कारण फ्यूज तार पिघल जाएगा तथा विद्युत परिपथ टूट जाएगा।
मुख्य बिंदु:
• पहले सूत्र P = VI का उपयोग करके धारा (I) की गणना करें।
• परिकलित धारा की तुलना दिए गए अनुमतांक (5 A) से करें।
• धारा अधिक होने पर फ्यूज के पिघलने का परिणाम स्पष्ट करें।
आम गलतियाँ:
• kW को W में बदलना भूल जाना (2 kW को सीधे 2 मान लेना)।
• गणना किए बिना सीधे उत्तर लिख देना।
Exam Tips:
a) आंकिक प्रश्नों में सूत्र, दिए गए मान और इकाई (units) अवश्य लिखें।
b) चरण-दर-चरण गणना करें ताकि गलती की गुंजाइश न रहे।
c) अंत में परिणाम का कारण (जैसे फ्यूज का उड़ना) जरूर बताएं।
Question 13: घरेलू विद्युत परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
Answer:
घरेलू विद्युत परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए: (1) एक ही सॉकेट में बहुत सारे विद्युत साधित्रों (appliances) को एक साथ संयोजित नहीं करना चाहिए। (2) विद्युत परिपथ में सही अनुमतांक (rating) का विद्युत फ्यूज का उपयोग करना चाहिए। (3) उच्च शक्ति वाले उपकरणों जैसे गीजर, एसी आदि को अलग-अलग सर्किट पर चलाना चाहिए और तारों का विद्युत रोधी आवरण अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए।
मुख्य बिंदु:
• एक ही सॉकेट पर अत्यधिक भार न डालें।
• उचित अनुमतांक के फ्यूज का प्रयोग करें।
• उच्च शक्ति के उपकरणों को अलग-अलग संयोजित करें।
आम गलतियाँ:
• केवल फ्यूज का नाम लिखकर अन्य सावधानियाँ छोड़ देना।
• अतिभारण के कारणों और बचाव में अंतर न समझना।
Exam Tips:
a) बिंदुओं के रूप में 2-3 स्पष्ट सावधानियाँ लिखें।
b) व्यावहारिक जीवन से जुड़े उदाहरण दें।
c) उत्तर संक्षिप्त और प्रवाحی होना चाहिए।
Question 14: निम्नलिखित में से कौन किसी लंबे विद्युत धारावाही तार के निकट चुंबकीय क्षेत्र का सही वर्णन करता है?
(a) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के लंबवत होती हैं।
(b) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के समांतर होती हैं।
(c) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ अरीय होती हैं जिनका उद्भव तार से होता है।
(d) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के चारों ओर सेकंदري क्षेत्र रेखाएँ होती हैं जिनका केंद्र तार होता है।
Answer:
(d) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के चारों ओर सेकंदري (संकेन्द्रीय) क्षेत्र रेखाएँ होती हैं जिनका केंद्र तार होता है।
स्पष्टीकरण: किसी सीधे धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र संकेंद्रى वृत्तों के रूप में होता है, जिनके केंद्र पर चालक तार स्थित होता है। दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम से इसकी पुष्टि होती है।
मुख्य बिंदु:
• सीधे तार के चारों ओर वृत्त के आकार की क्षेत्र रेखाएँ बनती हैं।
• इन वृत्तों का केंद्र स्वयं विद्युत धारावाही तार होता है।
• क्षेत्र रेखाएँ संकेन्द्रीय (concentric circles) होती हैं।
आम गलतियाँ:
• क्षेत्र रेखाओं को तार के समांतर मान लेना।
• अरीय (radial) रेखाओं से भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) सीधे धारावाही चालक के चुंबकीय क्षेत्र का पैटर्न याद रखें।
b) संकेन्द्रीय वृत्त शब्द को ध्यान में रखें।
c) यह अभ्यास का पहला बहुविकल्पीय प्रश्न है।
Question 15: लघुपथन के समय परिपथ में विद्युत धारा का मान –
(a) बहुत कम हो जाता है।
(b) परिवर्तित नहीं होता है।
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।
(d) निरंतर परिवर्तित होता है।
Answer:
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।
स्पष्टीकरण: लघुपथन (short circuiting) तब होता है जब जीवित तार और उदासीन तार सीधे संपर्क में आ जाते हैं। इससे परिपथ का प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है, जिसके फलस्वरूप ओम के नियम (I = V/R) के अनुसार परिपथ में प्रवाहित विद्युत धारा का मान अत्यधिक बढ़ जाता है।
मुख्य बिंदु:
• लघुपथन में प्रतिरोध लगभग शून्य या बहुत कम हो जाता है।
• धारा का मान अत्यधिक बढ़ जाता है।
• इससे चिंगारी या आग लगने का खतरा होता है।
आम गलतियाँ:
• धारा का मान कम होना समझ लेना।
• प्रतिरोध और धारा के संबंध में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) लघुपथन की स्थिति में प्रतिरोध का कम होना और धारा का बढ़ना याद रखें।
b) यह बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछा जाने वाला प्रश्न है।
c) सही विकल्प (c) है।
Question 16: निम्नलिखित प्रकथन में कौन-सा सही तथा कौन-गलत है? इसे प्रकथन के सामने अंकित कीजिए –
(a) किसी लंबी वृत्ताकार विद्युत धारावाही कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र समांतर सीधी क्षेत्र रेखाएँ होता है।
(b) हरे विद्युतरोधन वाला तार प्रायः विद्युثمय तार होता है।
Answer:
(a) सही
(b) गलत
स्पष्टीकरण: (a) जब किसी वृत्ताकार कुंडली या परिनालिका के केंद्र की बात करते हैं, तो वहाँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ लगभग सीधी और समांतर हो जाती हैं जो एकसमान क्षेत्र को दर्शाती हैं। (b) हरा विद्युतरोधन वाला तार प्रायः भूसंपर्क (earth) तार होता है, जबकि विद्युतमय (live) तार लाल रंग का होता है।
मुख्य बिंदु:
• कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ समांतर होती हैं (सही)।
• हरे रंग का तार भूसंपर्क तार होता है, विद्युतमय नहीं (गलत)।
• घरेलू वायरिंग में रंगों का मानक निश्चित होता है।
आम गलतियाँ:
• दोनों को सही या दोनों को गलत मान लेना।
• तारों के रंगों के मानक (लाल, काला, हरा) में भ्रम होना।
Exam Tips:
a) प्रकथन को ध्यान से पढ़कर सत्य/असत्य लिखें।
b) तारों के मानक रंग (लाल = विद्युतमय, काला = उदासीन, हरा = भूसंपर्क) अच्छी तरह याद रखें।
c) प्रत्येक भाग का कारण भी साथ में समझें।
Question 17: चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करने के तीन तरीकों की सूची बनाइए।
Answer:
चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के तीन प्रमुख तरीके निम्नलिखित हैं: (1) स्थायी चुंबक का उपयोग करके इसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न किया जा सकता है। (2) किसी सीधे विद्युत धारावाही चालक या तार में विद्युत धारा प्रवाहित करके उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न किया जा सकता है। (3) विद्युत धारावाही वृत्ताकार पाश या परिनालिका (solenoid) का उपयोग करके प्रबल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
• स्थायी चुंबक द्वारा चुंबकीय क्षेत्र।
• धारावाही चालक (तार) के माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित करके।
• परिनालिका या विद्युत चुंबक (electromagnet) का उपयोग करके।
आम गलतियाँ:
• केवल एक ही तरीका लिखकर छोड़ देना।
• विद्युत धारा और चुंबक के प्रभाव को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) तीनों तरीकों को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
b) विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव का मुख्य सिद्धांत इसमें शामिल करें।
c) उत्तर संक्षिप्त और बिंदुवार होना चाहिए।
Question 18: किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल कब अधिकतम होता है?
Answer:
किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल उस समय अधिकतम होता है जब विद्युत धारा की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत (90° पर) होती है। चालक पर लगने वाला बल धारा, चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता, चालक की लंबाई और उनके बीच के कोण पर निर्भर करता है, और लंबवत स्थिति में यह अधिकतम बल अनुभव करता है।
मुख्य बिंदु:
• बल अधिकतम तब होता है जब चालक चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत हो।
• कोण 90 डिग्री होने पर साइन का मान अधिकतम होता है।
• समांतर होने पर बल न्यूनतम (शून्य) होता है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि समांतर होने पर बल अधिकतम होता है।
• लंबवत शब्द का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) स्थिति स्पष्ट करें कि जब धारा और क्षेत्र परस्पर लंबवत हों।
b) यह एक अंकीय या लघु उत्तरीय महत्वपूर्ण प्रश्न है।
c) फ्लेमिंग के नियम से भी इसका संबंध याद रखें।
Question 19: मान लीजिए आप किसी चैंबर में अपनी पीठ को किसी दीवार से लगाकर बैठे हैं। कोई इलेक्ट्रॉन पुंज आपके पीछे की दीवार से सामने वाली दीवार की ओर क्षैतिजतः गमन करते हुए किसी प्रबल चुंबकीय क्षेत्र द्वारा आपके दाईं ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
आकृति का विवरण: इस आरेख में प्रेक्षक की स्थिति, इलेक्ट्रॉन पुंज के पीछे से सामने जाने की दिशा और दाईं ओर होने वाले विक्षेपण को फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम से दर्शाया गया है।
Answer:
इलेक्ट्रॉन पुंज पीछे की दीवार से सामने वाली दीवार की ओर क्षैतिजतः गमन कर रहा है। चूँकि इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित कण हैं, अतः उनके गति की विपरीत दिशा में विद्युत धारा की दिशा होगी, यानी विद्युत धारा सामने की दीवार से पीछे की दीवार की ओर प्रवाहित हो रही है। चुंबकीय बल दाईं ओर लग रहा है। फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम को लागू करने पर, तर्जनी (चुंबकीय क्षेत्र की दिशा) को ऊर्ध्वाधरतः उपरिमुखी (ऊपर की ओर) होना पड़ेगा। अतः चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर होगी।
मुख्य बिंदु:
• इलेक्ट्रॉन की गति की दिशा के विपरीत धारा की दिशा होती है।
• बल दाईं ओर लग रहा है।
• फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम का सावधानीपूर्वक प्रयोग करें।
आम गलतियाँ:
• इलेक्ट्रॉन की दिशा को ही धारा की दिशा मान लेना (धूलवश)।
• बाएं हाथ के नियमों को उल्टा लगा देना।
Exam Tips:
a) ऋणावेश (इलेक्ट्रॉन) के मामले में धारा की दिशा हमेशा उल्टी लें।
b) दिशा से जुड़े इस प्रकार के प्रश्नों में डायग्राम बनाकर सोचें।
c) उत्तर स्पष्ट रूप से "उपरिमुखी (ऊपर की ओर)" लिखें।
Question 20: निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम लिखिए –
(i) किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र,
(ii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लंबवत स्थित, विद्युत धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल, तथा
(iii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा।
Answer:
(i) किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा निर्धारित करने के लिए **दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-hand thumb rule)** का उपयोग किया जाता है। (ii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में क्षेत्र के लंबवत स्थित विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल की दिशा निर्धारित करने के लिए **फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम (Fleming's left-hand rule)** का उपयोग किया जाता है। (iii) चुंबकीय क्षेत्र में कुंडली के घूर्णन से उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए **फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम (Fleming's right-hand rule)** का उपयोग किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लिए दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम।
• बल की दिशा के लिए फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम।
• प्रेरित धारा की दिशा के लिए फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम।
आम गलतियाँ:
• वाम-हस्त और दक्षिण-हस्त नियमों के उपयोग में भ्रमित होना।
• नियमों के पूरे नाम न लिखना।
Exam Tips:
a) तीनों भागों के नाम अलग-अलग और स्पष्ट रूप से लिखें।
b) यह नियम आधारित प्रश्नों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।
c) बल (मोटर) और प्रेरित धारा (जेनरेटर) के नियमों का अंतर याद रखें।
Question 21: किसी विद्युत परिपथ में लघुपथन कब होता है?
Answer:
किसी विद्युत परिपथ में लघुपथन (Short circuit) तब होता है जब किसी कारणवश (जैसे तारों के पुराने होने या विद्युतरोधन के क्षतिग्रस्त होने पर) विद्युतमय तार (Live wire) और उदासीन तार (Neutral wire) सीधे आपस में संपर्क में आ जाते हैं। इस स्थिति में परिपथ का प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है और अत्यधिक धारा प्रवाहित होने लगती है, जिसे लघुपथन कहते हैं।
मुख्य बिंदु:
• विद्युतमय और उदासीन तार का सीधा संपर्क होना।
• विद्युतरोधन के नष्ट होने से ऐसा होता है।
• परिपथ का प्रतिरोध कम और धारा अत्यधिक हो जाती है।
आम गलतियाँ:
• केवल अतिभारण को ही लघुपथन समझ लेना।
• तारों के नाम (विद्युतमय और उदासीन) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) परिभाषा में दोनों तारों के संपर्क में आने का मुख्य कारण बताएं।
b) यह दो अंकों का बहुत ही सीधा और स्पष्ट प्रश्न है।
c) लघुपथन के परिणामों को भी संक्षिप्त में जोड़ सकते हैं।
Question 22: भूसंपर्क तार का क्या कार्य है? धातु के आवरण वाले विद्युत साधित्रों को भूसंपर्कित करना क्यों आवश्यक है?
Answer:
भूसंपर्क तार (Earth wire) का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि साधित्र के धात्विक आवरण में यदि कभी विद्युत धारा का क्षरण (leakage) हो, तो वह धारा सीधे पृथ्वी में चली जाए जिससे उपयोग करने वाले व्यक्ति को गंभीर विद्युत आघात (electric shock) से बचाया जा सके। धातु के आवरण वाले विद्युत साधित्रों (जैसे फ्रिज, प्रेस, हीटर) को भूसंपर्कित करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि धातु विद्युत की सुचालक होती है; यदि आवरण में करंट आ जाए और वह भूसंपर्कित न हो, तो छूने पर व्यक्ति को तीव्र झटका लग सकता है, जबकि भूसंपर्क तार उसे सुरक्षित रखता है।
मुख्य बिंदु:
• क्षरित धारा को सुरक्षित रूप से पृथ्वी में भेजना भूसंपर्क तार का कार्य है।
• धात्विक आवरण वाले उपकरणों में करंट का खतरा अधिक होता है।
• यह उपयोगकर्ता को जानलेवा झटकों से बचाता है।
आम गलतियाँ:
• भूसंपर्क तार को केवल सजावट या अतिरिक्त तार मान लेना।
• धातु के आवरण और सुरक्षा के बीच के संबंध को न समझा पाना।
Exam Tips:
a) भूसंपर्क तार के रंग (हरा) और उसके उद्देश्य को स्पष्ट करें।
b) सुरक्षा की दृष्टि से इसके महत्व को उदाहरण सहित समझाएँ।
c) यह बोर्ड परीक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैद्धांतिक प्रश्न है।
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