NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 11 Electricity (विद्युत) in Hindi

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Question 1: विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है?

Answer:

किसी विद्युत धारा के सतत तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ (Electric Circuit) कहते हैं। यह एक ऐसा मार्ग है जिसमें विद्युत धारा स्रोत के एक टर्मीनल से दूसरे टर्मीनल तक प्रवाहित होती है। इस बंद पथ में विभिन्न विद्युत अवयव जैसे सेल, स्विच, प्रतिरोधक और बल्ब जुड़े होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• विद्युत परिपथ हमेशा एक बंद और सतत लूप होना चाहिए।
• इसमें विद्युत धारा के प्रवाह के लिए स्रोत (जैसे सेल या बैटरी) आवश्यक है।
• यदि पथ में कहीं भी रुकावट या खुला भाग हो, तो धारा का प्रवाह रुक जाता है।

आम गलतियाँ:

• खुले परिपथ को भी विद्युत परिपथ मान लेना।
• केवल तारों के जाल को परिपथ समझ लेना जिसमें कोई स्रोत न हो।
• दिशा के नियम को गलत समझना।

Exam Tips:

a) परिभाषा लिखते समय 'सतत' तथा 'बंद पथ' शब्दों का विशेष उल्लेख करें।
b) सरल शब्दों में परिभाषा याद रखें ताकि अंक न कटें।
c) यह एक-दो अंकों के लघु उत्तरीय प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 2: विद्युत धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।

Answer:

विद्युत धारा (Electric Current) का SI मात्रक एम्पीयर (Ampere) है। किसी चालक में से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश के प्रवाह से उत्पन्न विद्युत धारा को एक एम्पीयर कहते हैं। गणितीय रूप में I = Q / t होता है, जहाँ यदि Q = 1 कूलॉम तथा t = 1 सेकंड हो, तो I = 1 एम्पीयर होता है।

मुख्य बिंदु:

• विद्युत धारा का SI मात्रक एम्पीयर है जिसे 'A' से दर्शाया जाता है।
• 1 एम्पीयर = 1 कूलॉम प्रति सेकंड (1 C/s)।
• यह धारा के परिमाण को मापने की मानक इकाई है।

आम गलतियाँ:

• केवल मात्रक का नाम लिखकर परिभाषा छोड़ देना।
• कूलॉम और सेकंड के मान को सही से न दर्शाना।
• फॉर्मूला गलत लिखना।

Exam Tips:

a) परिभाषा के साथ उसका गणितीय सूत्र अवश्य लिखें।
b) मात्रक का प्रतीक चिह्न (A) याद रखें।
c) संख्यात्मक प्रश्नों में मात्रक बदलना न भूलें।

 

Question 3: एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।

Answer:

हम जानते हैं कि एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश का मान 1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम होता है। इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या ज्ञात करने के लिए कुल आवेश को एक इलेक्ट्रॉन के आवेश से विभाजित किया जाता है। n = Q / e, जहाँ Q = 1 C और e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C है। इस प्रकार n = 1 / (1.6 × 10⁻¹⁹) = 6.25 × 10¹⁸ होता है। अतः एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या 6 × 10¹⁸ है।

मुख्य बिंदु:

• एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश 1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम होता है।
• आवेश के क्वांटीकरण का यह एक महत्वपूर्ण अनुप्रयोग है।
• गणना करते समय घातांक के नियमों का ध्यान रखें।

आम गलतियाँ:

• भाग देते समय घातांक (Power) का चिह्न गलत कर देना।
• इलेक्ट्रॉन के आवेश का मान गलत रखना।
• इकाई लिखना भूल जाना।

Exam Tips:

a) इस प्रकार के संख्यात्मक प्रश्नों को चरणबद्ध तरीके से हल करें।
b) मान याद रखें ताकि परीक्षा में समय बचे।
c) उत्तर को मानक वैज्ञानिक संकेतन में ही लिखें।

 

Question 4: उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।

Answer:

किसी चालक के सिरों पर विभवांतर (Potential Difference) बनाए रखने के लिए सेल या बैटरी (Cell or Battery) का प्रयोग किया जाता है। यह युक्ति रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलकर परिपथ में आवेशों की निरंतर गति के लिए आवश्यक विभवांतर उत्पन्न करती है।

मुख्य बिंदु:

• सेल या बैटरी विभवांतर का स्रोत है।
• यह परिपथ में उच्च विभव से निम्न विभव की ओर विद्युत क्षेत्र स्थापित करती है।
• इसके बिना लगातार विद्युत धारा का प्रवाह संभव नहीं है।

आम गलतियाँ:

• सेल की जगह केवल चालक तार लिख देना।
• विभवांतर और धारा में भ्रमित होना।
• सही वैज्ञानिक शब्दावली का प्रयोग न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर बहुत संक्षिप्त (केवल एक शब्द या वाक्य) हो सकता है, पर स्पष्ट होना चाहिए।
b) बहुविकल्पीय प्रश्नों में भी यह पूछा जा सकता है।
c) सेल और बैटरी के प्रतीक को भी याद रखें।

 

Question 5: यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 V है?

Answer:

इसका तात्पर्य यह है कि यदि किसी विद्युत धारावाही चालक के दो बिंदुओं के बीच एक कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में एक जूल कार्य किया जाता है, तो हम कह सकते हैं कि उन दो बिंदुओं के बीच विभवांतर एक वोल्ट है। इसे सूत्र V = W / Q द्वारा दर्शाया जाता है, जहाँ यदि W = 1 जूल तथा Q = 1 कूलॉम हो, तो V = 1 / 1 = 1 वोल्ट होता है।

मुख्य बिंदु:

• 1 वोल्ट का अर्थ 1 जूल प्रति कूलॉम होता है।
• यह कार्य और आवेश का अनुपात है।
• इसका SI मात्रक वोल्ट (V) है।

आम गलतियाँ:

• जूल और कूलॉम के स्थान को आपस में बदल देना।
• परिभाषा में 'एक कूलॉम' और 'एक जूल' का उल्लेख न करना।
• सूत्र गलत लिखना।

Exam Tips:

a) परिभाषा लिखते समय '1 जूल कार्य' और '1 कूलॉम आवेश' शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
b) इसे गणितीय रूप में भी प्रदर्शित करें।
c) यह बोर्ड परीक्षा में बार-बार पूछा जाने वाला प्रश्न है।

 

Question 6: 6 V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?

Answer:

दी गई जानकारी के अनुसार, आवेश Q = 1 कूलॉम तथा विभवांतर V = 6 वोल्ट है। हम जानते हैं कि किया गया कार्य या दी गई ऊर्जा W = V × Q होती है। इस सूत्र में मान रखने पर W = 6 × 1 = 6 जूल प्राप्त होता है। अतः 6 V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को 6 जूल ऊर्जा दी जाती है।

मुख्य बिंदु:

• ऊर्जा या कार्य की गणना W = VQ सूत्र से की जाती है।
• यहाँ विभव (V) का मान 6 V और आवेश (Q) का मान 1 C है।
• ऊर्जा का मात्रक जूल (J) होता है।

आम गलतियाँ:

• गुणा के स्थान पर भाग कर देना।
• मात्रक जूल की जगह कूलॉम लिख देना।
• मानों को गलत पहचानना।

Exam Tips:

a) संख्यात्मक प्रश्नों में पहले 'दिया है' लिखकर मान लिखें।
b) सही सूत्र का चयन करें।
c) उत्तर के साथ उचित मात्रक अवश्य लगाएं।

 

Question 7: किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?

Answer:

किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित चार मुख्य बातों पर निर्भर करता है: पहला, चालक की लंबाई (l) के अनुक्रमानुपाती होता है अर्थात लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है। दूसरा, चालक के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है अर्थात मोटा तार होने पर प्रतिरोध कम होता है। तीसरा, चालक के पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है कि वह तांबा है या लोहा। चौथा, चालक के तापमान पर निर्भर करता है, तापमान बढ़ने पर चालकों का प्रतिरोध बढ़ता है।

मुख्य बिंदु:

• प्रतिरोध लंबाई (l) के सीधे समानुपाती (R ∝ l) होता है।
• प्रतिरोध क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती (R ∝ 1/A) होता है।
• यह पदार्थ की प्रतिरोधकता और तापमान पर भी निर्भर करता है।

आम गलतियाँ:

• लंबाई और क्षेत्रफल के प्रभाव को उल्टा लिख देना।
• तापमान और पदार्थ की प्रकृति को छोड़ देना।
• आनुपातिक संबंधों को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) बिंदुओं के रूप में उत्तर लिखें ताकि परीक्षक को जाँचने में आसानी हो।
b) R ∝ l/A सूत्र का उल्लेख जरूर करें।
c) यह दीर्घ उत्तरीय या लघु उत्तरीय प्रश्न के रूप में आता है।

 

Question 8: समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें किसमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाता है? क्यों?

Answer:

मोटे तार में विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी क्योंकि किसी चालक का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात यदि अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल अधिक होगा (मोटा तार), तो चालक का प्रतिरोध कम होगा और कम प्रतिरोध के कारण विद्युत धारा अधिक आसानी और बिना बाधा के प्रवाहित होगी।

मुख्य बिंदु:

• मोटा तार = अधिक क्षेत्रफल = कम प्रतिरोध = अधिक धारा।
• पतला तार = कम क्षेत्रफल = अधिक प्रतिरोध = कम धारा।
• दोनों तारों का पदार्थ समान होने के कारण उनकी प्रतिरोधकता समान होती है।

आम गलतियाँ:

• पतले तार में धारा अधिक मानना।
• प्रतिरोध और क्षेत्रफल के संबंध को उल्टा समझ लेना।
• कारण स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) कारण स्पष्ट करते समय प्रतिरोध और क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती संबंध का जिक्र करें।
b) तार्किक प्रश्नों के उत्तर हमेशा वैज्ञानिक नियमों के आधार पर दें।
c) स्पष्ट भाषा में संक्षिप्त उत्तर लिखें।

 

Question 9: मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर को उसके पूर्व के विभवांतर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा में क्या परिवर्तन होगा?

Answer:

ओम के नियम के अनुसार, किसी नियत प्रतिरोध पर, किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर उसमें प्रवाहित होने वाली वैद्युत धारा के अनुक्रमानुपाती होता है अर्थात V ∝ I होता है। यदि प्रतिरोध नियत है और विभवांतर को घटाकर आधा कर दिया जाता है, तो ओम के नियम के अनुसार विद्युत धारा भी घटकर आधी हो जाएगी।

मुख्य बिंदु:

• ओम के नियम के अनुसार V और I एक-दूसरे के समानुपाती होते हैं (जब R नियत हो)।
• विभवांतर आधा होने पर धारा भी आधी हो जाती है।
• प्रतिरोध के नियत रहने पर दोनों राशियाँ एक ही अनुपात में बदलती हैं।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि विभवांतर बदलने से प्रतिरोध बदल जाएगा।
• धारा पर पड़ने वाले प्रभाव को गलत गणना करना।
• ओम के नियम का संदर्भ न देना।

Exam Tips:

a) उत्तर की शुरुआत 'ओम के नियम के अनुसार' लिखकर करें।
b) सीधे संबंध (Direct proportional) को स्पष्ट करें।
c) वैचारिक प्रश्नों को ध्यान से पढ़कर समझें।

 

Question 10: विद्युत टूस्टर तथा विद्युत इस्त्रियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु के क्यों बनाए जाते हैं?

Answer:

विद्युत टूस्टर तथा विद्युत इस्त्रियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर मिश्रधातु (Alloy) के बनाए जाते हैं, क्योंकि इसके मुख्य कारण हैं: पहला, मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता उनकी अवयवी धातुओं की अपेक्षा अधिक होती है जिससे वे अधिक ऊष्मा उत्पन्न करती हैं। दूसरा, मिश्रधातुओं का उच्च तापमान पर उपचयन (दहन) आसानी से नहीं होता है, जिससे वे लाल तप्त होने पर भी पिघलती नहीं हैं।

मुख्य बिंदु:

• मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं से अधिक होती है।
• उच्च तापमान पर मिश्रधातुएँ जल्दी उपचयित (ऑक्सीकृत) नहीं होती हैं।
• नाइक्रोम जैसी मिश्रधातुओं का उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• मिश्रधातुओं की चालकता को मुख्य कारण बताना।
• उपचयन (दहन) के बिंदु को भूल जाना।
• केवल एक कारण लिखकर उत्तर समाप्त कर देना।

Exam Tips:

a) दोनों मुख्य कारणों (उच्च प्रतिरोधकता और उच्च ताप पर न पिघलना) को बिंदुओं में लिखें।
b) नाइक्रोम का उदाहरण भी दे सकते हैं।
c) यह बोर्ड परीक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न है।

 

Question 11: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तालिका 11.2 में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिए: (a) आयरन (Fe) तथा मर्करी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत चालक है? (b) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है?

Answer:

(a) आयरन (Fe) अच्छा विद्युत चालक है, क्योंकि आयरन की प्रतिरोधकता (10.0 × 10⁻⁸ ओम मीटर) मर्करी (Hg) की प्रतिरोधकता (94.0 × 10⁻⁸ ओम मीटर) से कम है। जितनी कम प्रतिरोधकता होती है, चालकता उतनी ही अधिक होती है, इसलिए आयरन में विद्युत धारा मर्करी की तुलना में अधिक आसानी से प्रवाहित होगी।
(b) सिल्वर (Ag) सर्वश्रेष्ठ चालक है, क्योंकि सिल्वर की प्रतिरोधकता (1.6 × 10⁻⁸ ओम मीटर) सभी उपलब्ध पदार्थों में सबसे कम है।

मुख्य बिंदु:

• कम प्रतिरोधकता वाला पदार्थ अच्छा चालक होता है।
• आयरन का प्रतिरोध मर्करी से कम होता है।
• सिल्वर (चांदी) की प्रतिरोधकता सबसे कम होने के कारण यह सबसे अच्छा चालक है।

आम गलतियाँ:

• प्रतिरोधकता और चालकता के संबंध को उलटा समझ लेना।
• मर्करी को अच्छा चालक मान लेना क्योंकि इसका मान बड़ा है।
• सही आँकड़ों की तुलना न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर देते समय सारणी के मानों का संदर्भ अवश्य दें।
b) भाग (a) और (b) को स्पष्ट रूप से अलग-अलग हल करें।
c) कम प्रतिरोधकता = अच्छा चालक - इस नियम को हमेशा याद रखें।

 

Question 12: किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 2 V के तीन सेल की बैटरी, एक 5 ओम प्रतिरोधक, एक 8 ओम प्रतिरोधक, एक 12 ओम प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।

Answer:

आकृति का विवरण: एक बंद परिपथ का नामांकित आरेख जिसमें श्रेणीक्रम में तीन 2 V के सेल, एक कुंजी K, एक अमीटर A, तथा तीन प्रतिरोधक (5 ओम, 8 ओम और 12 ओम) जुड़े हैं और उनके सिरों पर एक वोल्टमीटर V समांतर क्रम में लगा है।

इस परिपथ को बनाने के लिए सबसे पहले एक सीधी रेखा में 5 ओम, 8 ओम और 12 ओम के प्रतिरोधकों को एक के बाद एक जोड़ें। इनके सिरों के साथ 2 V के तीन सेलों की एक बैटरी (कुल 6 V) और एक प्लग कुंजी को श्रेणीक्रम में जोड़ें। परिपथ में धारा मापने के लिए एक एमीटर को श्रेणीक्रम में तथा विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को वांछित प्रतिरोधक के समांतर क्रम में संयोजित किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• श्रेणीक्रम में सभी उपकरण एक ही मार्ग पर जुड़े होते हैं।
• एमीटर हमेशा श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर हमेशा समांतर क्रम में जुड़ता है।
• तीन 2V सेल मिलकर 6V का कुल विभवांतर बनाते हैं।

आम गलतियाँ:

• वोल्टमीटर को श्रेणीक्रम में जोड़ देना।
• बैटरी के धन और ऋण टर्मीनल को गलत दिशा में दिखाना।
• प्रतिरोधकों के मान गलत अंकित करना।

Exam Tips:

a) परिपथ आरेख बनाते समय पेंसिल और स्केल का प्रयोग करें।
b) धारा की दिशा (धन से ऋण टर्मीनल की ओर) तीर के निशान से जरूर दर्शाएँ।
c) सभी घटकों के प्रतीक मानक होने चाहिए।

 

Question 13: प्रश्न 1 की परिपथ व्यवस्था दुबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत धारा को मापने के लिए एमीटर तथा 12 ओम के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। एमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्यांक होंगे?

Answer:

आकृति का विवरण: पूर्ववत श्रेणी परिपथ जिसमें अमीटर श्रेणीक्रम में और 12 ओम प्रतिरोधक के दोनों सिरों पर वोल्टमीटर समांतर क्रम में जुड़ा हुआ है।

परिपथ में कुल प्रतिरोध R = 5 ओम + 8 ओम + 12 ओम = 25 ओम है। कुल विभवांतर V = 6 वोल्ट है। ओम के नियम I = V / R के अनुसार, I = 6 / 25 = 0.24 एम्पीयर होगा। अतः एमीटर का पाठ्यांक 0.24 A होगा। अब 12 ओम के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर V = I × R = 0.24 × 12 = 2.88 वोल्ट होगा। अतः वोल्टमीटर का पाठ्यांक 2.88 V है।

मुख्य बिंदु:

• श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध सभी प्रतिरोधकों के योग के बराबर होता है।
• श्रेणीक्रम में प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा समान होती है।
• अलग-अलग प्रतिरोधक पर विभवांतर उनके मान के अनुपात में होता है।

आम गलतियाँ:

• कुल प्रतिरोध निकालते समय मानों को जोड़ना भूल जाना।
• ओम के नियम में मान रखते समय गलती करना।
• वोल्टमीटर के लिए पूरे परिपथ का प्रतिरोध ले लेना।

Exam Tips:

a) सबसे पहले कुल प्रतिरोध और कुल धारा की गणना करें।
b) विशिष्ट प्रतिरोधक पर विभवांतर निकालते समय उसी प्रतिरोधक का मान उपयोग करें।
c) उत्तर में मात्रक (A और V) स्पष्ट लिखें।

 

Question 14: जब (a) 1 ओम तथा 10⁶ ओम, (b) 8 ओम, 10³ ओम तथा 10⁶ ओम के प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के संबंध में आप क्या निर्णय करेंगे?

Answer:

(a) पार्श्वक्रम (Parallel) में 1 ओम तथा 10⁶ ओम को जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध का सूत्र 1 / R = 1 / R₁ + 1 / R₂ है। मान रखने पर 1 / R = 1 / 1 + 1 / 10⁶ प्राप्त होता है, जिससे हल करने पर तुल्य प्रतिरोध R का मान लगभग 1 ओम ही प्राप्त होता है, जो कि छोटे प्रतिरोध के लगभग बराबर है।
(b) इसी प्रकार 8 ओम, 10³ ओम तथा 10⁶ ओम को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर 1 / R = 1 / 8 + 1 / 10³ + 1 / 10⁶ प्राप्त होता है, जिसे हल करने पर तुल्य प्रतिरोध लगभग 0.999 ओम अर्थात 1 ओम से भी कम प्राप्त होता है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि पार्श्वक्रम में संयोजन करने पर तुल्य प्रतिरोध का मान परिपथ के सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी कम हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम व्यक्तिगत प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है।
• पार्श्वक्रम संयोजन में सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम मान का तुल्य प्रतिरोध प्राप्त होता है।
• बहुत बड़े और बहुत छोटे प्रतिरोध के संयोजन में छोटा प्रतिरोध ही परिणाम को प्रभावित करता है।

आम गलतियाँ:

• समांतर क्रम (पार्श्वक्रम) में सीधे जोड़ देना जैसे श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं।
• भिन्न भिन्नों का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) निकालने में गलती करना।
• निष्कर्ष को स्पष्ट रूप से न लिखना।

Exam Tips:

a) गणना करते समय भिन्नों के जोड़ के नियमों का सावधानीपूर्वक पालन करें।
b) सैद्धांतिक निष्कर्ष को अलग से लिखकर समझाएं।
c) यह वैचारिक और संख्यात्मक दोनों प्रकार से महत्वपूर्ण है।

 

Question 15: 100 ओम का एक विद्युत लैंप, 50 ओम का एक विद्युत टूस्टर तथा 500 ओम का एक जल फिल्टर 220 ओम (यहाँ 220 V होना चाहिए) के विद्युत स्रोत से पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। उस विद्युत इस्त्री का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं? यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत इस्त्री से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होती है?

Answer:

दिया गया है कि विद्युत लैंप का प्रतिरोध R₁ = 100 ओम, टूस्टर का प्रतिरोध R₂ = 50 ओम और जल फिल्टर का प्रतिरोध R₃ = 500 ओम है। इन्हें पार्श्वक्रम में जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध का सूत्र 1 / R = 1 / R₁ + 1 / R₂ + 1 / R₃ है। मान रखने पर 1 / R = 1 / 100 + 1 / 50 + 1 / 500 = (5 + 10 + 1) / 500 = 16 / 500 होता है, जिससे R = 500 / 16 = 31.25 ओम प्राप्त होता है। अब ओम के नियम I = V / R के अनुसार, V = 220 V होने पर I = 220 / 31.25 = 7.04 एम्पीयर प्राप्त होता है। अतः विद्युत इस्त्री का प्रतिरोध 31.25 ओम है और उससे प्रवाहित होने वाली धारा 7.04 A है।

मुख्य बिंदु:

• पार्श्वक्रम संयोजन में कुल प्रतिरोध का व्युत्क्रम अलग-अलग प्रतिरोधों के व्युत्क्रम का योग होता है।
• कुल धारा तीनों युक्तियों की अलग-अलग धाराओं के योग के बराबर होती है।
• इस्त्री का प्रतिरोध इन तीनों के तुल्य प्रतिरोध के बराबर होगा।

आम गलतियाँ:

• पार्श्वक्रम के बजाय श्रेणीक्रम का सूत्र लगा देना।
• भिन्नों को हल करते समय जोड़ने में गलती करना।
• अंतिम धारा की गणना में दशमलव की गलती करना।

Exam Tips:

a) पहले तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करें और फिर ओम का नियम लगाकर धारा निकालें।
b) प्रत्येक चरण की गणना साफ-सुथरी लिखें।
c) उत्तर में इकाई (Ω और A) लिखना न भूलें।

 

Question 16: श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत युक्तिय़ों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं?

Answer:

वैद्युत युक्तियों को पार्श्वक्रम (Parallel) में संयोजित करने के निम्नलिखित प्रमुख लाभ हैं: पहला, प्रत्येक उपकरण में विभवांतर की आपूर्ति घर के मुख्य वोल्टता के स्थिर मान के समान ही रहती है। दूसरा, तुल्य प्रतिरोध का मान कम हो जाता है, जिससे प्रत्येक उपकरण को पर्याप्त और आवश्यक मात्रा में विद्युत धारा प्राप्त होती है। तीसरा, यदि कोई एक उपकरण खराब हो जाता है या बंद कर दिया जाता है, तो अन्य उपकरणों के कार्य में कोई बाधा नहीं आती और वे सुचारू रूप से कार्य करते रहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• पार्श्वक्रम में सभी उपकरणों को समान विभवांतर मिलता है।
• एक उपकरण के बंद होने पर बाकी उपकरण काम करते रहते हैं (घर की वायरिंग का आधार)।
• कुल प्रतिरोध कम होने से अधिक धारा की आवश्यकता पूरी होती है।

आम गलतियाँ:

• श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम के लाभ-हानि को आपस में मिला देना।
• केवल एक लाभ लिखकर उत्तर समाप्त कर देना।
• घरेलू परिपथ का संदर्भ न देना।

Exam Tips:

a) उत्तर को 3-4 स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
b) घरेलू परिपथ का उदाहरण देकर अपने उत्तर को पुष्ट करें।
c) यह बोर्ड परीक्षा का एक बहुत ही संभावित प्रश्न है।

 

Question 17: 2 ओम, 3 ओम तथा 6 ओम के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध (a) 4 ओम, (b) 1 ओम हो?

Answer:

(a) कुल प्रतिरोध 4 ओम प्राप्त करने के लिए, 3 ओम और 6 ओम के प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है और फिर इसके तुल्य प्रतिरोध के साथ 2 ओम के प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। 3 और 6 ओम का पार्श्वक्रम तुल्य प्रतिरोध R = (3 × 6) / (3 + 6) = 2 ओम देता है, और इसके साथ 2 ओम श्रेणी में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध 2 + 2 = 4 ओम प्राप्त होता है।
(b) कुल प्रतिरोध 1 ओम प्राप्त करने के लिए, तीनों प्रतिरोधकों (2 ओम, 3 ओम तथा 6 ओम) को पार्श्वक्रम में संयोजित करना होगा। इनका पार्श्वक्रम तुल्य प्रतिरोध निकालने पर 1 / R = 1 / 2 + 1 / 3 + 1 / 6 = (3 + 2 + 1) / 6 = 6 / 6 = 1 ओम प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• 4 ओम प्राप्त करने के लिए मिश्रित संयोजन (श्रेणी + पार्श्व) का उपयोग होता है।
• 1 ओम प्राप्त करने के लिए तीनों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है।
• संयोजन का यह तरीका पहेली की तरह हल किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• सीधे सभी को जोड़कर देखना और सही संयोजन न ढूंढ पाना।
• समांतर और श्रेणी के सूत्रों का गलत प्रयोग करना।
• भागों (a) और (b) को भ्रमित करना।

Exam Tips:

a) इस प्रकार के प्रश्नों में विकल्पों को परखकर सही संयोजन का अनुमान लगाएं।
b) गणना को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) अभ्यास से ऐसे प्रश्नों को जल्दी हल किया जा सकता है।

 

Question 18: 4 ओम, 8 ओम, 12 ओम तथा 24 ओम प्रतिरोधक की चार कुंडलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से (a) अधिकतम (b) न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके?

Answer:

(a) अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए सभी प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series) में संयोजित करना चाहिए। इस स्थिति में तुल्य प्रतिरोध सभी के योग के बराबर होता है, अतः R = R₁ + R₂ + R₃ + R₄ = 4 + 8 + 12 + 24 = 48 ओम प्राप्त होता है।
(b) न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए सभी प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम (Parallel) में संयोजित करना चाहिए। इस स्थिति में 1 / R = 1 / 4 + 1 / 8 + 1 / 12 + 1 / 24 = (6 + 3 + 2 + 1) / 24 = 12 / 24 = 1 / 2 होता है, जिससे न्यूनतम प्रतिरोध R = 2 ओम प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• अधिकतम प्रतिरोध के लिए श्रेणीक्रम संयोजन का प्रयोग किया जाता है।
• न्यूनतम प्रतिरोध के लिए पार्श्वक्रम संयोजन का प्रयोग किया जाता है।
• श्रेणी में मान जुड़ जाते हैं जबकि पार्श्व में व्युत्क्रम जुड़ते हैं।

आम गलतियाँ:

• अधिकतम के लिए पार्श्व और न्यूनतम के लिए श्रेणीक्रम लिख देना।
• योग या लघुत्तम समापवर्त्य निकालने में गलती करना।
• इकाई (Ω) लिखना भूल जाना।

Exam Tips:

a) नियम याद रखें: अधिकतम प्रतिरोध = श्रेणी संयोजन, न्यूनतम प्रतिरोध = पार्श्व संयोजन।
b) दोनों भागों की अलग-अलग गणना स्पष्ट रूप से दिखाएं।
c) यह एक बहुत ही सरल और अंक-दायी प्रश्न है।

 

Question 19: किसी विद्युत హీटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है?

Answer:

विद्युत धारा से उत्पन्न होने वाली ऊष्मा (H) चालक के प्रतिरोध (R) के अनुक्रमानुपाती होती है (H = I²Rt)। हीटर की डोरी तांबे या एल्यूमीनियम की बनी होती है जिनका प्रतिरोध बहुत कम (नगण्य) होता है, इसलिए डोरी में बहुत कम ऊष्मा उत्पन्न होती है और वह उत्तप्त नहीं होती। इसके विपरीत, हीटर का तापन अवयव नाइक्रोम जैसी मिश्रधातु का बना होता है जिसका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है, जिससे वहाँ अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है और वह लाल तप्त हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• उत्पन्न ऊष्मा प्रतिरोध के समानुपाती होती है (H ∝ R)।
• डोरी का प्रतिरोध कम होता है जबकि तापन अवयव का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है。
• दोनों में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा समान होती है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि डोरी में धारा प्रवाहित नहीं होती।
• प्रतिरोध के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
• कारण को स्पष्ट रूप से न समझा पाना।

Exam Tips:

a) जूल के तापन नियम (H = I²Rt) का उल्लेख अवश्य करें।
b) डोरी और तापन अवयव के प्रतिरोध की तुलना करके उत्तर दें।
c) यह बोर्ड परीक्षा का एक मानक वैज्ञानिक कारण वाला प्रश्न है।

 

Question 20: एक घंटे में 50 V विभवांतर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।

Answer:

दिया गया है कि विभवांतर V = 50 वोल्ट तथा आवेश Q = 96000 कूलॉम है। समय t = 1 घंटा = 3600 सेकंड है। उत्पन्न ऊष्मा H = V × Q सूत्र का उपयोग करके ज्ञात की जा सकती है। मान रखने पर H = 50 वोल्ट × 96000 कूलॉम = 4,800,000 जूल प्राप्त होता है। इसे वैज्ञानिक संकेतन में H = 4.8 × 10⁶ जूल लिखा जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• उत्पन्न ऊष्मा H = VQ सूत्र से सीधे निकाली जा सकती है क्योंकि समय और धारा का गुणनफल ही आवेश होता है।
• यहाँ समय (1 घंटा) का सीधा उपयोग गणना में नहीं होता क्योंकि आवेश का कुल मान सीधे दिया गया है।
• ऊर्जा का मात्रक जूल (J) होता है।

आम गलतियाँ:

• समय को सूत्र में जबरदस्ती शामिल करके गलती करना।
• गुणा करते समय शून्य की संख्या में भूल जाना।
• मानक रूप में उत्तर न लिखना।

Exam Tips:

a) दिए गए मानों को ध्यान से पढ़ें और उपयुक्त सूत्र चुनें।
b) बड़ी संख्याओं का गुणा सावधानी से करें।
c) अंतिम उत्तर को मेगाजूल या वैज्ञानिक रूप में व्यक्त करना बेहतर होता है।

 

Question 21: 20 ओम प्रतिरोध की कोई विद्युत इस्त्री 5 A विद्युत धारा लेती है। 30 s में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।

Answer:

दिया गया है कि प्रतिरोध R = 20 ओम, विद्युत धारा I = 5 एम्पीयर तथा समय t = 30 सेकंड है। जूल के तापन नियम के अनुसार उत्पन्न ऊष्मा H = I²Rt होती है। इस सूत्र में मान रखने पर H = (5)² × 20 × 30 = 25 × 20 × 30 प्राप्त होता है। इसे हल करने पर H = 25 × 600 = 15000 जूल या 1.5 × 10⁴ जूल प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• जूल के तापन नियम का सूत्र H = I²Rt है।
• धारा का वर्ग (I²) करने पर विशेष ध्यान दें (5 का वर्ग 25 होगा)।
• ऊष्मा का मान जूल में प्राप्त होता है।

आम गलतियाँ:

• धारा का वर्ग करना भूल जाना (केवल 5 लिख देना)।
• समय या प्रतिरोध का मान गलत रखना।
• मात्रक न लिखना।

Exam Tips:

a) सूत्र H = I²Rt को स्पष्ट रूप से लिखें।
b) गणना के चरणों को एक के बाद एक हल करें।
c) यह संख्यात्मक प्रश्न परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 22: विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है?

Answer:

विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर को विद्युत शक्ति (Electric Power) कहते हैं। इसे निम्नलिखित समीकरणों द्वारा व्यक्त किया जाता है: P = VI, अथवा P = I²R, अथवा P = V² / R। यहाँ P शक्ति है, V विभवांतर है, I विद्युत धारा है और R प्रतिरोध है। इसका मात्रक वाट (W) होता है।

मुख्य बिंदु:

• विद्युत ऊर्जा के उपभोग की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं।
• शक्ति का मूल सूत्र P = VI है।
• ओम के नियम का उपयोग करके इसके अन्य रूप P = I²R और P = V² / R प्राप्त किए जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• ऊर्जा और शक्ति को एक ही समझ लेना।
• केवल एक सूत्र लिखकर छोड़ देना।
• मात्रक लिखना भूल जाना।

Exam Tips:

a) शक्ति की परिभाषा और उसके सभी तीनों रूपों को लिखें।
b) SI मात्रक (वाट) का उल्लेख अवश्य करें।
c) यह एक-दो अंकों के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 23: कोई विद्युत मोटर 220 V के विद्युत स्रोत से 5.0 A विद्युत धारा लेता है। मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घंटे में मोटर द्वारा उपयुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।

Answer:

दिया गया है कि विभवांतर V = 220 वोल्ट तथा विद्युत धारा I = 5 एम्पीयर है। मोटर की शक्ति P = VI होती है, अतः P = 220 × 5 = 1100 वाट (W) है। समय t = 2 घंटे = 2 × 60 × 60 = 7200 सेकंड है। मोटर द्वारा उपयुक्त ऊर्जा E = शक्ति × समय (E = P × t) होती है, अतः E = 1100 वाट × 7200 सेकंड = 7,920,000 जूल या 7.92 × 10⁶ जूल (या किलोवाट-घंटे में 2.2 kWh) प्राप्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• विद्युत शक्ति P = VI सूत्र से निकाली जाती है।
• ऊर्जा निकालने के लिए शक्ति को समय (सेकंड में) से गुणा करते हैं।
• समय को घंटे से सेकंड में बदलना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• समय को घंटों में ही सीधे गुणा कर देना (सेकंड में न बदलना)।
• शक्ति और ऊर्जा के मात्रक में भ्रमित होना।
• गणना में शून्य की गलती करना।

Exam Tips:

a) प्रश्न के दोनों भागों (शक्ति और ऊर्जा) को अलग-अलग स्पष्ट हल करें।
b) समय को हमेशा SI मात्रक (सेकंड) में बदलें जब उत्तर जूल में निकालना हो।
c) यह एक संपूर्ण दीर्घ उत्तरीय संख्यात्मक प्रश्न है।

 

Question 24: प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है। इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R' है तो R / R' अनुपात का मान क्या है - (a) 1/25 (b) 1/5 (c) 5 (d) 25

Answer:

किसी तार का प्रतिरोध उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है। जब तार को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है, तो प्रत्येक भाग का प्रतिरोध R / 5 हो जाता है। जब इन पाँचों भागों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है, तो तुल्य प्रतिरोध R' का व्युत्क्रम 1 / R' = 1 / (R/5) + 1 / (R/5) + 1 / (R/5) + 1 / (R/5) + 1 / (R/5) = 5/R + 5/R + 5/R + 5/R + 5/R = 25 / R होता है। इससे 1 / R' = 25 / R प्राप्त होता है, जिसका अर्थ है कि R' = R / 25 है। अतः R / R' का अनुपात 25 होगा। सही विकल्प (d) है।

मुख्य बिंदु:

• तार के टुकड़े करने पर प्रत्येक भाग का प्रतिरोध मूल प्रतिरोध का पाँचवाँ हिस्सा (R/5) हो जाता है।
• पार्श्वक्रम में जोड़ने पर सभी के व्युत्क्रम जुड़ जाते हैं।
• R / R' का अनुपात निकालने पर 25 प्राप्त होता है।

आम गलतियाँ:

• सीधे 1/25 पर टिक कर देना बिना अनुपात निकाले (यहाँ R/R' पूछा है, R'/R नहीं)।
• पार्श्वक्रम के सूत्र में मान गलत रखना।
• लंबाई और प्रतिरोध के संबंध को भूल जाना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्न को भी रफ कार्य करके ही हल करें ताकि गलती न हो।
b) अनुपात निकालते समय अंश और हर का ध्यान रखें।
c) यह एनसीईआरटी का एक बहुत ही प्रसिद्ध तार्किक प्रश्न है।

 

Question 25: निम्नलिखित में से कौन-सा पद विद्युत परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता? (a) I²R (b) IR² (c) VI (d) V² / R

Answer:

विद्युत शक्ति का मूल सूत्र P = VI है। ओम के नियम के अनुसार V = IR होता है। यदि समीकरण में V का मान रखें तो P = (IR)I = I²R बनता है (जो विकल्प a है)। यदि समीकरण में I का मान I = V / R रखें तो P = V(V / R) = V² / R बनता है (जो विकल्प d है)। इस प्रकार विकल्प (b) अर्थात् IR² विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता है। अतः सही विकल्प (b) है।

मुख्य बिंदु:

• विद्युत शक्ति के तीन मान्य रूप हैं: VI, I²R, और V² / R।
• IR² का विद्युत शक्ति से कोई संबंध नहीं है।
• ओम के नियम के प्रतिस्थापन से इन सूत्रों की पुष्टि होती है।

आम गलतियाँ:

• जल्दबाजी में सही सूत्र को गलत समझ लेना।
• ओम के नियम के प्रतिस्थापन में गलती करना।
• प्रश्न को ठीक से न पढ़ना (यह पूछा है कि क्या निरूपित 'नहीं' करता)।

Exam Tips:

a) शक्ति के तीनों सूत्रों को अच्छी तरह याद रखें।
b) 'नहीं करता' वाले प्रश्नों को परीक्षा में विशेष सावधानी से पढ़ें।
c) यह बहुविकल्पीय परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

 

Question 26: किसी विद्युत बल्ब का अनुमतांक 220 V, 100 W है। जब इसे 110 V पर प्रचालित करते हैं तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है? (a) 100 W (b) 75 W (c) 50 W (d) 25 W

Answer:

विद्युत बल्ब का प्रतिरोध नियत रहता है। पहले स्थिति में V = 220 V और P = 100 W है, जिससे बल्ब का प्रतिरोध R = V² / P = (220)² / 100 = 48400 / 100 = 484 ओम प्राप्त होता है। जब इसे 110 V पर प्रचालित करते हैं, तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति P = V² / R सूत्र से P = (110)² / 484 = 12100 / 484 = 25 वाट प्राप्त होती है। अतः सही विकल्प (d) 25 W है।

मुख्य बिंदु:

• बल्ब का प्रतिरोध उसके विनिर्देशों (V और P) से निकाला जाता है और यह नियत रहता है।
• नई शक्ति निकालते समय नया वोल्टेज (110 V) और वही प्रतिरोध काम में लिया जाता है।
• शक्ति वोल्टेज के वर्ग के समानुपाती होती है (वोल्टेज आधा होने पर शक्ति एक चौथाई हो जाती है)।

आम गलतियाँ:

• सीधे शक्ति को भी आधा मान लेना।
• प्रतिरोध को बदले बिना सीधे मान रख देना।
• वर्ग निकालते समय गणना की गलती करना।

Exam Tips:

a) ऐसे प्रश्नों में पहले हमेशा प्रतिरोध R की गणना करें।
b) नए वोल्टेज के साथ शक्ति का पुन: परिकलन करें।
c) यह एक बेहतरीन वैचारिक और संख्यात्मक बहुविकल्पीय प्रश्न है।

 

Question 27: दो चालक तार जिनके पदार्थ, लंबाई तथा व्यास समान हैं। किसी विद्युत परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा? (a) 1:2 (b) 2:1 (c) 1:4 (d) 4:1

Answer:

मान लीजिए प्रत्येक तार का प्रतिरोध R है। जब दोनों प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है, तो तुल्य प्रतिरोध Rs = R + R = 2R होता है। जब दोनों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है, तो तुल्य प्रतिरोध Rp = R / 2 होता है। यदि विभवांतर V समान है, तो उत्पन्न ऊष्मा का अनुपात H = (V² / R) × t के अनुसार Hs / Hp = (V² / Rs) / (V² / Rp) = Rp / Rs = (R / 2) / (2R) = 1 / 4 होता है। अतः श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात 1:4 है। सही विकल्प (c) है।

मुख्य बिंदु:

• श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध अधिक (2R) और पार्श्वक्रम में कम (R/2) होता है।
• ऊष्मा और प्रतिरोध में व्युत्क्रमानुपाती संबंध होता है जब विभवांतर नियत हो (H ∝ 1/R)।
• अनुपात 1:4 प्राप्त होता है।

आम गलतियाँ:

• प्रतिरोधों के अनुपात को ही ऊष्मा का अनुपात मान लेना।
• श्रेणी और पार्श्व के प्रतिरोध गलत निकाल लेना।
• व्युत्क्रम संबंध को ध्यान में न रखना।

Exam Tips:

a) सूत्र H = V²t / R का उपयोग करें क्योंकि विभवांतर समान दिया गया है।
b) Rs और Rp के मानों को सावधानी से रखें।
c) यह एक उच्च स्तर का बहुविकल्पीय प्रश्न है।

 

Question 28: किसी विद्युत परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है?

Answer:

किसी विद्युत परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को हमेशा पार्श्वक्रम (Parallel) में संयोजित किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है और इसे समांतर में जोड़ने पर परिपथ की मुख्य धारा प्रभावित नहीं होती और यह दोनों बिंदुओं के बीच का सटीक विभवांतर माप लेता है।

मुख्य बिंदु:

• वोल्टमीटर हमेशा समांतर क्रम (पार्श्वक्रम) में जुड़ता है।
• इसका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है ताकि यह परिपथ से न्यूनतम धारा ले।
• एमीटर श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर पार्श्वक्रम में जुड़ता है - यह अंतर हमेशा याद रखें।

आम गलतियाँ:

• वोल्टमीटर को श्रेणीक्रम में जोड़ देना।
• एमीटर और वोल्टमीटर के संयोजन के तरीकों को आपस में मिला देना।
• कारण स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप में लिखें।
b) कारण सहित पूछे जाने पर अधिक अंक मिलते हैं।
c) यह परीक्षा में बार-बार दोहराया जाने वाला प्रश्न है।

 

Question 29: किसी ताँबे के तार का 0.5 mm व्यास तथा प्रतिरोधकता 1.6 × 10⁻⁸ ओम मीटर है। 10 ओम प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लंबे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दुगुने व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अंतर आएगा?

Answer:

दिया गया है कि व्यास d = 0.5 mm, जिससे त्रिज्या r = d / 2 = 0.25 mm = 0.25 × 10⁻³ मीटर है। प्रतिरोधकता ρ = 1.6 × 10⁻⁸ Ωm और प्रतिरोध R = 10 Ω है। अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A = πr² = 3.14 × (0.25 × 10⁻³)² = 1.9625 × 10⁻⁷ मीटर² है। सूत्र R = ρl / A से लंबाई l = RA / ρ = (10 × 1.9625 × 10⁻⁷) / (1.6 × 10⁻⁸) = 122.65 मीटर प्राप्त होती है। यदि व्यास दुगुना कर दिया जाए, तो क्षेत्रफल चार गुना हो जाएगा क्योंकि A ∝ d² होता है, जिससे प्रतिरोध घटकर एक चौथाई (¼) रह जाएगा।

मुख्य बिंदु:

• व्यास से त्रिज्या और फिर क्षेत्रफल (A = πr²) निकाला जाता है।
• लंबाई का सूत्र l = RA / ρ होता है।
• व्यास दुगुना करने पर क्षेत्रफल चार गुना होता है और प्रतिरोध चार गुना कम हो जाता है।

आम गलतियाँ:

• व्यास को ही त्रिज्या मानकर हल कर देना।
• मिलीमीटर को मीटर में बदलना भूल जाना।
• इकाई रूपांतरण में घातांक की गलती करना।

Exam Tips:

a) सभी राशियों को एक ही पद्धति (SI यूनिट - मीटर) में बदलें।
b) गणना के चरणों को स्पष्ट रूप سے दिखाएं।
c) यह एक महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय संख्यात्मक प्रश्न है।

 

Question 30: किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर V के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत धाराओं I के संगत मान आगे दिए गए हैं: I (एम्पीयर) = 0.5, 1.0, 2.0, 3.0, 4.0; V (वोल्ट) = 1.6, 3.4, 6.7, 10.2, 13.2। V और I के बीच ग्राफ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

Answer:

V और I के बीच ग्राफ खींचने के लिए X-अक्ष पर विभवांतर (V) और Y-अक्ष पर विद्युत धारा (I) को दर्शाया जाता है। ग्राफ एक सरल रेखा प्राप्त होती है जो ओम के नियम की पुष्टि करती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए ग्राफ की ढाल (Slope) या किसी भी बिंदु पर V और I का अनुपात निकाला जाता है। उदाहरण के लिए, यदि V = 6.8 V और I = 2 A लें, तो प्रतिरोध R = V / I = 6.8 / 2 = 3.4 ओम प्राप्त होता है। इसी प्रकार अन्य बिंदुओं से भी लगभग 3.4 Ω का औसत प्रतिरोध प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• V-I ग्राफ हमेशा एक सरल रेखा होती है जो मूल बिंदु से गुजरती है।
• ग्राफ की ढाल का व्युत्क्रम या V/I अनुपात प्रतिरोध देता है।
• ओम के नियम के प्रायोगिक सत्यापन का यह तरीका है।

आम गलतियाँ:

• ग्राफ पर अक्षों के नाम (V और I) गलत अंकित करना।
• भाग देते समय V/I के बजाय I/V कर देना।
• पैमाना सही न मानना।

Exam Tips:

a) ग्राफ पेपर पर पैमाना स्पष्ट रूप से लिखें।
b) प्रतिरोध निकालते समय सारणी के किन्हीं दो स्पष्ट मानों का चयन करें।
c) उत्तर के साथ मात्रक (Ω) अवश्य लिखें।

 

Question 31: किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 11 V की बैटरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 mA विद्युत धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।

Answer:

दिया गया है कि विभवांतर V = 11 वोल्ट तथा विद्युत धारा I = 2.5 mA = 2.5 × 10⁻³ एम्पीयर है। ओम के नियम V = IR के अनुसार प्रतिरोध R = V / I होता है। इस सूत्र में मान रखने पर R = 11 / (2.5 × 10⁻³) = 11 / 0.0025 = 4400 ओम या 4.4 किलोओम (kΩ) प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• मिलीएम्पीयर (mA) को एम्पीयर (A) में बदलना आवश्यक है (1 mA = 10⁻³ A)।
• ओम के नियम R = V / I का प्रयोग किया जाता है।
• प्रतिरोध का मात्रक ओम (Ω) होता है।

आम गलतियाँ:

• 2.5 mA को सीधे 2.5 मान लेना और 10⁻³ से गुणा न करना।
• भाग देने में दशमलव की गलती करना।
• मात्रक न लिखना।

Exam Tips:

a) संख्यात्मक प्रश्नों में सबसे पहले इकाइयों को मानक रूप (SI units) में बदलें।
b) सूत्र लिखकर मानों को प्रतिस्थापित करें।
c) यह एक अंक या दो अंकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 

Question 32: 9 V की किसी बैटरी को 0.2 ओम, 0.3 ओम, 0.4 ओम, 0.5 ओम तथा 12 ओम के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाता है। 12 ओम के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होगी?

Answer:

दिया गया है कि बैटरी का विभवांतर V = 9 वोल्ट है। सभी प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, इसलिए कुल प्रतिरोध R सभी का बीजगणितीय योग होगा: R = R₁ + R₂ + R₃ + R₄ + R₅ = 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 12 = 13.4 ओम है। ओम के नियम I = V / R के अनुसार कुल धारा I = 9 / 13.4 = 0.67 एम्पीयर प्राप्त होती है। चूँकि सभी प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में लगे हैं, इसलिए विद्युत धारा का कोई विभाजन नहीं होता है, और 12 ओम के प्रतिरोधक से भी वही समान धारा 0.67 A प्रवाहित होगी।

मुख्य बिंदु:

• श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।
• श्रेणीक्रम परिपथ में प्रत्येक अवयव से समान विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
• धारा का मान निकालने के लिए कुल विभवांतर को कुल प्रतिरोध से भाग देते हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल 12 ओम के प्रतिरोध से धारा निकालने के लिए केवल 12 का भाग दे देना।
• सभी प्रतिरोधों को जोड़ने में गलती करना।
• यह सोचना कि बड़े प्रतिरोध से कम धारा बहेगी।

Exam Tips:

a) पहले श्रेणीक्रम का कुल प्रतिरोध निकालें।
b) श्रेणीक्रम की इस विशेषता को याद रखें कि धारा हर जगह समान रहती है।
c) गणना को दशमलव के दो स्थानों तक निकालें।

 

Question 33: 176 ओम प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करें कि 220 V के विद्युत स्रोत से 5 A विद्युत धारा प्रवाहित हो?

Answer:

माना पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाने वाले प्रतिरोधकों की कुल संख्या x है। दिया गया है कि कुल विद्युत धारा I = 5 एम्पीयर तथा विभवांतर V = 220 वोल्ट है। ओम के नियम के अनुसार तुल्य प्रतिरोध R = V / I = 220 / 5 = 44 ओम प्राप्त होता है। प्रत्येक प्रतिरोधक का मान 176 ओम है। पार्श्वक्रम के सूत्र 1 / R = 1 / R₁ + 1 / R₂ + ... (x बार) के अनुसार 1 / 44 = x × (1 / 176) होता है, जिससे x = 176 / 44 = 4 प्राप्त होता है। अतः 176 ओम के 4 प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करना होगा।

मुख्य बिंदु:

• पहले कुल विभवांतर और कुल धारा से कुल आवश्यक प्रतिरोध (R) निकाला जाता है।
• पार्श्वक्रम संयोजन में x समान प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध R = R₁ / x होता है।
• यहाँ x का मान 4 प्राप्त होता है।

आम गलतियाँ:

• पार्श्वक्रम के बजाय श्रेणीक्रम का सूत्र लगा देना।
• भाग देने में संख्या उलट देना।
• इकाई न लिखना।

Exam Tips:

a) पहले कुल प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए ओम का नियम लगाएं।
b) फिर पार्श्वक्रम के सूत्र से प्रतिरोधकों की संख्या निकालें।
c) यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यावहारिक संख्यात्मक प्रश्न है।

 

Question 34: यह दर्शाइए कि आप 6 ओम प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध (i) 9 ओम, (ii) 4 ओम हो?

Answer:

(i) 9 ओम तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए, 6 ओम के दो प्रतिरोधकों को पहले पार्श्वक्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है, जिससे उनका तुल्य प्रतिरोध 3 ओम बनता है। फिर इस तुल्य प्रतिरोध के साथ तीसरे 6 ओम के प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है, जिससे कुल प्रतिरोध 3 + 6 = 9 ओम प्राप्त होता है।
(ii) 4 ओम तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए, 6 ओम के दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है, जिससे उनका तुल्य प्रतिरोध 6 + 6 = 12 ओम बनता है। फिर इस 12 ओम के संयोजन के साथ तीसरे 6 ओम के प्रतिरोधक को पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है, जिससे (12 × 6) / (12 + 6) = 72 / 18 = 4 ओम प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• 9 ओम के लिए: (6 || 6) + 6 = 9 ओम।
• 4 ओम के लिए: (6 + 6) || 6 = 4 ओम।
• मिश्रित संयोजन (श्रेणी और पार्श्व का संयोजन) का यह एक बेहतरीन उदाहरण है।

आम गलतियाँ:

• दोनों स्थितियों के लिए एक ही प्रकार का संयोजन मान लेना।
• समांतर और श्रेणी के सूत्रों में भ्रमित होना।
• गणना की प्रक्रिया को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर को (i) और (ii) भागों में बाँटकर स्पष्ट रूप से हल करें।
b) प्रत्येक भाग में कौन से दो प्रतिरोध पार्श्व में और कौन सा श्रेणी में है, इसे लिखकर बताएं।
c) यह बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 35: 220 V की विद्युत लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक 10 W है। यदि 220 V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत धारा 5 A है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं?

Answer:

प्रत्येक बल्ब के लिए विद्युत शक्ति P = 10 W और विभवांतर V = 220 V है। एक बल्ब का प्रतिरोध R = V² / P = (220)² / 10 = 4840 ओम है। दी गई कुल धारा I = 5 A और विभवांतर V = 220 V है, जिससे लाइन का कुल आवश्यक प्रतिरोध R कुल = V / I = 220 / 5 = 44 ओम प्राप्त होता है। माना बल्बों की कुल संख्या x है। पार्श्वक्रम में 1 / 44 = x × (1 / 4840) होता है, जिससे x = 4840 / 44 = 110 प्राप्त होता है। अतः दो तारों के बीच 110 बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं।

मुख्य बिंदु:

• एक बल्ब के प्रतिरोध और कुल आवश्यक प्रतिरोध की गणना की जाती है।
• पार्श्वक्रम संयोजन में कुल प्रतिरोध R = R1 / x होता है।
• अधिकतम धारा 5 A होने के कारण कुल प्रतिरोध 44 Ω होना चाहिए।

आम गलतियाँ:

• कुल शक्ति को 5 A से गुणा करके सीधे बल्बों की संख्या निकाल लेना।
• पार्श्वक्रम के सूत्र में मानों को उल्टा रख देना।
• गणना में शून्य की भूल करना।

Exam Tips:

a) पहले एक बल्ब का प्रतिरोध निकालें।
b) फिर कुल अनुमत प्रतिरोध की गणना करें।
c) अंत में समीकरण से बल्बों की संख्या ज्ञात करें।

 

Question 36: किसी विद्युत भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुंडलियों A तथा B की बनी हैं जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 24 ओम है तथा इन्हें पृथक-पृथक, श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्टी 220 V विद्युत स्रोत से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत धाराएँ क्या हैं?

Answer:

दिया गया है कि विभवांतर V = 220 V तथा प्रत्येक कुंडली का प्रतिरोध R = 24 Ω है।
पहला प्रकरण (पृथक-पृथक संयोजित करने पर): प्रत्येक कुंडली से प्रवाहित धारा I = V / R = 220 / 24 = 9.16 एम्पीयर होगी।
दूसरा प्रकरण (श्रेणीक्रम में संयोजित करने पर): कुल प्रतिरोध Rs = R + R = 24 + 24 = 48 Ω होगा। प्रवाहित धारा I = V / Rs = 220 / 48 = 4.58 एम्पीयर होगी।
तीसरा प्रकरण (पार्श्वक्रम में संयोजित करने पर): कुल प्रतिरोध Rp = R / 2 = 24 / 2 = 12 Ω होगा। प्रवाहित धारा I = V / Rp = 220 / 12 = 18.33 एम्पीयर होगी।

मुख्य बिंदु:

• पृथक स्थिति में केवल एक कुंडली का प्रतिरोध (24 Ω) काम आता है।
• श्रेणीक्रम में प्रतिरोध दोगुना (48 Ω) हो जाता है जिससे धारा आधी हो जाती है।
• पार्श्वक्रम में प्रतिरोध आधा (12 Ω) हो जाता है जिससे धारा दोगुनी हो जाती है।

आम गलतियाँ:

• तीनों प्रकरणों में एक ही प्रतिरोध मान लेना।
• श्रेणी और पार्श्व के प्रतिरोध गलत निकालना।
• भाग देने में त्रुटि करना।

Exam Tips:

a) तीनों स्थितियों (पृथक, श्रेणी, पार्श्व) के लिए प्रतिरोध अलग-अलग निकालें।
b) प्रत्येक स्थिति में ओम का नियम (I = V / R) लगाएं।
c) उत्तर को दशमलव के दो स्थानों तक लिखकर स्पष्ट करें।

 

Question 37: निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 2 ओम प्रतिरोधक द्वारा उपमुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए: (i) 6 V की बैटरी से संयोजित 1 ओम तथा 2 ओम श्रेणीक्रम संयोजन। (ii) 4 V बैटरी से संयोजित 12 ओम तथा 2 ओम का पार्श्वक्रम संयोजन।

Answer:

(i) श्रेणी संयोजन में 1 ओम तथा 2 ओम के प्रतिरोधक जुड़े हैं, इसलिए कुल प्रतिरोध R = 1 + 2 = 3 ओम है। बैटरी V = 6 V है। परिपथ की धारा I = V / R = 6 / 3 = 2 एम्पीयर है। श्रेणीक्रम में धारा समान रहती है, अतः 2 ओम प्रतिरोधक में प्रवाहित धारा भी 2 A होगी। इसकी उपमुक्त शक्ति P = I²R = (2)² × 2 = 4 × 2 = 8 वाट है।
(ii) पार्श्व संयोजन में 12 ओम और 2 ओम के प्रतिरोधक 4 V बैटरी से जुड़े हैं। पार्श्वक्रम में प्रत्येक शाखा के सिरों के बीच विभवांतर समान (4 V) रहता है, अतः 2 ओम प्रतिरोधक के सिरों पर भी विभवांतर 4 V होगा। इसकी उपमुक्त शक्ति P = V² / R = (4)² / 2 = 16 / 2 = 8 वाट है। अतः दोनों ही परिपथों में 2 ओम प्रतिरोधक द्वारा उपमुक्त शक्ति 8 वाट है, यानी दोनों समान हैं।

मुख्य बिंदु:

• श्रेणीक्रम में शक्ति निकालने के लिए P = I²R का प्रयोग सुविधाजनक है क्योंकि धारा समान होती है।
• पार्श्वक्रम में शक्ति निकालने के लिए P = V² / R का प्रयोग सुविधाजनक है क्योंकि विभवांतर समान होता है।
• दोनों स्थितियों में 2 ओम प्रतिरोधक की शक्ति 8 वाट आती है।

आम गलतियाँ:

• दोनों स्थितियों में एक ही सूत्र लगा देना।
• श्रेणीक्रम में धारा के बजाय विभवांतर समान मान लेना।
• पार्श्वक्रम में कुल प्रतिरोध से धारा निकालने की कोशिश करना।

Exam Tips:

a) प्रश्न के दोनों भागों को अलग-अलग और सही सूत्र चुनकर हल करें।
b) श्रेणी में धारा समान और पार्श्व में विभवांतर समान - इस मूल मंत्र को याद रखें।
c) यह एक बहुत ही शानदार वैचारिक संख्यात्मक प्रश्न है।

 

Question 38: दो विद्युत लैंपों में से एक का अनुमतांक 100 W; 220 V तथा दूसरे का 60 W; 220 V है, विद्युत मेंस के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित है। यदि विद्युत आपूर्ति की वोल्टता 220 V है तो विद्युत मेंस से कितनी धारा ली जाती है?

Answer:

पहले लैंप की शक्ति P₁ = 100 W और विभवांतर V = 220 V है, जिससे पहली धारा I₁ = P₁ / V = 100 / 220 = 0.455 एम्पीयर है। दूसरे लैंप की शक्ति P₂ = 60 W और विभवांतर V = 220 V है, जिससे दूसरी धारा I₂ = P₂ / V = 60 / 220 = 0.273 एम्पीयर है। चूँकि दोनों लैंप पार्श्वक्रम में संयोजित हैं, विद्युत मेंस से ली जाने वाली कुल धारा I दोनों धाराओं के योग के बराबर होगी: I = I₁ + I₂ = 0.455 + 0.273 = 0.728 एम्पीयर है।

मुख्य बिंदु:

• पार्श्वक्रम में कुल धारा व्यक्तिगत धाराओं के योग के बराबर होती है।
• प्रत्येक लैंप की धारा I = P / V सूत्र से निकाली जाती है।
• आपूर्ति वोल्टता (220 V) दोनों के लिए समान है।

आम गलतियाँ:

• शक्तियों को सीधे जोड़कर धारा निकाल लेना।
• प्रतिरोध निकालकर फिर हल करने में लंबी गणना करना (जबकि P/V सीधा तरीका है)।
• दशमलव जोड़ में गलती करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक उपकरण की धारा अलग से निकालें (I = P/V)।
b) पार्श्वक्रम होने के कारण धाराओं को आपस में जोड़ें।
c) उत्तर को उचित मात्रक (A) के साथ समाप्त करें।

 

Question 39: किसमें अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है - 250 W का टी.वी. सेट जो एक घंटे तक चलाया जाता है अथवा 120 W का विद्युत हीटर जो 10 मिनट के लिए चलाया जाता है?

Answer:

विद्युत उपकरण द्वारा उपभुक्त ऊर्जा E = P × t होती है।
टी.वी. सेट के लिए: शक्ति P = 250 W और समय t = 1 घंटा = 3600 सेकंड है। उपभुक्त ऊर्जा E₁ = 250 वाट × 3600 सेकंड = 900,000 जूल (या 9 × 10⁵ J) है।
विद्युत हीटर के लिए: शक्ति P = 1200 W (प्रश्न में 120 W दिया है, पर गणना 1200 W के अनुसार है) और समय t = 10 मिनट = 10 × 60 = 600 सेकंड है। उपभुक्त ऊर्जा E₂ = 1200 वाट × 600 सेकंड = 720,000 जूल (या 7.2 × 10⁵ J) है।
चूँकि T.V. सेट की ऊर्जा (900,000 J) हीटर की ऊर्जा (720,000 J) से अधिक है, अतः टी.वी. सेट द्वारा अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• ऊर्जा की तुलना करने के लिए दोनों का मान जूल या किलोवाट-घंटे में निकालें।
• समय को हमेशा सेकंड में बदलना आवश्यक है।
• ऊर्जा = शक्ति × समय का सूत्र प्रयोग किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• समय को बिना बदले सीधे घंटों और मिनटों से गुणा कर देना।
• केवल शक्ति देखकर ही निर्णय ले लेना (समय पर ध्यान न देना)।
• गणना में बड़ी संख्याओं की भूल।

Exam Tips:

a) दोनों उपकरणों की ऊर्जा की गणना अलग-अलग जूल में करें।
b) समय को सेकंड में और शक्ति को वाट में बदलें।
c) अंत में तुलना करके स्पष्ट निष्कर्ष लिखें।

 

Question 40: 8 ओम प्रतिरोध का कोई विद्युत हीटर विद्युत मेंस से 2 घंटे तक 15 A विद्युत धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए।

Answer:

विद्युत हीटर द्वारा उत्पन्न ऊष्मा की दर (अर्थात शक्ति) ज्ञात करनी है। यहाँ विद्युत धारा I = 15 A और प्रतिरोध R = 8 Ω है। समय t = 2 घंटे है। ऊष्मा उत्पन्न होने की दर H / t = I²R होती है। इस सूत्र में मान रखने पर H / t = (15)² × 8 = 225 × 8 = 1800 जूल प्रति सेकंड (या 1800 W) प्राप्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• 'उत्पन्न ऊष्मा की दर' का अर्थ प्रति सेकंड उत्पन्न ऊष्मा अर्थात विद्युत शक्ति (P = I²R) है।
• यहाँ समय (2 घंटे) का उपयोग गणना में नहीं होता क्योंकि दर प्रति सेकंड ही निकाली जाती है।
• इसका मात्रक जूल प्रति सेकंड (J/s) या वाट (W) होता है।

आम गलतियाँ:

• समय (2 घंटे) को सूत्र में गुणा कर देना (जबकि यह 'दर' पूछी गई है कुल ऊष्मा नहीं)।
• धारा का वर्ग करना भूल जाना।
• गलत सूत्र का चयन करना।

Exam Tips:

a) 'उत्पन्न ऊष्मा की दर' शब्दों को ध्यान से समझें, इसका अर्थ शक्ति (Power) होता है।
b) P = I²R सूत्र का प्रयोग करें।
c) मात्रक लिखना न भूलें।

 

Question 41: निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए: (a) विद्युत लैंपों के तंतुओं के निर्माण में एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है? (b) विद्युत तापन युक्तियों जैसे टूस्टर तथा विद्युत इस्त्री के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रधातुओं के क्यों बनाए जाते हैं? (c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है? (d) किसी तार का प्रतिरोध (R) उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है? (e) विद्युत संचरण के लिए प्रायः कॉपर तथा एल्युमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है?

Answer:

(a) टंगस्टन का गलनांक बहुत अधिक (लगभग 3380 °C) होता है तथा यह उच्च तापमान पर भी उपचयित नहीं होता, जिससे यह बिना पिघले अत्यधिक चमक उत्पन्न कर सकता है।
(b) मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं से अधिक होती है और वे उच्च तापमान पर भी जलती या पिघलती नहीं हैं।
(c) श्रेणीक्रम में एक उपकरण खराब होने पर परिपथ टूट जाता है और सभी उपकरण बंद हो जाते हैं, तथा सभी को समान वोल्टेज नहीं मिलता।
(d) तार मोटा होने पर (क्षेत्रफल अधिक होने पर) इलेक्ट्रॉनों को गति करने के लिए अधिक जगह मिलती है, जिससे बाधा या प्रतिरोध कम हो जाता है।
(e) कॉपर और एल्युमिनियम की प्रतिरोधकता बहुत कम होती है और वे विद्युत के बहुत अच्छे सुचालक होते हैं, जिससे ऊर्जा की हानि कम होती है।

मुख्य बिंदु:

• टंगस्टन का उच्च गलनांक इसे बल्ब के लिए उपयुक्त बनाता है।
• मिश्रधातुओं का उच्च प्रतिरोध और उच्च ताप सहन करने की क्षमता तापन अवयव बनाती है।
• घरेलू वायरिंग हमेशा पार्श्वक्रम में होती है श्रेणीक्रम में नहीं।
• कॉपर और एल्युमिनियम उत्तम सुचालक हैं।

आम गलतियाँ:

• सभी कारणों को एक ही जैसा लिख देना।
• वैज्ञानिक शब्दों (जैसे गलनांक, प्रतिरोधकता) का प्रयोग न करना।
• भागों को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक भाग (a से e) का उत्तर अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट दें।
b) वैज्ञानिक शब्दावली का सटीक प्रयोग करें।
c) यह बोर्ड परीक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है।

 

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