NCERT Solutions for Class 10 Science: Chapter 13 हमारा पर्यावरण
Review structured textbook solutions for Class 10 Science Chapter 13 हमारा पर्यावरण. Built according to NCERT guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.
Practice Class 10 Science Solutions: Chapter 13 हमारा पर्यावरण
View or download the dedicated Chapter 13 हमारा पर्यावरण solution resource below. Engaging with these textbook answers under focused study conditions ensures continuous academic progress and mastery of the 2026-27 curriculum for Science.
Question 1: पोषी स्तर क्या है? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभिन्न पोषी स्तर बताइए।
Answer:
आहार श्रृंखला में विभिन्न चरणों में खाद्य ऊर्जा के स्थानांतरण को पोषी स्तर (trophic level) कहा जाता है। खाद्य श्रृंखला का प्रत्येक चरण या कड़ी एक पोषी स्तर बनाता है। उदाहरण के लिए, एक घास के मैदान में काम कर रहे खाद्य श्रृंखला में: पहला पोषी स्तर घास है, दूसरा पोषी स्तर कीड़े हैं, तीसरा पोषी स्तर मेंढक है तथा चौथा और अंतिम पोषी स्तर पक्षी है। इस प्रकार ऊर्जा का प्रवाह उत्पादक से विभिन्न उपभोक्ता स्तरों तक होता है।
मुख्य बिंदु:
• पोषी स्तर आहार श्रृंखला में ऊर्जा के स्थानांतरण के विभिन्न चरणों को दर्शाते हैं。
• प्रथम पोषी स्तर हमेशा स्वपोषी या उत्पादक (जैसे घास) होता है。
• ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है और प्रत्येक उच्च पोषी स्तर पर ऊर्जा कम होती जाती है।
आम गलतियाँ:
• पोषी स्तर और आहार श्रृंखला को एक ही समझ लेना।
• प्राथमिक उपभोक्ता को प्रथम पोषी स्तर मान लेना (प्रथम पोषी स्तर उत्पादक होता है)।
• ऊर्जा के प्रवाह की दिशा को गलत दर्शाना।
Exam Tips:
a) पोषी स्तर की परिभाषा और उसका उदाहरण हमेशा क्रमबद्ध रूप में लिखें।
b) आरेख बनाकर विभिन्न पोषी स्तरों (घास → कीड़े → मेंढक → पक्षी) को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) यह प्रश्न अक्सर 2 या 3 अंकों में पूछा जाता है, इसलिए सटीक उदाहरण दें।
Question 2: पारितंत्र में अपमार्जकों की क्या भूमिका है?
Answer:
अपमार्जक (scavengers) वे सूक्ष्मजीव और जीव हैं जो उत्पादकों और उपभोक्ताओं के मृत और क्षय निकायों पर कार्य करते हैं और उन्हें सरल अकार्बनिक यौगिकों में तोड़ देते हैं। वे पदार्थों को अवशोषित करते हैं और बाकी को पुनर्नवीनीकरण के लिए पर्यावरण में छोड़ देते हैं जो भविष्य में उत्पादकों द्वारा उपयोग किए जाते हैं। इस प्रकार, जीव-जगत में इन विघटन करने वाले अपमार्जकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जो उत्पादकों को भोजन के लिए सामग्री प्रदान करते हैं। अतः, अपमार्जक मिट्टी उपजाऊ बनाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• अपमार्जक मृत जीवों और कचरे का अपघटन करते हैं।
• वे जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पोषक तत्वों में बदलते हैं।
• यह प्रक्रिया पारितंत्र में पदार्थों के चक्रण में मदद करती है और पर्यावरण को स्वच्छ रखती है।
आम गलतियाँ:
• अपमार्जक और decomposers (अपघटक) के बीच अंतर न समझ पाना।
• यह सोचना कि अपमार्जक केवल कचरा साफ करते हैं, पोषक चक्रण में उनकी भूमिका को भूल जाना。
• पारितंत्र संतुलन में उनकी महत्ता को कम आंकना।
Exam Tips:
a) अपमार्जकों के मुख्य कार्यों को बिंदुओं में लिखें ताकि उत्तर प्रभावी लगे।
b) पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण का उल्लेख करना न भूलें।
c) सरल और स्पष्ट भाषा का प्रयोग करें।
Question 3: क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं और कुछ अजैव निम्नीकरणीय?
Answer:
कुछ पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों द्वारा सरल पदार्थों में टूट कर अपघटित जाते हैं, को जैव निम्नीकरणीय (biodegradable) पदार्थ कहा जाता है जैसे कपास, लकड़ी, कागज़, ऊन, आदि। इसके विपरीत, जो पदार्थ (मुख्य रूप से मानव निर्मित) जो सूक्ष्मजीवों के एंजाइमों की क्रिया द्वारा सरल पदार्थों में अपघटित या टूट नहीं पाते हैं, उन्हें अजैव निम्नीकरणीय (non-biodegradable) पदार्थ कहा जाता है जैसे प्लास्टिक, पॉलिथीन, डीडीटी, आदि।
मुख्य बिंदु:
• जैव निम्नीकरणीय पदार्थ जैविक क्रियाओं (सूक्ष्मजीवों) द्वारा सरलता से विघटित हो जाते हैं।
• अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ प्रकृति में लंबे समय तक बने रहते हैं क्योंकि सूक्ष्मजीव उन्हें नहीं तोड़ सकते।
• अधिकांश मानव निर्मित रसायन अजैव निम्नीकरणीय श्रेणी में आते हैं।
आम गलतियाँ:
• जैव और अजैव पदार्थों के उदाहरणों में भ्रमित होना।
• यह भूल जाना कि सूक्ष्मजीवों के एंजाइम विशिष्ट होते हैं और हर पदार्थ पर कार्य नहीं कर सकते।
• वैज्ञानिक शब्दावली का सही प्रयोग न करना।
Exam Tips:
a) दोनों प्रकार के पदार्थों की परिभाषा के साथ कम से कम दो-दो उदाहरण अवश्य दें।
b) सूक्ष्मजीवों की भूमिका को मुख्य आधार बनाकर उत्तर लिखें।
c) अंतर स्पष्ट करने के लिए परिभाषाओं को स्पष्ट रूप से अलग करें।
Question 4: ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
Answer:
जैव निम्नीकरणीय पदार्थों का पर्यावरण पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ता है: पहला, जैव निम्नीकरणीय पदार्थों की अपघटन प्रक्रिया के दौरान बदबूदार गंध और कुछ हानिकारक गैसें उत्सर्जित होती हैं जो आसपास के जीवों के लिए समस्या पैदा करती हैं। दूसरा, अपघटन के दौरान यह स्थल मच्छर, कीड़े-मकोड़े तथा अन्य हानिकारक सूक्ष्म जीवों के लिए प्रजनन स्थल भी बन जाता है जो कोलेरा, दस्त, आदि जैसी घातक बीमारियों के लिए जिम्मेदार है।
मुख्य बिंदु:
• अपघटन के समय दुर्गंध और हानिकारक गैसों का निकलना।
• कीटों और सूक्ष्मजीवों का पनपना जो बीमारियों का कारण बनते हैं।
• पर्यावरण में गंदगी और अस्वच्छता का फैलना।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुँचाते।
• केवल सकारात्मक पक्षों (जैसे खाद बनना) पर ध्यान देना और नकारात्मक प्रभावों को छोड़ देना।
• स्पष्ट तरीकों का वर्णन न करना।
Exam Tips:
a) दो स्पष्ट प्रभाव बिंदुओं के रूप में लिखें।
b) बीमारी और प्रदूषण से जुड़े तर्कों को शामिल करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।
Question 5: ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
Answer:
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है: पहला, BHC और DDT जैसे रसायन मांसपेशी कैंसर और ट्यूमर के विकास को प्रेरित करते हैं। दूसरा, अपशिष्ट पदार्थों के संपर्क में आने से त्वचा, श्वसन और आंतों में संक्रमण हो सकता है क्योंकि अजैव निम्नीकरणीय आसानी से विचलित नहीं होते, इसलिए यह भूमि और जल प्रदूषण पैदा करता है।
मुख्य बिंदु:
• अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ लंबे समय तक पर्यावरण में संचित रहते हैं।
• वे जैव आवर्धन (biological magnification) के माध्यम से खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करते हैं।
• ये भूमि, जल और वायु प्रदूषण का मुख्य कारण बनते हैं।
आम गलतियाँ:
• अजैव और जैव प्रभावों को आपस में मिला देना।
• केवल प्लास्टिक की बात करना और रासायनिक प्रदूषकों (जैसे डीडीटी) को भूल जाना।
• स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को न लिखना।
Exam Tips:
a) रसायनों के नाम (जैसे डीडीटी) उदाहरण के रूप में दें।
b) प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी हानियों को प्रमुखता दें।
c) उत्तर को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लिखें।
Question 6: ओजोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?
Answer:
ओजोन (O3) अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनते हैं जो कि एक घातक विष होता है। वायुमंडल के उच्चतर स्तर पर पराबैंगनी (UV) विकिरण के प्रभाव से ऑक्सीजन अणुओं से ओजोन बनती है। उच्च ऊर्जा वाले पराबैंगनी विकिरण ऑक्सीजन अणुओं (O2) को विघटित कर स्वतंत्र ऑक्सीजन (O) परमाणु बनाते हैं। ओजोन के ये स्वतंत्र परमाणु संयुक्त होकर ओजोन बनाते हैं। वायुमंडल के ऊपरी स्तर में ओजोन एक आवश्यक कार्य संपादित करती है; यह सूर्य से आने वाले पराबैंगनी विकिरणों से पृथ्वी को सुरक्षित रखती है।
मुख्य बिंदु:
• ओजोन ऑक्सीजन का अपरूप है जिसका सूत्र O3 है।
• यह समताप मंडल में सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से हमारी रक्षा करती है।
• भू-तल पर यह एक विषैली गैस है, लेकिन ऊपरी वायुमंडल में जीवन के लिए कवच का काम करती है।
आम गलतियाँ:
• ओजोन को केवल एक हानिकारक गैस मान लेना और उसकी सुरक्षात्मक भूमिका भूल जाना।
• ओजोन के निर्माण की प्रक्रिया को गलत लिखना।
• पारितंत्र पर इसके प्रभाव को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) ओजोन का रासायनिक सूत्र और उसका निर्माण समीकरण अवश्य लिखें।
b) इसके दोनों रूपों (निचले वायुमंडल में विष और ऊपरी वायुमंडल में सुरक्षा कवच) को स्पष्ट करें।
c) पराबैंगनी किरणों के दुष्प्रभावों से ओजोन की महत्ता को जोड़कर समझाएँ।
Question 7: आप कचरा निपटारा की समस्या कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं? किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए।
Answer:
कचरा निपटारा की समस्या कम करने में हम निम्नलिखित योगदान कर सकते हैं: पहला, निपटान वस्तुओं के उपयोग को कम करके और पुनर्वनीकरण वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देकर। दूसरा, जैव निम्नीकरणीय तथा अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट को अलग करके। अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट सामग्री का पुनर्चक्रण करके हम कचरे को प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• 3R (Reduce, Reuse, Recycle) के सिद्धांतों का पालन करना।
• गीले और सूखे (जैव और अजैव) कचरे को अलग-अलग कूड़ेदान में डालना।
• प्लास्टिक और कैरी बैग का उपयोग कम करना।
आम गलतियाँ:
• केवल एक तरीका लिखकर उत्तर अधूरा छोड़ देना।
• पुनर्चक्रण (Recycling) और पुनरुपयोग (Reuse) में अंतर न समझ पाना।
• व्यावहारिक उपायों के बजाय केवल किताबी बातें लिखना।
Exam Tips:
a) दो स्पष्ट और व्यावहारिक उपाय headings के साथ लिखें।
b) अपने दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरण दें।
c) उत्तर साफ और बिंदुवार प्रस्तुत करें।
Question 8: निम्न में से कौन-से समूहों में केवल जैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं -
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक
(c) फलों के छिलके, केक एवं नींबू का रस
(d) केक, लकड़ी एवं घास
Answer:
(a), (c) और (d) क्योंकि प्लास्टिक जैव निम्नीकरणीय पदार्थ नहीं है।
मुख्य बिंदु:
• प्लास्टिक एक अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ है जो सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित नहीं होता।
• जैविक अपशिष्ट (घास, फल, लकड़ी, चमड़ा) आसानी से विघटित हो जाते हैं।
• विकल्प (b) में प्लास्टिक होने के कारण वह समूह अमान्य है।
आम गलतियाँ:
• सभी विकल्पों को ध्यान से न पढ़ना और केवल एक सही विकल्प चुनकर रुक जाना (यहाँ एकाधिक सही विकल्प हैं)।
• चमड़े को अजैव मान लेना।
• प्लास्टिक की प्रकृति को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में प्रत्येक विकल्प की जाँच करें।
b) कारण सहित उत्तर लिखने का अभ्यास करें।
c) सही विकल्पों का समूह स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 9: निम्न में से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं -
(a) घास, गेहूँ तथा आम
(b) घास, बकरी तथा मानव
(c) बकरी, गाय तथा हाथी
(d) घास, मछली तथा बकरी
Answer:
(b) घास, बकरी तथा मानव
मुख्य बिंदु:
• आहार श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह उत्पादक से प्राथमिक उपभोक्ता और फिर द्वितीयक उपभोक्ता तक होता है।
• घास (उत्पादक) को बकरी (शाकाहारी) खाती है, और बकरी को मानव (सर्वाहारी) खाता है।
• अन्य विकल्पों में जीव एक ही पोषण स्तर के हैं या सही क्रम नहीं बनाते।
आम गलतियाँ:
• समस्तरीय जीवों (जैसे घास, गेहूँ, आम) को आहार श्रृंखला मान लेना।
• जीवों के पोषण स्तर के क्रम को उलट देना।
• खाद्य संबंधों को ठीक से न समझना।
Exam Tips:
a) खाद्य श्रृंखला हमेशा उत्पाद से शुरू होती है।
b) शाकाहारी और मांसाहारी/सर्वाहारी का सही क्रम पहचानें।
c) विकल्प चुनते समय ऊर्जा प्रवाह की दिशा का ध्यान रखें।
Question 10: निम्न में से कौन पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाते हैं -
(a) बाजार जाते समय सामान के लिए कपड़े का थैला ले जाना
(b) कार्य समाप्त हो जाने पर लाइट (बल्ब) तथा पंखे का स्विच बंद करना
(c) माँ के द्वारा स्कूटर से विद्यालय छोड़ने के बजाय तुम्हारा विद्यालय तक पैदल जाना
(d) उपरोक्त सभी
Answer:
(d) उपरोक्त सभी
मुख्य बिंदु:
• कपड़े का थैला ले जाने से प्लास्टिक का उपयोग बचता है।
• बिजली बचाने से ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण होता है।
• पैदल चलने से ईंधन की बचत होती है और प्रदूषण घटता है।
आम गलतियाँ:
• किसी एक विकल्प को सही मानकर अन्य को छोड़ देना जबकि सभी पर्यावरण के अनुकूल हैं।
• पर्यावरण-मित्र की अवधारणा को केवल पेड़-पौधों तक सीमित समझना।
• दैनिक आदतों के महत्व को न समझना।
Exam Tips:
a) ऐसे प्रश्नों में सभी विकल्पों का विश्लेषण करें।
b) पर्यावरण संरक्षण के दैनिक उपायों को समझें।
c) सही विकल्प (d) को पूरी जानकारी के साथ लिखें।
Question 11: क्या होगा यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार डालें)?
Answer:
अगर हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को मार देते हैं, तो अगले पोषी स्तर पर खाद्य ऊर्जा का प्रवाह बंद हो जाएगा जिसके परिणामस्वरूप पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बिगड़ जाएगा। नतीजतन, इस पोषी स्तर से, उच्च पोषी स्तर के जीवों के लिए निर्वाह करना कठिन हो जाएगा जबकि निचले स्तर के जीव अपनी आबादी में भारी वृद्धि प्रदर्शित करेंगे। दोनों ही स्थितियों का परिणाम पारिस्थितिक असंतुलन होगा।
मुख्य बिंदु:
• किसी एक पोषी स्तर के समाप्त होने से पूरी आहार श्रृंखला टूट जाती है।
• ऊपर के स्तर के जीवों को भोजन मिलना बंद हो जाता है और वे भूख से मर सकते हैं।
• नीचे के स्तर के जीवों की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ जाती है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि केवल एक स्तर के हटने से पारितंत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
• केवल उच्च जीवों पर पड़ने वाले असर को लिखना, निचले जीवों की वृद्धि भूल जाना।
• ऊर्जा प्रवाह के व्यवधान को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) पारिस्थितिक संतुलन और ऊर्जा प्रवाह के संदर्भ में उत्तर दें।
b) उच्च और निम्न दोनों पोषी स्तरों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाएँ।
c) उत्तर को तार्किक और स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 12: क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा? क्या किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना संभव है?
Answer:
हाँ, एक पोषी स्तर में सभी जीवों को हटाने का प्रभाव अलग-अलग पोषी स्तरों के लिए अलग होगा। यदि सभी उत्पादक मारे गए हैं, तो यह पारिस्थितिकी तंत्र में प्राथमिक उपभोक्ताओं की मौत या प्रवास का कारण बनेगा। उत्पादकों की उपस्थिति में, उपभोक्ताओं के बाद के स्तर पर भी असर पड़ेगा। लेकिन यदि प्राथमिक उपभोक्ताओं को हटा दिया जाता है, तो उच्च पोषी स्तर के जीव मर जाएंगे, जबकि निम्न स्तर (उत्पादक) पर्यावरण की वाहक क्षमता से अधिक वृद्धि दिखाते हैं। एक पोषी स्तर में जीवों को हटाने से पूरे पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर दिया जाएगा क्योंकि जीवों की सभी श्रेणियां खाद्य श्रृंखला के माध्यम से जुड़ी हुई हैं। एक स्तर के जीवों का अस्तित्व अन्य पोषी स्तर के जीवों के अस्तित्व पर निर्भर करता है।
मुख्य बिंदु:
• हर पोषी स्तर की पारितंत्र में विशिष्ट भूमिका होती है।
• उत्पादकों के हटने से पूरा आधार नष्ट हो जाता है।
• किसी भी एक पोषी स्तर को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना नहीं हटाया जा सकता।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि किसी भी एक स्तर को बिना नुकसान के हटाया जा सकता है।
• उत्पादक और उपभोक्ता के हटने के परिणामों में अंतर न कर पाना।
• पारितंत्र की अन्योन्याश्रित (interdependent) प्रकृति को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) प्रश्न के दोनों भागों (अलग-अलग प्रभाव और बिना प्रभावित किए हटाना संभव है या नहीं) का उत्तर दें।
b) खाद्य जाल और ऊर्जा प्रवाह के तर्कों का उपयोग करें।
c) निष्कर्ष स्पष्ट रूप से लिखें कि किसी भी स्तर को हटाना असंभव है।
Question 13: जैव आवर्धन (Biological magnification) क्या है? क्या पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर जैव आवर्धन का प्रभाव भिन्न-भिन्न होगा?
Answer:
खाद्य श्रृंखला में गैर-जैव-अवक्रमण्य पदार्थों की एकाग्रता में प्रगतिशील वृद्धि को जैव आवर्धन कहा जाता है। जैसे विभिन्न फसलों को रोग एवं कीटों से बचाने के लिए पीड़कनाशक एवं रसायनों का अधिक प्रयोग करने से ये रसायन बहकर मिट्टी में अथवा जल स्रोत में चले जाते हैं। मिट्टी से इन पदार्थों को पौधों द्वारा जल एवं खनिजों के साथ-साथ अवशोषण हो जाता है और जलाशयों से यह जलीय पौधों एवं जंतुओं में प्रवेश कर जाते हैं। इसप्रकार ये आहार श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं। क्योंकि ये पदार्थ अजैव निम्नीकरणीय हैं, यह प्रत्येक पोषी स्तर पर उत्तरोत्तर संग्रहित होते चले जाते हैं। आहार श्रृंखला में मनुष्य शीर्ष पर होने के कारण, ये रसायन मानव शरीर में सर्वाधिक मात्रा में संचित हो जाते हैं। इसे जैव आवर्धन कहते हैं। जैव आवर्धन का प्रभाव प्रत्येक स्तर पर भिन्न-भिन्न होता है। ये रसायन अजैव निम्नीकृत हैं इसलिए, निचले स्तरों पर कम तथा ऊपरी स्तर पर अधिक होता है।
मुख्य बिंदु:
• अजैव निम्नीकरणीय रसायनों का खाद्य श्रृंखला में ऊपर की ओर सांद्रता बढ़ते जाना जैव आवर्धन है।
• शीर्ष उपभोक्ताओं (जैसे मानव या बड़े पक्षी) में इन विषैले पदार्थों की मात्रा सबसे अधिक होती है。
• यह पारितंत्र के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।
आम गलतियाँ:
• जैव आवर्धन और जैव निम्नीकरण को एक समझना।
• यह भूल जाना कि सांद्रता प्रत्येक उच्च स्तर पर बढ़ती जाती है।
• मानव शरीर पर इसके प्रभाव को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) परिभाषा के साथ हानिकारक रसायनों (जैसे डीडीटी) का उदाहरण दें।
b) स्पष्ट करें कि यह प्रक्रिया खाद्य श्रृंखला में कैसे काम करती है।
c) उच्च पोषी स्तर पर इसका प्रभाव सबसे अधिक होता है, यह अवश्य लिखें।
Question 14: हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?
Answer:
अजैव निम्नीकरणीय कचरे को सरल पदार्थों में विभाजित (अपघटन) नहीं किया जाता है। घातक रसायन तथा कीटनाशकों जैसे अजैव निम्नीकरणीय कचरे में से कुछ खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करते हैं और ऊपरी पोषी स्तरों में बढ़ते हैं। ये मिट्टी के प्राकृतिक लवणीय संतुलन को बदलकर मिट्टी की उर्वरता को भी कम करते हैं। ये पदार्थ सामान्यतः अक्रिय हैं तथा लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं और पर्यावरण के जीवों को हानि पहुँचाते हैं। ये भूमि, जल तथा वायु प्रदूषण के मुख्य कारक होते हैं जिससे विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ फैलती हैं।
मुख्य बिंदु:
• अजैव कचरा पर्यावरण में सदियों तक बना रहता है।
• यह भूमि और जल प्रदूषण का मुख्य कारण है।
• यह खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जैव आवर्धन को बढ़ावा देता है।
आम गलतियाँ:
• केवल प्लास्टिक कचरे तक सीमित रहना और अन्य अजैव रसायनों को छोड़ देना।
• मिट्टी की उर्वरता और जीवों पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख न करना।
• संक्षेप में उत्तर लिखकर मुख्य समस्याओं को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) समस्याओं को बिंदुओं में लिखें (प्रदूषण, उर्वरता में कमी, जैव आवर्धन)।
b) स्पष्ट और वैज्ञानिक शब्दावली का प्रयोग करें।
c) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के अनुसार पर्याप्त विस्तार दें।
Question 15: यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो क्या इसका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा?
Answer:
जैव निम्नीकरणीय कचरे सूक्ष्मजीवों द्वारा सरल पदार्थों में विघटित कर दिए जाते हैं और उत्पादकों के लिए भोजन प्रदान करते हैं, लेकिन पर्यावरण पर इसका प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ता है। जैव निम्नीकरणीय कचरे के दीर्घ अपघटन के परिणामस्वरूप गंध और हानिकारक गैसों की उत्पत्ति होती है। जब मनुष्यों द्वारा श्वास लिया जाता है, तो ये श्वास नलिका में प्रवेश करके बीमारी पैदा कर सकते हैं। अपशिष्ट पदार्थ कुछ हानिकारक जीवों के लिए प्रजनन स्थल प्रदान करते हैं। हानिकारक सूक्ष्मजीवों की बहुतायत जानवरों, पौधों और मनुष्यों में बीमारियों का कारण बन सकती है। जलीय माध्यम में सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि से जल निकायों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
मुख्य बिंदु:
• भले ही कचरा जैव निम्नीकरणीय हो, अत्यधिक मात्रा पर्यावरण के लिए हानिकारक होती है।
• अपघटन के समय निकलने वाली गैसें और दुर्गंध स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा करती हैं।
• जल में ऑक्सीजन की कमी (Eutrophication) जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि जैव निम्नीकरणीय कचरा शत-प्रतिशत पर्यावरण के अनुकूल होता है और कोई समस्या नहीं पैदा करता।
• सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन के नकारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज करना।
• जलीय निकायों पर पड़ने वाले असर को न लिखना।
Exam Tips:
a) तर्क दें कि अधिकता हर चीज की बुरी होती है, भले ही वह जैविक हो।
b) दुर्गंध, बीमारियाँ और ऑक्सीजन की कमी जैसे बिंदु शामिल करें।
c) संतुलित उत्तर लिखें।
Question 16: ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय क्यों है? इस क्षति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
Answer:
वायुमंडल के ऊपरी स्तर में ओजोन एक आवश्यक कार्य संपादित करती है। यह सूर्य से आने वाले पराबैंगनी विकिरण से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है। यह पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यंत हानिकारक है - जैसे यह विकिरण मानव में त्वचा का कैंसर उत्पन्न करती है। इसलिए ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय है। क्षति को सीमित करने के लिए 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वसम्मति बनी कि CFC (जो क्षति का मुख्य कारक है) के उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही सीमित रखा जाए.
मुख्य बिंदु:
• ओजोन परत हमें सूर्य की घातक पराबैंगनी (UV) किरणों से बचाती है।
• इसकी कमी से त्वचा का कैंसर और मोतियाबिंद जैसी बीमारियाँ बढ़ती हैं।
• मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (UNEP, 1987) के तहत CFC के उत्पादन को सीमित किया गया।
आम गलतियाँ:
• केवल ओजोन क्षय के कारण लिखना और यह न बताना कि यह चिंता का विषय क्यों है।
• UNEP या CFC का जिक्र न करना।
• पराबैंगनी किरणों के प्रभाव को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) पराबैंगनी विकिरण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) UNEP और 1987 समझौते (मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल) का सन सहित उल्लेख करें।
c) यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है, इसे अच्छे से तैयार करें।
Free study material for Science
Step-by-Step Textbook Answers: Class 10 Science Chapter 13 हमारा पर्यावरण
Chapter Exercise Answers for Class 10 Science
Explore reliable textbook solutions for Chapter 13 हमारा पर्यावरण tailored for Class 10 learners. Utilizing these complete exercise answers ensures your preparation aligns exactly with official NCERT standards for Science.
Detailed Answer Guides for Chapter 13 हमारा पर्यावरण
Beyond providing final answers, these guides offer step-by-step breakdowns for complex queries in the Class 10 Science module. This approach helps students balance theoretical depth with practical problem-solving skills required for NCERT exams.
Complete Preparation Kit for Class 10 Exams
Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 10 Science.
FAQs
The complete and updated NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 13 Our Environment (हमारा पर्यावरण) in Hindi is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Science are as per latest NCERT curriculum.
Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 13 Our Environment (हमारा पर्यावरण) in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 13 Our Environment (हमारा पर्यावरण) in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 10 Science. You can access NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 13 Our Environment (हमारा पर्यावरण) in Hindi in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 13 Our Environment (हमारा पर्यावरण) in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.