NCERT Solutions Class 10 Hindi Kshitiz पाठ 12 लखनवी अंदाज़ यशपाल

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1. लखनवी अंदाज़ (लेखक: यशपाल)

 

पाठ की रूपरेखा

लेखक यशपाल द्वारा रचित 'लखनवी अंदाज़' एक अत्यंत उत्कृष्ट व्यंग्य रचना है। यद्यपि लेखक ने इसे यह सिद्ध करने के लिए लिखा था कि किसी भी कहानी की रचना बिना किसी ठोस आधार या कथ्य के संभव नहीं है, फिर भी इसे एक उत्कृष्ट स्वतंत्र गद्य रचना के रूप में पढ़ा जा सकता है। लेखक ने इस पाठ में उस ढलते हुए सामंती समाज पर गहरा प्रहार किया है, जो यथार्थ से दूर रहकर केवल दिखावे और कृत्रिम जीवन शैली को ही अपना सब कुछ मानता है। समकालीन समय में भी ऐसी परजीवी और दिखावा पसंद संस्कृति हमारे समाज में प्रत्यक्ष रूप से देखी जा सकती है।

 

पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में लेखक ने एक ऐसे नवाब की कृत्रिम जीवन शैली का चित्रण किया है, जो अपनी झूठी नवाबी ठसक दिखाने के लिए लेखक के सामने खीरे खाने के बजाय उनकी केवल गंध लेकर ही पेट भर जाने का स्वाँग रचता है। वह एक-एक करके खीरे की फाँकों को सूँघता है और खिड़की से बाहर फेंकता जाता है। इसके पश्चात वह एक झूठी डकार लेकर अपनी पूर्ण तृप्ति का प्रदर्शन करता है। नवाब के इस अस्वाभाविक और कृत्रिम व्यवहार को देखकर लेखक के मन में यह विचार कौंधता है कि यदि बिना खाए केवल सूँघने से ही पेट भर सकता है, तो बिना किसी घटना, विचार या वास्तविक पात्रों के भी एक नई कहानी की रचना क्यों नहीं की जा सकती।

 

लेखक की रेल यात्रा

लेखक यशपाल अपनी कम खर्चीली आदत के कारण सामान्यतः सेकंड क्लास में सफर नहीं करना चाहते थे। परंतु, एकांत में नई कहानी के बारे में गहराई से सोचने, खिड़की से बाहर के सुंदर प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने और भीड़ से बचने की इच्छा से उन्होंने अंततः सेकंड क्लास का ही टिकट खरीद लिया। जब ट्रेन छूटने वाली थी, तो वे दौड़कर सेकंड क्लास के डिब्बे में सवार हो गए। लेखक का विचार था कि पूरा कम्पार्टमेंट खाली होगा, परंतु अंदर पहुँचने पर उन्होंने देखा कि एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी शैली में एक भद्र पुरुष पालथी मारकर बैठे थे। उनके ठीक सामने एक साफ़ तौलिये पर दो सुंदर खीरे रखे हुए थे। डिब्बे में लेखक के अचानक प्रवेश करने से नवाब साहब के चेहरे पर असंतोष की रेखाएँ उभर आईं। उन्होंने लेखक की उपस्थिति में कोई उत्साह या रुचि नहीं दिखाई, जिसके उत्तर में लेखक ने भी अपनी मर्यादा रखते हुए उनसे परिचय बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया और चुपचाप खिड़की की तरफ देखने लगे।

 

नवाब साहब का भाव-परिवर्तन

सामने बैठे नवाब साहब की चुप्पी को देखकर लेखक मन ही मन उनके बारे में कयास लगाने लगे। उन्होंने सोचा कि संभवतः नवाब साहब ने भी पैसे बचाने के उद्देश्य से ही सेकंड क्लास का टिकट लिया होगा, परंतु अब किसी सहयात्री के सामने इस श्रेणी में सफर करने में उन्हें अपनी नवाबी गरिमा कम होती महसूस हो रही होगी। सफर के समय को काटने के लिए उन्होंने शायद खीरे खरीदे होंगे, लेकिन अब एक अजनबी के सामने अत्यंत साधारण समझी जाने वाली वस्तु 'खीरा' खाने में उन्हें संकोच हो रहा होगा। नवाब साहब काफी देर तक खिड़की से बाहर देखते हुए इसी उधेड़बुन में लगे रहे। अचानक उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बहुत ही शिष्टता से लेखक को खीरे का स्वाद लेने के लिए आमंत्रित किया। नवाब साहब के इस अप्रत्याशित और अचानक हुए व्यवहार परिवर्तन को लेखक भांप गए और उन्होंने शिष्टतापूर्वक मना करते हुए धन्यवाद दिया तथा उन्हें ही खीरा खाने का आग्रह किया।

 

नवाब साहब का खीरा काटना

नवाब साहब ने कुछ क्षण और खिड़की से बाहर देखा, मानो वे कोई बड़ा निर्णय ले रहे हों। फिर उन्होंने अपनी सीट के नीचे रखे लोटे के पानी से खीरों को धोया, तौलिये से सुखाया और अपनी जेब से एक चाकू निकाला। उन्होंने खीरों के ऊपरी हिस्सों को काटकर बड़ी सावधानी से उन्हें गोदा ताकि उनका कड़वा झाग निकल जाए। इसके बाद उन्होंने खीरों को छीलकर उनकी सुंदर फाँकें बनाईं और तौलिये पर बहुत ही सलीके से सजा दिया। इसके उपरांत, उन्होंने उन फाँकों पर जीरा-नमक और लाल मिर्च का पिसा हुआ मसाला छिड़क दिया। लेखक उनके इस पूरे कार्यकलाप को बड़े ध्यान से देख रहे थे। नवाब साहब के चेहरे के हाव-भाव से स्पष्ट था कि खीरे की गंध और मसाले के छिड़काव से उनके मुँह में लार टपक रही थी। नवाब साहब ने एक बार पुनः लेखक को बड़े आदर से आमंत्रित करते हुए कहा कि लखनऊ का यह अत्यंत स्वादिष्ट 'बालम' खीरा है, इसका आनंद लें। मसालेदार रसीली फाँकों को देखकर लेखक का मन भी मचल उठा था, परंतु वे पहले ही मना कर चुके थे, अतः अपने आत्मसम्मान को ठेस न पहुँचाते हुए उन्होंने पुनः बहुत विनम्रतापूर्वक पेट की कमज़ोरी का बहाना बनाकर मना कर दिया।

 

नवाब साहब ने एक-एक फाँक बाहर फेंक दी

नवाब साहब ने नमक और मिर्च से सजी उन चमकीली फाँकों को एक बार लालसा भरी नज़रों से देखा, फिर गहरी सांस लेते हुए खिड़की के पार झाँका। उन्होंने बड़े सलीके से एक फाँक उठाई, उसे अपने होठों के समीप ले जाकर उसकी खुशबू का आनंद लिया। तृप्ति के सुखद अनुभव में उनकी आँखें बंद हो गईं। खुशबू के प्रभाव से मुँह में आए पानी को उन्होंने गले के नीचे उतार लिया और फिर उस फाँक को बिना खाए खिड़की से बाहर फेंक दिया। इस प्रकार उन्होंने एक-एक करके सभी फाँकों को सूँघता और बाहर फेंकते चले गए। अंत में, उन्होंने बड़े गर्व और नवाबी अहंकार के साथ तौलिये से अपने हाथ व होठों को पोंछा और लेखक की ओर इस तरह देखा मानो वे कह रहे हों कि यह है नवाबी रईसी का असली तरीका।

 

नवाब साहब की डकार

नवाब साहब सभी फाँकों को फेंकने के बाद अपने हाथ और मुँह को पोंछकर बर्थ पर लेट गए, मानो वे इस भारी परिश्रम वाले काम से अत्यंत थक गए हों। लेखक नवाब की इस विचित्र प्रदर्शनकारी कला को देखकर मन ही मन संकोच का अनुभव कर रहे थे। वे सोच रहे थे कि स्वाद लेने की यह कृत्रिम नवाबी शैली दिखने में भले ही अनूठी लगे, परंतु क्या बिना खाए केवल गंध से वास्तव में पेट की भूख शांत हो सकती है? इसी उधेड़बुन के बीच, नवाब साहब ने एक ज़ोरदार डकार ली और लेखक की तरफ देखते हुए टिप्पणी की कि खीरा खाने में तो बहुत स्वादिष्ट होता है, परंतु यह पचने में भारी होता है, जो हमारे नाज़ुक पेट को खराब कर देता है।

 

लेखक को मिली प्रेरणा

नवाब साहब की उस बनावटी डकार ने लेखक की आँखें पूरी तरह से खोल दीं। उनके मन में यह तीव्र वैचारिक तरंग उठी कि यदि खीरे को खाए बिना, केवल उसकी महक और स्वाद की कल्पना मात्र से ही पेट पूरी तरह भरकर डकार आ सकती है, तो बिना किसी वास्तविक घटना, विचार या जीवंत पात्रों के, केवल लेखक के मन की प्रबल इच्छा शक्ति से एक नई कहानी का सृजन क्यों नहीं किया जा सकता?

 

शब्दार्थ

 

पृष्ठ - 78

मुफ़स्सिल - केंद्रीय स्थान और उसके आसपास, स्थानीय। उतावली - बेचैनी। प्रतिकूल - विपरीत। निर्जन - एकांत, खाली स्थान। एकांत - चिंतन - अकेले में सोचना। विघ्न - बाधा। अपदार्थ वस्तु - सामान्य चीज़। आत्मसम्मान - स्वाभिमान। आँखें चुराना - बचने का प्रयास। ठाली बैठना - कुछ काम न करना। किफ़ायत - मितव्ययिता, कम खर्च करना। गवारा न होना - स्वीकार न होना। कनखियों - तिरछी नज़र से देखना। गौर करना - ध्यान देना। आदाब अर्ज़ - अभिवादन करना। भाव - परिवर्तन - भाव (विचारों) में परिवर्तन। भाँप लेना - समझ जाना। शराफ़त - सज्जनता, शालीनता। गुमान - घमंड। लथेड़ लेना - ज़बरदस्ती सम्मिलित करना। किबला - आप (सम्मानसूचक शब्द)।

 

पृष्ठ - 79

दृढ़ निश्चय - मज़बूत विचार। एहतियात - सावधानी। करीने से - अच्छी तरह से सजाना। बुरकना - छिड़कना। भाव - भंगिमा - चेहरे के बदलते स्वरूप। स्फुरण - फड़कना, हिलना। प्लावित होना - पानी भर जाना। अस्लियत - वास्तविकता, सचमुच। वल्लाह - कसम से। पनियाती - पानी छोड़ती। मुँह में पानी आना - जी ललचाना। तलब महसूस होना - इच्छा करना। सतृष्ण - इच्छा सहित। दीर्घ निश्वास - लंबी श्वास। पलकें मूँदना - आँखें बंद कर लेना.

 

पृष्ठ - 80

तसलीम - सम्मान। सिर खम करना - सिर झुकाना। तहज़ीब - शिष्टता। नफ़ासत - कोमलता। नज़ाकत - कोमलता। नफ़ीस - बढ़िया। एब्स्ट्रैक्ट - अमूर्त, सूक्ष्म, जिसका भौतिक अस्तित्व न हो। लज़ीज़ - स्वादिष्ट। सकील - आसानी से न पचने वाला। ज्ञान - चक्षु - ज्ञान की आँखें.

 

अभ्यास प्रश्नोत्तर

 

I. बहुविकल्पी प्रश्न

 

Question 1. लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट लिया। इसका उचित कारण कौन - सा नहीं है?
(a) लेखक को अधिक दूर नहीं जाना था।
(b) वह खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखना चाहता था।
(c) सेकंड क्लास का किराया कम था।
(d) वह भीड़ से बचना चाहता था।
Answer: (c) सेकंड क्लास का किराया कम था।
In simple words: लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट प्राकृतिक दृश्य देखने, एकांत में कहानी सोचने और भीड़ से बचने के लिए लिया था, न कि इसलिए कि किराया कम था।

Exam Tip: पाठ के आरंभिक पैराग्राफ को ध्यानपूर्वक पढ़ें, जहाँ लेखक द्वारा सेकंड क्लास का टिकट लेने के वास्तविक कारणों को स्पष्ट रूप से बताया गया है।

 

Question 2. लेखक को अनुमान था कि सेकंड क्लास का डिब्बा?
(a) अच्छे लोगों से भरा होगा।
(b) एकदम सुनसान होगा।
(c) उसमें केवल नवाब ही बैठे होंगे।
(d) उसमें उसी के जैसे लोग ही होंगे।
Answer: (b) एकदम सुनसान होगा।
In simple words: लेखक को विश्वास था कि सेकंड क्लास का डिब्बा पूरी तरह खाली यानी सुनसान होगा।

Exam Tip: अनुमान आधारित प्रश्नों के उत्तर के लिए पाठ के कथनों पर ध्यान केंद्रित करें, जहाँ डिब्बे के 'निर्जन' (सुनसान) होने की बात कही गई है।

 

Question 3. बर्थ पर पहले से बैठे व्यक्ति का संबंध इनमें से किससे था?
(a) नवाब के खानदान से।
(b) ज़मींदार के खानदान से।
(c) अवध के राजसी खानदान से।
(d) मुगल खानदान से।
Answer: (a) नवाब के खानदान से।
In simple words: सज्जन पुरुष का पहनावा और उनके बैठने का तरीका लखनऊ के नवाबी खानदान के प्रभाव को दर्शाता था।

Exam Tip: नवाब साहब के बाहरी पहनावे, उनके सलीके और लखनऊ के नवाबी अंदाज़ के उल्लेख से उनके पारिवारिक संबंध को स्पष्टता मिलती है।

 

Question 4. लेखक का डिब्बे में आना नवाब साहब को अच्छा नहीं लगा। इस बात को लेखक ने कैसे महसूस किया?
(a) नवाब साहब की बातों से
(b) नवाब साहब की आँखों में आए असंतोष के भाव से
(c) नवाब साहब के अशिष्ट व्यवहार से
(d) नवाब साहब के वहाँ से उठकर चले जाने से
Answer: (b) नवाब साहब की आँखों में आए असंतोष के भाव से
In simple words: डिब्बे में अचानक प्रवेश करने पर नवाब साहब के चेहरे और आँखों में छाए असंतोष को देखकर लेखक ने उनकी नाराज़गी को महसूस किया।

Exam Tip: हाव - भाव और आँखों के असंतोष को ही नवाब साहब के नाखुश होने का प्राथमिक संकेत मानें।

 

Question 5. 'प्रतिकूल' शब्द का विपरीतार्थक शब्द कौन - से विकल्प में है?
(a) उपकूल
(b) दुकूल
(c) अप्रतिकूल
(d) अनुकूल
Answer: (d) अनुकूल
In simple words: व्याकरण के नियमों के अनुसार 'प्रतिकूल' का सही विलोम शब्द 'अनुकूल' होता है।

Exam Tip: विलोम शब्द का चयन करते समय शब्दों के सही व्याकरणिक रूप का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।

 

Question 6. लखनऊ के खीरा - विक्रेता अन्य विक्रेताओं से अलग हैं। यह किस कथन से सत्य प्रतीत होता है?
(a) वे ग्राहकों से कम मूल्य लेते हैं।
(b) वे ग्राहकों को अधिक खीरा देते हैं।
(c) वे नमक - मिर्च की पुड़िया भी साथ दे देते हैं।
(d) वे ग्राहकों को अच्छा खीरे ही देते हैं।
Answer: (c) वे नमक - मिर्च की पुड़िया भी साथ दे देते हैं।
In simple words: लखनऊ में खीरा बेचने वाले लोग खीरे के साथ जीरा - नमक और पिसी लाल मिर्च की पुड़िया भी साथ देते हैं, जो उनकी विशेष सेवा को दर्शाता है।

Exam Tip: खीरा बेचने वालों की इस विशेषता को उनके द्वारा दी जाने वाली नमक - मिर्च की पुड़िया के प्रसंग से जोड़कर याद रखें।

 

Question 7. नवाब साहब की भाव भंगिमा से क्या प्रकट हो रहा था?
(a) लेखक के प्रति उत्साहीनता का भाव
(b) खीरे के स्वाद का आनंद
(c) खीरे जैसी साधारण वस्तु के प्रति अरुचि
(d) मिर्च के तीखेपन का भाव
Answer: (b) खीरे के स्वाद का आनंद
In simple words: नवाब साहब के होठों के फड़कने और पलकें मूँदने के हाव - भाव से स्पष्ट था कि वे खीरे के स्वाद का असीम आनंद ले रहे थे।

Exam Tip: भाव - भंगिमा का सीधा संबंध खीरे के रसास्वादन की कल्पना और उसके स्वाद के सुख से था।

 

Question 8. 'मियाँ रईस बनते हैं' - लेखक के कथन में कौन - सा भाव निहित है?
(a) नवाबी के प्रति सम्मान
(b) नवाब के प्रति कृतज्ञता
(c) नवाब को उनके पिछले दिनों की याद दिलाना
(d) नवाब साहब की रईसी के प्रति व्यंग्य।
Answer: (d) नवाब साहब की रईसी के प्रति व्यंग्य।
In simple words: इस कथन में लेखक ने नवाब साहब की झूठी शान - शौकत और दिखावटी रईसी पर तीखा प्रहार (व्यंग्य) किया है।

Exam Tip: जब कोई व्यक्ति अभाव में भी झूठा प्रदर्शन करता है, तो उसके प्रति बोला गया कथन व्यंग्य रूप में प्रयुक्त होता है।

 

Question 9. लेखक खीरा खाना चाहता था, फिर भी उसने मना कर दिया, ऐसा क्यों?
(a) वह मुफ्त का खीरा नहीं खाना चाहता था।
(b) उसे खीरा सुपाच्य नहीं लगता था।
(c) लेखक द्वारा पहले इनकार करने को निबाहने का आत्मसम्मान बनाए रखने के कारण।
(d) नवाब साहब द्वारा पहले लेखक के प्रति उत्साह न दिखाने के कारण।
Answer: (c) लेखक द्वारा पहले इनकार करने को निबाहने का आत्मसम्मान बनाए रखने के कारण।
In simple words: लेखक का मन तो खीरा खाने का था, परंतु पहले आदरपूर्वक मना कर देने के कारण उन्होंने अपने आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए दोबारा भी मना कर दिया।

Exam Tip: लेखक द्वारा दोबारा खीरे के प्रस्ताव को ठुकराना उनके 'आत्मसम्मान की रक्षा' की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

 

Question 10. 'रसास्वादन' का उचित संधि - विच्छेद होगा?
(a) रसा + स्वादन
(b) रस + अस्वादन
(c) रसास्व + आदन
(d) रस + आस्वादन।
Answer: (d) रस + आस्वादन।
In simple words: दीर्घ स्वर संधि के नियमानुसार 'रस + आस्वादन' के मेल से 'रसास्वादन' शब्द का निर्माण होता है।

Exam Tip: संधि - विच्छेद करते समय ध्यान रखें कि दोनों खंडों (पूर्वपद और उत्तरपद) का अपना स्वतंत्र और सार्थक अर्थ होना चाहिए।

 

Question 11. नवाब साहब ने खीरे खाने का आनंद किस तरह लिया?
(a) नमक - मिर्च के साथ खाकर
(b) बिना नमक - मिर्च के खीरे खाकर
(c) खीरे की फाँकों को सूँघकर
(d) खीरे के मुलायम भाग को खाकर
Answer: (c) खीरे की फाँकों को सूँघकर
In simple words: नवाब साहब ने खीरे की एक - एक फाँक को केवल सूँघकर और उसकी सुगंध का रसास्वादन करके ही खाने का आनंद लिया।

Exam Tip: इस व्यंग्य का मुख्य प्रहार इसी बात पर है कि नवाब साहब ने खीरे को खाया नहीं, बल्कि केवल सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक दिया।

 

Question 12. नवाब साहब खीरे की फाँकों को खिड़की से बाहर फेंककर क्या दिखाना चाहते थे?
(a) खीरा विक्षेपक साधारण खाद्य - वस्तु है
(b) खीरे की सेहत के लिए अनुपयुक्तता
(c) अपनी रईसी तथा नवाबी का प्रदर्शन
(d) खीरा खाने की परंपरागत तरीके का अपमान
Answer: (c) अपनी रईसी तथा नवाबी का प्रदर्शन
In simple words: वे लेखक के सामने यह जताना चाहते थे कि नवाब खीरे जैसी तुच्छ वस्तु को खाते नहीं, बल्कि केवल उसकी गंध लेकर फेंकने की रईसी रखते हैं।

Exam Tip: नवाबों की इसी दिखावटी रईसी और 'परजीवी संस्कृति' पर करारा कटाक्ष करने के लिए लेखक ने इस दृश्य को मुख्य स्थान दिया है।

 

Question 13. लेखक ने निम्नलिखित में से किसके समक्ष सिर झुका लिया?
(a) नवाब साहब की खानदानी संस्कृति एवं कोमलता के समक्ष
(b) नवाब साहब के ज्ञान के समक्ष
(c) नवाब साहब के खीरा - प्रेम के समक्ष
(d) नवाब साहब की ऊँची डकार सुनकर
Answer: (a) नवाब साहब की खानदानी संस्कृति एवं कोमलता के समक्ष
In simple words: नवाब साहब की नफ़ासत, नज़ाकत और उनके द्वारा प्रदर्शित खानदानी तहज़ीब के इस अनूठे प्रदर्शन को देखकर लेखक ने आदरपूर्वक अपना सिर झुका लिया।

Exam Tip: सिर झुकाने का संबंध नवाब साहब द्वारा प्रस्तुत की गई कृत्रिम 'नफ़ासत' and 'तहज़ीब' से है।

 

Question 14. लेखक के ज्ञान चक्षु कैसे खुल गए?
(a) खीरा खाने का नया तरीका देखकर
(b) नवाब साहब का शिष्टाचार देखकर
(c) नवाब साहब की नाज़ुकता देखकर
(d) बिना घटना, विचार और पात्रों के कहानी लिखने का नया आइडिया पाकर
Answer: (d) बिना घटना, विचार और पात्रों के कहानी लिखने का नया आइडिया पाकर
In simple words: नवाब साहब की बनावटी डकार सुनकर लेखक को यह प्रेरणा मिली कि बिना किसी पात्र या घटना के भी कहानी रची जा सकती है।

Exam Tip: ज्ञान - चक्षु खुलने का अर्थ बुद्धि जाग्रत होने से है, जो लेखक को बिना कथ्य के कहानी लिखने के रूप में प्राप्त हुआ।

 

Question 15. 'तहज़ीब, नफ़ासत और नज़ाकत' निम्नलिखित में से किस प्रकार के शब्द हैं?
(a) तत्सम
(b) तद्भव
(c) आगत (विदेशी)
(d) देशज
Answer: (c) आगत (विदेशी)
In simple words: ये तीनों शब्द उर्दू और फ़ारसी भाषा से हिंदी में आए हैं, इसलिए उन्हें विदेशी या आगत शब्द कहा जाता है।

Exam Tip: हिंदी भाषा में प्रयुक्त होने वाले उर्दू, फ़ारसी, अरबी और अंग्रेज़ी के शब्दों को 'आगत' श्रेणी में रखा जाता है।

 

Question 16. ट्रेन के एक डिब्बे में चढ़ने के बाद उसमें एक सफ़ेदपोश सज्जन को देखकर लेखक ने आँखें क्यों चुरा लीं?
(a) सज्जन के उनसे संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाने के कारण
(b) अपने शर्मीले स्वभाव के कारण
(c) अपने आत्म - सम्मान की रक्षा के लिए
(d) (a) तथा (c) दोनों
Answer: (d) (a) तथा (c) दोनों
In simple words: नवाब साहब द्वारा बातचीत का कोई उत्साह न दिखाने और स्वयं के स्वाभिमान को बनाए रखने के लिए लेखक ने उनसे आँखें चुरा लीं।

Exam Tip: लेखक की आँखें चुराने की क्रिया उनके स्वाभिमान and सामने वाले की उदासीनता, दोनों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम थी।

 

Question 17. नवाब साहब की आँखों में आए असंतोष के भाव का कारण लेखक ने क्या समझा?
(a) उनके एकांत चिंतन में खलल पड़ना
(b) नई कहानी के संबंध में सोचने में व्यवधान पड़ना
(c) खीरे जैसे साधारण वस्तु का शौक रखने का पता चल जाना
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: लेखक ने समझा कि उनके आने से नवाब साहब के अकेलेपन में बाधा पड़ी थी और अजनबी के सामने खीरे की पोल भी खुल गई थी।

Exam Tip: नवाब साहब की आँखों के असंतोष के पीछे एकांत भंग होना तथा खीरे जैसी साधारण वस्तु का रहस्य प्रकट होना, दोनों ही मुख्य कारण थे।

 

Question 18. लेखक के अनुसार नवाब साहब ने खीरे क्यों खरीदे होंगे?
(a) किसी सहयात्री के साथ मिलकर खाने के लिए
(b) खीरे खाकर वक्त बिताने के लिए
(c) किसी को देने के लिए
(d) खीरे वाले की आर्थिक मदद करने के लिए
Answer: (b) खीरे खाकर वक्त बिताने के लिए
In simple words: लेखक का मानना था कि नवाब साहब ने यात्रा के दौरान अकेले समय काटने के लिए ही ये साधारण खीरे खरीदे होंगे।

Exam Tip: सफर का समय काटने के लिए (वक्त बिताने के लिए) खीरे खरीदना एक सामान्य मध्यवर्गीय आदत है, जिसका लेखक ने उल्लेख किया है।

 

Question 19. नवाब साहब ने लेखक को एकाएक संबोधित करते हुए क्या दिखाना चाहा?
(a) जैसे उन्होंने लेखक को अभी - अभी देखा हो।
(b) जैसे लेखक से उनका पुराना परिचय हो।
(c) जैसे वे लेखक से काफी लंबे समय बाद मिले हों।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (a) जैसे उन्होंने लेखक को अभी - अभी देखा हो।
In simple words: अचानक लेखक से बात शुरू करके नवाब साहब यह जताना चाहते थे कि उन्होंने अभी - अभी डिब्बे में लेखक की उपस्थिति को देखा है।

Exam Tip: नवाब साहब का यह व्यवहार उनकी कृत्रिमता और दिखावे की प्रवृत्ति को ही उजागर करता है।

 

Question 20. नवाब साहब के खीरा खाने के प्रस्ताव से लेखक क्या जान गया?
(a) कि नवाब साहब अपनी शराफ़त के भ्रम को बनाए रखना चाहते हैं।
(b) कि नवाब साहब अपने फायदे के लिए मुझे आम लोगों की तरह व्यवहार करने के लिए बढ़ावा देना चाहते हैं।
(c) कि नवाब साहब मुझे छोटा दिखाना चाहते हैं।
(d) (a) तथा (b) दोनों
Answer: (d) (a) तथा (b) दोनों
In simple words: लेखक समझ गया कि नवाब साहब शिष्टाचार का नाटक करके स्वयं को श्रेष्ठ तथा लेखक को एक साधारण व्यक्ति साबित करना चाहते थे।

Exam Tip: प्रस्ताव के पीछे छिपा हुआ नवाबी ठसक और दिखावा ही लेखक के विश्लेषणात्मक विचार का कारण बना।

 

Question 21. लेखक द्वारा नवाब साहब के खीरे खाने के प्रस्ताव को ठुकराने के बाद नवाब साहब ने क्या किया?
(a) खीरे को पानी से धोकर तौलिए से पोंछा
(b) खीरे के सिर काटकर और गोदकर उससे झाग निकाला।
(c) खीरे को छीलकर उसकी फाँकों को तौलिए पर सजाया।
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: लेखक के मना करने के बाद नवाब साहब ने खीरों को पानी से धोया, छिला, कड़वाहट निकाली और उनकी फाँकों को तौलिये पर सजाकर तैयार किया।

Exam Tip: नवाब साहब द्वारा की गई यह पूरी तैयारी खीरे खाने के उनके सलीके और नफ़ासत को प्रकट करती है।

 

Question 22. लखनऊ स्टेशन के खीरा बेचने वाले खीरे के साथ जीरा मिला नमक और पिसी हुई लाल मिर्च की पुड़िया क्यों देते हैं?
(a) खीरे के इस्तेमाल का तरीका जानने के कारण
(b) खीरे का स्वाद बढ़ाने के लिए
(c) ग्राहक को अपने पास बार-बार बुलाने के लिए
(d) अपने पास उपलब्ध जीरा, नमक तथा लाल मिर्च की खपत करने के लिए
Answer: (a) खीरे के इस्तेमाल का तरीका जानने के कारण
In simple words: स्टेशन पर खीरा बेचने वाले जानते हैं कि ग्राहक को खीरे का पूरा आनंद लेने के लिए मसाले की आवश्यकता होती है, इसलिए वे पुड़िया साथ देते हैं।

Exam Tip: लखनऊ स्टेशन की इस प्रसिद्ध परंपरा को पाठ के आधार पर सटीक रूप से याद रखें।

 

Question 23. नवाब साहब द्वारा नमक - मिर्च लगी खीरे की फाँकों की ओर देखने के बाद खिड़की के बाहर देखकर दीर्घ निश्वास लेने का क्या कारण हो सकता है?
(a) खीरे की फाँकें न खा पाने की मजबूरी प्रकट करना
(b) अपनी घबराहट को नियंत्रित करने की कोशिश करना
(c) लेखक द्वारा उनके प्रस्ताव को ठुकराने के कारण उत्पन्न क्रोध का शमन करना।
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) [khjs dh iQk¡osaQ u [kk ikus dh e”kcwjh izdV djuk
In simple words: नवाब साहब का वह लंबी सांस लेना असल में स्वादिष्ट खीरे को न खा पाने के उनके आंतरिक संकोच और मजबूरी को दर्शाता था।

Exam Tip: दीर्घ निश्वास (लंबी सांस) उनके झूठे अहंकार और खीरे के प्रति अत्यधिक आकर्षण के बीच की आंतरिक जंग का प्रतीक है।

 

Question 24. नवाब साहब द्वारा खीरे की फाँकों को सूँघकर एक - एक करके ट्रेन की खिड़की के बाहर फेंक देना उनकी किस भावना को दर्शाता है?
(a) कि वे खीरे जैसी तुच्छ चीजों का रसास्वादन खाकर नहीं सूँघकर करते हैं।
(b) कि वे खीरे जैसी चीजों को सूँघने लायक ही मानते हैं।
(c) कि वे लेखक के सामने अपनी रईसी का प्रदर्शन करना चाहते थे।
(d) (a) तथा (c) दोनों
Answer: (d) (a) तथा (c) दोनों
In simple words: यह अजीब व्यवहार नवाब साहब की झूठी रईसी के खोखले प्रदर्शन और स्वयं को श्रेष्ठ दिखाने की सामंती मानसिकता को उजागर करता है।

Exam Tip: फाँकों को बाहर फेंकने की यह पूरी प्रक्रिया उनकी अत्यधिक प्रदर्शनकारी (दिखावटी) प्रवृत्ति की सूचक है।

 

Question 25. नवाब साहब को थकान क्यों हो गई जिसकी वजह से उन्हें लेटना पड़ा?
(a) लेखक से बात करने के कारण
(b) लगातार बैठे रहने के कारण
(c) खीरे की तैयारी एवं इस्तेमाल के कारण
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (c) [khjs dh rS;kjh ,oa bLrseky osQ dkj.k
In simple words: खीरे को धोने, छीलने, काटने, सजाने और फिर उन्हें सूँघ - सूँघकर खिड़की के बाहर फेंकने की इस 'कठिन' नवाबी प्रक्रिया ने उन्हें थका दिया था।

Exam Tip: लेखक का यह कथन कि नवाब साहब खीरे की तैयारी से थक गए, एक अत्यंत तीखा और मनोरंजक व्यंग्य है।

 

II. विषय - वस्तु का ज्ञान बोध एवं अभिव्यक्ति आधारित प्रश्न (2 अंक)

 

प्रश्न 1. बिना कथ्य के कहानी लिखना संभव नहीं है 'लखनवी अंदाज़' पाठ के आधार पर व्यंग्य स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'लखनवी अंदाज़' पाठ में लेखक यशपाल ने उस सामंती वर्ग पर करारा प्रहार किया है जो यथार्थ से दूर केवल आडंबरपूर्ण जीवन जीता है। नवाब साहब द्वारा खीरे को बिना खाए, केवल सूँघकर ही पेट भर जाने की झूठी डकार लेना एक हास्यास्पद और अस्वाभाविक स्वाँग है। लेखक ने इसी घटना के माध्यम से यह संदेश दिया है कि जिस प्रकार केवल गंध से भूख शांत होना असंभव है, उसी प्रकार बिना किसी कथ्य, ठोस घटना, विचार या जीवंत पात्रों के एक सार्थक कहानी की रचना करना भी सर्वथा असंभव है। यह नवाबी दिखावा नई कहानी के इस अधूरेपन पर एक गहरा कटाक्ष है।
In simple words: जैसे केवल खीरे को सूँघकर पेट नहीं भरा जा सकता, वैसे ही बिना किसी विषय या पात्रों के कहानी लिखना भी मुमकिन नहीं है।

Exam Tip: इस उत्तर में नवाब साहब के खीरा सूँघने और लेखक की नई कहानी के वैचारिक संबंध को स्पष्ट रूप से जोड़कर लिखें।

 

प्रश्न 2. लोग यथार्थ को स्वीकार करने से क्यों डरते हैं?
Answer: अक्सर देखा जाता है कि सुख - सुविधाओं और ऊँचे पदों पर रहे लोग समय बदलने के साथ अपनी ढलती हुई सामाजिक स्थिति या वर्तमान के अभावों को स्वीकार करने से घबराते हैं। उन्हें यह भय सताता है कि यथार्थ को अपनाने से समाज में उनका मान - सम्मान कम हो जाएगा और लोग उनकी उपेक्षा करेंगे। इसी सामाजिक प्रतिष्ठा को खोने के डर से वे यथार्थ से मुँह मोड़ लेते हैं और अभावग्रस्त जीवन में भी झूठी शान, तड़क - भड़क और दिखावे का सहारा लेते हैं।
In simple words: लोग अपनी ढलती हुई सामाजिक साख और मान - सम्मान खोने के डर से वर्तमान की सच्चाइयों को अपनाने से कतराते हैं।

Exam Tip: यथार्थ (सच्चाई) को न स्वीकारने के पीछे छिपे हुए सामाजिक भय और सम्मान खोने की आशंका को उत्तर का मुख्य बिंदु बनाएँ।

 

प्रश्न 3. 'लखनवी अंदाज़' पाठ में नवाब साहब के बहाने नवाबी परंपरा पर व्यंग्य है। स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह सर्वविदित तथ्य है कि केवल भोजन की कल्पना करने या उसकी प्रशंसा करने से किसी भी भूखे व्यक्ति की तृप्ति संभव नहीं है। नवाब साहब का पेट सूँघने मात्र से भर जाता होगा - यह तथ्य लेखक की समझ से परे एक हास्यास्पद कल्पना है। सेकंड क्लास में किफायत से यात्रा करने के बावजूद, नवाब साहब का अपनी नवाबी ठसक को बनाए रखने के लिए झूठा प्रदर्शन करना यह सिद्ध करता है कि सत्ता जाने के बाद भी वे अपनी खोखली मर्यादा और अनुपयोगी आडंबरों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
In simple words: यह पाठ दर्शाता है कि आज नवाबों की सत्ता तो समाप्त हो चुकी है, परंतु वे अब भी अपने खोखले आडंबरों और झूठी शान को छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

Exam Tip: नवाबों की मितव्ययी यात्रा (सेकंड क्लास) और उनकी झूठी प्रदर्शनकारी रईसी के विरोधाभास को उत्तर में रेखांकित करें।

 

प्रश्न 4. नवाब साहब का खीरे खाने का आग्रह अस्वीकार करना लेखक को अनुचित लगा। क्यों?
Answer: नवाब साहब ने खीरों को बहुत ही करीने से काटकर, उन पर जीरा - नमक और लाल मिर्च बुरक कर तौलिये पर सजा रखा था। मसालों के प्रभाव से पनियाती हुई फाँकों को देखकर लेखक के मुँह में भी पानी आ रहा था और उनका मन भी खीरा खाने के लिए मचल उठा था। इसके ऊपर से जब नवाब साहब ने स्वयं बड़े आदरपूर्वक उनसे दोबारा आग्रह किया, तो लेखक को लगा कि इस अनुकूल परिस्थिति में उनका मना करना शिष्टाचार के विरुद्ध था, परंतु वे अपने पहले के इनकार पर अड़े रहने के कारण विवश थे।
In simple words: मसालेदार रसीले खीरों को देखकर लेखक का जी ललचा रहा था, इसलिए नवाब साहब के बार - बार आग्रह करने पर भी मना करना उन्हें अनुचित लग रहा था।

Exam Tip: खीरे की पनियारी फाँकों और लेखक की पूर्व की अस्वीकृति के मानसिक संघर्ष को इस उत्तर में दर्शाएँ।

 

प्रश्न 5. लेखक ने नवाब साहब के खीरे खाने के आग्रह को क्यों नकार दिया था? जबकि लेखक के मुँह में पानी भर आया था।
Answer: लेखक के मुँह में पानी आने के बावजूद उनके मना करने के तीन मुख्य कारण थे:
(i) लेखक के भीतर अपने स्वाभिमान की रक्षा करने की तीव्र इच्छा थी।
(ii) नवाब साहब के अचानक बदले हुए व्यवहार से लेखक सतर्क हो गए थे। उन्हें लगा कि नवाब साहब स्वयं को श्रेष्ठ दिखाने के लिए लेखक को एक मामूली यात्री समझकर अपने नाटक में शामिल करना चाहते हैं।
(iii) लेखक शिष्टाचारवश पहली बार ही खीरे के प्रस्ताव को ठुकरा चुके थे, अतः अपने आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए उन्होंने दोबारा भी पेट की कमज़ोरी का बहाना बनाकर मना कर दिया।
In simple words: अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने और पहली बार मना कर चुके होने की मजबूरी के कारण लेखक ने अपनी इच्छा को दबाकर मना कर दिया।

Exam Tip: लेखक के आत्मसम्मान और नवाब साहब के अचानक बदले व्यवहार के प्रति उनकी शंका को उत्तर में स्पष्ट रूप से लिखें।

 

प्रश्न 6. नवाब साहब के खीरे खाने के आग्रह में उनकी शराफ़त झलकती है। कैसे?
Answer: नवाब साहब के आचरण में यद्यपि नवाबी अहंकार था, परंतु उनमें किसी भी प्रकार की अशिष्टता या उदंडता नहीं थी। जब लेखक डिब्बे में आए, तो नवाब साहब ने अपनी ओर से पहल नहीं की, परंतु लेखक की बेरुखी को देखकर उन्होंने स्वयं ही शिष्टतापूर्वक बात की शुरुआत की। लेखक के एक बार मना करने के बावजूद, उन्होंने खीरे के स्वाद की प्रशंसा करते हुए बहुत ही गंभीर और आदरपूर्ण ढंग से दोबारा आग्रह किया, जो उनकी शालीनता और सहज विनीत स्वभाव को प्रकट करता है।
In simple words: नवाब साहब ने लेखक की बेरुखी के बावजूद स्वयं पहल की और दोबारा बड़े आदर के साथ खीरा खाने का न्योता दिया, जो उनकी शालीनता को दर्शाता है।

Exam Tip: नवाब साहब के शिष्ट अभिवादन और दोबारा किए गए गंभीर आग्रह को उनकी शराफ़त के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करें।

 

प्रश्न 7. नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया। हमने भी उनके सामने की बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं। यहाँ नवाब साहब व लेखक की जो समानता दिखाई देती है, उसे चित्रित कीजिए।
Answer: इस प्रसंग में नवाब साहब और लेखक दोनों में ही एक समान स्वाभिमान और अकड़ दिखाई देती है:
- नवाब साहब लेखक के अचानक आने से अपने एकांत चिंतन में बाधा महसूस करते हैं। वे सेकंड क्लास में सफर करते हुए किसी सहयात्री के सामने अपनी नवाबी शान को कम होते नहीं देखना चाहते, इसलिए वे बातचीत का उत्साह नहीं दिखाते।
- दूसरी ओर, लेखक भी एकांत में नई कहानी के बारे में सोचने के उद्देश्य से आए थे और वे नवाब साहब की इस बेरुखी को अपना अपमान समझते हैं। वे स्वयं को साधारण समझकर दूरी बनाने वाले नवाब के सामने झुकना नहीं चाहते, अतः अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए वे भी अपनी आँखें चुरा लेते हैं। दोनों ही अपनी - अपनी अकड़ में अस्वाभाविक व्यवहार करते हैं।
In simple words: दोनों ही अपने एकांत में बाधा नहीं चाहते थे और अपनी - अपनी अकड़ व स्वाभिमान के कारण एक - दूसरे से दूरी बनाए रहे।

Exam Tip: दोनों पात्रों के एकांत चिंतन की चाहत और उनके आपसी स्वाभिमान (अकड़) की समानता को अपने उत्तर में रेखांकित करें।

 

प्रश्न 8. नवाब साहब और लेखक के व्यवहार के आधार पर किसे अच्छा ठहरा सकते हैं?
Answer: यदि व्यवहार और आचरण की दृष्टि से देखा जाए, तो नवाब साहब का चरित्र लेखक की तुलना में अधिक व्यावहारिक और सहज प्रतीत होता है। नवाब साहब शुरुआत में उदासीन रहने के बाद अपनी नवाबी अकड़ को पीछे छोड़ देते हैं और आदरपूर्वक लेखक से खीरे का लुत्फ़ उठाने का आग्रह करते हैं। इसके विपरीत, लेखक अपनी अशिष्ट अकड़ और शंकालु स्वभाव के कारण नवाब साहब के इस विनम्र प्रयास को भी दिखावा मान बैठते हैं और अपनी इच्छा होने पर भी केवल झूठे अहंकार की संतुष्टि के लिए उनके आग्रह को बार - बार ठुकरा देते हैं। अतः नवाब साहब अधिक व्यवहार कुशल हैं।
In simple words: नवाब साहब समय के साथ अपनी अकड़ भूलकर शिष्टता से बात करते हैं, जबकि लेखक अपने झूठे स्वाभिमान के कारण उनके अच्छे प्रयास को भी ठुकरा देते हैं।

Exam Tip: नवाब साहब के व्यवहार में आए लचीलेपन और लेखक की निरंतर बनी रहने वाली अकड़ की तुलना करके अपना निर्णय स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 9. लेखक को नवाब साहब का मौन रहना भी अखर रहा था और बातें करना भी कचोटने लगा। क्यों?
Answer: लेखक के मन में नवाब साहब के प्रति एक अजीब सा अहंकार और अंतर्द्वंद्व चल रहा था। वे स्वयं को श्रेष्ठ साबित करना चाहते थे, इसलिए वे चाहते थे कि नवाब साहब ही पहले उनसे बात करें। जब नवाब साहब चुप रहे, तो लेखक को लगा कि वे उनकी उपेक्षा कर रहे हैं, जो उनके स्वाभिमान को ठेस पहुँचा रहा था। परंतु, जब नवाब साहब ने अचानक अपनी चुप्पी तोड़कर खीरे का आग्रह किया, तो लेखक को लगा कि वे उन्हें एक मामूली साधारण यात्री समझकर अपनी नवाबी शान का रोब झाड़ रहे हैं। इसी मानसिक उधेड़बुन के कारण लेखक को नवाब साहब की चुप्पी और बातचीत, दोनों ही असहज कर रहे थे।
In simple words: लेखक का अपना स्वाभिमान उन्हें परेशान कर रहा था; नवाब की चुप्पी उन्हें उपेक्षा लगी और उनकी बातचीत उन्हें नवाबी दिखावा महसूस हुई।

Exam Tip: लेखक के आंतरिक द्वंद्व और उनके अहंकार की दोहरी स्थिति को उत्तर का आधार बनाएँ।

 

प्रश्न 10. ‘लखनवी अंदाज़’ कहानी का उद्देश्य क्या है?
Answer: 'लखनवी अंदाज़' कहानी का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त दिखावे की संस्कृति और कृत्रिम जीवन शैली पर तीखा प्रहार करना है। लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि भले ही नवाबों का पुराना राजसी ठाट-बाट समाप्त हो चुका हो, परंतु आज भी वे अपनी झूठी मर्यादा और खोखले आडंबरों से मुक्त नहीं हो पाए हैं। वे आज भी आम जनता से स्वयं को श्रेष्ठ दिखाने के लिए अस्वाभाविक और हास्यास्पद हरकतें करते हैं। लेखक हमें इस बनावटीपन को छोड़कर वास्तविक और यथार्थवादी जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।
In simple words: इस कहानी का मुख्य उद्देश्य समाज के बनावटीपन और दिखावे की सामंती मानसिकता पर चोट करना तथा हमें यथार्थ में जीने की सीख देना है।

Exam Tip: दिखावे की संस्कृति (आडंबरपूर्ण शैली) का त्याग और यथार्थवादी जीवन की आवश्यकता को कहानी का मूल उद्देश्य बताएं।

 

प्रश्न 11. लेखक ने नवाब साहब के उपेक्षापूर्ण व्यवहार का जवाब कैसे दिया?
Answer: जब लेखक सेकंड क्लास के डिब्बे में प्रवेश करते हैं, तो वे देखते हैं कि सामने बैठे नवाब साहब की आँखों में उनके आने से असंतोष छा जाता है और वे उनसे बात करने का कोई उत्साह नहीं दिखाते। नवाब साहब के इस ठंडे और उपेक्षापूर्ण व्यवहार को भांपते हुए लेखक ने भी अपने स्वाभिमान की रक्षा की। उन्होंने नवाब साहब से परिचय बढ़ाने की कोई चेष्टा नहीं की और चुपचाप खिड़की से बाहर के दृश्यों को देखने का अभिनय करने लगे, जिससे स्पष्ट था कि वे भी नवाब की उपेक्षा का उत्तर उपेक्षा से ही दे रहे हैं।
In simple words: नवाब साहब की बेरुखी को देखकर लेखक ने भी उनसे कोई बात नहीं की और खिड़की से बाहर देखकर उनके उपेक्षापूर्ण व्यवहार का करारा जवाब दिया।

Exam Tip: लेखक द्वारा नवाब साहब से आँखें चुराने और खिड़की से बाहर देखने की क्रिया को उपेक्षापूर्ण जवाब के रूप में लिखें।

 

प्रश्न 12. ‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के आधार पर नवाब साहब के स्वभाव के विषय में अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: पाठ के आधार पर नवाब साहब के स्वभाव में निम्नलिखित मुख्य विशेषताएं दिखाई देती हैं:
- वे अपनी ढलती हुई नवाबी के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाए हैं और आज भी झूठी मर्यादाओं में जीते हैं।
- उनके व्यवहार में अत्यधिक कृत्रिमता और दिखावा है, जिसके कारण वे केवल खीरे को सूँघकर ही पेट भरने का हास्यास्पद स्वाँग रचते हैं।
- परंतु, इन सबके बावजूद उनके स्वभाव में एक बुनियादी शालीनता और शिष्टता है। वे अजनबी सहयात्री से स्वयं बातचीत की पहल करते हैं और आदरपूर्वक उन्हें खीरा खाने का निमंत्रण देते हैं, जो उनकी व्यवहार कुशलता को दर्शाता है।
In simple words: नवाब साहब दिखावा पसंद और झूठी नवाबी शान में जीने वाले व्यक्ति हैं, परंतु उनके व्यवहार में एक बुनियादी शालीनता और विनम्रता भी दिखाई देती है।

Exam Tip: उनके चरित्र के दोनों पहलुओं - दिखावटी नवाबी ठसक और शिष्ट व्यावहारिक शालीनता - का संतुलित वर्णन करें।

 

प्रश्न 13. ‘लखनवी अंदाज़’ कहानी में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'लखनवी अंदाज़' कहानी में निहित संदेश यह है कि हमें यथार्थ और वास्तविकता के धरातल पर जीना चाहिए। हमें अपनी कमज़ोरियों या ढलते हुए समय को छिपाने के लिए कभी भी झूठी शान, कृत्रिमता या आडंबरों का सहारा नहीं लेना चाहिए। दिखावे की यह प्रवृत्ति हमें समाज में केवल उपहास और मज़ाक का पात्र बनाती है। हमें समाज के हर वर्ग के व्यक्ति को समान समझना चाहिए और बिना किसी हीनता या श्रेष्ठता की भावना के, सहजता से मित्रता का हाथ बढ़ाना चाहिए।
In simple words: कहानी हमें संदेश देती है कि हमें बनावटी जीवन शैली का त्याग करके हर मनुष्य को समान समझना चाहिए और सच्चाई के साथ जीना चाहिए।

Exam Tip: यथार्थवादी जीवन, समानता का व्यवहार और परजीवी दिखावटी संस्कृति के त्याग जैसे मुख्य संदेशों को स्पष्ट शब्दों में लिखें।

 

प्रश्न 14. ‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के आधार पर बताइए कि लेखक ने यात्रा करने के लिए सेकंड क्लास का टिकट क्यों खरीदा?
Answer: लेखक यशपाल ने सेकंड क्लास का टिकट खरीदने के लिए निम्नलिखित चार प्रमुख कारण बताए हैं:
- उन्हें बहुत अधिक लंबी दूरी की यात्रा नहीं करनी थी।
- वे स्टेशन की भीड़भाड़ और कोलाहल से दूर रहकर शांति से यात्रा करना चाहते थे।
- वे एकांत वातावरण में अपनी नई कहानी के कथ्य और पात्रों के बारे में गंभीरता से सोचना चाहते थे।
- वे खिड़की के पास बैठकर बाहर के सुंदर प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेना चाहते थे।
In simple words: लेखक ने भीड़ से बचने, खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने और एकांत में नई कहानी के बारे में सोचने के लिए सेकंड क्लास का टिकट लिया था।

Exam Tip: इन चारों कारणों (दूरी, भीड़, कहानी चिंतन, और प्राकृतिक दृश्य) को बुलेट पॉइंट्स में साफ़ - साफ़ लिखें।

 

प्रश्न 15. खीरा काटने में नवाब साहब की विशेषता का चित्रण अपने शब्दों में कीजिए।
Answer: नवाब साहब ने खीरा काटने की प्रक्रिया को एक अत्यंत कलात्मक और नफ़ीस अनुष्ठान बना दिया था। उन्होंने सर्वप्रथम खीरे को पानी से धोकर तौलिये से सुखाया। फिर चाकू से उसके ऊपरी सिरों को काटा और उन्हें आपस में रगड़कर उसका कड़वा झाग बाहर निकाला। इसके उपरांत, उन्होंने खीरों को बहुत ही सावधानी से छीलकर उनकी सुंदर, एक समान फाँकें बनाईं और उन्हें तौलिये पर करीने से सजा दिया। अंत में, उन्होंने उन पर जीरा - नमक और पिसी लाल मिर्च का मसाला इस तरह छिड़का कि वे अत्यंत रसीली दिखने लगीं। उनका यह सलीका उनकी इस विधा में विशेषता को दर्शाता है।
In simple words: नवाब साहब ने खीरे को धोने, छीलने, कड़वाहट निकालने और मसाले छिड़क कर तौलिये पर सजाने की प्रक्रिया को बहुत ही सलीके और कलात्मक ढंग से पूरा किया।

Exam Tip: खीरा काटने के चरणों (धोना, झाग निकालना, छीलना, फाँकें सजाना, और मसाला छिड़कना) को क्रमानुसार अपने शब्दों में सुंदर ढंग से प्रस्तुत करें।

 

अभ्यास प्रश्न पत्र

 

1. निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

 

Question 1(क). ‘लखनवी अंदाज़’ रचना के नवाब साहब की सनक को आप कहाँ तक उचित ठहराते हैं? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer: नवाब साहब द्वारा खीरे को बिना खाए, केवल सूँघकर और उसकी गंध का आनंद लेकर खिड़की से बाहर फेंक देने की इस सनक को किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता। यह व्यवहार पूरी तरह से अस्वाभाविक, दिखावटी और अव्यावहारिक है। यह उनके भीतर छिपे हुए अवास्तविक अहंकार और खोखली नवाबी गरिमा को जतन से बचाए रखने के अवांछित प्रयास को दर्शाता है। वास्तविक जीवन में ऐसे दिखावे का कोई मूल्य नहीं होता और यह व्यक्ति को केवल उपहास का पात्र बनाता है।
In simple words: नवाब साहब की खीरे को बिना खाए फेंक देने की सनक पूरी तरह से गलत और हास्यास्पद थी, क्योंकि यह केवल उनके झूठे दिखावे को दर्शाती है।

Exam Tip: सनक को अनुचित बताते हुए उसके पीछे छिपे अवास्तविक नवाबी अहंकार और दिखावे का तर्क प्रस्तुत करें।

 

Question 1(ख). नवाब साहब खीरा खाने के ढंग से क्या दर्शाना चाह रहे हैं?
Answer: नवाब साहब खीरे को काटने, छीलने, सजाने और फिर उन्हें बिना खाए केवल सूँघकर खिड़की से बाहर फेंकने के इस अनूठे ढंग से लेखक के सामने अपनी तथाकथित उच्च कुलीनता, रईसी और नवाबी तहज़ीब का प्रदर्शन करना चाहते हैं। वे यह जताना चाहते हैं कि नवाबों का खानदान खीरे जैसी साधारण वस्तु का रसास्वादन करने के लिए उसे खाता नहीं है, बल्कि केवल उसकी गंध लेकर ही तृप्त हो जाने की नफ़ासत और विशिष्टता रखता है।
In simple words: नवाब साहब इस अजीब ढंग से लेखक के सामने अपनी खोखली रईसी, नफ़ासत और खानदानी नवाबी तहज़ीब का प्रदर्शन करना चाहते हैं।

Exam Tip: उनके इस ढंग के पीछे छिपे हुए 'नवाबी नफ़ासत' और 'झूठी रईसी के प्रदर्शन' के इरादे को उत्तर में स्पष्ट करें।

 

Question 1(ग). ‘बिना विचार, घटना एवं पात्रों के द्वारा भी संदेशपूर्ण कहानी लिखी जा सकती है।’ यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?
Answer: हम लेखक यशपाल के इस विचार से पूरी तरह से असहमत हैं। वास्तव में, लेखक ने यह बात स्वयं एक गहरे व्यंग्य के रूप में कही है। किसी भी कहानी की रचना के लिए एक निश्चित कथ्य, आधारभूत घटना, वैचारिक पृष्ठभूमि और जीवंत पात्रों का होना अनिवार्य है। इनके बिना लिखी गई कोई भी रचना केवल शब्दों का समूह बनकर रह जाएगी और वह पाठकों को कोई स्पष्ट संदेश या प्रभाव देने में पूरी तरह असमर्थ होगी। जैसे बिना खाए तृप्ति असंभव है, वैसे ही इनके बिना कहानी भी असंभव है।
In simple words: हम इस विचार से असहमत हैं क्योंकि बिना किसी ठोस विषय, घटना या पात्रों के कोई भी कहानी नहीं लिखी जा सकती; लेखक ने यह केवल व्यंग्य में कहा था।

Exam Tip: लेखक के इस विचार को उनका वास्तविक मत न मानकर एक 'तीखा व्यंग्य' बताएं और कहानी के लिए कथ्य की अनिवार्यता को स्पष्ट करें।

 

Question 1(घ). नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Answer: नवाब साहब ने खीरा खाने की तैयारी बहुत ही सलीके और नफ़ासत से की थी। उन्होंने सबसे पहले बर्थ के नीचे रखे लोटे के पानी से खीरों को खिड़की से बाहर करके धोया, फिर तौलिये से अच्छी तरह पोंछा। जेब से चाकू निकालकर उन्होंने खीरों के ऊपरी सिरों को काटा और उन्हें आपस में रगड़कर उनका कड़वा झाग बाहर निकाला। इसके बाद उन्होंने खीरों को बहुत ही सावधानी से छीलकर उनकी सुंदर फाँकें बनाईं और तौलिये पर सजा दिया। अंत में, उन्होंने उन पर जीरा - नमक और पिसी लाल मिर्च का पिसा मसाला छिड़क दिया।
In simple words: नवाब साहब ने खीरे को धोकर, छीलकर, कड़वाहट निकालकर और उनकी फाँकों पर सुंदर ढंग से नमक - मिर्च का मसाला बुरक कर खाने की तैयारी की।

Exam Tip: इस उत्तर में खीरे की कड़वाहट निकालने (गोदने) और तौलिये पर फाँकें सजाने के नवाबी सलीके का सुंदर वर्णन करें।

 

Question 1(ङ). ‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाह रहा है?
Answer: 'लखनवी अंदाज़' पाठ के माध्यम से लेखक यशपाल हमें यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें अपने जीवन में कृत्रिमता, आडंबरों और झूठी शान - शौकत का त्याग करके सदैव यथार्थ और वास्तविकता को अपनाना चाहिए। किसी भी अभाव या ढलती हुई सामाजिक स्थिति को छिपाने के लिए किया गया प्रदर्शन हमें समाज में केवल उपहास और मज़ाक का पात्र बनाता है। लेखक हमें हर वर्ग के व्यक्ति को समान समझने, सहजता से मित्रता करने और दिखावे की इस परजीवी संस्कृति से दूर रहने का आह्वान करते हैं।
In simple words: लेखक हमें संदेश देते हैं कि हमें झूठे दिखावे और बनावटी जीवन शैली को छोड़कर सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए और सभी से समान व्यवहार करना चाहिए।

Exam Tip: यथार्थवादी जीवन, आडंबरों का विरोध और परजीवी दिखावटी संस्कृति के त्याग जैसे मुख्य संदेशों को स्पष्ट शब्दों में लिखें।

 

प्रश्न अभ्यास 
 

1. लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं ?

 
उत्तर 
 

लेखक के अचानक डिब्बे में कूद पड़ने से नवाब-साहब की आँखों में एकांत चिंतन में खलल पड़ जाने का असंतोष दिखाई दिया। ट्रेन में लेखक के साथ बात-चीत करने के लिए नवाब साहब ने कोई उत्साह नहीं प्रकट किया। इससे लेखक को स्वयं के प्रति नवाब साहब की उदासीनता का आभास हुआ।

2. नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका, अंतत: सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा ? उनका ऐसा करना उनके कैसे स्वभाव को इंगित करता है ?

उत्तर

नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा,नमक-मिर्च बुरका,अंततः सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक दिया।उनका यह बर्ताव स्वयं को खास दिखाने और लेखक पर अपनी अमीरी का रौब झाड़ने के लिए था।उनका ऐसा करना दंभ,मिथ्या-आडंबर,प्रदर्शन-प्रियता एवं उनके व्यवहारिक खोखलेपन की ओर संकेत करता है।

3. बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है। यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर

अपने इस कथन के द्वारा लेखक ने नई कहानी के दौर के लेखकों पर व्यंग किया है। किसी भी कहानी की रचना उसके आवश्यक तत्वों - कथावस्तु, घटना, पात्र आदि के बिना संभव नहीं होती। घटना तथा कथावस्तु कहानी को आगे बढ़ाते हैं, पात्रों द्वारा संवाद कहे जाते हैं। ये कहानी के लिए आवश्यक तत्व हैं।

4. आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?

उत्तर

इस कहानी का नाम 'झूठी शान' भी रखा जा सकता है क्योंकि नवाब ने अपनी झूठी शान-शौकत को बरकरार रखने के उद्देश्य से अपनी इच्छा को नष्ट कर दिया।

रचना और अभिव्यक्ति

5. नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।

उत्तर

सेकंड क्लास के एकांत डिब्बे में बैठे नवाब साहब खीरा खाने की इच्छा से दो ताज़े खीरे एक तौलिए पर रखे हुए थे। पहले तो उन्होंने खीरे को खिड़की से बाहर निकालकर लोटे के पानी से धोया और तौलिए से साफ़ कर पानी सुखा लिया जेब से चाकू निकाला। फिर बड़े सलीके से छिलकर उसकी फाँकें बनाने लगे।खीरे की पतली फाँकों को करीने से तौलिए पर सजाया। उसके बाद जीरा मिला नमक और मिर्च छिड़का।इसके बाद एक-एक करके उन फाँको को उठाते गए और उन्हें सूँघकर खिड़की से बाहर फेंकते गए।

 
भाषा अध्यन 
 
8. निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए -
(क) एक सफ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे।
(ख) नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया।
(ग) ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।
(घ) अकेले सफ़र का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे।
(ङ) दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला।
(च) नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की फाँकों की ओर देखा।
(छ) नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए।
(ज) जेब से चाकू निकाला।

उत्तर
 
(क) बैठे थे − अकर्मक क्रिया

(ख) दिखाया − सकर्मक क्रिया
(ग) आदत है − सकर्मक क्रिया
(घ) खरीदे होंगे − सकर्मक क्रिया
(ङ) निकाला − सकर्मक क्रिया
(च) देखा − सकर्मक क्रिया
(छ) लेट गए − अकर्मक क्रिया
(ज) निकाला − सकर्मक क्रिया

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FAQs

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