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पाठ 12: शतरंज़ में मात
तेनालीरामकृष्ण (तेनालीरामन) विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में विद्वषक एवं राज परामर्शदाता के रूप में जाने जाते थे। वे अपनी कुशाग्र बुद्धि और हास्य भरे वर्ताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
पहला दृश्य
(राजा का दरबार। दरबारी अपने-अपने आसन पर बैठे हैं। राजा और तेनालीरामन के आसन अभी खाली हैं।)
पहला दरबारी - देखा! अब तक नहीं आए तेनालीरामन।
दूसरा दरबारी - भला क्यों आएँगे? जब स्वयं महाराज अनकी मुटकी में हैं तो वे हमें जेमों को क्यों पूछें?
तीसरा दरबारी - महाराज ने भी बहुत सिर चढ़ाया है तेनालीरामन को!
चौथा दरबारी - (राजा की नकल करता है) हाँ तेनालीरामन! वाह तेनालीरामन! क्या पते की बात कहो तेनालीरामन के... तेनालीरामन, तेनालीरामन! कान पक गए हैं प्रशंसा सुनते-सुनते।
पहला दरबारी - महाराज के सिर से तेनालीरामन का भूत उतारना होगा।
दूसरा दरबारी - कितनी बार प्रयत्न किया तेनालीरामन की चतुराई के आगे एक नहीं चली।
तीसरा दरबारी - पर महाराज की बराबरी नहीं कर सकता। महाराज को अनाड़ी नहीं, ब्रह्मवादी का खिलाड़ी चाहिए!
चौथा दरबारी - आप कुशल खिलाड़ी हैं, जानकर मत हारिए।
पहला दरबारी - (दृश्यों को देखते हुए) लो, आते ही आ गई याद! (राजा से)
दूसरा दरबारी - भला क्यों आएँगे? जब स्वयं महाराज अनकी मुटकी में हैं तो वे हमें जेमों को क्यों पूछें?
राजा - (बैठते हुए) शतरंज़? तेनालीरामन क्या शतरंज़ के शौकीन हैं?
चीथा दरबारी - कुछ युक्ति निकाली जाए!
(सब सोचते हैं।)
पहला दरबारी - (चुटकी बजाते हुए) निकाल लिया मैंने उपाय! सुनो! (सब उसे ओर लेते हैं। आपास में खुसुर-फुसर होती है। सब प्रसन्न दिखते हैं।)
राजा - अरे, यह तो सरासर मूर्खता है। अवश्य जान-बुझकर हार रहा है। (गरजकर) तेनालीरामन मन से खेलो!
पहला दरबारी - ठीक से खेल जमाओ, तभी महाराज को आनंद आएगा।
दूसरा दरबारी - महाराज को अनाड़ी नहीं, ब्रह्मवादी का खिलाड़ी चाहिए!
चीथा दरबारी - आप कुशल खिलाड़ी हैं, जानकर मत हारिए।
तेनालीरामन - अच्छा तमाशा बन रहा है मेरा।
राजा - (समझाते हुए) ठीक से खेलो! यह मत समझो कि मैं आसानी से हार जाऊँगा।
चीथा दरबारी - महाराज, आज़ा हो तो मुकाबला आयोजित किया जाए। एक ओर आप, दूसरी ओर तेनालीरामन। तेनालीरामन वही जीतेगा।
राजा - घबराकर) पर... पर... मुझे वास्तव में बड़ा घाव है तेनालीरामन। एक से एक खिलाड़ी को मात दे चुका है।
दूसरा दरबारी - हाँ भई तेनालीरामन, खेल आरंभ हो?
तेनालीरामन - (मुँह लटकाए, धीरे से) महाराज, आरंभ करो।
राजा - यह चला में पहली चाल। (मोहरा उठाकर रखते हैं।)
चीथा दरबारी - क्या चाल चली महाराज ने! (ताली बजाता है।)
तेनालीरामन - (सोच में) अँड्स क्या चलूँ?
दूसरा दरबारी - पर हमारे तेनालीरामन भी कुछ कम नहीं।
तेनालीरामन - (अपने आप से, एक मोहरा उठाते हुए) चलो, इसको बढ़ता हूँ।
शिक्षक की टिप्पणी
इस दृश्य में आप देख रहे हैं कि दरबारी तेनालीरामन को नीचा दिखाने के लिए षड्यंत्र कर रहे हैं। राजा को भी वे झूठी बातें बता रहे हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि ईष्या और षड्यंत्र से कभी अच्छा नतीजा नहीं निकलता। साथ ही, सच्ची प्रतिभा और बुद्धिमानी सदा जीत जाती है।
दूसरा दृश्य
(दरबार भवन। बीच में चौकी। उस पर गद्दी। एक ओर तकए से टिके राजा कृष्णदेव राय के दरबार में विद्वषक एवं राज परामर्शदाता के रूप में जाने जाते थे वे अपनी कुशाग्र बुद्धि और हास्य भरे वर्ताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।)
राजा - (दर्शकों से) ऐड्स? सबसे पहले मंत्री? अवश्य कोई गुढ़ चाल है। सोच-समझकर चलूँ!
तेनालीरामन - (दर्शकों से) कुछ भी चलूँ, मुझे क्या? (राजा से) लीजिए, यह चला।
राजा - (धीरे से) यह क्या? चतुराई है या मूर्खता?
तेनालीरामन - अब चला यह घोड़ा।
राजा - अरे, यह तो सरासर मूर्खता है। अवश्य जान-बुझकर हार रहा है। (गरजकर) तेनालीरामन मन से खेलो!
पहला दरबारी - ठीक से खेल जमाओ, तभी महाराज को आनंद आएगा।
दूसरा दरबारी - महाराज को अनाड़ी नहीं, ब्रह्मवादी का खिलाड़ी चाहिए!
चीथा दरबारी - आप कुशल खिलाड़ी हैं, जानकर मत हारिए।
तेनालीरामन - अच्छा तमाशा बन रहा है मेरा।
राजा - (समझाते हुए) ठीक से खेलो! यह मत समझो कि मैं आसानी से हार जाऊँगा।
चीथा दरबारी - महाराज, आज़ा हो तो मुकाबला आयोजित किया जाए। एक ओर आप, दूसरी ओर तेनालीरामन। तेनालीरामन वही जीतेगा।
राजा - (लटकाए, धीरे से) महाराज, आरंभ करो।
तेनालीरामन - अब चला यह घोड़ा।
राजा - यह चला में पहली चाल। (मोहरा उठाकर रखते हैं।)
मुख्य बिंदु
- तेनालीरामन विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में एक प्रसिद्ध विद्वषक और सलाहकार थे।
- राजा के दूसरे दरबारी तेनालीरामन से ईष्या करते थे और उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे।
- दरबारियों ने राजा को शतरंज़ खेलने के लिए तेनालीरामन को चुनौती देने की सलाह दी।
- यह कहानी दिखाती है कि सच्ची बुद्धिमानी और प्रतिभा हमेशा षड्यंत्र पर विजयी होती है।
यह अध्याय के पहले 5 पृष्ठों का पूर्वावलोकन है। पूरा अध्याय पाने के लिए नीचे क्लिक करें।
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