Official Class 7 Sanskrit Worksheets: All Chapters
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Solved Practice Worksheets for Sanskrit
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Question 1. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार लिखें।
ग्रीष्मकाले कस्यचित् वृक्षस्य अधः एकः सिंहः स्वपिति स्म। अकस्मात् तत्र कोऽपि मूषकः समायातः। सः सिंहं सुप्तं दृष्ट्वा तस्य उपरि कूर्दति स्म। तेन सिंहस्य निद्राभङ्गः जातः। आत्मनः उपरि कूर्दन्तं मूषकं दृष्ट्वा सिंहः कोपेन तं मारयितुम् इच्छति स्म। मूषकः सिंहं प्राणरक्षणाय प्रार्थितवान्। तस्य प्रार्थनां श्रुत्वा सिंहः मूषकम् अवमुञ्चत्। कालान्तरे सः एव सिंहः जाले निपतितः। तदा अयं मूषकः दन्तैः तस्य जालं कर्तितवान्।
Answer:
क. एकपदेन उत्तरं दीजिए।
1. वृक्षस्य अधः कः अवस्वपत्?
Answer: सिंहः
2. कः प्राणरक्षणाय प्रार्थितवान्?
Answer: मूषकः
3. कस्य उपरि मूषकः कूर्दति स्म?
Answer: सिंहस्य
4. सिंहः कुत्र निपतितः?
Answer: जाले
ख. पूर्णवाक्येन उत्तरं दीजिए।
सिंहं रक्षितुं मूषकः किं कर्तितवान्?
Answer: सिंहं रक्षितुं मूषकः दन्तैः तस्य जालं कर्तितवान्।
ग. निर्देशानुसार उत्तर लिखत।
1. 'दृष्ट्वा' अस्य प्रकृतिप्रत्ययविभाजनं कुर्वन्तु।
Answer: दृश् + क्त्वा
2. 'इच्छति' अस्य पुरुषवचनं लिखन्तु।
Answer: प्रथमपुरुषः, एकवचनम्
3. अनुच्छेदे 'आत्मनः' इति पदं कस्यां विभक्तौ अस्ति?
Answer: षष्ठी विभक्तौ (एकवचने)
4. 'सहसा' इति अर्थे किं पदम् अत्र प्रयुक्तम्?
Answer: अकस्मात्
In simple words: गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सटीक और व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध उत्तर लिखे गए हैं।
Exam Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों के उत्तर देते समय अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़ें और एकपद या पूर्णवाक्य के निर्देश का पालन करें।
Question 2. मञ्जूषा की सहायता से चित्र देखकर संस्कृत में पाँच वाक्य लिखें।
Answer:
1. इदं सुन्दरं चित्रम् अस्ति।
2. चित्र े एका बालिका क्रीडति।
3. वृक्षेषु खगाः अपि वसन्ति।
4. प्रभाते सूर्यः उदयति।
5. बालकाः प्रसन्नाः सन्ति।
In simple words: चित्र को देखकर सरल संस्कृत वाक्यों की रचना की गई है।
Exam Tip: चित्र वर्णन में वर्तमान काल की प्रथम पुरुष की क्रियाओं (जैसे- अस्ति, क्रीडति, वसन्ति) का प्रयोग करें।
Question 3. निम्नलिखितपदों का वर्णविन्यास करें - जन्मभूमििश्च, विश्वासम्, गृहम्, विनम्रता, मनुस्मृतिः।
Answer:
1. जन्मभूमििश्च = ज् + अ + न् + म् + ब् + ऊ + म् + इ + श् + च + इ
2. विश्वासम् = व् + इ + स् + व् + आ + स् + अ + म्
3. गृहम् = ग् + ऋ + ह् + अ + म्
4. विनम्रता = व् + इ + न् + अ + म् + र् + त + आ
5. मनुस्मृतिः = म् + अ + न् + उ + स् + म् + ऋ + त् + इ + ह् + ः (or त् + इः)
In simple words: प्रत्येक शब्द के वर्णों (स्वर और व्यंजन) को अलग-अलग करके लिखना वर्णविन्यास कहलाता है।
Exam Tip: व्यंजन वर्णों के साथ हलन्त (\(\text{्}\)) लगाना न भूलें।
Question 4. निम्नलिखित उपसर्गयुक्त धातुओं के अर्थ लिखकर उनसे एक-एक वाक्य बनाएं - आ+गम्, अनु+गम्, अनु+भू, अभि+भू, अधि+कृ।
Answer:
1. आगच्छति (आ + गम्) - अर्थ: आना। वाक्यम्: बालकः गृहम् आगच्छति।
2. अनुगच्छति (अनु + गम्) - अर्थ: पीछे जाना। वाक्यम्: सेवकः नृपं अनुगच्छति।
3. अनुभवति (अनु + भू) - अर्थ: अनुभव करना। वाक्यम्: जनः सुखं दुःखं वा अनुभवति।
4. अभिभवति (अभि + भू) - अर्थ: पराजित करना / दबाना। वाक्यम्: शूरः शत्रून् अभिभवति।
5. अधिकोति (अधि + कृ) - अर्थ: अधिकार करना / करना। वाक्यम्: नृपः राज्यम् अधिकरोति।
In simple words: उपसर्ग लगने पर धातु का अर्थ बदल जाता है, जिसके आधार पर वाक्य बनाए गए हैं।
Exam Tip: उपसर्ग हमेशा धातु या शब्द के पूर्व में जुड़ते हैं।
Question 5. अशुद्धि संशोधन करें -
क. सः योग्या छात्रः अस्ति。
ख. आम्रिणं पक्वं सन्ति。
ग. एषा वाटिका शोभनम् अस्ति。
घ. इदं वातावरणं सुन्दरः अस्ति。
ङ. संस्कृतस्य विना वृथा अध्ययनम्。
च. पुस्तकालयै बहुनि पुस्तकानि अस्ति。
छ. जनाः देवालये ईश्वَرं पूजयति。
ज. ईश्वरं पूजयित्वा जनः भ्रमन्ति।
Answer:
क. सः योग्यः छात्रः अस्ति। (विशेषण-विशेष्य मेल)
ख. आम्रं पक्वं वर्तते (अथवा आम्राणि पक्तानि सन्ति)।
ग. एषा वाटिका शोभना अस्ति।
घ. इदं वातावरणं सुन्दरम् अस्ति।
ङ. संस्कृतं विना वृथा अध्ययनम्। (द्वितीया विभक्ति)
च. पुस्तकालये बहूनि पुस्तकानि सन्ति।
छ. जनाः देवालय् ईश्वर् पूजयन्ति।
ज. ईश्वरं पूजयित्वा जनाः भ्रमन्ति।
In simple words: वाक्यों में लिंग, वचन, कारक और विभक्ति की अशुद्धियों को ठीक किया गया है।
Exam Tip: कर्ता के अनुसार ही क्रिया और विशेषण के अनुसार ही विशेष्य का लिंग-वचन होता है।
Question 6. यथोचित शब्दरूपों से रिक्तस्थान की पूर्ति कीजिए।
क. ..................... सर्वतः जलम् अस्ति (नगरे, नजात्, नगरम्)।
ख. सः ................... हीनः अस्ति? धनम्, धनेन, धनात्)।
ग. रामः ................... अलम्। रावणम्, रावणेन, रावणाय)।
घ. ते बालकाः ................. बहिः खेलन्ति। गृहस्य, गृहेण, गृहार्त्)।
ङ. ................. गंगा श्रेष्ठा अस्ति। नदीनाम्, नद्यां, नद्याः)।
च. छात्राः ................. कुशलिन्ः सन्ति। कर्मसु, कर्मणा, कर्मणाम्)।
Answer:
क. नगरे सर्वतः जलम् अस्ति।
ख. सः धनेन हीनः अस्ति।
ग. रामः रावणाय अलम्।
घ. ते बालकाः गृहार्त् (गृहात्) बहिः खेलन्ति।
ङ. नद्यां गंगा श्रेष्ठा अस्ति।
च. छात्राः कर्मसु कुशलिन्ः सन्ति।
In simple words: उचित कारक और विभक्ति के अनुसार सही शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरे गए हैं।
Exam Tip: 'अलम्' के योग में चतुर्थी विभक्ति और 'बहिः' के योग में पंचमी विभक्ति का प्रयोग होता है।
Question 7. यथोचित क्रियापदों से रिक्तस्थान की पूर्ति कीजिए।
क. त्वं इदानीं किं करोति? (करोमि, कुर्वन्ति, करोषि)
ख. यूयं कथं न पठन्ति? (पठथः / पठतः / पठथ)
ग. छात्राः सदैव सदैव सत्यं ..................... (वदतु / वद / वदेयुः)
घ. सः शिक्षकरात् संस्कृतं ..................... (अविठन् / अपवठति / अपठत्)
ङ. पिता पुत्राय ..................... (क्रुष्यति / क्रुष्यसि / क्रुष्यन्ति)
च. मह्यं देशैटनं ..................... (रोचते / रोचसे / रोचन्ते)
छ. ..................... धर्मस्य संचालनं भवति। (धनात् / धनस्य / धनाथ)
Answer:
क. त्वं इदानीं किं करोषि?
ख. यूयं कथं न पठथ?
ग. छात्राः सदैव सत्यं वदेयुः।
घ. सः शिक्षकात् संस्कृतम् अपठत्।
ङ. पिता पुत्राय क्रुष्यति।
च. मह्यं देशाटनं रोचते।
छ. धनस्य धर्मस्य संचालनं भवति।
In simple words: कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार सही क्रियापद का चयन किया गया है।
Exam Tip: मध्यम पुरुष एकवचन के साथ 'करोषि' और बहुवचन के साथ 'पठथ' का प्रयोग होता है।
Question 8. यथोचित शब्दरूपैः रिक्तस्थानं पूरयन्तु-
क. ................. सर्वतः जलम् अस्ति (नगरे/नगरात्/नगरम्)।
ख. सः ................. हीनः अस्ति। (धनेन/धनम्/धनात्)।
ग. रामः ................. अलम्। (रावणम्/रावणेन/रावणाय)।
घ. ते बालकाः ................. बहिः खेलन्ति। (गृहस्य/गृहार्त्/गृहेण)।
ङ. ................. गंगा श्रेष्ठा अस्ति। (नदीनाम्/नद्या/नद्याः)।
च. छात्राः ................. कुशलिन्ः सन्ति। (कर्मस्र्/कर्मणा/कर्मणाम्)।
Answer:
क. नगरे सर्वतः जलम् अस्ति。
ख. सः धनेन हीनः अस्ति。
ग. रामः रावणाय अलम्。
घ. ते बालकाः गृहात् बहिः खेलन्ति。
ङ. नद्यां गंगा श्रेष्ठा अस्ति。
च. छात्राः कर्मसु कुशलिन्ः सन्ति。
In simple words: यह प्रश्न संख्या 6 का ही पुनरावृत्ति रूप है, जिसमें सही शब्दों से रिक्त स्थान भरे गए हैं।
Exam Tip: कारक नियमों का पुनरावलोकन करें।
Question 9. दिए गए शीर्षकों पर संस्कृत में पाँच वाक्यों का अनुच्छेद लिखें-
क. महात्मा बुद्धः
ख. मूर्खः भृत्यः
ग. कुशलः चित्रकारः
Answer:
क. महात्मा बुद्धः
1. महात्मा बुद्धः बौद्धधर्मस्य संस्थापकः आसीत्。
2. तस्य जन्म लुम्बिनिवने अभवत्。
3. सः अहिंसायाः संदेशम् अयच्छत्。
4. तस्य विचारः जनान् प्रेरयति स्म。
5. सः महान् समाजसुधारकः आसीत्。
ख. मूर्खः भृत्यः
1. एकस्मिन् नगरे एकः मूर्खः भृत्यः आसीत्。
2. सः सर्वदा कार्याणि विकृतानि करोति स्म。
3. स्वामी तस्य मूर्खतया दुखी भवति स्म。
4. मूर्खैः सह कार्यं कठिनं भवति。
5. अतः बुद्धिमन्तः एव सहायकाः भवन्ति。
ग. कुशलः चित्रकारः
1. एकः कुशलः चित्रकारः आसीत्。
2. सः सुन्दराणि चित्राणि रचयति स्म。
3. तस्य चित्राणि सजीवानी इव अभवन्。
4. राजा तस्य बहु सम्मानं अकरोत्。
5. सर्वे जनाः तस्य प्रसंशां कुर्वन्ति स्म。
In simple words: दिए गए विषयों पर पांच-पांच सरल संस्कृत वाक्यों में अनुच्छेद लिखे गए हैं।
Exam Tip: अनुच्छेद लेखन में सरल वाक्यों का प्रयोग करें और काल (लकार) का ध्यान रखें।
Question 10. क्त्वा, तुमुन्, ल्यप्, प्रत्ययॱों के प्रयोग नियम के साथ लिखें। प्रत्येक प्रत्यय के लिए 10-10 उदाहरण दें।
Answer:
1. क्त्वा प्रत्यय: 'कर के' या 'पी कर' के अर्थ में पूर्वकालिक क्रिया दर्शाने के लिए धातु के साथ 'क्त्वा' प्रत्यय लगता है। इसमें 'त्वा' शेष रहता है (क का लोप)।
उदाहरण: 1. पठ् + क्त्वा = पठित्वा, 2. गम् + क्त्वा = गत्वा, 3. हस् + क्त्वा = हसित्वा, 4. लिख् + क्त्वा = लिखित्वा, 5. पा + क्त्वा = पीत्वा, 6. खाद् + क्त्वा = खादित्वा, 7. दृश् + क्त्वा = दृष्ट्वा, 8. नम् + क्त्वा = नत्वा, 9. कृ + क्त्वा = कृत्वा, 10. ज्ञा + क्त्वा = ज्ञात्वा।
2. तुमुन् प्रत्यय: 'के लिए' के अर्थ में धातु के साथ 'तुमुन्' प्रत्यय का प्रयोग होता है। इसमें 'तुम्' शेष रहता है।
उदाहरण: 1. पठ् + तुमुन् = पठितुम्, 2. गम् + तुमुन् = गन्तुम्, 3. हस् + तुमुन् = हसितुम्, 4. पा + तुमुन् = पातुम्, 5. खाद् + तुमुन् = खादितुम्, 6. लिख् + तुमुन् = लेखितुम्, 7. दृश् + तुमुन् = द्रष्टुम्, 8. ज्ञा + तुमुन् = ज्ञातुम्, 9. क्रुध् + तुमुन् = क्रोद्धुम्, 10. भक्ष् + तुमुन् = भक्षितुम्।
3. ल्यप् प्रत्यय: जब धातु से पहले कोई उपसर्ग हो और 'कर के' अर्थ प्रकट करना हो, तब 'क्त्वा' के स्थान पर 'ल्यप्' प्रत्यय होता है। इसमें केवल 'य' शेष रहता है।
उदाहरण: 1. आ + गम् + ल्यप् = आगत्य, 2. प्र + नम् + ल्यप् = प्रणम्य, 3. वि + हस् + ल्यप् = विहस्य, 4. आ + नी + ल्यप् = आनी्य, 5. सम् + भू + ल्यप् = संभूय, 6. प्र + पा + ल्यप् = प्रपाय, 7. उत् + स्था + ल्यप् = उत्थाय, 8. वि + चिन्त् + ल्यप् = विचिन्त्य, 9. आ + दा + ल्यप् = आदाय, 10. अनु + गम् + ल्यप् = अनुगत्य。
In simple words: कृदन्त प्रत्ययों (क्त्वा, तुमुन्, ल्यप्) के नियम और उनके दस-दस उदाहरण दिए गए हैं।
Exam Tip: याद रखें कि 'ल्यप्' प्रत्यय का प्रयोग तभी होता है जब धातु से पहले उपसर्ग जुड़ा हो।
Question 11. "बुद्धियस्य बलं तस्य" पाठ का सारांश एवं शिक्षा हिन्दी में लिखें।
Answer:
सारांश: "बुद्धियस्य बलं तस्य" पाठ हमें यह सिखाता है कि शारीरिक बल से अधिक महत्वपूर्ण बुद्धि का बल होता है। कथा के अनुसार, एक दुर्बल प्राणी भी अपनी चतुराई और बुद्धि के बल पर बड़े से बड़े और बलवान् शत्रु को परास्त कर सकता है।
शिक्षा: यह पाठ संदेश देता है कि संकट के समय हमें भयभीत न होकर अपनी बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए। "बुद्धिर्यस्य बलं तस्य, निर्बुद्धस्य कुतो बलम्" अर्थात् जिसके पास बुद्धि है, उसी के पास बल है।
In simple words: इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि बुद्धि शारीरिक ताकत से बड़ी होती है।
Exam Tip: सारांश लिखते समय मुख्य पात्र और नैतिक संदेश का उल्लेख अवश्य करें।
Question 12. अपनी पाठ्यपुस्तक के सुभाषितानि पाठ के किन्हीं तीन श्लोकों को अर्थसहित लिखें।
Answer:
श्लोक 1:
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्。
मूढैः पाषाणखंडेषु रत्नसंज्ञा विधीयते।।
अर्थ: पृथ्वी पर तीन ही रत्न हैं - जल, अन्न और सुंदर वचन। मूर्खों द्वारा पत्थरों के टुकड़ों को रत्न का नाम दिया जाता है।
श्लोक 2:
सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः。
सत्येन वाति वायुश्च सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्।।
अर्थ: सत्य से ही पृथ्वी टिकी हुई है, सत्य से ही सूर्य तपता है, सत्य से ही हवा बहती है और सब कुछ सत्य पर ही आधारित है।
श्लोक 3:
काएण वाच मनसा बुद्धेन्द्रीयाणां च संम्यमः。
तप उच्यते बुद्घैः सत्पुरुषाणाम्।।
अर्थ: शरीर, वाणी, मन और इंद्रियों का संयम रखना ही विद्वानों द्वारा तप कहा गया है।
In simple words: पाठ्यपुस्तक के तीन प्रसिद्ध श्लोक और उनके सरल हिंदी अर्थ दिए गए हैं।
Exam Tip: श्लोक लिखते समय वर्तनी (स्पेलिंग) की अशुद्धियों से बचें।
Question 13. 1 से 50 तक के अंकों को संस्कृत में लिखें।
Answer:
1 - एकम्, 2 - द्वे, 3 - त्रीणि, 4 - चत्वारि, 5 - पञ्च, 6 - षट्, 7 - सप्त, 8 - अष्ट, 9 - नव, 10 - दश,
11 - एकादश, 12 - द्वादश, 13 - त्रयोदश, 14 - चतुर्दश, 15 - पञ्चदश, 16 - षोडश, 17 - सप्तदश, 18 - अष्टादश, 19 - नवदश (एकोनविंशतिः), 20 - विंशतिः,
21 - एकविंशतिः, 22 - द्वाविंशतिः, 23 - त्रयोविंशतिः, 24 - चतुर्विंशतिः, 25 - पञ्चविंशतिः, 26 - षड्विंशतिः, 27 - सप्तविंशतिः, 28 - अष्टाविंशतिः, 29 - नवविंशतिः (एकोनत्रिंशत्), 30 - त्रिंशत्,
31 - एकत्रिंशत्, 32 - द्वात्रिंशत्, 33 - त्रयस्त्रिंशत्, 34 - चतुस्त्रिंशत्, 35 - पञ्चत्रिंशत्, 36 - षट्त्रिंशत्, 37 - सप्तत्रिंशत्, 38 - अष्टत्रिंशत्, 39 - नवत्रिंशत् (एकोनचत्वारिंशत्), 40 - चत्वारिंशत्,
41 - एकचत्वारिंशत्, 42 - द्विचत्वारिंशत्, 43 - त्रिश्चत्वारिंशत्, 44 - चतुश्चत्वारिंशत्, 45 - पञ्चचत्वारिंशत्, 46 - षट्चत्वारिंशत्, 47 - सप्तचत्वारिंशत्, 48 - अष्टचत्वारिंशत्, 49 - नवचत्वारिंशत् (एकोनपञ्चाशत्), 50 - पञ्चाशत्。
In simple words: 1 से 50 तक की संख्याएँ संस्कृत शब्दों में लिखी गई हैं।
Exam Tip: संख्याओं की वर्तनी को अच्छी तरह याद रखें, विशेषकर 19, 29, 39, 49 के वैकल्पिक रूपों को।
Question 14. संस्कृत में अनुवाद करें-
क. वह निराश होकर बोला।
ख. संस्कृत दिवस श्रावणी पूर्णिमा को मनाते हैं।
ग. भारत ऋषियों का देश है।
घ. वृद्धावस्था सभी की होती है।
ङ. हिमालय सबसे ऊँचा पर्वत है।
च. आदर्श छात्र अनुशासन का पालन करते हैं।
छ. प्रतिदिन बड़ों को प्रणाम करना चाहिये।
ज. परोपकार मानव का धर्म है।
Answer:
क. सः निराशः भूत्वा अवदत्।
ख. संस्कृतदिवसं श्रावणीपूर्णिमायां आचरन्ति (मन्यन्ते)।
ग. भारतम् ऋषीणां देशः अस्ति。
घ. वृद्धावस्था सर्वेषां भवति。
ङ. हिमालयः सर्वेषु पर्वतेषु उच्चतमः (उन्नततमः) अस्ति。
च. आदर्शः छात्रः अनुशासनस्य पालनं करोति。
छ. प्रतिदिनं वृध्दान् (बड़ान्) प्रणमेत्。
ज. परोपकारः मानवानां धर्मः अस्ति。
In simple words: हिंदी वाक्यों के सटीक संस्कृत अनुवाद प्रस्तुत किए गए हैं।
Exam Tip: अनुवाद करते समय कर्ता और क्रिया के पुरुष-वचन का विशेष ध्यान रखें।
Question 15. किन्हीं पाँच धातुओं के रूप पाँचों लकारों में लिखें।
Answer:
1. पठ् धातु (लट् लकार - वर्तमानकाल):
पठति, पठतः, पठन्ति / पठसि, पठथः, पठथ / पठामि, पठावः, पठामः
लृट् लकार (भविष्यत्काल):
पठिष्यति, पठिष्यतः, पठिष्यन्ति / पठिष्यसि, पठिष्यथः, पठिष्यथ / पठिष्यामि, पठिष्यावः, पठिष्यामः
लङ् लकार (भूतकाल):
अपठत्, अपठताम्, अपठन् / अपठः, अपठतम्, अपठत / अपठम्, अपठाव, अपठाम
लोट्लकार (आज्ञाद्यर्थ):
पठतु, पठताम्, पठन्तु / पठ, पठतम्, पठत / पठानि, पठाव, पठाम
विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ):
पठेत्, पठेताम्, पठेयुः / पठेः, पठेतुम् (पठेतम्), पठेत् (पठेत) / पठेयम्, पठेव, पठेम
*(इसी प्रकार गम्, वद्, भू, लिख् आदि अन्य चार धातुओं के रूप भी पाँचों लकारों में लिखे जा सकते हैं)*
In simple words: पाँचों लकारों में पठ् धातु के रूप दिए गए हैं।
Exam Tip: लकारों के प्रत्ययों (ति तः अन्ति...) को याद करके किसी भी धातु के रूप आसानी से लिखे जा सकते हैं।
Question 16. नदी, मति, मातृ, अस्मद्, युष्मद्, किम्, तत्, एतत्, सर्व, शब्दों के रूप लिखें।
Answer:
1. नदी (ईकारान्त स्त्रीलिंग):
नदी, नद्यौ, नद्यः / नदीम्, नद्यौ, नदीः / नद्या, नदीभ्याम्, नदीभिः / नद्यै, नदीभ्याम्, नदीभ्यः / नद्याः, नदीभ्याम्, नदीभ्यः / नद्याः, नद्योः, नदीनाम् / नद्याम्, नद्योः, नदीषु / हे नदी, हे नद्यौ, हे नद्यः
2. मति (इकारान्त स्त्रीलिंग):
मतिः, मती, मतयः / मतिम्, मती, मतीः / मत्या, मतिभ्याम्, मतिभिः / मतये (मतै), मतिभ्याम्, मतिभ्यः / मतेः (मत्याः), मतिभ्याम्, मतिभ्यः / मतेः (मत्याः), मत्योः, मतीनाम् / मत्याम्, मत्योः, मतिषु / हे मते, हे मती, हे मतयः
3. मातृ (ऋकारान्त स्त्रीलिंग):
माता, मातरौ, मातरः / मातरम्, मातरौ मातृः / मात्रा, मातृभ्याम्, मातृभिः / मात्रे, मातृभ्याम्, मातृभ्यः / मातुः, मातृभ्याम्, मातृभ्यः / मातुः, मात्रोः, मातृणाम् / मातरि, मात्रोः, मातृषु / हे मातः, हे मातरौ, हे मातरः
4. अस्मद् (सर्वनाम - तीनों लिंगों में समान):
अहम्, आवाम्, वयम् / माम् (आवाम्), आवाम्, अस्मान् / मया, आवाभ्याम्, अस्माभिः / मह्यम् (मे), आवाभ्याम् (नम्), अस्माभ्यम् (नः) / मत्, आवाभ्याम्, अस्mat (अस्मत्) / मम (मे), आवयोः (नः), अस्माकम् (नः) / मयि, आवयोः, अस्मासु
5. युष्मद् (सर्वनाम - तीनों लिंगों में समान):
त्वम्, युवाम्, यूयम् / त्वाम् (त्वा), युवाम् (वाम्), युष्मान् (वः) / त्वया, युवाभ्याम्, युष्माभिः / तुभ्यम् (ते), युवाभ्याम् (वाम्), युष्मभ्यम् (वः) / त्वत्, युवाभ्याम्, युष्मत् / तव (ते), युवयोः (वाम्), युष्माकम् (वः) / त्वयि, युवयोः, युष्मासु
6. किम् (प्रश्नार्थक - पुल्लिंग):
कः, कौ, के / कम्, कौ, कान् / केन, काभ्याम्, कैः / कस्मै, काभ्याम्, केभ्यः / कस्मात्, काभ्याम्, केभ्यः / कस्य, तयोः, केषाम् / कस्मिन्, कयोः, केषु
7. तत् (सर्वनाम - पुल्लिंग):
सः, तौ, ते / तम्, तौ, तान् / तेन, ताभ्याम्, तैः / तस्मै, ताभ्याम्, तेभ्यः / तस्मात्, ताभ्याम्, तेभ्यः / तस्य, तयोः, तेषाम् / तस्मिन्, तयोः, तेषु
8. एतत् (सर्वनाम - पुल्लिंग):
एषः, एतौ, एते / एतम्, एतौ, एतान् / एतेन, एताभ्याम्, एतैः / एतस्मै, एताभ्याम्, एतेभ्यः / एतस्मात्, एताभ्याम्, एतेभ्यः / एतस्य, एतयोः, एतेषाम् / एतस्मिन्, एतयोः, एतेषु
9. सर्व (सर्वनाम - पुल्लिंग):
सर्वः, सर्वौ, सर्वे / सर्वम्, सर्वौ, सर्वान् / सर्वेण, सर्वाभ्याम्, सर्वैः / सर्वस्मै, सर्वाभ्याम्, सर्वेभ्यः / सर्वस्मात्, सर्वाभ्याम्, सर्वेभ्यः / सर्वस्य, सर्वयोः, सर्वेषाम् / सर्वस्मिन्, सर्वयोः, सर्वेषु
In simple words: प्रमुख संज्ञा और सर्वनाम शब्दों के विभक्तियों और वचनों के रूप दिए गए हैं।
Exam Tip: शब्दरूपों को याद करते समय विभक्तियों (प्रथमा से सप्तमी और संबोधन) का क्रम और वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) स्पष्ट रखें।
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For All Chapters, regular practice with our worksheets will improve question-handling speed and help students understand all technical terms and diagrams.