NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 06 The Parliamentary System Legislature and Executive (संसदीय प्रणाली विधायिका और कार्यपालिका) in Hindi

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 8 Social Science Chapter 06 संसदीय प्रणाली विधायिका और कार्यपालिका

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Question 1: भारत की संसदीय प्रणाली क्या है और इसकी संरचना किस प्रकार کی گئی है?

Answer:

भारत की संसदीय प्रणाली एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है। इस प्रणाली में जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है जो संसद में बैठकर शासन चलाते हैं।
भारत की संसद की संरचना द्विसदनीय है, जिसमें निम्नलिखित तीन अंग होते हैं—
1. राष्ट्रपति
2. लोकसभा (निचला सदन)
3. राज्यसभा (उच्च सदन)
लोकसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, जबकि राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। यह संरचना लोकतंत्र, संतुलन और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करती है।

मुख्य बिंदु:

• कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है।
• संसद की संरचना द्विसदनीय है।
• लोकसभा और राज्यसभा इसके दो प्रमुख सदन हैं।
• राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग होता है।

आम गलतियाँ:

• केवल लोकसभा को ही पूरी संसद मान लेना।
• राष्ट्रपति को संसद का हिस्सा न समझना।
• लोकसभा और राज्यसभा की निर्वाचन प्रक्रिया में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) संसदीय प्रणाली की परिभाषा स्पष्ट रूप से लिखें।
b) संसद के तीनों अंगों के नाम क्रमबद्ध रूप से दर्शाएँ।
c) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनाव का अंतर स्पष्ट करें।

 

Question 2: संसद के प्रमुख कार्य क्या हैं?

Answer:

संसद के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
1. संवैधानिक कार्य – संविधान में संशोधन करना तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का निर्वाचन करना।
2. कानून निर्माण – देश के लिए नए कानून बनाना और पुराने कानूनों में संशोधन करना।
3. कार्यपालिका संबंधी उत्तरदायित्व – सरकार (कार्यपालिका) के कार्यों की निगरानी करना और उससे जवाबदेही सुनिश्चित करना।
4. वित्तीय उत्तरदायित्व – बजट पारित करना, सरकारी खर्चों को नियंत्रित करना और धन के उपयोग की जाँच करना।
इन कार्यों के माध्यम से संसद देश के शासन को सुचारु और उत्तरदायी बनाती है।

मुख्य बिंदु:

• संसद देश के लिए नए कानून बनाती है।
• यह सरकार के वित्तीय मामलों और बजट को नियंत्रित करती है।
• कार्यपालिका की जवाबदेही तय करना इसका मुख्य दायित्व है।

आम गलतियाँ:

• केवल कानून बनाने को ही संसद का एकमात्र कार्य समझना।
• वित्तीय नियंत्रण और बजट पास करने की भूमिका को भूल जाना।

Exam Tips:

a) संसद के कार्यों को बिंदुओं में लिखकर उत्तर दें।
b) संवैधानिक और वित्तीय कार्यों का संक्षिप्त उल्लेख अवश्य करें।
c) उत्तरदायी शासन में संसद की भूमिका को रेखांकित करें।

 

Question 3: भारत के संसदीय लोकतंत्र में विधायिका और कार्यपालिका की भूमिकाएँ क्या हैं?

Answer:

भारत के संसदीय लोकतंत्र में दोनों अंगों की अलग-अलग और महत्वपूर्ण भूमिकाएँ हैं—
विधायिका (संसद):
• कानून बनाती है।
• सरकार के कार्यों की निगरानी करती है।
• बजट को पारित करती है।
कार्यपालिका (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद):
• संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करती है।
• प्रशासन चलाती है और नीतियाँ बनाती है।
• देश की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखती है।
इस प्रकार विधायिका और कार्यपालिका मिलकर शासन चलाते हैं, जहाँ कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है।

मुख्य बिंदु:

• विधायिका कानून निर्माण और नीति निर्धारण का कार्य करती है।
• कार्यपालिका उन कानूनों को धरातल पर लागू करती है।
• कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है।

आम गलतियाँ:

• विधायिका और कार्यपालिका के कार्यों को एक ही मान लेना।
• उत्तरदायित्व की दिशा को उल्टा लिख देना।

Exam Tips:

a) दोनों अंगों की भूमिकाओं को अलग-अलग शीर्षक देकर समझाएँ।
b) मुख्य बिंदुओं का उपयोग करके उत्तर को आकर्षक बनाएँ।
c) उत्तरदायित्व के संबंध को स्पष्ट करना न भूलें।

 

Question 4: केंद्र और राज्य स्तर पर विधायिका और कार्यपालिका का गठन किस प्रकार किया जाता है?

Answer:

केंद्र स्तर पर:
• विधायिका: संसद (राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा)
• कार्यपालिका: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
• प्रधानमंत्री बहुमत दल का नेता होता है और मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
राज्य स्तर पर:
• विधायिका: विधानमंडल (विधानसभा और कुछ राज्यों में विधान परिषद)
• कार्यपालिका: राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद
• मुख्यमंत्री राज्य में बहुमत दल का नेता होता है।
दोनों स्तरों पर कार्यपालिका, विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है और उसी के आधार पर शासन चलाया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है।
• केंद्र में राष्ट्रपति और राज्यों में राज्यपाल प्रमुख होते हैं।
• बहुमत दल का नेता प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनता है।

आम गलतियाँ:

• केंद्र और राज्य के पदों (जैसे राष्ट्रपति और राज्यपाल) में अंतर न कर पाना।
• दोनों स्तरों की संरचना को मिला देना।

Exam Tips:

a) उत्तर को 'केंद्र स्तर' और 'राज्य स्तर' में विभाजित करके लिखें।
b) विधायिका और कार्यपालिका के घटकों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) तुलनात्मक रूप से प्रस्तुति देने से अंक अच्छे मिलते हैं।

 

Question 1: पता लगाइए कि आपके राज्य से संसद के प्रत्येक सदन में कितने प्रतिनिधि हैं।

Answer:

मेरे राज्य से संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में प्रतिनिधि भेजे जाते हैं। लोकसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, इसलिए इनकी संख्या राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करती है। वहीं राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं और उनकी संख्या भी राज्यों की जनसंख्या के आधार पर निर्धारित होती है। बड़े राज्यों से अधिक प्रतिनिधि होते हैं, जबकि छोटे राज्यों से कम। यह व्यवस्था देश में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है।

मुख्य बिंदु:

• लोकसभा सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा होता है।
• राज्यसभा सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है।
• प्रतिनिधियों की संख्या राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करती है।

आम गलतियाँ:

• सभी राज्यों में प्रतिनिधियों की संख्या समान मान लेना।
• निर्वाचन के तरीकों में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) अपने राज्य का नाम लिखकर वहाँ की सीटों की संख्या का उल्लेख करें।
b) जनसंख्या के आधार पर सीटों के आवंटन का नियम समझाएँ।
c) संघीय प्रतिनिधित्व के महत्व को संक्षेप में लिखें।

 

Question 2: वे कौन-से तत्व हैं जो भारतीय संसद को ‘जनता की आवाज’ बनाते हैं? यह कैसे सुनिश्चित करती है कि विभिन्न विचारों को सुना जाए?

Answer:

भारतीय संसद को ‘जनता की आवाज’ बनाने वाले मुख्य तत्व हैं— निर्वाचित प्रतिनिधि, सार्वभौमिक मताधिकार और विविधता का प्रतिनिधित्व। जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है जो उनकी समस्याएँ संसद में रखते हैं। संसद में विभिन्न राजनीतिक दलों और क्षेत्रों के लोग शामिल होते हैं, जिससे अलग-अलग विचार सामने आते हैं। प्रश्नकाल, बहस और समितियाँ यह सुनिश्चित करती हैं कि सभी मुद्दों पर गहराई से चर्चा हो और सभी वर्गों की आवाज सुनी जाए।

मुख्य बिंदु:

• सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार द्वारा जनता की भागीदारी होती है।
• प्रश्नकाल और बहसों के माध्यम से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती है।
• संसदीय समितियाँ सभी विचारों को स्थान देती हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल चुनाव प्रक्रिया का उल्लेख करना और चर्चा के तरीकों को छोड़ देना।
• विविधता के महत्व को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) 'जनता की आवाज' वाक्यांश के मूल अर्थ को समझाएँ।
b) प्रश्नकाल और बहसों का विशेष रूप से उल्लेख करें।
c) लोकतंत्र में संवाद के महत्व को स्पष्ट करें।

 

Question 3: आपके विचार से संविधान ने कार्यपालिका को विधायिका के प्रति उत्तरदायी क्यों बनाया?

Answer:

संविधान ने कार्यपालिका को विधायिका के प्रति उत्तरदायी इसलिए बनाया ताकि सरकार जनता के प्रति जिम्मेदार बनी रहे। विधायिका जनता द्वारा चुनी जाती है, इसलिए वह कार्यपालिका के कार्यों की निगरानी करती है। इससे कार्यपालिका मनमाने निर्णय नहीं ले सकती और उसे अपने कार्यों का हिसाब देना पड़ता है। प्रश्नकाल और अविश्वास प्रस्ताव जैसे साधनों से विधायिका नियंत्रण रखती है, जिससे लोकतंत्र मजबूत होता है।

मुख्य बिंदु:

• सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए।
• कार्यपालिका को निरंकुश होने से रोकने के लिए।
• जनता के हितों की रक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए।

आम गलतियाँ:

• उत्तरदायित्व के मूल उद्देश्य को न समझ पाना।
• नियंत्रण के साधनों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) उत्तरदायित्व और जवाबदेही शब्दों पर जोर दें।
b) नियंत्रण के उपायों (जैसे प्रश्नकाल) का उदाहरण दें।
c) लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में उत्तर समाप्त करें।

 

Question 4: आपके अनुसार केंद्र स्तर पर द्विसदनीय विधायिका क्यों चुनी गई?

Answer:

केंद्र स्तर पर द्विसदनीय विधायिका इसलिए चुनी गई ताकि कानून बनाने की प्रक्रिया अधिक सोच-समझकर और संतुलित हो। एक सदन (लोकसभा) जनता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि दूसरा सदन (राज्यसभा) राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है। इससे जल्दबाजी में गलत कानून बनने से रोका जाता है। राज्यसभा पुनः समीक्षा का अवसर देती है और संघीय ढाँचे को मजबूती प्रदान करती है।

मुख्य बिंदु:

• कानूनों की दो स्तरों पर समीक्षा होती है।
• लोकसभा जनता का और राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है।
• संघीय व्यवस्था और संतुलन बना रहता है।

आम गलतियाँ:

• दोनों सदनों के अलग-अलग उद्देश्यों को स्पष्ट न करना।
• केवल एक ही सदन के होने के लाभ-हानि पर चर्चा करना।

Exam Tips:

a) द्विसदनीय व्यवस्था के दोनों सदनों की भूमिका स्पष्ट करें।
b) संघीय ढाँचे को मजबूत करने वाले बिंदु को शामिल करें।
c) जल्दबाजी में कानून बनने से रोकने वाले तर्क को लिखें।

 

Question 5: हाल ही में संसद में पारित किसी विधेयक की पूरी प्रक्रिया को समझने का प्रयास कीजिए। जानिए कि वह विधेयक सबसे पहले किस सदन में प्रस्तुत किया गया था। क्या उस पर कोई बड़ी चर्चा या विरोध हुआ था? इस विधेयक को कानून बनने में कितना समय लगा?

Answer:

मैंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम की प्रक्रिया का अध्ययन किया। यह विधेयक सबसे पहले लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद इसे समिति को भेजा गया, जहाँ संशोधन सुझाए गए। इस पर काफी चर्चा हुई और कुछ विरोध भी हुआ क्योंकि इसके प्रावधानों पर अलग-अलग मत थे। दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून बना। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 8 महीने का समय लगा।

मुख्य बिंदु:

• विधेयक की शुरुआत सदन में प्रस्तुतिकरण से होती है।
• समितियों द्वारा विधेयकों की गहन जाँच की जाती है।
• दोनों सदनों की मंजूरी और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से कानून बनता है।

आम गलतियाँ:

• कानून बनने की चरणबद्ध प्रक्रिया को छोड़ देना।
• समय सीमा और चर्चा के महत्व का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) किसी वास्तविक विधेयक का उदाहरण देकर समझाएँ।
b) प्रस्तुति से लेकर राष्ट्रपति की स्वीकृति तक के चरण लिखें।
c) चर्चा और विरोध के लोकतांत्रिक पहलू को दर्शाएँ।

 

Question 6: संसद द्वारा हाल ही में पारित किसी कानून का चयन कीजिए। कक्षा को अलग-अलग समूह में बाँटिए— कुछ विद्यार्थी लोकसभा और राज्यसभा के सांसद बनें, कुछ मंत्री बनें जो प्रश्नों के उत्तर दें और कोई राष्ट्रपति की भूमिका निभाए। सभी मिलकर एक लघु नाटिका तैयार करें जिसमें दर्शाया जाए कि एक विधेयक संसद में कैसे प्रस्तुत होता है, कैसे उस पर चर्चा होती है, वह पारित होता है और अंत में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर कानून बन जाता है। एक ‘मॉडल संसद’ का मंचन कीजिए।

Answer:

यह एक कक्षा गतिविधि (मॉडल संसद) है। इसके लिए एक लघु नाटिका का प्रारूप इस प्रकार है—
विषय: शिक्षा सुधार विधेयक
पात्र: लोकसभा अध्यक्ष, सांसद, मंत्री, राज्यसभा सभापति, राष्ट्रपति।
दृश्य 1 (लोकसभा): मंत्री विधेयक प्रस्तुत करते हैं, सांसद इस पर अपने विचार रखते हैं।
दृश्य 2 (मतदान): अध्यक्ष मतदान करवाते हैं और विधेयक पारित होता है।
दृश्य 3 (राज्यसभा): सभापति विधेयक पर चर्चा कराते हैं और वहाँ से भी पारित होता है।
दृश्य 4 (राष्ट्रपति): राष्ट्रपति विधेयक को अपनी स्वीकृति देते हैं और यह कानून बन जाता है।

मुख्य बिंदु:

• मॉडल संसद के माध्यम से विधायी प्रक्रिया को समझना।
• विभिन्न भूमिकाओं (अध्यक्ष, मंत्री, सांसद) का निर्वहन करना।
• विधेयक से कानून बनने के चरणों का व्यावहारिक अनुभव लेना।

आम गलतियाँ:

• नाटिका में संवैधानिक प्रक्रियाओं के क्रम को उलट देना।
• राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति के चरण को भूल जाना।

Exam Tips:

a) नाटक के दृश्यों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करें।
b) प्रत्येक पात्र की भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) विधायी प्रक्रिया के चरणों का सही पालन करें।

 

Question 7: महिला आरक्षण विधेयक, 2023 व्यापक समर्थन के साथ पारित हुआ। इतने लंबे समय तक चर्चा के बाद भी इस विधेयक को पारित होने में 25 वर्ष से अधिक समय क्यों लगा?

Answer:

महिला आरक्षण विधेयक, 2023 को पारित होने में 25 वर्ष से अधिक समय इसलिए लगा क्योंकि इस पर राजनीतिक दलों के बीच पूरी तरह सहमति नहीं बन पा रही थी। कुछ दलों ने इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग की, जबकि कुछ को सीटों के पुनर्वितरण पर आपत्ति थी। इसके अलावा, संसद में हंगामे और राजनीतिक मतभेदों के कारण यह लंबे समय तक लंबित रहा, लेकिन अंततः व्यापक सहमति से पारित हो गया।

मुख्य बिंदु:

• राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति का अभाव था।
• उप-श्रेणियों (जैसे OBC आरक्षण) को लेकर मतभेद थे.
• संसद में व्यवधान और हंगामे ने प्रक्रिया को धीमा किया।

आम गलतियाँ:

• केवल समय की बात करना और कारणों को न समझाना।
• राजनीतिक और सामाजिक आपत्तियों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) देरी के मुख्य कारणों को बिंदुओं में लिखें।
b) राजनीतिक सहमति के महत्व को स्पष्ट करें।
c) अंततः व्यापक सहमति से पारित होने के परिणाम को बताएं।

 

Question 8: कभी-कभी संसद बाधित हो जाती है और जितने दिनों तक इसे कार्य करना चाहिए, उतना कार्य नहीं कर पाती। आपको क्या लगता है कि इसका कानूनों की गुणवत्ता और लोगों के अपने प्रतिनिधियों के प्रति विश्वास पर क्या प्रभाव पड़ता है?

Answer:

मेरे विचार से जब संसद बाधित होती है, तो कानूनों की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि पर्याप्त चर्चा और विचार-विमर्श नहीं हो पाता। इससे जल्दबाजी में कानून बन जाते हैं, जिनमें कमियाँ रह जाती हैं। साथ ही, जब प्रतिनिधि ठीक से काम नहीं कर पाते, तो जनता का उन पर विश्वास कम हो जाता है और लोकतंत्र कमजोर पड़ सकता है। इसलिए संसद का सुचारु रूप से चलना बहुत जरूरी है।

मुख्य बिंदु:

• चर्चा की कमी से कानूनों की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
• जनता का प्रतिनिधियों और संसद से विश्वास उठने लगता है।
• लोकतंत्र की सुचारु कार्यप्रणाली बाधित होती है।

आम गलतियाँ:

• संसद के हंगामे को सामान्य मान लेना और इसके दुष्प्रभावों को नजरअंदाज करना।
• जनता के विश्वास पर पड़ने वाले असर को न लिखना।

Exam Tips:

a) कानूनों की गुणवत्ता और जनता के विश्वास दोनों पर पड़ने वाले असर को समझाएँ।
b) लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहस के महत्व को लिखें।
c) उत्तर को सकारात्मक निष्कर्ष के साथ समाप्त करें।

 

Question 9: क्या आप विद्यार्थियों के बीच हित समूह बनाकर किसी नीति से संबंधित प्रश्नों की एक सूचि तैयार कर सकते हैं, जिन्हें आप अपने सांसद या विधायक से पूछना चाहेंगे? यही प्रश्न विधायक के स्थान पर सांसद से पूछे जाएँ तो उनमें क्या अंतर होगा? और यदि सांसद की जगह विधायक से पूछेंगे तो प्रश्न कैसे भिन्न होंगे?

Answer:

हम विद्यार्थियों का एक हित समूह बनाकर शिक्षा या स्वच्छता से जुड़े प्रश्न तैयार कर सकते हैं, जैसे— हमारे क्षेत्र के स्कूलों में सुविधाएँ कब सुधरेंगी? यदि यही प्रश्न सांसद से पूछें, तो वे राष्ट्रीय स्तर की नीतियों और पूरे देश के बजट पर उत्तर देंगे। लेकिन यदि इन्हें विधायक से पूछें, तो वे राज्य या स्थानीय स्तर की समस्याओं, जैसे स्कूलों की स्थिति, सड़क और पानी आदि पर जवाब देंगे। सांसद के प्रश्न व्यापक (देश स्तर) होते हैं, जबकि विधायक के प्रश्न स्थानीय होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• सांसद राष्ट्रीय और केंद्रीय नीतियों के लिए उत्तरदायी होते हैं।
• विधायक स्थानीय और राज्य स्तर के मुद्दों को संभालते हैं।
• क्षेत्र के अनुसार प्रश्नों का दायरा बदल जाता है।

आम गलतियाँ:

• सांसद और विधायक के अधिकारों और क्षेत्रों में अंतर न समझ पाना।
• दोनों के लिए एक जैसे प्रश्न तैयार करना।

Exam Tips:

a) सांसद और विधायक के कार्यक्षेत्र का अंतर स्पष्ट करें।
b) स्थानीय बनाम राष्ट्रीय मुद्दों के उदाहरण दें।
c) प्रश्न पूछने के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 10: भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका की क्या भूमिका है? यदि हमारे पास स्वतंत्र न्यायपालिका न हो तो क्या हो सकता है?

Answer:

भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। यह कानूनों की व्याख्या करती है, विवादों का समाधान करती है और लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है। न्यायपालिका यह भी सुनिश्चित करती है कि सरकार के सभी कार्य संविधान के अनुसार हों। यदि स्वतंत्र न्यायपालिका न हो, तो सरकार मनमाने निर्णय ले सकती है और लोगों के अधिकारों का हनन हो सकता है, जिससे अन्याय बढ़ेगा और लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा।

मुख्य बिंदु:

• न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या और विवादों का समाधान करती है।
• यह मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है।
• स्वतंत्र न्यायपालिका तानाशाही को रोकती है और लोकतंत्र बचाती है।

आम गलतियाँ:

• केवल विवाद सुलझाने को न्यायपालिका का कार्य मानना।
• न्यायपालिका की स्वतंत्रता के महत्व को न लिखना।

Exam Tips:

a) न्यायपालिका के मुख्य कार्यों को स्पष्ट रूप से लिखें।
b) 'स्वतंत्र न्यायपालिका' न होने के परिणामों का वर्णन करें।
c) लोकतंत्र की मजबूती में इसकी भूमिका को रेखांकित करें।

 

Social Science Class 8 Curriculum Solutions: Chapter 06 संसदीय प्रणाली विधायिका और कार्यपालिका

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