Official NCERT Solutions for Class 8 Social Science: Chapter 03 मराठा साम्राज्य का उदय
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Chapter-wise Solutions for Social Science: Chapter 03 मराठा साम्राज्य का उदय
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Question 1: मराठा कौन थे? वे ब्रिटिश शासन स्थापित होने से पूर्व भारतवर्ष की सबसे बड़ी अखिल भारतीय शक्ति कैसे बने?
Answer:
मराठा दक्कन पठार, विशेष रूप से वर्तमान महाराष्ट्र के निवासी थे जो मराठी भाषा बोलते थे।
17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी के नेतृत्व में उन्होंने एक संगठित शक्ति के रूप में उभरकर 'स्वराज्य' की स्थापना की।
उन्होंने गुरिल्ला युद्ध नीति, मजबूत किलों और प्रभावी प्रशासन के बल पर मुगलों और अन्य ताकतों को कड़ी चुनौती दी।
समय के साथ मराठों ने अपने साम्राज्य का विस्तार किया और भारत के एक बड़े भूभाग पर नियंत्रण स्थापित करके एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति का दर्जा प्राप्त किया।
मुख्य बिंदु:
• मराठा मूल रूप से महाराष्ट्र के दक्कन पठार क्षेत्र से संबंधित थे।
• छत्रपति शिवाजी महाराज ने 17वीं शताब्दी में 'स्वराज्य' की स्थापना की थी।
• गुरिल्ला युद्ध नीति और सुदृढ़ किलों ने उनकी सैन्य ताकत को अत्यधिक मजबूत किया।
आम गलतियाँ:
• छात्रों को लगता है कि मराठों का प्रभाव केवल महाराष्ट्र तक सीमित था, जबकि उन्होंने पूरे भारत में विस्तार किया था।
• शिवाजी महाराज के काल और उत्तरवर्ती मराठों की नीतियों में अंतर स्पष्ट न करना।
• गुरिल्ला युद्ध रणनीति के महत्व को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) मराठों के भौगोलिक मूल और भाषा का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) 'स्वराज्य' शब्द और छत्रपति शिवाजी के योगदान को मुख्य रूप से दर्शाएँ।
c) उत्तर लिखते समय कालक्रम (Chronology) का ध्यान रखें।
Question 2: उनके शासन प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?
Answer:
मराठा शासन प्रणाली अत्यधिक संगठित, केंद्रीकृत और कुशल थी।
शिवाजी महाराज ने अधिकारियों को वेतन सीधे राज्य कोष से देने की व्यवस्था की और ‘अष्टप्रधान मंडल’ नामक मंत्रिपरिषद का गठन किया।
भूमि राजस्व व्यवस्था अत्यंत व्यवस्थित थी जिसमें किसानों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाता था।
सेना पैदल, घुड़सवार और नौसेना में विभाजित थी तथा चौथ और सरदेशमुखी करों के माध्यम से आय जुटाई जाती थी।
मुख्य बिंदु:
• अष्टप्रधान मंडल प्रशासनिक कार्यों में राजा की सहायता करता था।
• किसानों के हितों का संरक्षण करने वाली व्यवस्थित भूमि राजस्व प्रणाली थी।
• चौथ और सरदेशमुखी कर मराठा साम्राज्य की आय के प्रमुख स्रोत थे।
आम गलतियाँ:
• अष्टप्रधान के सदस्यों और उनके कार्यों को आपस में मिला देना।
• चौथ और सरदेशमुखी करों के अर्थ को गलत लिखना।
• प्रशासनिक सुधारों में शिवाजी की भूमिका को न बताना।
Exam Tips:
a) 'अष्टप्रधान मंडल' का उल्लेख अनिवार्य रूप से करें।
b) कर प्रणाली (चौथ और सरदेशमुखी) के नाम स्पष्ट रूप से लिखें।
c) सेना के तीनों अंगों (पैदल, घुड़सवार, नौसेना) का वर्णन करें।
Question 3: भारतीय इतिहास पर मराठा साम्राज्य का क्या प्रभाव पड़ा?
Answer:
मराठा साम्राज्य ने भारतीय इतिहास की दिशा को निर्णायक रूप से प्रभावित किया।
उन्होंने मुगल साम्राज्य की केंद्रीय शक्ति को कमजोर किया और भारतीय उपमहाद्वीप में एक नई राजनीतिक संरचना की नींव रखी।
मराठों ने स्थानीय शासन को मजबूत किया और मराठी भाषा, साहित्य तथा भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण किया।
उनके निरंतर संघर्षों ने अंततः अंग्रेजों के उदय का मार्ग भी प्रशस्त किया जिसके परिणामस्वरूप भारत में औपनिवेशिक शासन की स्थापना हुई।
मुख्य बिंदु:
• मुगल साम्राज्य की शक्ति को आघात पहुँचाकर पतन की ओर अग्रसर किया।
• मराठी भाषा, साहित्य और समृद्ध परंपराओं का संरक्षण व प्रसार किया।
• मराठा-ब्रिटिश संघर्षों से भारत के औपनिवेशिक इतिहास पर गहरा प्रभाव पड़ा।
आम गलतियाँ:
• केवल नकारात्मक प्रभावों का उल्लेख करना और सकारात्मक सांस्कृतिक योगदान को छोड़ देना।
• ब्रिटिश शासन की स्थापना से मराठा संघर्षों के संबंध को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों प्रकार के प्रभावों का संतुलन बनाए रखें।
b) मुगल सत्ता के पतन में मराठों की भूमिका को प्रमुखता से लिखें।
c) उत्तर को पैराग्राफ के बजाय स्पष्ट बिंदुओं में विभाजित करके लिखें।
Question 4: विश्लेषण करें कि किस प्रकार भूगोल (विशेषकर पर्वत और समुद्र तट) ने मराठा सैन्य रणनीति और राज्य-निर्माण को निर्धारित किया था?
Answer:
मराठा सैन्य रणनीति और राज्य-निर्माण में भूगोल की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका थी।
पश्चिमी घाट के ऊँचे पर्वतों और दुर्गम किलों ने मराठों को प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान की तथा उन्हें छिपकर आक्रमण करने यानी गुरिल्ला युद्ध में मदद की।
संकरे घाट और घने जंगल दुश्मन सेना के लिए बेहद कठिन थे जिससे मराठों को हमेशा सामरिक बढ़त मिली।
इसके अलावा समुद्र तटों ने व्यापार और सशक्त नौसेना के विकास में सहायता की जिससे वे विदेशी ताकतों का मुकाबला करने में सक्षम हुए।
मुख्य बिंदु:
• पश्चिमी घाट के किलों ने असाधारण सुरक्षा और सामरिक लाभ दिया।
• कठिन भौगोलिक परिस्थितियों ने गुरिल्ला युद्ध प्रणाली को संभव बनाया।
• समुद्री तटों की उपस्थिति से नौसेना और व्यापार का विस्तार हुआ।
आम गलतियाँ:
• केवल पर्वतीय भूगोल का जिक्र करना और तटीय क्षेत्रों की भूमिका को भूल जाना।
• भूगोल और सैन्य रणनीति के आपसी संबंध को स्पष्ट न कर पाना।
Exam Tips:
a) पर्वत और समुद्र तट दोनों के प्रभावों को अलग-अलग बिंदुओं में समझाएँ।
b) 'गुरिल्ला युद्ध' और 'तटीय दुर्ग' जैसे शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
c) उत्तर में मानचित्र के महत्व को भी संक्षिप्त रूप में जोड़ें।
Question 5: अध्याय में लिखा है कि अंग्रेजों ने भारत को मुगलों या किसी भी अन्य शक्ति से अधिक मराठों से छीना। आपके विचार में इसका क्या अर्थ है? अध्याय में दिए गए कौन-से प्रमाण इस विचार का समर्थन करते हैं?
Answer:
इस कथन का सीधा अर्थ यह है कि अंग्रेजों ने भारत में सबसे अधिक भूभाग और राजनीतिक प्रभुत्व मराठों को पराजित करके ही प्राप्त किया था।
उस काल में मराठा भारत की सबसे शक्तिशाली और विशाल अखिल भारतीय ताकत थे जिनका नियंत्रण उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत के बड़े क्षेत्रों पर था।
मराठों का प्रभाव दिल्ली, लाहौर और पेशावर तक फैल चुका था।
वर्ष 1775 से 1818 के बीच लड़े गए तीन आंग्ल-मराठा युद्धों के माध्यम से अंग्रेजों ने अंततः मराठा क्षेत्रों पर पूर्ण कब्जा कर लिया जो इस तथ्य का सबसे बड़ा प्रमाण है।
मुख्य बिंदु:
• मराठा साम्राज्य का विस्तार दिल्ली से लेकर उत्तर-पश्चिम के दूरदराज के क्षेत्रों तक था।
• तीन आंग्ल-मराठा युद्धों की श्रृंखला ने ब्रिटिश आधिपत्य को स्थापित किया।
• अंग्रेजों द्वारा अधिग्रहित कुल क्षेत्र में मराठा राज्य का हिस्सा सबसे बड़ा था।
आम गलतियाँ:
• आंग्ल-मराठा युद्धों की समय-सीमा का उल्लेख न करना।
• केवल मुगल साम्राज्य के पतन को ही ब्रिटिश विजय का कारण बताना।
Exam Tips:
a) आंग्ल-मराठा युद्धों (1775-1818) का सही कालक्रम दें।
b) भौगोलिक विस्तार (दिल्ली, लाहौर, पेशावर) का संदर्भ दें।
c) प्रश्न के दोनों भागों (अर्थ और प्रमाण) का उत्तर अलग से दें।
Question 6: तुलना कीजिए कि शिवाजी और उत्तरवर्ती मराठों ने धार्मिक स्थलों और विभिन्न धर्म के लोगों के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया। इस अध्याय में कौन-सा प्रमाण धार्मिक विविधता के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है?
Answer:
छत्रपति शिवाजी महाराज ने सभी धर्मों के लोगों और धार्मिक स्थलों के प्रति अत्यंत सम्मानजनक और सहिष्णु दृष्टिकोण अपनाया था।
उन्होंने हिंदू मंदिरों की रक्षा के साथ-साथ अन्य धर्मों के अनुयायियों को भी पूर्ण सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की थी।
उत्तरवर्ती मराठों ने भी सामान्यतः इसी नीति का अनुसरण किया हालांकि कुछ स्थानों पर अनुशासनहीनता के उदाहरण भी देखने को मिले।
इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि शिवाजी ने सूरत पर आक्रमण के दौरान भी धार्मिक स्थलों को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं पहुँचाई थी।
मुख्य बिंदु:
• शिवाजी महाराज ने सभी धर्मों के प्रति समान आदर और सहिष्णुता दिखाई।
• सूरत अभियान के दौरान धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करना उनके उच्च नैतिक मूल्यों का प्रमाण है।
• उत्तरवर्ती मराठों ने भी धार्मिक सहिष्णुता की नीति को आगे बढ़ाया।
आम गलतियाँ:
• शिवाजी और उत्तरवर्ती मराठों की नीतियों में अंतर किए बिना दोनों को एक समान मान लेना।
• सूरत आक्रमण के ऐतिहासिक संदर्भ को गलत तरीके से प्रस्तुत करना।
Exam Tips:
a) 'धार्मिक सहिष्णुता' और 'समान आदर' जैसे शब्दों का सटीक उपयोग करें।
b) सूरत अभियान के उदाहरण से अपने उत्तर को प्रमाणित करें।
c) तुलनात्मक रूप से स्पष्ट करें कि दोनों का दृष्टिकोण कैसा था।
Question 7: इस अध्याय में वर्णित है कि मराठों के लिए दुर्ग ‘राज्य की आधारशिला’ थे। वे इतने महत्वपूर्ण क्यों थे? उन्होंने मराठों को शक्तिशाली शत्रुओं के विरुद्ध खड़े रहने में किस प्रकार सहायता की?
Answer:
मराठों के लिए दुर्ग उनकी सुरक्षा और सैन्य शक्ति के मुख्य आधार होने के कारण ‘राज्य की आधारशिला’ माने जाते थे।
शिवाजी महाराज ने ऊँचे पर्वतों और दुर्गम स्थलों पर अनेक सुदृढ़ किलों का निर्माण और नियंत्रण किया था जो शत्रुओं से बचाव के लिए सबसे सुरक्षित स्थान थे।
इन दुर्गों से मराठा सैनिक छिपकर रणनीतियाँ बनाते थे और गुरिल्ला युद्ध पद्धति से अचानक हमला करके वापस किलों में सुरक्षित लौट जाते थे।
इस प्रकार इन दुर्गों ने मराठों को मुगलों जैसी विशाल और शक्तिशाली ताकतों के विरुद्ध लंबे समय तक टिके रहने में सक्षम बनाया।
मुख्य बिंदु:
• दुर्ग प्राकृतिक और रणनीतिक रूप से सुरक्षित आश्रय स्थल थे।
• गुरिल्ला युद्ध नीति का सफल संचालन दुर्गों के बिना असंभव था।
• विशाल शत्रुओं के खिलाफ लंबे युद्ध लड़ने की क्षमता इन्हीं किलों से मिली।
आम गलतियाँ:
• किलों को केवल रहने का स्थान बताना, उनके सामरिक महत्व को न लिखना।
• गुरिल्ला युद्ध और दुर्गों के अंतर्संबंध को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) 'राज्य की आधारशिला' उद्धरण का सटीक संदर्भ दें।
b) पर्वतीय किलों की वास्तुकला और रक्षात्मक लाभों का वर्णन करें।
c) शत्रुओं के विरुद्ध लंबे संघर्ष में किलों की भूमिका को रेखांकित करें।
Question 8: मराठा काल के इस भूमिका अध्ययन करने के पश्चात आपके विचार में भारतीय इतिहास में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्या था? अध्याय से उदाहरण लेकर अपने विचार का समर्थन करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए।
Answer:
मेरे विचार में मराठों का भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण योगदान ‘स्वराज्य’ की स्थापना करना और विदेशी तथा आतंयी शक्तियों को खुली चुनौती देना था।
छत्रपति शिवाजी महाराज ने एक संगठित, सुदृढ़ और संप्रभु राज्य की नींव रखी जिसने मुगल जैसी विशाल सत्ता को कड़ी टक्कर दी।
मराठों ने अपनी सैन्य रणनीतियों, दुर्गों और नौसेना के प्रभावी उपयोग से दिल्ली सहित देश के बड़े भूभाग पर नियंत्रण स्थापित किया।
इस प्रकार मराठों ने भारतीयों के भीतर आत्मविश्वास और स्वतंत्र शासन की जिस भावना को जागृत किया, वह आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनी।
मुख्य बिंदु:
• 'स्वराज्य' की स्थापना करना उनका सबसे बड़ा राजनीतिक योगदान था।
• मुगलों जैसी बड़ी ताकतों का सफलतापूर्वक मुकाबला करना उनकी सैन्य क्षमता को दर्शाता है।
• भारतीयों में स्वाभिमान और स्वतंत्र शासन की अलख जगाना भविष्य के आंदोलनों की प्रेरणा बनी।
आम गलतियाँ:
• उत्तर को केवल युद्धों और विजयों तक सीमित रखना, वैचारिक और प्रेरणादायक पहलुओं को छोड़ देना।
• आधुनिक स्वतंत्रता संग्राम से मराठा काल के संबंधों को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) अपने उत्तर की शुरुआत 'स्वराज्य' शब्द से करें।
b) छत्रपति शिवाजी और मराठा सैन्य संगठन का संक्षेप में उल्लेख करें।
c) उत्तर को एक प्रभावी और विश्लेषणात्मक निष्कर्ष के साथ समाप्त करें।
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