NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 12 How Nature Works in Harmony (प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है) in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 8 Science: Chapter 12 प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है

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Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 12 प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है

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Question 1: दिए गए आरेख (चित्र 12.19) को देखिए और गलत कथन का चयन कीजिए। (i) समुदाय समष्टि से बड़ा होता है। (ii) समुदाय एक पारितंत्र से छोटा होता है। (iii) पारितंत्र किसी समुदाय का भाग होता है।

Answer:

दिए गए कथनों में से कथन (iii) गलत है।
पारितंत्र किसी समुदाय का भाग नहीं होता, बल्कि एक समुदाय और उसके अजैविक घटक मिलकर एक पारितंत्र का निर्माण करते हैं।
इस प्रकार, पारितंत्र समुदाय से बड़ा होता है और समुदाय पारितंत्र का एक भाग होता है।
समष्टि < समुदाय < पारितंत्र पारितंत्र का सही क्रम है।

मुख्य बिंदु:

• एक स्थान पर एक ही प्रकार के जीवों के समूह को समष्टि कहते हैं।
• कई समष्टियाँ मिलकर एक समुदाय बनाती हैं।
• जैविक समुदाय और अजैविक घटक मिलकर एक पारितंत्र बनाते हैं।

आम गलतियाँ:

• छात्रों को अक्सर समष्टि और समुदाय के बीच का अंतर समझ नहीं आता।
• पारितंत्र और समुदाय के आकार के क्रम को उल्टा समझ लेना।
• विकल्पों को बिना ध्यान से पढ़े उत्तर देना।

Exam Tips:

a) जैविक संगठन के स्तर (समष्टि, समुदाय, पारितंत्र) को क्रमानुसार याद रखें।
b) परीक्षा में सही और गलत कथन वाले प्रश्नों को बहुत सावधानी से पढ़ें।
c) अपने उत्तर के समर्थन में सही क्रम अवश्य लिखें।

 

Question 2: समष्टि किसी समुदाय का भाग होती है। यदि सभी अपघटक, अकस्मात एक वन पारितंत्र से लुप्त हो जाएँ तो आपके विचार से क्या परिवर्तन होंगे? व्याख्या कीजिए कि अपघटक आवश्यक क्यों होते हैं।

Answer:

यदि सभी अपघटक अचानक वन पारितंत्र से लुप्त हो जाएँ, तो निम्नलिखित परिवर्तन होंगे:
1. मृत पादप और जंतु विघटित नहीं होंगे, जिससे पूरे वन क्षेत्र में मृत जैविक पदार्थों और पत्तियों का ढेर लग जाएगा।
2. मृदा में पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण रुक जाएगा क्योंकि नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे आवश्यक तत्व पादपों को वापस नहीं मिलेंगे।
3. पोषक तत्वों की भारी कमी के कारण पादपों की वृद्धि रुक जाएगी और वे धीरे-धीरे मरने लगेंगे।
4. पादपों के नष्ट होने से शाकाहारी और अंततः माँसाहारी जंतुओं का भोजन समाप्त हो जाएगा, जिससे पूरी आहार श्रृंखला टूट जाएगी।
अपघटक इसलिए आवश्यक हैं क्योंकि वे जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदलते हैं और प्रकृति में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखते हैं।

मुख्य बिंदु:

• अपघटक (जैसे जीवाणु और कवक) मृत जीवों को सरल पदार्थों में बदलते हैं।
• ये प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में कार्य करते हैं।
• पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण केवल अपघटकों के माध्यम से संभव है।

आम गलतियाँ:

• केवल मृत जीवों के जमा होने की बात लिखकर पोषक चक्र के रुकने को भूल जाना।
• आहार श्रृंखला पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन न करना।
• अपघटकों के कार्य को केवल कचरा साफ करना समझना।

Exam Tips:

a) उत्तर को बिंदुओं में लिखें ताकि सभी प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दें।
b) 'पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण' जैसे वैज्ञानिक शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
c) पारितंत्र में संतुलन बनाए रखने में अपघटकों की भूमिका को विस्तार से समझाएं।

 

Question 3: तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के सेल्वम ने बताया कि उनका गाँव मैंग्रोव वनों की उपस्थिति के कारण 2004 की सुनामी से आस-पास के गाँवों की तुलना में कम प्रभावित हुआ था। इससे सरिता, शबनम और शिजो को आश्चर्य हुआ। वे सोच रही थीं कि क्या मैंग्रोव वन गाँव की सुरक्षा कर रहे थे। क्या आप इसे समझने में उनकी सहायता कर सकते हैं?

Answer:

हाँ, मैंग्रोव वन वास्तव में गाँव की सुरक्षा कर रहे थे।
मैंग्रोव वन समुद्र के तटीय क्षेत्रों में उगने वाले विशेष वन होते हैं जिनकी जड़ें बहुत घनी और मजबूत होती हैं।
ये घनी और उलझी हुई जड़ें एक प्राकृतिक अवरोधक या दीवार का कार्य करती हैं।
जब सुनामी की तेज लहरें तट की ओर बढ़ती हैं, तो मैंग्रोव वनों के पेड़ और उनकी जड़ें लहरों की गति और शक्ति को काफी हद तक कम कर देते हैं।
इसी कारण से जिन तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव वन थे, वहाँ सुनामी से कम नुकसान हुआ और जहाँ ये नहीं थे, वहाँ भारी तबाही हुई।

मुख्य बिंदु:

• मैंग्रोव वन तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं और इनकी जड़ें अत्यधिक मजबूत होती हैं।
• ये तीव्र वायु और समुद्री लहरों के वेग को मंद करते हैं।
• ये वन वायु से कार्बन डाइऑक्साइड भी अवशोषित करते हैं और पर्यावरण संतुलन बनाते हैं।

आम गलतियाँ:

• मैंग्रोव वनों को सामान्य वनों की तरह समझना।
• प्राकृतिक आपदाओं से बचाव में इनकी भूमिका को नजरअंदाज करना।
• सुनामी की लहरों की गति कम करने के वैज्ञानिक कारण को न लिखना।

Exam Tips:

a) तटीय सुरक्षा में मैंग्रोव वनों की भूमिका को एक प्राकृतिक दीवार के संदर्भ में समझाएं।
b) वास्तविक जीवन के उदाहरण (जैसे 2004 की सुनामी) का उल्लेख उत्तर में अवश्य करें।
c) वनों के अन्य लाभों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण का भी संक्षिप्त जिक्र करें।

 

Question 4: इस आहार श्रृंखला को देखें — घास → टिड्डा → मेंढक → साँप यदि इस पारितंत्र से मेंढक लुप्त हो जाएँ तो टिड्डों और साँपों की समष्टि पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्यों?

Answer:

इस पारितंत्र से मेंढक के लुप्त होने पर दोनों जीवों की समष्टि पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ेगा:
टिड्डों की समष्टि पर प्रभाव: टिड्डों की संख्या बहुत अधिक बढ़ जाएगी। इसका कारण यह है कि मेंढक टिड्डों का प्राकृतिक भक्षक होते हैं। मेंढकों के न होने पर टिड्डों को खाने वाला कोई नहीं रहेगा, जिससे उनकी संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ जाएगी और वे फसलों तथा घास को भारी नुकसान पहुँचाएंगे।
साँपों की समष्टि पर प्रभाव: साँपों की संख्या घटने लगेगी। इसका कारण यह है कि साँप मुख्य रूप से मेंढकों को अपना भोजन बनाते हैं। जब मेंढक ही नहीं बचेंगे, तो साँपों को भोजन नहीं मिलेगा और भुखमरी के कारण उनकी संख्या धीरे-धीरे कम होते-होते वे अंततः लुप्त हो सकते हैं।

मुख्य बिंदु:

• आहार श्रृंखला में एक जीव के घटने से पूरी श्रृंखला प्रभावित होती है।
• भक्षक और शिकार का संतुलन पारितंत्र को स्थिर रखता है।
• खाद्य उपलब्धता घटने से उच्च पोषण स्तर के जीव प्रभावित होते हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल एक तरफ़ा प्रभाव (या तो टिड्डे या साँप) लिखकर छोड़ देना।
• 'क्यों' का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट न करना।
• आहार श्रृंखला के क्रम को गलत समझना।

Exam Tips:

a) दोनों जीवों (टिड्डों और साँपों) के प्रभावों की अलग-अलग हेडिंग बनाकर उत्तर लिखें।
b) खाद्य जाल और आहार श्रृंखला के परस्पर संबंधों को स्पष्ट करें।
c) उत्तर में कारण ('क्यों') का स्पष्ट उल्लेख करना न भूलें।

 

Question 5: एक विद्यालय के उद्यान में विद्यार्थियों ने पिछले मौसम में अपेक्षाकृत कम तितलियाँ देखीं। इसके संभावित कारण क्या हो सकते हैं? परिसर में अधिक तितलियाँ लाने के लिए विद्यार्थी क्या कदम उठा सकते हैं?

Answer:

कम तितलियाँ दिखने के संभावित कारण:
1. उद्यान में फूल वाले पादपों की कमी होना, क्योंकि तितलियाँ मकरंद पीने के लिए फूलों पर आती हैं।
2. कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया जाना जिससे तितलियाँ नष्ट हो गई हों।
3. आवास का नष्ट होना या परभक्षी जीवों (जैसे पक्षी और मकड़ियाँ) की संख्या में वृद्धि होना।
परिसर में अधिक तितलियाँ लाने के उपाय:
1. उद्यान में गेंदा, गुलाब, चमेली और बोगनविलिया जैसे अधिक फूल वाले पौधे लगाए जाएँ।
2. कीटनाशकों का प्रयोग बंद करके प्राकृतिक पीड़क नियंत्रण के तरीके अपनाए जाएँ।
3. तितलियों के लिए नमी वाले स्थान और औषधीय पौधे (जैसे तुलसी और पुदीना) उगाए जाएँ।

मुख्य बिंदु:

• तितलियाँ परागण में सहायक होती हैं और फूलों से मकरंद प्राप्त करती हैं।
• रासायनिक कीटनाशक कीटों और तितलियों के लिए हानिकारक होते हैं।
• जैव विविधता बढ़ाने के लिए अनुकूल आवास जरूरी है।

आम गलतियाँ:

• केवल कारणों को लिखना और सुधार के उपायों को छोड़ देना।
• तितलियों के मुख्य भोजन (मकरंद) और फूलों के संबंध को न बताना।
• रासायनिक और जैविक नियंत्रण में अंतर न समझना।

Exam Tips:

a) प्रश्न के दोनों भागों (कारण और उपाय) के लिए अलग-अलग पैराग्राफ या बिंदु बनाएं।
b) व्यावहारिक और पर्यावरण-अनुकूल उपाय जैसे जैविक खाद और फूल वाले पौधे सुझाएं।
c) तितलियों के संरक्षण के महत्व को संक्षिप्त में दर्शाएं।

 

Question 6: ऐसा पारितंत्र क्यों संभव नहीं है जिसमें केवल उत्पादक हों और कोई उपभोक्ता या अपघटक न हों?

Answer:

ऐसा पारितंत्र संभव नहीं है, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. उपभोक्ताओं के बिना समस्या: यदि पारितंत्र में केवल उत्पादक (पादप) होंगे और उपभोक्ता नहीं होंगे, तो पादप लगातार बढ़ते जाएंगे। इससे जल, मृदा, सूर्य का प्रकाश और पोषक तत्वों के लिए अत्यधिक प्रतिस्पर्धा होगी, जिससे अंततः कमजोर पादप मरने लगेंगे।
2. अपघटकों के बिना समस्या: यदि अपघटक नहीं होंगे, तो मरे हुए पादपों और जीवों का विघटन नहीं होगा। परिणामस्वरूप, आवश्यक पोषक तत्व मृदा में वापस नहीं लौटेंगे, जिससे मृदा की उर्वरता समाप्त हो जाएगी और अंततः पूरा पारितंत्र नष्ट हो जाएगा।

मुख्य बिंदु:

• एक संतुलित पारितंत्र में उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक तीनों का होना अनिवार्य है।
• संसाधनों की सीमितता के कारण केवल उत्पादक अनिश्चितकाल तक जीवित नहीं रह सकते।
• पोषक चक्र को चलाने के लिए अपघटकों की उपस्थिति जरूरी है।

आम गलतियाँ:

• केवल उत्पादकों के बढ़ने की बात लिखना और अपघटकों की भूमिका को भूल जाना।
• पारितंत्र के संतुलन के मूल सिद्धांतों को नजरअंदाज करना।
• उत्तर को अपूर्ण छोड़ देना।

Exam Tips:

a) दोनों घटकों (उपभोक्ता और अपघटक) की अनुपस्थिति के परिणामों को अलग-अलग बिंदुओं में समझाएं।
b) 'पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण' और 'प्रतिस्पर्धा' शब्दों का उचित प्रयोग करें।
c) उत्तर को वैज्ञानिक तर्कों के साथ समाप्त करें।

 

Question 7: अपने घर या विद्यालय के समीप दो अलग-अलग स्थानों का अवलोकन कीजिए (जैसे एक उद्यान और सड़क के किनारे का कोई स्थल)। आपको दिखाई देने वाले सजीव एवं निर्जीव घटकों की सूची बनाइए। दोनों पारितंत्र किस प्रकार भिन्न हैं?

Answer:

उद्यान (पारितंत्र 1):
सजीव (जैविक घटक): गुलाब, गेंदा, तुलसी, घास, तितलियाँ, मधुमक्खियाँ, केंचुए, चींटियाँ, पक्षी, छिपकली।
निर्जीव (अजैविक घटक): मृदा, जल, सूर्य का प्रकाश, वायु, खाद।
सड़क का किनारा (पारितंत्र 2):
सजीव (जैविक घटक): खरपतवार, झाड़ियाँ, कीड़े-मकोड़े, चींटियाँ, कौवे।
निर्जीव (अजैविक घटक): पत्थर, कंक्रीट, धूल, मृदा, वायु, सूर्य का प्रकाश。
दोनों पारितंत्रों में अंतर: उद्यान में जैव विविधता अधिक होती है जबकि सड़क किनारे कम। उद्यान की मृदा उपजाऊ और नम होती है जबकि सड़क किनारे की मृदा कड़ी और सूखी होती है। उद्यान में पादपों और जंतुओं के बीच सक्रिय परस्पर क्रियाएँ होती हैं और प्रदूषण कम होता है, जबकि सड़क किनारे इसका विपरीत होता है।

मुख्य बिंदु:

• पारितंत्र जैविक और अजैविक घटकों से मिलकर बनता है।
• मानव-निर्मित या प्राकृतिक हस्तक्षेप से पारितंत्र की विविधता प्रभावित होती है।
• उद्यान एक संरक्षित और उपजाऊ पारितंत्र है जबकि सड़क का किनारा प्रतिकूल परिस्थितियों वाला स्थल है।

आम गलतियाँ:

• जैविक और अजैविक घटकों को आपस में मिला देना।
• दोनों पारितंत्रों के बीच तुलना करते समय केवल जीवों के नाम लिखना और पर्यावरण की स्थिति न बताना।
• सूची को अधूरा छोड़ देना।

Exam Tips:

a) वर्गीकरण स्पष्ट करने के लिए तालिका या अलग-अलग शीर्षकों का प्रयोग करें।
b) तुलनात्मक अंतर लिखते समय मृदा, जैव विविधता और प्रदूषण जैसे बिंदुओं को शामिल करें।
c) अपने आसपास के अवलोकन पर आधारित उत्तर को तार्किक ढंग से प्रस्तुत करें।

 

Question 8: कृषि क्षेत्र जैसे मानव निर्मित पारितंत्र आवश्यक हैं परंतु उन्हें संधारणीय बनाया जाना चाहिए। इस कथन पर टिप्पणी करें।

Answer:

कृषि पारितंत्र की आवश्यकता: बढ़ती हुई मानव जनसंख्या के लिए भोजन की आपूर्ति केवल कृषि के माध्यम से ही संभव है। खेत, मछली के तालाब और उद्यान हमें भोजन, रेशे और औषधियाँ प्रदान करते हैं, इसलिए यह आजीविका और जीवन का आधार हैं।
वर्तमान कृषि पद्धतियों से हानियाँ: संश्लेषित उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा की उर्वरता कम हो रही है, परागणकारी जीव नष्ट हो रहे हैं तथा भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है।
संधारणीय कृषि पद्धतियाँ: कृषि को संधारणीय बनाने के लिए जैविक खाद और कम्पोस्ट का उपयोग किया जाना चाहिए, फसल चक्र अपनाया जाना चाहिए, प्राकृतिक पीड़क नियंत्रण के तरीके काम में लाए जाने चाहिए और जल का विवेकपूर्ण उपयोग होना चाहिए।
निष्कर्ष: कृषि को आवश्यक बनाए रखते हुए उसे पर्यावरण के अनुकूल और संधारणीय बनाना हमारा कर्तव्य है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए मृदा और पर्यावरण सुरक्षित रह सकें।

मुख्य बिंदु:

• कृषि पारितंत्र मानव जीवन के लिए अनिवार्य हैं।
• रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है।
• संधारणीय कृषि (Sustainable Agriculture) भविष्य की आवश्यकता है।

आम गलतियाँ:

• केवल कृषि के लाभ बताना और उससे होने वाली हानियों को छोड़ देना।
• संधारणीय कृषि के उपाय (जैसे फसल चक्र, जैविक खाद) का उल्लेख न करना।
• निष्कर्ष के बिना उत्तर समाप्त करना।

Exam Tips:

a) उत्तर को तीन स्पष्ट भागों में बांटें: आवश्यकता, हानियाँ और संधारणीय उपाय।
b) 'संधारणीय' शब्द का अर्थ पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए दीर्घकालिक उपयोग के संदर्भ में समझाएं।
c) फसल चक्र और जैविक खेती जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को अवश्य शामिल करें।

 

Question 9: यदि किसी रोग के कारण भारतीय शशकों की समष्टि कम हो जाती है (चित्र 12.20) तो इसका अन्य जीवों की संख्या पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

Answer:

दी गई आहार श्रृंखला (सूर्य → घास और पादप → शशक, हिरण → लोमड़ी, उकाब) के अनुसार, यदि शशकों की समष्टि कम हो जाती है तो विभिन्न जीवों पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ेगा:
घास और पादपों पर: घास और पादपों की संख्या बढ़ जाएगी क्योंकि उन्हें खाने वाले मुख्य शाकाहारी जीव (शशक) कम हो गए हैं।
लोमड़ी पर: लोमड़ियों की संख्या घटेगी क्योंकि शशक उनके भोजन का एक प्रमुख स्रोत हैं। भोजन की कमी से लोमड़ियाँ कमजोर होंगी और उनकी संख्या में गिरावट आएगी।
उकाब पर: उकाब की संख्या भी घट सकती है क्योंकि वे शशकों का शिकार करते हैं। हालांकि, वे हिरण का भी शिकार कर सकते हैं, इसलिए उन पर प्रभाव थोड़ा कम होगा।
हिरण पर: हिरण पर प्रत्यक्ष प्रभाव कम होगा क्योंकि वे भी घास खाते हैं। परंतु लोमड़ी और उकाब जैसे परभक्षी शशकों के अभाव में हिरणों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जिससे हिरणों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है।

मुख्य बिंदु:

• एक जीव की संख्या में कमी का असर पूरी खाद्य श्रृंखला पर पड़ता है।
• शाकाहारी जीवों के घटने से उत्पादकों (घास) की वृद्धि होती है।
• मांसाहारी जीवों को वैकल्पिक भोजन स्रोत की तलाश करनी पड़ती है।

आम गलतियाँ:

• केवल एक जीव पर पड़ने वाले प्रभाव को लिखकर उत्तर पूरा मान लेना।
• आहार श्रृंखला के सभी स्तरों (उत्पादक, शाकाहारी, मांसाहारी) का विश्लेषण न करना।
• वैकल्पिक शिकार की संभावनाओं को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक जीव (घास, लोमड़ी, उकाब, हिरण) के लिए अलग-अलग बुलेट पॉइंट बनाकर उत्तर लिखें।
b) आहार श्रृंखला के प्रवाह का स्पष्ट रूप से पालन करते हुए तार्किक उत्तर दें।
c) अप्रत्यक्ष प्रभावों (जैसे उकाब द्वारा हिरण का शिकार) को भी उत्तर में शामिल करें।

 

Science Class 8 Curriculum Solutions: Chapter 12 प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है

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