Step-by-Step Textbook Solutions for Class 8 Science Chapter 11 आकाशीय परिघटनाएँ और काल-निर्धारण
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Question 1: बताइए कि नीचे दिए गए कथन सत्य हैं या असत्य — (i) हम चंद्रमा के केवल उस भाग को देख पाते हैं जो सूर्य के प्रकाश को हमारी ओर परावर्तित करता है। (ii) पृथ्वी की छाया सूर्य के प्रकाश को चंद्रमा तक नहीं पहुँचने देती और चंद्रमा की कलाओं का कारण बनती है। (iii) कालदर्शक विभिन्न खगोलीय चक्रों पर आधारित होते हैं जो निश्चित क्रम में बारंबार घटित होते हैं। (iv) चंद्रमा को केवल रात्रि के समय ही देखा जा सकता है।
Answer:
(i) सत्य — चंद्रमा स्वयं का प्रकाश नहीं उत्सर्जित करता है। वह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके चमकता है, इसलिए हम केवल उसी भाग को देख पाते हैं जो सूर्य का प्रकाश हमारी ओर परावर्तित करता है।
(ii) असत्य — यह एक भ्रांतिपूर्ण धारणा है। चंद्रमा की कलाओं का कारण पृथ्वी की छाया नहीं है, बल्कि यह चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा तथा सूर्य, चंद्रमा एवं पृथ्वी के सापेक्ष अभिविन्यास में परिवर्तन के कारण होता है। पृथ्वी की छाया से चंद्र-ग्रहण होता है, कलाएँ नहीं।
(iii) सत्य — कालदर्शक (कैलेंडर) प्रकृति में पाए जाने वाले आवर्ती खगोलीय चक्रों पर आधारित होते हैं, जैसे पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन, चंद्रमा की कलाओं का चक्र और पृथ्वी का सूर्य के परितः परिक्रमण।
(iv) असत्य — चंद्रमा को दिन के समय भी देखा जा सकता है। वर्धमान काल में इसे सूर्यास्त के बाद और क्षीयमाण काल में सूर्योदय से पहले देखा जा सकता है। कभी-कभी चंद्रोदय दोपहर के बाद होने के कारण दिन के उजाले में भी चंद्रमा दिखाई देता है।
मुख्य बिंदु:
• चंद्रमा सूर्य के परावर्तित प्रकाश से चमकता है।
• चंद्रमा की कलाओं का कारण सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की बदलती स्थितियाँ हैं।
• कालदर्शक खगोलीय चक्रों पर आधारित होते हैं।
• चंद्रमा को दिन में भी देखा जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• विद्यार्थियों को लगता है कि चंद्र ग्रहण और चंद्रमा की कलाएँ एक ही कारण से होती हैं।
• यह सोचना कि चंद्रमा केवल रात में ही आकाश में रहता है।
• कालदर्शकों के खगोलीय आधार को न समझना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक कथन के सत्य या असत्य होने का संक्षिप्त और सटीक वैज्ञानिक कारण दें।
b) चंद्र-ग्रहण और चंद्रमा की कलाओं के अंतर को स्पष्ट रूप से याद रखें।
c) परिभाषाओं को लिखते समय मुख्य शब्दों (जैसे परावर्तन, परिक्रमण) का प्रयोग करें।
Question 2: अमोल का जन्म 6 मई को पूर्णिमा के दिन हुआ था। क्या उसका जन्मदिन प्रतिवर्ष पूर्णिमा के दिन ही होता है? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
Answer:
नहीं, अमोल का जन्मदिन प्रतिवर्ष पूर्णिमा के दिन नहीं होगा।
इसका मुख्य कारण यह है कि ग्रेगोरी कालदर्शक एक सौर कालदर्शक है जो सूर्य के परितः पृथ्वी की परिक्रमा पर आधारित है, जिसमें एक वर्ष लगभग 365 दिन का होता है।
इसके विपरीत, चंद्रमा को अपनी सभी कलाओं के एक चक्र को पूरा करने में लगभग 29.5 दिन लगते हैं, जिससे एक चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन का होता है।
यह सौर वर्ष से लगभग 11 दिन कम होता है, इसलिए प्रत्येक वर्ष 6 मई को पूर्णिमा नहीं होती और पूर्णिमा की तिथि हर साल बदलती रहती है।
मुख्य बिंदु:
• ग्रेगोरी कैलेंडर सौर वर्ष (365 दिन) पर आधारित है।
• चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन का होता है।
• सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में लगभग 11 दिनों का अंतर होता है।
• पूर्णिमा की तिथि हर साल ग्रेगोरी कैलेंडर में बदलती है।
आम गलतियाँ:
• चंद्र मास और सौर मास के अंतर को नजरअंदाज करना।
• यह मान लेना कि तिथियाँ और चंद्र कलाएँ हर साल एक ही दिन रिपीट होती हैं।
• सौर और चंद्र वर्ष की अवधि गलत बताना।
Exam Tips:
a) उत्तर में सौर वर्ष और चंद्र वर्ष की अवधि (दिनों की संख्या) का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) 11 दिन के अंतर के कारण को समझाते हुए उत्तर पूरा करें।
c) ग्रेगोरी कैलेंडर की प्रकृति को स्पष्ट करें।
Question 3: ऐसी दो बातें बताइए जो चित्र 11.10 में सही नहीं दर्शाई गई हैं।
Answer:
चित्र 11.10 में एक काले रंग का चंद्रमा तारों से भरे आकाश में दिखाया गया है, जिसमें निम्नलिखित दो मुख्य गलतियाँ हैं:
गलती 1: चित्र में चंद्रमा पूरी तरह काला (अदीप्त) दिखाया गया है जो अमावस्या को दर्शाता है, परंतु अमावस्या के दिन चंद्रमा सूर्य की दिशा में और दिन के समय आकाश में होता है, वह रात में इस प्रकार तारों के बीच दिखाई नहीं देता।
गलती 2: अमावस्या के दिन चंद्रमा का अदीप्त भाग पृथ्वी की ओर होता है जिससे वह बिल्कुल दिखाई नहीं देता, अतः उसे रात्रि के आकाश में एक काले वृत्त के रूप में दिखाना भ्रामक और वैज्ञानिक रूप से गलत है।
मुख्य बिंदु:
• अमावस्या का चंद्रमा दिन के समय सूर्य के पास होता है।
• अमावस्या की रात को चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता।
• चंद्रमा को रात में काले गोल घेरे के रूप में चित्रित करना गलत है।
• खगोलीय स्थितियों का सही ज्ञान होना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• अमावस्या के समय चंद्रमा की स्थिति (दिन या रात) को गलत समझना।
• अदीप्त चंद्रमा को रात्रि के आकाश में एक वस्तु के रूप में मान लेना।
• चित्रों के वैज्ञानिक दोषों को पहचानने में गलती करना।
Exam Tips:
a) चित्र आधारित प्रश्नों में दृश्यता और खगोलीय स्थिति दोनों का ध्यान रखें।
b) दोनों गलतियों को बिंदुओं में स्पष्ट रूप से लिखें।
c) अमावस्या के दिन चंद्रमा की स्थिति (दिन में आकाश में होना) को विशेष रूप से बताएं।
Question 4: चित्र 11.11 में दर्शाई गई चंद्रमा की कलाओं के चित्रों को देखिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए — (i) उपर्युक्त चित्र में दर्शाई गई चंद्रमा की कलाओं के संगत सही नामाक्षर लिखिए। (ii) चित्र में दर्शाई गई चंद्रमा की उन कलाओं के नामाक्षर लिखिए जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देती।
Answer:
(i) चित्र के अनुसार चंद्रमा की कलाओं के सही नामाक्षर निम्नलिखित हैं:
• प : अमावस्या के तीन दिन पश्चात (बालचंद्र — वर्धमान)
• त : पूर्णिमा
• थ : पूर्णिमा के तीन दिन पश्चात (अर्धाधिक कला — क्षीयमाण)
• द : पूर्णिमा के एक सप्ताह पश्चात (अर्धवृत्त — क्षीयमाण)
• न : अमावस्या के दिन
(ii) नामाक्षर 'न' (अमावस्या) वाली कला पृथ्वी से दिखाई नहीं देती क्योंकि अमावस्या के दिन चंद्रमा का केवल अदीप्त भाग पृथ्वी की ओर होता है, जिससे उसका दीप्त भाग हमारी दृष्टि से ओझल रहता है।
मुख्य बिंदु:
• चंद्रमा की कलाओं के अलग-अलग नाम और उनके चित्र होते हैं।
• अमावस्या के दिन चंद्रमा का दीप्त भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता।
• बालचंद्र, पूर्णिमा, अर्धाधिक और अर्धवृत्त चंद्रमा की प्रमुख अवस्थाएँ हैं।
• नामाક્ષर चित्रों की सही पहचान करना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• वर्धमान और क्षीयमाण कलाओं के नामाक्षर में भ्रमित होना।
• अमावस्या और पूर्णिमा की सही स्थिति न पहचान पाना।
• अदीप्त भाग की उपस्थिति को न समझ पाना।
Exam Tips:
a) चित्रों के साथ दिए गए अक्षरों का मिलान बहुत सावधानी से करें।
b) प्रत्येक कला का नाम (जैसे बालचंद्र, अर्धाधिक) सही से लिखें।
c) कौन सी कला दिखाई नहीं देती, इसका कारण भी साथ में स्पष्ट करें।
Question 5: मालिनी ने सूर्यास्त के समय चंद्रमा को ठीक अपने सिर के ऊपर देखा — (i) मालिनी द्वारा प्रेक्षित चंद्रमा की कला का चित्र बनाइए। (ii) क्या यह चंद्रमा का वर्धमान काल है या क्षीयमाण काल है?
Answer:
(i) मालिनी द्वारा प्रेक्षित चंद्रमा की कला अर्धवृत्त (प्रथम चतुर्थांश) के आकार की होगी, जो सूर्यास्त के समय आकाश के ठीक मध्य (सिर के ऊपर) दिखाई देती है।
(ii) यह चंद्रमा का वर्धमान काल (शुक्ल पक्ष) है। वर्धमान चंद्रमा को सूर्यास्त के समय देखना सर्वाधिक सुविधाजनक होता है। जब सूर्यास्त के समय चंद्रमा ठीक सिर के ऊपर (आकाश के मध्य में) हो तो यह वर्धमान काल का लगभग सप्तमी (सातवें दिन) का चंद्रमा होता है।
मुख्य बिंदु:
• सूर्यास्त के समय सिर के ऊपर दिखने वाला चंद्रमा शुक्ल पक्ष (वर्धमान) का होता है।
• यह स्थिति लगभग सप्तमी (सातवें दिन) की होती है।
• वर्धमान चंद्रमा को शाम के समय देखना आसान होता है।
• इस स्थिति में चंद्रमा आधा चमकता हुआ दिखाई देता है।
आम गलतियाँ:
• वर्धमान और क्षीयमाण पक्ष में अंतर न कर पाना।
• समय और चंद्रमा की स्थिति के संबंध को गलत समझना।
• सप्तमी के चंद्रमा की स्थिति को पूर्णिमा मान लेना।
Exam Tips:
a) शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के समय और स्थिति को अच्छे से याद रखें।
b) सप्तमी के चंद्रमा की स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) वर्धमान काल की विशेषता का उल्लेख जरूर करें।
Question 6: रवि ने कहा, “मैंने एक बालचंद्र देखा और जब सूर्य अस्त हो रहा था तो यह पूर्व में उदित हो रहा था।” कौशल्या ने कहा, “एक बार मैंने दोपहर के समय पूर्व दिशा में अर्धाधिक चंद्र देखा था।” दोनों में से किसकी बात सत्य है?
Answer:
कौशल्या की बात सत्य है।
रवि की बात गलत क्यों है — बालचंद्र अमावस्या के कुछ दिन बाद वर्धमान काल में दिखाई देता है और यह सूर्य के बहुत समीप होता है। जब सूर्य पश्चिम में अस्त होता है, तो बालचंद्र भी पश्चिम दिशा में ही सूर्य के पास दिखाई देता है, पूर्व में नहीं।
कौशल्या की बात सही क्यों है — अर्धाधिक (Gibbous) चंद्रमा अमावस्या के लगभग 18–22 दिन बाद क्षीयमाण काल में होता है। इस समय चंद्रोदय दोपहर के बाद (लगभग 2:00 से 4:00 बजे अपराह्न) पूर्व दिशा में होता है, इसलिए दोपहर के समय पूर्व दिशा में अर्धाधिक चंद्रमा देखा जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
• बालचंद्र हमेशा सूर्यास्त के समय पश्चिम दिशा में सूर्य के पास दिखता है।
• अर्धाधिक चंद्रमा क्षीयमाण काल में दोपहर के बाद पूर्व दिशा में उगता है।
• रवि का कथन खगोलीय स्थिति के विपरीत है।
• कौशल्या का कथन वैज्ञानिक रूप से सही है।
आम गलतियाँ:
• चंद्रमा के उगने के समय और दिशा में भ्रम होना।
• वर्धमान और क्षीयमाण चंद्रमा की आकाश में स्थिति न जानना।
• बिना सोचे दोनों कथनों को सही मान लेना।
Exam Tips:
a) दोनों कथनों की अलग-अलग जाँच करके कारण सहित बताएं कि कौन सही है।
b) बालचंद्र और अर्धाधिक चंद्रमा के उगने का समय और दिशा याद रखें।
c) उत्तर लिखते समय रवि और कौशल्या दोनों के तर्कों का खंडन/मंडन करें।
Question 7: वैज्ञानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि चंद्रमा पृथ्वी से दूर हट रहा है और इसकी परिक्रमण गति कम हो रही है। इससे चंद्र-सौर कालदर्शक में प्रायः अंतर्वेशी मास बढ़ाने की आवश्यकता होगी या घटाने की आवश्यकता होगी?
Answer:
अंतर्वेशी मास बढ़ाने की आवश्यकता होगी।
कारण — यदि चंद्रमा की परिक्रमण गति कम हो रही है, तो चंद्रमा को एक परिक्रमा पूरी करने में अधिक समय लगेगा, जिससे एक चंद्र माह की अवधि बढ़ जाएगी।
यदि चंद्र माह की अवधि बढ़ती है, तो एक चंद्र वर्ष में कम महीने आएंगे और सौर वर्ष तथा चंद्र वर्ष के बीच का अंतर और अधिक बढ़ जाएगा।
इस अंतर को सुधारने और समंजित करने के लिए चंद्र-सौर कालदर्शक में अधिक बार अंतर्वेशी मास (अधिक-मास) जोड़ने की आवश्यकता होगी।
मुख्य बिंदु:
• चंद्रमा की गति घटने से चंद्र माह की अवधि बढ़ जाती है।
• चंद्र वर्ष और सौर वर्ष का अंतर बढ़ जाता है।
• अंतर को संतुलित करने के लिए अंतर्वेशी मास (अधिक मास) जोड़ा जाता है।
• खगोलीय गतियों का कैलेंडरों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
आम गलतियाँ:
• गति कम होने पर समय घटने का भ्रम होना।
• अंतर्वेशी मास की आवश्यकता को उल्टा समझ लेना।
• चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के संतुलन को न समझ पाना।
Exam Tips:
a) प्रश्न में दिए गए प्रभावों (गति कम होना, समय बढ़ना) को क्रमबद्ध लिखें।
b) अंतर्वेशी मास बढ़ाने या घटाने का कारण स्पष्ट करें।
c) वैज्ञानिक तर्कों का प्रयोग करते हुए सटीक उत्तर दें।
Question 8: किसी सौर कालदर्शक में 3 वर्ष की अवधि में कुल 37 पूर्णिमाएँ आती हैं। दर्शाइए कि इन 37 पूर्णिमाओं में से कम से कम दो पूर्णिमाएँ सौर कालदर्शक के एक ही महीने में आएँगी।
Answer:
हम जानते हैं कि:
3 सौर वर्षों में कुल महीने = \( 3 \times 12 = 36 \) महीने
इन 3 वर्षों में कुल पूर्णिमाएँ दी गई हैं = 37
कबूतर-खाना सिद्धांत (Pigeonhole Principle) के अनुसार, यदि प्रत्येक महीने में केवल एक ही पूर्णिमा आए, तो 36 महीनों में अधिकतम 36 पूर्णिमाएँ ही हो सकती हैं।
परंतु प्रश्न में कुल 37 पूर्णिमाएँ दी गई हैं, जो 36 से अधिक हैं। अतः इस सिद्धांत के अनुसार कम से कम एक महीने में दो पूर्णिमाएँ आनी ही चाहिए।
यह स्थिति तब बनती है जब किसी महीने की शुरुआत (पहली या दूसरी तारीख) को पूर्णिमा हो और उसी महीने के अंत (29वें या 30वें दिन) में फिर से पूर्णिमा हो, और ऐसी दूसरी पूर्णिमा को 'ब्लू मून' (Blue Moon) भी कहा जाता है।
मुख्य बिंदु:
• 3 वर्षों में कुल 36 महीने होते हैं।
• पूर्णिमाओं की कुल संख्या 36 से अधिक (यानी 37) है।
• कबूतर-खाना सिद्धांत (Pigeonhole Principle) का प्रयोग किया जाता है।
• एक ही महीने में दो पूर्णिमा आने पर दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं।
आम गलतियाँ:
• महीनों की कुल संख्या की गणना में गलती करना।
• कबूतर-खाना सिद्धांत को न समझ पाना।
• ब्लू मून की स्थिति को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) गणितीय गणना (\( 3 \times 12 = 36 \)) को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
b) कबूतर-खाना सिद्धांत का उल्लेख अवश्य करें।
c) ब्लू मून की संकल्पना को संक्षिप्त में समझाएं।
Question 9: किसी विशेष रात्रि में वैशाली ने आकाश में चंद्रमा का सूर्यास्त से सूर्योदय तक अवलोकन किया। उसने चंद्रमा की किस कला का अवलोकन किया होगा?
Answer:
वैशाली ने पूर्ण चंद्र (पूर्णिमा) का अवलोकन किया होगा।
कारण — पूर्णिमा के दिन चंद्रमा सूर्य के लगभग विपरीत दिशा में होता है। जब सूर्य पश्चिम में अस्त होता है, तो पूर्ण चंद्रमा पूर्व दिशा में उदित होता है और पूरी रात आकाश में रहता है।
सूर्योदय के समय जब सूर्य पूर्व में उगता है, तब पूर्ण चंद्रमा पश्चिम में अस्त होता है।
इसलिए, जो व्यक्ति सूर्यास्त से सूर्योदय तक पूरी रात चंद्रमा देख सकता है, वह केवल पूर्णिमा के दिन ही ऐसा देख सकता है।
मुख्य बिंदु:
• पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूरी रात आकाश में रहता है।
• इस दिन चंद्रमा सूर्य के विपरीत दिशा में स्थित होता है।
• सूर्यास्त पर चंद्रोदय पूर्व में और सूर्योदय पर चंद्रास्त पश्चिम में होता है।
• अन्य कलाओं में चंद्रमा पूरी रात दिखाई नहीं देता।
आम गलतियाँ:
• किसी भी रात चंद्रमा के पूरी रात दिखने की संभावना मान लेना।
• सूर्य और चंद्रमा की आपेक्षिक स्थितियों को न समझना।
• पूर्णिमा के अलावा अन्य कलाओं को रात भर दिखने वाला समझ लेना।
Exam Tips:
a) पूर्ण चंद्र (पूर्णिमा) का स्पष्ट रूप से नाम लिखें।
b) सूर्यास्त से सूर्योदय तक चंद्रमा के रहने का खगोलीय कारण बताएं।
c) सूर्य और चंद्रमा की विपरीत स्थितियों का वर्णन करें।
Question 10: यदि हम अधिवर्षों (लीप वर्ष) को गणना में लेना बंद कर दें तो लगभग कितने वर्षों के पश्चात भारत का स्वतंत्रता दिवस शीत ऋतु में पड़ेगा?
Answer:
भारत का स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को आता है जो कि वर्षा ऋतु/गर्मी का अंत है। भारत में शीत ऋतु लगभग दिसंबर से फरवरी के बीच होती है।
15 अगस्त से 15 दिसंबर (शीत ऋतु की शुरुआत) के बीच लगभग 4 महीने यानी 120 दिन का अंतर है।
यदि अधिवर्ष न हो तो प्रत्येक 4 वर्षों में 1 दिन पीछे रह जाता है, अर्थात प्रत्येक वर्ष लगभग \( 1/4 = 0.25 \) दिन पीछे खिसकता है।
120 दिन पीछे खिसकने में लगने वाला समय:
\( = 120 \div 0.25 \)
\( = 480 \) वर्ष
अतः लगभग 480 वर्षों के पश्चात भारत का स्वतंत्रता दिवस शीत ऋतु में पड़ने लगेगा।
मुख्य बिंदु:
• 15 अगस्त और शीत ऋतु की शुरुआत के बीच का समय अंतराल लगभग 120 दिन है।
• बिना लीप वर्ष के हर साल कैलेंडर 0.25 दिन पीछे खिसकता है।
• कुल वर्षों की गणना के लिए कुल दिनों में 0.25 से भाग दिया जाता है।
• लगभग 480 वर्ष उत्तर आता है।
आम गलतियाँ:
• 0.25 दिन के खिसकाव को सही से कैलकुलेट न करना।
• ऋतुओं के महीनों का गलत अनुमान लगाना।
• भाग की प्रक्रिया में गलती करना।
Exam Tips:
a) चरणों में गणना दिखाएँ — पहले दिनों का अंतर निकालें, फिर वार्षिक खिसकाव निकालें।
b) अंतिम उत्तर निकालते समय इकाई (वर्ष) का विशेष ध्यान रखें।
c) लीप वर्ष के महत्व को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 11: कृत्रिम उपग्रहों के प्रमोचन का उद्देश्य क्या होता है?
Answer:
कृत्रिम उपग्रहों के प्रमोचन के निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्य होते हैं:
1. संचार (Communication) — दूरदराज के क्षेत्रों में टेलीफोन, इंटरनेट और टेलीविजन सेवाएँ पहुँचाना।
2. यान संचालन (Navigation) — GPS जैसी प्रणालियों द्वारा सटीक स्थान और दिशा की जानकारी देना।
3. मौसम-अनुवीक्षण (Weather Monitoring) — मौसम का पूर्वानुमान लगाना और चक्रवात जैसी आपदाओं की पूर्व सूचना देना।
4. आपदा प्रबंधन (Disaster Management) — बाढ़, भूकंप आदि प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्यों में सहायता करना।
5. वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research) — तारों, ग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों का अध्ययन करना (जैसे इसरो का एस्ट्रोसैट)।
6. पृथ्वी का मानचित्रण — पृथ्वी की उच्च गुणवत्ता की छवियाँ लेकर नगर नियोजन और प्राकृतिक आपदा प्रबंधन में सहायता करना (जैसे कार्टोसैट)।
7. अंतरिक्ष अन्वेषण — चंद्रमा (चंद्रयान), सूर्य (आदित्य एल-1) और मंगल (मंगलयान) का अध्ययन करना।
मुख्य बिंदु:
• कृत्रिम उपग्रह मानव जीवन और विज्ञान के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
• संचार और नेविगेशन रोजमर्रा के उपयोग में आते हैं।
• मौसम और आपदा प्रबंधन से जान-माल की रक्षा होती है।
• अंतरिक्ष अनुसंधान और मानचित्रण में उपग्रह मदद करते हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल एक या दो उद्देश्यों को लिखकर उत्तर अधूरा छोड़ देना।
• संचार और नेविगेशन के कार्यों में अंतर न समझ पाना।
• इसरो के उपग्रहों के विशिष्ट उदाहरण न देना।
Exam Tips:
a) उपदेशों को बिंदुओं (Points) में स्पष्ट रूप से लिखें।
b) प्रत्येक बिंदु के साथ संक्षिप्त उदाहरण भी दें।
c) कम से कम 4-5 मुख्य उद्देश्य परीक्षा में जरूर लिखें।
Question 12: समय के निम्नलिखित माप किन आवर्ती परिघटनाओं पर आधारित हैं — (i) दिवस (ii) मास (iii) वर्ष
Answer:
(i) दिवस (दिन) — यह पृथ्वी के अपने अक्ष के परितः घूर्णन पर आधारित है। पृथ्वी अपने अक्ष पर एक चक्कर लगाने में लगभग 24 घंटे का समय लेती है। सूर्य को आकाश में अपनी उच्चतम स्थिति से अगले दिन पुनः उच्चतम स्थिति तक पहुँचने में लगने वाले औसत समय को माध्य सौर दिन कहते हैं और यही 24 घंटे का एक दिन है।
(ii) मास (महीना) — यह चंद्रमा की कलाओं के चक्र पर आधारित है। चंद्रमा को अपनी सभी कलाओं (अमावस्या से पूर्णिमा और वापस अमावस्या) का एक पूरा चक्र पूरा करने में लगभग 29.5 दिन लगते हैं, यही एक चंद्र मास की अवधि है।
(iii) वर्ष — यह पृथ्वी द्वारा सूर्य के परितः परिक्रमण पर आधारित है। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा लगभग 365 दिन और 6 घंटे में पूरी करती है, और इस अवधि में ऋतुओं का एक पूरा चक्र पूरा होता है, जिसे सौर वर्ष कहते हैं।
मुख्य बिंदु:
• दिवस पृथ्वी के घूर्णन पर आधारित है (लगभग 24 घंटे)।
• मास चंद्रमा की कलाओं के चक्र पर आधारित है (लगभग 29.5 दिन)।
• वर्ष पृथ्वी के सूर्य के परितः परिक्रमण पर आधारित है (लगभग 365¼ दिन)।
• ये तीनों समय माप प्राकृतिक आवर्ती घटनाओं से जुड़े हैं।
आम गलतियाँ:
• दिवस और वर्ष के आधार में भ्रमित होना (घूर्णन और परिक्रमण को आपस में मिला देना)।
• मास की अवधि गलत बताना।
• प्रत्येक माप के वैज्ञानिक कारण को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
प्रत्येक माप (दिवस, मास, वर्ष) की परिभाषा और उसकी खगोलीय घटना को अलग-अलग हेडिंग या बिंदुओं में लिखें।
घूर्णन (Rotation) और परिक्रमण (Revolution) के अंतर को सही से समझकर लिखें।
समय की सटीक अवधि (जैसे 24 घंटे, 29.5 दिन, 365 दिन) का उल्लेख अवश्य करें।
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