NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 13 Our Home Earth a Unique Life Sustaining Planet (हमारा आवास पृथ्वी एक अद्वितीय जीवनदायी ग्रह) in Hindi

NCERT Solutions for Class 8 Science: Chapter 13 हमारा आवास पृथ्वी एक अद्वितीय जीवनदायी ग्रह

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Question 1: ऐसा कौन-सा प्रमुख कारण है जिससे वर्तमान में मंगल ग्रह पर पृथ्वी के समान जीवन संभव नहीं है? (i) इस पर अनेक ज्वालामुखी हैं। (ii) यह सूर्य के अधिक निकट है। (iii) इस पर सघन वायुमंडल और द्रव जल का अभाव है। (iv) इसका चुंबकीय क्षेत्र अत्यंत प्रबल है।

Answer:

(iii) इस पर सघन वायुमंडल और द्रव जल का अभाव है।
मंगल ग्रह का वायुमंडल पृथ्वी की तुलना में 100 गुना कम सघन है और वहाँ द्रव अवस्था में जल नहीं पाया जाता है। जीवन के लिए द्रव जल और उचित वायुमंडल दोनों आवश्यक हैं।

मुख्य बिंदु:

• मंगल ग्रह पर द्रव जल और सघन वायुमंडल का अभाव है।
• इसका वायुमंडल पृथ्वी से बहुत अधिक पतला है।
• यह सूर्य के ‘वासयोग्य क्षेत्र’ के सीमांत पर स्थित है।

आम गलतियाँ:

• केवल ज्वालामुखियों की उपस्थिति को मुख्य कारण मान लेना।
• सूर्य से दूरी के प्रभाव को गलत समझना।
• वायुमंडल और जल की महत्ता को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी कारकों (जल और वायु) को याद रखें।
c) कारण स्पष्ट करते समय सही वैज्ञानिक शब्दावली का प्रयोग करें।

 

Question 2: इनमें से कौन-सा भूविविधता का उदाहरण है? (i) जंगल में विविध पक्षियों की चहचहाहट। (ii) विभिन्न भू-आकृतियाँ, जैसे — पहाड़, घाटियाँ और मरुस्थल। (iii) मानसून के समय मौसम में परिवर्तन। (iv) तालाब में विभिन्न प्रकार की मछलियाँ।

Answer:

(ii) विभिन्न भू-आकृतियाँ, जैसे — पहाड़, घाटियाँ और मरुस्थल।
भूविविधता का अर्थ पृथ्वी पर मौजूद विभिन्न प्रकार की भू-आकृतियों, चट्टानों, मृदा और उन्हें आकार देने वाले प्रक्रमों से है। पहाड़, घाटियाँ और मरुस्थल इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

मुख्य बिंदु:

• भूविविधता पृथ्वी की सतह की विविधता को दर्शाती है।
• इसमें पहाड़, पठार, मैदान और मरुस्थल शामिल हैं।
• यह अद्वितीय पर्यावासों के सर्जन में सहायता करती है।

आम गलतियाँ:

• जैव विविधता और भूविविधता में भ्रमित होना।
• मौसम में परिवर्तन को भूविविधता मानना।

Exam Tips:

a) 'भूविविधता' शब्द के अर्थ को समझकर उत्तर दें।
b) जैव विविधता (जीवों की विविधता) और भूविविधता (धरातल की विविधता) का अंतर स्पष्ट रखें।
c) सटीक विकल्प का चयन करें।

 

Question 3: यदि पृथ्वी अत्यधिक छोटी होती और उसका घनत्व समान होता तो उसके वायुमंडल का क्या होता? (i) यह अधिक सघन और गरम हो जाता। (ii) दुर्बल गुरुत्व के कारण यह अंतरिक्ष में चला जाता। (iii) यह जम जाता। (iv) इससे प्रबल पवन चलने लगती।

Answer:

(ii) दुर्बल गुरुत्व के कारण यह अंतरिक्ष में चला जाता।
यदि पृथ्वी आकार में बहुत छोटी होती, तो उसका गुरुत्वाकर्षण बल इतना कमजोर होता कि वह वायुमंडल की गैसों को रोक नहीं पाती और गैसें अंतरिक्ष में पलायन कर जातीं।

मुख्य बिंदु:

• छोटे ग्रहों पर गुरुत्वाकर्षण बल कमजोर होता है।
• गुरुत्वाकर्षण वायुमंडल को थामकर रखता है।
• बुध ग्रह इसका एक उदाहरण है जहाँ वायुमंडल नहीं है।

आम गलतियाँ:

• गुरुत्वाकर्षण और वायुमंडल के संबंध को न समझना।
• तापमान में वृद्धि के भ्रम में पहला विकल्प चुन लेना।

Exam Tips:

a) गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को ध्यान में रखें।
b) आकार और गुरुत्वाकर्षण के सीधे संबंध को समझें।
c) कारण सहित उत्तर का अभ्यास करें।

 

Question 4: लैंगिक जनन में संतति अपने माता-पिता से भिन्न क्यों होती हैं? (i) उनकी वृद्धि विभिन्न जलवायु में होती है। (ii) वह विभिन्न प्रकार का भोजन ग्रहण करते हैं। (iii) वह जन्म के पश्चात नए आनुवंशिक अनुदेश प्राप्त करते हैं। (iv) वह माता-पिता दोनों से मिश्रित अनुदेश (जीन) प्राप्त करते हैं।

Answer:

(iv) वह माता-पिता दोनों से मिश्रित अनुदेश (जीन) प्राप्त करते हैं।
लैंगिक जनन में माता और पिता दोनों के युग्मकों (शुक्राणु और अंडाणु) का संलयन होता है, जिनमें आनुवंशिक पदार्थ का आधा-आधा भाग होता है। इनके मिलने से बनी संतति में नए संयोजन बनते हैं, जिससे प्रत्येक संतति अद्वितीय होती है।

मुख्य बिंदु:

• इसमें दो जनकों की आवश्यकता होती है।
• माता और पिता दोनों के जीन मिलते हैं।
• आनुवंशिक संयोजनों की विविधता के कारण भिन्नता आती है।

आम गलतियाँ:

• जलवायु या भोजन को आनुवंशिक भिन्नता का कारण समझना।
• युग्मकों की भूमिका को भूल जाना।

Exam Tips:

a) आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों का अंतर समझें।
b) लैंगिक जनन की मूल प्रक्रिया को याद रखें।
c) 'युग्मक' और 'जीन' शब्दों का सही प्रयोग करें।

 

Question 5: आपने मानसून के पश्चात अपने विद्यालय की दीवार की दरारों में छोटे-छोटे हरे पौधे उगते देखे होंगे। आपके अनुसार ये बीज कहाँ से आए? किन परिस्थितियों ने इन पौधों को वहाँ उगने में सहायता की होगी?

Answer:

बीज आने के स्रोत:
• पक्षियों द्वारा फल खाने के बाद उनकी बीट के माध्यम से दीवार की दरारों में गिरे हो सकते हैं।
• वायु द्वारा हल्के बीज उड़कर दरारों में जमा हो गए होंगे।
• वर्षा के जल के साथ बहकर बीज दरारों में पहुँचे होंगे।
• कीड़े-मकोड़े और चींटियाँ भी बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती हैं।
पौधों को उगने में सहायता करने वाली परिस्थितियाँ:
• मानसून के कारण पर्याप्त जल मिला जो अंकुरण के लिए आवश्यक है।
• दरारों में जमा धूल और मृदा के कणों से पोषक तत्व मिले।
• प्रकाश संश्लेषण के लिए सूर्य का प्रकाश उपलब्ध था।
• मानसून के बाद का तापमान अंकुरण के अनुकूल था।

मुख्य बिंदु:

• बीजों के प्रकीर्णन के विभिन्न माध्यम (वायु, पक्षी, जल)।
• बीज अंकुरण के लिए आवश्यक कारक (जल, वायु, तापमान)।
• दरारों में मिट्टी और नमी का संचय।

आम गलतियाँ:

• केवल एक ही माध्यम को बीज पहुँचने का कारण बताना।
• अंकुरण के लिए आवश्यक परिस्थितियों का पूरा उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर को दो स्पष्ट भागों (बीज कैसे आए और परिस्थितियाँ) में लिखें।
b) प्राकृतिक प्रकीर्णन विधियों के नाम लिखें।
c) अंकुरण की प्राथमिक आवश्यकताओं को स्पष्ट करें।

 

Question 6: कुछ समय पूर्व ही एक शहर में नई सड़कें और भवन बनाने के लिए जंगल का एक बड़ा भाग काट दिया गया। यह स्थानीय जलवायु एवं जैव विविधता को किस प्रकार प्रभावित करेगा? इससे स्थानीय क्षेत्र में जल की उपलब्धता अथवा गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

Answer:

स्थानीय जलवायु पर प्रभाव:
• वृक्षों की कटाई से वाष्पोत्सर्जन कम होगा जिससे वर्षा में कमी आएगी।
• छाया और ठंडक देने वाले पेड़ों के हटने से तापमान में वृद्धि होगी।
• वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) बढ़ने से हरितगृह प्रभाव तेज होगा।
जैव विविधता पर प्रभाव:
• जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास नष्ट होने से वे पलायन करने पर मजबूर होंगे।
• आहार श्रृंखला टूटने से कई प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं।
जल की उपलब्धता और गुणवत्ता पर प्रभाव:
• पेड़ों की जड़ें वर्षा जल को भूमिगत करने में मदद करती हैं, जिनके न होने से भूजल स्तर घटेगा।
• मृदा अपरदन बढ़ने से नदियों और तालाबों का जल सिल्ट (मिट्टी) से भर जाएगा।
• निर्माण कार्यों के रासायनिक पदार्थ जल को प्रदूषित कर सकते हैं।

मुख्य बिंदु:

• वनों की कटाई के दूरगामी पर्यावरणीय परिणाम।
• जलवायु, जैव विविधता और जल चक्र का आपस में संबंध।
• भूजल स्तर और मृदा अपरदन पर प्रभाव।

आम गलतियाँ:

• केवल तापमान वृद्धि का उल्लेख करना और जल चक्र व जैव विविधता को छोड़ देना।
• कारणों को स्पष्ट रूप से वर्गीकृत न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर को शीर्षकों (जलवायु, जैव विविधता, जल) में विभाजित करके लिखें।
b) प्रत्येक बिंदु में कारण और उसका परिणाम स्पष्ट करें।
c) पर्यावरणीय संतुलन के महत्व को दर्शाएं।

 

Question 7: एक मित्र कहता है, “पृथ्वी पर अतीत में भी जलवायु परिवर्तन होते रहे हैं इसलिए आज का वैश्विक तापन कोई नई बात नहीं है।” आपने अपनी विज्ञान की पुस्तक के इस अध्याय एवं अन्य अध्यायों में जो सीखा है उसका उपयोग करके आप क्या प्रतिक्रिया देंगे?

Answer:

मित्र की बात आंशिक रूप से सही है कि पृथ्वी के इतिहास में जलवायु परिवर्तन हुए हैं, परंतु वर्तमान वैश्विक तापन पूरी तरह अलग और अधिक खतरनाक है। इसके अंतर निम्नलिखित हैं:
• गति का अंतर: अतीत के जलवायु परिवर्तन हजारों-लाखों वर्षों में धीरे-धीरे हुए जिससे जीवों को अनुकूलन का समय मिला। वर्तमान परिवर्तन मात्र 150-200 वर्षों में अत्यधिक तीव्र गति से हो रहा है।
• कारण का अंतर: अतीत के परिवर्तन प्राकृतिक कारणों (जैसे ज्वालामुखी विस्फोट) से थे, जबकि वर्तमान परिवर्तन मानवीय गतिविधियों (जैसे जीवाश्म ईंधन जलाना और वनों की कटाई) के कारण हैं।
• परिणाम का अंतर: वर्तमान तापन से हिमखंड तेजी से पिघल रहे हैं, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और 'त्रिग्रहीय संकट' (जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का हनन और प्रदूषण) एक साथ उत्पन्न हो रहा है।

मुख्य बिंदु:

• प्राकृतिक बनाम मानवीय जलवायु परिवर्तन।
• परिवर्तन की गति (धीमी बनाम तीव्र)।
• वर्तमान संकट का व्यापक प्रभाव।

आम गलतियाँ:

• मित्र की बात को पूरी तरह नकार देना बिना वैज्ञानिक तर्कों के।
• गति और कारणों के अंतर को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर में तुलनात्मक बिंदुओं (गति, कारण, परिणाम) का प्रयोग करें।
b) मानवीय गतिविधियों की भूमिका को प्रमुखता से दर्शाएं।
c) वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उत्तर दें।

 

Question 8: कल्पना कीजिए कि यदि पृथ्वी पर उसका चुंबकीय क्षेत्र अचानक लुप्त हो जाए तो पृथ्वी पर जीवन के लिए किस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं? व्याख्या कीजिए।

Answer:

यदि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र गायब हो जाए, तो जीवन पर गंभीर संकट आ जाएगा:
• सौर पवन का प्रभाव: सूर्य से आने वाले उच्च-ऊर्जा कणों का प्रवाह (सौर पवन) सीधे हमारे वायुमंडल से टकराएगा, जिससे धीरे-धीरे वायुमंडल पतला होता जाएगा।
• ब्रह्मांडीय और पराबैंगनी किरणें: चुंबकीय क्षेत्र हमें अंतरिक्ष की खतरनाक किरणों और पराबैंगनी विकिरण से बचाता है। इसके बिना ये किरणें सीधे सतह पर पहुँचेंगी।
• स्वास्थ्य पर प्रभाव: यह बढ़ा हुआ विकिरण जीवित प्राणियों की कोशिकाओं को नष्ट कर देगा, जिससे व्यापक स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होंगी और जीवन का अस्तित्व असंभव हो जाएगा।

मुख्य बिंदु:

• चुंबकीय क्षेत्र एक सुरक्षात्मक ढाल के रूप में कार्य करता है।
• सौर पवनें वायुमंडल को नष्ट कर सकती हैं।
• हानिकारक विकिरण जीवित कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल गुरुत्वाकर्षण से जोड़कर उत्तर लिखना।
• सौर पवनों और विकिरण के प्रभावों को न समझाना।

Exam Tips:

a) चुंबकीय क्षेत्र की तुलना ढाल (Shield) से करके समझाएं।
b) वायुमंडल के क्षय और विकिरण के खतरे दोनों का उल्लेख करें।
c) जीवन पर पड़ने वाले अंतिम परिणाम को स्पष्ट करें।

 

Question 9: मंगल ग्रह पर मनुष्यों के लिए एक नई बस्ती की अभिकल्पना बनाने के कार्य का उत्तरदायित्व दिया गया है। वहाँ मानव जीवन को बनाए रखने के लिए आपको पृथ्वी पर उपलब्ध तीन वस्तुएँ मंगल ग्रह पर पुन: बनानी होंगी। इनमें से किस वस्तु को वहाँ प्रतिकृत करना सबसे कठिन लगता है और क्यों?

Answer:

मंगल ग्रह पर जीवन के लिए आवश्यक तीन मुख्य चीजें:
1. सांस लेने योग्य वातावरण: ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसी गैसों से युक्त बंद आवास।
2. तरल जल: पीने, भोजन उगाने और स्वच्छता के लिए जल का स्रोत व पुनर्चक्रण प्रणाली।
3. भोजन का एक स्थिर स्रोत: आवास के अंदर पौधे उगाने की प्रणाली (जैसे जल-परागण)।
सबसे कठिन कार्य: सांस लेने योग्य वातावरण को बड़े पैमाने पर बनाना और बनाए रखना सबसे कठिन है। छोटे आवास में इसे बनाना संभव है, परंतु पूरे ग्रह के लिए घना और सुरक्षात्मक वायुमंडल तैयार करना हमारी वर्तमान तकनीक से बहुत परे है।

मुख्य बिंदु:

• जीवन के लिए वायु, जल और भोजन अनिवार्य आवश्यकताएँ हैं।
• ग्रहों के स्तर पर वायुमंडल बदलना बेहद कठिन है।
• तकनीकी सीमाओं का यथार्थवादी आकलन।

आम गलतियाँ:

• केवल जल की कमी को सबसे बड़ी चुनौती मान लेना।
• संपूर्ण ग्रह के वातावरण और एक छोटे कमरे के अंतर को न समझना।

Exam Tips:

a) तीनों आवश्यक वस्तुओं को सूचीबद्घ करें।
b) अपने चयन का तार्किक कारण (जैसे पैमाने का अंतर) स्पष्ट रूप से दें।
c) वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए उत्तर लिखें।

 

Question 10: एक गाँव में विगत वर्षों से तापमान में वृद्धि हो रही है एवं वर्षा अप्रत्याशित हो गई है। इस परिवर्तन का क्या कारण हो सकता है? ऐसे दो उपाय बताइए जिन्हें अपनाकर यह गाँव उन नई परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन कर सके।

Answer:

परिवर्तन का कारण:
यह स्थानीय जलवायु परिवर्तन का लक्षण है, जो वैश्विक तापवृद्धि (Global Warming) से प्रेरित है। विश्व स्तर पर जीवाश्म ईंधन का दहन इसका मुख्य कारण है। स्थानीय स्तर पर वनों की कटाई ने वर्षा के पैटर्न को प्रभावित किया है और तापमान बढ़ाया है।
अनुकूलन के दो उपाय:
1. जल प्रबंधन: वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) अपनाना। छतों और सतहों से जल को टैंकों में एकत्र करना या भूजल रिचार्ज करना ताकि सूखे के समय उपयोग हो सके।
2. वृक्षारोपण: बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना। पेड़ छाया देकर ठंडक प्रदान करते हैं, मिट्टी की जल धारण क्षमता सुधारते हैं और स्थानीय वर्षा चक्र को स्थिर करने में मदद करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• वैश्विक तापवृद्धि का स्थानीय प्रभाव।
• वर्षा जल संचयन के लाभ।
• वृक्षारोपण द्वारा स्थानीय पर्यावरण में सुधार।

आम गलतियाँ:

• केवल वैश्विक कारणों को बताना और स्थानीय स्तर पर समाधान न लिखना।
• अनुकूलन के व्यावहारिक उपाय न सुझाना।

Exam Tips:

a) कारण और उपाय दोनों को अलग-अलग शीर्षकों के तहत लिखें।
b) जल संचयन और वृक्षारोपण जैसे प्रभावी उपायों का उल्लेख करें।
c) भाषा स्पष्ट और तथ्यात्मक रखें।

 

Question 11: यदि पृथ्वी पर वायुमंडल न होता तो क्या यह पृथ्वी पर जीवन, तापमान एवं जल को प्रभावित करता? स्पष्ट कीजिए।

Answer:

वायुमंडल के बिना पृथ्वी एक निर्जीव और बंजर ग्रह बन जाती:
• जीवन पर प्रभाव: वायुमंडल में श्वसन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन और हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाने वाली ओजोन परत होती है। इनके बिना जीवन असंभव है।
• तापमान पर प्रभाव: वायुमंडल एक कंबल की तरह काम करता है जो ग्रीनहाउस प्रभाव द्वारा तापमान स्थिर रखता है। इसके बिना दिन में अत्यधिक गर्मी और रात में जमा देने वाली ठंड होगी।
• जल पर प्रभाव: वायुमंडलीय दबाव के अभाव में दिन के समय तरल जल उबलकर अंतरिक्ष में चला जाता और रात की ठंड में बर्फ बन जाता। तरल जल के अस्तित्व के लिए वायुमंडल जरूरी है।

मुख्य बिंदु:

• वायुमंडल जीवनदायिनी गैसें और ओजोन प्रदान करता है।
• यह पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित रखता है।
• यह जल चक्र और द्रव जल के अस्तित्व के लिए आवश्यक दाब प्रदान करता है।

आम गलतियाँ:

• केवल तापमान पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करना।
• जल और वायुमंडल के दबाव के संबंध को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) उत्तर को जीवन, तापमान और जल—इन तीन स्पष्ट बिंदुओं में बाँटकर लिखें।
b) ग्रीनहाउस प्रभाव और वायुमंडलीय दबाव के महत्व को समझाएं।
c) संरचित और संपूर्ण उत्तर लिखें।

 

Question 12: कायिक प्रवर्धन के पाँच उदाहरणों पर चर्चा कीजिए।

Answer:

कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) बीज रहित पौधों के प्रजनन का तरीका है जिसमें तने, जड़ या पत्ती का उपयोग होता है। पाँच उदाहरण:
1. आलू: आलू के टुकड़े पर मौजूद 'आँख' (कली) से नया पौधा उगता है।
2. अदरक: यह भूमिगत तने (प्रकंद) से उगता है, जिसके टुकड़े से जड़ें और अंकुर निकलते हैं।
3. मनी प्लांट: इसके तने का टुकड़ा काटकर पानी या नम मिट्टी में रखने पर नया पौधा बन जाता है।
4. गन्ना: गन्ने के डंठल के छोटे टुकड़े (सेट) जिन पर कलियाँ होती हैं, उन्हें मिट्टी में लगाने से नया पौधा बनता है।
5. गुलाब: गुलाब के तने की कलम को मिट्टी में लगाने से नई झाड़ी उग जाती है।

मुख्य बिंदु:

• कायिक प्रवर्धन अलैंगिक जनन का एक रूप है।
• इसमें पौधे के कायिक भागों (तने, जड़, पत्ती) का उपयोग होता है।
• यह कम समय में नए पौधे उगाने में सहायक है।

आम गलतियाँ:

• बीजों द्वारा होने वाले जनन को कायिक प्रवर्धन में लिख देना।
• उदाहरणों में पौधे के सही भाग (जैसे आलू की आँख, अदरक का प्रकंद) का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) कायिक प्रवर्धन की परिभाषा संक्षेप में लिखें।
b) प्रत्येक उदाहरण के साथ पौधे के उस भाग का नाम लिखें जिससे नया पौधा बनता है।
c) बिन्दुवार (Bullet points) उत्तर लिखें ताकि जाँचने में आसानी हो।

 

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