NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 06 Pressure Winds Storms and Cyclones (दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात) in Hindi

Download NCERT Solutions for Class 8 Science Chapter 06 दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात

Review structured textbook solutions for Class 8 Science Chapter 06 दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात. Built according to NCERT guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.

Access NCERT Solutions and Answers

Access the complete solution PDF for Class 8 Science below. Regular practice with these targeted textbook answers builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school evaluations.

Question 1: सही विकल्प का चयन कीजिए।
(i) चित्र 6.21 को ध्यानपूर्वक देखिए। पात्र ‘ग’ में जल भरा जा रहा है। जल भरने की प्रक्रिया रोकने पर पात्रों में जलस्तर होगा ________________
(क) पात्र ‘क’ में उच्चतम
(খ) पात्र ‘ख’ में उच्चतम
(ग) पात्र ‘ग’ में उच्चतम
(घ) सभी पात्रों में समान

Answer:

(घ) सभी पात्रों में समान
जब आपस में जुड़े हुए विभिन्न आकारों के पात्रों में जल भरा जाता है, तो जल का स्तर सभी पात्रों में बराबर हो जाता है, चाहे पात्रों का आकार अलग-अलग क्यों न हो। यह द्रव के दाब का एक प्रमुख गुण है कि द्रव सभी दिशाओं में समान दाब डालता है, इसलिए जल हर पात्र में समान ऊँचाई पर रुकता है।

मुख्य बिंदु:

• जुड़े हुए पात्रों में जल का तल हमेशा एक समान रहता है।
• पात्रों का आकार या चौड़ाई जल के अंतिम स्तर को प्रभावित नहीं करती।
• यह नियम द्रव के स्थैतिक दाब और संतुलन के सिद्धांतों पर आधारित है।

आम गलतियाँ:

• छात्रों को लगता है कि चौड़े पात्र में जलस्तर नीचे रहेगा।
• कई बार लोग पात्र ‘ग’ को उच्चतम मान लेते हैं क्योंकि उसमें पानी भरा जा रहा था।
• द्रव दाब के मूलभूत सिद्धांतों की अनदेखी करना।

Exam Tips:

a) ऐसे प्रश्नों में हमेशा द्रव के संतुलन के सिद्धांत को याद रखें।
b) पात्रों की आकृति से भ्रमित न हों।
c) सही विकल्प के साथ उसका कारण भी संक्षिप्त में लिखें।

 

Question 1(ii): एक रबर चूषक ‘क’ को एक समतल चिकने पृष्ठ पर एवं समान चूषक ‘ख’ को खुरदरे पृष्ठ पर दबाया गया।
(क) ‘क’ और ‘ख’ दोनों ही अपने पृष्ठ से चिपक जाएँगे।
(ख) ‘क’ और ‘ख’ दोनों अपने पृष्ठ से नहीं चिपकेंगे।
(ग) ‘क’ चिपक जाएगा परंतु ‘ख’ नहीं चिपकेगा।
(घ) ‘क’ नहीं चिपकेगा परंतु ‘ख’ चिपकेगा।

Answer:

(ग) ‘क’ चिपक जाएगा परंतु ‘ख’ नहीं चिपकेगा।
चिकने पृष्ठ पर चूषक और पृष्ठ के बीच की सारी हवा बाहर निकल जाती है, जिससे वहाँ निर्वात जैसी स्थिति बनती है और बाहरी वायुदाब चूषक को दबाकर पकड़े रखता है। खुरदरे पृष्ठ पर सूक्ष्म छिद्रों के कारण हवा पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाती, जिससे वायुदाब का संतुलन बना रहता है और चूषक नहीं चिपकता।

मुख्य बिंदु:

• चूषक वायुमंडलीय दाब के सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
• चिकनी सतह पर वायु का रिसाव रुक जाता है जिससे मजबूत पकड़ बनती है।
• खुरदरी सतह पर हवा का प्रवेश होते ही दाब संतुलित हो जाता है।

आम गलतियाँ:

• दोनों चूषकों को एक जैसा मानकर एक ही परिणाम सोचना।
• वायुमंडलीय दाब की भूमिका को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) वायुदाब और सतह की चिकनाहट के संबंध को स्पष्ट करें।
b) वैज्ञानिक कारणों को बिंदुओं में लिखें।
c) सही विकल्प स्पष्ट रूप से चिह्नित करें।

 

Question 1(iii): किसी भवन की छत पर एक जल की टंकी को H ऊँचाई पर रखा जाता है। भूतल पर जल को अधिक दाब से प्राप्त करने के लिए हमें करना होगा —
(क) जहाँ टंकी रखी है, उस ऊँचाई H को बढ़ा दिया जाए।
(ख) जहाँ टंकी रखी है उस स्थान की ऊँचाई H को कम कर दिया जाए।
(ग) टंकी को समान ऊँचाई वाली दूसरी टंकी जिसमें अधिक जल आ सके, से परिवर्तित कर दिया जाए।
(घ) टंकी को समान ऊँचाई की दूसरी टंकी जिसमें कम जल आ सके, से परिवर्तित कर दिया जाए।

Answer:

(क) जहाँ टंकी रखी है, उस ऊँचाई H को बढ़ा दिया जाए।
द्रव द्वारा डाला जाने वाला दाब द्रव स्तंभ की ऊँचाई पर निर्भर करता है। जितनी अधिक ऊँचाई होगी, जल स्तंभ का भार और दाब उतना ही अधिक होगा, जिससे भूतल पर पानी का प्रवाह तेज और अधिक दाब के साथ प्राप्त होगा।

मुख्य बिंदु:

• द्रव का दाब \( P = h \rho g \) के अनुसार ऊँचाई पर निर्भर करता है।
• ऊँचाई बढ़ने से गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा और दाब में वृद्धि होती है।
• टंकी का आयतन दाब को प्रभावित नहीं करता, केवल ऊँचाई करती है।

आम गलतियाँ:

• टंकी के बड़े आकार (आयतन) को अधिक दाब का कारण समझना।
• ऊँचाई और दाब के सीधे संबंध को भूल जाना।

Exam Tips:

a) हमेशा याद रखें कि द्रव दाब गहराई या ऊँचाई पर निर्भर करता है।
b) विकल्प चुनते समय तार्किक कारण का ध्यान रखें।
c) परिभाषा या नियम का संदर्भ दें।

 

Question 1(iv): दर्शाए गए चित्र 6.22 में दो पात्र ‘क’ और ‘ख’ में समान स्तर तक जल भरा गया। दोनों पात्रों में लगने वाले दाब क्रमशः \( P_{क} \) और \( P_{ख} \) तथा बल क्रमशः \( F_{क} \) और \( F_{ख} \) में संबंध होगा।
(क) \( P_{क} = P_{ख}, F_{क} = F_{ख} \)
(ख) \( P_{क} = P_{ख}, F_{क} < F_{ख} \)
(ग) \( P_{क} < P_{ख}, F_{क} = F_{ख} \)
(घ) \( P_{क} > P_{ख}, F_{क} > F_{ख} \)

Answer:

(ख) \( P_{क} = P_{ख}, F_{क} < F_{ख} \)
दोनों पात्रों में जल की ऊँचाई समान है, इसलिए द्रव का दाब \( P \) दोनों में बराबर होगा। चूंकि बल \( F = \text{दाब} \times \text{क्षेत्रफल} \) होता है और पात्र ‘ख’ का आधार बड़ा है, इसलिए उस पर लगने वाला कुल बल अधिक होगा। अतः \( F_{क} < F_{ख} \) होगा।

मुख्य बिंदु:

• दाब केवल ऊँचाई पर निर्भर करता है, आधार के क्षेत्रफल पर नहीं।
• कुल बल दाब और क्षेत्रफल के गुणनफल के बराबर होता है।
• बड़े आधार वाले पात्र पर कुल thrust (बल) अधिक होता है।

आम गलतियाँ:

• दाब और बल को एक ही भौतिक राशि मान लेना।
• क्षेत्रफल के प्रभाव को दाब पर भी लागू करना।

Exam Tips:

a) सूत्र \( F = P \times A \) का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) दाब और बल के अंतर को समझकर उत्तर दें।
c) चरणों में गणना समझाएँ।

 

Question 2: बताइए निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य —
(i) वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहती है।
(ii) द्रव केवल पात्र के तल पर दाब डालते हैं।
(iii) चक्रवात अक्षि में मौसम झंझावाती होता है।
(iv) तड़ितझंझा के समय हम कार में सुरक्षित रहते हैं।

Answer:

(i) सत्य
(ii) असत्य
(iii) असत्य
(iv) सत्य

मुख्य बिंदु:

• वायु हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर गति करती है।
• द्रव पात्र के तल के साथ-साथ दीवारों पर भी दाब डालते हैं।
• चक्रवात की आँख (अक्षि) शांत क्षेत्र होती है, झंझावाती नहीं।
• कार की धातु की बॉडी फैराडे पिंजरे की तरह काम करती है, जो तड़ित से सुरक्षा देती है।

आम गलतियाँ:

• चक्रवात की आँख को सबसे खतरनाक और तूफानी मान लेना।
• यह सोचना कि द्रव केवल नीचे की ओर बल लगाते हैं।

Exam Tips:

a) प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़कर सत्य/असत्य लिखें।
b) यदि कारण पूछा जाए तो संक्षिप्त स्पष्टीकरण दें।
c) सामान्य विज्ञान की अवधारणाओं को स्पष्ट रखें।

 

Question 3: चित्र 6.23 (क) में रेतीली सतह पर एक लड़के को क्षैतिज रूप से लेटा हुआ दर्शाया गया है और चित्र 6.23 (ख) में लड़के को ऊर्ध्वाधर खड़ा हुआ दर्शाया है। किस स्थिति में लड़का रेत के अंदर अधिक धँसेगा? कारण दीजिए।

Answer:

लड़का ऊर्ध्वाधर खड़े होने की स्थिति (ख) में रेत के अंदर अधिक धँसेगा।
कारण: दाब \( P = \frac{\text{बल}}{\text{क्षेत्रफल}} \) होता है। लड़के का भार (बल) दोनों स्थितियों में समान है। जब लड़का लेटा होता है, तो उसके शरीर का अधिक क्षेत्रफल रेत के संपर्क में होता है, जिससे दाब कम हो जाता है। इसके विपरीत, जब लड़का खड़ा होता है, तो केवल पैरों का बहुत कम क्षेत्रफल संपर्क में आता है, जिससे कम क्षेत्रफल के कारण दाब बहुत बढ़ जाता है और वह अधिक धँसता है।

मुख्य बिंदु:

• दाब क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
• क्षेत्रफल कम होने पर दाब अधिक लगता है।
• भार (बल) समान रहने पर भी प्रभाव क्षेत्रफल पर निर्भर करता है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि वजन बढ़ने से ही ऐसा होता है।
• क्षेत्रफल और दाब के संबंध को उल्टा लिख देना।

Exam Tips:

• सूत्र \( \text{दाब} = \frac{\text{बल}}{\text{क्षेत्रफल}} \) अवश्य लिखें।
b) खड़े होने और लेटने की स्थिति की तुलना स्पष्ट करें।
c) उत्तर को वैज्ञानिक शब्दावली में लिखें।

 

Question 4: एक हाथी अपने चारों पैरों पर खड़ा है। यदि एक पैर द्वारा घेरे जाने वाला क्षेत्रफल \( 0.25 \, \text{m}^2 \) है और हाथी का भार \( 20000 \, \text{N \) है तो हाथी द्वारा स्थल पर आरोपित दाब की गणना कीजिए।

Answer:

दिया गया है:
एक पैर का क्षेत्रफल = \( 0.25 \, \text{m}^2 \)
चारों पैरों का कुल क्षेत्रफल \( (A) \) = \( 4 \times 0.25 \, \text{m}^2 = 1 \, \text{m}^2 \)
हाथी का भार \( (\text{बल}, F) \) = \( 20000 \, \text{N \)
दाब \( (P) = \frac{\text{बल}}{\text{क्षेत्रफल}} \)
\( P = \frac{20000 \, \text{N}}{1 \, \text{m}^2} \)
\( P = 20000 \, \text{N/m}^2 \) या \( 20000 \, \text{Pa} \)

मुख्य बिंदु:

• कुल क्षेत्रफल निकालते समय सभी चार पैरों के क्षेत्रफल को जोड़ा जाता है।
• दाब का मात्रक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर या पास्कल होता है।
• भारी जीवों द्वारा जमीन पर बड़ा बल लगाया जाता है।

आम गलतियाँ:

• केवल एक पैर के क्षेत्रफल से ही दाब की गणना कर देना।
• मात्रक लिखना भूल जाना।

Exam Tips:

a) गणना वाले प्रश्नों में पहले 'दिया गया है' लिखकर मान दर्शाएं।
b) प्रत्येक चरण में सही सूत्र का प्रयोग करें।
c) उत्तर के साथ उचित मात्रक अवश्य लिखें।

 

Question 5: ‘क’ और ‘ख’ दो नावें हैं। नाव ‘क’ के आधार का क्षेत्रफल \( 7 \, \text{m}^2 \) है और उसमें 5 लोग बैठे हैं। नाव ‘ख’ के आधार का क्षेत्रफल \( 3.5 \, \text{m}^2 \) है और उसमें 3 लोग बैठे हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति का भार \( 700 \, \text{N \) है तो पता लगाएँ कि किस नाव के आधार पर अधिक दाब लगेगा और कितना?

Answer:

नाव ‘क’ के लिए:
व्यक्तियों की संख्या = 5
कुल बल \( (F_1) = 5 \times 700 \, \text{N} = 3500 \, \text{N} \)
आधार का क्षेत्रफल \( (A_1) = 7 \, \text{m}^2 \)
दाब \( (P_1) = \frac{3500}{7} = 500 \, \text{N/m}^2 \)
नाव ‘ख’ के लिए:
व्यक्तियों की संख्या = 3
कुल बल \( (F_2) = 3 \times 700 \, \text{N} = 2100 \, \text{N} \)
आधार का क्षेत्रफल \( (A_2) = 3.5 \, \text{m}^2 \)
दाब \( (P_2) = \frac{2100}{3.5} = 600 \, \text{N/m}^2 \)
निष्कर्ष: नाव ‘ख’ के आधार पर अधिक दाब लगेगा। यह दाब \( 600 \, \text{N/m}^2 \) है जो नाव ‘क’ के दाब \( 500 \, \text{N/m}^2 \) से \( 100 \, \text{N/m}^2 \) अधिक है।

मुख्य बिंदु:

• दोनों नावों के लिए कुल भार अलग-अलग निकाला गया है।
• दाब निकालने के लिए कुल बल को क्षेत्रफल से विभाजित किया गया है।
• नाव ‘ख’ का क्षेत्रफल कम होने के कारण उस पर दाब अधिक आया है।

आम गलतियाँ:

• प्रत्येक व्यक्ति के भार को सीधे दाब मान लेना।
• गणना में भाग देते समय दशमलव की गलती करना।

Exam Tips:

a) दोनों नावों की गणना अलग-अलग खंडों में स्पष्ट रूप से करें।
b) अंत में दोनों के दाब की तुलना करके निष्कर्ष स्पष्ट लिखें।
c) इकाइयों का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 6: यदि वायु और बादल दोनों विद्युत के सुचालक होते तो क्या तड़ित उत्पन्न होती? अपने उत्तर का कारण दीजिए।

Answer:

नहीं, तड़ित उत्पन्न नहीं होती।
कारण: तड़ित बनने के लिए यह आवश्यक है कि बादलों में धनावेश और ऋणावेश अलग-अलग स्थानों पर एकत्रित हों। वायु विद्युतरोधी की तरह कार्य करती है और इन विपरीत आवेशों को अलग रखती है। यदि वायु और बादल दोनों विद्युत के सुचालक होते, तो आवेश लगातार प्रवाहित होते रहते और कभी एक स्थान पर जमा नहीं होते। आवेश का संचयन न होने के कारण अचानक विद्युत प्रवाह यानी तड़ित उत्पन्न नहीं होती।

मुख्य बिंदु:

• तड़ित उत्पन्न होने के लिए आवेशों का पृथक्करण और संचयन जरूरी है।
• वायु एक अच्छी विद्युतरोधी (insulator) परत का काम करती है।
• सुचालक होने पर आवेशों का विसर्जन लगातार और शांति से हो जाता।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि सुचालक होने से बिजली और तेज चमकती।
• आवेशों के संचयन की प्रक्रिया को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) वायु के विद्युतरोधी गुण का उल्लेख अवश्य करें।
b) तड़ित के निर्माण की मूल शर्त (आवेशों का जमा होना) को समझाएं।
c) संक्षिप्त और सटीक वैज्ञानिक कारण दें।

 

Question 7: यदि बोतल में जल एक निश्चित ऊँचाई तक भर दिया जाए तो दर्शाए गए चित्र 6.24 के अनुसार दो समान गुब्बारों ‘क’ और ‘ख’ का क्या होगा? क्या दोनों गुब्बारे फूलेंगे? यदि हाँ, तो क्या वे समान रूप से फूलेंगे?

Answer:

हाँ, दोनों गुब्बारे फूलेंगे और वे समान रूप से फूलेंगे।
कारण: बोतल में जल भरने पर जल स्तंभ नीचे की ओर दाब डालता है। बोतल के तल पर लगाए गए दाब के कारण दोनों गुब्बारों पर बराबर दाब पड़ता है। चूंकि दोनों गुब्बारे बोतल के तल से समान ऊँचाई पर लगाए गए हैं, इसलिए दोनों पर समान जल स्तंभ का दाब कार्य करता है और दोनों समान रूप से फूलते हैं। यह इस तथ्य को दर्शाता है कि समान गहराई या ऊँचाई पर द्रव सभी दिशाओं में समान दाब डालता है।

मुख्य बिंदु:

• द्रव का दाब गहराई या ऊँचाई पर निर्भर करता है।
• समान ऊँचाई पर स्थित बिंदुओं पर द्रव दाब समान होता है।
• गुब्बारों का फूलना यह सिद्ध करता है कि द्रव दीवारों पर भी बल लगाते हैं।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि अलग-अलग दिशाओं में होने के कारण गुब्बारे अलग-अलग फूलेंगे।
• द्रव दाब के समदैसिक (isotropic) गुण को भूल जाना।

Exam Tips:

a) प्रयोग के निष्कर्ष को स्पष्ट शब्दों में लिखें।
b) ऊँचाई और दाब के संबंध को रेखांकित करें।
c) हाँ/ना के साथ कारण अवश्य दें।

 

Question 8: व्याख्या कीजिए कि झंझावात चक्रवात में किस प्रकार परिवर्तित हो जाता है।

Answer:

जब गरम और आर्द्र वायु ऊपर उठती है, तो उस क्षेत्र में निम्न दाब का क्षेत्र बनता है। आसपास की ठंडी वायु तेजी से इस निम्न दाब क्षेत्र की ओर बढ़ती है। यह वायु भी गरम होकर ऊपर उठती है और इस प्रकार एक सतत चक्र बन जाता है—यही झंझावात की शुरुआत है।
जब ऐसा झंझावात किसी महासागर के गरम जल के ऊपर बनता है, तो जल का अत्यधिक वाष्पन होता है और वायु में नमी बढ़ जाती है। जलवाष्प के संघनित होने पर वायुमंडल में ऊष्मा (ताप) मुक्त होती है, जिससे वायु और अधिक गरम होकर तेजी से ऊपर उठती है। इससे केंद्र में बहुत गहरा निम्न दाब बन जाता है। पृथ्वी के घूर्णन के कारण यह तीव्र पवन चक्राकार गति ले लेती है। यही चक्राकार घूमती हुई तेज पवन, बादल और भारी वर्षा मिलकर एक भयंकर चक्रवात का रूप ले लेती है।

मुख्य बिंदु:

• चक्रवात की उत्पत्ति महासागरों के ऊपर होती है।
• संघनन के समय मुक्त होने वाली ऊष्मा चक्रवात को ऊर्जा देती है।
• पृथ्वी का घूर्णन पवनों को चक्राकार गति प्रदान करता है।

आम गलतियाँ:

• झंझावात और चक्रवात को एक ही घटना मान लेना।
• संघनन प्रक्रिया और ऊष्मा उत्सर्जन की भूमिका को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) चरणों में पूरी प्रक्रिया (वाष्पन, संघनन, ऊष्मा मुक्त होना, घूर्णन) समझाएं।
b) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'निम्न दाब क्षेत्र' और 'संघनन' का प्रयोग करें।
c) उत्तर को पैराग्राफ या बिंदुओं में सुव्यवस्थित लिखें।

 

Question 9: चित्र 6.25 में गर्मियों की दोपहर के समय में समुद्र तट पर पेड़ों को दर्शाया गया है। पहचानिए ‘क’ अथवा ‘ख’ में स्थल किस ओर है। अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिए।

Answer:

‘क’ की ओर स्थल है (या चित्र के अनुसार निर्देश देखें)।
स्पष्टीकरण: चित्र में पेड़ ‘ख’ की दिशा से ‘क’ की दिशा की ओर झुके हुए हैं, जिसका अर्थ है कि हवा ‘ख’ से ‘क’ की ओर बह रही है। गर्मियों की दोपहर में स्थल (जमीन), समुद्र की तुलना में बहुत तेजी से गरम होता है। इससे स्थल के ऊपर की वायु गरम होकर हल्की हो जाती है और ऊपर उठ जाती है, जिससे वहाँ निम्न दाब बनता है। समुद्र के ऊपर अपेक्षाकृत ठंडा और उच्च दाब का क्षेत्र होता है, इसलिए हवा समुद्र से स्थल की ओर बहती है—इसे समुद्र समीर कहते हैं। चूँकि हवा ‘ख’ (समुद्र) से ‘क’ (स्थल) की ओर बह रही है, अतः ‘क’ की ओर स्थल है।

मुख्य बिंदु:

• थल समीर और समुद्र समीर तापीय अंतर के कारण चलते हैं।
• दिन के समय समुद्र से स्थल की ओर हवा चलती है (समुद्र समीर)।
• पेड़ों का झुकाव हवा की दिशा को दर्शाता है।

आम गलतियाँ:

• हवा की दिशा और पेड़ों के झुकाव को उल्टा समझ लेना।
• थल और समुद्र के गर्म होने की दर में अंतर को न समझना।

Exam Tips:

a) समुद्र समीर की परिभाषा को संक्षिप्त में लिखें।
b) उच्च दाब और निम्न दाब के क्षेत्रों का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) पेड़ों के झुकाव से हवा की दिशा का तर्क दें।

 

Question 10: ऐसे किसी क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए जो यह दर्शाए कि वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहती है।

Answer:

क्रियाकलाप:
1. दो समान पतले रबड़ के गुब्बारे और एक प्लास्टिक की नलिका (स्ट्रॉ) लीजिए।
2. नलिका का एक सिरा एक खाली गुब्बारे में डालकर उसे धागे से कसकर बाँध दीजिए ताकि हवा बाहर न निकले।
3. दूसरे गुब्बारे को थोड़ा बड़ा फुलाइए और उसके मुँह को अपनी उँगलियों से कसकर पकड़ लीजिए ताकि हवा न निकले।
4. अब नलिका का दूसरा सिरा इस फूले हुए गुब्बारे के मुँह में डालकर उसे भी कसकर बाँध दीजिए।
5. इसके बाद, फूले हुए गुब्बारे के मुँह को पकड़े रहने वाली उँगलियों को हटा दीजिए।
प्रेक्षण: आप देखेंगे कि फूले हुए गुब्बारे (उच्च दाब क्षेत्र) से वायु नलिका के माध्यम से खाली गुब्बारे (निम्न दाब क्षेत्र) में जाने लगती है और खाली गुब्बारा भी फूलने लगता है। यह दर्शाता है कि वायु हमेशा उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है।

मुख्य बिंदु:

• फूले हुए गुब्बारे के अंदर हवा का दाब अधिक होता है।
• खाली गुब्बारे में हवा का दाब कम होता है।
• यह क्रियाकलाप पवन प्रवाह के सिद्धांत को बहुत आसानी से समझाता है।

आम गलतियाँ:

• क्रियाकलाप के चरणों को क्रम से न लिखना।
• निष्कर्ष स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) क्रियाकलाप को आवश्यक सामग्री, विधि और प्रेक्षण/निष्कर्ष के रूप में लिखें।
b) उच्च दाब और निम्न दाब की स्थिति को प्रयोग से जोड़ें।
c) सरल और स्पष्ट भाषा का प्रयोग करें।

 

Question 11: तड़ितझंझा क्या है? इसके निर्माण प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।

Answer:

तड़ितझंझा: जब किसी झंझावात (तूफान) के दौरान तीव्र वायु के साथ-साथ तड़ित (बिजली चमकना) और गर्जन (बादलों की गड़गड़ाहट) भी होती है, तो उसे तड़ितझंझावात कहते हैं।
निर्माण प्रक्रिया: जब स्थल बहुत गर्म होता है, तो गरम और आर्द्र वायु हल्की होकर तेजी से ऊपर उठती है, जिससे वहाँ निम्न दाब का क्षेत्र बनता है। आसपास के उच्च दाब क्षेत्र से ठंडी वायु आकर उस स्थान को घेर लेती है। यह वायु भी गर्म होकर ऊपर उठती है। ऊपर उठती हुई यह आर्द्र वायु ठंडी होकर जलवाष्प को संघनित करती है, जिससे बादल बनते हैं और भारी वर्षा होती है। कभी-कभी गर्म वायु इतनी अधिक ऊँचाई पर पहुँच जाती है कि जल की बूँदें हिम कणों में बदल जाती हैं। ऊपर जाती हुई (ऊर्ध्वगामी) और नीचे आती हुई (अधोगामी) तीव्र हवाओं के कारण जल की बूँदों और हिम कणों के बीच तीव्र घर्षण होता है, जिससे बादलों में स्थिर वैद्युत आवेश उत्पन्न होता है और तड़ितझंझा का निर्माण होता है।

मुख्य बिंदु:

• तड़ितझंझा में वर्षा, तेज हवा, बिजली चमकना और गर्जन शामिल हैं।
• बादलों के अंदर कणों के घर्षण से विद्युत आवेश पैदा होता है।
• यह प्रक्रिया बादलों के भीतर ऊर्ध्वाधर हवाओं की गति पर निर्भर करती है।

आम गलतियाँ:

• केवल बिजली चमकने को तड़ितझंझा मान लेना और वायु की गति को छोड़ देना।
• घर्षण और आवेश की प्रक्रिया को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) पहले तड़ितझंझा की परिभाषा दें, फिर निर्माण प्रक्रिया के चरण लिखें।
b) ऊर्ध्वगामी और अधोगामी पवनों के योगदान का उल्लेख करें।
c) वैज्ञानिक शब्दों का सही उपयोग करें।

 

Question 12: उस प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए जिसके कारण तड़ित उत्पन्न होती है।

Answer:

तड़ित उत्पन्न होने की प्रक्रिया इस प्रकार है:
1. जब झंझावात के दौरान ऊर्ध्वाधर (ऊपर और नीचे) तीव्र वायु बहती है, तो जल की बूँदें और हिम कण आपस में तेजी से टकराकर घर्षण करते हैं।
2. इस घर्षण के कारण बादलों में स्थिर वैद्युत आवेश उत्पन्न हो जाता है।
3. हल्के धनावेशित हिम कण ऊपर की ओर उठ जाते हैं और बादल के ऊपरी भाग में एकत्र हो जाते हैं, जबकि भारी ऋणावेशित जल की बूँदें बादल के निचले भाग में जमा हो जाती हैं। इस प्रकार बादलों में आवेश का पृथक्करण हो जाता है।
4. जब बादल का यह ऋणावेशित निचला भाग पृथ्वी (स्थल) के नजदीक आता है, तो वह पेड़ों और इमारतों आदि को धनावेशित कर देता है।
5. वायु विद्युतरोधी की तरह कार्य करती है और इन विपरीत आवेशों को अलग रखती है। परंतु जब आवेश बहुत अधिक हो जाता है, तो वायु का विद्युतरोधी गुण समाप्त हो जाता है और आवेशों का वायु में अचानक प्रवाह होने लगता है।
6. इससे एक क्षणिक चमकदार प्रकाश उत्पन्न होता है जिसे हम तड़ित (बिजली चमकना) कहते हैं। यह तड़ित आसपास की वायु को अत्यंत गर्म कर देती है, जिससे वायु का अचानक प्रसार होता है और तीव्र ध्वनि उत्पन्न होती है जिसे गर्जन कहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• बादलों में आवेशों का पृथक्करण घर्षण के कारण होता है।
• धनावेश ऊपर और ऋणावेश नीचे एकत्रित होते हैं।
• वायु के रोधी गुण के टूटने से चिंगारी (तड़ित) उत्पन्न होती है।

आम गलतियाँ:

• आवेशों के वितरण (ऊपर धनावेश, नीचे ऋणावेश) को उल्टा लिख देना।
• गर्जन और तड़ित के बीच के कारण को न समझाना।

Exam Tips:

a) पूरी प्रक्रिया को क्रमानुसार बिंदुओं में लिखें।
b) घर्षण, आवेश पृथक्करण और वायु के रोधी गुण जैसे मुख्य बिंदु जरूर शामिल करें।
c) उत्तर को स्पष्ट और विस्तृत रखें।

 

Question 13: व्याख्या कीजिए कि प्रदर्शपट्ट (बैनर) और विज्ञापन पट्ट (होर्डिंग्स) में छिद्र क्यों बनाए जाते हैं।

Answer:

प्रदर्शपट्ट (बैनर) और होर्डिंग्स में छिद्र इसलिए बनाए जाते हैं ताकि तेज हवा चलने पर वे उड़ें नहीं या फटे/टूटें नहीं।
जब तेज पवन किसी ठोस और सपाट बैनर से टकराती है, तो वह सीधे उसके पृष्ठ पर दाब डालती है। इसके अतिरिक्त, बैनर के आगे और पीछे वायुदाब में अंतर उत्पन्न हो जाता है जो बैनर पर बल लगाता है। यदि बैनर में छिद्र होते हैं, तो वायु उन छिद्रों से होकर आसानी से निकल जाती है। इससे बैनर के आगे और पीछे वायुदाब का अंतर कम हो जाता है और बैनर पर लगने वाला कुल बल भी कम हो जाता है, जिससे वह सुरक्षित रहता है।

मुख्य बिंदु:

• तेज हवाएं ठोस सतह पर अधिक बल डालती हैं।
• छिद्र होने से वायु का दबाव दोनों तरफ संतुलित हो जाता है।
• यह वायुदाब के अंतर के प्रभाव को कम करने की एक वैज्ञानिक तकनीक है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि छिद्र केवल हवा के वजन को कम करने के लिए होते हैं।
• वायुदाब के अंतर की अवधारणा को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) वायुदाब के अंतर और बल के कम होने का तर्क दें।
b) दैनिक जीवन के इस उदाहरण को भौतिकी के नियमों से जोड़ें।
c) संक्षिप्त और सटीक उत्तर लिखें।

 

Science Class 8 Curriculum Solutions: Chapter 06 दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात

Accessing Chapter 06 दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात Solutions

Review comprehensive exercise answers for Class 8 Science Chapter 06 दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात. Fully updated to match current NCERT syllabus guidelines, these textbook solutions help students verify their work and maintain accurate study notes.

Concept-Driven Answers for Class 8 Science

Beyond providing final answers, these guides offer step-by-step breakdowns for complex queries in the Class 8 Science module. This approach helps students balance theoretical depth with practical problem-solving skills required for NCERT exams.

Maximizing Study Efficiency

Consistent practice with these solution guides cultivates faster problem-solving habits and clearer logical structuring. For a complete preparation experience, pair these textbook answers with our dedicated revision notes and sample papers for Class 8 Science.

FAQs

Where can I find the latest NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 06 Pressure Winds Storms and Cyclones (दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात) in Hindi for the 2026-27 session?

The complete and updated NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 06 Pressure Winds Storms and Cyclones (दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात) in Hindi is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 8 Science are as per latest NCERT curriculum.

Are the Science NCERT solutions for Class 8 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 06 Pressure Winds Storms and Cyclones (दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात) in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 8 NCERT solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 06 Pressure Winds Storms and Cyclones (दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात) in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 06 Pressure Winds Storms and Cyclones (दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात) in Hindi in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 8 Science. You can access NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 06 Pressure Winds Storms and Cyclones (दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात) in Hindi in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Science NCERT solutions for Class 8 as a PDF?

Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 06 Pressure Winds Storms and Cyclones (दाब पवन झंझावात एवं चक्रवात) in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.