NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 07 Particulate Nature of Matter (द्रव्य की कणीय प्रकृति) in Hindi

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 8 Science Chapter 07 द्रव्य की कणीय प्रकृति

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Question 1: सही विकल्प चुनिए — ठोस पदार्थों और द्रवों में मूल अंतर यह है कि घटक कण (क) ठोस पदार्थों में सुसंकुलित होते हैं जबकि द्रवों में स्थिर होते हैं। (ख) ठोस पदार्थों में एक दूसरे से अधिक दूर होते हैं और द्रवों में उनकी नियत स्थिति होती है। (ग) ठोस पदार्थों में सदैव गति करते रहते हैं और द्रवों में उनकी नियत स्थिति होती है। (घ) ठोस पदार्थों में सुसंकुलित होते हैं और द्रवों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते हैं।

Answer:

(घ) ठोस पदार्थों में सुसंकुलित होते हैं और द्रवों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते हैं।
ठोस पदार्थों में कण प्रबल अंतराकणीय आकर्षण बल के कारण बहुत पास-पास और सुसंकुलित होते हैं तथा केवल अपनी जगह पर कंपन कर सकते हैं। द्रवों में कण एक सीमित स्थान के भीतर स्वतंत्र रूप से एक जगह से दूसरी जगह गति कर सकते हैं।

मुख्य बिंदु:

• ठोस पदार्थों में कण बहुत पास और सुसंकुलित होते हैं।
• ठोसों के कण केवल अपनी स्थिति पर कंपन कर सकते हैं।
• द्रवों में कण एक सीमित स्थान के भीतर स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं।

आम गलतियाँ:

• छात्रों को लगता है कि ठोसों के कण गति कर सकते हैं।
• द्रवों के कणों को स्थिर मान लेना।
• अंतराकणीय आकर्षण बल की प्रकृति को न समझना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
b) ठोस और द्रव की कण-स्तरीय संरचना को हमेशा याद रखें।
c) मुख्य अंतर आकर्षण बल और गतिशीलता पर आधारित होता है।

 

Question 2: निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं? असत्य कथनों को सत्य कथन के रूप में लिखिए। (क) बर्फ का जल में पिघलना किसी ठोस का द्रव में रूपांतरण का एक उदाहरण है। (ख) गलन प्रक्रिया में रूपांतरण के समय अंतराकणीय आकर्षणों में कमी होती है। (ग) ठोस पदार्थों की एक निश्चित आकृति और निश्चित आयतन होता है। (घ) ठोस पदार्थों में अंतराकणीय अन्योन्य क्रियाएँ अति प्रबल होती हैं और अंतराकणीय स्थान अति सूक्ष्म होते हैं। (ङ) जब हम कक्ष के किसी कोने में कपूर को गरम करते हैं तो उसकी सुगंध कक्ष के सभी कोनों में पहुँच जाती है। (च) गरम करने पर हम कपूर को ऊर्जा दे रहे हैं और यह ऊर्जा गंध के रूप में मुक्त होती है।

Answer:

(क) सत्य
(ख) सत्य
(ग) सत्य
(घ) सत्य
(ङ) सत्य
(च) असत्य (सत्य कथन: गरम करने पर हम कपूर को ऊर्जा दे रहे हैं और यह ऊर्जा कपूर के कणों को स्वतंत्र करने में उपयोग होती है जिससे वह सीधे वाष्प में बदल जाता है।)

मुख्य बिंदु:

• बर्फ का पिघलना ठोस से द्रव में परिवर्तन है।
• गलन के दौरान आकर्षण बल कमजोर होते हैं।
• कपूर का ऊर्ध्वपातन एक भौतिक परिवर्तन है।

आम गलतियाँ:

• ऊर्जा और गंध के संबंध को गलत समझना।
• सभी कथनों को बिना पढ़े सत्य मान लेना।
• ऊर्ध्वपातन प्रक्रिया को न समझ पाना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक कथन का वैज्ञानिक कारण सोचकर उत्तर दें।
b) असत्य कथन को ठीक करते समय सही वैज्ञानिक तथ्य लिखें।
c) अवस्था परिवर्तन के नियमों को स्पष्ट रखें।

 

Question 3: सत्यता सहित सही उत्तर का चयन कीजिए। यदि हम किसी कुर्सी से सभी घटक कण हटा पाते तो क्या होता? (क) कुछ भी नहीं बदलता (ख) कणों की हानि के कारण कुर्सी का भार कम हो जाता (ग) कुर्सी का कुछ भी नहीं बचता

Answer:

(ग) कुर्सी का कुछ भी नहीं बचता
कोई भी पदार्थ अपने घटक कणों से ही मिलकर बना होता है। घटक कण ही द्रव्य की मूल इकाइयाँ हैं। यदि किसी वस्तु से उसके सभी घटक कण हटा दिए जाएँ तो उस वस्तु का अस्तित्व ही पूरी तरह समाप्त हो जाएगा — इसलिए कुर्सी का कुछ भी नहीं बचेगा।

मुख्य बिंदु:

• सभी वस्तुएँ सूक्ष्म घटक कणों से बनी होती हैं।
• घटक कण द्रव्य की मूल इकाइयाँ हैं।
• कणों के बिना वस्तु के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती।

आम गलतियाँ:

• भार कम होने वाले विकल्प को सही मान लेना।
• यह सोचना कि कुर्सी का ढांचा रह जाएगा।
• पदार्थ की मूलभूत प्रकृति को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) प्रश्न की मूल भावना को समझें कि पदार्थ कणों से बनता है।
b) विकल्प चुनते समय वैज्ञानिक तर्क का प्रयोग करें।
c) उत्तर लिखते समय कारण भी स्पष्ट करें।

 

Question 4: गैसें सरलतापूर्वक क्यों मिश्रित हो जाती हैं जबकि ठोस पदार्थ मिश्रित नहीं होते। ऐसा क्यों?

Answer:

गैसों में अंतराकणीय आकर्षण बल नगण्य (बहुत कम) होते हैं और कणों के बीच बहुत अधिक खाली स्थान होता है। गैसों के कण सभी दिशाओं में पूर्णतः स्वतंत्र रूप से गति करते हैं। इसलिए एक गैस के कण दूसरी गैस के कणों के बीच उपलब्ध खाली स्थानों में आसानी से घुस जाते हैं और दोनों गैसें आपस में मिल जाती हैं।
इसके विपरीत, ठोस पदार्थों में कण प्रबल अंतराकणीय आकर्षण बल के कारण अपनी निर्धारित स्थितियों पर बंधे रहते हैं और उनके बीच बहुत कम खाली स्थान होता है। एक ठोस के कण दूसरे ठोस के कणों के बीच प्रवेश नहीं कर सकते, इसलिए ठोस पदार्थ आसानी से मिश्रित नहीं होते।

मुख्य बिंदु:

• गैसों में अंतराकणीय आकर्षण बल नगण्य और खाली स्थान बहुत अधिक होता है।
• ठोसों में प्रबल आकर्षण बल और कम खाली स्थान होता है।
• गैस के कण सभी दिशाओं में स्वतंत्र गति करते हैं।

आम गलतियाँ:

• दोनों अवस्थाओं के कणों की गतिशीलता को समान समझना।
• अंतराकणीय स्थान के प्रभाव को न लिखना।
• आकर्षण बल की भूमिका को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) उत्तर में गैस और ठोस दोनों की तुलना स्पष्ट रूप से करें।
b) 'अंतराकणीय आकर्षण' और 'खाली स्थान' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
c) उत्तर को बिंदुओं में या स्पष्ट अनुच्छेदों में लिखें।

 

Question 5: जब काँच के गिलास में रखा दूध मेज पर छलक जाता है तो वह बहता है और फैल जाता है परंतु काँच के गिलास की आकृति वही रहती है। इस कथन को सत्यापित कीजिए।

Answer:

यह कथन बिल्कुल सत्य है और यह ठोस तथा द्रव की अलग-अलग प्रकृति को दर्शाता है:
दूध (द्रव) के लिए: दूध एक द्रव पदार्थ है। द्रवों में कण स्वतंत्र रूप से एक सीमित स्थान में गति कर सकते हैं। अंतराकणीय आकर्षण बल ठोस की तुलना में कम होते हैं, इसलिए दूध जब गिलास से छलकता है तो मेज की सतह के अनुसार अपनी आकृति बदल लेता है और फैल जाता है। द्रवों की कोईनिश्चित आकृति नहीं होती।
काँच का गिलास (ठोस) के लिए: काँच एक ठोस पदार्थ है। ठोस पदार्थों में कण प्रबल आकर्षण बल से बंधे होते हैं और अपनी निर्धारित स्थितियों पर टिके रहते हैं। इसलिए गिलास की आकृति और आयतन दोनों निश्चित रहते हैं और वे परिवर्तित नहीं होते।

मुख्य बिंदु:

• द्रव (दूध) की आकृति अनिश्चित और आयतन निश्चित होता है।
• ठोस (काँच का गिलास) की आकृति और आयतन दोनों निश्चित होते हैं।
• द्रवों के कणों में गतिशीलता अधिक होती है जबकि ठोसों में वे स्थिर रहते हैं।

आम गलतियाँ:

• द्रव और ठोस दोनों के गुणों को मिला देना।
• आकर्षण बल के अंतर को स्पष्ट न करना।
• केवल फैलने के कारण को बताना, कणों की व्यवस्था को नहीं।

Exam Tips:

a) उत्तर को द्रव और ठोस के अलग-अलग भागों में विभाजित करके समझाएँ।
b) भौतिक गुणों जैसे आकृति और आयतन का सही उल्लेख करें।
c) वैज्ञानिक शब्दावली का प्रयोग करें।

 

Question 6: जब बर्फ पिघलती है और वह जल वाष्प में रूपांतरित होती है तो कणों की व्यवस्था में होने वाले परिवर्तनों को चित्र द्वारा निरूपित कीजिए।

Answer:

बर्फ (ठोस) → कण बहुत पास-पास, सुसंकुलित, नियत स्थान पर, केवल कंपन करते हैं। अंतराकणीय स्थान न्यूनतम होता है।
जल (द्रव) → कण थोड़े दूर-दूर, एक सीमित स्थान में स्वतंत्र रूप से गति करते हैं। अंतराकणीय स्थान ठोस से अधिक होता है।
जलवाष्प (गैस) → कण बहुत दूर-दूर, सभी दिशाओं में पूर्णतः स्वतंत्र गति करते हैं। अंतराकणीय स्थान अधिकतम होता है तथा आकर्षण बल नगण्य होता है।
परिवर्तन का क्रम: बर्फ गरम होने पर जल बनती है (गलनांक \( 0^\circ\text{C} \) पर), फिर जल को और गरम करने पर जलवाष्प बनती है (क्वथनांक \( 100^\circ\text{C} \) पर)। प्रत्येक चरण में कणों की दूरी बढ़ती जाती है और आकर्षण बल कम होते जाते हैं।

मुख्य बिंदु:

• ठोस से द्रव और द्रव से गैस बनने पर कणों के बीच की दूरी बढ़ती है।
• तापमान बढ़ाने पर अंतराकणीय आकर्षण बल कम होता जाता है।
• गैसीय अवस्था में कणों की गति सबसे अधिक होती है।

आम गलतियाँ:

• तीनों अवस्थाओं में कणों की दूरी को समान मान लेना।
• तापमान और अवस्था परिवर्तन के संबंध को भूल जाना।
• आकर्षण बल के घटने के क्रम को गलत लिखना।

Exam Tips:

a) ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्थाओं को अलग-अलग बिंदुओं में समझाएँ।
b) तापमान (\( 0^\circ\text{C} \) और \( 100^\circ\text{C} \)) का उल्लेख अवश्य करें।
c) कणों की दूरी और आकर्षण बल में संबंध स्पष्ट करें।

 

Question 7: निम्नलिखित में उपस्थित कणों को निरूपित करता हुआ चित्र आरेखित कीजिए — (क) ऐलुमिनियम पर्णिका (ख) ग्लिसरीन (ग) मेथेन गैस

Answer:

(क) ऐलुमिनियम पर्णिका: ऐलुमिनियम एक ठोस धातु है। इसमें कण बहुत पास-पास और सुसंकुलित होते हैं। कणों के बीच बहुत कम अंतराकणीय स्थान होता है। प्रबल आकर्षण बल के कारण कण अपनी निर्धारित स्थितियों पर बंधे रहते हैं और केवल कंपन करते हैं।
(ख) ग्लिसरीन: ग्लिसरीन एक द्रव पदार्थ है। इसमें कण ठोस की तुलना में थोड़े दूर-दूर होते हैं। कणों के बीच अंतराकणीय स्थान ठोस से अधिक होता है। कण एक सीमित स्थान के भीतर स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं।
(ग) मेथेन गैस: मेथेन एक गैस है। इसमें कण बहुत दूर-दूर होते हैं और कणों के बीच बहुत अधिक खाली स्थान होता है। अंतराकणीय आकर्षण बल नगण्य होते हैं। कण सभी दिशाओं में पूर्णतः स्वतंत्र रूप से गति करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• ऐलुमिनियम (ठोस) में कण अत्यंत निकट और व्यवस्थित होते हैं।
• ग्लिसरीन (द्रव) में कण थोड़े दूर और गतिशील होते हैं।
• मेथेन (गैस) में कण अत्यधिक दूर और स्वतंत्र होते हैं।

आम गलतियाँ:

• तीनों पदार्थों की भौतिक अवस्थाओं को आपस में मिला देना।
• कणों के बीच के रिक्त स्थान का सही वर्णन न करना।
• आकर्षण बल के अंतर को न दर्शाना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक भाग को अलग-अलग उप-शीर्षक (क), (ख) और (ग) के तहत लिखें।
b) ठोस, द्रव और गैस के मूल अंतरों को आधार बनाकर उत्तर दें।
c) परिभाषाओं में वैज्ञानिक शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 8: चित्र 7.16 (क) का अवलोकन कीजिए जिसमें एक ऐसी मोमबत्ती का चित्र है जिसे कुछ समय जलने के पश्चात बुझाया गया है। चित्र में मोम की विभिन्न अवस्थाओं को पहचानिए और चित्र 7.16 (ख) में दर्शाई गई कणों की व्यवस्था के साथ उनका मिलान कीजिए।

Answer:

मोमबत्ती में मोम तीन अवस्थाओं में दिखाई देता है —
ठोस मोम: मोमबत्ती का वह भाग जो जला नहीं है वह ठोस अवस्था में है। इसमें कण सुसंकुलित और नियत स्थान पर होते हैं। यह चित्र में दर्शाए गए पहले चित्र (ठोस — बहुत पास-पास के कण) से मेल खाता है।
द्रव मोम: मोमबत्ती की लौ के पास जो मोम पिघल गया है वह द्रव अवस्था में है। इसमें कण थोड़े दूर-दूर होते हैं और सीमित गति कर सकते हैं। यह चित्र में दर्शाए गए दूसरे चित्र (द्रव — थोड़े दूर-दूर कण) से मेल खाता है।
गैसीय मोम (धुआँ/वाष्प): जलती मोमबत्ती से उठता धुआँ मोम की गैसीय अवस्था को दर्शाता है। इसमें कण बहुत दूर-दूर और पूर्णतः स्वतंत्र होते हैं। यह चित्र में दर्शाए गए तीसरे चित्र (गैस — बहुत दूर-दूर कण) से मेल खाता है।

मुख्य बिंदु:

• मोमबत्ती में ऊष्मा के कारण ठोस मोम द्रव और गैस में बदलता है।
• ठोस मोम मेंकण पास होते हैं, द्रव में थोड़े दूर और गैस में बहुत दूर होते हैं।
• अवस्था परिवर्तन के साथ कणों की व्यवस्था बदलती है।

आम गलतियाँ:

• मोमबत्ती की अवस्थाओं को ठीक से न पहचान पाना।
• द्रव और गैसीय अवस्था के कणों में अंतर न कर पाना।
• प्रश्न के अनुसार चित्रों का सही मिलान न करना।

Exam Tips:

a) मोमबत्ती के उदाहरण को अवस्था परिवर्तन के संदर्भ में समझें।
b) ठोस, द्रव और गैसीय मोम की अलग-अलग विशेषताएँ लिखें।
c) मिलान करते समय कणों की स्थिति का स्पष्ट उल्लेख करें।

 

Question 9: समुद्र के जल का स्वाद नमकीन क्यों होता है जबकि इसमें नमक दिखाई भी नहीं देता है? समझाइए।

Answer:

समुद्र के जल में नमक (\( \text{NaCl} \)) घुला हुआ होता है। जब नमक जल में घुलता है तो उसके घटक कण बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित हो जाते हैं और जल के कणों के बीच उपलब्ध अंतराकणीय स्थानों में समा जाते हैं। ये नमक के कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि नग्न आँखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन नमक के ये घटक कण समुद्र के जल में समान रूप से फैले हुए विद्यमान रहते हैं। जब हम इस जल को पीते हैं या चखते हैं तो हमारी जीभ इन नमक के कणों का अनुभव करती है और जल का स्वाद नमकीन लगता है.

मुख्य बिंदु:

• नमक पानी के अंतराकणीय स्थानों में समा जाता है।
• नमक के कण अत्यधिक सूक्ष्म होते हैं जो नग्न आँखों से नहीं दिखते।
• विलेय के कण पूरे विलयन में समान रूप से वितरित रहते हैं।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि घुलने पर नमक नष्ट हो जाता है।
• अंतराकणीय स्थानों की भूमिका को न समझाना।
• स्वाद आने का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) विलयन और विलेय के कणों के बीच की अंतःक्रिया को समझाएँ।
b) 'अंतराकणीय स्थान' शब्द का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।
c) उत्तर को सरल और तार्किक भाषा में लिखें।

 

Question 10: चावल के दाने और चावल के आटे को जब विभिन्न पात्रों में रखा जाता है तो वे पात्र का आकार ले लेते हैं। क्या वे ठोस हैं या द्रव? व्याख्या कीजिए।

Answer:

चावल के दाने और चावल का आटा निश्चित रूप से ठोस होते हैं। हालांकि इन्हें बड़ी मात्रा में डाला जा सकता है और ये बर्तन का आकार ले लेते हैं, लेकिन यह गुण कई छोटे ठोस कणों के समूह का होता है, न कि किसी तरल पदार्थ का।
मुख्य अंतर यह है कि चावल का प्रत्येक दाना या आटे का प्रत्येक कण अपने निश्चित आकार और आयतन वाला ठोस होता है। एक सच्चा तरल पदार्थ इसलिए बहता है क्योंकि उसके मूल घटक कण (अणु) एक दूसरे के ऊपर फिसलते हैं। चावल के मामले में, बड़े दाने या कण एक दूसरे के ऊपर लुढ़कते या फिसलते हैं, न कि तरल के अणु।

मुख्य बिंदु:

• चावल के दाने और आटा ठोस होते हैं क्योंकि उनका अपना निश्चित आकार और आयतन होता है।
• बर्तन का आकार लेना कणों के समूह के ढीले रूप से व्यवस्थित होने के कारण होता है।
• सच्चे तरलों में अणु एक-दूसरे पर फिसलते हैं जबकि ठोसों के कण अपनी जगह पर रहते हैं।

आम गलतियाँ:

• बर्तन का आकार लेने के कारण इन्हें द्रव मान लेना।
• व्यक्तिगत कण और कणों के समूह में अंतर न समझना।
• तरलता और ढीले कणों के बहाव में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) स्पष्ट करें कि व्यक्तिगत कण ठोस हैं जबकि उनका ढेर बहने का भ्रम पैदा करता है।
b) ठोस और द्रव के अंतर को उनके मूल गुणों के आधार पर समझाएँ।
c) उदाहरण सहित सटीक वैज्ञानिक कारण दें।

 

NCERT Solutions for Class 8 Science Chapter 07 द्रव्य की कणीय प्रकृति

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