NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 04 Electricity Magnetic and Heating Effects (विद्युत चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव) in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 8 Science: Chapter 04 विद्युत चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव

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Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 04 विद्युत चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव

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Question 1: रिक्त स्थान भरिए — (i) वोल्टीय सेल में प्रयुक्त होने वाला विलयन ______________ कहलाता है। (ii) एक धारावाही कुंडली ______________ की भाँति व्यवहार करती है।

Answer:

(i) विद्युत-अपघट्य
(ii) चुंबक

मुख्य बिंदु:

• वोल्टीय सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
• इसमें प्रयुक्त विलयन विद्युत-अपघट्य होता है जो आयनों में विभक्त होता है।
• धारावाही कुंडली के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

आम गलतियाँ:

• छात्र विद्युत-अपघट्य की जगह केवल अम्ल लिख देते हैं।
• कुंडली को साधारण चालक मान लेना।
• चुंबकीय प्रभाव को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) रिक्त स्थान वाले प्रश्नों में सटीक वैज्ञानिक शब्दावली का प्रयोग करें।
b) वर्तनी (Spelling) पर विशेष ध्यान दें जैसे 'विद्युत-अपघट्य'।
c) एक शब्द के उत्तरों को साफ-सुथरा लिखें।

 

Question 2: सही विकल्प चुनिए — (i) शुष्क सेल, वोल्टीय सेल की तुलना में कम सुवाह्य है। (सत्य/असत्य) (ii) कुंडली तभी विद्युत-चुंबक बनती है जब कुंडली से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। (सत्य/असत्य) (iii) एक सेल के उपयोग से बना विद्युत-चुंबक दो सेलों की बैटरी के उपयोग से बने उसी विद्युत-चुंबक की अपेक्षा लोहे के अधिक कागज-क्लिपों को आकर्षित करता है। (सत्य/असत्य)

Answer:

(i) असत्य (शुष्क सेल अधिक सुवाह्य या पोर्टेबल होता है क्योंकि इसमें द्रव नहीं बल्कि गाढ़ी नम लेई होती है)
(ii) सत्य (धारा प्रवाहित होने पर ही चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है)
(iii) असत्य (दो सेलों की बैटरी अधिक प्रबल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है इसलिए वह अधिक क्लिपों को आकर्षित करती है)

मुख्य बिंदु:

• शुष्क सेल को आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
• विद्युत-चुंबक का प्रभाव धारा के परिमाण पर निर्भर करता है।
• सेलों की संख्या बढ़ाने से चुंबकीय बल बढ़ता है।

आम गलतियाँ:

• सुवाह्य (portable) शब्द का अर्थ न समझ पाना।
• सत्य/असत्य के साथ उचित कारण न लिखना।
• सेल और बैटरी के प्रभाव में अंतर न समझना।

Exam Tips:

a) कथन वाले प्रश्नों में प्रत्येक भाग का कारण अवश्य पढ़ें।
b) सत्य या असत्य स्पष्ट रूप से लिखने के बाद उसका संक्षिप्त कारण दें।
c) 'सुवाह्य' का अर्थ परिवहन में आसान होना होता है, इसे याद रखें।

 

Question 3: किसी निक्रोम के तार में अल्प समय के लिए विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है। (i) तार गरम हो जाता है। (ii) तार के नीचे रखे चुंबकीय दिक्सूचक की सुई विक्षेपित हो जाती है। सही विकल्प का चयन कीजिए — (क) केवल विकल्प (i) सही है। (ख) केवल विकल्प (ii) सही है। (ग) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं। (घ) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही नहीं हैं।

Answer:

सही उत्तर (ग) है — विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं।
कारण:
पहला — निक्रोम का प्रतिरोध अधिक होने के कारण विद्युत ऊर्जा तापीय ऊर्जा में बदल जाती है जिससे तार गरम हो जाता है (विद्युत धारा का तापीय प्रभाव)।
दूसरा — धारावाही तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है जो दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करता है (विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव)।

मुख्य बिंदु:

• विद्युत धारा के प्रवाह से एकसाथ तापीय और चुंबकीय दोनों प्रभाव उत्पन्न हो सकते हैं।
• प्रतिरोधकता के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है।
• चालकों के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनता है।

आम गलतियाँ:

• केवल एक ही प्रभाव (तापीय या चुंबकीय) को सही मान लेना।
• निक्रोम के उच्च प्रतिरोध के गुण को भूल जाना।
• विकल्पों को बिना सोचे-समझे टिक करना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी दिए गए कथनों की अलग से जाँच करें।
b) विद्युत धारा के प्रभावों को आपस में जोड़कर समझें।
c) कारण सहित उत्तर लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।

 

Question 4: स्तंभ ‘क’ में दिए गए एकांशों का मिलान स्तंभ ‘ख’ में दिए गए एकांशों से कीजिए:
(i) वोल्टीय सेल — (क) विद्युत तापक हेतु सर्वाधिक उपयुक्त
(ii) विद्युत इस्तरी — (ख) विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर कार्य करती है
(iii) निक्रोम तार — (ग) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करती है
(iv) विद्युत-चुंबक — (घ) रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विद्युत उत्पन्न करती है

Answer:

(i) वोल्टीय सेल — (घ) रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विद्युत उत्पन्न करती है
(ii) विद्युत इस्तरी — (ग) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करती है
(iii) निक्रोम तार — (क) विद्युत तापक हेतु सर्वाधिक उपयुक्त
(iv) विद्युत-चुंबक — (ख) विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर कार्य करती है

मुख्य बिंदु:

• वोल्टीय सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत में बदलता है।
• विद्युत इस्तरी और हीटर तापीय प्रभाव पर कार्य करते हैं।
• विद्युत-चुंबक चुंबकीय प्रभाव का उपयोग करता है।

आम गलतियाँ:

• मिलान करते समय रेखाएँ खींचना जिससे उत्तरपत्रिका गंदी हो जाती है (सही क्रम आमने-सामने लिखना बेहतर है)।
• निक्रोम तार और तापक के संबंध को न पहचान पाना।

Exam Tips:

a) मिलान वाले प्रश्नों को तीर के निशान के बजाय सही विकल्प के सामने उसका सही युग्म लिखकर हल करें।
b) प्रत्येक घटक के मुख्य कार्य को याद रखें।
c) परीक्षा में स्पष्ट मिलान सारणी बनाएं।

 

Question 5: सामान्यतः विद्युत-तापन युक्तियों में निक्रोम तार का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह (i) विद्युत का सुचालक है। (ii) کسی (किसी) निश्चित परिमाण की विद्युत धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है। (iii) ताँबे की अपेक्षा सस्ता है। (iv) विद्युत का कुचालक है।

Answer:

सही विकल्प (ii) है — किसी निश्चित परिमाण की विद्युत धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।

मुख्य बिंदु:

• निक्रोम का उच्च प्रतिरोध अधिक ऊष्मा उत्पन्न करने में सहायक होता है।
• यह उच्च तापमान पर भी आसानी से ऑक्सीकृत (जल) नहीं होता।
• तापन युक्तियों के लिए यह आदर्श सामग्री है।

आम गलतियाँ:

• इसे केवल विद्युत का सुचालक मान लेना (अन्य धातुएँ भी सुचालक होती हैं)।
• कीमत (सस्ता होना) को मुख्य कारण समझ लेना।

Exam Tips:

a) वैज्ञानिक कारणों वाले बहुविकल्पीय प्रश्नों में विशिष्ट गुण (जैसे उच्च प्रतिरोध) को पहचानें।
b) सही विकल्प का क्रमांक और कथन दोनों लिखें।
c) तापन युक्तियों से जुड़े निक्रोम के गुणों को अच्छे से याद रखें।

 

Question 6: विद्युत-तापन युक्तियों (जैसे — विद्युत कक्ष-तापक अथवा विद्युत हीटर) को प्रायः पारंपरिक तापन विधियों (जैसे — लकड़ी अथवा चारकोल जलाना) की तुलना में अधिक सुविधाजनक माना जाता है। समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस कथन के समर्थन हेतु कारण बताइए।

Answer:

विद्युत-तापन युक्तियाँ पारंपरिक तापन विधियों से निम्नलिखित कारणों से बेहतर हैं —
• पर्यावरणीय लाभ: लकड़ी और चारकोल जलाने से धुआँ और हानिकारक गैसें उत्पन्न होती हैं जो वायु प्रदूषण बढ़ाती हैं, जबकि विद्युत तापन युक्तियाँ प्रत्यक्ष प्रदूषण नहीं फैलातीं।
• स्वास्थ्य लाभ: लकड़ी के धुएँ से श्वसन संबंधी गंभीर रोग होते हैं, विद्युत तापन से ऐसा कोई खतरा नहीं होता।
• सुविधा और सुरक्षा: इनमें स्वचालित तापमान नियंत्रण होता है और इन्हें आसानी से चालू-बंद किया जा सकता है।
• वनों की रक्षा: लकड़ी जलाने से वनों की कटाई होती है, विद्युत तापन इस दबाव को कम करता है।
• दक्षता: विद्युत तापन अधिक कुशल है क्योंकि अधिकांश ऊर्जा सीधे उपयोग में आती है।

मुख्य बिंदु:

• पारंपरिक विधियाँ प्रदूषण और वनों की कटाई का कारण बनती हैं।
• विद्युत तापन स्वच्छ और नियंत्रित ऊर्जा स्रोत है।
• यह घरेलू स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है।

आम गलतियाँ:

• केवल लागत (खर्च) की बात करना और पर्यावरण तथा स्वास्थ्य को भूल जाना।
• बिंदुओं में उत्तर न लिखकर लंबे पैराग्राफ में लिखना।

Exam Tips:

a) ऐसे दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों को हमेशा मुख्य बिंदुओं (Headings) के साथ लिखें।
b) पर्यावरण, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे पहलुओं को जरूर शामिल करें।
c) स्पष्ट भाषा और उचित शब्दावली का प्रयोग करें।

 

Question 7: चित्र 4.4 (क) का अवलोकन कीजिए। यदि इसमें कुंडली के समीप रखे दिक्सूचक की सुई में विक्षेपण होता है तो — (i) विद्युत धारा का पथ दर्शाने हेतु आरेख पर तीर का चिह्न लगाइए। (ii) स्पष्ट कीजिए कि कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर दिक्सूचक सुई क्यों घूमती है? (iii) यदि आप बैटरी के सिरों को उल्टा कर देते हैं तो पूर्वानुमान लगाइए कि विक्षेप पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

Answer:

(i) विद्युत धारा बैटरी के धनात्मक (+) सिरे से निकलकर कुंडली में प्रवेश करती है, फेरों से होते हुए दूसरे सिरे से बाहर निकलती है और ऋणात्मक (-) सिरे पर पहुँचती है। तीर का चिह्न बैटरी के + सिरे से कुंडली की ओर और कुंडली से वापस – सिरे की ओर लगाया जाएगा।
(ii) जब कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो चुंबकीय प्रभाव के कारण उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। कुंडली एक विद्युत-चुंबक की तरह व्यवहार करती है। दिक्सूचक सुई स्वयं एक छोटा चुंबक होती है, जो कुंडली के चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव से विक्षेपित हो जाती है क्योंकि विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
(iii) यदि बैटरी के सिरे उल्टे कर दिए जाएँ तो कुंडली में धारा की दिशा विपरीत हो जाएगी, जिससे उसके उत्तर और दक्षिण ध्रुव आपस में बदल जाएँगे। परिणामस्वरूप दिक्सूचक सुई का विक्षेपण पहले की विपरीत दिशा में होगा (यदि पहले बाईं ओर था, तो अब दाईं ओर होगा)।

मुख्य बिंदु:

• धारा की दिशा बदलने से चुंबकीय ध्रुव भी बदल जाते हैं।
• धारावाही कुंडली विद्युत-चुंबक का कार्य करती है।
• दिक्सूचक सुई चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति दर्शाती है।

आम गलतियाँ:

• धारा के प्रवाह की दिशा (धन से ऋण) में भ्रम होना।
• बैटरी उल्टे करने पर विक्षेप की दिशा विपरीत होने के नियम को भूल जाना।

Exam Tips:

a) उप-प्रश्नों (i), (ii), (iii) के उत्तर अलग-अलग पैराग्राफ या बिंदुओं में लिखें।
b) चुंबकीय ध्रुवों के परिवर्तन के नियम को स्पष्ट रूप से समझाएं।
c) आरेख आधारित प्रश्नों में दिशा का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 8: मान लीजिए कि अध्याय के आरंभ में उल्लिखित कहानी में सुमना अपने उत्थापक विद्युत-चुंबक प्रदर्श के स्विच को ऑफ करना भूल जाती है। कुछ समय पश्चात लोहे की कील लोहे से बनी कागज-क्लिपों को नहीं उठा पाती है परंतु लोहे की कील के चारों ओर लपेटा गया तार अभी भी गरम है। उत्थापक विद्युत-चुंबक ने क्लिपों को उठाना क्यों बंद कर दिया? संभावित कारण बताइए।

Answer:

लंबे समय तक लगातार धारा प्रवाहित होते रहने के कारण सेल या बैटरी के भीतर के रासायनिक पदार्थ समाप्त हो गए होंगे, जिससे बैटरी निष्क्रिय हो गई और विद्युत धारा का प्रवाह बंद हो गया। जब कुंडली में धारा का प्रवाह बंद हो जाता है तो चुंबकीय क्षेत्र समाप्त हो जाता है और विद्युत-चुंबक अपना चुंबकीय प्रभाव खो देता है, इसलिए क्लिपें नहीं उठतीं। तार का अभी भी गरम रहना यह दर्शाता है कि तापीय प्रभाव के कारण तार में ऊष्मा संचित हो गई थी जो धीरे-धीरे ठंडी हो रही है।

मुख्य बिंदु:

• बैटरी के रसायन समाप्त होने से धारा बंद हो जाती है।
• धारा न होने पर चुंबकीय प्रभाव तुरंत समाप्त हो जाता है।
• तार का तापीय प्रभाव (ऊष्मा) कुछ समय तक बना रहता है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि तार ठंडा होने के बाद चुंबकत्व वापस आ जाएगा (बिना धारा के चुंबकत्व नहीं रहता)।
• बैटरी के निष्क्रिय होने के कारण को न समझ पाना।

Exam Tips:

a) व्यावहारिक परिस्थितियों पर आधारित प्रश्नों में वैज्ञानिक कारणों (जैसे रासायनिक ऊर्जा की समाप्ति) को स्पष्ट करें।
b) तापीय प्रभाव और चुंबकीय प्रभाव के समय अंतराल में अंतर को समझें।
c) उत्तर को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।

 

Question 9: चित्र 4.12 (क) और (ख) में से किस चित्र में स्विच बंद (ऑन) होने पर एल.ई.डी. दीप्त होगी?

Answer:

चित्र (क) में एल.ई.डी. दीप्त होगी।
कारण:
चित्र (क) में नींबू का रस विद्युत-अपघट्य का कार्य करता है जिसमें उपस्थित अम्ल आयनों में विभाजित होकर विद्युत का चालन करता है। लोहे की कील और ताँबे की पत्ती भिन्न धातुओं के इलेक्ट्रोड हैं जिनके बीच रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत धारा उत्पन्न होती है। चित्र (ख) में शुद्ध जल है जो विद्युत का कुचालक होता है क्योंकि इसमें आयन नहीं होते, अतः धारा प्रवाहित नहीं होगी।

मुख्य बिंदु:

• शुद्ध जल विद्युत का कुचालक होता है।
• अम्ल या लवण युक्त जल (विद्युत-अपघट्य) विद्युत का चालन करता है।
• इलेक्ट्रोडों और विलयन के बीच की प्रतिक्रिया से धारा बनती है।

आम गलतियाँ:

• शुद्ध जल और अम्लीय जल में अंतर न समझ पाना।
• इलेक्ट्रोड की भूमिका को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) चित्र आधारित प्रश्नों में पहले दोनों चित्रों की स्थितियों का तुलनात्मक अध्ययन करें।
b) चालकता के लिए आयनों की उपस्थिति अनिवार्य है, इसे स्पष्ट रूप से लिखें।
c) संक्षिप्त और सटीक कारण दें।

 

Question 10: नेहा ठीक वैसी ही कुंडली लेती है जैसी क्रियाकलाप 4.4 में ली गई थी किंतु वह इसके भीतर से लोहे की कील को बाहर निकाल देती है जिससे केवल तार से बनी कुंडली ही रह जाती है। क्या कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी? यदि हाँ, तो क्या विक्षेपण पहले की तुलना में अधिक होगा अथवा कम?

Answer:

हाँ, कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी। परंतु विक्षेपण पहले की तुलना में कम होगा।
कारण:
चुंबकीय प्रभाव कुंडली में प्रवाहित विद्युत धारा के कारण होता है। जब कुंडली में धारा बहती है तो चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है जो सुई को विक्षेपित करता है। लोहे की कील एक लौह क्रोड का कार्य करती है जो कुंडली के चुंबकीय प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है। बिना लोहे की कील के कुंडली का चुंबकीय प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर होता है, इसलिए दिक्सूचक सुई का विक्षेपण कम होगा।

मुख्य बिंदु:

• धारावाही तार की कुंडली स्वयं चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
• लौह क्रोड (कोर) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता को कई गुना बढ़ा देता है।
• क्रोड हटाने पर चुंबकत्व कमजोर हो जाता है।

आम गलतियाँ:

• यह समझना कि बिना कील के कुंडली कोई चुंबकीय प्रभाव नहीं दिखाएगी।
• लौह क्रोड के कार्य को ठीक से न समझ पाना।

Exam Tips:

a) 'हाँ/ना' वाले प्रश्न में पहले स्पष्ट निर्णय दें फिर उसका वैज्ञानिक कारण बताएं।
b) 'लौह क्रोड' (Iron Core) शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
c) तुलनात्मक शब्दों (अधिक/कम) का सही उल्लेख करें।

 

Question 11: चित्र 4.13 में दर्शाए अनुसार हमारे पास लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम एवं निक्रोम की बनी एक जैसी आकृति और आकार की चार कुंडलियाँ हैं। जब कुंडलां (कुंडलियों) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडलां (कुंडलियों) के समीप रखी दिक्सूचक सुइयाँ विक्षेप दर्शाएँगी — (i) केवल परिपथ (क) में (ii) केवल परिपथ (क) और (ख) में (iii) केवल परिपथ (क), (ख) और (ग) में (iv) सभी चारों परिपथों में

Answer:

सही विकल्प (iv) है — सभी चारों परिपथों में।
कारण:
विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव तब उत्पन्न होता है जब किसी भी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम और निक्रोम — ये चारों पदार्थ विद्युत के अच्छे सुचालक हैं। इन सभी पदार्थों की कुंडलियों से धारा प्रवाहित होने पर इनके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होगा जो दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगा।

मुख्य बिंदु:

• सभी धातुएँ (लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, निक्रोम) विद्युत की सुचालक होती हैं।
• सुचालक से धारा बहने पर चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न होता है।
• सामग्री बदलने पर भी चुंबकीय प्रभाव का बुनियादी नियम नहीं बदलता।

आम गलतियाँ:

• केवल ताँबे या लोहे को ही सुचालक मान लेना।
• निक्रोम या ऐलुमिनियम के चालक होने पर संदेह करना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्न में सभी विकल्पों का वैज्ञानिक विश्लेषण करें।
b) सुचालक पदार्थों की सामान्य सूची याद रखें।
c) सही विकल्प चुनकर उसका संक्षिप्त और उचित कारण अवश्य लिखें।

 

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