Download NCERT Solutions for Class 8 Science Chapter 03 स्वास्थ्य एक अमूल्य निधि
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Question 1: चित्रों में दर्शाए गए रोगों को संचरणीय अथवा असंचरणीय रोगों के रूप में समूहित करें।
Answer:
संचरणीय रोग (वे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं):
• सर्दी-जुकाम और फ्लू — विषाणु द्वारा, वायु के माध्यम से
• आंत्र ज्वर (टाइफॉइड) — जीवाणु द्वारा, दूषित जल और भोजन से
• छोटी माता (चिकनपॉक्स) — विषाणु द्वारा, वायु के माध्यम से
असंचरणीय रोग (वे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते हैं):
• मधुमेह (डायबीटीज) — जीवनशैली और हॉर्मोन असंतुलन के कारण
• अस्थमा (दमा) — पर्यावरण, एलर्जी और जीवनशैली के कारण
मुख्य बिंदु:
• संचरणीय रोग रोगाणुओं (जीवाणु, विषाणु आदि) द्वारा फैलते हैं।
• असंचरणीय रोग आंतरिक कारणों, जीवनशैली या पर्यावरण से जुड़े होते हैं।
• सर्दी-जुकाम और आंत्र ज्वर संचरणीय हैं जबकि मधुमेह और अस्थमा असंचरणीय हैं।
आम गलतियाँ:
• संचरणीय और असंचरणीय रोगों के बीच का अंतर न समझना।
• मधुमेह को संचरणीय रोग समझ लेना।
• रोगाणुओं के प्रकार और उनके फैलने के माध्यम को आपस में मिला देना।
Exam Tips:
a) संचरणीय और असंचरणीय रोगों की परिभाषा अच्छी तरह याद रखें।
b) उदाहरण सहित अंतर स्पष्ट करने का अभ्यास करें।
c) रोगों के फैलने के कारणों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 2: रोगों को व्यापक रूप से संचरणीय और असंचरणीय रोगों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। नीचे दिए गए विकल्पों में से असंचरणीय रोगों को पहचानिए। (i) आंत्र ज्वर (ii) अस्थमा (iii) मधुमेह (iv) खसरा (क) (i) और (ii) (ख) (ii) और (iii) (ग) (i) और (iv) (घ) (ii) और (iv)
Answer:
सही उत्तर विकल्प (ख) (ii) और (iii) है।
स्पष्टीकरण:
• अस्थमा (ii) और मधुमेह (iii) असंचरणीय रोग हैं क्योंकि ये रोगाणुओं के कारण नहीं होते और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते।
• ये जीवनशैली, आहार और पर्यावरण से जुड़े होते हैं।
• इसके विपरीत, आंत्र ज्वर (i) और खसरा (iv) संचरणीय रोग हैं जो क्रमशः जीवाणु और विषाणु से फैलते हैं।
मुख्य बिंदु:
• अस्थमा और मधुमेह असंचरणीय रोगों के अंतर्गत आते हैं।
• आंत्र ज्वर और खसरा संक्रामक या संचरणीय रोग हैं।
• विकल्प (ख) दोनों असंचरणीय रोगों की सही पहचान करता है।
आम गलतियाँ:
• संचरणीय और असंचरणीय विकल्पों में भ्रमित होना।
• आंत्र ज्वर को असंचरणीय मान लेना।
• विकल्पों के संयोजन को ध्यान से न पढ़ना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करते समय सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) प्रत्येक रोग की प्रकृति (संचरणीय/असंचरणीय) की जाँच करें।
c) सही विकल्प का चयन करने के बाद उसका संक्षिप्त कारण भी समझें।
Question 3: आपके विद्यालय में फ्लू का प्रकोप हुआ है। आपके अनेक सहपाठी अनुपस्थित हैं जबकि कुछ खाँसते और छींकते हुए विद्यालय आ रहे हैं। (i) संक्रमण को और अधिक फैलने से रोकने के लिए विद्यालय द्वारा तत्काल क्या उपाय किए जाने चाहिए? (ii) यदि आपके साथ बेंच पर बैठने वाले सहपाठी में फ्लू के लक्षण दिखने लगें तो आप उन्हें दु:ख अथवा ठेस पहुँचाए बिना कैसे प्रतिक्रिया देंगे? (iii) इस स्थिति में आप स्वयं को और दूसरों को संक्रमित होने से कैसे बचा सकते हैं?
Answer:
(i) विद्यालय द्वारा निम्नलिखित उपाय तुरंत किए जाने चाहिए —
• फ्लू के लक्षण वाले विद्यार्थियों को घर भेजा जाए और आराम करने की सलाह दी जाए।
• कक्षाओं, शौचालयों और सामान्य स्थानों को अच्छी तरह साफ और कीटाणुरहित किया जाए।
• सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को मास्क पहनने के लिए कहा जाए।
• बार-बार हाथ धोने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
• अभिभावकों को सूचित किया जाए कि यदि बच्चे में लक्षण हों तो उन्हें विद्यालय न भेजें।
• भीड़ कम करने के लिए कक्षाओं को हवादार रखा जाए।
(ii) मैं सहपाठी से प्यार से कहूँगा — “दोस्त, तुम्हें बुखार और खाँसी लग रही है। क्या तुम ठीक हो? मेरे विचार से तुम्हें शिक्षक को बताकर घर जाकर आराम करना चाहिए ताकि तुम जल्दी ठीक हो जाओ। चिंता मत करो, मैं बाद में नोट्स शेयर कर दूँगा।” इस तरह बिना शर्मिंदा किए सहानुभूति के साथ उसकी मदद की जा सकती है।
(iii) इस स्थिति में आप स्वयं को और दूसरों को संक्रमित होने से नीचे दिए गए तरीकों से बचा सकते हैं:
• बार-बार साबुन और पानी से हाथ धोएँ।
• मास्क पहनें।
• अपनी आँखों, नाक और मुँह को बिना धुले हाथों से न छुएँ।
• संक्रमित व्यक्ति के साथ खाने-पीने की वस्तुएँ साझा न करें।
• रोगी से उचित दूरी बनाए रखें।
• कक्षा में हवा आने-जाने दें — खिड़कियाँ खुली रखें।
मुख्य बिंदु:
• फ्लू एक संचरणीय रोग है जो वायु और संपर्क से फैलता है।
• सहपाठियों के प्रति संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार आवश्यक है।
• व्यक्तिगत स्वच्छता और मास्क का प्रयोग संक्रमण से बचाता है।
आम गलतियाँ:
• बीमार सहपाठी के साथ रुखा व्यवहार करना।
• व्यक्तिगत स्वच्छता के नियमों की उपेक्षा करना।
• विद्यालय स्तर पर एहतियाती उपायों को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) व्यावहारिक परिस्थितियों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर तार्किक और संवेदनशील रूप से दें।
b) निवारक उपायों को बिंदुओं के रूप में स्पष्ट लिखें।
c) सामाजिक जिम्मेदारी और व्यक्तिगत सुरक्षा दोनों का उल्लेख करें।
Question 4: आपका परिवार ऐसे स्थान पर यात्रा की योजना बना रहा है जहाँ मलेरिया का प्रकोप है। (i) यात्रा से पूर्व, यात्रा के समय और यात्रा के पश्चात आपको कौन-कौन सी सावधानियाँ रखनी चाहिए? (ii) आप अपने भाई अथवा बहन को मच्छरदानी या मच्छर प्रतिकर्षी का महत्त्व कैसे समझाएँगे? (iii) यदि ऐसे क्षेत्रों में यात्री स्वास्थ्य सलाह की अनदेखी करते हैं तो क्या हो सकता है?
Answer:
(i) सावधानियाँ:
• यात्रा से पूर्व: चिकित्सक से मलेरिया-रोधी दवाइयाँ लें, मच्छर प्रतिकर्षी (Repellent) क्रीम और मच्छरदानी साथ ले जाएँ, तथा पूरी बाँह के कपड़े पैक करें।
• यात्रा के समय: शाम और रात को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, मच्छर प्रतिकर्षी क्रीम लगाएँ, मच्छरदानी के अंदर सोएँ, रुके हुए पानी के पास न जाएँ जहाँ मच्छर पनपते हैं, तथा उबला हुआ या बोतलबंद पानी पिएँ।
• यात्रा के पश्चात: यदि बुखार, कंपकंपी या अत्यधिक पसीना आए तो तुरंत चिकित्सक से मिलें और मलेरिया परीक्षण (रक्त जाँच) करवाएँ।
(ii) मैं उन्हें सरल भाषा में समझाऊँगा — “मलेरिया एक खतरनाक बीमारी है जो मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होती है। जब हम मच्छरदानी के अंदर सोते हैं या मच्छर भगाने वाली क्रीम लगाते हैं, तो मच्छर हमें नहीं काट पाता और हम सुरक्षित रहते हैं। यह छोटी-सी सावधानी हमें बहुत बड़ी बीमारी से बचा सकती है।”
(iii) यदि यात्री स्वास्थ्य सलाह की अनदेखी करें तो —
• मच्छर के काटने से मलेरिया हो सकता है जिसमें तेज बुखार, कंपकंपी और थकान होती है।
• समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।
• संक्रमित यात्री घर लौटने पर परिवार और समुदाय में रोग फैला सकता है।
• बार-बार मलेरिया होने से शरीर कमजोर पड़ जाता है।
मुख्य बिंदु:
• मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है।
• यात्रा के तीनों चरणों (पूर्व, समय, पश्चात) में विशेष सतर्कता जरूरी है।
• स्वास्थ्य सलाह की अनदेखी करने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल यात्रा के समय सावधान रहना और बाद के लक्षणों की उपेक्षा करना।
• मच्छरों से बचाव के उपायों को हल्के में लेना।
• मलेरिया के लक्षणों और परिणामों को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) यात्रा से जुड़े तीनों चरणों को अलग-अलग headings के तहत लिखें।
b) बच्चों या परिवार को समझाने वाले उत्तर को सरल और स्पष्ट भाषा में लिखें।
c) स्वास्थ्य सलाह की अनदेखी के परिणामों को बिंदुवार दर्शाएं।
Question 5: आपके चाचाजी ने अपने मित्रों की संगत में पड़कर धूम्रपान करना आरंभ कर दिया है जबकि यह सर्वविदित है कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और मृत्यु का कारण भी बन सकता है। (i) आप उन्हें ठेस पहुँचाए बिना उनसे ऐसा क्या कहेंगे जिससे कि वे इसे छोड़ दें? (ii) यदि आपके मित्र ने पार्टी में आपको धूम्रपान करने के लिए कहा तो आप क्या करेंगे? (iii) विद्यालय ऐसी हानिकारक आदतों से विद्यार्थियों को बचाने में कैसे सहायता कर सकते हैं?
Answer:
(i) मैं प्यार और सम्मान के साथ चाचाजी से कहूँगा — “चाचाजी, आप हम सबके लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। मुझे पढ़ाई में पता चला है कि धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग और साँस की तकलीफ हो सकती है। मैं चाहता हूँ कि आप हमेशा स्वस्थ रहें और हमारे साथ खुशी से जीएँ। क्या आप इसे धीरे-धीरे छोड़ने की कोशिश करेंगे? डॉक्टर से मदद भी ली जा सकती है।”
(ii) मैं दृढ़ता से लेकिन विनम्रता से मना कर दूँगा और कहूँगा — “नहीं धन्यवाद, मैं धूम्रपान नहीं करता। यह मेरे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और मेरा निर्णय है।” सच्चा मित्र वही होता है जो हमारी सीमाओं का सम्मान करे। यदि मित्र दबाव डाले तो उस संगत से दूर रहना ही सही निर्णय है।
(iii) विद्यालय ऐसी हानिकारक आदतों से विद्यार्थियों को बचाने में निम्नलिखित तरीकों से सहायता कर सकते हैं:
• स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें।
• धूम्रपान और नशे के दुष्प्रभावों पर चर्चा और नाटक करवाएँ।
• विद्यालय परिसर को पूर्णतः तंबाकू-मुक्त क्षेत्र घोषित करें।
• परामर्शदाता की सेवाएँ उपलब्ध कराएँ ताकि विद्यार्थी दबाव से निपट सकें।
• खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों से विद्यार्थियों का समय सकारात्मक कार्यों में लगाएँ।
मुख्य बिंदु:
• धूम्रपान फेफड़ों और हृदय के लिए अत्यंत हानिकारक है।
• बड़ों से बात करते समय आदर और स्नेह का भाव होना चाहिए।
• सहपाठियों के दबाव (Peer pressure) से बचने के लिए दृढ़ता आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• बड़ों को सलाह देते समय अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना।
• मित्रों के दबाव में आकर गलत आदतें अपना लेना।
• विद्यालय की भूमिका को केवल पढ़ाई तक सीमित समझना।
Exam Tips:
a) नैतिक मूल्यों और व्यावहारिक समझ पर आधारित प्रश्नों के उत्तर संयमित भाषा में लिखें।
b) सहपाठी के दबाव से निपटने का तरीका दृढ़ता और शिष्टाचार के साथ बताएं।
c) विद्यालय के सकारात्मक प्रयासों को बिंदुओं में स्पष्ट करें।
Question 6: सानिया अपनी सखी विनीता से कहती है, “प्रतिजैविक औषधियाँ किसी भी संक्रमण को ठीक कर सकती हैं इसलिए हमें रोगों की चिंता नहीं करनी चाहिए।” विनीता ऐसे कौन-कौन से प्रश्न पूछ सकती हैं जिससे सानिया समझ सके कि उसका कथन गलत है?
Answer:
विनीता सानिया से निम्नलिखित प्रश्न पूछ सकती है —
• सानिया, क्या तुम जानती हो कि प्रतिजैविक औषधियाँ केवल जीवाणु से होने वाले संक्रमणों पर ही काम करती हैं — विषाणु (वायरस) से होने वाली सर्दी, फ्लू या कोविड पर नहीं?
• क्या तुमने प्रतिजैविक प्रतिरोध के बारे में सुना है? यदि हम बिना जरूरत के ये दवाइयाँ लेते रहें तो जीवाणु उनके प्रति प्रतिरोधी बन जाते हैं और दवाइयाँ बेअसर हो जाती हैं — तब क्या होगा?
• क्या यह सही नहीं है कि प्रतिजैविक औषधियाँ केवल चिकित्सक के परामर्श पर लेनी चाहिए — अपने मन से लेना खतरनाक हो सकता है?
• यदि प्रतिजैविक सब कुछ ठीक कर सकती हैं तो फिर टीकाकरण, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली की क्या जरूरत है?
• क्या प्रतिजैविक औषधियाँ मलेरिया या डेंगू जैसे रोगों में भी काम करती हैं जो प्रोटोजोआ या विषाणु से होते हैं?
मुख्य बिंदु:
• प्रतिजैविक (Antibiotics) केवल जीवाणु जनित रोगों पर प्रभावी होती हैं।
• इनका अनावश्यक उपयोग प्रतिजैविक प्रतिरोध (Antibiotic resistance) का कारण बनता है।
• वायरल संक्रमणों पर प्रतिजैविक बेअसर होती हैं।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि प्रतिजैविक हर प्रकार के रोग को ठीक कर सकती हैं।
• चिकित्सक की सलाह के बिना दवाइयाँ लेना।
• वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण में अंतर न समझना।
Exam Tips:
a) प्रतिजैविकों की कार्यप्रणाली और सीमाओं को अच्छी तरह समझें।
b) वैज्ञानिक तर्कों के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दें।
c) प्रतिजैविक प्रतिरोध के नुकसान को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 7: निम्नलिखित तालिका में एक वर्ष की अवधि में एक चिकित्सालय में अंकित किए गए डेंगू के मामलों की संख्या की जानकारी दी गई है — (तालिका के आधार पर बार ग्राफ और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें)
Answer:
(i) किन तीन महीनों में डेंगू के मामले सबसे अधिक थे?
उत्तर: जुलाई, अगस्त और सितंबर — इन तीनों महीनों में सर्वाधिक 65-65 मामले दर्ज हुए।
(ii) किस महीने अथवा महीनों में मामले सबसे कम थे?
उत्तर: जनवरी में सबसे कम 10 मामले थे।
(iii) डेंगू के सर्वाधिक प्रकोप वाले महीनों में कौन-से प्राकृतिक या पर्यावरणीय कारण इसके मामलों में वृद्धि का कारण बन सकते थे?
उत्तर: जुलाई से सितंबर मानसून का मौसम होता है। इस दौरान:
• वर्षा के कारण जगह-जगह पानी जमा हो जाता है जो मच्छरों के प्रजनन का उत्तम स्थान बनता है।
• गर्म और नम मौसम में एडीज मच्छर (डेंगू का वाहक) तेजी से पनपता है।
• घरों में कूलर, गमले, टायर आदि में रुका पानी मच्छरों को आमंत्रित करता है।
• मानसून के बाद जल-जमाव के कारण मच्छरों की संख्या और बढ़ जाती है।
(iv) कुछ ऐसे निवारक उपाय सुझाइए जो समुदाय अथवा सरकार द्वारा ऐसे समय से पूर्व किए जा सकते हैं जब डेंगू के मामले सबसे अधिक होते हैं ताकि डेंगू के प्रकोप को कम किया जा सके?
उत्तर: मानसून से पहले (अप्रैल-जून में) निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
• घरों और सार्वजनिक स्थानों पर जमे पानी को नष्ट करने का अभियान चलाएँ।
• नालियों की सफाई और कीटनाशक छिड़काव करें।
• विद्यालयों और सामुदायिक केंद्रों पर जागरूकता शिविर आयोजित करें।
• मच्छरदानी और मच्छर प्रतिकर्षी का वितरण करें।
• स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात करें।
• रोगियों की शीघ्र पहचान और उपचार की व्यवस्था करें।
मुख्य बिंदु:
• डेंगू का प्रकोप मानसून के मौसम में सबसे अधिक होता है।
• जल-जमाव मच्छरों के प्रजनन का मुख्य कारण है।
• मानसून से पहले निवारक उपाय करके डेंगू के प्रकोप को कम किया जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• आँकड़ों का विश्लेषण करते समय महीनों के नाम गलत पढ़ना।
• पर्यावरणीय कारणों और निवारक उपायों को आपस में मिला देना।
• समय-पूर्व किए जाने वाले उपायों की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) तालिका या ग्राफ आधारित प्रश्नों के उत्तर आँकड़ों के अनुसार सटीक दें।
b) पर्यावरणीय कारणों को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
c) निवारक उपायों को कालक्रम (मानसून से पहले) के अनुसार समझाएं।
Question 8: कल्पना कीजिए कि आप एक विद्यालय के स्वास्थ्य अभियान के प्रभारी हैं। इस भूमिका में आप संचरणीय और असंचरणीय रोगों को कम करने के लिए कौन-कौन से मुख्य संदेश देंगे?
Answer:
संचरणीय रोगों के लिए संदेश:
• “हाथ धोएँ — रोग भगाएँ!” — खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ जरूर धोएँ।
• खाँसते-छींकते समय मुँह और नाक ढकें।
• बीमार होने पर घर पर आराम करें ताकि रोग न फैले।
• उबला हुआ पानी पिएँ और ढका हुआ भोजन खाएँ।
• टीकाकरण समय पर करवाएँ — यह आपकी और दूसरों की रक्षा करता है।
• घर के आस-पास पानी जमा न होने दें।
असंचरणीय रोगों के लिए संदेश:
• “जंक फूड छोड़ो — स्वास्थ्य अपनाओ!” — प्रतिदिन फल, सब्जियाँ और साबुत अनाज खाएँ।
• प्रतिदिन कम से कम 30-60 मिनट व्यायाम करें।
• स्क्रीन टाइम कम करें — प्रकृति में समय बिताएँ।
• पर्याप्त नींद लें — 8-10 घंटे।
• तम्बाकू, मद्य और मादक पदार्थों को सदा ‘ना’ कहें।
• तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान और योग करें।
मुख्य बिंदु:
• संचरणीय रोगों से बचाव के लिए स्वच्छता और टीकाकरण जरूरी है।
• असंचरणीय रोगों से बचाव के लिए संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली आवश्यक है।
• एक स्वास्थ्य प्रभारी के रूप में सकारात्मक और प्रेरक संदेश दिए जाने चाहिए।
आम गलतियाँ:
• दोनों प्रकार के रोगों के संदेशों को मिला देना।
• केवल उपचार पर ध्यान देना और रोकथाम के उपायों को छोड़ देना।
• संदेशों को आकर्षक और स्पष्ट रूप से न लिखना।
Exam Tips:
a) संचरणीय और असंचरणीय रोगों के संदेशों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करके लिखें।
b) नारे (Slogans) का प्रयोग उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।
c) दैनिक जीवन से जुड़ी आदतों को संदेशों में शामिल करें।
Question 9: यह सलाह दी जाती है कि वायरल संक्रमण, जैसे— सर्दी, खाँसी या फ्लू में प्रतिजैविक औषधियाँ न लें। क्या आप इस सलाह के संभावित कारण बता सकते हैं?
Answer:
इस सलाह के निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण कारण हैं —
• कारण 1: प्रतिजैविक वायरस पर काम नहीं करतीं: प्रतिजैविक औषधियाँ केवल जीवाणु की कोशिकाओं के विशेष भागों को नष्ट करती हैं। विषाणु की संरचना पूरी तरह अलग होती है — उनमें कोशिका भित्ति ही नहीं होती, इसलिए प्रतिजैविक उन पर बिल्कुल बेअसर होती हैं।
• कारण 2: प्रतिजैविक प्रतिरोध का खतरा: बिना जरूरत के प्रतिजैविक लेने से शरीर में मौजूद जीवाणु उनके प्रति प्रतिरोधी बन जाते हैं। इससे भविष्य में जब वास्तव में प्रतिजैविक की जरूरत हो तब वे काम नहीं करतीं।
• कारण 3: उपकारी जीवाणुओं को नुकसान: प्रतिजैविक हमारे शरीर में मौजूद उपकारी जीवाणुओं को भी नष्ट कर देती हैं जो पाचन और प्रतिरक्षा में सहायता करते हैं।
• कारण 4: दुष्प्रभाव: अनावश्यक प्रतिजैविक लेने से दस्त, एलर्जी और अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• वायरल संक्रमणों पर प्रतिजैविक का कोई प्रभाव नहीं होता।
• अनावश्यक सेवन से शरीर में प्रतिजैविक प्रतिरोध उत्पन्न हो जाता है।
• यह हमारे शरीर के मित्र जीवाणुओं को भी नुकसान पहुँचाती है।
आम गलतियाँ:
• हर प्रकार के संक्रमण में एंटीबायोटिक का सेवन करना।
• वायरस और बैक्टीरिया के जैविक अंतर को न समझना।
• प्रतिजैविक प्रतिरोध के परिणामों की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) कारणों को स्पष्ट रूप से 'कारण 1, कारण 2' आदि के रूप में बिंदुओं में लिखें।
b) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'कोशिका भित्ति' और 'प्रतिजैविक प्रतिरोध' का सही प्रयोग करें।
c) उत्तर में स्पष्ट करें कि सर्दी-जुकाम वायरस से होता है।
Question 10: किसी संक्रमित व्यक्ति के उत्सर्जी पदार्थ द्वारा पेयजल के संदूषित होने पर निम्नलिखित में से कौन-कौन से रोग फैल सकते हैं? यकृतशोथ (हेपेटाइटिस) ए, क्षयरोग (टीबी), पोलियोमाइलाइटिस, हैजा, चेचक
Answer:
दूषित पेयजल से फैलने वाले रोग निम्नलिखित हैं —
• यकृतशोथ (हेपेटाइटिस) ए — हाँ, यह दूषित जल और भोजन से फैलता है।
• पोलियोमाइलाइटिस — हाँ, यह भी दूषित पेयजल से फैलता है।
• हैजा (कॉलरा) — हाँ, यह दूषित जल से फैलने वाला मुख्य रोग है।
(नोट: क्षयरोग वायु द्वारा और चेचक संपर्क या वायु द्वारा फैलता है, अतः वे दूषित जल से फैलने वाले रोगों में शामिल नहीं हैं।)
मुख्य बिंदु:
• जलजनित रोग संदूषित जल और भोजन के सेवन से फैलते हैं।
• यकृतशोथ ए, पोलियो और हैजा जल संदूषण से होने वाले प्रमुख रोग हैं।
• अन्य रोग (जैसे क्षयरोग और चेचक) फैलने के अन्य माध्यम रखते हैं।
आम गलतियाँ:
• सभी रोगों को दूषित जल से जोड़ देना।
• जलजनित और वायुजनित रोगों के अंतर को न समझना。
• सूची में से सही रोगों का चयन न करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक रोग के फैलने के मुख्य माध्यम की जानकारी रखें।
b) पूछे गए विकल्पों में से केवल सही रोगों के नाम स्पष्ट रूप से छाँटकर लिखें।
c) कारण सहित उत्तर की पुष्टि करें।
Question 11: जब हमारा शरीर किसी रोगजनक (रोगाणु) का पहली बार सामना करता है तो हमारी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया सामान्यतः कम होती है परंतु जब उसी रोगजनक से पुनः सामना होता है तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पहली बार की तुलना में कहीं अधिक प्रबल होती है। ऐसा क्यों होता है?
Answer:
जब कोई रोगाणु पहली बार शरीर में प्रवेश करता है तो प्रतिरक्षा प्रणाली उसे पहचानती है, उसके विरुद्ध एंटीबॉडी बनाती है और रोगाणु से लड़ती है। इस प्रक्रिया में कुछ समय लगता है इसलिए पहली बार प्रतिक्रिया धीमी होती है। इस पूरी लड़ाई के बाद शरीर कुछ विशेष कोशिकाएँ — स्मृति कोशिकाएँ — बना लेता है जो उस विशेष रोगाणु को लंबे समय तक याद रखती हैं। जब वही रोगाणु दोबारा शरीर में प्रवेश करता है तो ये स्मृति कोशिकाएँ उसे तुरंत पहचान लेती हैं और बहुत तेज़ी से बड़ी मात्रा में एंटीबॉडी बनाती हैं। इस कारण रोगाणु को नष्ट करने की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक तेज़ और प्रबल होती है।
मुख्य बिंदु:
• पहली बार रोगाणु के प्रवेश पर प्रतिरक्षा तंत्र को उसे पहचानने में समय लगता है।
• संक्रमण के पश्चात शरीर में 'स्मृति कोशिकाएँ' (Memory cells) बन जाती हैं।
• दूसरी बार उसी रोगाणु के आने पर स्मृति कोशिकाएँ तुरंत सक्रिय होकर तीव्र प्रतिक्रिया देती हैं।
आम गलतियाँ:
• प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के धीमे होने के कारण को न समझ पाना।
• स्मृति कोशिकाओं की भूमिका का उल्लेख न करना।
• प्रथम और द्वितीय संक्रमण के अंतर को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) प्रतिरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली को चरणबद्ध तरीके से समझाएं।
b) 'स्मृति कोशिकाओं' (Memory cells) और 'एंटीबॉडी' जैसे महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
c) उत्तर को वैज्ञानिक और तार्किक रूप से लिखें।
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