Step-by-Step Textbook Solutions for Class 8 Science Chapter 02 अदृश्य जीव-जगत हमारी आँखों की क्षमता से परे
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Question 1: कोशिका के विभिन्न भागों के नाम निम्नलिखित हैं। इन्हें निम्नांकित आरेख में उपयुक्त स्थानों पर लिखिए। (केंद्रक, कोशिकाद्रव्य, हरित लवक, कोशिका भित्ति, कोशिका झिल्ली, केंद्रकाभ)
Answer:
वेन-आरेख में विभिन्न कोशिकाओं (जंतु कोशिका, पादप कोशिका और जीवाणु कोशिका) की विशेषताएँ और उनके भाग नीचे दिए गए हैं:
(क) तीनों कोशिकाओं में समान भाग:
• कोशिका झिल्ली — यह सभी कोशिकाओं को घेरती है।
• कोशिकाद्रव्य — जीवन के जैव प्रक्रम यहीं होते हैं।
(ख) केवल जंतु कोशिका में:
• केंद्रक (स्पष्ट झिल्ली से घिरा हुआ)
(ग) केवल पादप कोशिका में:
• कोशिका भित्ति — पौधों को दृढ़ता और मजबूती देती है।
• हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) — प्रकाश संश्लेषण में सहायक।
(घ) केवल जीवाणु कोशिका में:
• केंद्रकाभ — स्पष्ट केंद्रक झिल्ली नहीं होती।
मुख्य बिंदु:
• जीवाणु कोशिका में स्पष्ट केंद्रक नहीं होता, इसे प्रोकैरियोटिक कोशिका कहते हैं।
• पादप और जंतु कोशिकाओं में स्पष्ट केंद्रक होता है, इसलिए ये यूकैरियोटिक कोशिकाएँ हैं।
• कोशिका झिल्ली सभी प्रकार की कोशिकाओं में पाई जाती है।
आम गलतियाँ:
• पादप और जंतु कोशिकाओं में पाए जाने वाले भागों को आपस में मिला देना।
• प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाओं के अंतर को स्पष्ट न करना।
• कोशिका भित्ति को जंतु कोशिका का भाग समझ लेना।
Exam Tips:
a) वेन-आरेख के प्रश्नों को हल करते समय कॉमन भागों और विशिष्ट भागों को अलग-अलग याद रखें।
b) पादप और जंतु कोशिकाओं के मुख्य अंतर को भली-भांति समझकर उत्तर लिखें।
c) परिभाषाओं में वैज्ञानिक शब्दों जैसे प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक का सही प्रयोग करें।
Question 2: आनंदी ने दो परखनली लीं एवं उन्हें ‘क’ और ‘ख’ से चिह्नित किया। उसने प्रत्येक परखनली में दो चम्मच चीनी का घोल डाला। परखनली ‘ख’ में उसने एक चम्मच खमीर (यीस्ट) डाला। इसके पश्चात उसने प्रत्येक परखनली के मुँह पर दो कम फूले हुए गुब्बारे लगाए। उसने इस व्यवस्थापन को धूप से दूर गर्म स्थान पर रखा।
(i) क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि 3–4 घंटे के पश्चात क्या होगा? उसने देखा कि परखनली ‘ख’ से जुड़ा गुब्बारा फूला हुआ था। इसका संभावित स्पष्टीकरण क्या हो सकता है? (क) परखनली ‘ख’ में पानी वाष्पित हो गया और गुब्बारे में जलवाष्प भर गई। (ख) गर्म वातावरण ने परखनली ‘ख’ के भीतर की हवा को फैला दिया जिससे गुब्बारा फूल गया। (ग) यीस्ट ने परखनली ‘ख’ के भीतर एक गैस उत्पन्न की जिससे गुब्बारा फूल गया। (घ) चीनी ने गरम हवा के साथ अभिक्रिया की जिससे गैस उत्पन्न हुई और अंततः गुब्बारा फूल गया।
(ii) आनंदी ने एक और परखनली ली जो चूने के पानी से ¼ भरी थी। उसने परखनली ‘ख’ से गुब्बारे को इस तरह निकाला कि गुब्बारे में भरी हुई गैस बाहर न निकले। उसने गुब्बारे को चूने के पानी वाली परखनली से जोड़ा और उसे अच्छी तरह हिलाया। आपके विचार से वह क्या जानना चाहती है?
Answer:
(i) सही विकल्प: (ग) — यीस्ट ने परखनली ‘ख’ के भीतर एक गैस उत्पन्न की जिससे गुब्बारा फूल गया।
स्पष्टीकरण: यीस्ट (खमीर) एक प्रकार का सूक्ष्मजीव है जो कवक वर्ग का सदस्य है। यह गरम स्थितियों में तेजी से वृद्धि करता है। यीस्ट गरम वातावरण में चीनी के घोल को किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया द्वारा विघटित करता है। इस प्रक्रिया के दौरान यीस्ट कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) गैस उत्पन्न करता है। यही \( \text{CO}_2 \) गुब्बारे में भरती है और गुब्बारा फूल जाता है।
(ii) आनंदी यह जानना चाहती थी कि परखनली ‘ख’ के गुब्बारे में भरी गैस कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) है या कोई अन्य गैस। चूने का पानी (\( \text{Ca(OH)}_2 \)) \( \text{CO}_2 \) के संपर्क में आने पर दूधिया या सफेद हो जाता है। यदि चूने का पानी सफेद हो जाए, तो यह सिद्ध होगा कि यीस्ट के किण्वन से \( \text{CO}_2 \) गैस उत्पन्न हुई है।
मुख्य बिंदु:
• यीस्ट कवक वर्ग का सूक्ष्मजीव है जो किण्वन प्रक्रिया करता है।
• किण्वन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है।
• चूने का पानी कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति में दूधिया हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि गुब्बारा केवल हवा के फैलने से फूला है।
• किण्वन प्रक्रिया और श्वसन प्रक्रिया में अंतर न समझना।
• चूने के पानी के परीक्षण के परिणाम को गलत लिखना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प चुनने के बाद उसका वैज्ञानिक कारण अवश्य लिखें।
b) किण्वन (Fermentation) प्रक्रिया और उससे उत्पन्न गैस का नाम याद रखें।
c) रासायनिक परीक्षणों (जैसे चूने के पानी का दूधिया होना) को समीकरण सहित स्पष्ट करें।
Question 3: एक किसान अपने खेत में गेहूँ की फसल की बुवाई कर रहा था। उसने फसल की अच्छी उपज पाने के लिए मिट्टी में नाइट्रोजन समृद्ध उर्वरक डाला। पड़ोस के खेत में एक और किसान सेम की फसल उगा रहा था परंतु उसने स्वस्थ फसल प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन समृद्ध उर्वरक नहीं डाला। क्या आप इसके कारणों पर विचार कर सकते हैं?
Answer:
सेम एक दलहनी (फलीदार) फसल है। इसकी जड़ों में राइजोबियम नामक जीवाणु रहते हैं, जो वायु से नाइट्रोजन को अवशोषित करके मिट्टी में मिलाते हैं। इस प्रक्रिया को नाइट्रोजन स्थिरीकरण कहते हैं।
• सेम की जड़ों में मूल ग्रंथिकाएँ (Root Nodules) होती हैं।
• इन ग्रंथिकाओं में राइजोबियम जीवाणु रहते हैं।
• ये जीवाणु वायुमंडल की नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी नाइट्रोजनी यौगिकों में बदलते हैं।
• इससे मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
इसीलिए सेम उगाने वाले किसान को अलग से नाइट्रोजन उर्वरक डालने की आवश्यकता नहीं पड़ी। गेहूँ में ऐसे जीवाणु नहीं होते, इसलिए उस किसान को उर्वरक डालना पड़ा।
मुख्य बिंदु:
• दलहनी फसलों की जड़ों में राइजोबियम जीवाणु पाए जाते हैं।
• राइजोबियम वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है।
• इससे मिट्टी की उर्वरता प्राकृतिक रूप से बढ़ती है।
आम गलतियाँ:
• यह समझना कि सभी फसलें खुद नाइट्रोजन बना सकती हैं।
• राइजोबियम जीवाणु के कार्य को गलत लिखना।
• दलहनी और गैर-दलहनी फसलों के अंतर को न समझना।
Exam Tips:
a) नाइट्रोजन स्थिरीकरण और राइजोबियम की भूमिका को मुख्य बिंदुओं में लिखें।
b) दलहनी फसलों के उदाहरण और उनकी विशेषताएँ स्पष्ट करें।
c) कारण आधारित प्रश्नों में जैविक प्रक्रिया का वैज्ञानिक तर्क दें।
Question 4: स्नेहल ने अपने बगीचे में दो गड्ढे ‘क’ और ‘ख’ खोदे। गड्ढा ‘क’ में उसने फलों और सब्जियों के छिलके डाले और उन्हें सूखे पत्तों के साथ मिला दिया। गड्ढा ‘ख’ में उसने उसी तरह के कचरे को सूखे पत्तों के साथ मिलाए बिना डाल दिया। उसने दोनों गड्ढों को मिट्टी से ढक दिया और 3 सप्ताह बाद देखा। वह क्या जाँचने का प्रयास कर रही है?
Answer:
स्नेहल यह जाँचना चाहती है कि सूखे पत्तों की उपस्थिति या अनुपस्थिति से खाद बनने की प्रक्रिया (Decomposition) पर क्या प्रभाव पड़ता है।
संभावित परिणाम:
• गड्ढा ‘क’ में सूखे पत्ते मिले होने से अधिक सूक्ष्मजीव सक्रिय होंगे, अधिक हवा और नमी बनी रहेगी, जिससे विघटन की प्रक्रिया तेज़ होगी और खाद जल्दी बनेगी।
• गड्ढा ‘ख’ में केवल छिलके हैं, सूखे पत्ते नहीं हैं, इसलिए वायु संचरण कम होगा और खाद बनने में अधिक समय लगेगा।
निष्कर्ष: सूखे पत्तों की उपस्थिति से खाद बनाने में सहायता मिलती है क्योंकि इससे जैव विविधता और सूक्ष्मजीवों की क्रियाशीलता बढ़ती है।
मुख्य बिंदु:
• सूक्ष्मजीवों द्वारा कार्बनिक कचरे का विघटन खाद कहलाता है।
• सूखे पत्ते कचरे में वायु का संचार बनाए रखते हैं।
• उचित नमी और वायु विघटन की प्रक्रिया को तेज करती है।
आम गलतियाँ:
• यह मानना कि सूखे पत्तों का खाद बनने में कोई योगदान नहीं होता।
• अपघटन (Decomposition) की प्रक्रिया में वायु और नमी के महत्व को नजरअंदाज करना।
• निष्कर्ष को स्पष्ट रूप से न लिखना।
Exam Tips:
a) प्रयोग आधारित प्रश्नों में उद्देश्य, संभावित परिणाम और निष्कर्ष अलग-अलग headings में लिखें।
b) सूक्ष्मजीवों की सक्रियता के लिए आवश्यक कारकों का उल्लेख करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और वैज्ञानिक भाषा में प्रस्तुत करें।
Question 5: निम्नलिखित सूक्ष्मजीवों की पहचान करें — (i) मैं प्रत्येक प्रकार के वातावरण में और आपकी आँत में रहता हूँ। (ii) मैं पावरोटी और केक को मुलायम और फूला हुआ बनाता हूँ। (iii) मैं दलहनी (फलीदार) फसलों की जड़ों में रहता हूँ और उनकी वृद्धि के लिए पोषक तत्व प्रदान करता हूँ।
Answer:
(i) जीवाणु (Bacteria): जीवाणु सर्वव्यापी होते हैं — जल, मृदा, वायु, अत्यधिक गर्म या ठंडे स्थानों और मनुष्य की आँत में भी पाए जाते हैं। आँत के जीवाणु पाचन में सहायता करते हैं।
(ii) खमीर / यीस्ट (Yeast — एक प्रकार का कवक): यीस्ट किण्वन के दौरान \( \text{CO}_2 \) गैस उत्पन्न करता है, जिससे आटे में हवा के बुलबुले बनते हैं और ब्रेड व केक नरम और फूले हुए बनते हैं।
(iii) राइजोबियम (Rhizobium — एक प्रकार का जीवाणु): राइजोबियम सेम, मटर, मसूर जैसी दलहनी फसलों की जड़ों में रहता है और वायु से नाइट्रोजन अवशोषित करके पौधों को उपयोगी पोषक तत्व प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
• जीवाणु सर्वव्यापी और पाचन में सहायक होते हैं।
• यीस्ट कवक है जो किण्वन द्वारा ब्रेड को फुलाता है।
• राइजोबियम नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला जीवाणु है।
आम गलतियाँ:
• यीस्ट को जीवाणु समझ लेना, जबकि यह कवक है।
• राइजोबियम के कार्यक्षेत्र को गलत बताना।
• सूक्ष्मजीवों के नाम और उनके मुख्य उपयोगों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) पहेली या पहचान वाले प्रश्नों में सूक्ष्मजीव का नाम और उसका विशिष्ट कार्य दोनों लिखें।
b) प्रत्येक सूक्ष्मजीव के वैज्ञानिक वर्ग (जैसे कवक या जीवाणु) का उल्लेख करें।
c) उत्तर को बिंदुवार (bullet points) लिखने से परीक्षा में अच्छे अंक मिलते हैं।
Question 6: यह जाँचने के लिए एक प्रयोग अभिकल्पित कीजिए कि सूक्ष्मजीवों को अपनी वृद्धि के लिए इष्टतम तापमान, वायु और नमी की आवश्यकता होती है।
Answer:
प्रयोग का नाम: ‘सूक्ष्मजीव वृद्धि की परिस्थितियाँ’
आवश्यक सामग्री: • 4 काँच के कटोरे — ‘क’, ‘ख’, ‘ग’, ‘घ’ • ब्रेड के चार समान टुकड़े • थोड़ा पानी (नमी के लिए)
विधि:
• कटोरा ‘क’: नम ब्रेड + खुला रखें (सामान्य तापमान, वायु, नमी)
• कटोरा ‘ख’: सूखी ब्रेड + बंद ढक्कन (सामान्य तापमान, कम वायु, कम नमी)
• कटोरा ‘ग’: नम ब्रेड + रेफ्रिजरेटर में रखें (कम तापमान)
• कटोरा ‘घ’: नम ब्रेड + धूप में रखें (अधिक तापमान)
3-4 दिन बाद अवलोकन:
• कटोरा ‘क’ में सबसे अधिक फफूँद/सूक्ष्मजीव वृद्धि होगी।
• कटोरा ‘ख’ में कम वृद्धि (नमी और वायु की कमी)।
• कटोरा ‘ग’ में न्यूनतम वृद्धि (ठंडे तापमान में सूक्ष्मजीव धीमे होते हैं)।
• कटोरा ‘घ’ में भी कम वृद्धि (अत्यधिक गरमी से सूक्ष्मजीव नष्ट हो सकते हैं)।
निष्कर्ष: सूक्ष्मजीवों को वृद्धि के लिए उचित तापमान, नमी और वायु की आवश्यकता होती है। इष्टतम (Optimal) परिस्थितियों में ही उनकी वृद्धि सबसे अधिक होती है।
मुख्य बिंदु:
• सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए नमी, वायु और उचित तापमान आवश्यक हैं।
• अत्यधिक ठंड या अत्यधिक गर्मी सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को धीमा या नष्ट कर देती है।
• सामान्य और नम वातावरण में फफूँद तेजी से बढ़ती है।
आम गलतियाँ:
• प्रयोग की विधि में आवश्यक नियंत्रण (control) और चर (variables) का ध्यान न रखना।
• अवलोकन और निष्कर्ष को स्पष्ट रूप से अलग न करना।
• तापमान और नमी के प्रभाव को गलत लिखना।
Exam Tips:
प्रयोग आधारित प्रश्नों में हमेशा आवश्यक सामग्री, विधि, अवलोकन और निष्कर्ष की रूपरेखा अपनाएँ।
b) प्रत्येक कटोरे की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन स्पष्ट करें।
c) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'इष्टतम परिस्थितियाँ' (Optimal conditions) का प्रयोग करें।
Question 7: ब्रेड के 2 स्लाइस लीजिए। एक स्लाइस को सिंक के पास एक प्लेट में रखिए। दूसरे स्लाइस को रेफ्रिजरेटर में रखिए। तीन दिन पश्चात दोनों स्लाइस की तुलना कीजिए। अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए। अपने अवलोकनों के कारण बताइए।
Answer:
अपेक्षित अवलोकन:
• सिंक के पास रखा स्लाइस: नम और गरम वातावरण के कारण ब्रेड पर फफूँद (Mould) उग आएगी — सफेद, काली या हरी-भरी रोयेंदार परत दिखेगी।
• रेफ्रिजरेटर में रखा स्लाइस: ठंडे तापमान के कारण सूक्ष्मजीव बहुत धीमे होते हैं, ब्रेड लगभग पहले जैसी रहेगी — फफूँद बहुत कम या नहीं होगी।
कारण: सूक्ष्मजीव (विशेषकर कवक/फफूँद) गरम और नम वातावरण में तेजी से वृद्धि करते हैं। सिंक के पास नमी और सामान्य तापमान दोनों उपलब्ध होते हैं। रेफ्रिजरेटर का कम तापमान सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोक देता है, इसीलिए रेफ्रिजरेटर में खाद्य पदार्थ लंबे समय तक ताजे रहते हैं।
मुख्य बिंदु:
• फफूँद एक प्रकार का कवक है जो नमी और गर्मी में पनपता है।
• रेफ्रिजरेटर का कम तापमान सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को कम करता है।
• खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए कम तापमान का प्रयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• दोनों स्थानों पर तापमान और नमी के अंतर को नजरअंदाज करना।
• फफूँद के विकास के मुख्य कारणों को स्पष्ट न करना।
• अवलोकन और कारण को मिला देना।
Exam Tips:
a) अवलोकनों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग बिंदुओं में लिखें।
b) वैज्ञानिक कारणों में तापमान और आर्द्रता (humidity) का मुख्य रूप से उल्लेख करें।
c) उत्तर को अपने दैनिक जीवन के अनुभवों से जोड़कर लिखें।
Question 8: एक विद्यार्थी अवलोकन करता है कि जब दही को एक दिन के लिए बाहर रखा जाता है तो वह अधिक खट्टा हो जाता है। इस अवलोकन के दो संभावित स्पष्टीकरण क्या हो सकते हैं?
Answer:
स्पष्टीकरण 1: दही में लैक्टोबैसिलस जीवाणु होते हैं। बाहर रखने पर गरम तापमान मिलने से ये जीवाणु तेजी से बढ़ते हैं और दूध की शर्करा (लैक्टोज) को लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं। जितना अधिक समय बाहर रहे, उतना अधिक अम्ल बनता है और दही अधिक खट्टी होती जाती है।
स्पष्टीकरण 2: बाहर का तापमान जीवाणुओं की वृद्धि दर को बढ़ा देता है। अधिक जीवाणु सक्रिय होने पर किण्वन की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे दही में लैक्टिक अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है और वह जल्दी व अधिक खट्टी हो जाती है.
मुख्य बिंदु:
• दही में लैक्टोबैसिलस नामक जीवाणु पाया जाता है।
• लैक्टोज शर्करा लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित होती है।
• तापमान बढ़ने से जीवाणुओं की वृद्धि और अम्ल का उत्पादन तेज होता है।
आम गलतियाँ:
• जीवाणु का नाम गलत लिखना (लैक्टोबैसिलस के स्थान पर अन्य नाम लिखना)।
• खट्टापन बढ़ने का कारण रासायनिक प्रतिक्रिया बताना बजाय जैविक प्रक्रिया के।
• दोनों स्पष्टीकरणों में तापमान के प्रभाव को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) जीवाणु का नाम और उससे संबंधित अम्ल का नाम सही-सही याद रखें।
b) बहु-स्पष्टीकरण वाले प्रश्नों में प्रत्येक बिंदु को तार्किक रूप से अलग करें।
c) उत्तर में 'लैक्टोज' और 'लैक्टिक अम्ल' शब्दों का सही प्रयोग करें।
Question 9: चित्र 2.15 में दिए गए व्यवस्थापन का अवलोकन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (फ्लास्क ‘क’ में चीनी का गुनगुना घोल + यीस्ट; परखनली ‘ख’ में चूने का पानी — दोनों एक नली से जुड़े हैं)
(i) फ्लास्क ‘क’ में चीनी के घोल का क्या होता है?
(ii) चार घंटे पश्चात आप परखनली ‘ख’ में क्या देखते हैं? आपके विचार से ऐसा क्यों हुआ?
(iii) यदि फ्लास्क ‘क’ में यीस्ट न डाला जाए तो क्या होगा?
Answer:
(i) फ्लास्क ‘क’ में यीस्ट गर्म चीनी के घोल पर क्रिया करता है। यह किण्वन की प्रक्रिया से गुजरता है। इस प्रक्रिया में यीस्ट चीनी को विघटित करके कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) और थोड़ी मात्रा में एल्कोहल उत्पन्न करता है।
समीकरण: चीनी \( \rightarrow \text{CO}_2 \) + एल्कोहल + ऊर्जा
(ii) परखनली ‘ख’ में चूने का पानी दूधिया/सफेद हो जाएगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि फ्लास्क ‘क’ में यीस्ट द्वारा उत्पन्न \( \text{CO}_2 \) गैस नली के माध्यम से परखनली ‘ख’ के चूने के पानी में पहुँचती है। \( \text{CO}_2 \) चूने के पानी (\( \text{Ca(OH)}_2 \)) से मिलकर कैल्सियम कार्बोनेट (\( \text{CaCO}_3 \)) बनाती है जो सफेद रंग का होता है।
समीकरण: \( \text{Ca(OH)}_2 + \text{CO}_2 \rightarrow \text{CaCO}_3 \) (सफेद) + \( \text{H}_2\text{O} \)
(iii) यदि फ्लास्क ‘क’ में यीस्ट न डाला जाए, तो चीनी का घोल किण्वित नहीं होगा। कोई \( \text{CO}_2 \) गैस उत्पन्न नहीं होगी। इसलिए परखनली ‘ख’ के चूने के पानी में कोई परिवर्तन नहीं होगा — वह साफ और पारदर्शी ही रहेगा। इस प्रयोग से सिद्ध होता है कि \( \text{CO}_2 \) का उत्पादन यीस्ट की उपस्थिति पर निर्भर करता है।
मुख्य बिंदु:
• यीस्ट की उपस्थिति में चीनी का किण्वन होता है।
• किण्वन से कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है।
• कार्बन डाइऑक्साइड चूने के पानी को दूधिया कर देती है।
आम गलतियाँ:
• रासायनिक समीकरणों को संतुलित किए बिना लिखना या छोड़ देना।
• चूने के पानी के दूधिया होने का कारण गलत बताना।
• यीस्ट की अनुपस्थिति के प्रभाव को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) प्रयोग आधारित और चित्र वाले प्रश्नों में प्रत्येक उप-प्रश्न (i, ii, iii) का उत्तर अलग-अलग पैराग्राफ में लिखें।
b) रासायनिक समीकरणों (\( \text{CO}_2 \) और चूने का पानी) को अवश्य याद रखें और परीक्षा में लिखें।
c) निष्कर्ष को स्पष्ट रूप से रेखांकित करें ताकि परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़े।
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Step-by-Step Textbook Answers: Class 8 Science Chapter 02 अदृश्य जीव-जगत हमारी आँखों की क्षमता से परे
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