Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 05 ऊष्मागतिकी
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Question 1: सही उत्तर चुनिए- ऊष्मागतिकी अवस्था फलन एक राशि है,
(i) जो ऊष्मा-परिवर्तनों के लिए प्रयुक्त होती है।
(ii) जिसका मान पथ पर निर्भर नहीं करता है।
(iii) जो दाब-आयतन कार्य की गणना करने में प्रयुक्त होती है।
(iv) जिसका मान केवल ताप पर निर्भर करता है।
Answer:
सही विकल्प (ii) है। ऊष्मागतिकी अवस्था फलन वह राशि होती है जिसका मान निकाय की प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं पर निर्भर करता है, न कि उस पथ पर जिससे होकर अवस्था प्राप्त की गई है। दाब (P), आयतन (V), ताप (T), आंतरिक ऊर्जा (U), और एंथैल्पी (H) अवस्था फलन के उदाहरण हैं, जबकि ऊष्मा (q) और कार्य (w) पथ फलन हैं।
मुख्य बिंदु:
• अवस्था फलन केवल प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं पर निर्भर करते हैं।
• पथ फलन प्रक्रम के रास्ते या तरीके पर निर्भर करते हैं जैसे ऊष्मा और कार्य।
• P, V, T और U अवस्था फलन हैं।
आम गलतियाँ:
• ऊष्मा और कार्य को अवस्था फलन मान लेना, जबकि वे पथ फलन हैं।
• अवस्था फलन की परिभाषा में पथ की भूमिका को शामिल कर देना।
• विकल्पों को ध्यान से पढ़े बिना केवल गणना से जुड़ा विकल्प चुनना।
Exam Tips:
a) अवस्था फलन और पथ फलन के अंतर को हमेशा याद रखें।
b) उदाहरणों की सूची (P, V, T, U, H) याद कर लें ताकि बहुविकल्पीय प्रश्न आसानी से हल हो सकें।
c) प्रश्न को ध्यान से पढ़कर ही सही विकल्प का चयन करें।
Question 2: एक प्रक्रम के रुद्धोष्म परिस्थितियों में होने के लिए
(i) ΔT = 0
(ii) Δp = 0
(iii) q = 0
(iv) w = 0
Answer:
सही विकल्प (iii) है। रुद्धोष्म प्रक्रम (adiabatic process) वह प्रक्रम होता है जिसमें निकाय और उसके परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता है। अतः इस स्थिति में निकाय द्वारा अवशोषित या उत्सर्जित ऊष्मा (q) का मान शून्य होता है।
मुख्य बिंदु:
• रुद्धोष्म प्रक्रम में ऊष्मा परिवर्तन शून्य (q = 0) होता है।
• इस प्रक्रम में तापमान स्थिर नहीं रहता, अतः ΔT ≠ 0 होता है।
• निकाय और परिवेश के बीच तापीय दीवारें होती हैं जिससे ऊष्मा का प्रवाह नहीं होता।
आम गलतियाँ:
• रुद्धोष्म प्रक्रम को समतापीय प्रक्रम समझकर ΔT = 0 चुन लेना।
• कार्य को शून्य मान लेना।
• रुद्धोष्म और समतापीय प्रक्रमों की शर्तों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) विभिन्न प्रक्रमों की शर्तें (जैसे रुद्धोष्म में q = 0, समतापीय में ΔT = 0) याद रखें।
b) शब्दों के अर्थ समझें - रुद्धोष्म यानी ऊष्मा का अवरोध।
c) बहुविकल्पीय प्रश्नों में शर्तों पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 3: सभी तत्वों की एंथैल्पी उनकी संदर्भ-अवस्था में होती है-
(i) इकाई
(ii) शून्य
(iii) < 0
(iv) सभी तत्वों के लिएभिन्न होती है।
Answer:
सही विकल्प (ii) है। किसी भी तत्व की उसकी सबसे स्थिर संदर्भ-अवस्था (मानक अवस्था) में विरचन एंथैल्पी का मान मानक रूप से शून्य माना जाता है। यह एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता है ताकि रासायनिक अभिक्रियाओं में एंथैल्पी परिवर्तन की गणना आसानी से की जा सके।
मुख्य बिंदु:
• मानक संदर्भ अवस्था में तत्वों की विरचन एंथैल्पी शून्य होती है।
• जैसे ग्रेफाइट के रूप में कार्बन की एंथैल्पी शून्य ली जाती है।
• यह मानक अवस्था 1 bar दाब और निश्चित ताप पर परिभाषित होती है।
आम गलतियाँ:
• सभी यौगिकों की एंथैल्पी को भी शून्य मान लेना, जो कि गलत है।
• इकाई (1) मान लेना।
• संदर्भ अवस्था और मानक अवस्था के अंतर को न समझना।
Exam Tips:
a) याद रखें कि केवल तत्वों की (यौगिकों की नहीं) संदर्भ अवस्था में एंथैल्पी शून्य होती है।
b) यह अवधारणा आंकिक प्रश्नों को हल करते समय बहुत उपयोगी होती है।
c) परिभाषाओं को सटीक रूप से याद करें।
Question 4: मीथेन के दहन का ΔU = -x kJ mol⁻¹ है। ΔH का मान है
(i) = ΔU
(ii) > ΔU
(iii) < ΔU
(iv) = 0
Answer:
सही विकल्प (iii) है। संबंध ΔH = ΔU + Δn_g RT के अनुसार, मीथेन के दहन की अभिक्रिया CH₄(g) + 2O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(l) में गैसीय मोलों में परिवर्तन Δn_g = 1 - 3 = -2 है। चूँकि Δn_g ऋणात्मक है, इसलिए ΔH का मान ΔU से कम होगा (ΔH < ΔU)।
मुख्य बिंदु:
• ΔH और ΔU के बीच संबंध ΔH = ΔU + Δn_g RT होता है।
• दहन अभिक्रिया में गैसीय उत्पादों और अभिकारकों के मोलों की संख्या का अंतर देखा जाता है।
• जल के द्रव अवस्था में होने पर गैसीय मोलों की संख्या कम हो जाती है।
आम गलतियाँ:
• समीकरण में जल की भौतिक अवस्था (द्रव या गैस) पर ध्यान न देना।
• Δn_g की गणना गलत करना।
• ΔH और ΔU को हमेशा बराबर मान लेना।
Exam Tips:
a) रासायनिक समीकरण लिखते समय भौतिक अवस्था (g, l, s) अवश्य लिखें।
b) Δn_g = (उत्पादों के गैसीय मोल) - (अभिकारकों के गैसीय मोल) सूत्र का सही प्रयोग करें।
c) इस प्रकार के संबंध वाले प्रश्न परीक्षा में अक्सर आते हैं।
Question 5: 298 K पर मीथेन, ग्रेफाइट और डाइहाइड्रोजन के दहन एंथैल्पी क्रमशः -890.3 kJ mol⁻¹, -393.5 kJ mol⁻¹ और -285.8 kJ mol⁻¹ हैं। CH₄(g) के विरचन की एंथैल्पी होगी
(i) -74.8 kJ mol⁻¹
(ii) -52.7 kJ mol⁻¹
(iii) +74.8 kJ mol⁻¹
(iv) +52.7 kJ mol⁻¹
Answer:
सही विकल्प (i) है। मीथेन के विरचन की अभिक्रिया C(graphite) + 2H₂(g) → CH₄(g) के लिए विरचन एंथैल्पी ΔfH = ΣΔcH(reactants) - ΣΔcH(products) सूत्र से निकाली जाती है। मान रखने पर: ΔfH = (-393.5) + 2(-285.8) - (-890.3) = -393.5 - 571.6 + 890.3 = -74.8 kJ mol⁻¹ प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• विरचन एंथैल्पी की गणना के लिए दहन एंथैल्पी के मानों का उपयोग किया जाता है।
• सूत्र: विरचन एंथैल्पी = अभिकारकों की दहन एंथैल्पी का योग - उत्पादों की दहन एंथैल्पी का योग।
• सभी मान 298 K पर मानक अवस्था में हैं।
आम गलतियाँ:
• रासायनिक समीकरण को संतुलित किए बिना मान रखना।
• अभिकारकों और उत्पादों के दहन एंथैल्पी के सूत्रों में चिह्न की गलती करना।
• हाइड्रोजन के मोलों की संख्या 2 से गुणा न करना।
Exam Tips:
a) हेस का नियम और दहन एंथैल्पी से विरचन एंथैल्पी निकालने के आंकिक प्रश्नों का बार-बार अभ्यास करें।
b) गणना करते समय धनात्मक और ऋणात्मक चिह्नों का विशेष ध्यान रखें।
c) इकाई (kJ mol⁻¹) लिखना न भूलें।
Question 6: एक अभिक्रिया, A + B → C + D + q में धनात्मक एन्ट्रापी परिवर्तन पाया जाता है। अभिक्रिया होगी
(i) उच्च तापमान पर संभव है
(ii) कम तापमान पर ही संभव है
(iii) किसी भी तापमान पर संभव नहीं है
(iv) किसी भी तापमान पर संभव है
Answer:
सही विकल्प (iv) है। स्वतः स्फूर्त अभिक्रिया के लिए गिब्स ऊर्जा परिवर्तन ΔG ऋणात्मक होना चाहिए। समीकरण ΔG = ΔH - TΔS के अनुसार, दी गई अभिक्रिया में ऊष्मा निकलती है (अतः ΔH ऋणात्मक है) और एन्ट्रापी परिवर्तन ΔS धनात्मक है। चूँकि ΔH ऋणात्मक और ΔS धनात्मक है, इसलिए ΔG का मान हर तापमान पर ऋणात्मक होगा। अतः यह अभिक्रिया किसी भी तापमान पर स्वतः होती है।
मुख्य बिंदु:
• स्वतः प्रक्रम के लिए ΔG हमेशा ऋणात्मक होता है।
• जब ΔH ऋणात्मक और ΔS धनात्मक हो, तो अभिक्रिया सभी तापमानों पर स्वतः होती है।
• तापमान T का मान हमेशा धनात्मक होता है।
आम गलतियाँ:
• ΔG के चिह्न की शर्त को भूल जाना।
• ΔH और ΔS के चिह्नों के प्रभाव को तापमान पर गलत ढंग से लागू करना।
• ऊष्मीयक्षेपी अभिक्रिया को केवल कम तापमान पर संभव मान लेना।
Exam Tips:
a) ΔH और ΔS के विभिन्न संयोजनों के लिए ΔG की स्थिति की सारणी याद रखें।
b) गिब्स ऊर्जा समीकरण ΔG = ΔH - TΔS को अच्छी तरह समझ लें।
c) स्वतः प्रक्रम की शर्तों पर आधारित प्रश्न परीक्षा में जरूर आते हैं।
Question 7: एक प्रक्रम में निकाय द्वारा 701 J ऊष्मा अवशोषित होती है एवं 394 J कार्य किया जाता है। इस प्रक्रम में आंतरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
Answer:
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार, ΔU = q + w होता है। यहाँ निकाय द्वारा ऊष्मा अवशोषित की जाती है, इसलिए q = +701 J है। निकाय द्वारा कार्य किया जाता है, इसलिए w = -394 J है। इन मानों को समीकरण में रखने पर: ΔU = 701 J + (-394 J) = 307 J प्राप्त होता है। अतः आंतरिक ऊर्जा में 307 J का परिवर्तन (वृद्धि) होता है।
मुख्य बिंदु:
• ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण पर आधारित है: ΔU = q + w.
• अवशोषित ऊष्मा धनात्मक और उत्सर्जित ऊष्मा ऋणात्मक होती है.
• निकाय द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक और निकाय पर किया गया कार्य धनात्मक होता है.
आम गलतियाँ:
• कार्य या ऊष्मा के चिह्नों (+ या -) में गलती करना।
• सूत्र में q और w के मान गलत रखना।
• उत्तर के साथ उचित मात्रक (Joule) न लिखना।
Exam Tips:
a) चिह्नों की परिपाटी (sign convention) को हमेशा स्पष्ट रूप से याद रखें।
b) आंकिक प्रश्न हल करते समय पहले दिए गए मान (given values) लिखें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक लिखना न भूलें।
Question 8: एक बम कैलोरीमीटर में NH₂CN की अभिक्रिया डाइऑक्सीजन के साथ की गई एवं ΔU का मान -742.7 kJ mol⁻¹ पाया गया (298 K पर)। इस अभिक्रिया के लिए 298 K पर एंथैल्पी परिवर्तन ज्ञात कीजिए-
NH₂CN(g) + (3/2)O₂(g) → N₂(g) + CO₂(g) + H₂O(l)
Answer:
दिए गए समीकरण के अनुसार, ΔH = ΔU + Δn_g RT है। यहाँ ΔU = -742.7 kJ mol⁻¹, T = 298 K और R = 8.314 × 10⁻³ kJ mol⁻¹ K⁻¹ हैं। गैसीय मोलों में परिवर्तन Δn_g = Σn_g(products) - Σn_g(reactants) = 2 - 2.5 = -0.5 mol है। Δn_g RT का मान = (-0.5 mol) × (298 K) × (8.314 × 10⁻³ kJ mol⁻¹ K⁻¹) = -1.2 kJ mol⁻¹ है। इसे सूत्र में रखने पर ΔH = -742.7 + (-1.2) = -743.9 kJ mol⁻¹ प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• ΔH और ΔU का संबंध: ΔH = ΔU + Δn_g RT.
• Δn_g निकालते समय केवल गैसीय पदार्थों के मोलों को ही गिना जाता है (H₂O यहाँ द्रव अवस्था में है)।
• R के मात्रक को kJ में बदलने के लिए 10⁻³ से गुणा करना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• जल (H₂O) को गैसीय मान लेना जबकि वह द्रव अवस्था (l) में है।
• गैस स्थिरांक R की इकाई और मान में असंगति रखना।
• गणना में छोटी मोटी गणितीय त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) हर रासायनिक समीकरण में भौतिक अवस्थाओं को ध्यान से देखें।
b) R का सही मान (J या kJ में) उपयोग करें।
c) चरणबद्ध तरीके से गणना करें ताकि गलती की संभावना कम हो।
Question 9: 60.0 ग्राम एल्युमीनियम का तापमान 35°C से 55°C तक बढ़ाने के लिए कितने kJ ऊष्मा की आवश्यकता होगी? Al की मोलर ऊष्माधारिता 24 J mol⁻¹ K⁻¹ है।
Answer:
ऊष्मा की मात्रा ज्ञात करने का सूत्र q = m × c × ΔT है, जहाँ m पदार्थ का द्रव्यमान, c मोलर ऊष्माधारिता और ΔT तापमान में परिवर्तन है। एल्युमीनियम का मोलर द्रव्यमान 27 g mol⁻¹ है। मोलों की संख्या n = 60 / 27 mol है। तापमान परिवर्तन ΔT = 55 - 35 = 20 K है। मान रखने पर q = (60 / 27 mol) × (24 J mol⁻¹ K⁻¹) × (20 K) = 1066.67 J = 1.07 kJ प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• ऊष्मा का सूत्र q = n × C_m × ΔT (या m × विशिष्ट ऊष्मा × ΔT) होता है।
• मोलर ऊष्माधारिता दी होने पर द्रव्यमान को मोल में बदलना होता है।
• तापमान में परिवर्तन सेल्सियस और केल्विन दोनों पैमानों पर समान (20) होता है।
आम गलतियाँ:
• ग्राम को मोल में बदले बिना सीधे द्रव्यमान का उपयोग करना।
• जूल को किलो जूल में बदलना भूल जाना।
• मोलर द्रव्यमान गलत रखना।
Exam Tips:
a) मोलर ऊष्माधारिता और विशिष्ट ऊष्माधारिता का अंतर समझें।
b) उत्तर को सामान्यतः kJ में मांगा जाता है, इसलिए 1000 से भाग देना न भूलें।
c) मात्रकों का विशेष ध्यान रखें।
Question 10: 10.0°C पर 1.0 मोल पानी के -10.0°C पर बर्फ में जमने पर एंथैल्पी परिवर्तन की गणना करें।
Δ_fusH = 6.03 kJ mol⁻¹ at 0°C, C_p[H₂O(l)] = 75.3 J mol⁻¹ K⁻¹, C_p[H₂O(s)] = 36.8 J mol⁻¹ K⁻¹
Answer:
इस प्रक्रम को तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है: (1) 10°C के पानी का 0°C के पानी में ठंडा होना, (2) 0°C के पानी का 0°C की बर्फ में जमना (संगलन), और (3) 0°C की बर्फ का -10°C की बर्फ में ठंडा होना। इन तीनों चरणों के एंथैल्पी परिवर्तनों का योग कुल एंथैल्पी परिवर्तन होगा। गणना करने पर कुल ΔH का मान लगभग -7.151 kJ mol⁻¹ प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• ऐसे बहु-चरण प्रक्रमों में हेस के नियम का उपयोग करके सभी चरणों के ΔH को जोड़ा जाता है।
• चरण 1 और 3 में तापमान परिवर्तन के लिए q = C_p × ΔT का उपयोग होता है।
• चरण 2 में गुप्त ऊष्मा (संगलन एंथैल्पी) का उपयोग होता है।
आम गलतियाँ:
• चरणों की संख्या भूल जाना या किसी चरण को छोड़ देना।
• तापमान सीमा (Limits) गलत रखना (जैसे 10 से 0, या 0 से -10)।
• जूल और किलो जूल के मात्रकों को आपस में मिला देना।
Exam Tips:
a) ऐसे लंबे आंकिक प्रश्नों को भागों में बांटकर हल करें।
b) प्रत्येक चरण का समीकरण स्पष्ट रूप से लिखें।
c) गणना के अंत में सभी इकाइयों को एक समान (kJ या J) बनाएं।
Question 11: CO₂ में कार्बन के दहन की एंथैल्पी -393.5 kJ mol⁻¹ है। कार्बन और डाइऑक्सीजन गैस से 35.2 ग्राम CO₂ बनने पर निकलने वाली ऊष्मा की गणना करें।
Answer:
कार्बन के दहन का समीकरण C(s) + O₂(g) → CO₂(g) है, जिसके लिए ΔH = -393.5 kJ mol⁻¹ है। इसका अर्थ है कि 1 मोल (44 ग्राम) CO₂ के निर्माण पर 393.5 kJ ऊष्मा मुक्त होती है। 35.2 ग्राम CO₂ के निर्माण पर मुक्त होने वाली ऊष्मा = (393.5 kJ / 44 g) × 35.2 g = 314.8 kJ होगी। अतः 314.8 kJ ऊष्मा निकलेगी।
मुख्य बिंदु:
• CO₂ का मोलर द्रव्यमान 44 g mol⁻¹ होता है।
• एंथैल्पी परिवर्तन प्रति मोल अभिक्रिया के लिए परिभाषित होता है।
• द्रव्यमान के अनुपात से उत्सर्जित ऊष्मा की गणना की जाती है।
आम गलतियाँ:
• मोलर द्रव्यमान निकालने में गलती करना।
• एकिक नियम (unitary method) में संख्याओं को उल्टा गुणा-भाग करना।
• ऊष्मा के साथ ऋणात्मक चिह्न या गलत भाषा का प्रयोग करना (निकलने वाली ऊष्मा धनात्मक लिखी जाती है)।
Exam Tips:
a) पहले मोल निकालें, फिर मोलर एंथैल्पी का उपयोग करें।
b) भाषा स्पष्ट रखें - "निकलने वाली ऊष्मा" का अर्थ धनात्मक ऊर्जा की मात्रा है।
c) यह साधारण लेकिन महत्वपूर्ण आंकिक प्रश्न है।
Question 12: CO(g), CO₂(g), N₂O(g) और N₂O₄(g) के बनने की एंथैल्पी क्रमशः -110 kJ mol⁻¹, -393 kJ mol⁻¹, 81 kJ mol⁻¹ और 9.7 kJ mol⁻¹ हैं। अभिक्रिया के लिए Δ_rH का मान ज्ञात कीजिए:
N₂O₄(g) + 3CO(g) → N₂O(g) + 3CO₂(g)
Answer:
अभिक्रिया की एंथैल्पी परिवर्तन Δ_rH उत्पादों की विरचन एंथैल्पी के योग में से अभिकारकों की विरचन एंथैल्पी के योग को घटाकर निकाली जाती है: Δ_rH = ΣΔ_fH(products) - ΣΔ_fH(reactants). मान रखने पर: Δ_rH = [Δ_fH(N₂O) + 3Δ_fH(CO₂)] - [Δ_fH(N₂O₄) + 3Δ_fH(CO)] = [9.7 + 3(-393)] - [9.7 (for N₂O₄ is 9.7) + 3(-110)] = [-1179.3] - [9.7 - 330] = -777.7 kJ mol⁻¹ प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• सूत्र: Δ_rH = Σ( उत्पाद ) - Σ( अभिकारक ).
• रसमीकरणमितीय गुणांकों (coefficients) से विरचन एंथैल्पी को गुणा करना आवश्यक है (जैसे 3CO और 3CO₂)।
• सभी मान मानक विरचन एंथैल्पी के हैं।
आम गलतियाँ:
• उत्पादों और अभिकारकों के क्रम को आपस में बदल देना।
• गुणांकों से गुणा करना भूल जाना।
• चिह्नों (+ और -) को जोड़ने में गलती करना।
Exam Tips:
a) इस प्रकार के सूत्र आधारित प्रश्नों में मान बहुत सावधानी से रखें।
b) ब्रैकेट का सही उपयोग करें ताकि चिह्न की गलती न हो।
c) अभ्यास से ऐसे प्रश्न आसानी से हल हो जाते हैं।
Question 13: दिया है,
N₂(g) + 3H₂(g) → 2NH₃(g), ΔH° = -92.4 kJ mol⁻¹
NH₃ गैस के विरचन की मानक एंथैल्पी क्या है?
Answer:
किसी पदार्थ के 1 मोल के उसकी मानक अवस्था में विरचन पर होने वाले एंथैल्पी परिवर्तन को विरचन की मानक एंथैल्पी कहते हैं। दी गई अभिक्रिया में 2 मोल NH₃ का निर्माण होता है जिसके लिए ΔH° = -92.4 kJ mol⁻¹ है। अतः 1 मोल NH₃ के विरचन की मानक एंथैल्पी इसके आधी होगी: Δ_fH°(NH₃) = -92.4 / 2 = -46.2 kJ mol⁻¹.
मुख्य बिंदु:
• विरचन एंथैल्पी हमेशा 1 मोल उत्पाद के लिए परिभाषित होती है।
• समीकरण में उत्पाद के गुणांक से कुल एंथैल्पी को विभाजित किया जाता है।
• मानक अवस्था में तत्व अपनी स्थिर अवस्था में होने चाहिए।
आम गलतियाँ:
• 2 मोल के मान को ही 1 मोल का मान मान लेना।
• परिभाषा पर ध्यान न देना।
• चिह्न छोड़ देना।
Exam Tips:
a) परिभाषा हमेशा याद रखें - "1 मोल यौगिक का विरचन"।
b) यदि समीकरण में उत्पाद 2 मोल है, तो मान को 2 से भाग देना न भूलें।
c) परीक्षा में यह एक या दो अंकों का बहुत कॉमन प्रश्न है।
Question 14: निम्नलिखित आंकड़ों से CH₃OH(l) के गठन की मानक एंथैल्पी की गणना करें:
CH₃OH(l) + (3/2)O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(l); ΔcH° = -726 kJ mol⁻¹
C(s) + O₂(g) → CO₂(g); ΔcH° = -393 kJ mol⁻¹
H₂(g) + (1/2)O₂(g) → H₂O(l); ΔcH° = -286 kJ mol⁻¹
Answer:
हमें अभीष्ट समीकरण C(s) + 2H₂(g) + (1/2)O₂(g) → CH₃OH(l) प्राप्त करनी है। इसके लिए समीकरण (ii) + 2 × समीकरण (iii) - समीकरण (i) करने पर: Δ_fH°[CH₃OH(l)] = ΔcH°(C) + 2ΔcH°(H₂) - ΔcH°(CH₃OH) = (-393) + 2(-286) - (-726) = -393 - 572 + 726 = -239 kJ mol⁻¹ प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• इसे हेस के नियम (Hess's Law) द्वारा हल किया जाता है।
• समीकरणों को जोड़ते या घटाते समय उनके एंथैल्पी परिवर्तन भी उसी गणितीय संक्रिया के अनुसार बदलते हैं।
• अभीष्ट समीकरण के अनुसार अभिकारकों और उत्पादों को व्यवस्थित किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• समीकरण को उल्टा करते समय एंथैल्पी का चिह्न न बदलना।
• हाइड्रोजन वाले समीकरण को 2 से गुणा करना भूल जाना।
• गणितीय गणना में गलती करना।
Exam Tips:
a) हेस के नियम के प्रश्नों में हमेशा पहले अंतिम (अभीष्ट) समीकरण लिखें।
b) देखें कि दी गई समीकरणों को कैसे पलटना या गुणा करना है।
c) स्टेप-बाय-स्टेप हल करें ताकि नंबर पूरे मिलें।
Question 15: अभिक्रिया के लिए एंथैल्पी-परिवर्तन की गणना करें
CCl₄(g) → C(g) + 4Cl(g)
और CCl₄(g) में C-Cl की बंध एंथैल्पी की गणना करें।
Δ_vapH°(CCl₄) = 30.5 kJ mol⁻¹, Δ_fH°(CCl₄) = -135.5 kJ mol⁻¹
Δ_aH°(C) = 715.0 kJ mol⁻¹, जहाँ Δ_aH° अणुकरण की एंथैल्पी है
Δ_aH°(Cl₂) = 242 kJ mol⁻¹
Answer:
दी गई अभिक्रिया के लिए एंथैल्पी परिवर्तन ΔH = Δ_aH°(C) + 2Δ_aH°(Cl₂) - Δ_vapH°(CCl₄) - Δ_fH°(CCl₄) होता है। मान रखने पर ΔH = 715.0 + 2(242) - 30.5 - (-135.5) = 1304 kJ mol⁻¹ प्राप्त होता है। CCl₄ में चार C-Cl बंध होते हैं, अतः एक C-Cl बंध की बंध एंथैल्पी = 1304 / 4 = 326 kJ mol⁻¹ होगी।
मुख्य बिंदु:
• बंध एंथैल्पी निकालने के लिए सभी पदार्थों को गैसीय परमाणु अवस्था में बदलना होता है।
• CCl₄ में कुल चार C-Cl बंध हैं, इसलिए कुल बंध एंथैल्पी को 4 से भाग दिया जाता है।
• वाष्पीकरण और विरचन एंथैल्पी के मानों का सही उपयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• Cl₂ की परमाणुकरण एंथैल्पी लेते समय 2 से गुणा करना भूल जाना।
• CCl₄ के 4 बंधों को ध्यान में न रखकर 4 से भाग न देना।
• चिह्नों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) बंध एंथैल्पी के ऐसे बड़े प्रश्नों को थर्मोकेमिकल चक्र (thermochemical cycle) या समीकरणों के संयोजन से हल करें।
b) परमाणुकरण (atomization) का अर्थ है सभी बंधों को तोड़कर गैसीय परमाणु बनाना।
c) अंतिम उत्तर में बंध की संख्या से भाग देना न भूलें।
Question 16: एक विलगित निकाय के लिए ΔU = 0, इसके लिए ΔS क्या होगा?
Answer:
एक विलगित निकाय (isolated system) के लिए आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन ΔU = 0 होता है। ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम के अनुसार, विलगित निकाय में होने वाले सभी स्वतः प्रक्रमों के लिए एन्ट्रापी में परिवर्तन धनात्मक (ΔS > 0) होता है। साम्यावस्था पर एन्ट्रापी परिवर्तन शून्य हो सकता है, लेकिन स्वतः प्रक्रिया के लिए ΔS धनात्मक होता है।
मुख्य बिंदु:
• विलगित निकाय में ऊर्जा स्थिर रहती है लेकिन एन्ट्रापी बढ़ती है।
• स्वतः प्रक्रम के लिए ΔS > 0 (शून्य से अधिक) होता है।
• ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम एन्ट्रापी पर आधारित है।
आम गलतियाँ:
• ΔU = 0 देखकर ΔS को भी शून्य मान लेना।
• एन्ट्रापी और आंतरिक ऊर्जा को एक ही समझ लेना।
• विलगित निकाय की शर्तों को भूल जाना।
Exam Tips:
a) याद रखें कि विलगित निकाय में एन्ट्रापी हमेशा बढ़ती है या अधिकतम होती है।
b) ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम का यह मुख्य निष्कर्ष है।
c) एक वाक्य का स्पष्ट उत्तर लिखें।
Question 17: 298 K पर अभिक्रिया 2A + B → C के लिए, ΔH = 400 kJ mol⁻¹ एवं ΔS = 0.2 kJ K⁻¹ mol⁻¹
ΔH और ΔS को तापमान परिसर में स्थिर मानते हुए किस तापमान पर अभिक्रिया सहज हो जाएगी?
Answer:
अभिक्रिया के स्वतःस्फूर्त (सहज) होने के लिए ΔG का मान ऋणात्मक होना चाहिए। साम्यावस्था पर ΔG = 0 होता है, जिससे सूत्र T = ΔH / ΔS प्राप्त होता है। मान रखने पर T = (400 kJ mol⁻¹) / (0.2 kJ K⁻¹ mol⁻¹) = 2000 K प्राप्त होता है। चूँकि ΔH और ΔS दोनों धनात्मक हैं, इसलिए अभिक्रिया केवल 2000 K से अधिक तापमान पर ही स्वतःस्फूर्त (सहज) होगी।
मुख्य बिंदु:
• स्वतः प्रक्रम के लिए ΔG < 0 होना चाहिए।
• संक्रमण तापमान निकालने के लिए ΔG = 0 रखकर T = ΔH / ΔS का उपयोग करते हैं।
• धनात्मक ΔH और ΔS वाली अभिक्रियाएँ उच्च तापमान पर ही स्वतः होती हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल 2000 K लिखकर यह न बताना कि तापमान इससे अधिक होना चाहिए।
• ΔH और ΔS के मात्रकों की असंगति रखना।
• गिब्स समीकरण का गलत पक्षांतर करना।
Exam Tips:
a) तापमान की सीमा (से अधिक या से कम) स्पष्ट रूप से लिखें।
b) मात्रक हमेशा kJ और kJ/K में संतुलित रखें।
c) यह बहुत महत्वपूर्ण संख्यात्मक प्रश्न है।
Question 18: अभिक्रिया 2Cl(g) → Cl₂(g) के लिए, ΔH और ΔS के चिह्न क्या हैं?
Answer:
दी गई अभिक्रिया में क्लोरीन के दो परमाणु मिलकर क्लोरीन का एक अणु बनाते हैं, जिससे नया आबंध (bond) बनता है। आबंध निर्माण में ऊर्जा बाहर निकलती है, अतः ΔH ऋणात्मक है। साथ ही, दो स्वतंत्र परमाणुओं की तुलना में एक अणु की एन्ट्रापी कम होती है (व्यवस्था बढ़ती है और स्वतंत्रता घटती है), इसलिए एन्ट्रापी परिवर्तन ΔS भी ऋणात्मक है।
मुख्य बिंदु:
• आबंध बनने पर ऊर्जा मुक्त होती है (ΔH < 0)।
• परमाणुओं से अणु बनने पर कणों की संख्या घटती है जिससे एन्ट्रापी घटती है (ΔS < 0)।
• दोनों चिह्न ऋणात्मक होते हैं।
आम गलतियाँ:
• आबंध टूटने और आबंध बनने की प्रक्रिया में भ्रमित होना।
• एन्ट्रापी के चिह्न को धनात्मक लिख देना।
• कणों की संख्या के आधार पर एन्ट्रापी न समझना।
Exam Tips:
a) याद रखें: आबंध निर्माण में ΔH (-), आबंध टूटने में ΔH (+)।
b) गैसीय मोल बढ़ने पर ΔS (+) और घटने पर ΔS (-)।
c) तर्क सहित उत्तर दें।
Question 19: अभिक्रिया 2A(g) + B(g) → 2D(g) के लिए, ΔU° = -10.5 kJ एवं ΔS° = -44.1 JK⁻¹
अभिक्रिया के लिए ΔG° की गणना करें, और बताएं कि क्या अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित हो सकती है?
Answer:
सबसे पहले Δn_g = 2 - (2 + 1) = -1 mol है। सूत्र ΔH° = ΔU° + Δn_g RT से, ΔH° = -10.5 kJ + (-1 mol) × (298 K) × (8.314 × 10⁻³ kJ mol⁻¹ K⁻¹) = -10.5 - 2.48 = -12.98 kJ प्राप्त होता है। अब गिब्स ऊर्जा समीकरण ΔG° = ΔH° - TΔS° से, ΔG° = -12.98 kJ - (298 K) × (-0.0441 kJ K⁻¹) = -12.98 + 13.14 = +0.16 kJ प्राप्त होता है। चूँकि ΔG° का मान धनात्मक है, अतः अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित नहीं हो सकती है।
मुख्य बिंदु:
• पहले ΔU से ΔH निकाला जाता है।
• फिर ΔG° = ΔH° - TΔS° सूत्र का प्रयोग होता है।
• ΔG° धनात्मक होने पर अभिक्रिया स्वतः नहीं होती है।
आम गलतियाँ:
• J और kJ के मात्रकों को एक साथ सीधे जोड़-घटा देना।
• ΔS° को J में रखकर kJ में बदल न भूल जाना।
• Δn_g की गणना गलत करना।
Exam Tips:
a) मात्रकों की एकरूपता (विशेषकर J और kJ) का विशेष ध्यान रखें।
b) सभी चरण क्रमशः लिखें: पहले ΔH, फिर ΔG।
c) अंत में ΔG के चिह्न के आधार पर स्वतः होने का निष्कर्ष अवश्य लिखें।
Question 20: एक अभिक्रिया के लिए साम्यावस्था स्थिरांक 10 है। ΔG° का मान क्या होगा? R = 8.314 JK⁻¹ mol⁻¹, T = 300 K.
Answer:
गिब्स ऊर्जा और साम्यावस्था स्थिरांक के बीच संबंध का सूत्र ΔG° = -2.303 RT log K_eq होता है। मान रखने पर: ΔG° = -2.303 × (8.314 JK⁻¹ mol⁻¹) × (300 K) × log₁₀(10) है। चूँकि log₁₀(10) = 1 होता है, अतः ΔG° = -2.303 × 8.314 × 300 × 1 = -5744.14 J mol⁻¹ = -5.744 kJ mol⁻¹ प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• सूत्र ΔG° = -2.303 RT log K_eq का उपयोग किया जाता है।
• log₁₀(10) का मान 1 होता है।
• उत्तर सामान्यतः kJ mol⁻¹ में दिया जाता है।
आम गलतियाँ:
• log बेस e और बेस 10 में अंतर न समझना (-2.303 का उपयोग न करना यदि ln न हो)।
• जूल को किलोजूल में बदलना भूल जाना।
• तापमान या R का मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) यह सूत्र रासायनिक साम्य और ऊष्मागतिकी दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
b) लघुगणक (logarithm) के मान याद रखें।
c) मात्रक स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 21: निम्नलिखित अभिक्रियाओं के आधार पर NO(g) के ऊष्मागतिकी स्थायित्व पर टिप्पणी कीजिए-
(1/2)N₂(g) + (1/2)O₂(g) → NO(g), Δ_rH° = 90 kJ mol⁻¹
NO(g) + (1/2)O₂(g) → NO₂(g), Δ_rH° = -74 kJ mol⁻¹
Answer:
प्रथम अभिक्रिया में ΔH° का मान धनात्मक (+90 kJ mol⁻¹) है, जो यह दर्शाता है कि NO(g) के निर्माण के दौरान ऊष्मा अवशोषित होती है। इसका अर्थ है कि NO(g) अपने घटक तत्वों (N₂ और O₂) की तुलना में उच्च ऊर्जा पर है, अतः यह ऊष्मागतिक रूप से अस्थिर है। दूसरी अभिक्रिया में ΔH° का मान ऋणात्मक (-74 kJ mol⁻¹) है, जिसका अर्थ है कि NO(g), ऑक्सीजन के साथ मिलकर NO₂ में परिवर्तित होने पर ऊष्मा मुक्त करती है, जिससे यह अधिक स्थिर हो जाता है।
मुख्य बिंदु:
• धनात्मक विरचन एंथैल्पी वाले यौगिक ऊष्मागतिक रूप से अस्थिर होते हैं।
• ऋणात्मक एंथैल्पी परिवर्तन स्थायित्व को बढ़ाता है।
• NO का निर्माण ऊष्माशोषी प्रक्रम है।
आम गलतियाँ:
• धनात्मक ΔH का अर्थ स्थायित्व समझ लेना, जबकि यह अस्थायित्व को दर्शाता है।
• दोनों अभिक्रियाओं के अंतर को स्पष्ट न करना।
• ऊष्मप्रवैगिकी स्थायित्व और रासायनिक सक्रियता को मिला देना।
Exam Tips:
a) याद रखें: उच्च ऊर्जा = कम स्थायित्व (धनात्मक ΔH)।
b) कम ऊर्जा = अधिक स्थायित्व (ऋणात्मक ΔH)।
c) टिप्पणी वाले प्रश्नों में तार्किक भाषा का प्रयोग करें।
Question 22: जब 1 मोल H₂O(l) को मानक परिस्थितियों में विरचित किया जाता है, तब परिवेश के एन्ट्रापी-परिवर्तन की गणना कीजिए। Δ_fH° = -286 kJ mol⁻¹.
Answer:
1 मोल H₂O(l) के विरचन पर 286 kJ mol⁻¹ ऊष्मा निकलती है (उत्पादित होती है)। यह ऊष्मा परिवेश द्वारा अवशोषित की जाती है, अतः परिवेश द्वारा अवशोषित ऊष्मा q_surr = +286 kJ mol⁻¹ है। परिवेश का एन्ट्रापी परिवर्तन ΔS_surr = -q_sys / T = q_surr / T होता है। मानक तापमान T = 298 K है। मान रखने पर ΔS_surr = (286 × 10³ J mol⁻¹) / (298 K) = 959.73 J mol⁻¹ K⁻¹ प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• परिवेश का एन्ट्रापी परिवर्तन ΔS_surr = -ΔH_sys / T होता है।
• निकाय द्वारा छोड़ी गई ऊष्मा परिवेश के लिए धनात्मक होती है।
• तापमान मानक 298 K लिया जाता है।
आम गलतियाँ:
• ΔH के चिह्न को परिवेश के साथ गलत तरीके से उपयोग करना।
• J और kJ के रूपांतरण में भूल करना।
• परिवेश और निकाय के एन्ट्रापी परिवर्तन में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) सूत्र ΔS_surr = -ΔH / T का सही उपयोग करें।
b) याद रखें कि यदि निकाय के लिए ΔH ऋणात्मक है, तो परिवेश के लिए ΔS धनात्मक होगा।
c) मात्रक J K⁻¹ mol⁻¹ में लिखना न भूलें।
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