NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 02 Acids Bases and Salts (अम्ल, क्षारक एवं लवण) in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 10 Science: Chapter 02 अम्ल, क्षारक एवं लवण

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Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 02 अम्ल, क्षारक एवं लवण

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Question 1: कोई विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है, इसका pH संभवतः क्या होगा?
(a) 1
(b) 4
(c) 5
(d) 10

Answer:

इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (d) 10 है। लाल लिटमस को नीला करने वाले विलयन प्रकृति में क्षारीय होते हैं। क्षारीय विलयनों का pH मान 7 से अधिक होता है। दिए गए विकल्पों में केवल 10 ही एक ऐसी संख्या है जो 7 से अधिक है, अतः यह विलयन एक क्षारीय विलयन है। अन्य सभी विकल्प 1, 4 और 5 अम्लीय विलयनों को दर्शाते हैं जो नीले लिटमस को लाल करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• लाल लिटमस को नीला करने वाले पदार्थ क्षारक होते हैं।
• क्षारकों का pH मान 7 से अधिक होता है।
• उदासीन विलयन का pH मान 7 और अम्लीय विलयन का pH मान 7 से कम होता है।

आम गलतियाँ:

• लिटमस पेपर के रंगों के परिवर्तन को आपस में मिला देना।
• pH स्केल के अम्लीय और क्षारीय क्षेत्रों को भूल जाना।

Exam Tips:

a) अनिल (अम्ल नीले लिटमस को लाल करता है) और छालानी (क्षार लाल लिटमस को नीला करता है) ट्रिक याद रखें।
b) बहुविकल्पीय प्रश्नों में pH मान की सीमा को हमेशा ध्यान से देखें।
c) क्षारीय विलयन हमेशा 7 से अधिक pH मान प्रदर्शित करते हैं।

 

Question 2: कोई विलयन अंडे के पिसे हुए कवच से अभिक्रिया कर एक गैस उत्पन्न करता है जो चुने के पानी को दूधिया कर देती है। इस विलयन में क्या होगा?
(a) NaCl
(b) HCl
(c) LiCl
(d) KCl

Answer:

इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (b) HCl (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) है। अंडे के पिसे हुए कवच में कैल्शिय‍म कार्बोनेट होता है। जब यह अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस उत्पन्न होती है, जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है। अभिक्रिया इस प्रकार है: CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂। इसलिए, दिए गए विकल्पों में से वह विलयन HCl है।

मुख्य बिंदु:

• अंडे के कवच में कैल्शिय‍म कार्बोनेट (CaCO₃) उपस्थित होता है।
• अम्ल और धातु कार्बोनेट की अभिक्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है।
• कार्बन डाइऑक्साइड गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है।

आम गलतियाँ:

• लवण के विलयनों को अम्ल समझ लेना।
• चूने के पानी को दूधिया करने वाली गैस की पहचान में गलती करना।

Exam Tips:

a) धातु कार्बोनेट और अम्ल की अभिक्रिया के उत्पादों को हमेशा याद रखें।
b) चूने के पानी का दूधिया होना CO₂ गैस की उपस्थिति की पुष्टि करता है।
c) रासायनिक समीकरण लिखकर अभ्यास करें।

 

Question 3: NaOH का 10 mL विलयन, HCl के 8 mL विलयन से पूर्णतः उदासीन हो जाता है। यदि हम NaOH के उसी विलयन का 20 mL लें तो इसे उदासीन करने के लिए HCl के उसी विलयन की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
(a) 4 ml
(b) 8 ml
(c) 12 ml
(d) 16 ml

Answer:

इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (d) 16 ml है। चूँकि 10 mL सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) को उदासीन करने के लिए 8 mL हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) की आवश्यकता होती है, इसलिए NaOH की मात्रा दुगुनी (20 mL) करने पर आवश्यक अम्ल की मात्रा भी दुगुनी हो जाएगी। 8 mL का दुगुना 16 mL होता है। यह समानुपातिक संबंध उदासीनीकरण अभिक्रियाओं में लागू होता है।

मुख्य बिंदु:

• उदासीनीकरण अभिक्रिया में अम्ल और क्षार एक निश्चित अनुपात में प्रतिक्रिया करते हैं।
• अभिकारक की मात्रा दुगुनी होने पर दूसरे अभिकारक की आवश्यक मात्रा भी दुगुनी हो जाती है।
• यह एक सरल ऐकिक नियम (unitary method) पर आधारित प्रश्न है।

आम गलतियाँ:

• मात्राओं के बीच के सीधे अनुपात को समझ न पाना।
• गणितीय गणना में गलती करना।

Exam Tips:

a) ऐसे प्रश्नों में मात्राओं के बीच के अनुपात को ध्यान से समझें।
b) यदि एक अभिकारक दोगुना होता है, तो दूसरा भी दोगुना होगा।
c) गणना को संक्षिप्त रूप में लिखकर जाँच लें।

 

Question 4: अपच का उपचार करने के लिए निम्न में से किस औषधि का उपयोग होता है?
(a) एंटीबायोटिक (प्रतिजैविक)
(b) एनाल्जेसिक (पीडाहरী)
(c) एंटैसिड
(d) एंटीसेप्टिक (प्रतिरोधी)

Answer:

इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (c) एंटैसिड है। अपच की स्थिति में पेट में अत्यधिक अम्ल (HCl) उत्पन्न हो जाता है, जिससे जलन और दर्द होता है। एंटैसिड एक क्षारीय औषधि होती है जो पेट के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करती है और राहत प्रदान करती है। उदाहरण के लिए, मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया) एक सामान्य एंटैसिड है।

मुख्य बिंदु:

• अपच पेट में अम्ल की अधिकता के कारण होती है।
• एंटैसिड प्रकृति में क्षारीय होते हैं और अम्ल को उदासीन करते हैं।
• एंटीबायोटिक बैक्टीरिया से और एनाल्जेसिक दर्द से राहत देती है।

आम गलतियाँ:

• एनाल्जेसिक और एंटैसिड के नामों में भ्रमित होना।
• अपच के कारणों और उपचार को गलत समझना।

Exam Tips:

a) औषधियों के वर्गीकरण और उनके कार्यों की सूची याद रखें।
b) पेट की अम्लता के लिए हमेशा एंटैसिड का प्रयोग होता है।
c) मिल्क ऑफ मैग्नीशिया का रासायनिक नाम और सूत्र याद रखें।

 

Question 5: निम्न अभिक्रिया के लिए पहले शब्द-समीकरण लिखिए तथा उसके बाद संतुलित समीकरण लिखिए:
(a) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल दानेदार जिंक के साथ अभिक्रिया करता है।
(b) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मैग्नीशियम पट्टी के साथ अभिक्रिया करता है।
(c) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल एल्यूमीनियम चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है।
(d) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लोहे के रेतन के साथ अभिक्रिया करता है।

Answer:

(a) शब्द-समीकरण: सल्फ्यूरिक अम्ल + जिंक → जिंक सल्फेट + हाइड्रोजन
संतुलित समीकरण: H₂SO₄(aq) + Zn(s) → ZnSO₄(aq) + H₂(g)
(b) शब्द-समीकरण: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल + मैग्नीशियम → मैग्नीशियम क्लोराइड + हाइड्रोजन
संतुलित समीकरण: 2HCl(aq) + Mg(s) → MgCl₂(aq) + H₂(g)
(c) शब्द-समीकरण: सल्फ्यूरिक अम्ल + एल्यूमीनियम → एल्यूमीनियम सल्फेट + हाइड्रोजन
संतुलित समीकरण: 3H₂SO₄(aq) + 2Al(s) → Al₂(SO₄)₃(aq) + 3H₂(g)
(d) शब्द-समीकरण: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल + लोहा → फेरिक क्लोराइड + हाइड्रोजन
संतुलित समीकरण: 6HCl(aq) + 2Fe(s) → 2FeCl₃(aq) + 3H₂(g)

मुख्य बिंदु:

• अम्ल और धातु की अभिक्रिया से हमेशा लवण और हाइड्रोजन गैस बनती है।
• समीकरणों को संतुलित करते समय द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन करना आवश्यक है。
• भौतिक अवस्थाओं के संकेत (s, l, g, aq) लिखना अच्छा अभ्यास है।

आम गलतियाँ:

• समीकरणों को संतुलित करना भूल जाना।
• रासायनिक सूत्रों और उनकी संयोजकता में गलती करना।

Exam Tips:

a) धातु और अम्ल की सामान्य अभिक्रिया का सूत्र याद रखें: धातु + अम्ल → लवण + हाइड्रोजन।
b) समीकरण संतुलित करते समय प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या दोनों ओर गिनें।
c) हाइड्रोजन गैस के लिए (g) और जलीय विलयन के लिए (aq) लिखें।

 

Question 6: ग्लूकोज एवं एल्कोहॉल जैसे यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं लेकिन इनका वर्गीकरण अम्ल की तरह नहीं होता है। एक क्रियाकलाप द्वारा इसे साबित कीजिए।

Answer:

आकृति का विवरण: एक बीकर में ग्लूकोज या एल्कोहॉल का विलयन लेकर उसमें दो किले लगाकर उन्हें बैटरी, बल्ब और स्विच से जोड़ने का प्रायोगिक सेटअप दर्शाया गया है।
ग्लूकोज और एल्कोहॉल जैसे यौगिकों में हाइड्रोजन होने के बावजूद वे अम्लीय गुण प्रदर्शित नहीं करते क्योंकि वे जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन (H⁺) उत्पन्न नहीं करते हैं। इसे साबित करने के लिए एक क्रियाकलाप करते हैं: एक बीकर में ग्लूकोज का विलयन लेकर उसमें कॉर्क पर लगी दो लोहे की कीलें रखते हैं। इन कीलों को एक 6 वोल्ट की बैटरी, एक बल्ब और एक स्विच के साथ जोड़ते हैं। जब विद्युत धारा प्रवाहित करते हैं, तो हम देखते हैं कि बल्ब नहीं जलता है। यही प्रयोग एल्कोहॉल के साथ दोहराने पर भी बल्ब नहीं जलता है। इससे यह सिद्ध होता है कि इन विलयनों में आयनों का निर्माण नहीं होता है, अतः ये विद्युत का चालन नहीं करते और अम्ल नहीं हैं।

मुख्य बिंदु:

• केवल हाइड्रोजन की उपस्थिति किसी यौगिक को अम्ल नहीं बनाती है।
• अम्लों को विद्युत चालन के लिए जलीय विलयन में H⁺ आयन उत्पन्न करने होते हैं।
• ग्लूकोज और एल्कोहॉल के विलयन में आयन न होने के कारण विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि हाइड्रोजन युक्त हर यौगिक अम्ल होता है।
• क्रियाकलाप के वर्णन में बल्ब के न जलने के कारण को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) प्रयोग का वर्णन करते समय उपकरण (बीकर, बैटरी, बल्ब, कील) का उल्लेख अवश्य करें।
b) मुख्य कारण स्पष्ट करें कि आयनों की अनुपस्थिति के कारण विद्युत चालन नहीं होता।
c) यह प्रश्न क्रियाकलाप आधारित है, इसलिए इसे चरणबद्ध तरीके से लिखें।

 

Question 7: आस्वत जल विद्युत का चालक क्यों नहीं होता जबकि वर्षा जल होता है?

Answer:

आस्वत जल (distilled water) शुद्ध रूप होता है और इसमें किसी भी प्रकार के आयन (आवेशित कण) उपस्थित नहीं होते हैं। विद्युत के चालन के लिए स्वतंत्र आयनों की आवश्यकता होती है, जो आस्वत जल में नहीं होते, इसलिए यह विद्युत का चालन नहीं करता है। इसके विपरीत, वर्षा जल वायुमंडल से गुजरते समय हवा में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों को घोल लेता है, जिससे वह कार्बोनिक अम्ल बनाता है। ये अम्ल हाइड्रोजन आयन और कार्बोनेट आयन उत्पन्न करते हैं। इन आयनों की उपस्थिति के कारण वर्षा जल विद्युत का सुचालक होता है।

मुख्य बिंदु:

• आस्वत जल शुद्ध होता है और उसमें आयन नहीं होते।
• वर्षा जल वायुमंडल की गैसों को घोलकर अम्ल बनाता है जो आयन उत्पन्न करते हैं।
• विद्युत धारा के प्रवाह के लिए आयनों का होना अनिवार्य है।

आम गलतियाँ:

• जल के शुद्ध और अशुद्ध रूप के बीच अंतर न समझ पाना।
• आयनों की भूमिका को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) आयनों की उपस्थिति और अनुपस्थिति को अपने उत्तर का मुख्य आधार बनाएं।
b) आस्वत जल को विद्युत का कुचालक और वर्षा जल को सुचालक स्पष्ट रूप से बताएं।
c) वायुमंडल की गैसों का वर्षा जल में घुलना मुख्य कारण है।

 

Question 8: जल की उपस्थिति में अम्ल का व्यवहार अम्लीय क्यों नहीं होता है?

Answer:

जल की उपस्थिति के बिना अम्ल अपने हाइड्रोजन आयन (H⁺) पृथक नहीं कर पाते हैं। अम्लों का अम्लीय स्वभाव उनमें उपस्थित हाइड्रोजन आयनों के कारण होता है। शुष्क अवस्था में अम्ल और लिटमस पेपर के बीच कोई अभिक्रिया नहीं होती क्योंकि H⁺ आयन उत्पन्न नहीं होते हैं। जब जल मिलाया जाता है, तो अम्ल वियोजित होकर हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) बनाते हैं, जिससे उनका अम्लीय व्यवहार प्रकट होता है। अतः जल के बिना अम्ल अम्लीय गुण प्रदर्शित नहीं करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• अम्लीय गुण के लिए हाइड्रोजन आयन (H⁺) का पृथक होना आवश्यक है।
• शुष्क अम्ल आयन उत्पन्न नहीं करते हैं।
• जल अम्ल को वियोजित करके H⁺ आयन मुक्त करने में सहायता करता है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि अम्ल बिना जल के भी आयनित हो सकते हैं।
• शुष्क लिटमस पेपर और शुष्क HCl गैस के प्रयोग में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) उत्तर में हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) या H⁺ आयन की वियोजन प्रक्रिया का उल्लेख करें।
b) जल की भूमिका को उत्प्रेरक या वियोजक के रूप में समझें।
c) यह अवधारणात्मक प्रश्न है, इसे वैज्ञानिक शब्दावली में लिखें।

 

Question 9: पाँच विलयनों A, B, C, D व E की जब सार्वत्रिक सूचक से जाँच की जाती है तो pH के मान क्रमशः 4, 1, 11, 7 एवं 9 प्राप्त होते हैं। कौन सा विलयन:
(a) उदासीन है?
(b) प्रवल क्षारीय है?
(c) प्रबल अम्लीय है?
(d) दुर्बल अम्लीय है?
(e) दुर्बल क्षारीय है?
pH के मानों को हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

Answer:

(a) उदासीन विलयन: विलयन D (pH = 7)
(b) प्रबल क्षारीय विलयन: विलयन C (pH = 11)
(c) प्रबल अम्लीय विलयन: विलयन B (pH = 1)
(d) दुर्बल अम्लीय विलयन: विलयन A (pH = 4)
(e) दुर्बल क्षारीय विलयन: विलयन E (pH = 9)
हाइड्रोजन आयन की सांद्रता का आरोही क्रम (बढ़ते क्रम में): pH 11 < pH 9 < pH 7 < pH 4 < pH 1 (या C < E < D < A < B)।

मुख्य बिंदु:

• pH मान 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय और 7 से अधिक क्षारीय होता है।
• pH जितना कम होगा, अम्ल उतना ही प्रबल होगा और H⁺ आयन अधिक होंगे।
• pH जितना अधिक होगा, क्षार उतना ही प्रबल होगा और H⁺ आयन कम होंगे।

आम गलतियाँ:

• pH मान और हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के संबंध को उल्टा समझ लेना।
• आरोही क्रम (बढ़ता क्रम) लिखते समय दिशा की गलती करना।

Exam Tips:

a) pH स्केल के नियमों को अच्छी तरह याद रखें।
b) आरोही क्रम का अर्थ छोटे से बड़ा होता है, इसे ध्यान में रखें।
c) प्रत्येक विलयन के सामने उसका pH मान लिखकर मिलान कर लें।

 

Question 10: परखनली 'ए' एवं 'बी' में समान लंबाई की मैग्नीशियम की पट्टी लीजिए। परखनली 'ए' में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) तथा परखनली 'बी' में ऐसिटिक अम्ल (CH₃COOH) डालिए। दोनों अम्लों की मात्रा तथा सांद्रता समान है। किस परखनली में अधिक तेज़ी से बुद्बुदाहट होगी क्यों?

Answer:

परखनली 'ए' में अधिक तेज़ी से बुद्बुदाहट होगी। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) एक प्रबल अम्ल है जो जल में पूरी तरह वियोजित होकर अधिक मात्रा में हाइड्रोजन आयन (H⁺) उत्पन्न करता है। इसके विपरीत, ऐसिटिक अम्ल (CH₃COOH) एक दुर्बल अम्ल है जो आंशिक रूप से वियोजित होता है और कम H⁺ आयन देता है। अधिक आयन होने के कारण HCl मैग्नीशियम के साथ बहुत तेज़ी से अभिक्रिया करता है और हाइड्रोजन गैस के बुलबुले तेज़ी से निकलते हैं।

मुख्य बिंदु:

• प्रबल अम्ल दुर्बल अम्ल की तुलना में अधिक तेज़ी से अभिक्रिया करते हैं।
• HCl एक प्रबल अम्ल है और CH₃COOH एक दुर्बल अम्ल है।
• बुद्बुदाहट हाइड्रोजन गैस (H₂) के तेजी से निकलने के कारण होती है।

आम गलतियाँ:

• प्रबल और दुर्बल अम्लों की अभिक्रिया दर में अंतर न समझ पाना।
• बुद्बुदाहट के कारण को गैस से न जोड़ना।

Exam Tips:

a) प्रबल अम्ल और दुर्बल अम्ल के उदाहरण हमेशा याद रखें।
b) अभिक्रिया की गति वियोजन की मात्रा पर निर्भर करती है, यह स्पष्ट करें।
c) दोनों अम्लों के रासायनिक सूत्र सही लिखें।

 

Question 11: ताजे दूध का pH मान 6 होता है। दही बन जाने पर इसके pH के मान में क्या परिवर्तन होगा? अपना उत्तर समझाइए।

Answer:

दही बन जाने पर pH का मान 6 से कम हो जाएगा। ताजे दूध में लैक्टोज शर्करा होती है जो लैक्टिक अम्ल में बदल जाती है। अम्ल की उपस्थिति के कारण दही की अम्लता बढ़ जाती है और pH मान 6 से घटकर और नीचे आ जाता है। चूँकि pH मान जितना कम होता है, अम्लता उतनी ही अधिक होती है, इसलिए दही का pH मान ताजे दूध से कम होता है।

मुख्य बिंदु:

• दूध से दही बनने की प्रक्रिया में लैक्टिक अम्ल का निर्माण होता है।
• अम्ल की मात्रा बढ़ने से विलयन की अम्लता बढ़ती है और pH गिरता है।
• pH 7 से जितना दूर और कम होगा, वह उतना ही अधिक अम्लीय होगा।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि pH मान बढ़ने से अम्लता बढ़ती है।
• लैक्टिक अम्ल की भूमिका को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) याद रखें: अम्लता बढ़ने पर pH मान घटता है।
b) दूध में लैक्टिक अम्ल बनता है, यह नाम परीक्षा में अवश्य लिखें।
c) उत्तर को तार्किक और वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 12: एक ग्वाला ताजे दूध में थोड़ा बेकिंग सोड़ा मिलाता है।
(a) ताज़ा दूध के pH के मान को 6 से बदलकर थोड़ा क्षारीय क्यों बना देता है?
(b) इस दूध को दही बनने में अधिक समय क्यों लगता है?

Answer:

(a) ग्वाला ताजे दूध में बेकिंग सोडा (जो कि एक क्षारक है) इसलिए मिलाता है ताकि दूध जल्दी से अम्लीय होकर खराब न हो जाए। बेकिंग सोडा मिलाने से दूध का pH मान 6 से थोड़ा बढ़ जाता है और वह क्षारीय हो जाता है, जिससे जीवाणु लैक्टिक अम्ल आसानी से नहीं बना पाते और दूध अधिक समय तक सुरक्षित रहता है।
(b) इस दूध को दही बनने में अधिक समय इसलिए लगता है क्योंकि पहले बेकिंग सोडा (क्षारक) को उदासीन करने के लिए अतिरिक्त अम्ल की आवश्यकता होती है। जब तक सारा बेकिंग सोडा उदासीन नहीं हो जाता, तब तक लैक्टिक अम्ल दूध को खट्टा नहीं कर पाता, इसलिए किण्वन प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

मुख्य बिंदु:

• बेकिंग सोडा एक क्षारक है जो दूध को अम्लीय होने से रोकता है।
• क्षारीय दूध को किण्वित होने (दही बनने) में अधिक समय लगता है।
• यह दूध को गर्मियों में फटने से बचाने का एक घरेलू उपाय है।

आम गलतियाँ:

• बेकिंग सोडा के क्षारीय स्वभाव को भूल जाना।
• दही बनने में अधिक समय लगने के कारण को न समझ पाना।

Exam Tips:

a) दोनों भागों (a और b) का उत्तर अलग-अलग स्पष्ट बिंदुओं में दें।
b) क्षारक और अम्ल की पारस्परिक क्रिया को समझें।
c) व्यावहारिक जीवन से जुड़े ऐसे प्रश्नों के उत्तर तर्कसंगत दें।

 

Question 13: प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द-रोधी बर्तन में क्यों रखा जाना चाहिए? इसकी व्याख्या कीजिए।

Answer:

प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO₄·½H₂O) को आर्द्र-रोधी बर्तन में इसलिए रखा जाना चाहिए क्योंकि यह नमी (जल) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है। यदि यह नमी के संपर्क में आता है, तो यह जल को अवशोषित कर लेता है और जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) नामक एक कठोर ठोस पदार्थ में बदल जाता है। इस रासायनिक परिवर्तन के कारण प्लास्टर ऑफ पेरिस अपने गुण खो देता है और उपयोग के योग्य नहीं रहता। रासायनिक समीकरण: CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O → CaSO₄·2H₂O।

मुख्य बिंदु:

• प्लास्टर ऑफ पेरिस नमी पाकर कठोर जिप्सम में बदल जाता है।
• इसका रासायनिक सूत्र कैल्शिय‍म सल्फेट हेमीहाइड्रेट है।
• आर्द्र-रोधी बर्तन इसे वायु की नमी से सुरक्षित रखते हैं।

आम गलतियाँ:

• प्लास्टर ऑफ पेरिस और जिप्सम के रासायनिक सूत्रों में जल के अणुओं की संख्या में गलती करना।
• नमी के प्रभाव को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक नाम और सूत्र अवश्य याद रखें।
b) जिप्सम बनने की अभिक्रिया का समीकरण अभ्यास करें।
c) कारण स्पष्ट करें कि नमी से वह ठोस हो जाता है।

 

Question 14: उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दीजिए।

Answer:

जब किसी अम्ल और किसी क्षारक की आपस में अभिक्रिया होती है, तो लवण और जल का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization reaction) कहते हैं। इस अभिक्रिया में अम्ल का अम्लीय प्रभाव और क्षारक का क्षारीय प्रभाव दोनों समाप्त हो जाते हैं।
उदाहरण 1: सोडियम हाइड्रोक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया:
NaOH + HCl → NaCl + H₂O
उदाहरण 2: मैग्नीशियम हाइड्रोक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया:
Mg(OH)₂ + 2HCl → MgCl₂ + 2H₂O

मुख्य बिंदु:

• अम्ल + क्षारक → लवण + जल, यह उदासीनीकरण की मूल समीकरण है।
• इसमें दोनों अभिकारकों के गुण नष्ट हो जाते हैं।
• यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।

आम गलतियाँ:

• लवण और जल के अलावा अन्य उत्पाद लिख देना।
• संतुलित समीकरण न लिखना।

Exam Tips:

a) परिभाषा के साथ कम से कम दो संतुलित समीकरण अवश्य दें।
b) दैनिक जीवन में इसके उदाहरण (जैसे एंटैसिड का प्रयोग) भी याद रखें।
c) शब्दों और सूत्रों दोनों में समीकरण स्पष्ट लिखें।

 

Question 15: धोने का सोड़ा एवं बेकिंग सोड़ा के दो-दो प्रमुख उपयोग बताइए।

Answer:

धोने का सोडा (सोडियम कार्बोनेट, Na₂CO₃·10H₂O) के दो प्रमुख उपयोग:
1. इसका उपयोग काँच, साबुन एवं कागज उद्योगों में किया जाता है।
2. इसका उपयोग घरों में साफ-सफाई के लिए और जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए किया जाता है।
बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट, NaHCO₃) के दो प्रमुख उपयोग:
1. इसका उपयोग बेकिंग पाउडर बनाने में किया जाता है जो केक और डबलरोटी को फुलाकर स्पंजी बनाता है।
2. यह पेट की अम्लता को दूर करने के लिए एंटैसिड के रूप में और सोडा-अमलाग्निशामक (fire extinguisher) में उपयोग किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• धोने का सोडा सफाई और कांच-साबुन उद्योग में मुख्य रूप से प्रयुक्त होता है।
• बेकिंग सोडा खाने की चीजें फुलाने और चिकित्सा (अम्लता नाश) में काम आता है।
• दोनों के रासायनिक नाम और सूत्र अलग-अलग हैं, उन्हें स्पष्ट रखें।

आम गलतियाँ:

• धोने के सोडे और बेकिंग सोडे के उपयोगों को आपस में मिला देना।
• रासायनिक नाम और सूत्र गलत लिखना।

Exam Tips:

a) दोनों रसायनों के उपयोगों को अलग-अलग हेडिंग डालकर लिखें।
b) बेकिंग सोडा का बेकिंग पाउडर में उपयोग सबसे महत्वपूर्ण है, इसे न भूलें।
c) इनके सामान्य नाम और रासायनिक नाम दोनों याद रखें।

 

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