NCERT Solutions Class 10 Hindi Sparsh पाठ 4 मनुष्यता

Official NCERT Solutions for Class 10 Hindi: पाठ 4 मनुष्यता

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Chapter-wise Solutions for Hindi: पाठ 4 मनुष्यता

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi for Sparsh पाठ 4 मनुष्यता

पाठ की रूपरेखा

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी 'मनुष्यता' कविता के माध्यम से संसार को मानवता, एकता, सहानुभूति, उदारता और करुणा का संदेश देते हैं। कवि का मानना है कि मनुष्य को स्वार्थ और संकीर्ण भेदभाव से ऊपर उठकर संपूर्ण मानव कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों की भलाई को सर्वोपरि मानता है और धन के अहंकार से दूर रहकर मानवता को अपनाता है।

 

पाठ का सार

इस कविता में गुप्त जी मनुष्य को सच्ची मनुष्यता का भाव अपनाने की सीख देते हैं। आज का मनुष्य अपने स्वार्थों के पीछे भागकर परोपकार की भावना को भूलता जा रहा है। जो मनुष्य केवल अपने लिए जीता है, वह पशु के समान है क्योंकि पशु का उद्देश्य केवल अपना पेट भरना होता है। भगवान ने मनुष्य को बुद्धि और सामर्थ्य दिया है, इसलिए हमें इसका उपयोग दूसरों की सेवा में करना चाहिए। दधीचि, कर्ण और रंतिदेव जैसे महापुरुषों ने दूसरों की रक्षा के लिए अपने प्राण और शरीर का सहर्ष दान कर दिया था। अतः हमें भी इस नश्वर शरीर का मोह छोड़कर सबके साथ भाईचारे और प्रेम से रहना चाहिए।

 

I. बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. कवि की दृष्टि में सुमृत्यु क्या है?
(a) जब मरने के बाद मनुष्य अमर हो जाए
(b) जब मरने के बाद मनुष्य को लोग उसके अच्छे गुणों के कारण याद करें
(c) जब मनुष्य अपने परिजनों के कल्याण के लिए ही काम करते-करते मर जाए
(d) जब मनुष्य समाज के कल्याण के लिए मर जाए
Answer: (b) जब मरने के बाद मनुष्य को लोग उसके अच्छे गुणों के कारण याद करें
In simple words: मरने के बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहना और अच्छे कार्यों के लिए याद किया जाना ही सच्ची मृत्यु है।

Exam Tip: कविता के अनुसार सुमृत्यु का संबंध परोपकार और यश से है, इसलिए परीक्षा में सही विकल्प चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें।

 

Question 2. मनुष्य का मरना-जीना किस दृष्टि से व्यर्थ है?
(a) जब मनुष्य किसी के काम न आ सके
(b) जब मनुष्य अपने परिवार जनों तक के भी काम न आ सके
(c) जब मरने के बाद मनुष्य को कोई याद करने वाला भी न हो
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) जब मरने के बाद मनुष्य को कोई याद करने वाला भी न हो
In simple words: यदि जीवन में किसी का भला नहीं किया और मरने पर किसी को दुख नहीं हुआ, तो ऐसा जीवन और मरण दोनों ही बेकार हैं।

Exam Tip: जो मनुष्य समाज के लिए नहीं जीता, उसका जीवन निरर्थक माना जाता है - परीक्षा में इस केंद्रीय भाव को याद रखें।

 

Question 3. आपकी दृष्टि में कौन मरे के समान है?
(a) जिसकी मृत्यु आपकी नज़रों के सामने हो जाए
(b) जिसकी मृत्यु आपकी जानकारी में हो
(c) जो ज़रूरत पड़ने पर आपके किसी काम न आ सके
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) जो ज़रूरत पड़ने पर आपके किसी काम न आ सके
In simple words: जो इंसान संकट या ज़रूरत के समय दूसरों की सहायता नहीं करता, उसका जीवित रहना भी मरे हुए के बराबर ही माना जाता है।

Exam Tip: इस प्रश्न में परोपकार की भावना को मुख्य आधार मानकर सही विकल्प का चुनाव करें।

 

Question 4. पशु और मनुष्य में मूलभूत अंतर क्या है?
(a) पशु अपने लिए जीता है, जबकि मनुष्य समस्त मानव जाति के लिए
(b) पशु अपने तथा अपने बच्चों के बारे में सोचता है, जबकि मनुष्य केवल अपने बारे में
(c) पशु तथा मनुष्य केवल अपने बारे में सोचते हैं
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) पशु अपने लिए जीता है, जबकि मनुष्य समस्त मानव जाति के लिए
In simple words: जानवर केवल अपने पेट भरने और जीवित रहने की सोचते हैं, जबकि सच्चा मनुष्य पूरी मानव जाति के कल्याण और भलाई के लिए जीता है।

Exam Tip: पशु-प्रवृत्ति और मनुष्य-प्रवृत्ति के बीच के इस मुख्य अंतर को हमेशा याद रखें।

 

Question 5. सरस्वती किसका गुणगान करती हैं?
(a) आमजन का
(b) स्वार्थी तथा लालची लोगों का
(c) उदार लोगों का
(d) सभी लोगों का
Answer: (c) उदार लोगों का
In simple words: जो लोग दूसरों के प्रति दया और परोपकार की भावना रखते हैं, ज्ञान की देवी सरस्वती भी इतिहास में उनका ही यशगान करती हैं।

Exam Tip: "उदारता" और "सरस्वती पूजन" के बीच के संबंध को कविता की पंक्तियों के आधार पर याद रखें।

 

Question 6. 'अखंड आत्म भाव' का क्या अर्थ है?
(a) संपूर्ण एकता एवं आत्मीयता का भाव
(b) संपूर्ण एकता का भाव
(c) संपूर्ण आत्मीयता का भाव
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) संपूर्ण एकता एवं आत्मीयता का भाव
In simple words: इसका अर्थ है पूरी दुनिया के लोगों को अपना समझना और सबके साथ भाईचारे और एकता का गहरा संबंध महसूस करना।

Exam Tip: "अखंड" का अर्थ एकता और "आत्म भाव" का अर्थ आत्मीयता से है, परीक्षा में शब्दों का अर्थ समझकर उत्तर चुनें।

 

Question 7. किसकी कीर्ति सदा कूजती रहती है?
(a) स्वार्थी की
(b) उदार की
(c) भले मानुष की
(d) उपर्युक्त सभी की
Answer: (b) उदार की
In simple words: जो व्यक्ति अत्यंत दयालु और परोपकारी होता है, उसकी प्रसिद्धि और अच्छे कर्मों की गूंज सदा संसार में बनी रहती है।

Exam Tip: "कीर्ति" का अर्थ यश और प्रसिद्धि से है, जो केवल उदार व्यक्तियों को ही प्राप्त होती है।

 

Question 8. समस्त सृष्टि किसकी पूजा करती है?
(a) धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति की
(b) सामाजिक व्यक्ति की
(c) उदार व्यक्ति की
(d) उपर्युक्त सभी की
Answer: (c) उदार व्यक्ति की
In simple words: सारा संसार उस मनुष्य का सम्मान और नमन करता है जिसके हृदय में दूसरों के लिए नि:स्वार्थ प्रेम और सेवा की भावना होती है।

Exam Tip: "समस्त सृष्टि पूजती" पंक्ति सीधे तौर पर उदार व्यक्ति के सम्मान की ओर संकेत करती है।

 

Question 9. दधीचि ने दूसरों के कल्याण के लिए किस चीज़ का दान किया था?
(a) गायों का
(b) भूमि का
(c) अपने शरीर के मांस का
(d) अपनी अस्थियों का
Answer: (d) अपनी अस्थियों का
In simple words: महर्षि दधीचि ने राक्षसों से देवताओं की रक्षा करने के लिए अपने शरीर की हड्डियों का सहर्ष दान कर दिया था।

Exam Tip: दधीचि और अस्थि-दान (हड्डियों का दान) के पौराणिक प्रसंग को अच्छी तरह याद रखें।

 

Question 10. किसने खुशी-खुशी अपने शरीर के चर्म तक का दान कर दिया था?
(a) रंतिदेव ने
(b) गांधार देश के राजा उशीनर ने
(c) दधीचि ने
(d) वीर कर्ण ने
Answer: (d) वीर कर्ण ने
In simple words: महादानी कर्ण ने बिना किसी संकोच के अपने शरीर की सुरक्षा करने वाले कवच और कुंडल (चर्म) का दान कर दिया था।

Exam Tip: "चर्म" का अर्थ यहाँ कवच से है, जो कर्ण ने दान किया था। परीक्षा में इस ऐतिहासिक तथ्य को ध्यान में रखें।

 

Question 11. कवि के अनुसार दूसरों की भलाई के लिए नश्वर शरीर को जोखिम में डालने से क्यों नहीं डरना चाहिए?
(a) क्योंकि आत्मा अजर-अमर है, इसका नाश नहीं होता, भले ही शरीर का नाश हो जाए
(b) क्योंकि दूसरों की भलाई करने का मौका बार-बार नहीं मिलता
(c) क्योंकि दूसरों की भलाई के लिए जोखिम उठाकर अपने को प्रसिद्ध किया जा सकता है
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) क्योंकि आत्मा अजर-अमर है, इसका नाश नहीं होता, भले ही शरीर का नाश हो जाए
In simple words: हमारा यह भौतिक शरीर एक दिन नष्ट होने वाला है, परंतु हमारी आत्मा कभी नहीं मरती। इसलिए परोपकार के लिए इस नश्वर शरीर का मोह छोड़ देना चाहिए।

Exam Tip: शरीर की नश्वरता और आत्मा की अमरता का दर्शन ही इस कविता का मुख्य आधार है।

 

Question 12. किसने भूख से पीड़ित होने पर भी अपने हाथ में पकड़े थाल को भी दान में दे दिया था?
(a) परम्दानी राजा रंतिदेव ने
(b) गांधार के राजा क्षितीश ने
(c) दानवीर कर्ण ने
(d) महर्षि दधीचि ने
Answer: (a) परम्दानी राजा रंतिदेव ने
In simple words: राजा रंतिदेव ने स्वयं कई दिनों से भूखे रहने के बाद भी भोजन की थाली एक भूखे व्यक्ति को आदरपूर्वक सौंप दी थी।

Exam Tip: "क्षुधार्त रंतिदेव" शब्द भूख से व्याकुल रंतिदेव के लिए प्रयुक्त हुआ है - इसे याद रखें।

 

Question 13. मनुष्य के किस गुण के कारण धरती भी उसके वश में हो जाती है?
(a) मानवता
(b) सहानुभूति
(c) भाईचारा
(d) कट्टरता
Answer: (b) सहानुभूति
In simple words: जब हम दूसरों के प्रति करुणा और दया दिखाते हैं, तो संपूर्ण पृथ्वी और यहाँ के लोग हमारे प्रेम के बंधन में बंध जाते हैं।

Exam Tip: "वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही" पंक्ति सीधे तौर पर सहानुभूति की ओर संकेत करती है।

 

Question 14. बुद्ध का विरुद्धवाद क्या था?
(a) लोगों को अहिंसा का उपदेश देना
(b) करुणावश उस समय की गलत मान्यताओं का विरोध करना
(c) लोगों को शासन के विरुद्ध करना
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) करुणावश उस समय की गलत मान्यताओं का विरोध करना
In simple words: महात्मा बुद्ध ने समाज में फैली कुप्रथाओं और पुरानी रूढ़ियों का प्रेम और करुणा के बल पर डटकर विरोध किया था।

Exam Tip: "विरुद्धवाद" का अर्थ यहाँ तत्कालीन कुप्रथाओं के खिलाफ खड़े होने से है।

 

Question 15. कवि के अनुसार उदार कौन है?
(a) सबको अपना समझने वाला
(b) लोगों पर दया करने वाला
(c) परोपकार करने वाला
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (c) परोपकार करने वाला
In simple words: कवि के अनुसार वही व्यक्ति सच्चा उदार है जो अपने स्वार्थ को छोड़कर दूसरों की भलाई के लिए काम करता है।

Exam Tip: "वही उदार है परोपकार जो करे" पंक्ति के आधार पर इस प्रश्न का सही विकल्प 'परोपकार' ही होगा।

 

Question 16. कवि ने मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी किसे कहा है?
(a) दया
(b) करुणा
(c) सहानुभूति
(d) अहिंसा
Answer: (c) सहानुभूति
In simple words: दूसरों के सुख-दुख को महसूस करने और उनके प्रति दया रखने की भावना ही मनुष्य का सबसे अमूल्य धन है।

Exam Tip: "सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही" पंक्ति में महाविभूति का अर्थ सबसे बड़ी पूँजी (सहानुभूति) से है।

 

Question 17. लोग क्यों मदांध हो जाते हैं?
(a) अपने पास धन-संपत्ति होने के कारण
(b) भरा-पूरा परिवार होने के कारण
(c) बहुत बड़ा ज्ञानी होने के कारण
(d) ईश्वर-भक्ति के कारण
Answer: (a) अपने पास धन-संपत्ति होने के कारण
In simple words: कुछ लोग धन-दौलत और समृद्धि पाकर घमंड में अंधे हो जाते हैं और दूसरों को छोटा समझने की भूल कर बैठते हैं।

Exam Tip: "मदांध" का अर्थ मद (घमंड) में अंधा होना है, जो प्रायः तुच्छ वित्त (धन) के कारण होता है।

 

Question 18. संसार में कोई भी अनाथ क्यों नहीं है?
(a) क्योंकि सबके माता-पिता हैं
(b) लोगों का प्यार मिलने के कारण अनाथ को इसका पता ही नहीं चलता
(c) अनाथों को सदा त्रिलोकीनाथ का साथ मिलता रहता है
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (c) अनाथों को सदा त्रिलोकीनाथ का साथ मिलता रहता है
In simple words: इस दुनिया में कोई भी बेसहारा नहीं है, क्योंकि तीनों लोकों के स्वामी ईश्वर सदैव हर निर्बल और असहाय व्यक्ति की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।

Exam Tip: "त्रिलोकीनाथ" ईश्वर को कहा गया है, जो सबके रक्षक हैं। इस धार्मिक दर्शन को ध्यान में रखें।

 

Question 19. कवि ने कैसे लोगों को भाग्यहीन कहा है?
(a) जो ईश्वर को नहीं मानते
(b) जिनके पास धन-संपत्ति का अभाव हो
(c) और-और पाने की लालसा में अधीर रहने वालों को
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) और-और पाने की लालसा में अधीर रहने वालों को
In simple words: जो लोग हमेशा व्याकुल और बेचैन रहते हैं और जिनके मन में संतोष नहीं होता, कवि उन्हें सबसे बड़ा अभागा मानते हैं।

Exam Tip: "अतीव भाग्यहीन है अधीर भाव जो करे" पंक्ति सीधे तौर पर असंतोष और अधीरता की ओर इशारा करती है।

 

Question 20. सनाथ होने पर लोगों के मन में कैसे भाव आते हैं?
(a) अभिमान का
(b) निडरता का
(c) चिंता का
(d) संतुष्टि का
Answer: (a) अभिमान का
In simple words: खुद को सुरक्षित या संपन्न पाकर लोगों के मन में अक्सर घमंड और अहंकार की भावना जन्म ले लेती है, जिससे बचना चाहिए।

Exam Tip: "सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में" - यहाँ "गर्व" का अर्थ नकारात्मक अहंकार से है।

 

Question 21. उपर्युक्त पंक्तियों के अनुसार 'अनंत देव' किसके लिए खड़े हैं?
(a) असंख्य देवताओं के लिए
(b) महान काम करने वाले असंख्य लोगों के लिए
(c) हमारे शुभचिंतकों के लिए
(d) इनमें से किसी के लिए नहीं
Answer: (b) महान काम करने वाले असंख्य लोगों के लिए
In simple words: परोपकार और भलाई का मार्ग चुनने वाले लोगों का स्वागत करने के लिए स्वर्ग में देवता स्वयं अपनी बाहें फैलाकर खड़े रहते हैं।

Exam Tip: देवताओं द्वारा स्वागत उन्हीं का किया जाता है जो लोक-कल्याण के कार्यों में अपना सर्वस्व दान कर देते हैं।

 

Question 22. उपर्युक्त पंक्तियों में कवि लोगों को क्या संदेश दे रहा है?
(a) स्वावलंबी बनकर आगे बढ़ने का
(b) एक-दूसरे का सहायक बनने का
(c) समस्याओं से मुक्ति के लिए ईश्वर की स्तुति करने का
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (b) एक-दूसरे का सहायक बनने का
In simple words: कवि चाहते हैं कि हम सभी एक-दूसरे का सहारा बनें और साथ मिलकर प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ें।

Exam Tip: "परस्परावलंब" का शाब्दिक अर्थ एक-दूसरे का सहारा बनना ही है।

 

Question 23. कवि के अनुसार हमें देव तुल्य लोगों का संरक्षण पाने के लिए अपने को किस प्रकार रखना चाहिए?
(a) दोष रहित
(b) प्रेम युक्त
(c) परिश्रमी
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (a) दोष रहित
In simple words: देवताओं की गोद में स्थान पाने यानी मोक्ष प्राप्त करने के लिए हमें अपने जीवन को हर प्रकार के पाप और बुराइयों से मुक्त रखना होगा।

Exam Tip: "अपंक हो चढ़ो सभी" में "अपंक" का सीधा अर्थ निष्कलंक या दोष रहित होने से है।

 

Question 24. कवि सफलता की ऊँचाइयों को किस प्रकार प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर रहा है?
(a) अपने बल पर
(b) एक-दूसरे के सहयोग से
(c) स्वार्थ की सहायता से
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) एक-दूसरे के सहयोग से
In simple words: हम सब मिलकर ही जीवन के ऊँचे लक्ष्यों को पा सकते हैं, अकेले चलने के बजाय आपसी तालमेल से ही सफलता मिलती है।

Exam Tip: आपसी सहयोग ही उन्नति का मुख्य मार्ग है, इसे काव्य के प्रसंग में समझें।

 

Question 25. कवि के अनुसार सबसे बड़ा विवेक क्या है?
(a) संपूर्ण मानव जाति परस्पर बंधु-बांधव की तरह है
(b) परमात्मा सबका पिता है
(c) (i) तथा (ii) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) संपूर्ण मानव जाति परस्पर बंधु-बांधव की तरह है
In simple words: सबसे बड़ी समझदारी और ज्ञान की बात यह है कि हम संसार के सभी मनुष्यों को अपने भाई-बहन के समान मानें।

Exam Tip: "मनुष्य मात्र बंधु है यही बड़ा विवेक है" - यह कविता की सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति है, इसे कंठस्थ रखें।

 

Question 26. वेद में किस बात को प्रमाणित किया गया है?
(a) सबका शरीर रक्त और हाड़-मांस से बना है
(b) सबके अंदर एक जैसी आत्मा है
(c) सबके अंदर एक समान भाव उत्पन्न होते हैं
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (b) सबके अंदर एक जैसी आत्मा है
In simple words: वेदों में यह प्रमाण दिया गया है कि बाहरी रूप से भिन्न होने पर भी हम सभी मनुष्यों के भीतर एक ही परमात्मा की आत्मा का निवास है।

Exam Tip: "अंतरैक्य में प्रमाणभूत वेद हैं" - यहाँ 'अंतरैक्य' का अर्थ आंतरिक आत्मा की एकता से है।

 

Question 27. बाह्य तौर पर मनुष्यों में भेद क्यों है?
(a) संसाधनों के असमान बँटवारे के कारण
(b) कर्म-फल की असमानता के कारण
(c) भौगोलिक कारणों से
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) कर्म-फल की असमानता के कारण
In simple words: हम अपने कर्मों के फलों के अनुसार बाहर से अलग-अलग दिखाई देते हैं या अलग-अलग परिस्थितियों में जीवन जीते हैं।

Exam Tip: "फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद हैं" पंक्ति को ध्यान में रखकर उत्तर चुनें।

 

Question 28. एक बंधु का दूसरे बंधु के दुख-तकलीफ़ को दूर न करना कवि की दृष्टि में क्या है?
(a) उचित
(b) अनुचित
(c) अनर्थकारी
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (c) अनर्थकारी
In simple words: यदि एक मनुष्य दूसरे मनुष्य की पीड़ा और कष्ट को दूर करने का प्रयास नहीं करता, तो यह सबसे बड़ा पाप और दुर्भाग्यपूर्ण बात है।

Exam Tip: "अनर्थ है कि बंधु ही न बंधु की व्यथा हरे" - यहाँ 'अनर्थ' का सीधा अर्थ अनर्थकारी परिस्थिति से है।

 

Question 29. लोगों को इच्छित मार्ग पर किस प्रकार बढ़ना चाहिए?
(a) प्रसन्न मन से खेलते-कूदते हुए
(b) मार्ग में आने वाली विघ्न-बाधाओं को दूर करते हुए
(c) (i) तथा (ii) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) (i) तथा (ii) दोनों
In simple words: हमें जीवन के लक्ष्य की ओर हँसते-मुस्कुराते हुए और रास्ते में आने वाली हर रुकावट को साहस से हटाते हुए आगे बढ़ते जाना चाहिए।

Exam Tip: "सहर्ष खेलते हुए" और "विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए" दोनों ही सकारात्मक दृष्टिकोण की ओर संकेत करते हैं।

 

Question 30. किस काम के कारण हमारी एकता घटनी नहीं चाहिए तथा हमारे बीच की भिन्नता बढ़नी नहीं चाहिए?
(a) इच्छित मार्ग पर बढ़ने के क्रम में
(b) किसी भी काम में
(c) चुने हुए कामों में
(d) उपर्युक्त सभी में
Answer: (a) इच्छित मार्ग पर बढ़ने के क्रम में
In simple words: अपनी-अपनी मंजिलों की ओर बढ़ते समय हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारे बीच आपसी मेलजोल कम न हो और न ही कोई दूरियाँ बढ़ें।

Exam Tip: "घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी" - इस पंक्ति का संबंध जीवन मार्ग पर बढ़ने से है।

 

Question 31. सभी अपनी मंज़िल पाने के लिए किस प्रकार आगे बढ़ें?
(a) तर्क से परे होकर सावधानीपूर्वक
(b) विघ्न-बाधाओं से समझौता करते हुए
(c) तर्क-वितर्क करते हुए असावधानीपूर्वक
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) तर्क से परे होकर सावधानीपूर्वक
In simple words: बिना किसी व्यर्थ के विवाद या भेदभाव के, हम सभी को एक होकर पूरी सजगता के साथ सही मार्ग पर चलना चाहिए।

Exam Tip: "अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी" - 'अतर्क' का अर्थ तर्क से परे और 'सतर्क' का अर्थ सावधान है।

 

Question 32. कवि के अनुसार मनुष्य का समर्थ भाव है -
(a) केवल अपना विकास करना
(b) सदा दूसरों की तरक्की में सहायता करना
(c) खुद का विकास करना तथा इस कार्य में दूसरों की भी मदद करना
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (c) खुद का विकास करना तथा इस कार्य में दूसरों की भी मदद करना
In simple words: सच्ची सार्थकता इसी में है कि हम स्वयं भी उन्नति करें और साथ ही समाज के अन्य लोगों को भी आगे बढ़ने में सहारा दें।

Exam Tip: "तारता हुआ तरे" का सीधा संबंध स्वयं का विकास करते हुए दूसरों का भी कल्याण करने से है।

 

II. लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

 

Question 1. कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?
Answer: मैथिलीशरण गुप्त जी के अनुसार, परोपकार के मार्ग पर चलते हुए जो मृत्यु प्राप्त होती है, उसे ही श्रेष्ठ मृत्यु (सुमृत्यु) माना जाता है। इस प्रकार की मृत्यु के पश्चात संसार के लोग उस परोपकारी व्यक्ति को उसके भले कार्यों के लिए हमेशा याद रखते हैं।
In simple words: दूसरों की भलाई करते हुए प्राण देना ही सुमृत्यु है। ऐसी मौत के बाद भी दुनिया आपको हमेशा याद रखती है।

Exam Tip: परीक्षा में उत्तर लिखते समय "परोपकार" और "याद रखा जाना" जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 2. उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?
Answer: एक सच्चे उदार इंसान की पहचान उसके नि:स्वार्थ स्वभाव से होती है, जो अपनी पूरी जिंदगी लोक-कल्याण और सेवा कार्यों में समर्पित कर देता है। वह हर व्यक्ति को अपना समझता है और किसी से कोई भेदभाव नहीं करता। ऐसे परोपकारी मनुष्य के यश का गान पुस्तकें तथा लेखक भी आदर के साथ करते हैं, क्योंकि वह खुद के स्वार्थों से ऊपर उठकर जीता है।
In simple words: उदार व्यक्ति हमेशा दूसरों का भला सोचता है, किसी से नफरत नहीं करता और पूरी दुनिया को अपना परिवार मानता है।

Exam Tip: "भेदभाव रहित आचरण" और "लोकहित" जैसे बिंदुओं को उत्तर में दर्शाने से अच्छे अंक मिलते हैं।

 

Question 3. कवि ने दधीचि, कर्ण आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर 'मनुष्यता' के लिए क्या संदेश दिया है?
Answer: कवि ने इन पौराणिक नायकों का उदाहरण देकर यह संदेश दिया है कि परोपकार के लिए हमें अपना सब कुछ, यहाँ तक कि इस नश्वर देह को भी समर्पित करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। जिस तरह महर्षि दधीचि ने देवराज इंद्र के वज्र के लिए अपनी हड्डियों का और कर्ण ने अपनी त्वचा (कवच) का दान कर दिया, उसी तरह हमें भी यह समझना चाहिए कि शरीर तो नष्ट होने ही वाला है, इसलिए इसका मोह छोड़कर जनकल्याण के कार्यों में लग जाना ही वास्तविक मनुष्यता है।
In simple words: दधीचि और कर्ण जैसे महापुरुषों ने दूसरों की जान बचाने के लिए अपने शरीर का दान कर दिया। हमें भी अपने शरीर का मोह छोड़कर दूसरों की मदद करनी चाहिए।

Exam Tip: उत्तर में महर्षि दधीचि और दानवीर कर्ण के विशिष्ट दानों (हड्डियों और कवच) का उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 4. कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
Answer: कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने मनुष्य को अभिमान से बचने की सलाह देते हुए काव्य में निम्नलिखित पंक्तियाँ लिखी हैं -
रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में॥
In simple words: इन पंक्तियों का अर्थ है कि कभी भी थोड़े से धन या खुद को सुरक्षित समझकर मन में घमंड नहीं करना चाहिए।

Exam Tip: दी गई पंक्तियों को बिना किसी वर्तनी की गलती के सटीक रूप से लिखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. 'मनुष्य मात्र बंधु है' से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस कथन का अर्थ यह है कि इस संसार में रहने वाले समस्त मानव आपस में भाई-भाई हैं। हम सभी एक ही परमपिता परमेश्वर की संतानें हैं, इसलिए हमारे बीच कोई पराया नहीं है। हम सबको आपसी प्रेम, सद्भावना और सहयोग के साथ जीवन जीना चाहिए और विपत्ति के समय एक-दूसरे का संबल बनना चाहिए।
In simple words: दुनिया के सभी लोग हमारे भाई-बहन की तरह हैं क्योंकि हम सब एक ही भगवान के बच्चे हैं। हमें मिलकर रहना चाहिए।

Exam Tip: "एक ही ईश्वर की संतान" और "वसुधैव कुटुंबकम" की भावना को उत्तर में शामिल करने से परीक्षक प्रभावित होते हैं।

 

Question 6. कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?
Answer: कवि ने एकता के सूत्र में बंधकर आगे बढ़ने का संदेश दिया है क्योंकि आध्यात्मिक रूप से हम सभी एक ही ईश्वर के अंश हैं। जब हम सभी को साथ लेकर आगे बढ़ते हैं, तभी समाज का वास्तविक उत्थान होता है। सच्चा सामर्थ्य इसी में है कि हम केवल अपनी ही प्रगति न सोचें, बल्कि दूसरों के कल्याण में ही अपनी भलाई देखें।
In simple words: हम सब एक ही भगवान के बच्चे हैं, इसलिए हमें एक साथ मिलकर चलना चाहिए। दूसरों की मदद करते हुए आगे बढ़ना ही असली ताकत है।

Exam Tip: "परमपिता परमेश्वर" और "समग्र विकास" (तारता हुआ तरे) के विचार को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

Question 7. 'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
Answer: इस सुंदर कविता के द्वारा मैथिलीशरण गुप्त जी हमें स्वार्थ की संकीर्णता से बाहर निकलकर परोपकारी जीवन जीने की सीख देते हैं। उनके अनुसार, वास्तविक मनुष्य वही है जो संपूर्ण मानवता की सेवा में अपना जीवन लगा देता है और जात-पात या अमीरी-गरीबी का कोई भेदभाव नहीं रखता। हमें धन के अहंकार से बचकर हमेशा दया, करुणा और आत्मीयता का मार्ग अपनाना चाहिए।
In simple words: कवि कहना चाहते हैं कि हमें स्वार्थी नहीं होना चाहिए। हमें अमीर होने पर घमंड नहीं करना चाहिए और हमेशा दूसरों की भलाई करनी चाहिए।

Exam Tip: इस उत्तर में "परोपकार", "सहानुभूति", "अहंकार मुक्ति" और "मानवतावाद" जैसे कीवर्ड्स का प्रयोग करें।

 

Question 8. कवि मैथिलीशरण गुप्त के अनुसार, मनुष्य कब अहंकारी हो जाता है और क्यों?
Answer: मैथिलीशरण गुप्त जी का मत है कि जब किसी व्यक्ति के पास अत्यधिक धन-दौलत या सांसारिक साधन आ जाते हैं, तो वह अभिमान की गिरफ्त में आ जाता है। वह इस अस्थाई और तुच्छ वैभव को पाकर खुद को बहुत विशेष और सुरक्षित मानने लगता है। इस घमंड के कारण वह निर्धन या असहाय लोगों को हीन दृष्टि से देखने लगता है और उनकी उपेक्षा करने लगता है।
In simple words: जब इंसान के पास बहुत पैसा आ जाता है, तो वह खुद को बहुत बड़ा समझने लगता है और गरीबों को छोटा समझकर घमंड करने लगता है।

Exam Tip: "तुच्छ धन" और "अस्थाई वैभव" का उल्लेख कर समझाएं कि घमंड क्यों अनुचित है।

 

Question 9. 'मनुष्यता' कविता में 'अभीष्ट मार्ग' किसे कहा गया है और क्यों?
Answer: कविता में 'अभीष्ट मार्ग' से तात्पर्य उस पथ से है जिसे मनुष्य अपनी इच्छा और लक्ष्य के रूप में चुनता है। कवि के अनुसार, यह ऐसा कल्याणकारी मार्ग होना चाहिए जहाँ सभी लोग हँसते-खेलते हुए आगे बढ़ें और जिसमें किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक हित और उत्थान छुपा हो।
In simple words: अपनी पसंद के लक्ष्य वाले रास्ते को 'अभीष्ट मार्ग' कहा गया है। इस रास्ते पर चलते हुए हमें समाज के भले की बात सोचनी चाहिए।

Exam Tip: "सामूहिक कल्याण का मार्ग" और "अभीष्ट लक्ष्य" को जोड़कर उत्तर प्रस्तुत करें।

 

Question 10. 'मनुष्यता' कविता के आधार पर किन्हीं तीन मानवीय गुणों के बारे में लिखिए।
Answer: राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने इस रचना में जिन सर्वश्रेष्ठ मानवीय गुणों को रेखांकित किया है, वे निम्नलिखित हैं:
1. परोपकार - बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करना और समाज के हित के लिए काम करना।
2. सहानुभूति - दूसरों की पीड़ा और कष्ट को गहराई से महसूस करना और उसे दूर करने का प्रयास करना।
3. उदारता - संकीर्ण मानसिकता का त्याग कर संपूर्ण जगत को अपना परिवार समझना और सबके प्रति दया भाव रखना।
In simple words: इस कविता में परोपकार (दूसरों का भला करना), दयालुता (सब पर दया करना) और उदारता (सबको अपना समझना) को सबसे अच्छे गुण बताया गया है।

Exam Tip: तीनों गुणों को अलग-अलग बिंदुओं (बुलेट पॉइंट्स) में स्पष्ट रूप से लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।

 

Question 11. व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए?
Answer: एक मनुष्य को हमेशा परोपकार और सेवा से भरा जीवन जीना चाहिए। अपने चुने हुए प्रगति के मार्ग पर चलते हुए उसे कभी भी स्वार्थी होना नहीं चाहिए, बल्कि हर कठिनाई का सामना करते हुए दूसरों को भी साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए। दूसरों का भला करके ही इंसान अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
In simple words: हमें हमेशा दूसरों की मदद करने वाला जीवन जीना चाहिए और अपनी मंजिल की ओर बिना डरे और सबको साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

Exam Tip: "परोपकारी जीवन" और "सहयोगपूर्ण प्रगति" का उल्लेख करें।

 

Question 12. कविता के आधार पर 'मनुष्यता' की परिभाषा बताइए।
Answer: मैथिलीशरण गुप्त जी के अनुसार 'मनुष्यता' का वास्तविक अर्थ है अपने संकीर्ण स्वार्थों को भूलकर संपूर्ण संसार को अपना कुटुंब मानना। जब कोई मनुष्य दुनिया के किसी भी प्राणी को पराया नहीं समझता और सबके प्रति आत्मीयता एवं बंधुत्व का भाव रखता है, वही सच्ची मनुष्यता है। दूसरों के सुख-दुख में काम आना ही इसकी सच्ची कसौटी है।
In simple words: सभी लोगों को अपना भाई-बहन समझना, किसी को पराया न मानना और दूसरों के काम आना ही सच्ची मनुष्यता है।

Exam Tip: "वसुधैव कुटुंबकम" और "विश्व बंधुत्व" जैसे दार्शनिक विचारों के संदर्भ में परिभाषा स्पष्ट करें।

 

III. उच्च चिंतन क्षमता एवं अभिव्यक्ति आधारित प्रश्न (4 अंक)

 

Question 1. कवि ने आप ही आप चरने को पशु-प्रवृत्ति कहा है। आप मनुष्यवृत्ति किसे मानते हैं? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: जब कोई जीव केवल अपने भोजन और आश्रय के बारे में सोचता है और दूसरों की सुख-सुविधाओं से उदासीन रहता है, तो उसे कवि ने पशु-प्रवृत्ति कहा है क्योंकि जानवरों में केवल आत्म-पोषण की प्रवृत्ति होती है। इसके विपरीत, 'मनुष्यवृत्ति' का अर्थ है अपने स्वार्थों की सीमा से बाहर निकलकर दूसरों के कल्याण के लिए सोचना और कर्म करना। जब कोई मनुष्य समाज के पिछड़े या पीड़ित लोगों के प्रति गहरी संवेदनशीलता रखता है, उनके उत्थान के लिए प्रयास करता है और नि:स्वार्थ भाव से सेवा करता है, तब उसके भीतर मनुष्यवृत्ति जागृत होती है। त्याग, दया, परोपकार और प्रेम जैसे गुण ही मनुष्यवृत्ति की पहचान हैं।
In simple words: जानवर केवल अपने खाने और सोने के बारे में सोचते हैं। इसके विपरीत, जब कोई इंसान दूसरों के दुख को समझता है और उनकी मदद करता है, तो उसे ही सच्ची मनुष्यवृत्ति कहा जाता है।

Exam Tip: चार अंक के प्रश्नों में पशु-प्रवृत्ति और मनुष्यवृत्ति के बीच के अंतर को स्पष्ट उदाहरण देकर विस्तार से समझाएं।

 

Question 2. राजा रंतिदेव, उशीनर राजा शिवि आदि का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है? इनके कार्यों से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
Answer: कविता में इन ऐतिहासिक और पौराणिक महापुरुषों का उल्लेख परोपकार, त्याग और जीव-दया की पराकाष्ठा को समझाने के लिए किया गया है। राजा रंतिदेव ने अकाल के भीषण दौर में भूखे रहने के बाद जब भोजन का थाल प्राप्त किया, तो एक भूखे याचक के आते ही उन्होंने बिना संकोच अपनी थाली उसे सौंप दी। वहीं, उशीनर के राजा शिवि ने अपनी शरण में आए एक छोटे से कबूतर की जान बचाने के लिए भूखे शिकारी को अपने ही शरीर का मांस काट कर दे दिया। इन महान कृत्यों से हमें यह सीख मिलती है कि दूसरों की भलाई और रक्षा के लिए हमें अपने जीवन और शरीर के मोह का पूर्ण त्याग करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।
In simple words: राजा रंतिदेव ने खुद भूखे रहकर अपना खाना एक गरीब को दे दिया और राजा शिवि ने कबूतर को बचाने के लिए अपने शरीर का मांस दे दिया। इनसे हमें त्याग और दूसरों की जान बचाने की सीख मिलती है।

Exam Tip: दोनों राजाओं की कहानियों के मुख्य बिंदुओं (रंतिदेव का भोजन दान और राजा शिवि का मांस दान) को अलग-अलग वाक्यों में स्पष्ट करें।

 

Question 3. आज संसार जिस वस्तु को पूँजी मान बैठा है, उसे आप कितना उचित या अनुचित मानते हैं? आपके विचार से असली पूँजी किसे मानना चाहिए?
Answer: वर्तमान समय में अधिकांश लोग केवल भौतिक सुख-सुविधाओं, धन-दौलत और जमीन-जायदाद को ही अपनी असली संपत्ति मान बैठे हैं। मेरी दृष्टि में यह विचारधारा पूर्णतः अनुचित है। यद्यपि दैनिक जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए धन आवश्यक है, परंतु इसे जीवन का एकमात्र लक्ष्य बना लेना गलत है क्योंकि अत्यधिक धन अक्सर मनुष्य के भीतर अहंकार पैदा करता है। हमारे विचार में वास्तविक पूँजी तो मनुष्य के आंतरिक गुण हैं - जैसे दया, करुणा, नि:स्वार्थ प्रेम, सहानुभूति और आपसी सद्भाव। यदि समाज में इन मानवीय संवेदनाओं की कमी हो जाएगी, तो चारों ओर केवल स्वार्थ और वैमनस्य फैल जाएगा। इसलिए मानवीय मूल्यों को ही सबसे बड़ी दौलत माना जाना चाहिए।
In simple words: आज लोग पैसे को ही सब कुछ मानते हैं जो कि गलत है। पैसा तो घमंड लाता है। असली धन तो हमारे अच्छे गुण हैं जैसे - प्यार, दया और दूसरों की मदद करना।

Exam Tip: उत्तर में धन के नकारात्मक प्रभाव (घमंड उत्पन्न करना) और मानवीय गुणों के सकारात्मक प्रभाव की तुलना करते हुए अपनी बात रखें।

 

Question 4. कवि का मानना है कि संसार में कोई अनाथ नहीं है। उनकी इस सोच को आप कितना उचित या अनुचित मानते हैं और क्यों?
Answer: कवि की यह सोच कि संसार में कोई भी व्यक्ति अनाथ या बेसहारा नहीं है, पूर्ण रूप से सत्य और उचित है। अक्सर लोग थोड़ा सा धन या सामाजिक प्रतिष्ठा पाकर स्वयं को बहुत सुरक्षित मान लेते हैं और गरीबों को लाचार व बेसहारा समझने लगते हैं। वे भूल जाते हैं कि सृष्टि का एकमात्र पालनहार ईश्वर है, जो हर जीव का ध्यान रखता है। ईश्वर अपनी असीम सत्ता से हर दीन-दुखी की रक्षा करता है, भले ही वह हमें प्रत्यक्ष रूप से दिखाई न दे। इसलिए किसी भी मनुष्य को अनाथ मानकर उसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए और न ही अपनी संपन्नता पर कोई अहंकार करना चाहिए क्योंकि परमेश्वर सबका रक्षक है।
In simple words: कवि की बात बिल्कुल सही है कि कोई अनाथ नहीं है। भगवान सबके साथ हैं और वे सबकी रक्षा करते हैं, इसलिए हमें गरीबों को कमजोर नहीं समझना चाहिए।

Exam Tip: "ईश्वर सबका रक्षक है" और "अनाथ की अवधारणा का खंडन" जैसे दार्शनिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 5. 'मनुष्यता' कविता में कवि ने भगवान बुद्ध द्वारा दिए गए जिन संदेशों का उल्लेख किया है, आज के संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
Answer: महात्मा बुद्ध के समय समाज में गंभीर रूढ़िवादिता, अंधविश्वास और पशु बलि जैसी हिंसक प्रथाएँ फैली हुई थीं। बुद्ध ने इन सामाजिक बुराइयों का डटकर विरोध किया और समूचे संसार को अहिंसा, करुणा तथा दया का मार्ग दिखाया। आज के आधुनिक युग में भी जब चारों ओर जाति-पाति, सांप्रदायिकता, क्षेत्रीयता और भाषा के नाम पर नफरत और शोषण फैल रहा है, तब बुद्ध के उपदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। आज मानव समाज को आपसी कलह से बचाने के लिए और शांति स्थापित करने के लिए बुद्ध की करुणा और दया की अत्यधिक आवश्यकता है ताकि हम सब एक होकर जी सकें।
In simple words: बुद्ध ने दुनिया को अहिंसा और करुणा का पाठ पढ़ाया था। आज जब लोग जात-पात और धर्म के नाम पर लड़ रहे हैं, तब बुद्ध की दया और प्यार की बातें हमारे बहुत काम आ सकती हैं।

Exam Tip: "विरुद्धवाद", "करुणा" और "आधुनिक समाज में प्रासंगिकता" को जोड़ते हुए उत्तर को तीन-चार स्पष्ट तार्किक चरणों में लिखें।

 

अभ्यास प्रश्न पत्र

1. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर 25-30 शब्दों में दीजिए।

 

Question 1(क). मानव-जाति का सबसे बड़ा अनर्थ क्या है?
Answer: कवि मैथिलीशरण गुप्त जी के अनुसार, मानव जाति का सबसे बड़ा अनर्थ यह है कि एक मनुष्य दूसरे मनुष्य के दुखों और कष्टों को दूर करने का प्रयास न करे। जब समाज में लोग एक-दूसरे के प्रति संवेदनहीन हो जाते हैं, तो वह स्थिति सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण होती है।
In simple words: सबसे बुरा काम यह है कि कोई इंसान दूसरे इंसान के काम न आए और उसके दुखों को दूर करने की कोशिश न करे।

Exam Tip: इस उत्तर में स्पष्ट करें कि संवेदनहीनता ही समाज के पतन का कारण बनती है।

 

Question 1(ख). मनुष्य को मृत्यु से क्यों नहीं डरना चाहिए?
Answer: मनुष्य को मृत्यु से भयभीत नहीं होना चाहिए क्योंकि मृत्यु एक अटल सत्य है और यह शरीर नश्वर है। आत्मा अजर-अमर है, इसलिए हमें इस जीवन का सदुपयोग परोपकार करने में करना चाहिए ताकि मरने के बाद भी लोग हमें आदर से याद रखें।
In simple words: हमारा शरीर एक दिन नष्ट हो जाएगा पर आत्मा कभी नहीं मरती। इसलिए मौत से डरे बिना हमें अच्छे काम करने चाहिए।

Exam Tip: "नश्वर शरीर" और "अमर आत्मा" का उल्लेख कर उत्तर को प्रभावी बनाएं।

 

Question 1(ग). गर्वरहित जीवन बिताने के लिए कवि ने क्या-क्या तर्क दिए हैं?
Answer: कवि ने तर्क दिया है कि धन-दौलत और सांसारिक वैभव बहुत तुच्छ चीजें हैं, जिन पर घमंड करना व्यर्थ है। इस संसार में कोई भी व्यक्ति अनाथ या असहाय नहीं है क्योंकि ईश्वर (त्रिलोकीनाथ) सबके रक्षक हैं, इसलिए हमें स्वयं पर घमंड करने के बजाय सबका आदर करना चाहिए।
In simple words: धन और सुख-सुविधाएं हमेशा रहने वाली चीजें नहीं हैं, और भगवान सबके साथ हैं, इसलिए हमें कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए।

Exam Tip: "त्रिलोकीनाथ" और "तुच्छ धन" के तर्कों का संक्षिप्त उल्लेख करें।

2. निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का उत्तर 60-70 शब्दों में दीजिए।

 

Question 2(क). इस कविता में कवि ने सबको एक साथ चलने की प्रेरणा दी है, इससे समाज को क्या लाभ हो सकता है?
Answer: कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने 'मनुष्यता' कविता के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर चलने का संदेश दिया है। जब समाज के सभी नागरिक आपसी मतभेद, जाति, धर्म और वर्ग की दूरियों को मिटाकर एक साथ मिलकर चलते हैं, तो समाज में अभूतपूर्व एकता और शांति की स्थापना होती है। इससे आपसी भाईचारा और सौहार्द मजबूत होता है, जिससे समाज में किसी प्रकार का शोषण या अन्याय नहीं पनप पाता। सभी लोग एक-दूसरे का संबल बनकर कठिनाइयों को आसानी से पार कर लेते हैं, जिससे समग्र और सतत विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।
In simple words: जब सब लोग मिलकर चलते हैं, तो समाज से लड़ाई-झगड़े खत्म हो जाते हैं, आपसी प्यार बढ़ता है और देश का तेजी से विकास होता है।

Exam Tip: इस दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द और सामूहिक प्रगति जैसे मुख्य बिंदुओं पर जोर दें।

 

Question 2(ख). 'फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद हैं' - पंक्ति से क्या तात्पर्य है?
Answer: इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने मानव जीवन के एक महत्वपूर्ण सत्य को उजागर किया है। बाहरी रूप से देखने पर हमें विभिन्न मनुष्यों के रंग-रूप, आर्थिक स्थिति, सुख-दुख और परिस्थितियों में काफी अंतर दिखाई देता है। कवि स्पष्ट करते हैं कि यह अंतर हमारे पूर्व कर्मों के फलों के कारण है - जैसे कर्म हम करते हैं, वैसा ही बाहरी जीवन हमें प्राप्त होता है। परंतु, इस बाहरी भिन्नता के बावजूद हम सभी के भीतर मौजूद आत्मा एक ही है। वेदों में भी प्रमाणित किया गया है कि आंतरिक रूप से हम सभी एक ही परमपिता परमेश्वर की संतानें हैं, इसलिए बाहरी भेदों को देखकर हमें आपस में कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए।
In simple words: बाहरी रूप से हम अपने कर्मों के कारण अमीर-गरीब या अलग दिखते हैं, लेकिन हमारे अंदर की आत्मा एक ही भगवान का अंश है।

Exam Tip: पंक्ति की व्याख्या करते समय "कर्मफल की बाहरी भिन्नता" और "आंतरिक आत्मा की एकता" के बीच के संतुलन को स्पष्ट करें।

प्रश्न अभ्यास 

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -

1. कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?

उत्तर

कवि ने ऐसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है जो मानवता की राह में परोपकार करते हुए आती है जिसके बाद मनुष्य को मरने के बाद भी याद रखा जाता है।
 
2. उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?

उत्तर

उदार व्यक्ति सदा परोपकार के लिए काम करता है| इन व्यक्तियों क चर्चा दूर-दूर तक की जाती है| कवि तथा लेखक भी इनके गुणों की चर्चा अपने लेखनों में करते हैं। धरती इन लोगों की ऋणी होती है| उदार मनुष्य ही वास्तविक अर्थों में मनुष्य होता है| 
 
3. कवि ने दधीचि कर्ण, आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर मनुष्यता के लिए क्या संदेश दिया है?
 
उत्तर 
 

कवि ने दधीचि ,कर्ण आदि महान व्यक्तियों के उदाहरण देकर ‘मनुष्यता’के लिए यह संदेश दिया है कि परोपकार के लिए अपना सर्वस्व, यहाँ तक कि अपने प्राण तक न्योंछावर तक करने को तैयार रहना चाहिए दधीचि ने मानवता की रक्षा के लिए अपनी हड्डियाँ तथा कर्ण ने वचन रखने के लिए अपना रक्षा कवच दान कर दिया। कवि कहते हैं कि हमारा शरीर तो नश्वर हैं इसलिए इसका मोह रखना व्यर्थ है। परोपकार करना ही सच्ची मनुष्यता है।

 
4. कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त है कि हमें गर्व रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
 
उत्तर 
 

निम्नलिखित पंक्तियों में गर्व रहित जीवन व्यतीत करने की बात कही गई है-
रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में।
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में॥

5. 'मनुष्य मात्र बंधु है' से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

'मनुष्य मात्र बंधु है' का अर्थ है हम सारे एक ईश्वर की संतान हैं इसलिए हमारा परस्पर सम्बन्ध है| संसार के केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी जो विवेकशील है और बंधुत्व के महत्व को समझता है| इसलिए हमें भाईचारे के साथ रहना चाहिए|

6. कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?

उत्तर

कवि ने सबको एक साथ चलने की प्रेरणा इसलिए दी है ताकि समाज में एकता और भाईचारा कायम रहे| इससे हमारे बीच ईर्ष्या-द्वेष की भावना का अंत होगा| साथ चलने से हम रास्ते में आने वाली विपत्तियों से पार पा सकेंगें|

7. व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।

उत्तर

व्यक्ति को परोपकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए। उसे अपने बारे में सोचने से ज्यादा दूसरों के हित-अहित के बारे में सोचना चाहिए| केवल अपने लिए सोचना पशु प्रवृत्ति होती है| दूसरों की मुसीबत में काम आने के लिए हमें सदा तैयार रहना चाहिए| 

8. 'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?

उत्तर

'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहते है कि हमें अपना जीवन परोपकार में व्यतीत करना चाहिए। सच्चा मनुष्य दूसरों की भलाई के काम को सर्वोपरि मानता है। हमें उदार ह्रदय बनना चाहिए । हमें धन के मद में अंधा नहीं बनना चाहिए। मानवतावाद को अपनाना चाहिए। 

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए। 

1. सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?

उत्तर

इन पंक्तियों में कवि ने कहा है कि हमें मनुष्यों के प्रति सहानुभूति यानी संवेदना का भाव होना चाहिए क्योंकि यही सबसे बड़ी पूँजी है| औरों के दुखों को समझना और उनमें शामिल होना जैसे गुण ही हमें सही अर्थों में मनुष्य बनाते हैं| सारी धरती इन गुणों वाले व्यक्ति के वश में रहती है| महात्मा बुद्ध के दया-भावना और करुणामय विचारों ने विरोध के स्वर का दबा दिया| जो लोग उनके विरोधी थे वह भी उनके विचारों के सामने झुक गए|

2. रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,
दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।

उत्तर

कवि कहते हैं कि हमें कभी भूलकर भी अपने थोड़े से धन के अहंकार में अंधे होकर स्वयं को सनाथ अर्थात् सक्षम मानकर गर्व नहीं करना चाहिए क्योंकि यहाँ अनाथ कोई नहीं है। इस संसार का स्वामी ईश्वर है जो सबके साथ है| ईश्वर बहुत दयालु हैं और दीनों और असहायों का सहारा हैं| उनके हाथ बहुत विशाल है अर्थात् वह सबकी सहायता करने में सक्षम है।प्रभु के रहते भी जो व्याकुल रहता है वह बहुत ही भाग्यहीन है|

3. चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।

उत्तर

कवि कहते हैं कि हमें अपने इच्छित मार्ग पर प्रसन्नतापूर्वक हँसते-खेलते बढ़ते रहना चाहिए और रास्ते में जो कठिनाई या बाधा आए उन्हें ढकेलते हुए आगे बढ़ना चाहिए। परंतु इन सब में यह ध्यान रखना चाहिए कि इससे हम मनुष्यों के बीच आपसी सामंजस्य न घटे और हमारे बीच भेदभाव न बढ़े। हम तर्क रहित होकर एक मार्ग पर सावधानीपूर्वक चलें।एक दूसरे का उद्धार करते हुए आगे बढ़े तभी हमारी समर्थता सिद्ध होगी अर्थात् हम तभी समर्थ माने जाएंगे|

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