NCERT Solutions Class 10 Hindi Sanchyan पाठ 2 सपनों केसे दिन

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sanchyan for पाठ 2 सपनों केसे दिन

पाठ की रूपरेखा

इस आत्मकथात्मक पाठ में लेखक गुरदयाल सिंह ने अपने बचपन के दिनों की अनमोल यादें साझा की हैं। उन्होंने बताया है कि किस प्रकार वे और उनके साथी विद्यालय के दिनों में खूब मौज-मस्ती करते थे, खेल-खेल में चोटिल हो जाते थे और अपने शिक्षकों से अत्यधिक भयभीत रहते थे। बचपन के उस दौर में लेखक अपने शिक्षकों के सख्त व्यवहार के पीछे छिपे वास्तविक उद्देश्य को समझ नहीं पाते थे, जिसके कारण उन्हें स्कूल का वातावरण अत्यंत नीरस और भयावह प्रतीत होता था। इसी मानसिक द्वंद्व और बाल-सुलभ अनुभूतियों का सजीव चित्रण इस पाठ में किया गया है।

पाठ का सार

यह पाठ लेखक गुरदयाल सिंह की आत्मकथा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंश है, जिसमें वे अपने बचपन और स्कूल के दिनों को याद करते हैं। उनका परिवार कोई बहुत संपन्न नहीं था। वे एक ऐसे साधारण गाँव के निवासी थे जहाँ शिक्षा के प्रति लोगों की रुचि बहुत कम थी। अधिकांश बच्चे या तो कभी विद्यालय नहीं जाते थे या फिर प्राथमिक स्तर पर ही अपनी पढ़ाई छोड़ देते थे। वह द्वितीय विश्व युद्ध का कालखंड था, जब दैनिक उपयोग की वस्तुएँ बहुत महँगी हुआ करती थीं। पढ़ाई-लिखाई का खर्च इतना अधिक था कि जितने पैसों में स्कूल की कॉपियाँ-किताबें आती थीं, उतने में पूरे एक सेर घी का प्रबंध हो सकता था। लेखक अपने पूरे परिवार में पहले ऐसे बालक थे जिन्हें स्कूल जाने का अवसर प्राप्त हुआ था।

लेखक बताते हैं कि उस दौर में सभी छात्र स्कूल को किसी बंदीगृह की तरह मानते थे और पढ़ाई में बहुत कम बच्चों की रुचि होती थी। खेलकूद के दौरान बच्चों का चोटिल होना और फिर घर लौटने पर माता-पिता से कड़े शारीरिक दंड पाना एक सामान्य बात थी। इसके बावजूद, खेल के प्रति उनका उत्साह कभी कम नहीं होता था। स्कूल न जाने की एक सबसे बड़ी वजह थी - शिक्षकों द्वारा की जाने वाली बेरहम पिटाई का डर। जहाँ एक ओर हेडमास्टर मदनमोहन शर्मा जी अत्यंत दयालु और संवेदनशील थे, वहीं दूसरी ओर पीटी शिक्षक प्रीतम चंद बेहद कठोर स्वभाव के थे, जो बच्चों को कड़ा शारीरिक दंड देने में विश्वास रखते थे। छात्रों को स्काउट परेड करना बहुत प्रिय लगता था क्योंकि उसमें रंग-बिरंगे झंडे लेकर चलना और खाकी वर्दी पहनना उन्हें किसी सच्चे सैनिक जैसा गौरव प्रदान करता था।

पीटी मास्टर द्वारा दी जाने वाली बर्बर सजा के कारण एक बार हेडमास्टर साहब ने उन्हें निलंबित कर दिया था, जिसके बाद वे कभी स्कूल नहीं लौटे। बाद में छात्रों को पता चला कि जो पीटी मास्टर स्कूल में यमराज की तरह डरावने लगते थे, वे अपने किराए के कमरे में पालतू तोतों से बेहद मीठी और प्यार भरी बातें करते हैं। यह विरोधाभास बालकों को अचंभित कर देता था। यह कहानी वर्तमान काल के शिक्षकों को भी एक मर्मस्पर्शी संदेश देती है कि बाल-मन को केवल असीम स्नेह और सहानुभूति से ही जीता जा सकता है, न कि कठोर यातनाओं से।

शब्दार्थ

कठिन शब्दसरल अर्थ
पिंडलियाँघुटने और टखने के बीच का पिछला माँसपेशियों वाला भाग
गुस्सैलअत्यधिक क्रोध करने वाला
ट्रेनिंगव्यवहारिक प्रशिक्षण
बाल-मनोविज्ञानबच्चों के मानसिक विकास और व्यवहार का अध्ययन
परचूनियेदैनिक राशन की दुकान चलाने वाले व्यापारी
आढ़तीयेकिसानों की फसल खरीदकर आगे बेचने वाले बिचौलिए
लंडेबहीखाता लिखने के लिए प्रयुक्त होने वाली पुरानी पंजाबी लिपि
सयानेसमझदार और अनुभवी लोग
ननिहालनानी का घर या ननिहाल पक्ष
ढाँढसधैर्य बंधाना या सांत्वना देना
बख्शनाक्षमा करना या छोड़ देना
मुअत्तलअस्थायी रूप से निलंबित करना
चौबाराचारों ओर खिड़कियों वाला ऊपरी मंजिला कमरा
अलौकिकअसाधारण या जो इस लोक का न प्रतीत हो

पाठाधारित मुहावरे

मुहावराअर्थ
तार-तार होनापूरी तरह से छिन्न-भिन्न या कट-फट जाना
तरस खानाकिसी की दयनीय स्थिति पर दया करना
आँख बचानानज़रों से छिपना या कतराकर निकलना
हाए-हाए करनाअपने दुखों और कष्टों का विलाप करना
दिन गिननाअत्यंत बेचैनी या व्याकुलता से प्रतीक्षा करना
खाल खींचना / चमड़ी उधेड़नाअत्यंत बर्बरतापूर्वक मारना या कठोर शारीरिक दंड देना

 

I. बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. लेखक ने बाल-मनोविज्ञान पढ़कर क्या जाना?
(a) बच्चों को मारना-पीतना ठीक नहीं होता।
(b) बच्चों को खेलना क्यों अच्छा लगता है।
(c) बच्चों का पढ़ाई के साथ-साथ खेलना भी ज़रूरी है।
(d) उपर्युक्त सभी विकल्प
Answer: (b) बच्चों को खेलना क्यों अच्छा लगता है।
In simple words: बाल-मनोविज्ञान का अध्ययन करने के बाद लेखक को यह समझ आया कि बच्चों के स्वभाव में खेलकूद के प्रति इतना गहरा आकर्षण क्यों होता है।

Exam Tip: पाठ के संदर्भ के अनुसार ही सही विकल्प चुनें; बाल-मनोविज्ञान बच्चों के खेलने की स्वाभाविक प्रवृत्ति के कारणों को स्पष्ट करता है।

 

Question 2. पढ़ाई में रुचि न होने के कारण लेखक के बचपन के कुछ साथी क्या करते थे?
(a) तालाब में तैरने चले जाते थे।
(b) बस्ता तालाब में फेंक आते थे।
(c) माँ-बाप से स्कूल नहीं जाने की जिद करते थे।
(d) मास्टर जी को चिढ़ाया करते थे।
Answer: (b) बस्ता तालाब में फेंक आते थे।
In simple words: जिन बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता था, वे स्कूल के डर से अपने बस्ते को पानी में फेंक देते थे ताकि उन्हें दोबारा स्कूल न जाना पड़े।

Exam Tip: पाठ की मुख्य घटनाओं को ध्यान से पढ़ें, जहाँ अरुचि के कारण बच्चों द्वारा बस्ता तालाब में फेंकने का प्रसंग स्पष्ट रूप से वर्णित है।

 

Question 3. स्कूल की क्यारियों से तोड़ी गई कलियों का लेखक क्या करते थे?
(a) वे इन्हें अपनी जेब में रखकर भूल जाते थे।
(b) वे इन्हें किताबों के बीच दबा देते थे।
(c) स्कूल से बाहर निकलते समय वे इन्हें मेमनों की तरह चर जाते थे।
(d) अपने किसी दोस्त को दे देते थे।
Answer: (c) स्कूल से बाहर निकलते समय वे इन्हें मेमनों की तरह चर जाते थे।
In simple words: लेखक और उनके साथी स्कूल की कलियों को तोड़कर जेबों में रख लेते थे और बाहर आते ही उन्हें बकरी के बच्चों की तरह चबा जाते थे।

Exam Tip: 'मेमनों की तरह चरना' इस पाठ का एक अनूठा और विशिष्ट प्रसंग है, इसे परीक्षा के लिए विशेष रूप से याद रखें।

 

Question 4. लेखक के साथी ओमा की शक्ल-सूरत कैसी थी?
(a) ठिंगने शरीर पर हाँडी जैसा सिर
(b) नारियल की-सी आँखों वाला बंदरिया के बच्चे जैसा चेहरा
(c) पतला, छरहरा, सुगठित शरीर
(d) (a) तथा (b) दोनों
Answer: (d) (a) तथा (b) दोनों
In simple words: ओमा का शरीर छोटा और नाटा था परंतु उसका सिर बहुत बड़ा था और उसका चेहरा बंदर के बच्चे जैसा अजीब दिखता था।

Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में जब दो विकल्प सही लगें, तो 'दोनों' वाले विकल्प को ध्यानपूर्वक पढ़कर ही सही उत्तर का चयन करें।

 

Question 5. ओमा के सिर की टक्कर से किसके टूटने का डर बना रहता?
(a) हाथ के
(b) पैर के
(c) पसलियों के
(d) सिर के
Answer: (c) पसलियों के
In simple words: ओमा जब किसी को अपने बड़े सिर से टक्कर मारता था, तो ऐसा लगता था मानो सामने वाले व्यक्ति की हड्डियाँ या पसलियाँ ही टूट जाएँगी।

Exam Tip: ओमा की टक्कर को बच्चे 'रेल बम्बा' कहते थे क्योंकि उसकी टक्कर से पसलियाँ टूटने का गहरा भय रहता था।

 

Question 6. मास्टर प्रीतम चंद अन्य अध्यापकों की तरह हेडमास्टर साहब के पीछे कतार में क्यों नहीं खड़े होते थे?
(a) अन्य अध्यापकों से मतभेद के कारण
(b) पीटी सर की भूमिका के कारण
(c) बच्चों की तरह कतार में खड़ा होना पसंद नहीं होने के कारण
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) पीटी सर की भूमिका के कारण
In simple words: मास्टर प्रीतम चंद पीटी शिक्षक थे, इसलिए वे प्रार्थना सभा में अनुशासन बनाए रखने के लिए कतारों के पीछे निगरानी करते थे।

Exam Tip: पीटी शिक्षक का मुख्य कार्य छात्रों की कतारों और अनुशासन पर नज़र रखना होता था, इसलिए वे हेडमास्टर के पीछे नहीं खड़े होते थे।

 

Question 7. निचली कक्षाओं में लेखक को कभी-कभी स्कूल अच्छा भी लगने लगता था, क्यों?
(a) हेडमास्टर शर्मा जी की प्यारी चपत के कारण
(b) पीटी साहब की शाबाशी के कारण
(c) खेल-कूद की अनिवार्यता समाप्त हो जाने के कारण
(d) (a) तथा (c) दोनों
Answer: (b) पीटी साहब की शाबाशी के कारण
In simple words: जब कठोर पीटी मास्टर परेड के दौरान बच्चों को खुश होकर शाबाशी देते थे, तो बच्चों को स्कूल आना बहुत अच्छा महसूस होता था।

Exam Tip: पीटी साहब की शाबाशी बच्चों के लिए किसी बड़े सैन्य पदक या तमगे के समान मूल्यवान होती थी, जिससे उनका हौसला बढ़ता था।

 

Question 8. लेखक को हर वर्ष अगली श्रेणी में प्रवेश करने पर पुरानी किताबें ही क्यों मिलती थीं?
(a) लेखक के घर में किसी की पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं होने के कारण
(b) लेखक का साधारण परिवार से होने के कारण
(c) हेडमास्टर शर्मा जी द्वारा पुरानी किताबें आसानी से उपलब्ध करा दिए जाने के कारण
(d) उपर्युक्त सभी विकल्प
Answer: (d) उपर्युक्त सभी विकल्प
In simple words: लेखक का परिवार बहुत गरीब था और पढ़ाई पर खर्च नहीं कर सकता था, इसलिए हेडमास्टर साहब हर साल उनके लिए किसी अमीर छात्र की पुरानी किताबों का प्रबंध कर देते थे।

Exam Tip: लेखक के घर की आर्थिक तंगी और हेडमास्टर जी का परोपकारी स्वभाव- ये दोनों ही पुरानी पुस्तकें मिलने के मुख्य कारण थे।

 

Question 9. नई श्रेणी में लेखक का मन उदास होने का क्या कारण था?
(a) नई श्रेणी की मुश्किल पढ़ाई
(b) नए मास्टरों की मार-पीट का भय
(c) किताब-कॉपियों तथा अलियार के झाड़ से आने वाली गंध
(d) उपर्युक्त सभी विकल्प
Answer: (d) उपर्युक्त सभी विकल्प
In simple words: अगली कक्षा में जाने पर पढ़ाई का कठिन बोझ, नई पिटाई का डर और पुरानी किताबों की अजीब महक लेखक के मन को उदास कर देती थी।

Exam Tip: बाल-मन की उदासी के पीछे केवल पढ़ाई का डर नहीं, बल्कि पुरानी कॉपियों की सीलन भरी गंध और नए अध्यापकों का खौफ भी शामिल था।

 

Question 10. पीटी साहब से प्रेरित होकर जब बच्चे घरवालों से बूटों की माँग करते थे, तो वे क्या करते थे?
(a) बूट दिला देते थे।
(b) बूट से टखने टेढ़े होने का भय दिखा दिया करते थे।
(c) डाँट दिया करते थे।
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) बूट से टखने टेढ़े होने का भय दिखा दिया करते थे।
In simple words: जब बच्चे परेड वाले जूते माँगते थे, तो घरवाले पैसे बचाने के लिए डरा देते थे कि भारी जूतों से पैर की हड्डियाँ खराब हो जाएँगी।

Exam Tip: पुराने समय में ग्रामीण क्षेत्रों में जूतों के प्रति माता-पिता का दृष्टिकोण और उनकी आर्थिक सीमाएँ इस उत्तर का मुख्य आधार हैं।

 

Question 11. उस जमाने में किस श्रेणी से अंग्रेजी पढ़ानी शुरू की जाती थी?
(a) दूसरी से
(b) तीसरी से
(c) चौथी से
(d) पाँचवीं से
Answer: (d) पाँचवीं से
In simple words: लेखक के समय के दौरान स्कूलों में पाँचवीं कक्षा से अंग्रेजी विषय का अध्ययन शुरू करवाया जाता था।

Exam Tip: पाठ में वर्णित ऐतिहासिक काल और शिक्षा प्रणाली की सामान्य जानकारियों को याद रखना अत्यंत आवश्यक है।

 

Question 12. हेडमास्टर शर्मा जी किस श्रेणी के बच्चों को अंग्रेज़ी पढ़ाते थे?
(a) तीसरी और छठी
(b) चौथी और सातवीं
(c) पाँचवीं और आठवीं
(d) छठी और नवी
Answer: (c) पाँचवीं और आठवीं
In simple words: हेडमास्टर शर्मा जी स्वयं बहुत विद्वान थे और वे विद्यालय में पाँचवीं तथा आठवीं कक्षा के छात्रों को अंग्रेजी सिखाते थे।

Exam Tip: हेडमास्टर शर्मा जी का अंग्रेज़ी पढ़ाना और उनकी कोमल चपत का प्रसंग इसी कक्षा के छात्रों से जुड़ा हुआ है।

 

II. पाठ आधारित प्रश्नोत्तर

 

Question 1. कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती - पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता है?
Answer: बचपन के दिनों में लेखक के अधिकांश मित्र राजस्थान और हरियाणा प्रांतों से संबंध रखते थे। उनके साथ खेलते समय यद्यपि सभी की मातृभाषाएँ भिन्न थीं और वे परस्पर एक-दूसरे के शब्दों को पूरी तरह नहीं समझ पाते थे, फिर भी क्रीड़ा के दौरान उन्हें कभी किसी कठिनाई का अहसास नहीं हुआ। खेल की मस्ती में वे सभी एक-दूसरे के मनोभावों को सहजता से भाँप लेते थे। इससे स्पष्ट होता है कि स्नेह और खेल के आपसी व्यवहार में भाषा कभी भी रुकावट पैदा नहीं करती।
In simple words: बच्चे जब आपस में खेलते हैं, तो उन्हें एक-दूसरे की भाषा न आने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता। वे इशारों और खेल की मस्ती से ही सारी बातें समझ जाते हैं।

Exam Tip: इस उत्तर में राजस्थान और हरियाणा के बच्चों के बीच बिना किसी भाषाई अंतर के होने वाले सहज मेलजोल का उदाहरण अवश्य लिखें।

 

Question 2. पीटी साहब की 'शाबाशी' फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी? स्पष्ट कीजिए।
Answer: विद्यालय में पीटी शिक्षक प्रीतम चंद बेहद कड़े और अनुशासनप्रिय अध्यापक के रूप में जाने जाते थे। प्रार्थना सभा की कतार में तनिक भी हिलने-डुलने या पैर खुजलाने पर वे विद्यार्थियों पर चीते की भाँति टूट पड़ते थे। ऐसे कठोर स्वभाव वाले शिक्षक के मुँह से जब बच्चों को बिना किसी त्रुटि के परेड करने पर प्रशंसा स्वरूप 'शाबाश' सुनने को मिलता, तो उनकी प्रसन्नता की कोई सीमा नहीं रहती थी। उन्हें ऐसा महसूस होता था मानो सेना में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें कोई बड़ा पदक या सम्मान मिल गया हो।
In simple words: बहुत कड़क स्वभाव के शिक्षक जब किसी बच्चे की तारीफ करते हैं, तो उस बच्चे को ऐसा महसूस होता है जैसे उसने दुनिया का सबसे बड़ा इनाम जीत लिया हो।

Exam Tip: उत्तर में पीटी मास्टर की अत्यधिक कठोरता और उसके विपरीत मिलने वाली उनकी दुर्लभ प्रशंसा की तुलना सेना के पदकों (तमगों) से करना आवश्यक है।

 

Question 3. नई श्रेणी में जाने और नई कॉपियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था?
Answer: हर वर्ष जब लेखक अगली कक्षा में प्रवेश करते, तो हेडमास्टर साहब उन्हें किसी संपन्न छात्र की पुरानी पुस्तकें लाकर सौंपते थे। उन पुरानी किताबों और नई कॉपियों से उठने वाली अनजानी महक लेखक के मन को निराशा से भर देती थी। इसका मुख्य कारण यह था कि अगली कक्षा में जाने का सीधा अर्थ था - कठिन पाठ्यक्रम का बोझ और नए शिक्षकों द्वारा दंडित होने का डर। इसके अतिरिक्त, पुराने शिक्षकों की उम्मीदें भी बढ़ जाती थीं कि छात्र अब अधिक समझदार हो गए हैं, और उम्मीदों पर खरे न उतरने पर कड़े शारीरिक दंड का सामना करना पड़ता था।
In simple words: नई क्लास में जाने पर मुश्किल पढ़ाई और टीचरों की कड़क मार का डर रहता था। पुरानी किताबों की गंध उन्हें इसी आने वाली मुश्किल की याद दिलाती थी, इसलिए वे उदास हो जाते थे।

Exam Tip: किताबों की गंध का संबंध पढ़ाई के मानसिक तनाव और शिक्षकों की बढ़ती हुई अपेक्षाओं से जोड़कर उत्तर को प्रभावशाली बनाएँ।

 

Question 4. स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण 'आदमी' फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता था?
Answer: स्काउट गाइड की परेड के दौरान जब लेखक बिल्कुल उजले और धुले हुए वस्त्र धारण करते, जूतों को चमकाकर और मोज़े पहनकर पूरे रौब के साथ कदमों की ताल मिलाते हुए चलते, तो वे अत्यंत गर्व का अनुभव करते थे। बूटों की ठक-ठक आवाज़ और सीधे तनकर चलने की मुद्रा उन्हें किसी अनुशासित सैनिक जैसी गरिमा और आत्मविश्वास से भर देती थी, जिससे वे स्वयं को एक ज़िम्मेदार सैन्य जवान मानने लगते थे।
In simple words: साफ-सुथरी वर्दी और चमचमाते जूते पहनकर जब लेखक परेड में कदम से कदम मिलाकर चलते थे, तो उन्हें खुद पर बहुत गर्व होता था और वे खुद को असली फौजी समझने लगते थे।

Exam Tip: 'धोबी के धुले कपड़े', 'पॉलिश किए जूते' और 'कदमों की ठक-ठक ध्वनि' जैसे शब्दों का प्रयोग करके उत्तर की गुणवत्ता बढ़ाएँ।

 

Question 5. हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअत्तल कर दिया?
Answer: एक अवसर पर पीटी मास्टर प्रीतम चंद ने चौथी कक्षा के छात्रों को फ़ारसी भाषा के शब्द-रूप कंठस्थ करने का कार्य दिया था। जब छात्र उसे याद नहीं कर पाए, तो दंड स्वरूप उन्होंने सभी को मुर्गा बना दिया। छोटे बच्चे इस असहनीय शारीरिक पीड़ा को अधिक समय तक झेल नहीं सके और ज़मीन पर गिरने लगे। ठीक उसी समय अत्यंत दयालु स्वभाव के प्रधानाचार्य शर्मा जी वहाँ से गुज़रे। बालकों की यह दयनीय दशा देखकर उनका हृदय द्रवित हो उठा और उन्होंने तुरंत पीटी शिक्षक को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
In simple words: पीटी मास्टर ने बच्चों को बहुत कठिन काम न कर पाने पर मुर्गा बना दिया था। छोटे बच्चों की यह हालत देखकर दयालु हेडमास्टर जी ने उन्हें नौकरी से अस्थायी रूप से निकाल दिया।

Exam Tip: निलंबन (मुअत्तल) का तात्कालिक कारण 'फ़ारसी के शब्द-रूप' न सुना पाने पर बच्चों को बर्बरतापूर्वक 'मुर्गा बनाना' ही था, इसे स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 6. लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?
Answer: यद्यपि सामान्यतः लेखक को विद्यालय जाना अत्यंत अरुचिकर लगता था और वे वहाँ प्रसन्नता से नहीं जाते थे, किंतु विशेष अवसरों पर यह दृष्टिकोण बदल जाता था। जब स्कूल में रंगीन ध्वज हाथ में थमाए जाते, गले में सुंदर दुपट्टानुमा रुमाल सजाया जाता और पीटी शिक्षक सामूहिक परेड का अभ्यास करवाते, तो उन्हें बहुत आनंद आता था। सभी छात्रों का एक सुर में कदमों की ध्वनि करना, दायें-बायें मुड़ना और फिर शिक्षक से प्रशंसा पाना उन्हें परीक्षा में मिलने वाले सभी पुरस्कारों से अधिक प्रिय लगता था। इसी कारण उन्हें कभी-कभी स्कूल जाना प्रिय लगने लगता था।
In simple words: रोज़ स्कूल जाना भले ही डरावना लगता था, लेकिन परेड वाले दिन रंगीन झंडे लेकर और साफ़ कपड़े पहनकर दोस्तों के साथ ताल मिलाकर चलना बच्चों को बहुत पसंद आता था।

Exam Tip: 'स्काउट परेड', 'रंग-बिरंगे झंडे' और 'राइट टर्न-लेफ़्ट टर्न' जैसे परेड के अनुभवों को उत्तर में शामिल करना न भूलें।

 

Question 7. पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: पाठ के विवरणों से पीटी सर (प्रीतम चंद) के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं: प्रथम, वे शारीरिक रूप से दुबले-पतले और छोटे कद के थे, लेकिन उनकी भूरी आँखों में गज़ब की तेज़ी थी। द्वितीय, वे अत्यधिक कड़क स्वभाव के और अनुशासन के पक्के थे; नियमों की अनदेखी करने वाले छात्रों को वे बर्बरतापूर्वक शारीरिक यातनाएँ देने से भी नहीं हिचकते थे। तृतीय, स्वभाव से अत्यंत कठोर होने के बावजूद वे आत्मसम्मान से परिपूर्ण थे। जब प्रधानाचार्य ने उन्हें सेवा से निलंबित किया, तो उन्होंने याचना करने के बजाय स्वाभिमान के साथ चुपचाप वहाँ से प्रस्थान करना बेहतर समझा।
In simple words: पीटी मास्टर दिखने में छोटे और फुर्तीले थे। वे अनुशासन के बहुत पक्के और डरावने थे, लेकिन साथ ही वे बहुत स्वाभिमानी भी थे क्योंकि नौकरी जाने पर भी वे किसी के आगे नहीं झुके।

Exam Tip: उनके चरित्र के दो मुख्य पहलुओं को स्पष्ट करें - उनका अत्यधिक क्रूर स्वभाव और उनका दृढ़ स्वाभिमान।

 

Question 8. विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: कहानी के कालखंड में छात्रों को अनुशासित करने के लिए निर्मम पिटाई और कठोर शारीरिक प्रताड़ना जैसी अमानवीय विधियों का प्रयोग किया जाता था। परंतु आधुनिक शिक्षा प्रणाली में इस प्रकार के व्यवहार को पूरी तरह अस्वीकार्य और दंडनीय घोषित किया गया है। वर्तमान समय में बाल-मनोविज्ञान को प्राथमिकता दी जाती है, जहाँ शिक्षकों को संवेदनशील बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है। आज का दृष्टिकोण बच्चों की त्रुटियों के पीछे छिपे कारणों को समझकर, उन्हें प्रेमपूर्वक समझाने और एक दोस्ताना माहौल प्रदान करने पर बल देता है ताकि विद्यालय भयमुक्त और आनंददायक स्थान बन सके।
In simple words: पुराने समय में बच्चों को सुधारने के लिए मार-पीट का सहारा लिया जाता था, जो कि गलत था। आज बच्चों को प्यार से समझाने और उनकी कमियों को दूर करने की कोशिश की जाती है।

Exam Tip: इस उत्तर में पुराने क्रूर अनुशासन और आधुनिक संवेदनशील, मनोवैज्ञानिक शिक्षा पद्धति के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

Question 9. हेडमास्टर की चपत बच्चों को नमकीन पापड़ी-सी क्यों लगती थी?
Answer: प्रधानाचार्य मदनमोहन शर्मा जी अत्यंत दयालु, शांतप्रिय और मधुर व्यवहार वाले व्यक्ति थे। वे उच्च प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्वयं अंग्रेज़ी का अध्यापन कराते थे। यदि कोई छात्र पढ़ने में त्रुटि करता, तो वे अत्यधिक क्रोधित होने पर केवल अपनी पलकें तेज़ी से झपकाते और हाथ की पिछली उंगलियों से गाल पर हल्की सी चपत लगा देते थे। यह स्पर्श इतना स्नेहपूर्ण होता था कि शारीरिक रूप से दुर्बल बच्चे भी लज्जित होने के बजाय मुस्कुरा देते थे। शिक्षक के इसी कोमल स्नेह के कारण बच्चों को वह चपत किसी स्वादिष्ट नमकीन पापड़ी की तरह प्रिय लगती थी।
In simple words: हेडमास्टर साहब इतने भले और सीधे थे कि उनका गुस्सा भी बच्चों को मीठा लगता था। उनकी हल्की सी मार में भी बच्चों को डाँट के बजाय उनका प्यार महसूस होता था।

Exam Tip: 'मृदुभाषी स्वभाव' और 'चपत में छिपा अपनत्व' इस चपत को 'नमकीन पापड़ी' बनाने वाले मुख्य तत्व हैं।

 

Question 10. मास्टर प्रीतम के व्यक्तित्व और पहनावे को भयभीत करने वाला क्यों कहा गया है? 'सपनों के-से दिन' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: पीटी शिक्षक का बाह्य रूप और वेशभूषा बच्चों के मन में आतंक पैदा करने के लिए पर्याप्त थी। उनका कद छोटा था लेकिन काया गठीली और सुदृढ़ थी। चेचक के दागों से युक्त उनका चेहरा और बाज की तरह तीखी, पैनी आँखें किसी को भी डराने के लिए काफी थीं। वे हमेशा कड़क खाकी पोशाक पहनते थे और उनके जूतों की एड़ियों में लोहे की नाल तथा तलवों में नुकीली कीलें लगी होती थीं, जिनकी खटखटाहट से पूरा विद्यालय काँपता था। उनका यही रौबीला रूप और भयावह पहनावा छात्रों के भीतर गहरा डर पैदा करता था।
In simple words: पीटी मास्टर का शरीर गठीला था, चेहरे पर चेचक के दाग थे और उनकी आँखें बहुत तेज़ थीं। उनके भारी जूतों में लोहे की खुरियाँ लगी थीं, जिसकी आवाज़ सुनकर ही बच्चे डर जाते थे।

Exam Tip: उनके जूतों की बनावट (लोहे की खुरियाँ और कीलें) तथा उनकी पैनी आँखों का वर्णन करना इस उत्तर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है।

 

Question 11. ननिहाल जाकर लेखक को क्या सुख मिलता था?
Answer: ग्रीष्मावकाश के दौरान जब लेखक अपनी माता जी के साथ ननिहाल जाते, तो वहाँ का वातावरण उनके लिए स्वर्ग जैसा होता था। उनकी नानी अपार स्नेह बरसाते हुए उन्हें प्रचुर मात्रा में मलाईदार दूध, दही और ताजा मक्खन खिलाती थीं। वे बिना किसी संकोच के अपनी मनपसंद चीजें माँगकर खाते थे। लेखक की सादगीपूर्ण बोली और संयमित खानपान नानी को बेहद प्रिय लगता था, और वे अपने अन्य पोतों को भी लेखक जैसा आचरण अपनाने को कहती थीं। सबसे बड़ी राहत यह थी कि ननिहाल में उन पर पढ़ाई-लिखाई का कोई दबाव या भय नहीं रहता था।
In simple words: नानी के घर जाकर लेखक को ढेर सारा प्यार, खाने को घी-मक्खन और खेलने की पूरी आज़ादी मिलती थी। वहाँ उन्हें स्कूल की पढ़ाई और मार का कोई डर नहीं होता था।

Exam Tip: नानी के लाड-प्यार, दूध-दही के खानपान और पढ़ाई के किसी भी प्रकार के तनाव से पूरी तरह मुक्ति को मुख्य बिंदु बनाएँ।

 

Question 12. छात्रों के नेता ओमा के सिर की क्या विशेषताएँ थीं? पाठ 'सपनों के-से दिन' के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: ओमा नामक छात्र का शारीरिक ढांचा अत्यंत विचित्र था; उसका कद छोटा था परंतु उसका मस्तक किसी बड़े मिट्टी के घड़े के समान विशाल था। वह कुरूप होने के साथ-साथ अत्यंत बलशाली भी था, जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता था मानो बिल्ली के लघु शरीर पर कोई बड़ा तरबूज टिका दिया गया हो। अपनी इसी शारीरिक शक्ति के बल पर वह सभी बालकों का अगुआ बना हुआ था। उसके आक्रमण करने की शैली अनोखी थी - वह थप्पड़ या लात चलाने के बजाय एक उग्र साँड की तरह फुंफकारते हुए अपना भारी सिर सामने वाले के पेट अथवा वक्षस्थल पर दे मारता था। इस प्रहार की तीव्रता इतनी अधिक होती थी कि बच्चे दर्द से तड़प उठते थे, इसलिए उसकी इस खतरनाक टक्कर को सभी ने 'रेल बम्बा' का नाम दिया था।
In simple words: ओमा का सिर बहुत बड़ा था और वह बहुत ताकतवर था। वह जब लड़ता था तो हाथ-पैर चलाने के बजाय अपने भारी सिर से सीधे सामने वाले के पेट में ज़ोरदार टक्कर मारता था।

Exam Tip: ओमा के सिर की उपमा 'तरबूज' से करना और उसकी टक्कर को 'रेल बम्बा' कहे जाने के पीछे का कारण ज़रूर लिखें।

 

Question 13. 'सपनों के-से दिन' पाठ के आधार पर बताइए कि बच्चों को पढ़ाई करने से अधिक खेलना क्यों रुचिकर लगता था?
Answer: तत्कालीन समय में विद्यालय का परिवेश बच्चों के लिए तनिक भी आनंददायक नहीं था; मुट्ठी भर बालकों को छोड़कर शेष सभी रोते-बिलखते हुए जबरन स्कूल भेजे जाते थे। इसका मुख्य कारण यह था कि स्कूल में उनके मनोरंजन या रुचि का कोई साधन नहीं था। वहाँ के शिक्षक, विशेषकर पीटी मास्टर, यमराज के समान क्रूर प्रतीत होते थे। गृहकार्य पूरा न होने पर दी जाने वाली अमानवीय यातनाओं के कारण बच्चे छुट्टियों के काम का बोझ उठाने के बजाय पिटना अधिक आसान समझते थे। चारों ओर फैले इसी भय और आतंक के माहौल के कारण बच्चों को पढ़ाई नीरस व कष्टदायक लगती थी, जबकि खेलकूद में उन्हें असीम स्वतंत्रता और मानसिक सुख प्राप्त होता था।
In simple words: स्कूल का माहौल बहुत सख्त और डरावना होता था जहाँ शिक्षक बेरहमी से पीटते थे। इसके विपरीत, खेलने में बच्चों को आज़ादी मिलती थी और कोई डर नहीं होता था, इसलिए वे खेलना पसंद करते थे।

Exam Tip: स्कूल के डरावने और हिंसक माहौल के मुकाबले खेल के मैदान से मिलने वाली स्वतंत्रता को मुख्य बिंदु बनाकर उत्तर लिखें।

 

Question 14. 'सपनों के-से दिन' पाठ के आधार पर लिखिए कि अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई में रुचि क्यों नहीं थी? पढ़ाई को व्यर्थ समझने में उनके क्या तर्क थे? स्पष्ट कीजिए।
Answer: ग्रामीण अंचल के निर्धन परिवारों में शिक्षा के प्रति भारी उदासीनता व्याप्त थी। स्कूल का डरावना माहौल देखकर बच्चे अक्सर अपनी बस्ते तालाबों में विसर्जित कर पढ़ाई से नाता तोड़ लेते थे। अभिभावक भी शिक्षा को निरर्थक मानते थे क्योंकि उनके अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करके उनके बच्चों को कोई प्रशासनिक पद या तहसीलदारी नहीं संभालनी थी। उनका मानना था कि जीवनयापन के लिए पारंपरिक व्यापारिक कौशल ही पर्याप्त है। इसलिए वे अपने बच्चों को किसी विद्यालय भेजने के स्थान पर स्थानीय पंडितों से प्राचीन बहीखाते की 'लंडे' लिपि सीखवाना अधिक श्रेयस्कर समझते थे ताकि वे दुकान का हिसाब-किताब संभाल सकें अथवा मुनीमी का कार्य कर सकें।
In simple words: माता-पिता सोचते थे कि उनके बच्चों को अफसर तो बनना नहीं है, इसलिए वे सोचते थे कि स्कूल जाने से बेहतर है बच्चे दुकान का हिसाब-किताब या मुनीमी का काम सीख लें।

Exam Tip: उत्तर में अभिभावकों के मुख्य तर्कों जैसे 'तहसीलदारी न करना' और प्राचीन व्यापारिक भाषा 'लंडे लिपि' सीखकर 'मुनीम' बनने की सोच का उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 15. लेखक को बचपन में स्कूल की पढ़ाई में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था और हेडमास्टर शर्मा जी उसकी किस प्रकार सहायता करते थे? 'सपनों के-से दिन' पाठ के आधार पर बताइए।
Answer: लेखक के प्रारंभिक जीवन में शिक्षा प्राप्त करना आर्थिक रूप से एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि उनके परिवार में वे विद्यालय जाने वाले पहले सदस्य थे। यद्यपि उस समय पाठ्यपुस्तकों और कॉपियों का वार्षिक व्यय मात्र एक या दो रुपये था, किंतु तत्कालीन आर्थिक तंगी के कारण उनके परिवार के लिए यह राशि भी अत्यंत भारी थी। पढ़ाई के प्रति पारिवारिक सहयोग न होने के कारण यदि किताबों का अतिरिक्त बोझ पड़ता, तो लेखक की शिक्षा प्राथमिक स्तर पर ही रुक जाती। ऐसी कठिन परिस्थिति में प्रधानाचार्य शर्मा जी उनके रक्षक बने। वे स्वयं जिस संपन्न छात्र को ट्यूशन पढ़ाते थे, उसकी उत्तीर्ण होने के बाद की पुरानी पुस्तकें लाकर लेखक को दे देते थे। इसी अमूल्य सहायता के बल पर लेखक अपनी सात वर्षों की स्कूली शिक्षा सफलतापूर्वक पूरी कर सके।
In simple words: लेखक का परिवार बहुत गरीब था और किताबें खरीदने के पैसे नहीं थे। हेडमास्टर साहब ने हर साल उन्हें एक अमीर लड़के की पुरानी किताबें लाकर दीं, जिससे लेखक की पढ़ाई पूरी हो सकी।

Exam Tip: लेखक की पारिवारिक गरीबी, किताबों के मामूली खर्चे का भी बोझ होना और हेडमास्टर जी द्वारा 'पुरानी किताबें उपलब्ध कराने' की उदारता को उत्तर का केंद्रबिंदु बनाएँ।

 

Question 16. तोतों के प्रति मधुर व्यवहार से प्रीतमचंद के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषता के बारे में पता चलता है?
Answer: छात्रों को बेरहमी से पीटने के अपराध में सेवा से निलंबित होने के बाद भी प्रीतम चंद के व्यवहार में कोई पछतावा या चिंता नहीं दिखाई दी। वे अपने किराए के कमरे में अत्यंत शांत भाव से जीवन व्यतीत कर रहे थे। वहाँ वे अपने पाले हुए तोतों को बड़े प्रेम से भीगे बादाम छीलकर खिलाते और उनसे अत्यंत मधुर स्वर में बातें करते थे। उनका यह संवेदनशील रूप देखकर छात्र स्तब्ध रह गए, क्योंकि जो व्यक्ति स्कूल में यमराज का साक्षात रूप माना जाता था, वह पशु-पक्षियों के प्रति इतना करुणामयी और वात्सल्यपूर्ण हो सकता है, इसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। इससे स्पष्ट होता है कि उनके कठोर और हिंसक बाह्य आवरण के भीतर भी एक संवेदनशील मानवीय कोमलता छिपी हुई थी।
In simple words: स्कूल में बहुत सख्त और डरावने दिखने वाले पीटी मास्टर असल में अंदर से कोमल दिल के थे। वे अपने तोतों से बहुत प्यार करते थे और उन्हें भीगे बादाम खिलाते थे।

Exam Tip: इस उत्तर में उनके 'दोहरे व्यक्तित्व' को उजागर करें - एक तरफ स्कूल का कठोर हिंसक रूप और दूसरी तरफ तोतों के साथ उनका अत्यंत कोमल और संवेदनशील रूप।

 

Question 17. पीटी अध्यापक कैसे स्वभाव के व्यक्ति थे? विद्यालय के कार्यक्रमों में उनकी कैसी रुचि थी? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: पीटी शिक्षक प्रीतम चंद का चरित्र अत्यंत जटिल था। वे नियमों और अनुशासन को लेकर बेहद कड़े थे, जहाँ छोटी सी त्रुटि पर भी छात्रों को अत्यंत बर्बरतापूर्वक दंडित किया जाता था। विद्यालय की प्रार्थना सभा को सुव्यवस्थित रखने में उनकी मुख्य भूमिका होती थी। इसके साथ ही, विद्यालय की पाठ्येतर गतिविधियों जैसे स्काउट परेड के वे कुशल संचालक थे। उनके दिशा-निर्देशन में परेड अत्यंत आकर्षक और प्रभावशाली होती थी। जब वे उत्कृष्ट प्रदर्शन पर बच्चों की सराहना करते थे, तो वह शब्द बालकों को किसी सैनिक मेडल की भाँति गौरव प्रदान करता था, जिससे उनके प्रति मन में क्षणिक आदर की भावना उत्पन्न हो जाती थी।
In simple words: पीटी मास्टर बहुत सख्त और अनुशासनप्रिय थे, लेकिन वे स्काउट परेड बहुत अच्छे से कराते थे। उनकी थोड़ी सी तारीफ भी बच्चों को बहुत बड़ा सम्मान महसूस कराती थी।

Exam Tip: पीटी साहब की दो मुख्य भूमिकाओं का वर्णन करें - प्रार्थना सभा का कठोर अनुशासन और स्काउट परेड में उनका कुशल नेतृत्व।

 

Question 18. 'सपनों के-से दिन' पाठ के लेखक का मन पुरानी किताबों से क्यों उदास हो जाता है?
Answer: लेखक का मन पुरानी पुस्तकों को देखकर इसलिए खिन्न हो जाता था क्योंकि उन किताबों के पन्नों से आने वाली विशिष्ट सीलन भरी गंध उन्हें मानसिक रूप से अशांत कर देती थी। निर्धनता के कारण उनके अभिभावक नई पुस्तकें खरीदने में असमर्थ थे, जिसके कारण उन्हें सदैव दूसरों की उपयोग की हुई पुरानी किताबों से ही अध्ययन करना पड़ता था। सहपाठियों के पास नए और चमकीले पन्नों वाली पुस्तकें देखकर उनके भीतर भी नई सामग्रियों के साथ पढ़ने की जो उमंग और जिज्ञासा जगती थी, वह पुरानी फटी पुस्तकों को देखकर निराशा में बदल जाती थी।
In simple words: लेखक गरीब होने के कारण नई किताबें नहीं खरीद पाते थे। दूसरों की पुरानी किताबों की गंध उन्हें अपनी बेबसी की याद दिलाती थी और वे सहपाठियों की नई किताबें देखकर दुखी हो जाते थे।

Exam Tip: पुरानी पुस्तकों की 'सीलन भरी गंध' का मनोवैज्ञानिक प्रभाव और नई वस्तुओं के प्रति बाल-सुलभ इच्छा की कमी को मुख्य कारण के रूप में रेखांकित करें।

 

Question 19. फ़ारसी की घंटी बजते ही बच्चे डर से क्यों काँप उठते थे? 'सपनों के-से दिन' पाठ के आधार पर लिखिए।
Answer: फ़ारसी कालखंड की घंटी की ध्वनि सुनते ही छात्रों के हृदय में भय व्याप्त हो जाता था क्योंकि पीटी मास्टर प्रीतम चंद ने कठिन व्याकरण रूपों को कंठस्थ न करने पर विद्यार्थियों को अमानवीय शारीरिक यातनाएँ दी थीं। यद्यपि उनके इस क्रूर व्यवहार के कारण प्रधानाचार्य ने उन्हें सेवामुक्त कर दिया था, तथापि छात्रों के अवचेतन मन में उनका इतना गहरा खौफ था कि उन्हें आशंका रहती थी कि निलंबित होने के बाद भी वे अचानक कक्षा में न धमक पड़ें। उनका यह मानसिक तनाव केवल तभी दूर होता था जब कक्षा में अन्य शिक्षक नौहरिया राम जी अथवा स्वयं हेडमास्टर शर्मा जी प्रवेश करते थे।
In simple words: बच्चे पीटी मास्टर की बेरहम पिटाई से बुरी तरह डरते थे। उन्हें डर था कि निलंबित होने के बाद भी पीटी मास्टर कहीं अचानक क्लास में न आ जाएँ, इसलिए घंटी बजते ही वे काँपने लगते थे।

Exam Tip: उत्तर में पीटी मास्टर के निलंबन के बाद भी बच्चों के मन में बने रहने वाले अवचेतन भय (मनोवैज्ञानिक खौफ) को स्पष्ट करना आवश्यक है।

 

Question 20. 'सपनों के-से दिन' कहानी के आधार पर पीटी साहब के व्यक्तित्व की दो विशेषताएँ बताते हुए लिखिए कि स्काउट परेड करते समय लेखक स्वयं को महत्वपूर्ण आदमी (एक फ़ौजी जवान) क्यों समझता था?
Answer: पीटी मास्टर प्रीतम चंद के व्यक्तित्व की दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **अत्यधिक कठोर एवं कड़क स्वभाव:** वे अनुशासन के मामले में रत्ती भर भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं करते थे। प्रार्थना सभा में बच्चों को कतार में सीधा खड़ा रखना और नियमों का उल्लंघन करने पर अमानवीय शारीरिक दंड देना उनकी शैली थीKey।
2. **कुशल एवं निपुण मार्गदर्शक:** वे छात्रों को उत्कृष्ट परेड सिखाने में बेहद दक्ष थे। परेड के दौरान जब वे बालकों की सराहना में 'शाबाश' कहते, तो वह बाल मन को किसी राष्ट्रीय पुरस्कार की भाँति गौरव की अनुभूति कराता था।

**लेखक द्वारा स्वयं को फ़ौजी जवान मानने के कारण:**
स्काउट परेड के समय धुले हुए कड़क वस्त्र, चमकदार बूट और अनुशासित ढंग से कदमों की ताल मिलाना लेखक के मन में एक आदर्श सैनिक की छवि अंकित कर देता था। पीटी शिक्षक के 'लेफ्ट-टर्न' या 'राइट-टर्न' जैसे आदेशों पर जब बूटों से 'ठक-ठक' की गूंज पैदा होती थी, तो लेखक के भीतर देश सेवा और सैन्य जीवन के प्रति गहरे सम्मान के साथ-साथ स्वयं के एक गौरवशाली सैनिक होने का भ्रम पैदा हो जाता था।
In simple words: पीटी मास्टर बहुत सख्त पर कुशल शिक्षक थे। परेड के समय साफ वर्दी और जूतों की आवाज़ से लेखक को लगता था कि वे सच में देश की रक्षा करने वाले जांबाज फौजी बन गए हैं।

Exam Tip: पीटी साहब की दो विशेषताओं (कठोर अनुशासन और कुशल प्रशिक्षण) तथा परेड के समय लेखक के मन में उत्पन्न होने वाले आत्म-गौरव को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें।

 

अभ्यास प्रश्न पत्र

 

Question 1(क). ओमा की लड़ाई का ढंग क्या था? पाठ के आधार पर लिखिए।
Answer: ओमा का शारीरिक ढांचा नाटा था परंतु उसका सिर मटके के समान बहुत विशाल था। वह अन्य सामान्य बालकों की भाँति लड़ाई में थप्पड़, घूँसे या लात का प्रयोग नहीं करता था। उसका युद्ध कौशल बिल्कुल निराला था; वह एक क्रोधित साँड की तरह अपनी गर्दन नीचे झुकाकर पूरी ताकत से सामने वाले के पेट या छाती पर टक्कर मारता था। उसकी इस भीषण टक्कर को बच्चे 'रेल बम्बा' कहते थे क्योंकि इससे विरोधी बालक अत्यधिक दर्द से तड़प उठता था।
In simple words: ओमा हाथ-पैर से नहीं लड़ता था। वह साँड की तरह सिर झुकाकर सामने वाले के पेट में इतनी तेज़ टक्कर मारता था कि विरोधी बच्चा दर्द से छटपटाने लगता था।

Exam Tip: इस उत्तर में ओमा के सिर की बनावट और उसके लड़ने की अनूठी शैली 'साँड की तरह सिर से टक्कर मारना' (रेल बम्बा) का सटीक विवरण दें।

 

Question 1(ख). हेडमास्टर शर्मा जी का छात्रों के साथ कैसा व्यवहार था?
Answer: हेडमास्टर मदनमोहन शर्मा जी अत्यंत दयालु, सौम्य और शांत स्वभाव के शिक्षक थे। वे विद्यार्थियों से असीम स्नेह रखते थे और कभी भी उन्हें किसी प्रकार का कड़ा शारीरिक दंड नहीं देते थे। यदि कभी कोई छात्र अंग्रेज़ी विषय का पाठ याद करने में त्रुटि करता, तो वे बहुत क्रोधित होने पर भी केवल अपनी पलकें तेज़ी से झपकाते थे और अपने हाथ की पिछली उंगलियों से गाल पर एक बहुत ही हल्की चपत लगा देते थे। उनकी इस मार में भी ममता छिपी होती थी, जिससे बच्चे भयभीत होने के बजाय मुस्कुरा देते थे।
In simple words: हेडमास्टर शर्मा जी बच्चों को बहुत प्यार करते थे। वे कभी लाठी या डंडे से नहीं पीटते थे, बल्कि गुस्सा आने पर भी सिर्फ गाल पर हल्की सी चपत लगाते थे जिसमें प्यार झलकता था।

Exam Tip: हेडमास्टर साहब के 'मृदुभाषी व्यक्तित्व' और उनकी चपत में छिपे 'अपनत्व' को उत्तर का मुख्य आधार बनाएँ।

 

Question 1(ग). गरीब घरों के लड़कों का स्कूल जाना क्यों कठिन था?
Answer: तत्कालीन समय में निर्धन परिवारों के बच्चों के लिए स्कूल जाना अत्यंत कठिन था क्योंकि एक तो स्कूल का वातावरण बहुत अधिक डरावना और अरुचिकर था, जहाँ अध्यापकों की मार का भारी खौफ रहता था। दूसरा बड़ा कारण था - आर्थिक तंगी। गरीब माता-पिता कॉपियों और किताबों का मामूली खर्च भी उठाने में असमर्थ थे। उनका मानना था कि बच्चों को पढ़-लिखकर कोई नौकरी नहीं करनी है, इसलिए वे बच्चों को स्कूल भेजने की जगह दुकान का बहीखाता संभालने के लिए स्थानीय स्तर पर 'मुनीमी' या 'लंडे लिपि' सिखाना अधिक व्यावहारिक समझते थे।
In simple words: स्कूल का हिंसक माहौल और घर की कंगाली के कारण गरीब बच्चे पढ़ नहीं पाते थे। माता-पिता भी सोचते थे कि पढ़ने से अच्छा है कि बच्चे दुकान का काम सीख लें।

Exam Tip: इस उत्तर में दो प्रमुख पक्षों को दर्शाएँ - पहला, शिक्षकों की क्रूरता का भय; दूसरा, आर्थिक तंगी और माता-पिता की पारंपरिक व्यावसायिक सोच।

 

Question 2(क). प्रीतमचंद को स्कूल से क्यों निकाल दिया गया? निकाल दिए जाने के बाद वे क्या किया करते थे?
Answer: पीटी मास्टर प्रीतम चंद ने चौथी कक्षा के नन्हे बालकों को फ़ारसी के शब्द-रूप याद न करने के अपराध में अत्यधिक कठोरता से 'मुर्गा' बना दिया था। छोटे बच्चे शारीरिक रूप से इस असहनीय पीड़ा को झेल नहीं पाए और ज़मीन पर गिरने लगे। बालकों की यह दयनीय दशा देखकर कोमल हृदय हेडमास्टर शर्मा जी का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने नियमों के विरुद्ध जाने के कारण पीटी मास्टर को स्कूल से निलंबित (मुअत्तल) कर दिया। नौकरी से निकाले जाने के बाद वे अपने किराए के कमरे में आराम से रहते थे और अपने दो पालतू तोतों को बादाम खिलाते हुए उनसे मीठी बातें किया करते थे।
In simple words: पीटी मास्टर ने बच्चों को बर्बरता से मुर्गा बनाया था, जिसके कारण हेडमास्टर ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। नौकरी जाने के बाद वे अपने तोतों के साथ समय बिताते और उन्हें बादाम खिलाते थे।

Exam Tip: उत्तर को दो भागों में स्पष्ट रूप से लिखें - पहला, निलंबन का कारण (मुर्गा बनाना); दूसरा, निलंबन के बाद तोतों के साथ उनका स्नेहमयी व्यवहार।

 

Question 2(ख). हेडमास्टर और प्रीतमचंद दोनों के व्यवहार में क्या अंतर था? बच्चे किसे पसंद करते थे? पाठ के आधार पर लिखिए।
Answer: हेडमास्टर मदनमोहन शर्मा जी और पीटी मास्टर प्रीतम चंद के व्यवहार में ज़मीन-आसमान का अंतर था। शर्मा जी कोमल हृदय, संवेदनशील और बच्चों से गहरा प्रेम करने वाले इंसान थे, जो कभी भी शारीरिक दंड का समर्थन नहीं करते थे। इसके विपरीत, पीटी मास्टर प्रीतम चंद अत्यंत क्रूर, रूखे और अनुशासन के नाम पर बच्चों की खाल खींचने वाले अध्यापक थे। स्वाभाविक रूप से, बच्चे हेडमास्टर शर्मा जी के स्नेहमयी और सुरक्षात्मक व्यवहार को अत्यधिक पसंद करते थे, जबकि प्रीतम चंद से वे यमराज की तरह नफ़रत करते और हमेशा भयभीत रहते थे।
In simple words: हेडमास्टर साहब बहुत दयालु थे और बच्चों को प्यार से समझाते थे, जबकि पीटी मास्टर बहुत कठोर थे और अमानवीय सजा देते थे। बच्चे हेडमास्टर साहब को बहुत प्यार करते थे और पीटी मास्टर से डरते थे।

Exam Tip: दोनों शिक्षकों के व्यवहार की तुलना 'संवेदनशीलता बनाम क्रूरता' के आधार पर करें और स्पष्ट रूप से दर्शाएँ कि बच्चे स्नेह को ही प्राथमिकता देते हैं।

 

Question 2(ग). खेलते समय बच्चों को जब चोटें लगती थीं तब क्या होता था? स्पष्ट कीजिए।
Answer: खेलते समय जब बच्चे गिरकर चोटिल हो जाते थे, तो उनके फटे कपड़े, धूल से सना शरीर और पैरों से बहता खून देखकर उनके माता-पिता बिल्कुल भी सहानुभूति नहीं दिखाते थे। वे बच्चों के घावों पर दवा लगाने के स्थान पर उन्हें अपनी मर्ज़ी से खेलने और कपड़े खराब करने के अपराध में और अधिक बेरहमी से पीटते थे। इसके बावजूद, बच्चों का खेल के प्रति आकर्षण कभी कम नहीं होता था। वे अगले ही दिन अपनी चोटों के दर्द को भूलकर उसी मैदान में नए उत्साह के साथ दोबारा धूल में खेलने के लिए पहुँच जाते थे।
In simple words: चोट लगने पर घरवालों से सहानुभूति के बजाय और मार पड़ती थी। फिर भी बच्चे अगले दिन अपनी चोटों को भूलकर दोबारा खुशी-खुशी खेलने पहुँच जाते थे।

Exam Tip: इस उत्तर में माता-पिता के कठोर व्यवहार के बावजूद बच्चों के खेल के प्रति असीम और अटूट लगाव (बाल-सहज स्वभाव) को प्रमुखता से दर्शाएँ।

 

प्रश्नोत्तरी :

बोध प्रश्न 

1. कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती− पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता हैं?

उत्तर

बचपन में लेखक के आधे से ज्यादा साथी राजस्थान या हरियाणा से थे जिनके साथ वे खेलते थे। सबकी बोलियाँ अलग-अलग थीं। वे एक-दूसरें की बोलियाँ काम ही समझ पाते  परन्तु खेलते समय यह बात जरा भी महसूस नही होती। सब की भाषा सब समझ लेते थे। उनके व्यवहार में इससे कोई अंतर न आता था। पाठ के इस अंश द्वारा यह पता चलता है की कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती।

2. पीटी साहब की शाबाश फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

पीटी साहब प्रीतमचन्द बहुत सख्त अध्यापक थे। यदि कोई कतार से सिर इधर-उधर हिला लेता या दूसरी पिंडली खुजलाने लगता इस पर वे उसे लड़के की ओऱ बाघ की तरह झपट पड़ते। परन्तु जब बच्चे कोई भी गलती न करते तो पी. टी. साहब उन्हें शाबाश कहते। बच्चे शाबाश शब्द सुनकर खुश होते और उन्हें लगता कि जैसे फौज में सिपाही को तमंगे दिए जाते हैं वैसा ही तमगा उन्हें भी मिल गया है।

3. नयी श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था?

उत्तर

नयी श्रेणी में जाने पर लेखक को हैडमास्टर जी एक अमीर घर के बच्चे की पुरानी किताबें लाकर देते थे। परन्तु इन नयी कापियों और पुरानी किताबों आती विशेष गंध से लेखक का बालमन उदास कर जाती थीं क्योंकि नयी श्रेणी का मतलब और कठिन पढाई और नए मास्टरों से पिटाई का भय होता था। पुराने मास्टरों की भी अपेक्षाएं बढ़ जाती थी। उन्हें लगता था की नयी श्रेणी में आने से बच्चें तेज हो गए हैं और अपेक्षाओं की प्रति न होने पर वे चमड़ी उधेरने में देर न लगाते।

4. स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण आदमी फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता था?

उत्तर

स्काउट परेड में लेखक साफ़ सुथरे धोबी के घुले कपड़े, पॉलिश किए हुए बूट, जुराबों को पहन कर जब लेखक ठक-ठक करके चलता था तो वह अपने आपको फ़ौजी से कम नहीं समझता था। अकड़कर चलता तो अपने अंदर एक फ़ौजी जैसी आन-बान-शान महसूस करता था।

5. हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअतल कर दिया?

उत्तर

एक दिन मास्टर प्रीतमचंद ने कक्षा में बच्चों को फ़ारसी के शब्द रूप याद करने के लिए दिए । परन्तु बच्चों से यह शब्द रूप याद नहीं हो सके। इसपर मास्टर जी ने उन्हें मुर्गा बना दिया। बच्चे इसे सहन नहीं कर पाए कुछ ही देर में लुढ़कने लगे। उसी समय नम्र ह्रदय हेडमास्टरजी वहाँ से निकले और बच्चों की हालत देखकर सहन नहीं कर पाए और पीटी मास्टर को मुअत्तल कर दिया।

6. लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?

उत्तर

लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल जाना बिल्कूल अच्छा नहीं लगता था परन्तु जब स्कूल में रंग बिरगें झंडे लेकर, गले में रूमाल बाँधकरमास्टर प्रीतमचंद परेड करवाते थे, तो लेखक को बहुत अच्छा लगता था। सब बच्चे ठक-ठक करते राइट टर्न, लेफ्ट टर्न या अवाउट टर्न करते और मास्टर जी उन्हें शाबाश कहते तो लेखक को पूरे साल में मिले गुड्डों से भी ज़्यादा अच्छा लगता था। इसी कारण लेखक को स्कूल जाना अच्छा लगने लगा।

7. लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुट्टियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति बहादुर बनने की कल्पना किया करता था?

उत्तर

लेखक के स्कूल की छुट्टियाँ होती और उसमें जो काम करने के लिए मिलता उसे पूरा करने के लिए लेखक समय सारणी बनाता। कौन-सा काम, कितना काम एक दिन में पूरा करना है। लेकिन खेल कूद में लेखक का समय बीत जाता और काम न हो पाता। धीरे-धीरे समय बीतने लगता तो लेखक ओमा नामक ठिगने और बलिष्ठ लड़के जैसा बहादुर बनना चाहता था जो उद्दंड था और काम करने के बजाए पिटना सस्ता सौदा समझता था।

8. पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर

पीटी सर शरीर से दुबले-पतले, ठिगने कद के थे, उनकी आँखे भूरी और तेज़ थीं। वे खाकी वर्दी और लम्बे जूते पहनते थे। वे बहुत अनुशासन प्रिय थे। बच्चे उनका कहना नहीं मानते तो वे दंड देते थे। वे कठोर स्वभाव के थे, उनके मन में दया भाव न था। बाल खीचना, ठुडढे मारना, खाल खीचना उनकी आदत थी। इनके साथ वे स्वाभिमानी भी थे। नौकरी से निकाले जाने पर वे हेडमास्टर जी के सामने गिड़गिड़ाए नहीं बल्कि चुपचाप चले गए।

9. विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर

पाठ में अनुशासन रखने के लिए कठोर दंड, मार-पीठ जैसी युक्तियाँ अपनाई गई हैं परन्तु वर्तमान में यह निंदनीय माना गया है। आजकल अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाता है कि वे बच्चे की भावनाओं को समझें, उनके कामों के कारण को समझे, उन्हें उनकी गलती का एहसास कराए तथा उनके साथ मित्रता व ममता का व्यवहार रखें। इससे बच्चे स्कूल जाने से डरेंगे नहीं बल्कि खुशी खुशी आएँगे।

11. प्राय अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज़्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए −

(क) खेल आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं।
(ख) आप कौन से ऐसे नियम-कायदों को अपनाएँगे जिससे अभिभावकों को आपके खेल पर आपत्ति न हो।

उत्तर

(क) खेल मनोरंजन के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है, बच्चे अनुशासित रहते हैं तथा प्रेम और सहयोग की भावना बढ़ती है। साथ ही साथ प्रतिस्पर्धा के गुण भी समझ में आते हैं। समूह में खेलने से सामाजिक भावना आती है।

(ख) खेल शरीर के लिए ज़रूरी हैं परन्तु उतने ही ज़रूरी अन्य कार्य भी हैं; जैसे – पढ़ाई आदि। यदि खेल स्वास्थ्य के लिए है तो पढ़ाई जैसे कार्य भविष्य को सुधारने के लिए आवश्यक हैं। हमें अपना कार्य समय पर करते रहना चाहिए। ज्ञानवर्धक विषयों पर भी उतना ही ध्यान देंगे और समय देंगे तो अभिभावकों को खेलने पर कोई आपत्ति नहीं होगी

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