Class 8 Hindi Chapter 06 Ek Tokri Bhar Mitti: NCERT Study Material
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पाठ 6: एक टोकरी भर मिठी
किसी श्रीमान जमींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ बुढ़ा की झोपड़ी थी। जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। बुढ़ा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोपड़ी हटा ले, पर वह तो कई जमानों से बहीं बसी थी। उसका प्रिय पत्नी और इकलौता पुत्र भी उसी झोपड़ी में मर गया था। पतहु भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। अब यही उसकी पौती इस बुढ़ावस्था में एकमात्र आधार थी। जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी और जब से उसने अपनी श्रीमान पड़ासी की इच्छा का हाल सुना, तब से वह मुतप्राय हो गई थी। उस झोपड़ी में उसका ऐसा कुछ मन लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। श्रीमान के सब प्रयत्न निफल हुए। तब वे अपनी जमींदारी चाल चलने लगे। बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की शेली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया और बुढ़ा को वहाँ से निकाल दिया। बिचारी अनाथ तो थी ही, पास-पड़ोस में कहीं जाकर रहने लगी।
एक दिन श्रीमान उस झोपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और लोगों को काम बताता रहे थे कि इतने में वह बुढ़ा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची। श्रीमान ने उसको देखते ही अपने नौकरों से कहा कि उसे यहीं से हटा दो। पर वह गिड़गिड़ाकर बोली, "महाराज, अब तो झोपड़ी तुम्हारी हो गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ। महाराज क्षमा करें तो एक विनती है।" जमींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा, "जब से यह झोपड़ी छूटी है, तब से मेरी पौती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। मैंने बहुत कुछ समझाया, पर वह एक नहीं मानती। यही कहा करती है कि अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी। अब मैंने यह सोचा कि इस झोपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी झोपड़ी के साथ रहूँ।" यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है?
(संकेत - मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है? मिट्टी के बहाने बुढ़ा क्या कहना चाहती है?)
पाठ से
आइए, अब हम इस पाठ पर विस्तार से चर्चा करें। नीचे दी गई गतिविधियों इस कार्य में आपकी सहायता करेगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सामने दो-दो निशर्फ लिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इनके संपूर्ण उपयुक्त निष्कर्षों से मिलाइए।
- जमींदार को झोपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?
- झोपड़ी जर्जर हो चुकी थी
- झोपड़ी रास्ते में बाधा थी
- वह अहाते का विस्तार करना चाहता था
- बुढ़ा से उसका कोई पुराना झगड़ा था
- बुढ़ा ने मिड़ी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी?
- क्रोध और झगड़ा करके
- अदालत से अनुमति लेकर
- निवनती और नम्रता से
- चुप्पचाप उठाकर ले गई
- बुढ़ा की पौती का व्यहार किस भाव को दर्शाता है?
- दया
- लगाव
- गुस्सा
- डर
- कहानी का अंत कैसा है?
- दुःखद
- सुखद
- प्रेरणादायक
- सकारात्मक
- कृत्कर्म का पश्चाताप कर उठोने बुढ़ा से क्षमा माँगी।
- बुढ़ा ने अपने व्यहार पर पछतاकर जमींदार से क्षमा माँगी।
- अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर जमींदार ने क्षमा माँगी।
- उसका भाग आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?
- बुढ़ा आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?
- कृपा करके इस टोकरी को जरा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।
- बुढ़ा ने चतुराई से जमींदार को शामिल करने की योजना बनाई।
- बुढ़ा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर जमींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया।
- उस प्राचीन बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसु की धारा बहने लगी।
- बुढ़ा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना असान नहीं है।
- बुढ़ा ने जमींदार की उम्र और शक्ति पर व्यंग्य करते हुए यह बात कही।
- उन्होंने बुढ़ा को शामिल करने की योजना बनाई।
- बुढ़ा ने चतुराई से जमींदार को शामिल करने की योजना बनाई।
- बुढ़ा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए जमींदार से निवनती की योजना बनाई।
- झोपड़ी में तो हजारो टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है।...।" यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है?
शिक्षक की टिप्पणी
इस कहानी में बुढ़ा जमींदार को यह दिखाता है कि अन्याय करना आसान है, पर उसका भार सहना बहुत मुश्किल होता है। जब जमींदार टोकरी को थोड़ा ही उठाते हैं, तो उन्हें दर्द महसूस होने लगता है। यह मिट्टी असल में उस गुनाह का प्रतीक है जो जमींदार ने किया था। याद रखिए: जब भी आप किसी को दर्द देते हो, तो उसका भार आप के साथ रहता है।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) "आपसे एक टोकरी भर मिठी नहीं उठाई जाती और इस झोपड़ी में तो हजारो टोकरियाँ मिठी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?"
(ख) "जमींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।"
(ग) "उन्होंने बुढ़ा से क्षमा माँगी और अपने कर्तव्य भूल गए थे पर बुढ़ा के उपयुक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। कृत्कर्म का पश्चाताप कर उन्होंने बुढ़ा को माफ़ कर दिया। बिचारी अनाथ तो थी ही, पास-पड़ोस में कहीं जाकर रहने लगी। उसके द्वारा किए अन्याय पर पछताकर जमींदार ने क्षमा माँगी।"
सोच-विचार के लिए
पाठ को पुन: ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
(ख) बुढ़ा की पौती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
(ग) जमींदार ने झोपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
(घ) "महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। जमींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा...।" यहाँ जमींदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है?
(ड) "किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।" यहाँ जमींदार के व्यहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले जमींदार का व्यहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यहार में क्या परिवर्तन आया?
(च) "उन्होंने बुढ़ा से क्षमा माँगी और उसकी झोपड़ी वापस दे दी।" जमींदार ने ऐसा क्यों किया?
अनुमान और कल्पना से
(क) यदि बुढ़ा की पौती जमींदार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?
(ख) यदि आप जमींदार की जगह होते तो क्या करते?
(ग) जमींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?
(घ) "झोपड़ी में तो हजारो टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है।..." यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है? (संकेत - मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है? मिट्टी के बहाने बुढ़ा क्या कहना चाहती है?)
शिक्षक की टिप्पणी
जब आप इस कहानी को पढ़ते हैं, तो ध्यान रखिए कि बुढ़ा के सारे कार्य और बातें मिट्टी के प्रतीक के माध्यम से हैं। मिट्टी मतलब सिर्फ मिट्टी नहीं है - यह उस अन्याय का प्रतीक है जो जमींदार ने किया था। जमींदार को जब वह मिट्टी की टोकरी उठाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि गुनाह का भार कितना भारी होता है। यह बुढ़ा की बुद्धिमत्ता दिखाता है।
मुख्य बिंदु
- इस कहानी में बुढ़ा अपने अन्याय को सहन करने के लिए जमींदार को मिट्टी की टोकरी के माध्यम से सीख देती है।
- मिट्टी की टोकरी असल में जमींदार के किए गए अन्याय का प्रतीक है, जो उसे सहन करना बहुत कठिन होता है।
- जब जमींदार को अपने गलत काम का एहसास हो जाता है, तो वह बुढ़ा से क्षमा माँगता है और उसे झोपड़ी वापस कर देता है।
यह अध्याय के पहले 5 पृष्ठों का पूर्वावलोकन है। पूरा अध्याय पाने के लिए नीचे क्लिक करें।
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