Read Chapter 05 Kabir Ke Dohe of NCERT Class 8 Hindi
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Chapter 05 Kabir Ke Dohe PDF Resource
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पाठ 5: कबीर के दोहे
सांच बरابर तप नहीं, झूठ बराबर पापा। जाके हिंदे सांच है, ता हिंदे गुरु आपा। बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जेसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूरा। गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूँ पांचा। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताया। अति का भला न बोलना, अति का भला न चूपा। अति का भला न बसना, अति की भली न धूपा। ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोया। ओसन को सीतल करे, आपहु सीतल होया। निंदक निये राखिए, अंगन कुटी छवाया। बिन पानी साबुन बिना, निमेल करे सुभाया। साधु ऐसा चाहिए, जैसा सुप सुभाया। सार सार को गहि रहे, थोथा देइ उड़ाया। कंबीरा मन पँछी भया, भावे तहवाँ जाया। जो जेसी संगति करे, सो तेसा फल पाया। - कबीर *संदर्भ - कबीर वचनावली, संपादक - अयोध्याSingh उपाध्याय 'हरिऔध'
कवि से परिचय
एक पैसे संत जो कश्मे पर कपड़ा और मन में कविता बुनते-बुनते इतने प्रसिद्ध हो गए कि उनकी कविताएँ आज भी लोग भजनों की तरह सुनते हैं और पाठ्यपुस्तकों में पढ़ते हैं। माना जाता है कि कबीर का जन्म चौदहवीं शताब्दी में काशी में हुआ था। उनकी रचनाएँ मुस्लवात: कबीर ग्रंथावली में संगृहीत हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन की सच्चाई को समझने और अच्छा मनुष्य बनने की प्रेरणा देती हैं।
पाठ से
आइए, अब हम इन दोहों को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियों इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
- स्वर्ग क्या है और नरक क्या है, यह कबीर के इस दोहे में बताया गया है। किसके विषय में बताया गया है?
- श्रम का महत्व
- गुरु का महत्व
- ज्ञान का महत्व
- भक्ति का महत्व
- "अति का भला न बोलना अति का भला न चूपा। अति का भला न बसना अति की भली न धूपा।" इस दोहे का मूल संदेश क्या है?
- हमेशा चुप रहने में ही हमारी भलाई है
- बारिश और धूप से बचना चाहिए
- हर परिस्थिति में संतुलन होना चाहिए
- हमेशा मधुर वाणी बोलनी चाहिए
- "बड़ा हुआ तो क्या हुआ जेसे पेड़ खजूर? पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूरा।" यह दोहा किस जीवन कौशल का विकास करने पर बल देता है?
- समय का सदुपयोग करना
- दूसरों के काम आना
- परिश्रम और लगन से काम करना
- सभी के प्रति उदार रहना
- "ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोया। ओसन को सीतल करे, आपहु सीतल होया।" इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
- लोग हमारी प्रशंसा और सम्मान करने लगते हैं
- दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है
- किसी से विवाद होने पर उसमें जीत हासिल होती है
- सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है
- "सांच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पापा। जाके हिंदे सांच है, ता हिंदे गुरु आपा।" इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
- सत्य और झूठ में कोई अंतर नहीं होता है
- सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं होता है
- बाहरी परिस्थितियों ही जीवन में सफलता तय करती हैं
- सत्य महत्वपूर्ण है लेकिन झूठ भी कभी-कभी आवश्यक होता है
- "निंदक निये राखिए अंगन कुटी छवाया। बिन पानी साबुन बिना, निमेल करे सुभाया।" यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है?
- आलोचकों को दूर रखना चाहिए जिससे मन को शांति प्राप्त हो सके
- विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है
- आलोचकों की निंदा करने वालों की प्रवृत्ति को आदर्श मानना चाहिए
- सोने-चाँदी को पॉलिश करना चाहिए
- "साधु ऐसा चाहिए जैसा सुप सुभाया। सार सार को गहि रहे थोथा देइ उड़ाया।" इस दोहे में 'सुप' किसका प्रतीक है?
- मन की कल्पनाओं का
- सुख-सुविधाओं का
- विवेक और बुद्धि का
- कठोर अनुशासन का
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियों नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए -
(क) "कंबीरा मन पँछी भया भावे तहवाँ जाया। जो जेसी संगति करे, सो तेसा फल पाया।"
(ख) "सांच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पापा। जाके हिंदे सांच है ता हिंदे गुरु आपा।"
सोच-विचार के लिए
पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए -
(क) "गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागूँ पांचा। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताया।"
(ख) "बड़ा हुआ तो क्या हुआ जेसे पेड़ खजूर। जाके हिंदे सांच है ता हिंदे गुरु आपा।"
(ग) "ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोया।" क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही पड़ता है? अपने विचार साझा कीजिए और लिखिए।
शिक्षक की टिप्पणी
कबीर के दोहों में जो सीख दी गई है, उन्हें आप अपने दैनिक जीवन में कैसे लागू कर सकते हैं, यह सोचकर देखिए। उदाहरण के लिए, यदि कोई आपके साथ बुरा व्यवहार करता है, तो क्या आप उसके प्रति मधुर और सहानुभूतिपूर्ण रह सकते हैं? अपने अनुभव से कोई उदाहरण दीजिए।
मुख्य बिंदु
- कबीर 14वीं शताब्दी के महान संत और कवि थे जिन्होंने सत्य, ज्ञान और सदाचार के बारे में सरल और प्रभावशाली दोहे लिखे।
- कबीर के दोहों का मुख्य संदेश यह है कि सत्य का पालन करना, मधुर और विचारशील वाणी बोलना, और दूसरों की मदद करना ही जीवन का सार है।
- वे सिखाते हैं कि जीवन के हर काम में संतुलन जरूरी है - न तो बहुत अधिक बोलना चाहिए और न ही बिल्कुल चुप रहना चाहिए, और बड़े होने से कोई लाभ नहीं है अगर हम दूसरों की मदद न कर सकें।
- कबीर के विचार बताते हैं कि सच्चा गुरु वह है जो हमें सही ज्ञान देता है, और हमारी संगति हमारे भविष्य को निर्धारित करती है।
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