Official NCERT Book for Class 7 Sanskrit: Parishisht 01 Shabdarupani
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Chapter-wise Study Material: Parishisht 01 Shabdarupani
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पाठ 9: शब्दरूपाणि
अजन्ता: (अचु = स्वरा:) स्वरवर्णा: अन्ते येषा ते अजन्ता: ।
पुलिङ्गशब्दा:
'अ'कारान्ता: पुलिङ्गशब्दा:
'अ'कारान्त: (देव = द् + ए + व् + अ) अत्र अन्तिमवर्णः 'अ' अत: 'अ'कारान्त: इति ।
| 'अ'कारान्त: पुलिङ्गा: 'देव'-शब्द: | 'अ'कारान्त: पुलिङ्गा: 'राम'-शब्द: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | देव: | देवौ | देवा: | प्रथमा | राम: | रामौ | रामा: |
| द्वितीया | देवम् | देवौ | देवान् | द्वितीया | रामम् | रामौ | रामान् |
| तृतीया | देवेन | देवाभ्याम् | देवै: | तृतीया | रामेन | रामाभ्याम् | रामै: |
| चतुर्थी | देवाय | देवाभ्याम् | देवेभ्य: | चतुर्थी | रामाय | रामाभ्याम् | रामेभ्य: |
| पञ्चमी | देवात् | देवाभ्याम् | देवेभ्य: | पञ्चमी | रामात् | रामाभ्याम् | रामेभ्य: |
| षष्ठी | देवस्य | देवयो: | देवानाम् | षष्ठी | रामस्य | रामयो: | रामानाम् |
| सप्तमी | देवे | देवयो: | देवेषु | सप्तमी | रामे | रामयो: | रामेषु |
| सम्बोधनम् | हे देव ! | हे देवौ ! | हे देवा: ! | सम्बोधनम् | हे राम ! | हे रामौ ! | हे रामा: ! |
एवम् - बाल, भीम, शिव, कृष्ण, हस्त, पाद इत्यादय:
एवम् - हर, कर, शर, शिक्षक, बुध, चपक इत्यादय:
शिक्षक की टिप्पणी
'अ'कारान्त पुलिङ्गशब्दों के रूप सीखते समय हर विभक्ति में एकवचन, द्विवचन और बहुवचन तीनों को एक साथ देखिए। उदाहरण के लिए, प्रथमा विभक्ति में देव:, देवौ और देवा: - ये तीनों एक ही पंक्ति में हैं। इससे आप आसानी से याद रख सकते हैं कि किस विभक्ति में क्या रूप आता है।
'ई'कारान्ता: पुलिङ्गशब्दा:
'ई'कारान्त: (कवि = क् + अ + व् + इ) अत्र अन्तिमवर्णः 'इ' अत: 'ई'कारान्त: इति ।
| 'ई'कारान्त: पुलिङ्गा: 'कवि'-शब्द: | 'ई'कारान्त: पुलिङ्गा: 'हरि'-शब्द: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | कवि: | कवी | कवय: | प्रथमा | हरि: | हरी | हरय: |
| द्वितीया | कविम् | कवी | कवीन् | द्वितीया | हरिम् | हरी | हरीन् |
| तृतीया | कविना | कविभ्याम् | कविभि: | तृतीया | हरिणा | हरिभ्याम् | हरिभि: |
| चतुर्थी | कविये | कविभ्याम् | कविभ्य: | चतुर्थी | हरये | हरिभ्याम् | हरिभ्य: |
| पञ्चमी | कविये | कविभ्याम् | कविभ्य: | पञ्चमी | हरये | हरिभ्याम् | हरिभ्य: |
| षष्ठी | कवे: | कवयो: | कवीनाम् | षष्ठी | हरे: | हरयो: | हरीनाम् |
| सप्तमी | कवौ | कवयो: | कविषु | सप्तमी | हरौ | हरयो: | हरिषु |
| सम्बोधनम् | हे कवे ! | हे कवी ! | हे कवय: ! | सम्बोधनम् | हे हरे ! | हे हरी ! | हे हरय: ! |
एवम् - मुनि, रवि, कपि, निधि, अमि इत्यादय:
एवम् - गिरि, अरि, ऋषि इत्यादय:
स्त्रीलिङ्गशब्दा:
'आ'कारान्ता: स्त्रीलिङ्गशब्दा:
'आ'कारान्त: (मला = म् + अ + ल् + आ) अत्र अन्तिमवर्णः 'आ' अत: 'आ'कारान्त: इति ।
| 'आ'कारान्त: स्त्रीलिङ्गा: 'माला'-शब्द: | 'आ'कारान्त: स्त्रीलिङ्गा: 'रमा'-शब्द: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | माला | माले | माला: | प्रथमा | रमा | रमे | रमा: |
| द्वितीया | मालाम् | माले | मालान् | द्वितीया | रमाम् | रमे | रमान् |
| तृतीया | मालया | मालाभ्याम् | मालाभि: | तृतीया | रमया | रमाभ्याम् | रमाभि: |
| चतुर्थी | मालायै | मालाभ्याम् | मालाभ्य: | चतुर्थी | रमायै | रमाभ्याम् | रमाभ्य: |
| पञ्चमी | मालायाः | मालाभ्याम् | मालाभ्य: | पञ्चमी | रमायाः | रमाभ्याम् | रमाभ्य: |
| षष्ठी | मालायाः | मालयो: | मालानाम् | षष्ठी | रमायाः | रमयो: | रमानाम् |
| सप्तमी | मालायाम् | मालयो: | मालासु | सप्तमी | रमायाम् | रमयो: | रमासु |
| सम्बोधनम् | हे माले ! | हे माले ! | हे माला: ! | सम्बोधनम् | हे रमे ! | हे रमे ! | हे रमा: ! |
एवम् - सीता, सुधा, लता, गीता, राधा, विद्या इत्यादय:
एवम् - क्षमा, कक्षा, रेखा, रक्षा, शिक्षा इत्यादय:
शिक्षक की टिप्पणी
'आ'कारान्त स्त्रीलिङ्गशब्दों में द्विवचन को ध्यान से देखिए - प्रथमा और द्वितीया दोनों में 'माले' और 'रमे' आते हैं। यह द्विवचन की एक विशेषता है। बहुवचन में प्रथमा और सम्बोधनम् में 'माला:' आता है, लेकिन अन्य विभक्तियों में अलग रूप आते हैं।
'ई'कारान्ता: स्त्रीलिङ्गशब्दा:
'ई'कारान्त: (मति = म् + अ + त् + इ) अत्र अन्तिमवर्णः 'इ' अत: 'ई'कारान्त: इति ।
| 'ई'कारान्त: स्त्रीलिङ्गा: 'मति'-शब्द: | 'ई'कारान्त: स्त्रीलिङ्गा: 'कीर्ति'-शब्द: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | मति: | मती | मतय: | प्रथमा | कीर्ति: | कीर्ती | कीर्तय: |
| द्वितीया | मतिम् | मती | मतीन् | द्वितीया | कीर्तिम् | कीर्ती | कीर्तीन् |
| तृतीया | मत्या | मतिभ्याम् | मतिभि: | तृतीया | कीर्त्या | कीर्तिभ्याम् | कीर्तिभि: |
| चतुर्थी | मत्यै | मतिभ्याम् | मतिभ्य: | चतुर्थी | कीर्त्यै | कीर्तिभ्याम् | कीर्तिभ्य: |
| पञ्चमी | मत्याः | मतिभ्याम् | मतिभ्य: | पञ्चमी | कीर्त्याः | कीर्तिभ्याम् | कीर्तिभ्य: |
| षष्ठी | मत्या: | मतयो: | मतीनाम् | षष्ठी | कीर्त्या: | कीर्तयो: | कीर्तीनाम् |
| सप्तमी | मत्याम् | मतयो: | मतिषु | सप्तमी | कीर्त्याम् | कीर्तयो: | कीर्तिषु |
| सम्बोधनम् | हे मते ! | हे मती ! | हे मतय: ! | सम्बोधनम् | हे कीर्ते ! | हे कीर्ती ! | हे कीर्तय: ! |
एवम् - भ्रान्ति, जामातु, नन्दु इत्यादय:
एवम् - गिरि, अरि, ऋषि इत्यादय:
नपुंसकलिङ्गशब्दा:
'अ'कारान्ता: नपुंसकलिङ्गशब्दा:
'अ'कारान्त: (फल = फ् + अ + ल् + अ) अत्र अन्तिमवर्णः 'अ' अत: 'अ'कारान्त: इति ।
| 'अ'कारान्त: नपुंसका: 'फल'-शब्द: | 'अ'कारान्त: नपुंसका: 'मित्र'-शब्द: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | फलम् | फले | फलानि | प्रथमा | मित्रम् | मित्रे | मित्राणि |
| द्वितीया | फलम् | फले | फलानि | द्वितीया | मित्रम् | मित्रे | मित्राणि |
| तृतीया | फलेन | फलाभ्याम् | फलैः | तृतीया | मित्रेण | मित्राभ्याम् | मित्रैः |
| चतुर्थी | फलाय | फलाभ्याम् | फलेभ्य: | चतुर्थी | मित्राय | मित्राभ्याम् | मित्रेभ्य: |
| पञ्चमी | फलात् | फलाभ्याम् | फलेभ्य: | पञ्चमी | मित्रात् | मित्राभ्याम् | मित्रेभ्य: |
| षष्ठी | फलस्य | फलयो: | फलानाम् | षष्ठी | मित्रस्य | मित्रयो: | मित्राणाम् |
| सप्तमी | फले | फलयो: | फलेषु | सप्तमी | मित्रे | मित्रयो: | मित्रेषु |
| सम्बोधनम् | हे फल ! | हे फले ! | हे फलानि ! | सम्बोधनम् | हे मित्र ! | हे मित्रे ! | हे मित्राणि ! |
एवम् - वन, धन, जान, नयन, पुष्टक, उदान, वात इत्यादय:
एवम् - तर, रिपु, प्रभु, इषु, शत्रु इत्यादय:
'ई'कारान्ता: नपुंसकलिङ्गशब्दा:
'ई'कारान्त: (मति = म् + अ + त् + इ) अत्र अन्तिमवर्णः 'इ' अत: 'ई'कारान्त: इति ।
| 'ई'कारान्त: नपुंसका: 'मति'-शब्द: | 'ई'कारान्त: नपुंसका: 'कीर्ति'-शब्द: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्ति: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | मति: | मती | मतय: | प्रथमा | कीर्ति: | कीर्ती | कीर्तय: |
| द्वितीया | मतिम् | मती | मतीन् | द्वितीया | कीर्तिम् | कीर्ती | कीर्तीन् |
| तृतीया | मत्या | मतिभ्याम् | मतिभि: | तृतीया | कीर्त्या | कीर्तिभ्याम् | कीर्तिभि: |
| चतुर्थी | मत्यै | मतिभ्याम् | मतिभ्य: | चतुर्थी | कीर्त्यै | कीर्तिभ्याम् | कीर्तिभ्य: |
| पञ्चमी | मत्याः | मतिभ्याम् | मतिभ्य: | पञ्चमी | कीर्त्याः | कीर्तिभ्याम् | कीर्तिभ्य: |
| षष्ठी | मत्या: | मतयो: | मतीनाम् | षष्ठी | कीर्त्या: | कीर्तयो: | कीर्तीनाम् |
| सप्तमी | मत्याम् | मतयो: | मतिषु | सप्तमी | कीर्त्याम् | कीर्तयो: | कीर्तिषु |
| सम्बोधनम् | हे मते ! | हे मती ! | हे मतय: ! | सम्बोधनम् | हे कीर्ते ! | हे कीर्ती ! | हे कीर्तय: ! |
एवम् - भ्रान्ति, जामातु, नन्दु इत्यादय:
एवम् - गिरि, अरि, ऋषि इत्यादय:
एवम् - बुद्धि, रचि, शुचि, श्रुति, स्मृति, भक्ति, रीति, स्तुति, जाति, भूमि, गति, स्थिति, रति, कृति, प्रीति, नीति, मूर्ति, युवति, प्रकृति, पाणिनत्, वाणि, शांति इत्यादय:
मुख्य बिंदु
- संस्कृत में शब्दों के रूप तीन लिङ्गों में होते हैं: पुलिङ्ग (पुरुष), स्त्रीलिङ्ग (महिला) और नपुंसकलिङ्ग (न पुरुष, न महिला)। आप किसी शब्द का लिङ्ग जान सकते हैं उसके अंत में देखकर - 'अ' या 'इ' से कौन शब्द खत्म होता है।
- हर शब्द के आठ विभक्तियों के रूप होते हैं: प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी, सप्तमी और सम्बोधनम्। ये आठों विभक्तियां तीन वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) में बदलती हैं।
- 'अ'कारान्त पुलिङ्गशब्दों में प्रथमा एकवचन में 'ः' लगता है (देव:), पर नपुंसकलिङ्ग में नहीं (फलम्)। इसी तरह प्रथमा और द्वितीया नपुंसकलिङ्ग में सदा समान रूप होते हैं।
- 'ई'कारान्त शब्दों के रूप उससे अलग होते हैं क्योंकि उनका अंतिम वर्ण 'इ' है। द्विवचन में प्रायः 'ई' आता है और बहुवचन में 'य' या 'य:' जुड़ता है।
- स्त्रीलिङ्ग 'आ'कारान्त शब्दों में 'आ' को 'आ' ही रहता है, लेकिन षष्ठी एकवचन में 'आयाः' बन जाता है और सप्तमी में 'आयाम्' हो जाता है।
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Official NCERT Textbook PDF: Class 7 Sanskrit Parishisht 01 Shabdarupani
NCERT Book Class 7 Sanskrit Parishisht 01 Shabdarupani
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