Read Chapter 13 Varnamatra Parichayah of NCERT Class 7 Sanskrit
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Chapter 13 Varnamatra Parichayah PDF Resource
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पाठ 13: वर्णमात्रा-परिचय:
श्रद्धा - नमस्ते अध्यापक-महोदय! पष्ठ-कक्षाया: पाठ्यपुस्तके वर्णमालाया: पाठे क्षिचित् संदेह: अस्ति।
वर्णमालाया: पाठस्य प्रारम्भे वयं पूर्वे स्वराणां ह्रस्व-दीर्घौ तथैव व्यञ्जनानां गणनां कृतवन्तः। एतेषां प्रत्येकस्य वर्णस्य आधारेण अधुना कस्यचित् सम्पूर्णस्य शब्दस्य अपि माऽत्रा गणयितुं शक्या इति।
अध्यापक: - श्रद्धे! समीचीनं प्रश्नं पृष्टवती। सामान्यत: अन्य-भारतीय-भाषासु स्वराणां प्राय: द्वे मात्रा अस्तः। परन्तु संस्कृत-भाषायां वस्तुत: सर्वेषां स्वराणां निर्मात्र: अपि कश्चिद् उपभेद: भवति। यथा -
| ह्रस्व: (एकमात्र: - १) | दीर्घ: (द्विमात्र: - २) | प्लुत: (त्रिमात्र: - ३) |
|---|---|---|
| अ | आ | अऍ |
| इ | ई | इइ |
| उ | ऊ | उउ |
| ऋ | ॠ | ॠॠ |
| लृ | - | लृॠ |
१. समानाक्षरणि
| - | ए | एऍ |
|---|---|---|
| - | ऐ | ऐॢ |
| - | ओ | ओऔ |
| - | औ | औऔ |
२. सन्ध्यक्षराणि
| - | ए | एऍ |
|---|---|---|
| - | ऐ | ऐॢ |
| - | ओ | ओऔ |
| - | औ | औऔ |
एत्रप्रकारण संस्कृत-भाषायां आहत्य २२ स्वरा: भवन्ति।
संस्कृत-भाषायां प्लुत-स्वराणो प्रयोग: प्राय: ब्रह्मो सन्दर्भेषु अधिकतरं भवति। यथा -
एप्रकारण संस्कृत-भाषायां आहत्य २२ स्वरा: भवन्ति।
संस्कृत-भाषायां प्लुत-स्वराणो प्रयोग: प्राय: ब्रह्मो सन्दर्भेषु अधिकतरं भवति। यथा -
अध्यापक: - श्रद्धे! समीचीनं प्रश्नं पृष्टवती। सामान्यत: अन्य-भारतीय-भाषासु स्वराणां प्राय: द्वे मात्रा अस्तः। परन्तु संस्कृत-भाषायां वस्तुत: सर्वेषां स्वराणां निर्मात्र: अपि कश्चिद् उपभेद: भवति।
परन्तु संस्कृत-भाषायां वस्तुत: सर्वेषां स्वराणां निर्मात्र: अपि कश्चिद् उपभेद: भवति। अत: एव पाठे पूर्वं सरलार्थैं द्वे मात्रा एव प्रदर्शिते।
[चित्र: कुकु्कड: एकमात्र: हस्व: से शुरू होकर 'उ-उ-उ-उ' और 'उ-उ-उ-उऍ' सहित, पाठ्यपुस्तक में देखें]
सर्वे छात्रा: (उच्चे: सोत्साहम्) -
क्-क् - क् - क्र, उ-उ - उ - उऍ
क्-क् - इ - क्र, उ - क्-क् - उऍ
उ-उ - उ - उऍ
पद्छेद: - चाप: तु वदते मात्रां द्विमात्रं तु एव बायस: शिखी गीति त्रिमात्रं तु नकुल: तु अर्धमात्रक्रम्
भावार्थ: -
- चाप: (नीलकण्ठ:) पक्षी - एकमात्रकालं ध्वनिं करोति। स एकमात्र: ध्वनिः हस्व-स्वर: इब भवति।
- बायस: (काक:) पक्षी - द्विमात्रकालं ध्वनिं करोति। स द्विमात्र: ध्वनिः दीर्घ-स्वर: इब भवति।
- शिखी (मयूर:) पक्षी - त्रिमात्रकालं ध्वनिं करोति। स त्रिमात्र: ध्वनिः प्लुत-स्वर: इब भवति।
- नकुल: पशु: - अर्धमात्रकालं ध्वनिं करोति। स अर्धमात्र: ध्वनिः व्यञ्जनम् इब भवति।
शिक्षक की टिप्पणी
संस्कृत में ह्रस्व स्वर (अ, इ, उ, आदि) एक मात्रा के होते हैं और दीर्घ स्वर (आ, ई, ऊ, आदि) दो मात्रा के होते हैं। किसी शब्द में मात्राओं की संख्या निकालते समय सभी स्वरों को ध्यान से देखिए। उदाहरण के लिए, 'राम:' में र् (आधा मात्रा) + आ (दो मात्रा) + म् (आधा मात्रा) = तीन मात्रा होती हैं।
मात्रा-गणना-क्रीडा
वर्यं प्रत्येके वर्णस्य माऽत्रा ज्ञातव्यत:। अस्य आधारेण अधुना कस्यचित् सम्पूर्णस्य शब्दस्य अपि माऽत्रा गणयितुं शक्याः यथा -
राम: = र् + आ + म् + अ + : = राम:
\( \frac{1}{3} + 2 + \frac{1}{3} + 1 + \frac{1}{3} \) = \( 4 \frac{1}{3} \)मात्रा:
सीता = स् + ई + त् + आ = सीता
\( \frac{1}{3} + 2 + \frac{1}{3} + 2 \) = \( 4 \)मात्रा:
हनूमान् = ह् + अ + न् + ऊ + म् + आ + न् = हनूमान्
\( \frac{1}{3} + 1 + \frac{1}{3} + 2 + \frac{1}{3} + 2 + \frac{1}{3} \) = \( 6 \)मात्रा:
भरत: = भ् + अ + र् + अ + त् + अ + : = भरत:
\( \frac{1}{3} + 1 + \frac{1}{3} + 1 + \frac{1}{3} + 1 + \frac{1}{3} \) = \( 5 \)मात्रा:
सयुक्त-व्यञ्जन-युक्ता: शब्दा: -
कौसल्या = क् + औ + स् + अ + ल् + य् + आ = कौसल्या
\( \frac{1}{3} + 2 + \frac{1}{3} + 1 + \frac{1}{3} + \frac{1}{3} + 2 \) = \( 6 \)मात्रा:
लक्ष्मण: = ल् + अ + क् + ष् + म् + अ + ण् + अ + : = लक्ष्मण:
\( \frac{1}{3} + 1 + \frac{1}{3} + \frac{1}{3} + \frac{1}{3} + 1 + \frac{1}{3} + 1 + \frac{1}{3} \) = \( 6 \)मात्रा:
शिक्षक की टिप्पणी
व्यञ्जन (क्, त्, न् आदि) हमेशा आधी मात्रा (\( \frac{1}{3} \)) लेते हैं, लेकिन जब कोई व्यञ्जन किसी स्वर के साथ आता है, तो उस पूरी इकाई (जैसे 'क' में क् + अ) को गिना जाता है। यह याद रखना जरूरी है कि अकेला व्यञ्जन और स्वर के साथ आने वाला व्यञ्जन अलग-अलग गिने जाते हैं।
मुख्य बिंदु
- संस्कृत में स्वरों के तीन भेद होते हैं: ह्रस्व (एक मात्रा), दीर्घ (दो मात्रा) और प्लुत (तीन मात्रा)।
- व्यञ्जन आधी मात्रा लेते हैं, और स्वर के साथ आने वाले व्यञ्जन-स्वर के संयोग को गिना जाता है।
- किसी शब्द की कुल मात्रा निकालने के लिए सभी व्यञ्जनों और स्वरों की मात्राओं को जोड़ा जाता है।
- छंद और काव्य में मात्राओं की गणना बहुत महत्वपूर्ण होती है, जो शब्दों की लय को तय करती है।
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