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परिशिष्टम् २
धातुरूपाणि
लकारा: (क्रियापदानां रूपाणि)
सामान्यत: संस्कृतभाषायां २०० धातु: सन्ति। तेषु: 'तिड्' प्रत्ययान् योजयां: चेत् ते एव तिडन्ता: भवन्ति। तिड्-प्रत्या: येषां अन्ते सन्ति ते तिडन्ता:। अथवा लकारा: इति वक्तु शक्नुम:।
धातु: त्रिप्रकारक: भवन्ति -
१. परस्मैपदि-धातु: २. आत्मनेपदि-धातु: ३. उभयपदि-धातु:
परस्मैपदि-धातूनां लट्-लकारस्य रूपाणि (वर्तमानकाल:)
लट्-लकार: (वर्तमानकाल:)
| पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुष: | पठति | पठत: | पठन्ति | प्रथमपुरुष: | बाल: पठति | बालो पठत: | बाला: पठन्ति |
| मध्यमपुरुष: | पठसि | पठथ: | पठथ | मध्यमपुरुष: | त्वं पठसि | युवां पठथ: | यूयं पठथ |
| उत्तमपुरुष: | पठामि | पठाव: | पठाम: | उत्तमपुरुष: | अहं पठामि | आवां पठाव: | वयं पठाम: |
एवम् - लिखु, खादु, वदु, मिलु, हसु, चलु, त्यजु, स्म (स्मर), पा (पिबु), क्रीडु, नी (नयु), प्रच् (पृच्छु), भू (भवु), दूश (पश्यु) गम (गच्छ) इत्यादय:
विशेष-धातु:
| 'अस्'-धातु: | 'कृ'-धातु: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुष: | अस्ति | स्त: | सन्ति | प्रथमपुरुष: | करोति | कुरत: | कुर्वन्ति |
| मध्यमपुरुष: | असि | स्थ: | स्थ | मध्यमपुरुष: | करोषि | कुरुथ: | कुरुथ |
| उत्तमपुरुष: | अस्मि | स्व: | स्म: | उत्तमपुरुष: | करोमि | कुर्व: | कुर्म: |
| 'श्रु'-धातु: | 'दा'-धातु: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुष: | शृणोति | शृणुत: | शृणुवन्ति | प्रथमपुरुष: | ददाति | दत्त: | ददति |
| मध्यमपुरुष: | शृणोषि | शृणुथ: | शृणुथ | मध्यमपुरुष: | ददासि | दत्थ: | दत्थ |
| उत्तमपुरुष: | शृणोमि | शृणु्व: | शृणु्म: | उत्तमपुरुष: | ददामि | दद्व: | दद्म: |
आत्मनेपदिधातूनां लट्-लकारस्य रूपाणि (वर्तमानकाल:)
लट्-लकार: (वर्तमानकाल:)
| पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुष: | भाषते | भाषेते | भाषन्ते | प्रथमपुरुष: | स: भाषते | तो भाषेते | ते भाषन्ते |
| मध्यमपुरुष: | भाषसे | भाषेथे | भाषध्वे | मध्यमपुरुष: | त्वं भाषसे | युवां भाषेथे | यूयं भाषध्वे |
| उत्तमपुरुष: | भाषे | भाषावहे | भाषामहे | उत्तमपुरुष: | अहं भाषे | आवां भाषावहे | वयं भाषामहे |
एवम् - खादु, वदु, प्रच् (पृच्छु), मिलु, हसु, चलु, त्यजु, स्म (स्मर), पा (पिबु), क्रीडु, नी (नयु), प्रच् (पृच्छु), भू (भवु), दूश (पश्यु) गम (गच्छ)। इत्यादय:
विशेष-धातु:
| 'अस्'-धातु: (भू इति आदश: भवति) | 'कृ'-धातु: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुष: | भविष्यति | भविष्यते | भविष्यन्ते | प्रथमपुरुष: | करिष्यते | करिष्येते | करिष्यन्ते |
| मध्यमपुरुष: | भविष्यसे | भविष्येथे | भविष्यध्वे | मध्यमपुरुष: | करिष्यसे | करिष्येथे | करिष्यध्वे |
| उत्तमपुरुष: | भविष्ये | भविष्यावहे | भविष्यामहे | उत्तमपुरुष: | करिष्ये | करिष्यावहे | करिष्यामहे |
परस्मैपदि-धातूनां लोट्-लकारस्य रूपाणि (भविष्यत्काल:)
लोट्-लकार: (भविष्यत्काल:)
| पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुष: | पठतु | पठतां | पठन्तु: | प्रथमपुरुष: | बाल: पठतु | बालो पठतां | बाला: पठन्तु: |
| मध्यमपुरुष: | पठ | पठतम् | पठत | मध्यमपुरुष: | त्वं पठ | युवां पठतम् | यूयं पठत |
| उत्तमपुरुष: | पठानि | पठाव | पठाम | उत्तमपुरुष: | अहं पठानि | आवां पठाव | वयं पठाम |
एवम् - लिखु, खादु, वदु, प्रच् (पृच्छु), मिलु, क्रीडु, हसु, चलु, त्यजु, स्म (स्मर), पा (पिबु), नी (नयु), प्रच् (पृच्छु), भू (भवु), दूश (पश्यु) गम (गच्छ)। इत्यादय:
विशेष-धातु:
| 'अस्'-धातु: | 'कृ'-धातु: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुष: | अस्तु | स्तां | सन्तु | प्रथमपुरुष: | करोतु | कुरतां | कुर्वन्तु |
| मध्यमपुरुष: | एधि | स्तम् | स्त | मध्यमपुरुष: | कुरु | कुरुतम् | कुरुत |
| उत्तमपुरुष: | असानि | असाव | असाम | उत्तमपुरुष: | करवाणि | करवाव | करवाम |
| 'श्रु'-धातु: | 'दा'-धातु: | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | पुरुष: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुष: | शृणोतु | शृणुतां | शृणुवन्तु | प्रथमपुरुष: | ददातु | दत्तां | ददतु |
| मध्यमपुरुष: | शृणु | शृणुतम् | शृणुत | मध्यमपुरुष: | देहि | दत्तम् | दत्त |
| उत्तमपुरुष: | शृणवाणि | शृणवाव | शृणवाम | उत्तमपुरुष: | दद्यां | दद्याव | दद्याम |
शिक्षक की टिप्पणी
धातु के विभिन्न रूपों को याद रखने के लिए पहले धातु को पहचानिए। फिर देखिए कि वह परस्मैपदी है या आत्मनेपदी, और किस लकार में है। उसके बाद पुरुष और वचन के अनुसार सही रूप चुनिए। नियम को समझने से रटना आसान हो जाता है।
मुख्य बिंदु
- संस्कृत में तीन प्रकार की धातुएँ होती हैं: परस्मैपदी, आत्मनेपदी और उभयपदी।
- लट् लकार वर्तमान काल को दर्शाता है, और लोट् लकार भविष्यत् काल को दर्शाता है।
- प्रत्येक लकार में धातु तीनों पुरुषों (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और तीनों वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) में बदलती है।
- विशेष धातुएँ जैसे 'अस्' (होना), 'कृ' (करना), 'श्रु' (सुनना) और 'दा' (देना) अपने नियम के अनुसार रूप बनाती हैं।
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