Read Chapter 06 Kridama Vayam Shlokantyaksharim of NCERT Class 7 Sanskrit
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Chapter 06 Kridama Vayam Shlokantyaksharim PDF Resource
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पाठ 6: क्रीडामं वयं श्लोकान्त्यक्षरम्
[चित्र: किशोरियों की बातचीत, पाठ्यपुस्तक में देखें]
सखि दीपिके !
वयम् अधुना क्रीडितुम् अभिलषाम: |
अरे भारति ! बहि: वृष्टि: अस्ति, कथ क्रीडाम: ?
वृष्टि: अस्तु नाम | इच्छा आस्ति चेत् क्रीडाम: | बहिर्मनस्य आवश्यकता एव नास्ति | एषा नूतना क्रीडा अस्ति भो: !
किं अन्त्यक्षरी क्रीडा ? अहमपि क्रीडामि |
वृयं गणध्वय रचयाम: |
प्रथमगणस्य नाम - 'ज्ञानमाला' एवं च द्वितीयगणस्य नाम - 'रत्नमाला' | आदो प्रथमगणस्य सदस्य: एके पर्थं गायति | तस्य पञ्चाष्य अन्तिमं व्यञ्जनवर्णं द्वितीयगणस्य सदस्य: सद्स्या वा अन्ये श्लोके गायति, एवं क्रमश: क्रीडा प्रचलति |
शिक्षक की टिप्पणी
इस पाठ में दो लड़कियाँ एक खेल के बारे में बात कर रही हैं जिसे 'अन्त्यक्षरी' कहते हैं। यह एक परंपरागत भारतीय खेल है जहाँ एक व्यक्ति किसी श्लोक को गाता है, और दूसरा व्यक्ति उस श्लोक के अंतिम व्यंजन से शुरू होने वाला एक नया श्लोक गाता है। जब आप संस्कृत में श्लोक पढ़ते समय इस प्रकार के शब्द खेल देखते हैं, तो याद रखें कि 'अन्त्यक्षरी' का अर्थ है 'अंतिम अक्षर'।
तदा वृत्तिश्च कीर्तिश्च लक्ष्मीवाणी यशस्विनी | तच्जानं परा शान्त्यैदा विधा भवेतव || ५ ||
पदच्छेद: तदा वृत्ति: च कीर्ति: च लक्ष्मी: वाणी यशस्विनी | तत्-जानम् परा शान्ति: एदा विधा भवेतव ||
अन्वय: यदा विधा भवेतव, तदा वृत्ति:, च कीर्ति:, लक्ष्मी:, वाणी यशस्विनी (च) परा शान्ति: एदा (च) तत्-जानम् ||
भावार्थ: दुः: जन: विधाया: उपयोगं कलहार्थ क्रोति | धनस्य उपयोगम् अहङ्कारार्थ क्रोति, सामर्थ्य उपयोगम् अन्येषा पीडनार्थ च क्रोति, किंतु सज्जनस्य स्वभाव: एतस्य विपरीत: भवति | ते अस्यां भूमौ भविष्यन्ति: सर्वे लोका: सुखी एवं च समृद्धा: | अतएव यदि कोऽपि व्यक्ति: विधिम् (अर्थात् शिक्षा) प्राप्त: भवति, तर्हि तेन सर्वस्य कल्याणं कर्तव्यम् | विद्याबहुजना: एव सर्वत्र सम्मानिता: भवन्ति |
शिक्षक की टिप्पणी
इस श्लोक में कहा गया है कि जब कोई व्यक्ति शिक्षा (विधा) प्राप्त करता है, तो उसके पास धन, ख्याति, ज्ञान और शांति आती है। संस्कृत में 'विधा' का अर्थ केवल किताबी ज्ञान नहीं है - यह उचित आचरण और सदगुणों को सीखना भी है। जब आप यह श्लोक पढ़ते हैं, तो ध्यान दें कि कैसे विभिन्न लाभ (वृत्ति, कीर्ति, लक्ष्मी) एक साथ सूचीबद्ध हैं।
विधा विवादाय धनं मदाय, शक्ति: परेषां परिपीडनाय | खलस्य साधोर्विषरीतिमेतत्, ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय || ३ || (य)
पदच्छेद: विधा विवादाय धनं मदाय शक्ति: परेषां परिपीडनाय | खलस्य साधोर्विष-रीति-मेतत्, ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ||
अन्वय: यदा विधा भवेतव, तदा (खलस्य) विधा विवादाय, (खलस्य) धनं मदाय, (खलस्य) शक्ति: परेषां परिपीडनाय (भवति) | एतत् साधोर्विष-रीति-मेतत् (अस्ति): (साधोर्) ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय (भवति) |
भावार्थ: खलस्य विधा विवादाय भवति | तस्य धनं मदाय भवति | शक्ति: परेषां पीडनाय भवति | किंतु साधोर्विषयम् एतत् विपरीतम् | साधोर्ज्ञानम् ज्ञानाय एव, धनं दानाय च, शक्ति: रक्षणाय च भवति | एतद् एव खल-साधु-भेद: |
यदि त्वं विधाम् अर्जयिषि तर्हि त्वं उद्योग, यश:, धन:, कीर्तिप्रद वाणी, वास्तविके ज्ञानम् उत्तमा शान्ति च लप्स्यसे - सदस्य: सदस्या वा अन्ये श्लोके गायति, एवं क्रमश: क्रीडा प्रचलति |
मुख्य बिंदु
- अन्त्यक्षरी एक परंपरागत भारतीय खेल है जिसमें खिलाड़ी एक श्लोक गाते हैं और दूसरा खिलाड़ी उसी के अंतिम व्यंजन से शुरू होने वाला नया श्लोक गाता है।
- संस्कृत ग्रंथों में विधा (शिक्षा) को सर्वोत्तम धन माना गया है, क्योंकि यह व्यक्ति को ज्ञान, सम्मान और आत्मविश्वास प्रदान करती है।
- एक सज्जन व्यक्ति अपने विद्या, धन और शक्ति का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करता है, जबकि दुष्ट व्यक्ति इनका दुरुपयोग करता है।
- खेल और शिक्षा दोनों ही जीवन के महत्वपूर्ण अंग हैं क्योंकि खेल से शरीर मजबूत होता है और शिक्षा से मन विकसित होता है।
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