Official NCERT Book for Class 4 Hindi: Chapter 02 Bagiche Ka Ghongha
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Chapter-wise Study Material: Chapter 02 Bagiche Ka Ghongha
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पाठ 2: बगीचे का घोंघा
ऊपर दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
- यह कौन-सा जीव है?
- आपने इसे कहाँ देखा है?
- आपने इसे किस मौसम में अधिक देखा है?
- आपको अपने घर और विद्यालय में कौन-कौन से जीव दिखाई देते हैं?
- घोंघा उन जीवों से किस बात में भिन्न है?
बहुत समय पहले की बात है। एक बगीचे में एक घोंघा रहता था। जानते हो घोंघा वैसा होता है?
बगीचा बहुत छोटा और मुंदर था। घोंघे ने अपना सारा जीवन उसी बगीचे में बिताया था। उसे बगीचे के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँचने में पूरे दो दिन लगते थे। इतने समय तक वहाँ रहने के कारण घोंघा बगीचे का कोना-कोना पहचान गया था।
पर कभी-कभी घोंघे को लगता था, इस बगीचे के बाहर क्या होगा? कैसी होती होगी बाहर की दुनिया?
बगीचे में वह बच्चों के खेलने की जगह थी। पर घोंधे ने तो सोचा ही नहीं था कि इतनी बड़ी जगह भी हो सकती है। "वाह! दुनिया सचमुच कितनी बड़ी है", घोंधे ने कहा।
उसी समय खड़-खड़ की धवनि आई। घोंधे को लगा कि पूरा आकाश ढँक गया है। वह डर के मारे जोर से चिल्लाया, "उई!" फिर वह अपने रुप हँसमे लगा। उसने देखा कि एक सूखा पत्ता उसके ऊपर आ गिरा था।
"वाह! दुनिया तो कितनी मजेदार है", घोंधे ने कहा। वह उस मुखी-भूरी पत्ती के नीचे से बाहर निकल गया।
शोड़ा आगे एक बड़ा-सा पत्थर पड़ा हुआ था। घोंधे को लगा यह कोई पहाड़ होगा। वह झट से उस पर चढ़ गया और देखने लगा।
घोंधा छंद में घुसा और जल्दी ही बाहर निकल आया। बाहर आते ही घोंधा चकित रह गया। बाहर आते ही घोंधा ने पहली बार लाल चीँटों को देखा। जिसमें उसका सर चकरा गया अभी तक तो घोंधे ने पोंधा या छोटे पेड़ ही देख थे। पर यहाँ पर तो एक ऐसा लंबा पेड़ था जो पूरे आसमान तक जाता था। बेचारे घोंधे ने कभी खुज़र का पेड़ नहीं देखा था।
वहाँ एक और पेड़ था जो इतना बड़ा था कि घोंधा उसके एक छोर से दूसरे छोर तक भी नहीं देख पाता था। बड़ के पेड़ से जो उसका पाला पड़ गया था, इसलिए! घोंधे की आँखें आश्चर्य से और भी खुल गई। उसने अपना सामान अपने शंख में बाँध लिया। अगले दिन सुरज निकलने के पहले ही घोंधा निकल पड़ी बगीचा पीछे छोड़ दिया।
घोंधा छंद में घुसा और जल्दी ही बाहर निकल आया। घोंधा अपने जीवन में पहली बार लाल चीँटों को देखा। वे अपने लंबे-पतले पाँवों से इधर-उधर आ-जा रहे थे।
उसने देखा कि एक गिलहरी फुदकक-फुदककर एक पेड़ पर चढ़ गई। उसने देखा कि दूर एक गोद लुहकती हुई जा रही है।
शिक्षक की टिप्पणी
कहानी में घोंघा छोटे बगीचे से बाहर की दुनिया देखता है। ध्यान दें कि घोंघा नई चीजों के बारे में कैसे सोचता है - उसे एक छोटा पत्थर 'पहाड़' जैसा लगता है। यह दिखाता है कि चीजें कितनी बड़ी हैं यह हमारे अनुभव पर निर्भर करता है। घोंघे के लिए बगीचा बहुत बड़ा था, लेकिन असली दुनिया उससे कहीं बड़ी थी।
बातचीत के लिए
- घोंधे का बगीचे (उद्यान) के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुँचने में दो दिन क्यों लगते थे?
- आप अपने विद्यालय कैसे जाते हैं और आपको कितना समय लगता है?
- घोंधा उद्यान से बाहर क्यों जाना चाहता था?
- आपका कहाँ-कहाँ जाने का मन करता है?
- आप घूमने के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं और किसके साथ जाते हैं?
- एकलव्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'छीका-छीक' से साभार
पाठ के भीतर
नीचे दिए गए प्रश्नों के सटीक उत्तर के सामने सूरज का चित्र (☀) बनाइए -
- घोंधा उद्यान से बाहर क्यों जाना चाहता था?
- (क) उसे उद्यान में अच्छा नहीं लगता था।
- (ख) वह बाहर का जीवन देखना चाहता था।
- (ग) उसे उद्यान सुंदर नहीं लगता था।
- (घ) उसे उद्यान बहुत छोटा लगता था।
- घोंधे को बड़ा-सा पत्थर पहाड़ जैसा क्यों लगा होगा?
- (क) पत्थर पहाड़ की तरह बहुत ही बड़ा था।
- (ख) घोंधे ने उद्यान में पत्थर जैसी बड़ी वस्तु कभी नहीं देखी थी।
- (ग) घोंधे को पत्थर पर चढ़कर दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था।
- (घ) पत्थर की आकृति पहाड़ जैसी थी।
शिक्षक की टिप्पणी
एक छोटे से घोंघे की नज़र में छोटी चीजें कितनी बड़ी दिखाई देती हैं। जब आप किसी नई जगह जाते हैं तो वह कैसी लगती है? पहली बार देखी गई चीजें हमें हमेशा बड़ी या अलग लगती हैं। कहानी का यह संदेश समझिए कि दुनिया कितनी विशाल और दिलचस्प है।
मुख्य बिंदु
- घोंघा एक छोटे बगीचे में रहता था और सोचता था कि दुनिया कैसी होगी।
- बगीचे से बाहर निकलते ही घोंधे को पत्थर, पेड़, चीँटियाँ और गिलहरी जैसी नई चीजें दिखीं।
- घोंधे के लिए छोटी चीजें बहुत बड़ी दिखाई देती थीं क्योंकि वह खुद बहुत छोटा था।
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