CBSE Class 10 Hindi अपठित गद्यांश, व्याकरण और लेखन Worksheet Set 07

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Questions

खंड क: अपठित गद्यांश

नीचे दिए गए अपठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

विद्वान लोग नम्रता को स्वतंत्रता की जननी मानते हैं। आत्म-संस्कार हेतु स्वतंत्रता आवश्यक है। मर्यादापूर्वक जीवन व्यतीत करने के लिए आत्म-निर्भरता आवश्यक है। आत्म-मर्यादा हेतु आवश्यक है कि हम बड़ों से सम्मानपूर्वक तथा छोटों और बराबर वालों के साथ कोमलता का व्यवहार करें। युवाओं को याद रखना चाहिए कि उनका ज्ञान कम है। वे अपने लक्ष्य से पीछे हैं तथा उनकी आकांक्षाएँ उनकी योग्यता से अधिक हैं। सभी लोग युवाओं से कुशल आचरण और विनम्रता की उम्मीद करते हैं।

नम्रता का अर्थ दूसरों का मुँह ताकना नहीं है। इससे तो प्रज्ञा मंद पड़ जाती है। संकल्प क्षीण होता है, विकास रुक जाता है तथा निर्णय-क्षमता नहीं आती। मनुष्य को अपना भाग्य-विधाता स्वयं होना चाहिए। हमेशा याद रखो, अपने फैसले तुम्हें स्वयं ही करने होंगे। विश्वासपात्र मित्र भी तुम्हारी ज़िम्मेदारी नहीं ले सकता। हमें अनुभवी लोगों के अनुभवों से लाभ उठाना चाहिए, लेकिन हमारे निर्णयों तथा हमारे विचारों से ही हमारी रक्षा व पतन होगा। हमें नज़रें तो नीचे रखनी हैं, लेकिन सामने का रास्ता भी देखना है। हमारा व्यवहार कोमल तथा लक्ष्य उच्च होना चाहिए। हमारी प्रवृत्ति ऐसी होनी चाहिए कि संक्रमणकाल में भी हम स्वयं को साधारण रख पाएँ। वही मनुष्य कर्मक्षेत्र में श्रेष्ठ और उत्तम रहते हैं, जिनमें बुद्धि, चतुराई तथा दृढ़ निश्चय होता है।

Q1. प्रस्तुत गद्यांश में मूलतः स्वतंत्रता की जननी किसे माना गया है तथा मनुष्य को परतंत्रता क्यों स्वीकार्य नहीं है? [1 mark]

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Answer: स्वतंत्रता की जननी नम्रता को माना गया है। परतंत्रता इसलिए स्वीकार्य नहीं है कि आत्म-संस्कार और मर्यादापूर्ण जीवन के लिए स्वतंत्रता तथा आत्म-निर्भरता आवश्यक है।

Teacher's Note:
1. उत्तर गद्यांश की पहली दो पंक्तियों में मिलता है।
2. उत्तर में दोनों बातें अलग-अलग लिखिए।

Q2. मानव को अपने आचरण और व्यवहार में कैसा होना चाहिए? [1 mark]

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Answer: मानव को बड़ों के साथ सम्मानपूर्ण तथा छोटों और बराबर वालों के साथ कोमलता का व्यवहार करना चाहिए। उसका आचरण कुशल और विनम्र होना चाहिए।

Teacher's Note:
1. गद्यांश के पहले अनुच्छेद में आत्म-मर्यादा की बात कही गई है।
2. बड़ों, छोटों और बराबर वालों के प्रति व्यवहार अलग बताइए।

Q3. हमारी प्रवृत्ति कैसी होनी चाहिए? [1 mark]

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Answer: हमारी प्रवृत्ति ऐसी होनी चाहिए कि संक्रमणकाल में भी हम स्वयं को साधारण रख पाएँ। हमारा व्यवहार कोमल तथा लक्ष्य उच्च होना चाहिए।

Teacher's Note:
1. यह बात दूसरे अनुच्छेद के अंत में कही गई है।
2. संक्रमणकाल का अर्थ परिवर्तन का कठिन समय है।

Q4. मनुष्य को अपना भाग्य-विधाता स्वयं क्यों होना चाहिए? [1 mark]

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Answer: क्योंकि अपने फैसले हमें स्वयं ही करने होते हैं। हमारे निर्णयों और विचारों से ही हमारी रक्षा या पतन होता है, इसलिए दूसरों पर निर्भर रहना ठीक नहीं।

Teacher's Note:
1. भाग्य-विधाता का अर्थ अपना भाग्य बनाने वाला है।
2. निर्णय और उसके परिणाम को जोड़कर उत्तर दीजिए।

Q5. विश्वासपात्र व्यक्ति भी हमारी ज़िम्मेदारी क्यों नहीं ले सकता? [1 mark]

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Answer: क्योंकि हमारे निर्णयों के परिणाम हमें ही भोगने पड़ते हैं। कोई दूसरा, चाहे कितना भी विश्वासपात्र हो, हमारे फैसलों की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर नहीं ले सकता।

Teacher's Note:
1. यह पंक्ति दूसरे अनुच्छेद में है।
2. उत्तर को अपने शब्दों में लिखिए।

Q6. प्रस्तुत गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक लिखिए। [1 mark]

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Answer: नम्रता और आत्म-निर्भरता (अथवा 'नम्रता: स्वतंत्रता की जननी')।

Teacher's Note:
1. शीर्षक छोटा और गद्यांश के मूल भाव को बताने वाला होना चाहिए।
2. गद्यांश का केंद्र नम्रता और अपने निर्णय स्वयं लेना है।

खंड ख: व्याकरण और लेखन

Q7. शब्द किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। [2 marks]

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Answer: विभिन्न ध्वनियों का ऐसा स्वतंत्र एवं सार्थक समूह जो एक निश्चित अर्थ का बोध कराता है, शब्द कहलाता है। जैसे: कलम, पुस्तक, गगन।

Teacher's Note:
1. शब्द में ध्वनियों का सार्थक होना आवश्यक है।
2. परिभाषा के साथ कम से कम दो उदाहरण दीजिए।

Q8. रचना के आधार पर शब्द के कितने भेद हैं? नाम लिखकर एक-एक उदाहरण दीजिए। [2 marks]

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Answer: रचना के आधार पर शब्द के तीन भेद हैं:

1. रूढ़ शब्द: जिनके खंडों का अर्थ नहीं होता, जैसे कल, पल।

2. यौगिक शब्द: जो दो सार्थक शब्दों के मेल से बनते हैं, जैसे विद्यालय, देशवासी।

3. योगरूढ़ शब्द: जो यौगिक होकर भी किसी विशेष अर्थ में रूढ़ हो गए हों, जैसे पंकज, दशानन।

Teacher's Note:
1. रूढ़ शब्द के टुकड़े करने पर सार्थक खंड नहीं मिलते।
2. योगरूढ़ शब्द सामान्य अर्थ की जगह विशेष अर्थ बताते हैं।

Q9. शब्द और पद में अंतर स्पष्ट कीजिए। [2 marks]

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Answer: जब कोई शब्द किसी वाक्य से अलग होता है, तब वह शब्द कहलाता है। वही शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर कोई व्याकरणिक प्रकार्य करता है, तब पद कहलाता है, जैसे 'राम' शब्द है और 'राम ने फल खाया' में 'राम' पद है।

Teacher's Note:
1. शब्द स्वतंत्र इकाई है और पद वाक्य में प्रयुक्त रूप है।
2. उदाहरण देने से अंतर साफ़ होता है।

Q10. निम्नलिखित समस्तपदों का विग्रह कर समास का नाम लिखिए: (क) भारतरत्न (ख) हथकड़ी (ग) हस्तलिखित (घ) विषधर (ङ) देश-विदेश (च) पंचतंत्र [6 marks]

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Answer:

(क) भारत का रत्न: तत्पुरुष समास

(ख) हाथ की कड़ी: तत्पुरुष समास

(ग) हाथ से लिखित: तत्पुरुष समास

(घ) विष को धारण करने वाला: तत्पुरुष समास

(ङ) देश और विदेश: द्वंद्व समास

(च) पाँच तंत्रों का समूह: द्विगु समास

Teacher's Note:
1. विग्रह में विभक्ति चिह्न (का, से, को) जोड़ने पर तत्पुरुष समास पहचाना जाता है।
2. संख्यावाचक पूर्वपद होने पर द्विगु समास होता है।

Q11. निम्नलिखित विग्रह-युक्त पदों के समस्तपद लिखकर समास का नाम बताइए: (क) घन के समान श्याम (ख) रोग से ग्रस्त (ग) जितना संभव हो (घ) तीन फलों का समाहार (ङ) नीला है जो कमल [5 marks]

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Answer:

(क) घनश्याम: कर्मधारय समास

(ख) रोगग्रस्त: तत्पुरुष समास

(ग) यथासंभव: अव्ययीभाव समास

(घ) त्रिफला: द्विगु समास

(ङ) नीलकमल: कर्मधारय समास

Teacher's Note:
1. उपमान-उपमेय या विशेषण-विशेष्य संबंध होने पर कर्मधारय समास होता है।
2. 'यथा' जैसे अव्यय से बने पद अव्ययीभाव समास के होते हैं।

Q12. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके पुनः लिखिए: (क) क्या आप खाना खाए हैं? (ख) तुम्हारा भाई मेहनत से पढ़ते है। (ग) एक फूलों की माला लेते आइए। (घ) कृपया मेरी बात सुनने की कृपा करें। (ङ) क्या आप उसकी बात समझ लेते हो? [5 marks]

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Answer:

(क) क्या आपने खाना खाया है?

(ख) तुम्हारा भाई मेहनत से पढ़ता है।

(ग) फूलों की एक माला लेते आइए।

(घ) कृपया मेरी बात सुनिए। (अथवा: मेरी बात सुनने की कृपा करें।)

(ङ) क्या आप उसकी बात समझ लेते हैं?

Teacher's Note:
1. वाक्य में कारक, वचन, संख्यावाचक शब्द और पुनरुक्ति की जाँच कीजिए।
2. 'कृपया' और 'कृपा करें' एक साथ प्रयोग करना पुनरुक्ति का दोष है।

Q13. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: (क) आड़े हाथों लेना (ख) रंग दिखाना (ग) ज़मीन पर पाँव न रखना [3 marks]

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Answer:

(क) कड़ी फटकार लगाना: अध्यापक ने झूठ बोलने वाले छात्र को आड़े हाथों लिया।

(ख) प्रभाव या असर दिखाना: कठिन परिश्रम ने आखिर रंग दिखाया और वह प्रथम आई।

(ग) बहुत घमंड करना: पद मिलते ही वह ज़मीन पर पाँव नहीं रखता।

Teacher's Note:
1. मुहावरे का अर्थ लाक्षणिक होता है, शाब्दिक नहीं।
2. वाक्य ऐसा बनाइए जिससे अर्थ स्पष्ट हो जाए।

Q14. उचित मुहावरे से रिक्त स्थान भरिए, जिससे अर्थ स्पष्ट हो: (क) विशेषज्ञ विद्वान को समझाना ऐसा ही है जैसे ______। (ख) गणित का गृहकार्य करना मुझे ______ प्रतीत होता है। (ग) मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में हमेशा ______ चाहिए। (घ) वज़ीर अली बरसों से हमारी ______ झोंक रहा है। [4 marks]

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Answer:

(क) भैंस के आगे बीन बजाना

(ख) टेढ़ी खीर

(ग) कमर कसकर तैयार रहना

(घ) आँखों में धूल

Teacher's Note:
1. प्रत्येक वाक्य का भाव समझकर मुहावरा चुनिए।
2. मुहावरा वाक्य के व्याकरण में ठीक बैठना चाहिए।

Q15. संकेत-बिंदुओं के आधार पर 'आशा ही जीवन है, निराशा ही मृत्यु' विषय पर लगभग 80 शब्दों का अनुच्छेद लिखिए। (संकेत-बिंदु: आशा क्या है; निराशा से हानि; आशा की शक्ति) [5 marks]

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Answer:

आशा ही जीवन है, निराशा ही मृत्यु

आशा वह भाव है जो कठिन समय में भी मनुष्य को आगे बढ़ने की शक्ति देता है। जो व्यक्ति आशावान रहता है, वह हर असफलता से सीखकर फिर प्रयास करता है। निराशा इसके विपरीत मन को शिथिल कर देती है और उत्साह को मार देती है। निराश व्यक्ति सामने खड़े अवसर को भी नहीं पहचान पाता। आशा की शक्ति से ही किसान सूखे के बाद फिर बीज बोता है और विद्यार्थी असफल होकर भी दोबारा परीक्षा देता है। इसलिए जीवन में आशा का दीपक सदा जलाए रखना चाहिए।

Teacher's Note:
1. अनुच्छेद में तीनों संकेत-बिंदु क्रम से आने चाहिए।
2. भाषा सरल और वाक्य छोटे रखिए।

Q16. विद्यालय में कंप्यूटर-शिक्षा की व्यवस्था करने के लिए प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना-पत्र लिखिए। [5 marks]

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Answer:

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
सरकारी उच्च विद्यालय, जयपुर।

विषय: विद्यालय में कंप्यूटर-शिक्षा की व्यवस्था हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं कक्षा दसवीं का छात्र हूँ। आज के युग में कंप्यूटर का ज्ञान प्रत्येक विद्यार्थी के लिए आवश्यक हो गया है, परंतु हमारे विद्यालय में कंप्यूटर की शिक्षा की व्यवस्था नहीं है।

अतः आपसे प्रार्थना है कि विद्यालय में कंप्यूटर प्रयोगशाला बनवाकर प्रशिक्षित शिक्षक की नियुक्ति करवाने की कृपा करें। इससे सभी छात्र लाभान्वित होंगे।

धन्यवाद सहित।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
अमित कुमार
कक्षा दसवीं
दिनांक: 12 नवंबर 2026

Teacher's Note:
1. औपचारिक पत्र में प्रेषक, विषय, संबोधन और अंत में शिष्टाचार सूचक पंक्ति आवश्यक है।
2. पत्र में समस्या और उसका समाधान दोनों स्पष्ट लिखिए।

Q17. अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को निर्धन छात्र को विद्यालय से आर्थिक सहायता दिलाने के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए। [5 marks]

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Answer:

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
सरकारी उच्च विद्यालय, जयपुर।

विषय: आर्थिक सहायता हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं कक्षा दसवीं का छात्र हूँ। मेरे पिता एक छोटे दुकानदार हैं और हाल की बीमारी के कारण हमारी आर्थिक स्थिति बहुत कमज़ोर हो गई है। मैं पढ़ाई में अच्छा हूँ और पिछली परीक्षा में मेरे अंक 85 प्रतिशत थे।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि मुझे विद्यालय की ओर से शुल्क-माफ़ी या आर्थिक सहायता प्रदान करने की कृपा करें, ताकि मैं अपनी पढ़ाई जारी रख सकूँ।

धन्यवाद सहित।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
रोहित शर्मा
कक्षा दसवीं
दिनांक: 12 नवंबर 2026

Teacher's Note:
1. प्रार्थना-पत्र में अपनी स्थिति और माँग विनम्रता से लिखी जाती है।
2. सच्चे कारण और अच्छे प्रदर्शन का उल्लेख पत्र को प्रभावी बनाता है।

Q18. एक पुस्तक विक्रेता के लिए आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए। (लगभग 40 शब्द) [4 marks]

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Answer:

ज्ञान-सागर पुस्तक भंडार

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Teacher's Note:
1. विज्ञापन में आकर्षक नारा, विशेषताएँ, छूट और पता होना चाहिए।
2. भाषा संक्षिप्त और प्रभावशाली रखिए।

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