CBSE Class 9 Hindi dukh ka adhikar Assignment

Class 9 Hindi Practice Assignments: CBSE Class 9 Hindi dukh ka adhikar Assignment

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लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1. मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्त्व है?
Answer: मनुष्य के जीवन में पोशाक की अहम् भूमिका होती है। मनुष्य की पहचान पोशाक से ही होती है। यह हमें समाज में अधिकार दिलाती है तथा दर्जा निश्चित करती है। यह मनुष्यों को विभिन्न श्रेणियों में बाँट देती है, भेद-भाव उत्पन्न कराती है तथा हमारे लिए अनेक बंद दरवाजे खोल भी देती है।
In simple words: पोशाक मनुष्य की सामाजिक स्थिति और पहचान तय करती है तथा लोगों में भेद पैदा करती है।

Exam Tip: पोशाक के सामाजिक प्रभाव और उच्च-नीच के भेदभाव को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

प्रश्न 2. पोशाक हमारे लिए कब बंधन और अड़चन बन जाती है?
Answer: बहुमूल्य पोशाक हमें नीचे झुककर समाज की निचली श्रेणियों की अनुभूतियों को समझने में बंधन व अड़चन बन जाती है। क्योंकि यह हमें अभिजात वर्ग व अमीरी का बोध कराती है। मानव-मानव में दूरियों बढ़ाने का काम करती है। इस प्रकार विषम परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें नीचे झुकने से रोके रखती है।
In simple words: महँगी पोशाक इंसान को गरीबों के साथ सहानुभूति रखने से रोकती है।

Exam Tip: उच्च वर्ग के अहंकार और संवेदनहीनता के संदर्भ को उत्तर में शामिल करें।

 

प्रश्न 3. लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नहीं जान पाया?
Answer: लेखक भी एक संवेदनशील प्राणी था। जब उसने उस खरबूजे बेचनेवाली स्त्री को फुटपाथ पर सिर रखकर रोते देखा और बाजार में खड़े लोगों का उस स्त्री के संबंध में घृणापूर्ण बातें करते देखा तो उसका मन भी दुखी हो उठा। वह भी उस स्त्री के दुखर के कारण को जानना चाहा। परन्तु उसकी कीमती पोशाक उसमें रुकावट बन गई। इसलिए वह उसके समीप बैठकर उसकी दुखद स्थिति को न जान सका।
In simple words: लेखक की महँगी पोशाक और सामाजिक मर्यादा उसे उस रोती हुई स्त्री के पास बैठने से रोक रही थी।

Exam Tip: लेखक की संवेदनशीलता और उसकी पोशाक की विवशता का विरोधाभास दर्शाएँ।

 

प्रश्न 4. भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था?
Answer: भगवाना शहर के पास डेढ़ बीघा ज़मीन में कढ़ियारी करके उसमें खरबूजों की खेती कर अपने परिवार का जीवन निर्वाह करता था। खरबूजों की डलिया बाजार में पहुँचाकर कभी वह स्वयं सौदे के पास बैठ जाता, तो कभी उसकी माँ बैठ जाती।
In simple words: भगवाना खेती करके और बाजार में खरबूजे बेचकर अपने परिवार का गुजारा करता था।

Exam Tip: भगवाना के जीविकोपार्जन के साधन (डेढ़ बीघा ज़मीन और खरबूजे बेचना) का उल्लेख अवश्य करें।

 

प्रश्न 5. लड़के की मृत्यु के दूसरे दिन ही बुढ़िया खरबूजे बेचने क्यों चल पड़ी?
Answer: बुढ़िया का एकमात्र कमाऊ बेटा सर्प दंश से मर चुका था। घर में जो भी अन्न-धन था वह भगवाना की मृत्यु होने पर दान-दक्षिण व कफ़न में ख़त्म हो चुका था। बच्चे भूख के मारे बिलबिला रहे थे। बहू बीमार थी। इसलिए मजबूरी वश बुढ़िया को खरबूजे बेचने के लिए लड़के की मृत्यु के दूसरे दिन ही बाजार में दुकान लगाना पड़ा। कहा भी गया है - "विभूतिश्च किं न करोति पापम्।"
In simple words: घर में खाने को कुछ नहीं था और छोटे बच्चे भूख से रो रहे थे, इसलिए मजबूरी में उसे दुकान लगानी पड़ी।

Exam Tip: गरीबी, भुखमरी और एकमात्र कमाने वाले बेटे की मृत्यु की विवशता को मुख्य बिंदु बनाएँ।

 

प्रश्न 6. बुढ़िया के दुःख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई?
Answer: बुढ़िया के दुःख के समान लेखक के पड़ोस की एक संभ्रांत महिला के साथ भी ऐसी ही घटना घटी थी। इसके जवान पुत्र की मृत्यु होने पर वह ढाई-मास तक पलंग से न सकी थी। हर पंद्रह मिनट पर पुत्र-वियोग में उसे मूर्छा आती थी। दो-दो डॉक्टर हमेशा उसके सिरहाने बैठे रहते थे। शहर के सभी लोग इसे देखकर दुखी हो रहे थे। अनावकि बुढ़िया के पास नंगे मृत शरीर को ढकने के लिए कपड़ा भी न था। बुढ़िया की मजबूरी पर लोग ताने कस रहे थे। इसलिए यह बात सत्य है कि थोड़ा-सा दुःख अमीरों को हिला देता है, वही बड़ा-से-बड़ा दुःख भी गरीबों को सहज बने रहने पर मजबूर कर देता है।
Answer: (ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-
In simple words: अमीर महिला के बेटे की मौत पर पूरा आराम और सहानुभूति मिली, जबकि गरीब बुढ़िया को दुःख के साथ समाज के ताने सहने पड़े।

Exam Tip: अमीर और गरीब के दुखों के प्रति समाज के दोहरे रवैये की तुलना करें।

 

प्रश्न 1. बाजार के लोग खरबूजे बेचनेवाली स्त्री के बारे में क्या-क्या कह रहे थे? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: बाजार के लोग खरबूजे बेचनेवाली स्त्री के बारे में अनेक प्रकार की तिरस्कारपूर्ण बातें कर रहे थे। एक आदमी ने घृणा से एक तरफ थूकते हुए कहा, "कैसा जमाना है! जवान लड़के को मरे पूरा दिन नहीं बीता और यह दुकान लगा के बैठी है।" एक आदमी ने कहा, "ये कमीने लोग रोटी के टुकड़े पर जान देते हैं। इनके लिए बेटा-बेटी, खसम-लुगाई, धर्म-ईमान सब रोटी का टुकड़ा है।" परसून की दुकान पर बैठे लालाजी ने कहा, "जवान बेटे के मरने पर तेरह दिन का सूतक होता है और यह सड़क पर दुकान लगा के बैठी है। हमारा आदमी आते-आते हैं, कोई क्या जानता है? कोई इसके खरबूजे खा ले तो उसका ईमान-धर्म कैसे रहेगा?" इस प्रकार अनेक लोग अनेक बातें हो रही थीं। परन्तु कोईभी उस बुढ़िया की मजबूरी को समझना नहीं चाहता था।
In simple words: बाजार के लोग बुढ़िया को बेसर्म और धर्महीन कह रहे थे क्योंकि वह बेटे की मौत के तुरंत बाद दुकान लगाकर बैठी थी।

Exam Tip: समाज की संवेदनहीनता और रूढ़िवादी सोच को दर्शाने वाले कथनों को उद्धृत करें।

 

प्रश्न 2. पास-पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को क्या पता चला?
Answer: आस-पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को पता चला कि इस बुढ़िया का तेईस-वर्षीय जवान लड़का था। पोता-पोती और उसकी बहू है। लड़का डेढ़ बीघा ज़मीन में कढ़ियारी करके खरबूजों की खेती कर परिवार का जीवन निर्वाह करता था।
लड़का मुँह-अँधेरे बेलों में से पके खरबूजे चुन रहा था। तभी गीली मेड़ की तरावट में विश्राम करते हुए एक साँप पर लड़के का पैर पड़ गया, तब साँप ने लड़के को डस लिया और उसकी मृत्यु हो गई।
In simple words: पड़ोसियों से पता चला कि बुढ़िया का जवान बेटा खेत में खरबूजे चुनते समय साँप के काटने से मर गया था।

Exam Tip: घटना के कारणों (साँप का डसना और परिवार की इकलौती आजीविका) का संक्षेप में उल्लेख करें।

 

प्रश्न 3. लड़के को बचाने के लिए बुढ़िया माँ ने क्या-क्या उपाय किए?
Answer: लड़के को बचाने के लिए बुढ़िया माँ ने हर संभव प्रयास किया। वह बावली होकर ओझा को बुला लाई। झाड़ना-फूँकना हुआ। नागदेव की पूजा हुई। पूजा के लिए दान-दक्षिणा चाहिए। घर में जो कुछ आटा और अनाज था, दान-दक्षिणा में उठ गया। माँ, बहू और बच्चों ‘भगवाना’ से लिपट-लिपट कर रोए, पर भगवाना जो एक दफ़े चुप हुआ तो फिर न बोला। सर्प के विष से उसका सब बदन काला पड़ गया था। और अन्त में उसकी मृत्यु हो गई।
In simple words: बुढ़िया ने ओझा-गुणी को बुलाया, नागदेव की पूजा कराई और घर का सारा अनाज दान दे डाला, पर बेटा नहीं बचा।

Exam Tip: अंधविश्वास और गरीबी के कारण हुए प्रयासों का वर्णन करें।

 

प्रश्न 4. लेखक ने बुढ़िया के दुःख का अंदाजा कैसे लगाया?
Answer: लेखक ने बुढ़िया के दुःख का अंदाजा अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला को याद करके लगाया। अमीर लोग अपने दुःख का वर्णन बढ़ा-चढ़ा कर करते हैं। वे बेहोश होने का नाटक करते हैं। कई दिनों तक बिस्तर पर पड़े रहते हैं, अनेक लोगों से सहानुभूति प्राप्त करते हैं, जबकि गरीब लोग मौत की परवाह न कर बाहर निकल आते हैं, अपने दुःख को हृदय में ही दबा लेते हैं।
जैसे ही बुढ़िया भी अपने जवान पुत्र की मृत्यु को हृदय में दफ़न कर खरबूजों की दुकान लगा कर बैठ जाती है। दिल शोकाकुल है परन्तु विवशता कार्य करने हेतु मजबूर कर रही है।
In simple words: लेखक ने अमीर महिला के लंबे विलाप और गरीब बुढ़िया की विवशता की तुलना करके दुःख का सही अनुमान लगाया।

Exam Tip: अमीरों के प्रदर्शनकारी दुःख और गरीबों के मौन व विवश दुःख के अंतर को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 5. इस पाठ का शीर्षक ‘दुःख का अधिकार’ कहाँ तक सार्थक है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस पाठ का शीर्षक ‘दुःख का अधिकार’ पूरी तरह से सार्थक है। प्रस्तुत कहानी देश में फैली अंधविश्वासों और ऊँच-नीच के भेद-भाव का पर्दाफाश करते हुए यह बताती है कि दुःख की अनुभूति सभी को समान रूप से होती है। कहानी धनी लोगों की अमानवीयता और गरीबों की मजबूरी को भी पूरी गहराई से उजागर करती है।
यह सही है कि दुःख सभी को तोड़ता है, दुःख में मातम मनाना हर कोई चाहता है, दुःख के क्षण से सामना होने पर सब अवश्य हो जाते हैं, पर इस देश में ऐसे भी अभागे लोग हैं जिन्हें न तो दुःख मनाने का अधिकार है, न अवकाश...
In simple words: शीर्षक बिल्कुल सही है क्योंकि यह दर्शाता है कि समाज में केवल अमीरों को ही ढंग से दुःख मनाने की छूट या अधिकार है, गरीबों को नहीं।

Exam Tip: शीर्षक की सार्थकता सामाजिक असमानता और व्यवस्था पर कटाक्ष के आधार पर सिद्ध करें।

 

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1. जैसे वायु की लहरें-...-रोके रहती हैं।
Answer: प्रस्तुत पंक्तियों के द्वारा लेखक पोशाक के विषय में वर्णन करते हुए कहता है कि जिस प्रकार पतंग को डोर से नियंत्रित किया जाता है और डोर के टूटने के बाद भी हवा पतंग को तुरंत ज़मीन पर नहीं गिरने देती, वह आकाश में ही लहराती रहती है, वैसे ही खास पोशाक के कारण व्यक्ति आसमानी बातें करने लगता है। वह अमीरी का आभास कराती है। गरीबों को बराबर का स्थान नहीं देना चाहता। परिणामतः उसकी स्थिति त्रिहंक जैसी हो जाती है। वह चाहकर भी गरीबों के दुःख-दर्द में शामिल नहीं हो पाता है।
In simple words: महँगी पोशाक इंसान को जमीन से काट देती है और वह चाहकर भी गरीबों के करीब नहीं आ पाता।

Exam Tip: पोशाक और सामाजिक दूरी के प्रतीकात्मक अर्थ को समझाएँ।

 

प्रश्न 2. इनके लिए बेटा-बेटी...टुक्डा है।
Answer: प्रस्तुत पंक्ति में मजबूर इंसान की लाचारी को बताया गया है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसे समाज के द्वारा बनाए गए नियमों, कानूनों एवं परंपराओं को मानना चाहिए। पूरत मजबूरी व लाचारी सभी नियमों व परंपराओं को तोड़ने के लिए विवश कर देती है।
इस कहानी में बढ़िया को घर की मजबूरी फुटपाथ पर खरबूजे बेचने के लिए विवश कर देती है। वह दिल पर पत्थर रखकर लोगों के ताने सहती है। लोग ताने देते हुए कहते हैं कि इनके लिए बेटा-बेटी पति-पत्नी और धर्म-ईमान सभी कुछ रोटी की टुकड़ा ही होती है। लोग किसी की विवशता पर हँस तो सकते हैं, परन्तु उसका सहारा नहीं बन सकते। पेट की आग उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर कर देती है।
In simple words: गरीबी और भुखमरी इंसान से उसके सारे रिश्ते और धर्म-ईमान छिनकर केवल पेट भरने को मजबूर कर देती है।

Exam Tip: पेट की आग और विवशता के आगे सामाजिक मर्यादाओं के गौण होने की बात स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 3. शोक करने, ग़म मनाने---अधिकार होता है।
Answer: प्रस्तुत पंक्ति का आशय यह है कि आज के इस समाज में दुःख मनाने का अधिकार भी केवल धनी वर्ग को होता है। गरीब व्यक्ति के पास न तो दुःख मनाने की सुविधा है और न समय है। वह तो रोजी-रोटी के ही चक्कर में उलझा रहता है। सम्पन्न वर्ग शोक मनाने का दिखावा करता है वहीं विपन्न वर्ग उसे दिल में ही दफ़न कर अपने दैनिक कार्यों में लग जाता है। पेट की ज्वाला उसे दुखी होने का अधिकार नहीं देती है।
In simple words: अमीर लोग आराम से बैठकर शोक मनाते हैं, जबकि गरीब को पेट पालने के लिए दुःख भूलकर तुरंत काम पर लौटना पड़ता है।

Exam Tip: आर्थिक स्थिति और दुःख मनाने की स्वतंत्रता के बीच के गहरे संबंध को उजागर करें।

 

Sparsh Chapter 01 Dukh Ka Adhikar Printable Assignments & Solutions for Class 9 Hindi

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