CBSE Class 9 Hindi Dhool Assignment Set 02

Official CBSE Assignments for Class 9 Hindi

Access comprehensive school assignments for Dhool using the CBSE Class 9 Hindi Dhool Assignment Set 02. Designed to align with the 2026-27 CBSE academic guidelines, these practice sets help Class 9 Hindi students reinforce core concepts and improve their problem-solving accuracy.

Solved Practice Assignments for Hindi

View or download the dedicated CBSE Class 9 Hindi Dhool Assignment Set 02 resource below. Engaging with these assignments under focused study conditions ensures continuous academic progress and mastery of the 2026-27 curriculum.

(क)

Question 1. धूल के बिना किसी शिशु की कल्पना क्यों नहीं की जा सकती ?
Answer: धूल के बिना शिशु की कल्पना इसलिए नहीं की जा सकती क्योंकि शिशु के मुख पर धूल फूल की पंखुड़ियों के समान सुंदर लगती है। उसकी सुंदरता को निखारती है, जो कि नकली प्रसाधनों से नहीं पाई जा सकती।
In simple words: बच्चों के चेहरे पर लगी धूल फूलों की तरह सुंदर दिखती है और उनकी मासूमियत को बढ़ाती है।

Exam Tip: उत्तर लिखते समय 'शिशु की सहज सुंदरता' और 'फूल की पंखुड़ियों' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 2. हमारी सभ्यता धूल से क्यों बचना चाहती है ?
Answer: हमारी सभ्यता धूल से इसलिए बचना चाहती है क्योंकि वह दिखावे की दुनिया में रहती है। वह काल्पनिक संसार बसाना चाहती है इसलिए वह अपने बच्चों को धूल से दूर रखना चाहती है।
In simple words: आज की बनावटी और आधुनिक सभ्यता प्राकृतिक सुंदरता से दूर भागती है और बच्चों को धूल-मिट्टी से बचाना चाहती है।

Exam Tip: 'दिखावे की दुनिया' और 'काल्पनिक संसार' बिंदुओं को उत्तर में मुख्य रूप से दर्शाएं।

 

Question 3. अखाड़े की मिट्टी की क्या विशेषता होती है ?
Answer: अखाड़े की मिट्टी साधारण मिट्टी से भिन्न है। इसे तेल और मट्ठे से सिंचा जाता है। इसे देवता पर चढ़ाया जाता है। पहलवान को अखाड़े की मिट्टी ही विश्वविजेता बनाती है।
In simple words: अखाड़े की मिट्टी विशेष होती है जिसे पहलवान मज़बूती के लिए अपने शरीर पर मलते हैं।

Exam Tip: 'तेल और मट्ठे से सिंचा जाना' तथा पहलवानों के लिए इसका महत्व बताना आवश्यक है।

 

Question 4. श्रद्धा, भक्ति, स्नेह की व्यंजना के लिए धूल सर्वाधिक साधन किस प्रकार है ?
Answer: धूल का स्पर्श करके हम अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। इसी धूल को मस्तक पर लगाकर भक्ति दर्शाते हैं और धूल से भरे शिशु को चूम कर स्नेह प्रकट करते हैं।
In simple words: धूल के माध्यम से मनुष्य अपनी श्रद्धा, भक्ति और स्नेह बहुत सहज रूप से व्यक्त करता है।

Exam Tip: श्रद्धा, भक्ति और स्नेह तीनों के अलग-अलग उदाहरण (मस्तक पर लगाना, बच्चे को चूमना) स्पष्ट करें।

 

Question 5. इस पाठ में लेखक ने नगरीय सभ्यता पर क्या व्यंग्य किया है ?
Answer: लेखक ने बनावटी जीवन की भावना पर व्यंग्य इसलिए किया है क्योंकि आज की सभ्यता धूल से दूर रहना चाहती है। उन्हें चकाचौंध करने वाली सुंदरता ही पसंद है।
In simple words: लेखक ने बताया है कि शहरी लोग केवल बनावटी और झूठी चमक-दमक को पसंद करते हैं।

Exam Tip: 'नगरीय सभ्यता' और 'बनावटी जीवन' के विरोध को अपने उत्तर का मुख्य आधार बनाएं।

 

(ख)

Question 6. लेखक "बालकृष्ण" के मुँह पर छाई गोधूलि को श्रेष्ठ क्यों मानता है ?
Answer: लेखक "बालकृष्ण" के मुँह पर छाई गोधूलि को श्रेष्ठ इसलिए मानता है क्योंकि गोधूलि से शिशु बालकृष्ण के मुख की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। यह शिशु की सहज पार्थिवता को निखारती है।
In simple words: भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप के मुख पर लगी धूल उनकी सुंदरता और दिव्यता को कई गुना बढ़ा देती है।

Exam Tip: 'सहज पार्थिवता' शब्द का प्रयोग उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।

 

Question 7. लेखक ने धूल और मिट्टी में क्या अंतर बताया है ?
Answer: लेखक धूल और मिट्टी का अंतर शरीर और आत्मा के समान मानता है दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। दोनों में देह और प्राण, चाँद और चाँदनी के समान का अंतर है।
In simple words: धूल और मिट्टी वैसे ही जुड़े हैं जैसे शरीर और प्राण, इन्हें अलग नहीं किया जा सकता।

 

Question 8. ग्रामीण परिवेश में प्रकृति धूल के कौन-कौन से सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है ?
Answer: शिशु के मुख पर धूल फूल की पंखुड़ियों के समान सुंदर लगती है। उसकी सुंदरता को निखारती है। सायंकाल गोधूलि के उड़ने की सुंदरता का चित्र ग्रामीण परिवेश में प्रस्तुत करती है जो कि शहरों के हिस्से नहीं पड़ती।
In simple words: गाँव में बच्चों के चेहरे पर धूल और शाम के समय उड़ती गोधूलि बहुत सुंदर दृश्य बनाती है जो शहरों में देखने को नहीं मिलती।
Exam Tip: ग्रामीण और शहरी परिवेश की तुलना को स्पष्ट रूप से उजागर करें।

 

Question 9. "हीरा वही घन चोट न टूटे"- का संदर्भ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: "हीरा वही घन चोट न टूटे" का अर्थ है असली हीरा वही है जो हथौड़े की चोट से भी न टूटे और अटूट होने का प्रमाण दे।अर्थात देश पर मर मिटने वाले हीरे अपनी अमरता का प्रमाण देते हैं। वह कठिनाइयों से कभी नहीं घबराते।
In simple words: सच्चे वीर और देशभक्त वे होते हैं जो कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ आने पर कभी पीछे नहीं हटते।

Exam Tip: हीरे की मजबूती की तुलना देश के वीर सपूतों और देशभक्तों के साथ करें।

 

Question 10. धूल, धूली, धूली, धूरि और गोधूलि की व्यंजनाओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: धूल यथार्थवादी गद्य है तो धूली उसकी कविता। धूली छायावादी दर्शन है और धूरि लोक-संस्कृति का नवीन जागरण है। इन सब का रंग एक ही है परंतु गोधूलि गाँव के जीवन की अपनी संपत्ति है।
In simple words: धूल से जुड़े इन सभी शब्दों के अलग-अलग साहित्यिक और सांस्कृतिक अर्थ हैं, जो ग्रामीण जीवन की सुंदरता को दर्शाते हैं।

Exam Tip: प्रत्येक शब्द के साथ जुड़े साहित्यिक संदर्भ (गद्य, कविता, दर्शन, लोक-संस्कृति) को क्रमबद्ध लिखें।

 

Question 11. "धूल" पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: लेखक ने पाठ "धूल" में धूल का महत्त्व स्पष्ट किया है कि धूल से ही हमारा शरीर बना है परंतु आज का नगरीय जीवन इससे दूर रहना चाहता है जबकि ग्रामीण सभ्यता का वास्तविक सौंदर्य ही "धूल" है।
In simple words: पाठ का मुख्य उद्देश्य हमारी संस्कृति और शरीर के मूल आधार धूल के प्रति प्रेम और सम्मान जगाना है।

Exam Tip: उत्तर में नगरीय बनावट और ग्रामीण वास्तविकता के विरोध को मुख्य बिंदु बनाएं।

 

Question 12. कविता को विडंबना मानते हुए लेखक ने क्या कहा है ?
Answer: कविता सौंदर्य की रचना करना चाहती है।कवि गोधूलि बेला में अपनी कविता रचता है।नगरीय लोग इससे दूर रहना चाहते हैं क्योंकि वह इसका अनुभव नहीं कर सकते।गोधूलि की सुंदरता गाँव के जीवन से ही अनुभव की जा सकती है।
In simple words: यह एक विडंबना है कि जो लोग सुंदरता की बात करते हैं (कवि), वे ही शहरी चकाचौंध में रहकर ग्रामीण धूल और गोधूलि के वास्तविक सौंदर्य से दूर रहते हैं।

Exam Tip: 'विडंबना' शब्द के अर्थ को स्पष्ट करते हुए शहरी और ग्रामीण जीवन के अंतर्विरोध को समझाइए।

 

(ग)

Question 13. फूल के ऊपर जो रेणु उसका शृंगार बनती है, वही धूल शिशु के मुँह पर उसकी सहज पार्थिवता को निखार देती है।
Answer: जिस प्रकार फूल के ऊपर रेणु उसका शृंगार बनती है उसी प्रकार शिशु के मुँह पर धूल उसकी सुंदरता को और भी बढ़ा देती है।
In simple words: जिस प्रकार परागकण फूलों की सुंदरता बढ़ाते हैं, वैसे ही धूल बच्चों के चेहरे की मासूमियत को निखारती है।

Exam Tip: फूल के परागकण (रेणु) और बच्चे के मुख की धूल की तुलना को स्पष्ट करें।

 

Question 14. 'धन्य-धन्य वे हैं नर मैले जो करत गात कनिया लगाय धूरि ऐसे लरिकन की'-लेखक इस पंक्ति द्वारा क्या कहना चाहता है ?
Answer: वह नर धन्यवाद् के पात्र हैं जो धूरि भरे शिशुओं को गोद में उठाकर गले से लगा लेते हैं। लेखक कवि को हीरे का प्रेमी मानता है, धूलि भरे हीरों का नहीं। अगर उसके मन में सच्चा प्रेम होता तो वह इन व्यक्तियों को 'धन्य' नहीं कहता।
In simple words: वे लोग भाग्यशाली और प्रशंसा के पात्र हैं जो धूल से सने बच्चों को बिना किसी संकोच के प्रेम से गले लगाते हैं।

Exam Tip: 'धूलि भरे हीरे' रूपक का अर्थ समझाते हुए बच्चों के प्रति सच्चे स्नेह को दर्शाएं।

 

Question 15. मिट्टी और धूल में अंतर है लेकिन उतना ही, जितना शब्द और रस में, देह और प्राण में, चाँद और चाँदनी में।
Answer: लेखक ने इसके माध्यम से मिट्टी और धूल के संबंध को स्पष्ट किया है कि दोनों एक दूसरे से जुड़े हैं। इनमें कोई अंतर नहीं है। जिस प्रकार शब्द से रस, देह से प्राण, चाँद से चाँदनी अलग कर देने पर नष्ट हो सकती है, उसी प्रकार मिट्टी की धूल से अलग हो जाने पर वह नष्ट हो जाएगी।
In simple words: धूल और मिट्टी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं; एक को दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता।

Exam Tip: दिए गए सभी युग्मों (देह-प्राण, चाँद-चाँदनी) के माध्यम से अभिन्न संबंध को समझाएं।

 

Question 16. हमारी देशभक्ति धूल को माथे से न लगाए तो कम से कम उस पर पैर न रखे।
Answer: आज के युग में देशभक्ति की भावना का रूप ही बदल गया है। आज का मानव देश की धूल को अपने माथे से नहीं लगाता। वह उस धूल को गंदा मानता है। चाहे वह देश की धूल को माथे से न भी लगाए परंतु उसकी वास्तविकता से परिचित हो।
In simple words: आज का इंसान भले ही देश की धूल को मस्तक पर न लगाए, कम से कम उसे अपमानित या गंदा नहीं समझना चाहिए।

Exam Tip: देशभक्ति के बदले हुए स्वरूप और वास्तविक सम्मान की भावना पर जोर दें।

 

Question 17. वे पलट कर चोट भी करेंगे और तबカाँच और हीरे का भेद जानना बाकी न रहेगा।
Answer: लेखक के अनुसार उसके पास जीवन की वास्तविक सुंदरता है। उसके अनुसार बनावट वास्तविकता के बीच के अंतर को स्पष्ट करेगी। काँच और हीरे के अंतर को स्पष्ट करते हुए वास्तविक सुंदरता और बनावटी सुंदरता के अंतर को स्पष्ट करेगी।
In simple words: जब कठिन समय आएगा, तब असली और नकली (काँच और हीरा) का अंतर स्वतः स्पष्ट हो जाएगा।

Exam Tip: 'काँच और हीरा' के प्रतीक का अर्थ असली और बनावटी जीवन से जोड़कर लिखें।

Dhool Printable Assignments & Solutions for Class 9 Hindi

Download Assignment: Dhool (Class 9 Hindi)

Access structured practice assignments for Dhool designed in alignment with the latest CBSE curriculum for Class 9 Hindi. These printable sets cover objective and descriptive problem types to support thorough revision.

Why Practice Class 9 Hindi Assignments?

  • Syllabus Compliance: Sets reflect current CBSE evaluation criteria and official marking frameworks.
  • Multi-Format Practice: Includes varied problem types designed to deepen comprehension across all sub-topics.
  • Time Management: Routine practice optimizes pacing to finish school examinations comfortably within schedule.

How to Approach Hindi Dhool Assignments

  1. Concept Foundation: Review the NCERT book for Class 9 Hindi thoroughly before diving into assignment tasks.
  2. Self-Evaluation: Solve exercises independently before inspecting professional answer guides.
  3. Progress Monitoring: Note down complex formulas or concepts, clearing them up using available online practice aids.

FAQs

Where can I download the latest CBSE Class 9 Hindi Dhool assignments?

You can download free PDF assignments for Class 9 Hindi Dhool from StudiesToday.com. These practice sheets have been updated for the 2026-27 session covering all concepts from latest NCERT textbook.

Do these Hindi Dhool assignments include solved questions?

Yes, our teachers have given solutions for all questions in the Class 9 Hindi Dhool assignments. This will help you to understand step-by-step methodology to get full marks in school tests and exams.

Are the assignments for Class 9 Hindi Dhool based on the 2026 exam pattern?

Yes. These assignments are designed as per the latest CBSE syllabus for 2026. We have included huge variety of question formats such as MCQs, Case-study based questions and important diagram-based problems found in Dhool.

How can practicing Dhool assignments help in Hindi preparation?

Practicing topicw wise assignments will help Class 9 students understand every sub-topic of Dhool. Daily practice will improve speed, accuracy and answering competency-based questions.

Can I download Hindi Dhool assignments for free on mobile?

Yes, all printable assignments for Class 9 Hindi Dhool are available for free download in mobile-friendly PDF format.