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पृथ्वी की आन्तरिक संरचना
पृथ्वी की आन्तरिक संरचना को समझने में जिन स्रोतों की भूमिका प्रमुख है उनको हम दो भागों में विभाजित कर सकते हैं:
1. प्रत्यक्ष स्रोत: जिसके अन्तर्गत खनन से प्राप्त प्रमाण एवं ज्वालामुखी से निकली हुयी वस्तुयें आती है।
2. अप्रत्यक्ष प्रमाण: जिसके अन्तर्गत (1) पृथ्वी के अन्दर तापमान दबाव एवं घनत्व में अन्तर (2) अन्तरिक्ष से प्राप्त उल्कापिंड (3) गुरुत्वाकर्षण (4) भूकम्प संबंधी क्रियायें आदि आते हैं।
3. भूकम्पीय तरंगे: प्राथमिक तरंगें एवं द्वितीयक तरंगें भी भूगर्भ को समझने में सहायक है। यह अध्याय पृथ्वी के अन्दर की तीनों परतों एवं ज्वालामुखी निर्मित स्थरूपों को समझने में भी सहायक है।
प्रश्नावली
प्रश्न 1. पृथ्वी की त्रिज्या कितनी है?
Answer: पृथ्वी की त्रिज्या 6370 कि.मी. है।
In simple words: पृथ्वी के केंद्र से सतह की दूरी लगभग 6370 किलोमीटर है।
Exam Tip: पृथ्वी की त्रिज्या का यह मानक आँकड़ा भूगोल के प्रश्नों में बहुविकल्पीय एवं अतिलघु प्रश्नों हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 2. मानव द्वारा अब तक भूगर्भ में अधिकतम प्रवेशान कितना और कहाँ किया गया है?
Answer: आर्कटिक महासागर में कोला क्षेत्र में 12 कि.मी. की गहराई तक।
In simple words: मनुष्य ने पृथ्वी के अंदर अधिकतम 12 किलोमीटर की गहराई तक छेद किया है।
Exam Tip: कोला सुपरडीープ बोरहोल (Kola Superdeep Borehole) का नाम और गहराई याद रखें।
प्रश्न 3. भूगर्भ के बारे में जानने के प्रमुख अप्रत्यक्ष स्रोत कौन-कौन से हैं?
Answer: पृथ्वी के पदार्थों के गुण जैसे तापमान, दबाव, घनत्व, (1) उल्कायें (2) गुरुत्वाकर्षण, चुम्बकीय क्षेत्र व भूकम्प।
In simple words: तापमान, दबाव, घनत्व, उल्काएं और गुरुत्वाकर्षण अप्रत्यक्ष स्रोत हैं।
Exam Tip: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष स्रोतों के अंतर को स्पष्ट रूप से याद रखें।
प्रश्न 4. भूकम्पीय तरंगे उत्पन्न होने का प्रमुख कारण क्या है?
Answer: भूगर्भ में दरारें बन जाती है जिन्हें भ्रंश भी कहते हैं उनसे ऊर्जा मुक्त होती है जिससे तरंगे निकलती है ये तरंगे सभी दिशाओं में फैलंकर भूकम्प का कारण बनती है।
In simple words: चट्टानों के टूटने या खिसकने से ऊर्जा निकलती है जो तरंगों के रूप में फैलती है।
Exam Tip: ऊर्जा की मुक्ति और भ्रंश (Fault) का बनना भूकंप का मुख्य कारण है।
प्रश्न 5. भूकम्प का अवकेन्द्र किसे कहते हैं?
Answer: भूगर्भ का वह स्थान जहाँ से ऊर्जा निकलती है और अलग-अलग दिशाओं में जाती है उसे अवकेन्द्र या उद्गम केन्द्र भी कहते हैं।
In simple words: पृथ्वी के भीतर जिस बिंदु से भूकंप की ऊर्जा निकलती है, उसे अवकेंद्र कहते हैं।
Exam Tip: अवकेंद्र (Focus) और अधिकेंद्र (Epicenter) के अंतर को भली-भांति समझें।
प्रश्न 6. भूकम्पीय छाया क्षेत्र किसे कहते हैं?
Answer: भूपटल का वह क्षेत्र, जहाँ कोई भी भूकम्पीय तरंग भूकम्पमापी पर अभिलेखیت नही होती, उसे छाया क्षेत्र कहते हैं।
In simple words: वह क्षेत्र जहाँ भूकंप की कोई भी तरंग दर्ज नहीं होती, छाया क्षेत्र कहलाता है।
Exam Tip: पी-तरंग और एस-तरंग के छाया क्षेत्रों का विस्तार परीक्षा में पूछा जाता है।
प्रश्न 7. भूकम्प तीव्रता को मापने के लिये किस स्केल का प्रयोग किया जाता है?
Answer: रिक्टर स्केल का।
In simple words: भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर मापी जाती है।
Exam Tip: तीव्रता के लिए रिक्टर स्केल और क्षति के लिए मर्काली स्केल का उपयोग होता है।
प्रश्न 8. भूपर्पटी की औसत मोटाई कितनी है?
Answer: भूपर्पटी की औसत मोटाई महासागरों नीचे 5 कि.मी. एवं महाद्वीपों के नीचे लगभग 30 कि.मी. तक है। हिमालय के नीचे यह लगभग 70 कि.मी. है।
In simple words: महासागरों के नीचे यह पतली (5 किमी) और महाद्वीपों के नीचे मोटी (30 किमी) होती है।
Exam Tip: महासागरीय और महाद्वीपीय भूपर्पटी की मोटाई के आंकड़े याद रखें।
प्रश्न 9. एस्थेनोस्फियर किसे कहते हैं?
Answer: पृथ्वी के आन्तरिक भाग में मेंटल का ऊपरी भाग एस्थेनोस्फीयर या दुर्बलता मंडल कहलाता है।
In simple words: मेंटल के ऊपरी पिघले हुए भाग को दुर्बलता मंडल कहा जाता है।
Exam Tip: मैग्मा का मुख्य स्रोत एस्थेनोस्फीयर ही माना जाता है।
प्रश्न 10. पृथ्वी का क्रोड मुख्यतः किन पदार्थों से बना है?
Answer: क्रोड मुख्यतः भारी पदार्थों जैसे निकल व लोहे से बना है।
In simple words: पृथ्वी का केंद्र भारी धातुओं निकल (Ni) और लोहे (Fe) से बना है।
Exam Tip: इसे NIFE (निकल और फेरियम) परत भी कहा जाता है।
प्रश्न 11. भारत का दक्कन ट्रैप किस तरह के ज्वालामुखी का उदाहरण है?
Answer: बेसाल्ट लावा प्रवाह।
In simple words: यह विशाल क्षेत्र शांत लावा के फैलाव से बना है।
Exam Tip: दक्कन ट्रैप प्रवाह प्रकार (Flood Basalt) के ज्वालामुखी उद्गार का श्रेष्ठ उदाहरण है।
प्रश्न 12. मिश्रित ज्वालामुखी किसे कहते हैं?
Answer: ये वे ज्वालामुखी है जिनसे तरल लावा के साथ जलते हुये पदार्थ एवं राख भी निकलती है।
In simple words: जिस ज्वालामुखी से लावा के साथ राख और मलबे का भी उद्गार हो, उसे मिश्रित ज्वालामुखी कहते हैं।
Exam Tip: मिश्रित ज्वालामुखियों में शंकু के ऊपर कई परतों का निर्माण होता है।
प्रश्न. सीस्मोग्राफ किसे कहते हैं? इसका प्रयोग किसलिए किया जाता है?
Answer: सीस्मोग्राफ एक यंत्र है जिसके माध्यम से भूकम्प की गति तथा भूकम्पीय तरंगे मापी जाती है।
In simple words: सीस्मोग्राफ वह यंत्र है जो भूकंप की तरंगों को रिकॉर्ड करता है।
Exam Tip: इस उपकरण का नाम और इसका कार्य भूगोल की परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
आइये विस्तार से समझें
तीन अंको का प्रश्न
प्रश्न 1. भूगर्भ की जानकारी में तापमान एवं दबाव किस तरह सहायक है? स्पष्ट करे
Answer: पृथ्वी के धरातल में गहराई बढ़ने के साथ-साथ तापमान एवं दबाव में वृद्धि होती है साथ ही पदार्थ का घनत्व भी बढ़ता है। वैज्ञानिको ने विभिन्न गहराइयों पर पदार्थों के तापमान में भिन्नता, दबाव एवं घनत्व के अन्तरों की गणना की तथा भूगर्भ के बारे में तथ्य हासिल किये।
In simple words: गहराई के साथ तापमान, दबाव और घनत्व में वृद्धि होती है, जिससे पृथ्वी की आंतरिक स्थिति का पता चलता है।
Exam Tip: गहराई बढ़ने के साथ तापमान वृद्धि की सामान्य दर (geothermal gradient) का उल्लेख करना उत्तर को प्रभावी बनाता है।
प्रश्न 2. चित्र में उद्गम को दर्शाइये व उनमें अंतर स्पष्ट करे
Answer: (अ) उद्गम केन्द्र (ब) अधिकेन्द्र
उद्गम केन्द्र: वह स्थान जहाँ से ऊर्जा निकलती है और ऊर्जा तरंगे सभी दिशाओं में गतिमान होती है।
अधिकेन्द्र: भूतल पर वह बिन्दु जो उद्गम केन्द्र के निकटतम होता है अधिकेन्द्र कहलाता है।
In simple words: उद्गम केंद्र जमीन के अंदर होता है और अधिकेंद्र उसके ठीक ऊपर सतह पर होता है।
Exam Tip: परीक्षा में इसका रेखाचित्र बनाकर प्रदर्शित करना अत्यंत लाभदायक होता है।
प्रश्न 3. पृथ्वी की आन्तरिक संरचना कितने परतों में बंटी है? प्रत्येक परत की विशेषतायें संक्षेप में समझाइये।
Answer: पृथ्वी के धरातल से क्रोड मुख्यतः तीन परते है:
(क) भूपर्पटी (Crust): यह पृथ्वी का सबसे बाहरी भाग है। यह धरातल से 100 कि.मी. की गहराई तक पाया जाता है। इस परत की चट्टानों का घनत्व 3 ग्राम प्रति घन से.मी. है।
(ख) मैंटल: भूपर्पटी से नीचे का भाग मैंटल कहलाता है। यह भाग भूपर्पटी के नीचे से आरम्भ होकर 2900 कि.मी गहराई तक है। मैंटल का ऊपरी भाग दुर्बलता मंडल है इस मंडल की चट्टाने जेली की तरह की संरचना की है। यह भाग 400 कि.मी. तक है। भूपर्पटी एवं मैंटल का ऊपरी भाग मिलकर स्थल मंडल बना है। मैंटल का निचला भाग ठोस अवस्था में है इसका घनत्व लगभग 3.4 ग्राम प्रति घन से.मी. है।
(ग) क्रोड: मैंटल के नीचे क्रोड है जिसे हम आन्तरिक व बाह्य क्रोड कहते है बाह्य क्रोड तरल अवस्था में है आन्तरिक क्रोड ठोस है। इसका घनत्व 13 ग्राम प्रति घन सेमी लगभग है। क्रोड निकल व लोहे जैसे भारी पदार्थों से बना है।
In simple words: पृथ्वी मुख्य रूप से तीन परतों में विभाजित है: भूपर्पटी, मैंटल और क्रोड।
Exam Tip: तीनों परतों की गहराई, घनत्व और प्रमुख घटकों की तालिका बनाकर याद करें।
प्रश्न 4. बैथोलिथ व लैकोलिथ में क्या भिन्नता है?
Answer: बैथोलिथ भूपर्पटी में मैग्मा का गुंबदाकर ठंडा हुआ पिंड है ये कई कि.मी की गहराई में विशाल क्षेत्र में फैले होते है।
लैकोलिथ बहुत अधिक गहराई में पाये जाने वाले मैग्मा के विस्तृत गुंबदाकर पिंड है जिनका तल समतल होता है और एक नली (जिससे मैग्मा ऊपर आया) द्वारा के नीचे से जुड़े होते है। इस दोनों भू आकृतियों में मुख्य अंतर इनकी गहराई ही है।
In simple words: दोनों मैग्मा के जमे हुए रूप हैं, किंतु बैथोलिथ विशाल और गहराई में होता है जबकि लैकोलिथ गुंबद के आकार का होता है।
Exam Tip: आन्तरिक आकृतियों (Intrusive Landforms) के नाम और उनके चित्र ध्यान में रखें।
प्रश्न 5. ज्वालामुखी द्वारा निर्मित निम्नलिखित आकृतियों को निर्माण प्रक्रिया बताइये? (क) काल्डेरा (ख) सिंडरशंकु
Answer: (ख) काल्डेरा: ज्वालामुखी जब बहुत अधिक विस्फोटक होते है तो वे ऊंचा ढांचा बनाने के बजाय उभरे हुए भाग को विस्फोट से उड़ा देते है आरै वहाँ एक बहुत बड़ा गड्डा बन जाता है जिसे काल्डेरा (बड़ी कढ़ाई) कहते हैं।
सिंडर शंकु: जब ज्वालामुखी की प्रवृत्ति कम विस्फोटक होती है तो निकास नालिका से लावा फव्वारे की तरह निकलता है और निकास के पास एक शंकु के रूप में जमा होता जाता है जिसे सिंडर शंकु कहते है।
In simple words: अत्यधिक विस्फोट से धँसकर बने गर्त को काल्डेरा और राख व सिंडर के जमाव से बने ढेर को सिंडर शंकु कहते हैं।
Exam Tip: काल्डेरा और क्रेटर के आकार में अंतर स्पष्ट होना चाहिए।
प्रश्न 6. ज्वालामुखी द्वारा निर्मित अन्वेषेंधी आकृतियों में से निम्नलिखित में से निम्नलिखित आकृतियों की विशेषताएँ बताइये? (क) सिल (ख) शीट (ग) डाइक
Answer: (क) सिल व शीट: भूगर्भ में लावा जब क्षैतिज तल में चादर के रूप ठंडा होता है और यह परत काफी मोटी होती है तो इसे सिल कहते है यह परत जब पतली होती है तो इसे शीट कहते है।
(ख) डाइक: लावा का प्रवाह भूगर्भ में कभी-कभी किसी दरार में ही ठंडा होकर जम जाता है। यह दरार धरातल के समकोण पर होती है। इस दीवार की भांति की संरचना को डाइक कहते हैं।
In simple words: क्षैतिज रूप में जमे लावा को सिल या शीट कहते हैं और लंबवत खड़ी दीवारनुमा जमाव को डाइक कहते हैं।
Exam Tip: क्षैतिज (Horizontal) और लंबवत (Vertical) शब्दों का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।
प्रश्न 7. पृथ्वी में कम्पनी क्यों होता है?
Answer: भ्रंश के दोनों तरफ शैल विपरीत दिशा में गति करती है। जहां ऊपर के शैल खण्ड दबाव डालते है उनके आपस का घर्षण उन्हें परस्पर बांधे रखता है। फिर भी अलग होने की प्रवृत्ति के कारण एक समय पर घर्षण का प्रभाव कम हो जाता है जिसके परिणाम स्वरूप शैलखण्ड विकृत होकर अचानक एक-दूसरे के विपरीत दिशा में सरक ाते है। इससे ऊर्जा निकलती है और ऊर्जा तरंगे सभी दिशाओं में गतिमान होती है। इससे पृथ्वी में कम्पन हो जाता है।
In simple words: चट्टानों के आपस में टकराने और अचानक खिसकने से ऊर्जा निकलती है जिससे भूकंप आता है।
स्वयं कर के सीखिये: इन तरंगों के बारे में आप एक लम्बी स्प्रिंग की सहायता से सीख सकते है स्प्रिंग को खींच कर छोड़ दे। इस गति को पी तरंग कह सकते है स्प्रिंग को हल्का सा हिलाकर रखिये। लहर जैसी गति एस तरंग है।
Exam Tip: प्रत्यास्थ पुनस्छलन सिद्धांत (Elastic Rebound Theory) भूकंप की उत्पत्ति को समझाने का सबसे मान्य सिद्धांत है।
विस्तृत उत्तर वाले प्रश्न
प्रश्न 1. भूकम्पीय तरंगे कितने प्रकार की होती है? प्रत्येक की विशेषतायें बताईये?
Answer: भूकम्पीय तरंगे दो प्रकार की है:
(1) भूगर्भीय तरंगे
(2) धरातलीय तरंगे
भूगर्भीय तरंगे भूगर्भ से उद्गम केन्द्र से निकलती है और विभिन्न दिशाओं में जाती है। ये तरंगे धरातलीय शैलों से क्रिया करके धरातलीय तरंगों में बदल जाती है। भूगर्भीय तरंगे दो प्रकार की होती है:
(अ) पी तरंगे (प्राथमिक तरंगें): ये तरंगे गैस, तरल व ठोस तीनों प्रकार के पदार्थों से होकर गुजरती है ये त्रीव गति से चलने वाली तरंगे है जो धरातल पर सबसे पहले पहुँचती है।
(ब) एस तरंगे (द्वितीयक तरंगें): ये तरंगे केवल ठोस माध्यम से ही गुजरती है ये धरातल पर पी तरंगों के पश्चात ही पहुँचती है इन तरंगों के ठोस से न गुजरने के कारण वैज्ञानिकों द्वारा भूगर्भ को समझने में सहायक होती है।
पी तरंगे जिधर चलती है उसी दिशा में ही पदार्थ पर दबाव डालती है। एस तरंगे तरंग की दिशा के समकोण पर कंपन उत्पन्न करती है। धरातलीय तरंगे भूकंपलेखी पर सबसे अंत में अभिलेखیت होती है और सर्वाधिक विनाशक होती है।
In simple words: भूकंपीय तरंगें मुख्यतः भूगर्भीय (P और S) और धरातलीय (L) प्रकार की होती हैं, जिनकी गति और गुण अलग-अलग होते हैं।
Exam Tip: P तरंगें अनुदैर्ध्य (longitudinal) और S तरंगें अनुप्रस्थ (transverse) प्रकृति की होती हैं, इसे हमेशा याद रखें।
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