CBSE Class 11 Geography Atmospheric Circulation and Weather System Hindi Assignment

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वायुदाब एवं पवनें

अतिलघुउत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. आजकल वायुदाब मापन की किस इकाई का उपयोग किया जाता है?
उत्तर: हेक्टोपास्कल
In simple words: वायुदाब को मापने के लिए आजकल हेक्टोपास्कल इकाई का प्रयोग किया जाता है।

Exam Tip: हेक्टोपास्कल (hPa) मिलीबार के बराबर होता है।

 

प्रश्न 2. पवनों के विक्षेपण संबंधी नियम को किस वैज्ञानिक ने सिद्ध किया था?
उत्तर: अमेरिकी वैज्ञानिक फैरल।
In simple words: पवनों के मुड़ने या विक्षेपित होने के नियम को फैरल ने प्रतिपादित किया था।

Exam Tip: इसे फैरल का नियम कहा जाता है।

 

प्रश्न 3. विषुवतीय निम्न वायुदाब कटिबंध को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: शांत कटिबंध (डोलड्रम)
In simple words: विषुवत वृत्त के पास कम वायुदाब और शांत हवाओं वाले क्षेत्र को डोलड्रम कहते हैं।

Exam Tip: यहाँ क्षैतिज पवनें नहीं चलती हैं, केवल संवहनीय धाराएँ ऊपर उठती हैं।

 

प्रश्न 4. कौन-सा व्यापारिक पवन ग्रीष्म ऋतु में मध्य एशिया में विकसित अत्यंत निम्न दाब केंद्र की और विषुवत वृत्त पार करके दक्षिणी पश्चिमी दिशा में बहने लगता है?
उत्तर: दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक पवनें।
In simple words: दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें विषुवत रेखा पार करके भारत में दक्षिण-पश्चिमी मानसून का रूप लेती हैं।

Exam Tip: यह मौसमी हवाओं का सबसे अच्छा उदाहरण है।

 

प्रश्न 5. किस अक्षांश पर कारिओलिस बल शून्य होता है?
उत्तर: विषुवत रेखा
In simple words: भूमध्य रेखा पर कारिओलिस बल का प्रभाव बिल्कुल नहीं होता है।

Exam Tip: ध्रुवों पर कारिओलिस बल सर्वाधिक होता है।

 

प्रश्न 6. उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की आंख का विशेष लक्षण क्या है?
उत्तर: शांत क्षेत्र (साफ मौसम)
In simple words: चक्रवात के बिल्कुल बीच का हिस्सा शांत और साफ होता है जिसे 'आंख' कहते हैं।

Exam Tip: चक्रवात की आंख में वायुदाब न्यूनतम और मौसम शांत होता है।

 

प्रश्न 7. शांत कटिबंध या डोलड्रम किसे कहते हैं?
उत्तर: वह निम्न वायुदाब प्रदेश जहाँ पवनें क्षैतिज या धरातल के साथ गति नहीं करती है बल्कि अधिक तापमान के कारण वायु हल्की होकर ऊपर उठती है। इस प्रदेश को शान्त कटिबंध कहते हैं।
In simple words: भूमध्य रेखा के पास हवाएँ ऊपर उठती हैं, क्षैतिज रूप से नहीं बहतीं, इसलिए इसे शांत क्षेत्र कहते हैं।

Exam Tip: यहाँ वायुदाब बहुत कम होता है।

 

प्रश्न 8. चीन के तट को प्रभावित करने वाले उष्ण कटिबंधीय चक्रवात को किस नाम से पुकारा जाता है?
उत्तर: टाईफून।
In simple words: चीन सागर में आने वाले भयंकर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को टाईफून कहते हैं।

Exam Tip: अलग-अलग क्षेत्रों में चक्रवातों के अलग-अलग नाम होते हैं।

 

प्रश्न 9. किन स्थानीय पवनों को हिमभक्षी अथवा फिमहरिणी कहा जाता है?
उत्तर: चिनूक (रॉकी पर्वत श्रेणी)
In simple words: चिनूक हवाएँ बर्फ को पिघला देती हैं इसलिए इन्हें हिमभक्षी कहा जाता है।

Exam Tip: ये उत्तरी अमेरिका की रॉकी पर्वतमाला के पूर्वी ढाल पर चलती हैं।

 

प्रश्न 10. वाताग्र का क्या अर्थ है?
उत्तर: जब दो भिन्न प्रकार की वायुराशियाँ मिलती है तो उनके मध्य सीमा क्षेत्र को वाताग्र कहते हैं।
In simple words: ठंडी और गर्म हवाओं के मिलने की सीमा रेखा को वाताग्र कहा जाता है।

Exam Tip: वाताग्र शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

 

प्रश्न 11. टोरेनेडो या जलस्तंभ किसे कहते हैं?
उत्तर: भयंकर तड़ितझंझा से कभी-कभी वायु आक्रामक रूप में हाथी की सूंड की तरह सर्पिल अवरोहण करती है। इसमें केन्द्र पर अत्यंत कम वायुदाब होता है और यह व्यापक रूप से भयंकर विनाशकारी होते हैं। इस परिघटना को टोरेनेडो कहते हैं।
In simple words: टोरेनेडो एक अत्यंत शक्तिशाली और विनाशकारी भंवर या बवंडर है।

Exam Tip: यह मुख्यतः कैरेबियन सागर और संयुक्त राज्य अमेरिका में आता है।

 

लघु उत्तर प्रश्न

प्रश्न 1. कारिओलिस प्रभाव किस प्रकार पवन की दिशा को प्रभावित करता है? संक्षेप में वर्णन कीजिए?
उत्तर: पवन सदैव समदाब रेखाओं के आर-पार उच्च दाब से निम्नवायुदाब की ओर नहीं चलती। वे पृथ्वी के घूर्णन के कारण विक्षेपित हो जाती हैं। पवनों के इस विक्षेपण को ही कारिओलिस बल या प्रभाव कहते हैं।
- इस बल के प्रभाव से पवन उत्तरी गोलार्ध में अपने दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में अपने बाईं ओर मुड़ जाती हैं।
- कारिओलिस बल का प्रभाव विषुवत वृत्त पर शून्य तथा ध्रुवों पर अधिकतम होता है।
- इस विक्षेप को फेरेल नामक वैज्ञानिक ने सिद्ध किया था, अतः इसे फेरेल का नियम कहते हैं।
In simple words: पृथ्वी के घूमने के कारण हवाएँ अपनी सीधी दिशा से मुड़ जाती हैं, जिसे कारिओलिस प्रभाव कहते हैं।

Exam Tip: उत्तरी गोलार्ध में दाहिने और दक्षिणी गोलार्ध में बाएं मुड़ना याद रखें।

 

प्रश्न 2. पवनों के प्रकारों का वर्णन कीजिए?
उत्तर: पवनें तीन प्रकार की होती हैं:
(1) भूमंडलीय पवन: पृथ्वी के विस्तृत क्षेत्र पर एक ही दिशा में वर्ष भर चलने वाली पवन को भूमंडलीय पवन कहते हैं। ये पवनें एक वायुदाब कटिबंध से दूसरे वायुदाब कटिबंध की ओर नियमित रूप से चलती रहती हैं। ये मुख्यतः तीन प्रकार, सन्मार्गी या व्यापारिक पवन, पछुआ पवन तथा ध्रुवीय पवनें होती हैं।
(2) सामयिक पवन: ये वे पवनें है जो ऋतु या मौसम के अनुसार अपनी दिशा परिवर्तित करती हैं। उन्हें सामयिक पवन कहते हैं। मानसून पवन इसका उदाहरण है।
(3) स्थानीय पवन: ये पवनें भूतल के गर्म व ठण्डा होने की भिन्नता से पैदा होती है और स्थानीय रूप से सीमित क्षेत्र को प्रभावित करती हैं। स्थल समीर व समुद्र समीर, लू, फोजेन, चिनूक मिस्ट्रल आदि।
In simple words: पवनें मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं - भूमंडलीय, सामयिक और स्थानीय पवनें।

Exam Tip: भूमंडलीय पवनें पूरे साल बहती हैं, सामयिक मौसम के अनुसार बदलती हैं।

 

प्रश्न 3. मानसून पवनें किसे कहते हैं इसकी तीन विशेषताएँ बताइए?
उत्तर: मानसून शब्द अरबी भाषा के मौसम शब्द से लिया गया है। जिसका अर्थ ऋतु है अतः मानसून पवनें वे पवनें है जिनकी दिशा मौसम के अनुसार बिल्कुल उलट जाती हैं। ये पवनें ग्रीष्म ऋतु के छह माह में समुद्र से स्थल की ओर तथा शीत ऋतु के छह माह में स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं। इन पवनों को दो वर्गों, ग्रीष्मकालीन मानसून तथा शीतकालीन मानसून में बाँटा जाता है। ये पवनें भारतीय उपमहाद्वीप में चलती हैं।
In simple words: मानसून हवाएँ वे हैं जो मौसम के साथ अपनी दिशा पूरी तरह बदल लेती हैं।

Exam Tip: ग्रीष्मकाल में समुद्र से स्थल और शीतकाल में स्थल से समुद्र की ओर बहती हैं।

 

प्रश्न 4. स्थल समीर व समुद्र समीर मे अन्तर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर: स्थल समीर व समुद्र समीर, स्थानीय पवन के उदाहरण हैं।
स्थल समीर: ये पवनें दिन के समय चलती हैं।
- दिन के समय जब सूर्य चमकता है तो समुद्र की अपेक्षा स्थल शीघ्र गर्म हो जाता है। जिससे स्थल पर उच्च वायुदाब प्रदेश बनता है।
- ये पवनें शुष्क होती हैं।
समुद्र समीर: ये पवनें रात के समय चलती हैं।
- रात के समय स्थल शीघ्र ठण्डा होता है तथा समुद्र देर से ठण्डा होता है जिसके कारण समुद्र पर उच्च वायुदाब प्रदेश बनता है।
- इन पवनों में आर्द्रता होती है।
In simple words: दिन में हवा समुद्र से जमीन की ओर (समुद्र समीर) और रात में जमीन से समुद्र की ओर (स्थल समीर) चलती है।

Exam Tip: दिशा याद रखें: समुद्र समीर = दिन में, स्थल समीर = रात में।

 

प्रश्न 5. पर्वत-समीर व घाटी समीर में अंतर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर: घाटी समीर: दिन के समय शांत स्वच्छ मौसम में वनस्पतिहीन सूर्यभिमुख, ढाल तेजी गर्म हो जाते हैं और इनके संपर्क में आने वाली वायु भी गर्म होकर ऊपर उठ जात हैं। इसका स्थान लेने के लिए घाटी से वायु ऊपर की ओर चल पड़ती है।
- दिन मे दो बजे इनकी गति बहुत तेज होती है।
- कभी कभी इन समरीरों के कारण बादल बन जाते हैं, और पर्वतीय ढालों पर वर्षा होने लगती है।
पर्वत समीर: रात के समय पर्वतीय ढालों की वायु तेज पार्थिव विकिरण के कारण ठंडी और भारी होकर घाटी में नीचे उतरने लगती है।
- इससे घाटी का तापमान सूर्योदय से कुछ पहले तक काफी कम हो जाता है। अतः तापमान का व्युत्क्रम हो जाता है।
- सूर्योदय से कुछ पहले इनकी गति बहुत तेज होती है। ये समीर शुष्क होती हैं।
In simple words: दिन में हवा घाटी से ऊपर पहाड़ की ओर जाती है (घाटी समीर), और रात में पहाड़ से नीचे घाटी की ओर आती है (पर्वत समीर)।

 


प्रश्न 6. चक्रवात किसे कहते हैं? उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की विशेषताएँ बताइए?
उत्तर: पवनों का ऐसा चक्र जिसमें अंदर की ओर वायुदाब कम और बाहर की ओर अधिक होता है। चक्रवात कहलाता है। यह वृत्ताकार या अण्डाकार होता है। इसमें वायु चारो और उच्च वायुदाब के क्षेत्र से केन्द्र के निम्नवायुदाब क्षेत्र की ओर चलती है। पृथ्वी के घूर्णन के कारण ये उत्तरी गोलार्ध में घड़ियों की सूइयों की विपरीत दिशा में तथा दक्षिणी गोलार्ध में घड़ियों की सूइयों के अनुसार चलती है। उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:
- इनकी उत्पत्ति सागरतल पर होती है।
- इनकी उत्पत्ति भूमध्य रेखा के आसपास निम्न अक्षांशों में होती है।
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात की दिशा पूर्व से पश्चिम (उत्तर-पश्चिम) हैं।
- ये चक्रवात भारी मूसलाधार वर्षा प्रदान करते हैं।
In simple words: चक्रवात कम वायुदाब का केंद्र होता है जहाँ हवाएँ गोल-गोल घूमती हैं।

Exam Tip: उत्तरी गोलार्ध में घड़ी की सुई के विपरीत और दक्षिणी में सुई की दिशा में घूमते हैं।

 

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 7. वायुदाब के क्षैतिज वितरण के विश्व प्रतिरूप का वर्णन कीजिए?
उत्तर: वायुमंडलीय दाब के अक्षांशिय वितरण को वायुदाब का क्षैतिज वितरण कहते हैं। विभिन्न अक्षांशों में तापमान में अंतर तथा पृथ्वी के घूर्णन के प्रभाव से पृथ्वी पर वायुदाब के सात कटिबंध बनते हैं। जो इस प्रकार हैं:
1. विषुवतीय निम्न वायुदाब कटिबंध: इस कटिबंध का विस्तार \(5^\circ\) उत्तर और \(5^\circ\) दक्षिणी अक्षांशों के मध्य है।
- इस कटिबंध में सूर्य की किरणें साल भर सीधी गिरती हैं। अतः यहाँ की वायु सदैव गर्म रहती है।
- इस कटिबंध में पवन नही चलती। केवल ऊर्ध्वाधर (लम्बवत्) संवहनीय वायुधाराएँ ही ऊपर की ओर उठती हैं। अतः यह कटिबंध पवन-विहीन शांत प्रदेश बना रहता है। इसीलिए इसे शांत कटिबंध या डोलड्र्म कहते हैं।
2. उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबंध:
- यह कटिबंध उत्तरी और दक्षिणी दोनों ही गोलार्धों में \(30^\circ\) से \(35^\circ\) के मध्य फैला है।
- इस कटिबंध में वायु लगभग शांत एवं शुष्क होती है। आकाश स्वच्छ और मेघ रहित होता है। संसार के सभी गरम मरुस्थल इसी कटिबंध में महाद्वीपों के पश्चिमी भागो में स्थित है।
3. उपध्रुवीय निम्न वायुदाब कटिबंध:
- इस कटिबंध का विस्तार उत्तरी और दक्षिणी गोलार्धों में \(60^\circ\) से \(65^\circ\) अक्षांशों के मध्य है।
- इस कटिबंध में विशेष रूप से शीतऋतु में अवदाब (चक्रवात) आते हैं।
4. ध्रुवीय उच्च वायुदाब कटिबंध:
- इनका विस्तार उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों \(90^\circ\) उत्तर तथा दक्षिण के निकटवर्ती क्षेत्रो मे है।
- तापमान यहाँ स्थायी रूप से बहुत कम रहता है। अतः धरातल सदैव हिमाच्छादित रहता है।
In simple words: तापमान और पृथ्वी के घूमने के कारण पृथ्वी पर कुल सात वायुदाब कटिबंध पाए जाते हैं।

Exam Tip: सातों कटिबंधों के नाम और उनके अक्षांशीय विस्तार को अच्छी तरह याद रखें।

 

प्रश्न 8. भूमंडलीय या प्रचलित पवनों का वर्णन कीजिए?
उत्तर: वर्षभर एक ही दिशा में बहने वाली पवनों को भूमंडलीय पवन कहते हैं। ये पवनें एक वायुदाब कटिबंध से दूसरे वायुदाब कटिबंध की ओर नियमित रूप से चला करती हैं। ये तीन प्रकार हैं:
(1) सन्मार्गी या व्यापारिक पवनें:
- उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबंधों से भूमध्य रेखीय निम्नवायुदाब कटिबंध की ओर चलने वाली पवनों को सन्मार्गी पवन कहते हैं।
- करिओलिस बल के अनुसार ये अपने पथ से विक्षेपित होकर उत्तरी गोलार्ध में उत्तर-पूर्व दिशा से तथा दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण-पूर्व दिशा में बहते हैं।
- व्यापारिक पवन को अंग्रेजी में ट्रेड विंड्स कहते हैं। जर्मन भाषा में ट्रेड का का अर्थ निश्चित मार्ग होता है।
- विषुवत वृत्त तक पहुँचते-पहुँचते ये जलवाष्प से संतृप्त हो जाते हैं तथा विषुवत वृत्त के निकट पूरे साल भारी वर्षा करते हैं।
(2) पछुआ पवनें:
- ये पवनें उपोष्ण उच्चवायुदाब कटिबंधों से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब कटिबंध की ओर बहती हैं।
- दोनो गोलार्धों में इनका विस्तार \(30^\circ\) से \(60^\circ\) अक्षांशों के मध्य होता है।
- उत्तरी गोलार्ध में इनकी दिशा दक्षिणी पश्चिमी से तथा दक्षिणी गोलार्ध में उत्तर पश्चिम से होती है।
- व्यापारिक पवनों की तरह ये पवन शक्ति और दिशा की दृष्टि से नियमित नहीं है। इस कटिबंध में प्रायः चक्रवात तथा प्रतिचक्रवात आते रहते हैं।
(3) ध्रुवीय पवनें:
- ये पवन ध्रुवीय उच्च वायुदाब कटिबंधों से उपध्रुवीय निम्नवायुदाब कटिबंधों की ओर बहते हैं।
- इनका विस्तार दोनों गोलार्धों में \(60^\circ\) अक्षांशों और ध्रुवों के मध्य है।
- बर्फ की चादरों पर से आने के कारण ये पवन अत्यंत ठंडी और शुष्क होती हैं।
In simple words: भूमंडलीय पवनें पूरे साल एक ही निश्चित दिशा में बहती हैं, जो व्यापारिक, पछुआ और ध्रुवीय पवनें होती हैं।

 


प्रश्न 9. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के विकास की अवस्थाओं का संक्षिप्त विवरण दीजिए?
उत्तर: शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति तथा प्रभाव क्षेत्र शीतोष्ण कटिबंध में ही है। ये चक्रवात उत्तरी गोलार्ध में शीतऋतु में आते हैं परन्तु दक्षिणी गोलार्ध में जलभाग के अधिक होने के कारण लगभग सारा साल चलते रहते हैं। इनकी उत्पत्ति जे. बर्कनीस के ध्रुवीय वाताग्र सिद्धांत के आधार पर समझी जा सकती है। इनकी उत्पत्ति की निम्नलिखित अवस्थाएँ हैं:
अवस्था क: इस सिद्धांत के अनुसार इनकी उत्पत्ति दो विभिन्न ताप तथा आर्द्रता वाली वायुराशियाँ के विपरीत दिशा से आकर मिलने से होती है। कोरियोलिस बल के अधीन ये पवनें एक दूसरे के लगभग सामान्यतः चलती हैं। इन दोनों वायुराशियाँ के बीच वाताग्र स्थित है।
अवस्था ख: इस अवस्था में चक्रवात बाल्यावस्था को दर्शाया गया है। इस अवस्था में उष्ण वायुराशि वाताग्र को धकेलकर शीतवायुराशि में प्रविष्ट होने का प्रयास करती है और शीतवायुराशि भारी होने के कारण नीचे आने लगती है। इससे वाताग्र तरंग के रूप में परिवर्तित होने लगता है। अब वाताग्र को स्पष्ट रूप से उष्ण एवं शीत वाताग्रों में बांटा जा सकता है। इन वाताग्रों पर उष्ण तथा आर्द्र वायु ऊपर उठने को बाध्य हो जाती है, इसलिए आकाश प्रायः मेघच्छन्न हो जाता है और वृष्टि होती है।
अवस्था ग: इस अवस्था में चक्रवात की प्रौढ़ावस्था आरंभ होती है। इस अवस्था में शीत वायु तेजी से नीचे उतरकर उष्ण वायु को परे धकेलती है जिससे उष्ण खण्ड का आकार छोटा हो जाता है।
अवस्था घ: इस अवस्था में चक्रवात की प्रौढ़ावस्था पूर्ण रूप से विकसित हो गई है। इसमें शीत वाताग्र की शीत वायु उष्ण वायु को ऊपर की ओर धकेलती है जिससे उष्ण वायु केन्द्र में स्थापित हो जाती है परिणामस्वरुप वहाँ निम्न वायुदाब केन्द्र विकसित होने लगता है और शीत वायु तेजी से केन्द्र की ओर चलने लगती है।
अवस्था ङ: इसमें चक्रवात के क्षय होने की पहली अवस्था है। शीत वायु, उष्ण वायु को तब तक धकेलती रहती है जब तक उसका भू-पृष्ठ से संपर्क टूट जाता है।
अवस्था च: इसमें चक्रवात का क्षय हो चुका है।
In simple words: शीतोष्ण चक्रवात गर्म और ठंडी हवाओं (वाताग्र) के मिलने से छह अलग-अलग अवस्थाओं में विकसित होते हैं।

Exam Tip: बर्कनीस का ध्रुवीय वाताग्र सिद्धांत शीतोष्ण चक्रवातों को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

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