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Detailed Chapter 7 जीवित जीवों में विविधता UP Board Solutions for Class 9 Science
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Class 9 Science Chapter 7 जीवित जीवों में विविधता UP Board Solutions PDF
Up Board Solutions For Class 9 Science Chapter 7 Diversity In Living Organisms
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 91)
Question 1. हम जीवधारियों का वर्गीकरण क्यों करते
Answer: जीवों को वर्गीकरण इनकी विविधता के अध्ययन को सरल बनाता है इससे हमारी एक झलक से सभी जीवों की एक तस्वीर हमारे सामने आ जाती है तथा भिन्न-भिन्न जीवों के मध्य आपसी सम्बन्धों के अध्ययन में भी सहायता करता है अतः इसी कारण हम जीवों का वर्गीकरण करते हैं।
In simple words: जीवों का वर्गीकरण उनके अध्ययन को आसान बनाता है, विभिन्न जीव-रूपों को समझने में मदद करता है, और उनके बीच के संबंधों को स्पष्ट करता है, जिससे जीव विज्ञान का अध्ययन सुव्यवस्थित हो जाता है।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण का महत्व समझने के लिए इसके तीन मुख्य लाभों - अध्ययन में सरलता, विविधता की समझ, और आपसी संबंध निर्धारण - पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 2. अपने चारों ओर फैले जीव रूपों की विभिन्नता के तीन उदाहरण दें।
Answer:
1. हम अपने आस-पास सूक्ष्म जीवाणुओं को देखते हैं जिनके आकार कुछ माइक्रोमीटर तक ही होता है। और बहुत कम समय तक ही जीवित रहते हैं, जैसे प्लाज्मोडियम, अमीबा, नीली-हरी शैवाल इत्यादि ।
2. हम 30 मीटर या इससे बड़े जीव भी देखते हैं जो काफी लम्बे समय तक जीवित रहते हैं, जैसे नीली व्हेल आदि ।
3. हमें इसे भी अधिक बड़े व हजारों वर्षों तक जीवित रहने वाले जीव भी मिलते हैं, जैसे रैड वुड आदि ।
In simple words: हमारे आस-पास सूक्ष्म जीवाणुओं (जैसे अमीबा), बड़े जीवों (जैसे नीली व्हेल), और अत्यंत दीर्घजीवी वृक्षों (जैसे रैड वुड) के रूप में जीवों की विशाल विविधता मौजूद है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न आकार, जीवनकाल और संरचना वाले जीवों के उदाहरण देकर जैव विविधता को प्रभावी ढंग से समझाएं।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 92)
Question 1. जीवों के वर्गीकरण के लिए सर्वाधिक मूलभूत लक्षण क्या ले सकता है?
(a) उनका निवास स्थान
(b) उनकी कोशिका संरचना।।
Answer: हमारे विचार के अनुसार जीवों के वर्गीकरण का आधारे उन कोशिकाओं का प्रकार है जिनके द्वारा उनका शरीर बना है क्योंकि जीव की सभी क्रियाएँ कोशिका की रचना पर ही आधारित होती हैं। जीव एककोशी है या बहुकोशी, उसमें केन्द्रक झिल्ली सहित है या झिल्ली रहित यही कोशिका के गुण जीव को प्रभावित करते हैं।
In simple words: जीवों के वर्गीकरण के लिए कोशिका संरचना सबसे मूलभूत लक्षण है, क्योंकि शरीर की सभी जैविक क्रियाएं कोशिका की बनावट पर निर्भर करती हैं, जैसे कि वह एककोशीय है या बहुकोशीय, और उसमें केंद्रक झिल्ली है या नहीं।
🎯 Exam Tip: कोशिका संरचना को वर्गीकरण के मूलभूत लक्षण के रूप में प्रस्तुत करें, उसके प्रकार (प्रोकैरियोटिक/यूकैरियोटिक) और संगठन (एककोशिकीय/बहुकोशिकीय) के महत्व पर जोर दें।
Question 2. जीवों के प्रारम्भिक विभाजन के लिए किस मृल लक्षण को आधार बनाया गया?
उनर- वह मूल लक्षण जिस पर जीवों का प्रारंभिक विभाजन आधारित है वह कोशिका का स्वभाव है अर्थात् वह कोशिका ससीम केद्रक है। ससीम केन्द्रक कोशिका में एक केन्द्रक होता है जो कोशिका के सभी कोशिकीय कार्य जैसे विभाजन की क्षमता और बहुकोशिकीय जीव बनाने की क्षमता इत्यादि गुण पाए जाते हैं जिससे फिर ये विशेष कार्य योग्य बन जाते हैं। इसलिए इस गुण को प्राथमिक गुण माना जाता है।
Answer: वह मूल लक्षण जिस पर जीवों का प्रारंभिक विभाजन आधारित है वह कोशिका का स्वभाव है अर्थात् वह कोशिका ससीम केंद्रक है। ससीम केंद्रक कोशिका में एक केंद्रक होता है जो कोशिका के सभी कोशिकीय कार्य जैसे विभाजन की क्षमता और बहुकोशिकीय जीव बनाने की क्षमता इत्यादि गुण पाए जाते हैं जिससे फिर ये विशेष कार्य योग्य बन जाते हैं। इसलिए इस गुण को प्राथमिक गुण माना जाता है।
In simple words: जीवों के प्रारंभिक वर्गीकरण का आधार कोशिका का प्रकार (ससीम केंद्रक या प्रोकैरियोटिक) है, क्योंकि ससीम केंद्रक वाली कोशिकाओं में एक स्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग होते हैं, जो उन्हें जटिल कार्य करने और बहुकोशिकीय जीव बनाने की क्षमता देते हैं।
🎯 Exam Tip: जीवों के प्रारंभिक वर्गीकरण में कोशिका के प्रकार, विशेषकर ससीम केंद्रक की उपस्थिति या अनुपस्थिति, को एक निर्णायक कारक के रूप में हाइलाइट करें।
Question 3. किस आधार पर जन्तुओं और वनस्पति को एक दूसरे से भिन्न वर्ग में रखा जाता है?
Answer: पौधों और जन्तुओं को विभिन्न वर्गों में रखने का आधार कोशिकाओं की संरचना व भोजन संश्लेषण करने की क्षमता है। यदि कोशिका की संरचना में कोर कोशिका भीति का होना, पर्णहरित पाया जाना, सूर्य के प्रकाश में भोजन का संश्लेषण करने की क्षमता से तो पौधों के वर्ग में होते हैं। दूसरी ओर जिन कोशिकाओं में कोशिका भीति के स्थान पर कोशिका झिल्ली पाई जाती है और पर्णहरित नहीं होता तथा वे अपने भोजन का संश्लेषण नहीं करते बल्कि दूसरों के स्वरा, (पौ) बनाए गए भोजन ग्रहण करते हैं जन्तु वर्ग में वर्गीकृत किए जाते हैं। इसी आधार पर पौधे व जन्तु अलग-अलग वर्ग में रखे रोए हैं।'
In simple words: पौधों और जंतुओं को उनकी कोशिका संरचना और पोषण विधि के आधार पर अलग किया जाता है; पौधों में कोशिका भित्ति और क्लोरोफिल होता है जिससे वे प्रकाश संश्लेषण कर पाते हैं, जबकि जंतुओं में कोशिका भित्ति नहीं होती, क्लोरोफिल अनुपस्थित होता है, और वे भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
🎯 Exam Tip: पौधों और जंतुओं के वर्गीकरण में कोशिका भित्ति की उपस्थिति/अनुपस्थिति और पोषण के तरीके (स्वपोषी/परपोषी) को मुख्य अंतर के रूप में स्पष्ट करें।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 93)
Question 1. आदिम जीव किन्हें कहते हैं ? ये तथाकथित उन्नत जीवों से किस प्रकार भिन्न हैं?
Answer: पुरातन जीवों को साधारण व आदिम जीव कहा जाता है क्योंकि उनमें कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। नए जीवों को जटिल या विकसित जीव कहते हैं क्योंकि उनमें अधिक परिवर्तन हुआ है और उन्होंने अभी ही विशेष डिजाइन के शरीर को ग्रहण किया है।
In simple words: आदिम जीव वे होते हैं जिनकी शारीरिक संरचना में समय के साथ बहुत कम या कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि उन्नत जीव वे होते हैं जिनकी संरचना में विकास के दौरान महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं, जिससे वे अधिक जटिल बन गए हैं।
🎯 Exam Tip: आदिम और उन्नत जीवों के बीच अंतर को स्पष्ट करते समय शारीरिक संरचना की जटिलता और विकासवादी परिवर्तनों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 2. क्या उन्नत जीव और जटिल जीव एक होते हैं?
Answer: हाँ, विकसित जीव व जटिल जीव एक समान (जैसे) ही है क्योंकि विकास के समय में ही उनकी जटिलता में वृद्धि हुई है। अतः यह कहना गलत नहीं होगा। कि नए बने या विकसित जीव ही अधिक जटिल जीव हैं।
In simple words: हाँ, उन्नत जीव और जटिल जीव एक ही अवधारणा को दर्शाते हैं; विकास की प्रक्रिया में जीवों की शारीरिक संरचना में जटिलता बढ़ती जाती है, इसलिए जो जीव अधिक विकसित होते हैं, वे उतने ही अधिक जटिल भी होते हैं।
🎯 Exam Tip: उन्नत और जटिल जीव को समानार्थक अवधारणाओं के रूप में प्रस्तुत करें, यह बताते हुए कि विकास के साथ-साथ जीवों की संरचनात्मक जटिलता बढ़ती है।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 96)
Question 1. मोनेरा या प्रोटिस्टा जैसे जीवों के वर्गीकरण के मापदंड क्या हैं ?
Answer: जीवों को मोनेरा या प्रोटिस्टा किंगडम में वर्गीकृत करने का आधार उनकी कोशिका संरचना, पोषण विधि, पोषण का स्रोत और शारीरिक रचना है। मोनेरा को आर्किबैक्टीरीय और यूबैक्टीरिया (जीवाणु) में विभाजित किया जाता है।
In simple words: मोनेरा और प्रोटिस्टा के वर्गीकरण के लिए कोशिका संरचना, पोषण का तरीका (जैसे स्वपोषी या परपोषी), पोषण का स्रोत, और शरीर की बुनियादी रचना जैसे लक्षणों का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: मोनेरा और प्रोटिस्टा के वर्गीकरण मानदंड में कोशिका प्रकार, पोषण और शरीर संगठन को मुख्य बिंदु के रूप में शामिल करें।
Question 2. प्रकाश संश्लेषण करने वाले एककोशिक, यूकैरियोदी जीवों को आप किस जगत में संगै ?
Answer: पादप जगत में रखते हैं।
In simple words: प्रकाश संश्लेषण करने वाले एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीवों को पादप जगत (Plant Kingdom) में रखा जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण और यूकैरियोटिक प्रकृति को पादप जगत के निर्धारण के प्रमुख लक्षणों के रूप में याद रखें।
Question 3. वर्गीकरण के विभिन्न पदानुक्रमों में किस समूहमें सर्वाधिक समान लक्षण वाले सबसे कम जीवों को और किस समूह में सबसे ज्यादा संख्या में जीवों को रखा जायेगा ?
Answer: स्पीसीज में सबसे कम जीव लेकिन अधिकतम समानताएँ वाले जीव रखे गये हैं। जरात में सबसे अधिक जीव रखे जाते हैं।
In simple words: वर्गीकरण पदानुक्रम में, 'स्पीशीज' (जाति) वह समूह है जिसमें सबसे कम जीव होते हैं लेकिन उनमें अधिकतम समानताएँ पाई जाती हैं, जबकि 'जगत' वह समूह है जिसमें सबसे अधिक संख्या में जीव रखे जाते हैं।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण पदानुक्रम को समझने के लिए, याद रखें कि 'जाति' सबसे विशिष्ट और 'जगत' सबसे व्यापक समूह है।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 99)
Question 1. सरलतम पौधों को किस वर्ग में रखा गया है ?
Answer: सरलतम पौधे थैलोफाइटा वर्ग में रखे गये हैं।
In simple words: सबसे सरल पौधों को थैलोफाइटा वर्ग में वर्गीकृत किया गया है, जिनकी शारीरिक संरचना जड़, तना और पत्ती में विभेदित नहीं होती।
🎯 Exam Tip: पादप जगत के वर्गीकरण में थैलोफाइटा को सबसे निचले और सरलतम वर्ग के रूप में याद रखें।
Question 2. टेरिडोफाइटा और फैनरोगैमस में क्या अन्तर है ?
Answer:
टेरिडोफाइटा - इसमें भ्रूण (एम्ब्रीओ) नग्न होता है जिसे बी एणु कहते हैं। इस डिवीजन में देह तना, पत्तियों व जड़ों से बनी है। संवहन तंत्र विद्यमान होता है। बीज नहीं बनते। इसीलिए इन्हें क्रिप्टोगेमस (बिना बीज) पौधे कहते हैं। सभी फर्न इसी से सम्बन्धित हैं।
फैनरोगेम्स - इनमें देह असली तना, पत्तियाँ व जड़ में विभाजित होती है। इसमें जनन ऊतक बीज बनाते है। निषेवन के पश्चात् भ्रूण बनता है जिसमें संगृहीत भोजन होता है जो अकुरण में सहायक होता है। अतः यह टेरिडोफाइटा से अधिक विकसित होता है। इसमें संवहन तंत्र भी अच्छी प्रकार विकसित होता है। बीज फलों में बन्द होते या नहीं इसी आधार पर इन्हें वर्गीकृत करते हैं।
In simple words: टेरिडोफाइटा में बीज नहीं बनते और ये क्रिप्टोगेमस समूह में आते हैं, जबकि फैनरोगैम्स बीज उत्पन्न करते हैं, जो अंकुरण में सहायक होते हैं, और इनमें वास्तविक जड़, तना और पत्तियां होती हैं।
🎯 Exam Tip: टेरिडोफाइटा और फैनरोगैम्स के बीच मुख्य अंतर बीज की उपस्थिति/अनुपस्थिति, शारीरिक संगठन और विकास के स्तर पर केंद्रित है।
Question 3. जिम्नोस्पर्म और एन्जियोस्पर्म एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं ?
Answer: जैसे तो दोनों वर्ग (डिवीजन) फैनरोगेम्स में पौधे जड़, तने, पत्तियाँ व बीज में विभाजित होते हैं, फिर भी बीजों के अन्तर के आधार पर इन्हें दो वर्गों में विभाजित किया जाता है
1. जिम्नोस्पर्म - इनमें बीज फलों में बन्द नहीं होते। अतः इन्हें नग्नबीजी भी कहते हैं। ये पौधे काष्ठीय व सदाबहार होते हैं। उदाहरण-पाइनस, साइकस, सिड्स ।
2. एन्जियोस्पर्म - इनमें बीज फलों में बन्द होते हैं, अतः ये आवृतबीजी कहलाते हैं। बीजों में बीजपत्रों की संख्या के आधार पर इन्हें दो वर्गों में बाँटा गया है-
• एकबीजपत्र वाले एक बीजपत्री और
• दो बीजपत्र वाले पौधे द्विबीजपत्री कहलाते हैं।
अतः दोनों में से कुछ सीमा तक जिम्नोस्पर्म अधिक विकसित समझे जाते हैं। उदाहरण- पैफियोपडिलम (एकबीजपत्री), आइपोमिया (द्विबीजपत्री) ।
In simple words: जिम्नोस्पर्म और एन्जियोस्पर्म दोनों बीजधारी पौधे हैं, लेकिन जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न होते हैं (फलों से ढके नहीं होते), जबकि एन्जियोस्पर्म में बीज फलों के अंदर सुरक्षित होते हैं, और इन्हें बीजपत्रों की संख्या के आधार पर एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री में बांटा जाता है।
🎯 Exam Tip: जिम्नोस्पर्म और एन्जियोस्पर्म में मुख्य भेद बीज की सुरक्षा (नग्न या फल के अंदर) और एन्जियोस्पर्म में बीजपत्रों की संख्या पर केंद्रित है।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 105)
Question 1. पोरीफेरा और सिलेन्ट्रेटा वर्ग के जन्तुओं में क्या अन्तर है ?
Answer: दोनों वर्ग के जन्तुओं में निम्नलिखित अन्तर है-
| पोरीफेरा | सीलेन्ट्रेटा |
| (1) देह में सभी जगह छिद्र होते हैं और शिखर पर एक बड़ा मुख होता है। | (1) देह में कोई छिद्र नहीं होता बस एक केद्रीय मुख होता है। |
| (2) जल संचारण के लिए इनमें एक नाल तंत्र होता है जिससे इन्हें भोजन व ऑक्सीजन मिलती है। | (2) देह के मध्य में एक जठरवाही गुहिका होती है। |
| (3) गुहिका एक परतीय होती है। | (3) गुहिका द्विपरतीय होती है। |
| (4) ये सरल बहुकोशीय जीव हैं और ऊतक नहीं बनाते। | (4) इनमें विभिन्नता अधिक होती है। |
| (5) कंकाल चनेदार या सिलिकामय कन्टिका या स्पंजिन तन्तुओं से बना है। | (5) कंकाल कठोर नहीं होता। मुख के चारों ओर और देह पर विशेष दंशकोकग्क होती है। |
| (6) सभी स्थान बद्ध होते हैं। | (6) स्थानबद्ध या संघजीवी होते हैं। |
| उदाहरण - साइकॉन, स्पांजिला, यूप्लेक्टेला आदि । | उदाहरण-हाइड्रा, समुद्री एनीमोन, कोरल, जेली फिश आदि। |
In simple words: पोरीफेरा (स्पंज) में शरीर पर कई छिद्र और एक नाल तंत्र होता है जिससे वे भोजन प्राप्त करते हैं, जबकि सीलेन्ट्रेटा (जैसे हाइड्रा) में एक केंद्रीय गुहा और मुख के चारों ओर दंश कोशिकाएं होती हैं।
🎯 Exam Tip: पोरीफेरा और सीलेन्ट्रेटा के अंतर को याद करते समय छिद्रों की उपस्थिति, नाल तंत्र बनाम केंद्रीय गुहा, और दंश कोशिकाओं की विशेषता पर ध्यान दें।
Question 2. एनीलिडा के जन्तु आर्थोपोडा के जन्तुओं से किस प्रकार भिन्न हैं?
Answer: एनीलिडा के जीव आर्थोपोडा के जीवों से निम्न गुणों में भिन्न है-
| एनीलिडा | आर्थोपोडा |
| (1) ये लम्बे सखंड देह वाले प्राणी हैं। इनकी द्विपाश्विक सममिति है। | (1) ये लम्बे देह वाले प्राणी नहीं हैं परन्तु द्विपाश्विक सममिति हैं। |
| (2) कुछ अग्रखंड केन्द्रित होकर सिर बनाते हैं। | (2) देह सखंड और सारे खंड दो भागों शिरोवक्ष व उदर में विभाजित है। |
| (3) इनके पैर सखंड नहीं होते। | (3) इनके पैर सखंड होते हैं।' |
| (4) असली देहगुहा वाले प्रथम प्राणी हैं। | (4) देहगुहा कम है और रक्त से भरी है। |
| (5) इनमें बाह्य कंकाल नहीं होता। | (5) बाह्य कंकाल काईटिनी है। |
| (6) कम विकसित तंत्रिका तंत्र होता है। | (6) देह का अन्त भाग मस्तिष्क व संवेदी अंगों के लिए एक विशेष सिर होता है। |
| (7) ये गीली मिट्टी अलवण जल या लवण जल में पाए जाते हैं। | (7) ये जमीन पर, मिट्टी में, लवण, अलवण, जल व अन्य सभी जगह पाए जाते हैं। कुछ दूसरे परजीवी भी होते हैं। |
| उदाहरण - केंचुआ, जोंक, नेरीस आदि। | उदाहरण- झींगा, बिच्छु, मकड़ी, मक्खी, तिलचट्टा, कनखजूरा, तितली आदि। |
In simple words: एनीलिडा में शरीर लंबा, खंडित, बिना बाह्य कंकाल और अखंडित पैर होते हैं, जैसे केंचुआ, जबकि आर्थोपोडा में खंडित शरीर (शिरोवक्ष और उदर), काइटिन का बाह्य कंकाल और खंडित पैर होते हैं, जैसे कीट और मकड़ी।
🎯 Exam Tip: एनीलिडा और आर्थोपोडा के अंतर को याद करते समय बाह्य कंकाल, शरीर के खंडन, पैरों के प्रकार और निवास स्थान पर जोर दें।
Question 3. जल-स्थलचर और सरीसृप में क्या अंतर हैं ?
Answer: जल-स्थलचर और सरीसृप में निम्नलिखित अंतर हैं-
| जल-स्थलचर | सरीसृप |
| (1) त्वचा नम, लचीली तथा पतली होती है। यह श्वास क्रिया में सहायक होती है। बाह्य कंकाल का अभाव होता है। | (1) त्वचा शुष्क, मोटी तथा शल्कीय होती है। यह श्वास क्रिया में सहायक नहीं होती। बाह्य कंकाल शल्कों से बना होता है। |
| (2) ये जल तथा स्थल दोनों स्थानों पर रह सकते हैं। | (2) ये मुख्यतया स्थल पर रहते हैं। ये रेंगकर चलने वाले प्राणी हैं। |
| (3) हृदय में दो अलिन्द तथा एक निलय होता। | (3) हृदय में दो अलिन्द तथा अपूर्ण रूप से विभाजित निलय होता है। |
| (4) श्वसन क्लोम, त्वचा अथवा फेफडों द्वारा होता है। | (4) श्वसन फेफड़ों द्वारा होता है। |
| (5) ये अंडे सदैव जल में देते हैं। अंडे कवच रहित होते हैं। | (5) ये स्थल पर अंडे देते हैं। अंडे कवच युक्त होते हैं। |
| उदाहरण - मेंढक, सैलामेंडर, टोड इत्यादि । | उदाहरण - कछुआ, साँप, छिपकली, मगरमच्छ आदि। |
In simple words: जल-स्थलचरों की त्वचा नम और चिकनी होती है, वे जल व स्थल दोनों में रहते हैं, और जल में कवच रहित अंडे देते हैं, जबकि सरीसृपों की त्वचा सूखी और शल्कीय होती है, वे मुख्य रूप से स्थल पर रेंगते हैं, और स्थल पर कवच युक्त अंडे देते हैं।
🎯 Exam Tip: जल-स्थलचर और सरीसृप के अंतर को स्पष्ट करते समय त्वचा की प्रकृति, निवास स्थान, श्वसन अंग और अंडे देने की विधि पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 4. पक्षी वर्ग और स्तनपायी वर्ग के जंतुओं में क्या अंतर है?
Answer: पक्षी तथा स्तनपायी वर्ग के जंतुओं में निम्नलिखित अंतर हैं-
| पक्षी | स्तनपायी |
| (1) शरीर परों (feathers) से ढका रहता है। | (1) शरीर बालों (hairs) से ढका रहता है। |
| (2) अग्रपाद पंख (wing) में रूपांतरित हो जाते हैं जो उड़ने में सहायक होते हैं। | (2) अग्रपाद प्रचलन या वस्तुओं को पकड़ने के लिए उपयोजित होते हैं। |
| (3) जबड़े चोंच के रूप में बदल जाते हैं। चोंच में दाँत नहीं होते। | (3) जबड़े दाँत युक्त होते हैं। दाँत विषमदन्ती होते हैं। |
| (4) कर्ण पल्लव तथा स्तनग्रन्थियाँ नहीं पाई जाती हैं। | (4) कर्ण पल्लव तथा स्तनग्रन्थियाँ पाई जाती हैं। |
| (5) ये अंडज (oviparous) होते हैं। | (5) ये जरायुज (viviparous) होते हैं। |
| उदाहरण-ऑस्ट्रिच, कबूतर, गौरैया आदि। | उदाहरण-मनुष्य, बिल्ली, ह्वेल, चमगादड़ आदि। |
In simple words: पक्षियों का शरीर पंखों से ढका होता है, अग्रपाद पंखों में रूपांतरित होते हैं, चोंच होती है, और वे अंडे देते हैं; जबकि स्तनधारियों का शरीर बालों से ढका होता है, अग्रपाद चलने या पकड़ने के लिए होते हैं, दाँत होते हैं, कर्ण पल्लव और स्तन ग्रंथियां होती हैं, और वे सीधे बच्चों को जन्म देते हैं।
🎯 Exam Tip: पक्षियों और स्तनधारियों के बीच अंतर को स्पष्ट करते समय शरीर के आवरण, अग्रपादों की संरचना, मुखांग, ग्रंथियों की उपस्थिति और प्रजनन विधि पर ध्यान केंद्रित करें।
अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 107)
Question 1. जीवों के वर्गीकरण से क्या लाभ है ?
Answer: जीवों के वर्गीकरण के निम्नलिखित लाभ हैं
1. वर्गीकरण करने से जीवों का अध्ययन करना सरल हो जाता है।
2. वर्गीकरण सभी जीवों की एकदम स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है।
3. इससे विभिन्न जीवों के समूहों के बीच आपसी सम्बन्धों के बारे में जानकारी मिलती है।
4. यह अन्य जैविक विज्ञान के विकास को आधार प्रदान करता है।
In simple words: जीवों का वर्गीकरण उनके अध्ययन को सरल बनाता है, सभी जीवों की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है, विभिन्न समूहों के बीच संबंधों को समझने में मदद करता है, और जैविक विज्ञानों के विकास का आधार बनता है।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के लाभों को मुख्य रूप से अध्ययन में सरलता, जैव विविधता की स्पष्टता, विकासवादी संबंधों की समझ और वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 2. वर्गीकरण में पदानुक्रम निर्धारण के लिए दो लक्षणों में से आप किस लक्षण का चयन करेंगे ?
Answer: वर्गीकरण के पदानुक्रम के लक्षणों का चयन हम निम्नरूप से कर सकते हैं
1. हम जीव के निर्माण की इकाई अर्थात् कोशिका को ध्यान में रखेंगे, इसके बाहर कोशिका झिल्ली है या कोशिका भित्ति, इसमें केन्द्रक है कोशिकांगों में झिल्ली है, उनके कार्य और उनकी उत्पत्ति जैसे सभी गुणों का अध्ययन करेंगे। इस प्रकार इन गुणों के विकास के आधार पर ही उनका वर्गीकरण करेंगे।
2. हमें यह भी देखना है अर्थात् अध्ययन करना होगा कि जीव स्वपोषी (स्वयं भोजन बनाना) है या परपोषी (दूसरों को बनाया भोजन ग्रहण करना)। यह विशेष गुण भी वर्गीकरण में सहायता करता है।
In simple words: वर्गीकरण पदानुक्रम के लिए हम कोशिका की संरचना (जैसे कोशिका भित्ति/झिल्ली, केंद्रक और कोशिकांग) और पोषण विधि (स्वपोषी या परपोषी) जैसे लक्षणों का चयन करेंगे, क्योंकि ये जीवों की बुनियादी विशेषताओं और विकासवादी संबंधों को दर्शाते हैं।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के लिए कोशिका की जटिलता और पोषण विधि को प्रमुख लक्षणों के रूप में चुनें, यह दिखाते हुए कि ये जीवों के मूलभूत जैविक कार्यों को कैसे प्रभावित करते हैं।
Question 3. जीवों के पाँच जगत में वर्गीकरण के आधार की व्याख्या कीजिए ।
Answer: जीवों को पाँच मुख्य किंगडम में वर्गीकृत करने के लिए प्रयोग किए गए कुछ आधार निम्नलिखित है-
1. वे जीव असीमकेन्द्री कोशिका से बने हैं या ससीमकेन्द्री कोशिका से। यदि उनकी संरचना असीमकेन्द्री कोशिका से बनी है तो वे प्राथमिक श्रेणी में आते हैं परन्तु यदि वे ससीमकेन्द्री कोशिका से बने हैं तो वे अपेक्षाकृत विकसित जीव होंगे ।
2. जीवों की रचना एक कोशिका से है या वे बहुकोशी हैं। एककोशीय जीव निम्न फाइलमों में होंगे और बहुकोशीय जटिल होंगे।
3. कोशिकाओं के बाहर कोशिका भित्ति या कोशिका झिल्ली, यदि बाहर कोशिका भित्ति होगी तो उनका आधार कठोर व अधिक सुरक्षात्मक होगा, साथ-ही-साथ अधिक जटिल व विकसित होंगे।
4. जीव स्वपोषी है या परपोषी । स्वपोषी पौधों की श्रेणी व परपोषी जन्तुओं की किंगडम में होंगे।
In simple words: पाँच जगत वर्गीकरण के मुख्य आधार कोशिका का प्रकार (प्रोकैरियोटिक/यूकैरियोटिक), शरीर का संगठन (एककोशिकीय/बहुकोशिकीय), कोशिका भित्ति की उपस्थिति/अनुपस्थिति, और पोषण की विधि (स्वपोषी/परपोषी) हैं।
🎯 Exam Tip: पाँच जगत वर्गीकरण के आधारों में कोशिका प्रकार, कोशिकीय संगठन, कोशिका भित्ति और पोषण विधि को प्रमुख बिंदुओं के रूप में याद रखें।
Question 4. पादप जगत के प्रमुख वर्ग कौन हैं? इस वर्गीकरण का क्या आधार है?
Answer: पादप प्रमुख पाँच वर्ग में बाँटे जाते हैं। ये पाँच वर्ग निम्नलिखित हैं
1. थैलोफाइटा - इस प्रकार के पौधों के शरीर में विभाजन नहीं होता ये थैलस के रूप में होते हैं जैसे शैवाल, काई ।
2. ब्रायोफाइटा - इसमें पौधे का शरीर तने व पत्तियों के रूप में विभाजित होता है। कोई जल संवहन के लिए ऊतक विशेष नहीं होते, जैसे-मार्केशिया, मॉस इत्यादि ।
3. टैरीडोफाइटा - पादप जड़, तना व पत्तियों के रूप में बँटा होता है। जल संवहन के लिए विशेष ऊतक पाए जाते हैं। जैसे-मारसीलिया आदि ।
ऊपरलिखित तीन विभाजन के पौधों के बीज नहीं होते। इनमें केवल नग्न भुण होता है जिन्हें बीजाणु (spores) कहते हैं। इनको सम्मिलित रूप से क्रिप्टोगेम्स कहते हैं। जिन पौधों में बीज पाए जाते हैं उन्हें फैनरोगेम्स कहते हैं। इनको दो भागों में बाँटते हैं-
(i) जिम्नोस्पर्म
(ii) एन्जियोस्पर्म
(i) जिम्नोस्पर्म - इन पौधों के बीज नग्न होते हैं। ये पौधे सदाबहार व काष्ठीय होते हैं जैसे-पाइनस व साइकस आदि ।
(ii) एन्जियोस्पर्म - इन पौधों के बीज आवृतबीजी होते हैं। पौधों में फल व फूल भी लगते हैं। बीजों में एक या दो बीजपत्र पाए जाते हैं जो अंकुरण में सहायता करते हैं। एक बीजपत्र वाले बीजों को एकबीजपत्री (गेहूं, चावल आदि) और दो बीजपत्र वालों को द्विबीजपत्री (चना, मटर, मॅग आदि) कहते हैं।
वर्गीकरण का आधार - विभाजनों का पहला आधार है कि पौधे का शरीर जड़, तने, और पत्ती में विभाजित है। या नहीं। दूसरे स्तर पर देखते हैं कि जल व अन्य पदार्थों के संवहन के लिए विशेष प्रकार के ऊतक उपस्थित हैं। तीसरे स्तर पर हमारा आधार होगा कि क्या पौधा बीज उत्पन्न करने में सक्षम है यदि है तो वे बीज आवृतबीजी हैं या नग्नबीजी । आवृतबीजी है तो उनमें कितने बीजपत्र (एक या दो) हैं। यह सभी पौधों के विभाजन के मुख्य आधार हैं।
In simple words: पादप जगत को थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा (ये बीज रहित क्रिप्टोगेम्स हैं), जिम्नोस्पर्म (नग्न बीज) और एन्जियोस्पर्म (फल के अंदर बीज, एकबीजपत्री/द्विबीजपत्री) में वर्गीकृत किया जाता है। वर्गीकरण का आधार शरीर का विभाजन (जड़, तना, पत्ती), संवहन ऊतकों की उपस्थिति, और बीज उत्पादन की क्षमता व बीजपत्रों की संख्या है।
🎯 Exam Tip: पादप जगत के वर्गीकरण में थैलोफाइटा से एंजियोस्पर्म तक के क्रम को शारीरिक जटिलता, संवहन ऊतकों और बीज निर्माण की विशेषताओं के साथ जोड़कर याद रखें।
Question 5. जन्तुओं और पौधों के वर्गीकरण के आधारों में मूल अन्तर क्या है?
Answer: पौधों के विभाजन का आधार जन्तुओं के विभाजन (वकर) आधार से भिन्न है। इस विभाजन का मुख्य आः उनकी रचना की उगलता है। पौधों की कोशिका में कोशिका भित्ति होती है और ये अपना भोजन पर्णहरिम (हरावर्णक) की सहायता से सूर्य के प्रकाश में भोजन को संश्लेषण करते हैं। ौधे स्थिर होते हैं। जन्तु की को में रोई कोशिका भित्ति ही होती, ये पौधों द्वारा, भोजन ग्रहण करते हैं (परपोषी)। ये गति कर सकते हैं। इन सभी गुणों के अन्तर को ही वर्गीकरण का आधार माना जाता है जिससे वर्ग, उराव इत्यादि में जन्तुओं को वर्गीकृत किया जाता है।
In simple words: पौधों और जंतुओं के वर्गीकरण में मुख्य अंतर उनकी कोशिका भित्ति, पोषण विधि (स्वपोषी बनाम परपोषी) और गतिशीलता है; पौधों में कोशिका भित्ति होती है, वे स्वपोषी होते हैं और स्थिर रहते हैं, जबकि जंतुओं में कोशिका भित्ति नहीं होती, वे परपोषी होते हैं और गतिशील होते हैं।
🎯 Exam Tip: पौधों और जंतुओं के वर्गीकरण के अंतर को याद करते समय कोशिका भित्ति, पोषण के तरीके (प्रकाश संश्लेषण बनाम भोजन ग्रहण) और गतिशीलता पर ध्यान दें।
Question 6. वटा (कशेरुक प्राणी) को विभिन्न वर्गों में बाँटने के आधार की व्याख्या कीजिए।
Answer: सभी वर्टीब्रेटा (कशेरुक प्राणियों) में मेरुदंड पाई जाती है। यह पृष्ठीय खोखली मेरुजु को घेरे रहती है। ग्रसनी विदर या क्लोम विदर प्रायः भ्रूण अवस्था में ही पाए जाते हैं। जलीय जंतुओं; जैसे मछली की वयस्क अवस्था में क्लोम (gills) पाए जाते हैं। मेरुरज्जु का अग्रभाग मस्तिष्क बनाता है। सिर पर नेत्र, कर्ण तथा घ्राणग्राही आदि संवेदी अंग होते हैं। अंतः कंकाल सुविकसित होता है। पेशियाँ अंतः कंकाल से लगी होती हैं। पेशियाँ तथा अस्थियाँ प्रचलन में सहायक होती हैं। वर्टीबेटा के वर्गीकरण के मुख्य आधार - वर्टीब्रेटा के वर्गीकरण के मुख्य आधार निम्नलिखित हैं-
1. वयस्क अवस्था में या भ्रूण अवस्था में क्लोम विदर का पाया जाना।
2. त्वचा पर श्लेष्म ग्रन्थियाँ, स्वेद ग्रन्थियाँ, तैल ग्रन्थियाँ, दुग्ध ग्रन्थियाँ आदि का पाया जाना । ।
3. बाह्य काल शल्क, हॉर्नीप्लेट्स, पर (feathers), बाल से बना हुआ ।
4. अंतः कंकाल उपास्थि या अस्थि से बना हुआ ।
5. श्वसन क्लोम, त्वचा या फेफड़ों द्वारा।
6. हृदय में वेश्मों की संख्या
7. अग्रपादों का पंखों में रूपांतरण।
8. असमतापी या समतापी ।
9. अंडज या जरायुज ।
10. अंडे जल में देना या जल से बाहर देना। अंडे कवचरहित या कवचयुक्त ।
In simple words: कशेरुक प्राणियों का वर्गीकरण मुख्य रूप से मेरुदंड, क्लोम विदर (भ्रूण या वयस्क अवस्था में), त्वचा की ग्रंथियों/आवरण (जैसे शल्क, पंख, बाल), अंतःकंकाल की संरचना, श्वसन अंग, हृदय कक्षों की संख्या, अग्रपादों का रूपांतरण, शरीर का तापमान (असमतापी/समतापी), और प्रजनन विधि (अंडज/जरायुज, अंडे का प्रकार) के आधार पर किया जाता है।
🎯 Exam Tip: वर्टीब्रेटा के वर्गीकरण के आधारों में मेरुदंड, श्वसन अंग, हृदय की संरचना, त्वचा के आवरण और प्रजनन विधि जैसे लक्षणों को प्रमुखता से दर्शाएं।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जीतन की विविधता किसे कहते हैं ?
अथवा
नैव विविधता' से क्या समझते हो ?
Answer: नै विविधता या जीवन की विविधता (Diversits of Life) - जीवों में पाई जाने वाली विभिन्नता या अग्नता को सीवन की विविधता या जैव विविधता रूदने हैं।
In simple words: जैव विविधता का अर्थ है जीवों में पाई जाने वाली विशाल विविधता, जिसमें विभिन्न प्रकार के जीव, उनके निवास स्थान और उनके बीच के आनुवंशिक अंतर शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: जैव विविधता की परिभाषा देते समय 'विविधता' और 'विभिन्नता' जैसे शब्दों का प्रयोग करें और स्पष्ट करें कि यह पृथ्वी पर जीवन के विभिन्न रूपों को संदर्भित करती है।
Question 2. जीवो के वर्गीकरण से क्या तात्पर्य है ?
Answer: लीटों का वर्गीकरण (Classification of living organisms) - नीवों को खोजकर पहचानने, नाम देने तथा इनके गुणों एवं आदतों का पता लगाकर समूहबद्ध करने की क्रिया के जीवों का वर्गीकरण कहते हैं।
In simple words: जीवों का वर्गीकरण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें जीवों को उनके गुणों, आदतों और विशेषताओं के आधार पर पहचानना, नाम देना और विभिन्न समूहों में व्यवस्थित करना शामिल है।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण को जीवों की पहचान, नामकरण और समूहबद्ध करने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित करें, जो उनके गुणों पर आधारित हो।
Question 3. र्गिकी से आप क्या सम्झते हैं ?
Answer: वर्गकी (Taxonomy) - विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत जीवों के वर्गीकरण का अध्ययन किया जाता है, वर्गिकी कहलाती है।
In simple words: वर्गिकी जीव विज्ञान की वह शाखा है जो जीवों के वर्गीकरण, पहचान, नामकरण और उन्हें विभिन्न समूहों में व्यवस्थित करने का अध्ययन करती है।
🎯 Exam Tip: वर्गिकी को जीव विज्ञान की एक शाखा के रूप में परिभाषित करें जो वर्गीकरण के सिद्धांतों और विधियों से संबंधित है।
Question 4. विकासात्मक वर्गीकरण किसे कहते हैं ?
Answer: विकासात्मक वर्गीकरण (Evolutionary Classification) - जो वर्गीकरण विकास के आधार पर किया जाता है उसे विकासात्मक वर्गीकरण कहते हैं।
In simple words: विकासात्मक वर्गीकरण वह विधि है जिसमें जीवों को उनके विकासवादी इतिहास और उनके पूर्वजों से उनके संबंधों के आधार पर समूहीकृत किया जाता है।
🎯 Exam Tip: विकासात्मक वर्गीकरण को परिभाषित करते समय 'विकास' या 'विकासवादी संबंध' को केंद्रीय आधार के रूप में हाइलाइट करें।
Question 5. वर्गीकरण का पिता किसे कहा जाता है?
Answer: कैरोलस लीनियस को वर्गीकरण का पिता कहा जाता है।
In simple words: स्वीडिश वनस्पतिशास्त्री और चिकित्सक कैरोलस लीनियस को आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली विकसित करने के लिए 'वर्गीकरण का पिता' कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के पिता के रूप में कैरोलस लीनियस का नाम सीधे और स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 6. जगत-मोनेरा के उदाहरण दीजिए।
Answer: जगत-मोनेरा के उदाहरण-जीवाणु, नीली- हरी शैवाल ।
In simple words: जगत मोनेरा के उदाहरणों में जीवाणु और नीली-हरी शैवाल शामिल हैं, जो प्रोकैरियोटिक कोशिका संरचना वाले एककोशिकीय जीव हैं।
🎯 Exam Tip: मोनेरा के उदाहरणों में हमेशा प्रोकैरियोटिक जीवों जैसे जीवाणु और सायनोबैक्टीरिया (नीली-हरी शैवाल) को शामिल करें।
Question 7. जगत-प्रोटिस्टा के उदाहरण दीजिए ।
Answer: जगत-प्रोटिस्टा के उदाहरण-अमीबा, पैरामीशियम ।
In simple words: जगत प्रोटिस्टा के उदाहरणों में अमीबा और पैरामीशियम जैसे एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव शामिल हैं, जो विविध प्रकार के पोषण और गतिशीलता दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटिस्टा के उदाहरणों को याद रखते समय अमीबा और पैरामीशियम जैसे एकल-कोशिकीय यूकैरियोटिक जीवों पर ध्यान दें।
Question 8. जगत-प्लाण्टी के उदाहरण दीजिए।
Answer: जगत- प्लाण्टी के उदाहरण-शैवाल, आवृतबीजी पौधे ।
In simple words: जगत प्लांटी (पादप जगत) के उदाहरणों में शैवाल और आवृतबीजी पौधे जैसे सभी प्रकाश संश्लेषक, बहुकोशिकीय यूकैरियोटिक जीव शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: प्लांटी जगत के उदाहरणों में सभी प्रकार के पौधे, विशेषकर शैवाल और आवृतबीजी पौधे, शामिल करें जो प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
Question 9. जगत-फंजाई के उदाहरण दीजिए।
Answer: जगत-फजाई के उदाहरण-सभी कवक ।
In simple words: जगत फंजाई के उदाहरणों में सभी प्रकार के कवक शामिल हैं, जो विषमपोषी, यूकेरियोटिक जीव होते हैं और मृत पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं।
🎯 Exam Tip: फंजाई जगत के उदाहरण के रूप में 'सभी कवक' को सीधे याद रखें, जो मृतोपजीवी होते हैं।
Question 10. जगत-ऐनीमेलिया के उदाहरण दीजिए ।
Answer: जगत-ऐनीमेलिया के उदाहरण-सभी बहुकोशिकीय जन्तु जैसे-फीताकृमि, केंचुआ इत्यादि ।
In simple words: जगत एनिमेलिया के उदाहरणों में सभी बहुकोशिकीय, विषमपोषी जंतु शामिल हैं, जैसे फीताकृमि और केंचुआ, जो गति करने और भोजन ग्रहण करने में सक्षम होते हैं।
🎯 Exam Tip: एनिमेलिया जगत के उदाहरणों में फीताकृमि और केंचुआ जैसे बहुकोशिकीय, विषमपोषी जीवों को शामिल करें।
Question 11. सर्वप्रथम नामकरण पद्धति किसने प्रारम्भ की ?
Answer: सर्वप्रथम नामकरण की पद्धति कैरोलस लीनियस ने प्रारम्भ की।
In simple words: जीवों के वैज्ञानिक नामकरण की पद्धति, जिसे द्विनाम पद्धति कहा जाता है, को पहली बार कैरोलस लीनियस ने शुरू किया था।
🎯 Exam Tip: नामकरण पद्धति के प्रवर्तक के रूप में कैरोलस लीनियस का नाम याद रखें।
Question 12. ब्रायोफाइटा के उदाहरण दीजिए।
Answer: ब्रायोफाइटा के उदाहरण-मॉस ।
In simple words: ब्रायोफाइटा के उदाहरणों में मॉस शामिल है, जो छोटे, नम स्थानों पर उगने वाले गैर-संवहनी पौधे हैं।
🎯 Exam Tip: ब्रायोफाइटा के मुख्य उदाहरण के रूप में मॉस को याद रखें, जो पौधों के उभयचर के रूप में जाने जाते हैं।
Question 13. टेरिडोफाइटा के उदाहरण दीजिए ।
Answer: टेरिडोफाइटा के उदाहरण-फर्न
In simple words: टेरिडोफाइटा के उदाहरणों में फर्न शामिल है, जो बीज रहित संवहनी पौधे होते हैं और बीजाणुओं द्वारा प्रजनन करते हैं।
🎯 Exam Tip: टेरिडोफाइटा के प्रमुख उदाहरण के रूप में फर्न को याद रखें, जो बीज रहित संवहनी पौधे होते हैं।
Question 14. अनावृतबीजी के उदाहरण दीजिए।
Answer: अनावृतबीजी के उदाहरण- पाइनस, साइकस, विलियम सोनिया ।
In simple words: अनावृतबीजी (जिम्नोस्पर्म) के उदाहरणों में पाइनस, साइकस और विलियम सोनिया शामिल हैं, जिनके बीज नग्न होते हैं, यानी फल के अंदर ढके नहीं होते।
🎯 Exam Tip: अनावृतबीजी के उदाहरणों में पाइनस, साइकस और विलियम सोनिया जैसे पौधों को याद रखें, जो नग्न बीजधारी होते हैं।
Question 15. आवृतबीजी के उदाहरण दीजिए।
Answer: आवृतबीजी के उदाहरण-आम, सरसों, गेहूँ।
In simple words: आवृतबीजी (एन्जियोस्पर्म) के उदाहरणों में आम, सरसों और गेहूं जैसे पौधे शामिल हैं, जिनके बीज फलों के अंदर सुरक्षित होते हैं और फूल तथा फल पैदा करते हैं।
🎯 Exam Tip: आवृतबीजी के उदाहरणों में आम, सरसों और गेहूं जैसे सामान्य फूल वाले पौधों को याद रखें, जिनके बीज फल के अंदर होते हैं।
Question 16. एकबीजपत्री के उदाहरण दीजिए।
Answer: एकबीजपत्री के उदाहरण-मक्का, गेहूं, जौ, प्याज
In simple words: एकबीजपत्री पौधों के उदाहरणों में मक्का, गेहूं, जौ और प्याज शामिल हैं, जिनके बीजों में केवल एक बीजपत्र होता है।
🎯 Exam Tip: एकबीजपत्री के उदाहरणों में ऐसे पौधों को याद रखें जिनके बीज में एक ही बीजपत्र होता है और पत्तियां समानांतर शिराविन्यास दिखाती हैं, जैसे मक्का और गेहूं।
Question 17. द्विबीजपत्री के उदाहरण दीजिए ।
Answer: द्विबीजपत्री के उदाहरण-चना, सरसों, मटर, आम ।
In simple words: द्विबीजपत्री पौधों के उदाहरणों में चना, सरसों, मटर और आम शामिल हैं, जिनके बीजों में दो बीजपत्र होते हैं।
🎯 Exam Tip: द्विबीजपत्री के उदाहरणों में ऐसे पौधों को याद रखें जिनके बीज में दो बीजपत्र होते हैं और पत्तियां जालिकावत शिराविन्यास दिखाती हैं, जैसे चना और मटर।
Question 18. अमीबा किस संघ का प्राणी है ?
Answer: अमीबा प्रोटोजोआ संघ का प्राणी है।
In simple words: अमीबा एक एकल-कोशिकीय जीव है जो प्रोटोजोआ संघ से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: अमीबा को प्रोटोजोआ संघ के अंतर्गत आने वाले एककोशिकीय जीव के रूप में पहचानें।
Question 19. अमीबा के चलन अंग का नाम बताइये ।
Answer: अमीबा के चलन अंग का नाम कूटपाद है।
In simple words: अमीबा अपने आकार को बदलकर अस्थायी उंगली जैसे उभार बनाता है जिन्हें कूटपाद कहते हैं, जिनका उपयोग गति और भोजन पकड़ने के लिए होता है।
🎯 Exam Tip: अमीबा के चलन अंग को 'कूटपाद' के रूप में याद रखें, जो भोजन ग्रहण करने में भी सहायक होता है।
Question 20. अमीबा में चलन (गति) किस अंग द्वारा होता है ?
अथवा
कूटपाद द्वारा किस जन्तु में चलन होता है ?
Answer: अमीबा में चलन कूटपाद द्वारा होता है।
In simple words: अमीबा में गति कूटपाद नामक अस्थायी संरचनाओं द्वारा होती है, जो कोशिकाद्रव्य के प्रवाह से बनती हैं।
🎯 Exam Tip: कूटपाद को अमीबा के चलन और भोजन ग्रहण के प्राथमिक साधन के रूप में याद रखें।
Question 21. यूग्लीना किस संघ का प्राणी है ?
Answer: युग्लीना प्रोटोजोआ संघ का प्राणी है।
In simple words: यूग्लीना भी एक एकल-कोशिकीय जीव है जो प्रोटोजोआ संघ से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: यूग्लीना को प्रोटोजोआ संघ के अंतर्गत एककोशिकीय जीव के रूप में पहचानें।
Question 22. यूग्लीना के चलन अंग का नाम बताइये ।
Answer: युग्लीना के चलन अंग का नाम फ्लैजिला है।
In simple words: यूग्लीना में गति के लिए फ्लैजिला नामक एक या दो धागे जैसी संरचनाएं होती हैं।
🎯 Exam Tip: यूग्लीना के चलन अंग को 'फ्लैजिला' के रूप में याद रखें, जो एक चाबुक जैसी संरचना होती है।
Question 23. यूग्लीना में चलन (गति) किस अंग द्वारा होता है ?
अथवा
फ्लैजिला द्वारा किस जन्तु में चलन होता है ?
Answer: युग्लीना में चलन फ्लैजिला द्वारा होता है।
In simple words: यूग्लीना फ्लैजिला नामक अपनी चाबुक जैसी संरचनाओं का उपयोग करके गति करता है।
🎯 Exam Tip: फ्लैजिला को यूग्लीना में गति के प्रमुख साधन के रूप में याद रखें।
Question 24. सीलिया द्वारा गति किस जन्तु में होती
अथवा
पैरामीशियम में किस अंग के द्वारा गति होती है ?
Answer: पैरामीशियम में गति सीलिया द्वारा होती है।
In simple words: पैरामीशियम अपने शरीर पर मौजूद छोटे, बाल जैसी संरचनाओं, जिन्हें सीलिया कहते हैं, की सहायता से गति करता है।
🎯 Exam Tip: पैरामीशियम के चलन अंग को 'सीलिया' के रूप में याद रखें, जो पूरे शरीर पर होते हैं।
Question 25. संघ-मोलस्का के जन्तुओं के उदाहरण दीजिए।
अथवा
संघ-मोलस्का के दो जन्तुओं के नाम लिखिए।
Answer: संघ-मोलस्का के जन्तुओं का नाम-पाइला, यूनियो (सीप), ऑक्टोपस ।
In simple words: मोलस्का संघ के उदाहरणों में पाइला (घोंघा), यूनियो (सीप), और ऑक्टोपस जैसे जीव शामिल हैं, जिनकी शारीरिक संरचना मुलायम होती है और अक्सर एक कठोर कवच से ढकी होती है।
🎯 Exam Tip: मोलस्का के उदाहरणों में पाइला, यूनियो और ऑक्टोपस जैसे जीवों को याद रखें, जिनकी विशेषता एक नरम शरीर और अक्सर एक बाहरी खोल होता है।
Question 26. संघ-इकाइनोडर्मेटा के प्रमुख जन्तुओं के नाम लिखिए।
Answer: संघ-इकाइनोडर्मेटा के जन्तुओं के नाम-स्टारफिश, सी-आरचिन, सी-कुकुम्बर ।
In simple words: इकाइनोडर्मेटा संघ के उदाहरणों में स्टारफिश (तारा मछली), सी-आरचिन (समुद्री अर्चिन), और सी-कुकुम्बर (समुद्री खीरा) जैसे जीव शामिल हैं, जिनकी विशेषता कांटेदार त्वचा और पंच-अरीय सममिति होती है।
🎯 Exam Tip: इकाइनोडर्मेटा के उदाहरणों में तारा मछली, समुद्री अर्चिन और समुद्री खीरा जैसे समुद्री जीवों को याद रखें, जिनकी त्वचा कांटेदार होती है।
Question 27. स्टारफिश में चलन किस अंग द्वारा होता है ? नाम बताइये ।
Answer: स्टारफिश में चलन नाल पादों (Tube feet) द्वारा होता है।
In simple words: स्टारफिश अपने शरीर के निचले हिस्से में मौजूद छोटे, लचीले ट्यूब जैसे संरचनाओं, जिन्हें नाल पाद कहते हैं, की मदद से चलती है।
🎯 Exam Tip: स्टारफिश में चलन के लिए 'नाल पाद' (Tube feet) को मुख्य अंग के रूप में याद रखें, जो जल संवहन प्रणाली का हिस्सा होते हैं।
Question 28. मत्स्य वर्ग के जन्तुओं के नाम लिखिए।
Answer: मत्स्य वर्ग के जन्तुओं के नाम-शार्क, रोहू (लेबियो), समुद्री घोड़ा (हिप्पोकैम्पस)
In simple words: मत्स्य वर्ग के उदाहरणों में शार्क, रोहू और समुद्री घोड़ा जैसे जलीय जीव शामिल हैं, जिनकी विशेषता गलफड़े, पंख और धारा रेखीय शरीर होता है।
🎯 Exam Tip: मत्स्य वर्ग के उदाहरणों में शार्क, रोहू और समुद्री घोड़ा जैसे विभिन्न प्रकार की मछलियों को याद रखें।
Question 29. एम्फीबिया वर्ग के जन्तुओं के नाम लिखिए ।
Answer: एम्फीबिया वर्ग के जन्तुओं के नाम-मेंढक, टोड।
In simple words: एम्फीबिया वर्ग के उदाहरणों में मेंढक और टोड शामिल हैं, जो जल और स्थल दोनों में रहने वाले उभयचर होते हैं और जिनकी त्वचा नम होती है।
🎯 Exam Tip: एम्फीबिया के उदाहरणों में मेंढक और टोड जैसे उभयचरों को याद रखें जो जल और स्थल दोनों पर जीवित रह सकते हैं।
Question 30. पक्षी वर्ग के उदाहरण दीजिए।
Answer: पक्षी वर्ग के जन्तुओं के उदाहरण-मोर, कबूतर, मुर्गा
In simple words: पक्षी वर्ग के उदाहरणों में मोर, कबूतर और मुर्गा जैसे उड़ने वाले या उड़ने में सक्षम जीव शामिल हैं, जिनकी विशेषता पंख, चोंच और अंडे देना है।
🎯 Exam Tip: पक्षी वर्ग के उदाहरणों में मोर, कबूतर और मुर्गा जैसे सामान्य पक्षियों को याद रखें, जिनकी मुख्य विशेषता पंख और उड़ने की क्षमता (या अनुपस्थिति) होती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. सम्पूर्ण जीव जगत को कितने जगतों में विभाजित किया गया है ? उनके नाम लिखिए ।
Answer: जीव जगत का विभाजन-सम्पूर्ण जीव जगत को निम्न दो जगतों में विभाजित किया गया है
1. पादप जगत (Plant Kingdom)
2. जन्तु जगत (Animal Kingdom)
In simple words: सम्पूर्ण जीव जगत को पारंपरिक रूप से दो मुख्य जगतों - पादप जगत (पौधे) और जन्तु जगत (जंतु) - में विभाजित किया गया है।
🎯 Exam Tip: प्रारंभिक वर्गीकरण के अनुसार, जीव जगत को पादप और जन्तु दो मुख्य जगतों में बांटा गया था; इस बिंदु को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 2. द्विजगत वर्गीकरण किसे कहते हैं ?
Answer: द्विजगत वर्गीकरण-जिस वर्गीकरण में सम्पूर्ण जीवों को दो जगतों में विभाजित किया गया है, उसे द्विजगत वर्गीकरण कहते हैं।
In simple words: द्विजगत वर्गीकरण एक ऐसी प्रणाली है जिसमें सभी सजीवों को केवल दो बड़े समूहों - पादप जगत और जन्तु जगत - में बांटा जाता है।
🎯 Exam Tip: द्विजगत वर्गीकरण को जीवों को केवल दो बड़े जगतों (पादप और जन्तु) में बांटने की प्रणाली के रूप में परिभाषित करें।
Question 3. द्विजगत वर्गीकरण किस वैज्ञानिक ने किया था ?
Answer: द्विजगत वर्गीकरण स्वीडिस के वैज्ञानिक कैरोलस लीनियस ने किया था।
In simple words: द्विजगत वर्गीकरण प्रणाली को स्वीडिश वैज्ञानिक कैरोलस लीनियस ने प्रतिपादित किया था।
🎯 Exam Tip: द्विजगत वर्गीकरण के जनक के रूप में कैरोलस लीनियस का नाम याद रखें।
Question 4. कैरोलस लीनियस की वर्गीकरण से सम्बन्धित पुस्तक का नाम क्या है ?
Answer: कैरोलस लीनियस की वर्गीकरण से सम्बन्धित पुस्तक का नाम सिस्टेमा नेचुरी (Systema Naturae) है।
In simple words: कैरोलस लीनियस की प्रमुख वर्गीकरण संबंधी पुस्तक का नाम 'सिस्टेमा नेचुरी' है, जिसमें उन्होंने अपनी वर्गीकरण प्रणाली का वर्णन किया।
🎯 Exam Tip: कैरोलस लीनियस की प्रसिद्ध पुस्तक 'सिस्टेमा नेचुरी' का नाम याद रखें, जो वर्गीकरण विज्ञान में एक मील का पत्थर है।
Question 5. जीवों का आधुनिक वर्गीकरण किस वैज्ञानिक ने किया ?
Answer: जीवों का आधुनिक वर्गीकरण आर. एच. ह्विटेकर ने किया।
In simple words: आधुनिक वर्गीकरण, जिसे पाँच जगत वर्गीकरण के रूप में जाना जाता है, आर. एच. व्हिटेकर द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
🎯 Exam Tip: आधुनिक या पाँच जगत वर्गीकरण के प्रवर्तक के रूप में आर. एच. व्हिटेकर का नाम याद रखें।
Question 6. पाँच जगत वर्गीकरण या आधुनिक वर्गीकरण किसे कहते हैं ?
Answer: आधुनिक वर्गीकरण या पाँच जगत वर्गीकरण-जिस वर्गीकरण में सम्पूर्ण जीवों को पाँच जगतों में विभाजित किया गया है उस वर्गीकरण को आधुनिक वर्गीकरण या पाँच जगत वर्गीकरण कहते हैं।
In simple words: पाँच जगत वर्गीकरण एक आधुनिक प्रणाली है जिसमें सभी जीवों को उनके कोशिकीय संरचना, पोषण विधि और शरीर संगठन के आधार पर मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया नामक पाँच मुख्य जगतों में बांटा गया है।
🎯 Exam Tip: पाँच जगत वर्गीकरण को जीवों को पांच बड़े समूहों (मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया) में वर्गीकृत करने की प्रणाली के रूप में परिभाषित करें।
Question 7. जीवों के नामकरण की पद्धति की क्या आवश्यकता है?
अथवा
जीवों के वैज्ञानिक नामों की क्या आवश्यकता है?
Answer: जीवों को विभिन्न स्थानों पर विभिन्न नामों से पुकारा जाता था। अतः सम्पूर्ण विश्व में अध्ययन के लिए जीवों के ऐसे नामों की आवश्यकता हुई जो विश्वभर में एकसमान हों। ऐसे नामों को वैज्ञानिक नाम कहा गया।
In simple words: जीवों के वैज्ञानिक नामकरण की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि स्थानीय नाम अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न होते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीवों की पहचान और अध्ययन में भ्रम होता है, इसलिए एक सार्वभौमिक और मानकीकृत नाम प्रणाली की जरूरत थी।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक नामकरण की आवश्यकता को स्थानीय नामों की भिन्नता और वैश्विक स्तर पर स्पष्टता व भ्रम से बचने की जरूरत के रूप में समझाएं।
Question 8. द्विनाम पद्धति क्या है ?
Answer: द्विनाम पद्धति (Binomial system) - जिस पद्धति में जीवों का नाम दो शब्दों में रखा जाता है, जिसमें पहला शब्द वंश (Genus) और दूसरा शब्द उसकी जाति (Species) को बतलाता है, उस पद्धति को द्विनाम पद्धति कहते हैं।
In simple words: द्विनाम पद्धति जीवों के नामकरण की एक विधि है जिसमें प्रत्येक जीव को दो शब्दों से बना एक अद्वितीय वैज्ञानिक नाम दिया जाता है - पहला शब्द वंश (Genus) को दर्शाता है और दूसरा शब्द जाति (Species) को।
🎯 Exam Tip: द्विनाम पद्धति को 'वंश' और 'जाति' नामक दो शब्दों से बने वैज्ञानिक नामकरण प्रणाली के रूप में परिभाषित करें।
Question 9. त्रिनाम पद्धति क्या है ?
Answer: त्रिनाम पद्धति-जिस पद्धति में जीवों का नाम तीन शब्दों का रखा जाता है, जिसमें पहला शब्द वंश, दूसरा शब्द उसकी जाति तथा तीसरा शब्द उसकी उपजाति को बतलाता है, उस पद्धति को त्रिनाम पद्धति कहते हैं।
In simple words: त्रिनाम पद्धति जीवों के नामकरण की वह प्रणाली है जिसमें नाम तीन शब्दों से बनता है: पहला शब्द वंश, दूसरा जाति, और तीसरा उपजाति को इंगित करता है।
🎯 Exam Tip: त्रिनाम पद्धति को द्विनाम पद्धति के विस्तार के रूप में प्रस्तुत करें, जिसमें उपजाति के लिए तीसरा शब्द जोड़ा जाता है।
Question 10. त्रिनाम पद्धति की क्या आवश्यकता पड़ी?
Answer: त्रिनाम पद्धति की आवश्यकताकभी-कभी अलग-अलग वातावरण में रहने वाले एक ही जाति में कुछ भिन्नताएँ आ जाती हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए त्रिनाम पद्धति की आवश्यकता पड़ी।
In simple words: त्रिनाम पद्धति की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि एक ही जाति के जीवों में भी विभिन्न भौगोलिक या पर्यावरणीय स्थितियों के कारण सूक्ष्म भिन्नताएँ (उपजाति) विकसित हो जाती हैं, जिन्हें वर्गीकृत करने के लिए एक अतिरिक्त स्तर की आवश्यकता थी।
🎯 Exam Tip: त्रिनाम पद्धति की आवश्यकता को एक ही जाति के भीतर उत्पन्न होने वाली उपजातियों या सूक्ष्म भिन्नताओं को वर्गीकृत करने के लिए एक साधन के रूप में समझाएं।
Question 11. पादप जगत को कितने प्रभागों में बाँटा गया है? उनके नाम लिखिए।
Answer: पादप जगत का वर्गीकरण- पादप जगत को निम्न तीन भागों में विभाजित किया गया है
1. शैवाल (Algae),
2. ब्रायोफाइटा (Bryophyta) तथा
3. ट्रेकियोफाइटा (Tracheophyta)
In simple words: पादप जगत को मुख्य रूप से तीन प्रभागों - शैवाल, ब्रायोफाइटा और ट्रेकियोफाइटा - में विभाजित किया गया है, जो उनकी संरचनात्मक जटिलता और संवहन ऊतकों की उपस्थिति पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: पादप जगत के तीन मुख्य प्रभागों - शैवाल, ब्रायोफाइटा, और ट्रेकियोफाइटा - को उनके विकासात्मक क्रम में याद रखें।
Question 12. ट्रेकियोफाइटा को कितने उप-प्रभाग में बाँटा गया है? नाम लिखिए।
Answer: ट्रेकियोफाइटा का वर्गीकरण-ट्रेकियोफाइटा को निम्न तीन उप-प्रभागों में बाँटा गया है
1. टेरिडोफाइटा (Pteridophyta)
2. अनावृतबीजी (Gymnosperms)
3. आवृतबीजी (Angiosperm)
In simple words: ट्रेकियोफाइटा, जिसमें संवहन ऊतक होते हैं, को टेरिडोफाइटा, अनावृतबीजी (जिम्नोस्पर्म), और आवृतबीजी (एंजियोस्पर्म) नामक तीन उप-प्रभागों में विभाजित किया गया है, जो बीज उत्पादन की क्षमता और विधि पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: ट्रेकियोफाइटा के तीन उप-प्रभागों (टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म) को बीज की उपस्थिति और उसके प्रकार के आधार पर याद रखें।
Question 13. आवृत्तबीजी पौधों को कितने वर्गों में बाँटा गया है? उनके नाम लिखिए।
Answer: आवृत्तबीजी पौधों का वर्गीकरण आवृतबीजी पौधों को निम्न दो वर्गों में बाँटा गया है
1. एकबीजपत्री (Monocotyledons)
2. द्विबीजपत्री (Dicotyledons)
In simple words: आवृतबीजी पौधों को उनके बीज में मौजूद बीजपत्रों की संख्या के आधार पर दो मुख्य वर्गों - एकबीजपत्री (एक बीजपत्र) और द्विबीजपत्री (दो बीजपत्र) - में बांटा गया है।
🎯 Exam Tip: आवृतबीजी पौधों को एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री में विभाजित किया जाता है; यह विभाजन बीजपत्रों की संख्या पर आधारित है।
Question 14. जन्तु जगत को कितने उप-जगतों में विभाजित किया गया है? उनके नाम लिखिये ।
Answer: जन्तु जगत का वर्गीकरण- जन्तु जगत को निम्नांकित उप-जगत में विभाजित किया गया है
1. अपृष्ठवंशी या अकशेरुकी या नॉन-कॉडेटा (Non-chordata)
2. पृष्ठवंशी या कशेरुकी या कॉउँटा (Chordata)
In simple words: जन्तु जगत को दो मुख्य उप-जगतों में विभाजित किया गया है: अपृष्ठवंशी (नॉन-कॉडेटा), जिनमें मेरुदंड नहीं होता, और पृष्ठवंशी (कॉडेटा), जिनमें मेरुदंड उपस्थित होता है।
🎯 Exam Tip: जन्तु जगत को अपृष्ठवंशी (नॉन-कॉर्डेटा) और पृष्ठवंशी (कॉर्डेटा) में बांटा जाता है, जिसमें मेरुदंड की उपस्थिति मुख्य अंतर है।
Question 15. मेंढक को एम्फीबिया वर्ग में क्यों रखा गया है?
Answer: मेंढक एक असमतापी उभयचर है जिसमें एम्फीबिया वर्ग के लगभग सभी लक्षण मौजूद हैं इसलिए इसे एम्फीबिया वर्ग में रखा गया है।
In simple words: मेंढक को एम्फीबिया वर्ग में रखा गया है क्योंकि यह असमतापी है, जल और स्थल दोनों पर रह सकता है, नम त्वचा रखता है, और एम्फीबिया के अन्य विशिष्ट लक्षण दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: मेंढक को एम्फीबिया वर्ग में रखने का कारण उसकी उभयचरी प्रकृति, असमतापी स्वभाव और जल-स्थल दोनों में रहने की क्षमता है।
Question 16. वर्गीकरण के लाभ लिखिए ।
Answer: वर्गीकरण के लाभ-वर्गीकरण के निम्नलिखित प्रमुख लाभ हैं
1. जीवों की पहचान होना।
2. जीवों की विविधता का ज्ञान होना।
3. जीवों के आपसी सम्बन्धों का ज्ञान होना।
4. जीवों के उत्पत्ति की जानकारी होना ।
5. जीवों के विकास के क्रम का ज्ञान होना।
In simple words: वर्गीकरण से जीवों की पहचान आसान होती है, उनकी विविधता और आपसी संबंधों को समझने में मदद मिलती है, और जीवों की उत्पत्ति व विकास के क्रम की जानकारी मिलती है।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के लाभों को जीवों की पहचान, विविधता की समझ, विकासवादी संबंधों और अध्ययन की सुगमता के रूप में संक्षेप में प्रस्तुत करें।
Question 17. द्विजगत वर्गीकरण की कमियाँ बताइये ।
Answer: द्विजगत वर्गीकरण की कमियाँ-द्विजगत वर्गीकरण की निम्नलिखित कमियाँ हैं
1. एककोशिकीय एवं बहुकोशिकीय जीवों को साथ-साथ रखना।
2. प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक को साथ-साथ रखना।
3. स्वपोषी एवं विषमपोषी जीवों को साथ-साथ रखना।
4. जन्तु समूहों में कुछ पादपों एवं पादप समूहों में कुछ जन्तुओं को रखना।
In simple words: द्विजगत वर्गीकरण की मुख्य कमियाँ यह थीं कि इसने एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों, प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक जीवों, तथा स्वपोषी और विषमपोषी जीवों को एक ही समूह में रख दिया, जिससे जीवों की वास्तविक विविधता को सही ढंग से नहीं दर्शाया जा सका।
🎯 Exam Tip: द्विजगत वर्गीकरण की कमियों में एककोशिकीय/बहुकोशिकीय, प्रोकैरियोटिक/यूकैरियोटिक और स्वपोषी/विषमपोषी जीवों को एक साथ रखने के बिंदुओं को शामिल करें।
Question 18. वे पाँच लक्षण कौन-कौन से हैं जिनके आधार पर आधुनिक वर्गीकरण किया गया?
Answer: निम्नलिखित पाँच लक्षणों के आधार पर आधुनिक वर्गीकरण किया गया|
1. कोशिका की जटिलता प्रोकैरियोटिक या यूकैरियोटिक ।
2. पोषण विधियाँ ।
3. जीवन शैली ।
4. जीव जगत की संगठनात्मक जटिलता-एक कोशिकीयता एवं बहुकोशिकीयता ।
5. जीवों का विकासात्मक या जातिवृत्तीय सम्बन्ध।
In simple words: आधुनिक वर्गीकरण कोशिका की जटिलता (प्रोकैरियोटिक/यूकैरियोटिक), पोषण विधियाँ, जीवन शैली, जीव जगत की संगठनात्मक जटिलता (एककोशिकीय/बहुकोशिकीय), और जीवों के विकासात्मक या जातिवृत्तीय संबंधों जैसे पाँच प्रमुख लक्षणों पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: आधुनिक वर्गीकरण के पाँच आधारों में कोशिका का प्रकार, पोषण विधि, संगठन का स्तर, जीवन शैली और विकासवादी संबंधों को याद रखें।
Question 19. पाँच जगत वर्गीकरण (आधुनिक वर्गीकरण) की कमियाँ बताइये ।
Answer: पाँच जगत वर्गीकरण (आधुनिक वर्गीकरण) की कमियाँ-इस वर्गीकरण की निम्नलिखित कमियाँ हैं
1. एककोशिकीय शैवालों को अलग रखना।
2. प्रोटिस्टा जगत का विविधतापूर्ण होना ।
3. जीवों की उत्पत्ति को बहुस्रोत वाली दर्शाना ।
4. विषाणु का स्थान निश्चित न होना।
5. मिलते-जुलते गुणों वाले जीवों को दूर रखना।
In simple words: पाँच जगत वर्गीकरण की कमियों में एककोशिकीय शैवालों को अलग रखना, प्रोटिस्टा जगत की अत्यधिक विविधता, जीवों की उत्पत्ति को बहु-स्रोत से दर्शाना, विषाणु के स्थान की अनिश्चितता, और समान गुणों वाले जीवों को दूर रखना शामिल है।
🎯 Exam Tip: पाँच जगत वर्गीकरण की कमियों में प्रोटिस्टा की विविधता, विषाणुओं की स्थिति और समान जीवों के अलगाव जैसे बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 20. शैवालों के लक्षण लिखिए ।
Answer: शैवाल के लक्षण
1. इनका शरीर शूकायवत (Thalloid) होता है। अर्थात् यह जड़, तना एवं पत्ती में विभेदित नहीं होता है।
2. ये स्वपोषी जीव होते हैं।
3. इनके शरीर में संवहनी ऊतक नहीं पाया जाता है।
4. ये जलीय वातावरण या नम स्थानों में पाये जाते हैं।
In simple words: शैवाल थैलोइड शरीर वाले स्वपोषी जीव होते हैं, जिनमें जड़, तना और पत्तियां विभेदित नहीं होतीं, इनमें संवहनी ऊतक नहीं होते, और ये मुख्य रूप से जलीय या नम वातावरण में पाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: शैवाल के लक्षणों में उनके थैलोइड शरीर, स्वपोषी प्रकृति, संवहनी ऊतकों की अनुपस्थिति और जलीय आवास को मुख्य बिंदुओं के रूप में याद रखें।
Question 21. ब्रायोफाइटा के लक्षण लिखिए।
Answer: ब्रायोफाइटा के लक्षण
1. ये असंवहनी (Non-vascular), हरित लवक युक्त पौधे हैं।
2. इनमें निषेचन के बाद भ्रूण (Embryo) बनता है तथा इनके निषेचन के लिए जल आवश्यक है।
3. इनमें प्रतिपृष्ठ सतह पर मूलरोमों के समान रचनाएँ पाई जाती हैं जिन्हें मूलाभास (Rhizoids) कहते हैं।
4. कुछ विकसित ब्रायोफाइट्स में तने सदृश रचनाएँ पाई जाती हैं।
5. ये नम भूमि या पेड़ की छालों आदि पर पाये जाते हैं।
In simple words: ब्रायोफाइटा असंवहनी, हरित लवक युक्त पौधे हैं जिन्हें प्रजनन के लिए जल की आवश्यकता होती है, इनमें मूलाभास पाए जाते हैं, कुछ में तने जैसी संरचनाएं होती हैं, और ये नम स्थानों पर उगते हैं।
🎯 Exam Tip: ब्रायोफाइटा के लक्षणों में उनके असंवहनी स्वभाव, प्रजनन के लिए जल की आवश्यकता, मूलाभास की उपस्थिति और नम आवास पर ध्यान दें।
Question 22. ट्रेकियोफाइटा के लक्षण लिखिए।
Answer: ट्रेकियोफाइटा के लक्षण
1. इनमें संवहनी ऊतक जाइलम (Xylem) एवं फ्लोएम (Phloem) पाये जाते हैं।
2. इनका शरीर विभिन्न परिस्थितियों में रहने के लिए अनुकूलित होता है।
3. ये पौधे जड़, तना तथा पत्ती में विभेदित होते हैं।
4. इनमें श्रम विभाजन पाया जाता है।
In simple words: ट्रेकियोफाइटा संवहनी पौधे होते हैं जिनमें जाइलम और फ्लोएम ऊतक पाए जाते हैं, इनका शरीर जड़, तना और पत्तियों में विभेदित होता है, और ये विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए अनुकूलित होते हैं।
🎯 Exam Tip: ट्रेकियोफाइटा के लक्षणों में संवहनी ऊतकों (जाइलम, फ्लोएम) की उपस्थिति, जड़-तना-पत्ती का विभेदन और पर्यावरणीय अनुकूलन पर जोर दें।
Question 23. टेरिडोफाइटा के लक्षण लिखिए ।
Answer: टेरिडोफाइटा के लक्षण
1. इनका शरीर जड़, तना तथा पत्ती में विभेदित होता है।
2. इनमें संवहनी ऊतक पाया जाता है जो जाइलम एवं फ्लोएम का बना होता है।
3. ये पुष्पहीन होते हैं अतः इनमें बीज का निर्माण ही नहीं होता।
4. इनका मुख्य पौधा बीजाणुभिद् होता है जिस पर बीजाणु पैदा होते हैं, जो अंकुरित होकर युग्मोद्भिद पौधे का निर्माण करते हैं।
In simple words: टेरिडोफाइटा ऐसे पौधे हैं जिनमें जड़, तना और पत्तियां विभेदित होती हैं, संवहनी ऊतक होते हैं, ये फूल या बीज पैदा नहीं करते बल्कि बीजाणुओं से प्रजनन करते हैं, और इनका मुख्य पौधा बीजाणुभिद् होता है।
🎯 Exam Tip: टेरिडोफाइटा के लक्षणों में जड़-तना-पत्ती का विभेदन, संवहनी ऊतक की उपस्थिति, बीज रहित प्रजनन और बीजाणुभिद् अवस्था को मुख्य बिंदु के रूप में याद रखें।
Question 24. जिम्नोस्पर्म (अनावृत्तबीजी) के लक्षण लिखिए।
Answer: जिम्नोस्पर्म (अनावृत्तबीजी) के लक्षण
1. इन पौधों के बीजों के चारों तरफ कोई आवरण नहीं पाया जाता है अतः इनके बीज नग्नं बीज होते हैं।
2. इनमें वायु द्वारा परागण होता है।
3. ये पौधे बहुवर्षी, काष्ठीय तथा मरुद्भिद स्वभाव के होते हैं।
4. इनका संवहनी ऊतक जाइलम एवं फ्लोएम में विभेदित रहता है।
In simple words: जिम्नोस्पर्म नग्न बीज वाले पौधे होते हैं, जिनमें बीज किसी फल से ढके नहीं होते, वायु द्वारा परागण होता है, ये बहुवर्षी और काष्ठीय स्वभाव के होते हैं, और इनमें सुविकसित संवहनी ऊतक पाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जिम्नोस्पर्म के लक्षणों में नग्न बीज, वायु परागण, काष्ठीय स्वभाव और विभेदित संवहनी ऊतकों की उपस्थिति पर ध्यान दें।
Question 25. एन्जियोस्पर्म (आवृत्तबीजी) के लक्षण लिखिए।
Answer: एन्जियोस्पर्म (आवृत्तबीजी) के लक्षण
1. इन पौधों के बीजों के चारों ओर आवरण पाया जाता है।
2. इनमें दोहरे निषेचन की क्रिया पाई जाती है।
3. इनमें वातावरण के प्रति बहुत अधिक अनुकूलन पाया जाता है।
4. ये परजीवी (अमरबेल), मृतजीवी (ऑर्किड), सहजीवी (दाल वाले पादप) तथा स्वपोषी रूप में पाये जाते हैं।
In simple words: एन्जियोस्पर्म वे पौधे हैं जिनके बीज फल के अंदर ढके होते हैं, इनमें दोहरा निषेचन पाया जाता है, ये अत्यधिक अनुकूलनीय होते हैं, और पोषण के विभिन्न तरीके (स्वपोषी, परजीवी, मृतजीवी, सहजीवी) प्रदर्शित करते हैं।
🎯 Exam Tip: एन्जियोस्पर्म के लक्षणों में फल के अंदर बीज, दोहरा निषेचन, व्यापक अनुकूलन और पोषण की विविध विधियों को प्रमुखता से दर्शाएं।
Question 26. एकबीजपत्री के लक्षण लिखिए।
Answer: एकबीजपत्री के लक्षण
1. इनके बीजों में केवल एक बीजपत्र पाया जाता है।
2. इनकी पत्तियों में समानान्तर शिराविन्यास पाया जाता है।
3. इनकी पत्तियाँ अवृन्त रहती हैं।
4. इनमें प्रायः रेशेदार (झकड़ा) जड़े होती हैं।
5. इनके पुष्पों के तीन भाग या इसके गुणांक में होते हैं।
In simple words: एकबीजपत्री पौधों के बीजों में एक बीजपत्र होता है, पत्तियों में समानांतर शिराविन्यास, अवृन्त पत्तियाँ, रेशेदार जड़ें और पुष्प तीन के गुणांक में होते हैं।
🎯 Exam Tip: एकबीजपत्री के लक्षणों को याद करते समय बीजपत्र की संख्या (एक), पत्तियों में शिराविन्यास (समानांतर), जड़ प्रणाली (रेशेदार) और पुष्प भागों की संख्या (तीन के गुणांक) पर ध्यान दें।
Question 27. द्विबीजपत्री के लक्षण लिखिए ।
Answer: द्विबीजपत्री के लक्षण
1. इनके बीजों में दो बीजपत्र पाये जाते हैं।
2. इनकी पत्तियों में जालिकावत् शिराविन्यास होता है।
3. इनकी पत्तियाँ प्रायः सवृन्त होती हैं।
4. इनमें मूसला जड़ पाई जाती है।
5. इनके पुष्प के भाग चार या पाँच या इनके गुणांक में होते हैं।
In simple words: द्विबीजपत्री पौधों के बीजों में दो बीजपत्र होते हैं, पत्तियों में जालिकावत शिराविन्यास, सवृन्त पत्तियाँ, मूसला जड़ और पुष्प चार या पांच के गुणांक में होते हैं।
🎯 Exam Tip: द्विबीजपत्री के लक्षणों को याद करते समय बीजपत्र की संख्या (दो), पत्तियों में शिराविन्यास (जालिकावत), जड़ प्रणाली (मूसला) और पुष्प भागों की संख्या (चार या पांच के गुणांक) पर ध्यान दें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. ऐसे लक्षणों के तीन वास्तविक उदाहरण उद्धत कीजिए जो पदानुक्रम वर्गीकरण के लिए प्रयोग किए जाते हैं।
Answer: (i) एक यूकैरियोटी कोशिका में केन्द्रक समेत कुछ झिल्ली से घिरे कोशिकांग होते हैं, जिसके कारण कोशिकीय क्रिया अलग-अलग कोशिकाओं में दक्षतापूर्वक होती रहती है। यही कारण है कि जिन कोशिकाओं में झिल्लीयुक्त कोशिकांग और केन्द्रक नहीं होते हैं, उनकी जैव रासायनिक प्रक्रियाएँ भिन्न होती हैं। इसका असर कोशिकीय संरचना के सभी पहलुओं पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त केन्द्रकयुक्त कोशिकाओं में बहुकोशिक जीव के निर्माण की क्षमता होती है क्योंकि वे किसी विशेष कार्यों के लिए विशिष्टीकृत हो सकते हैं। इसलिए कोशिकीय संरचना और कार्य वर्गीकरण का आधारभूत लक्षण है।
(ii) कोशिकाएँ जो एक साथ समूह बनाकर किसी जीव का निर्माण करती हैं, उनमें श्रम-विभाजन पाया जाता है। शारीरिक संरचना में सभी कोशिकाएँ एक समान नहीं होती हैं, बल्कि कोशिकाओं के समूह कुछ विशेष कार्यों के लिए विशिष्टीकृत हो जाते हैं। यही कारण है कि जीवों की शारीरिक संरचना में इतनी विभिन्नता होती है।
(iii) स्वयं भोजन बनाने की क्षमता रखने वाले और बाहर से भोजन प्राप्त करने वाले जीवों की शारीरिक संरचना में आवश्यक भिन्नता पाई जाती है।
In simple words: जीवों के वर्गीकरण के लिए कोशिका की संरचना (प्रोकैरियोटिक या यूकैरियोटिक), शरीर की संगठन प्रणाली (एककोशिकीय या बहुकोशिकीय) और पोषण की विधि (स्वपोषी या परपोषी) मुख्य आधार होते हैं। ये लक्षण जीवों के विकासवादी संबंधों और उनकी जटिलता को समझने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के आधारभूत लक्षणों को उदाहरण सहित स्पष्ट करें। प्रत्येक लक्षण का जीवों की शारीरिक संरचना और कार्यप्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाएं।
Question 2. जल-स्थलचर और सरीसृप में तीन अन्तर लिखिए।
Answer: जल-स्थलचर और सरीसृप में तीन अन्तर निम्नलिखित हैं-
| जल-स्थलचर | सरीसृप |
| 1. शरीर पर शल्क नहीं होते। | 1. शरीर पर शल्क होते हैं। |
| 2. श्वसन गिल्स और फेफड़ों द्वारा होता है। | 2. श्वसन केवल फेफड़ों द्वारा होता है। |
| 3. ये पानी में अंडे देते हैं। | 3. इनके अंडों के ऊपर कठोर कवच होता है। अतः जल में अंडे देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। |
In simple words: जल-स्थलचरों की त्वचा नम होती है और वे पानी व जमीन दोनों पर रह सकते हैं, जबकि सरीसृपों की त्वचा सूखी और शल्कयुक्त होती है और वे मुख्य रूप से जमीन पर रेंगकर चलते हैं। जल-स्थलचरों में श्वसन गिल्स या फेफड़ों से होता है और वे पानी में अंडे देते हैं, जबकि सरीसृपों में केवल फेफड़ों से श्वसन होता है और वे कठोर कवच वाले अंडे जमीन पर देते हैं।
🎯 Exam Tip: जल-स्थलचर और सरीसृप के मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से तालिका बनाकर प्रस्तुत करें, जिसमें उनके आवास, त्वचा, श्वसन और प्रजनन जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए।
Question 3. फाइलम कॉडेटा के तीन विशेष लक्षण बताइए ।
Answer: फाइलम (संघ) कॉडेटा (chordata) के विशेष लक्षण निम्नलिखित हैं
• जीवन की किसी न किसी अवस्था में नोटोकॉर्ड (notochord) अवश्य पाई जाती है।
• तंत्रिका रज्जु (nerve chord) खोखला तथा पृष्ठतलीय होता है।
• हृदय अधर तल पर स्थित होता है। चल रुधिराणु हीमोग्लोबिन के कारण श्वसन में सहायक होते हैं।
In simple words: कॉडेटा जीवों की प्रमुख विशेषताओं में जीवन के किसी न किसी चरण में नोटोकॉर्ड का पाया जाना, एक खोखली पृष्ठतलीय तंत्रिका रज्जु का होना और हृदय का शरीर के अधर भाग में स्थित होना शामिल है।
🎯 Exam Tip: कॉडेटा के विशिष्ट लक्षणों को याद रखें, खासकर नोटोकॉर्ड और तंत्रिका रज्जु की उपस्थिति, क्योंकि ये इस फाइलम की पहचान हैं।
Question 4. उन तीन मुख्य लक्षणों का उल्लेख कीजिए जिन्हें जीवों को वर्गीकृत करने के लिए ध्यान में रखा गया है।
Answer: जीवों को वर्गीकृत करने के लिए निम्नलिखित लक्षणों को ध्यान में रखा गया है।
• जीव प्रोकेरियोटी या यूकेरियोटी कोशिका का बना है।
• कोशिकाएँ स्वतंत्र हैं या बहुकोशिकीय संगठन और जटिल जीव के रूप में हैं।
• कोशिकाओं में कोशिका भित्ति है। वे अपना भोजन संश्लेषित करते हैं।
In simple words: जीवों के वर्गीकरण के लिए तीन मुख्य आधार उनकी कोशिका का प्रकार (प्रोकैरियोटिक या यूकैरियोटिक), उनका शारीरिक संगठन (एककोशिकीय या बहुकोशिकीय) और उनकी पोषण विधि (कोशिका भित्ति की उपस्थिति या अनुपस्थिति, भोजन संश्लेषण) हैं।
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के इन मूलभूत लक्षणों को स्पष्ट रूप से समझें क्योंकि ये विभिन्न जगतों में जीवों के विभाजन का आधार बनते हैं।
Question 5. वर्ग जल-स्थलचर की छह विशेषतायें लिखिए ।
Answer: जल-स्थलचर वर्ग की छह विशेषतायें
• जीव जल तथा नम स्थानों में स्थल पर रहते हैं। शीत रुधिर एवं अंडज वर्टीब्रेट ।
• त्वचा मुलायम, आर्द्र तथा बिना स्केल की होती
• अधिकतर पाँच अँगुलियों वाले दो जोड़ी हाथ होते हैं।
• नेत्र गोलक इधर-उधर घुमाये जा सकते हैं।
• नासा छिद्र होते हैं।
• जीभ चिपचिपी एवं श्लेष्मिक झिल्ली से जुड़ी होती है।
In simple words: जल-स्थलचर ठंडे खून वाले जीव होते हैं जो पानी और जमीन दोनों पर रहते हैं, इनकी त्वचा नम और शल्करहित होती है, और इनके हाथ-पैर में आमतौर पर पाँच उंगलियाँ होती हैं। इनकी आँखों में पलकें होती हैं, नाक के छेद होते हैं, और चिपचिपी जीभ पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: जल-स्थलचर की विशिष्ट शारीरिक विशेषताओं और उनके द्वैध आवास को उजागर करें, जैसे नम त्वचा, पाँच-उंगली वाले पैर, और शीत रुधिर प्रकृति।
Question 6. वर्ग सरीसृप की छः विशेषतायें लिखिए ।
Answer: सरीसृप वर्ग की छह विशेषतायें
• ये अधिकांश थलचर हैं।
• त्वचा सूखी एवं शल्कों से ढकी होती है।
• शीत रुधिर चाले जंतु हैं।
• श्वसन मुख्य रूप से फेफड़ों से होता है।
• शरीर सिर, ग्रीवा, धड़ तथा पूँछ में बँटा होता है।
• अंत: कंकाल अस्थियों (bones) का बना होता है।
In simple words: सरीसृप मुख्य रूप से जमीन पर रहने वाले, ठंडे खून के जानवर होते हैं जिनकी त्वचा सूखी और शल्कों से ढकी होती है। ये फेफड़ों से सांस लेते हैं, और इनके शरीर में सिर, गर्दन, धड़ और पूंछ स्पष्ट रूप से विभाजित होते हैं, जिसमें हड्डियां होती हैं।
🎯 Exam Tip: सरीसृपों के प्रमुख लक्षणों पर ध्यान दें जैसे उनकी शुष्क, शल्कयुक्त त्वचा, शीत-रुधिरता, फेफड़ों से श्वसन, और अस्थिमय कंकाल।
Question 7. (a) अमीबा किस संघ का प्राणी है ? इसका प्राप्ति स्थान क्या है ? यह एक स्थान से दूसरे स्थान पर कैसे जाता है ?
(b) कवक अपना भोजन क्यों नहीं बना पाते हैं?
(c) सीलेण्टरॉन क्या है ? किन्हीं दो जंतुओं के नाम लिखिए जिनमें सीलेण्टरॉन पाई जाती है।
Answer:
(a) अमीबा प्रोटियस (Amoeba proteus) - संघ प्रोटोजोआ का एक कोशिकीय प्राणी है। यह साधारणतः पोखरों, तालाबों की कीचड़ में पाया जाने वाला सूक्ष्म जीव है। इसमें चलन पादाभ या कूटपाद द्वारा होता है।
(b) कवकों में पर्णहरित (chlorophyll) - नहीं होता, अतः वे अपना भोजन नहीं बना पाते। ये विषमपोषी (heterotrophic) या परपोषी होते हैं। ये मृतपोषी, परजीवी या सहजीवी होते हैं।
(c) सीलेण्टरॉन देहगुहा तथा आहारनाल दोनों का कार्य करने वाली गुहा (cavity) होती है। उदाहरण-हाइड्रा या ओबीलिया ।
In simple words: अमीबा एककोशिकीय प्रोटोजोआ है जो पानी कीचड़ में मिलता है और कूटपाद से चलता है। कवक में क्लोरोफिल न होने के कारण वे भोजन नहीं बना पाते और मृतपोषी होते हैं। सीलेण्टरॉन एक गुहा है जो पाचन और शरीर के कार्य करती है, जैसे हाइड्रा और ओबीलिया में।
🎯 Exam Tip: अमीबा के संघ और गति के तरीके को याद रखें, कवक के पोषण संबंधी अद्वितीय पहलू पर ध्यान दें, और सीलेण्टरॉन की अवधारणा को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।
Question 8. “जीवों के वर्गीकरण का जैव विकास से निकट का सम्बन्ध है।” क्या आप इसे कथन से सहमत हैं? एक उदाहरण के साथ टिप्पणी कीजिए ।
Answer: जैव विकास की अवधारणा को वर्गीकरण से संबंधित करके देखें तो दो तरह के जीव पाये जाते हैं
(i) आदिम अथवा निम्न जीव ।
(ii) उन्नंत अथवा उच्च जीव ।
(i) आदिम अथवा निम्न जीव - वे जीव जिनकी शारीरिक संरचना में प्राचीन काल से लेकर आज तक कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है, आदिम अथवा निम्न जीव कहलाते हैं।
(ii) उन्नत अथवा उच्च जीव - वे जीव जिनकी शारीरिक संरचना में प्राचीन काल से आज तक पर्याप्त परिवर्तन हुआ है, उन्नत अथवा उच्च जीव कहलाते हैं। वर्गीकरण में हम जीवों को सरल से जटिल की तरफ व्यवस्थित करने का प्रयास करते हैं, जैसा कि निर्विवाद प्रमाणित हो चुका है कि जीवों का विकास सरल से जटिल की ओर या आदिम से उन्नत की ओर हुआ। शारीरिक संरचना में समय के साथ या विकास के साथ परिवर्तन आते गये। अतः वर्गीकरण जैव विकास से निकट संबंधित है।
In simple words: हाँ, जीवों के वर्गीकरण का जैव विकास से गहरा संबंध है। वर्गीकरण जीवों को उनके विकास क्रम के अनुसार सरल से जटिल रूपों में व्यवस्थित करने में मदद करता है। जो जीव शारीरिक रूप से कम बदले हैं वे आदिम कहलाते हैं, जबकि जिनमें अधिक परिवर्तन हुए हैं वे उन्नत जीव कहलाते हैं, जिससे पता चलता है कि वर्गीकरण और विकास प्रक्रियाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
🎯 Exam Tip: जैव विकास और वर्गीकरण के बीच संबंध को स्पष्ट करने के लिए आदिम और उन्नत जीवों के उदाहरणों का उपयोग करें। यह अवधारणा दर्शाती है कि वर्गीकरण कैसे विकासवादी इतिहास को दर्शाता है।
Question 9. निम्न में से प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए
(i) अंडे देने वाला एक स्तनपायी।
(ii) एक मछली जिसका कंकाल केवल उपास्थि का बना होता है।
(iii) कवकों की कुछ प्रजातियाँ जो नील हरित शैवाल (साइनोबैक्टीरिया) के साथ स्थायी अंतर्सम्बन्ध बनाती हैं।
(iv) पादप वर्ग का उभयचर ।
Answer: (i) प्लेटिपस,
(ii) शार्क,
(iii) लाइकेन,
(iv) ब्रायोफाइट।
In simple words: प्लेटिपस एक अंडे देने वाला स्तनपायी है, शार्क एक उपास्थि से बनी मछली है, लाइकेन कवक और नील हरित शैवाल का सहजीवी संबंध है, और ब्रायोफाइट पादप जगत का एक उभयचर है।
🎯 Exam Tip: इन विशिष्ट उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये विभिन्न जैविक अवधारणाओं और वर्गीकरण श्रेणियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Question 10. द्विबीजपत्री एवं एकबीजपत्री में पाँच अन्तर लिखिए।
Answer: द्विबीजपत्री एवं एकबीजपत्री में पाँच प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-
| द्विबीजपत्री | एकबीजपत्री |
| 1. बीज में दो बीज पत्र होते हैं। | 1. बीज में एक बीज पत्र होता है। |
| 2. इनके तने में संवहन बंडल वलय में तथा वर्धी होते हैं। | 2. इनके तने में संवहन बंडल भरण ऊतक में बिखरे हुए एवं अवर्धी होते हैं। |
| 3. इनके बीज प्रायः अभ्रूण-पोषी होते हैं। | 3. इनके बीज भ्रूणपोषी होते हैं। |
| 4. इनके पुष्प प्रायः चतुष्टयी या पंचतयी होते हैं। | 4. इनके पुष्प प्रायः त्रितयी होते हैं। |
| 5. पत्तियों में शिराविन्यास जालिकावत् होता है। | 5. इनकी पत्तियों में समान्तर शिराविन्यास होता है। |
In simple words: द्विबीजपत्री पौधों के बीजों में दो बीजपत्र होते हैं, उनकी पत्तियों में जालीदार शिराएं होती हैं, और उनके फूल चार या पांच के गुणक में होते हैं, जबकि एकबीजपत्री पौधों में एक बीजपत्र होता है, पत्तियों में समानांतर शिराएं होती हैं, और उनके फूल तीन के गुणक में होते हैं।
🎯 Exam Tip: द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री पौधों के बीच के अंतरों को बीजपत्रों की संख्या, पत्तियों के शिरा-विन्यास और पुष्प के अंगों की संख्या के आधार पर याद रखें।
Question 11. वंश कोशिका किस संघ के जन्तुओं में पाई जाती है? इस संघ के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: दंश कोशिका संघ सीलेण्टरेटा के जन्तुओं में पाई जाती है। इस संघ के दो जन्तु हाइड्रा तथा ओबीलिया हैं।
In simple words: दंश कोशिकाएं सीलेण्टरेटा संघ के जीवों में पाई जाती हैं, जैसे कि हाइड्रा और ओबीलिया।
🎯 Exam Tip: दंश कोशिकाओं की उपस्थिति सीलेण्टरेटा संघ की एक विशिष्ट पहचान है। इसके उदाहरण याद रखना सहायक होगा।
Question 12. बरसात में रास्ता फिसलने वाला क्यों हो जाता है ? ऐसी दशा उत्पन्न करने वाले इन जीवों को किस संघ में रखते हैं ?
Answer: बरसात में रास्ते में नमी के कारण नीले-हरे शैवाल उग आते हैं। इन शैवालों की कोशिका भित्ति से काफी मात्रा में श्लेष्मक होता है। अतः रास्ता फिसलने वाला हो जाता है। इन जीवों को संघ साइनोफाइटा में रखते हैं।
In simple words: बरसात में रास्ते पर नीले-हरे शैवाल उग आते हैं जिनकी कोशिका भित्ति से निकलने वाले श्लेष्मक के कारण रास्ता फिसलन भरा हो जाता है। इन शैवालों को साइनोफाइटा संघ में वर्गीकृत किया जाता है।
🎯 Exam Tip: नीले-हरे शैवाल (साइनोबैक्टीरिया) की संरचना और उनके द्वारा उत्पन्न श्लेष्मक को समझना महत्वपूर्ण है, जो फिसलन का कारण बनता है।
Question 13. पादप जगत के वर्गीकरण का रेखाचित्र बनाइये ।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख पादप जगत (Plant Kingdom) के वर्गीकरण को दर्शाता है। इसमें पादप जगत को तीन मुख्य डिवीजनों में बांटा गया है: शैवाल (Algae), ब्रायोफाइटा (Bryophyta) और ट्रेकियोफाइटा (Tracheophyta)। ट्रेकियोफाइटा को आगे टेरिडोफाइटा (Pteridophyta), अनावृतबीजी (Gymnosperms) और आवृतबीजी (Angiosperms) में विभाजित किया गया है। अंत में, आवृतबीजी पौधों को एकबीजपत्री (Monocotyledons) और द्विबीजपत्री (Dicotyledons) में वर्गीकृत किया गया है।
In simple words: यह आरेख पौधों के वर्गीकरण को दर्शाता है, जिसमें शैवाल, ब्रायोफाइटा और ट्रेकियोफाइटा जैसे मुख्य समूह शामिल हैं, जो आगे टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म (एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री) में विभाजित होते हैं।
🎯 Exam Tip: पादप जगत के वर्गीकरण का यह रेखाचित्र विभिन्न समूहों के बीच के संबंध को दर्शाता है और इसे याद रखने से आप पूरे वर्गीकरण तंत्र को समझ पाएंगे।
Question 14. अपृष्ठवंशी या अकशेरुकी या नॉनकॉर्डेटा के विशिष्ट लक्षण लिखिए।
अथवा
उप-जगत नॉन-कॉडेटा के मुख्य लक्षण लिखिए।
Answer: अपृष्ठवंशी (अकशेरुकी) या नॉन-कॉडेटा (Non-chordata) के विशिष्ट लक्षण
1. शरीर में मेरुदण्ड का अभाव रहता है।
2. रक्त में लाल रक्त कणिकाओं का अभाव रहता है।
3. मस्तिष्क ठोस होता है।
4. हृदय स्पष्ट नहीं होता। यदि उपस्थित रहता है। तो शरीर के पृष्ठ तल पर उपस्थित रहता है।
5. शरीर पर बाह्य कंकाल (Exoskeleton) पाया जाता है।
In simple words: नॉन-कॉर्डेटा वे जीव हैं जिनमें रीढ़ की हड्डी नहीं होती, उनके रक्त में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं होतीं, और उनका मस्तिष्क ठोस होता है। यदि हृदय मौजूद हो, तो वह शरीर के ऊपरी हिस्से में होता है, और अक्सर शरीर पर बाहरी कंकाल होता है।
🎯 Exam Tip: अकशेरुकी के प्रमुख लक्षणों पर ध्यान केंद्रित करें, विशेषकर मेरुदंड की अनुपस्थिति और बाह्य कंकाल की उपस्थिति, क्योंकि ये कॉर्डेटा से इनके भिन्नता के प्रमुख बिंदु हैं।
Question 15. अकशेरुकी (अपृष्ठवंशी या नॉनकॉडेटा) को कितने संघों में विभाजित किया गया है? उनके नाम लिखिए।
अथवा
नॉन-कॉडेटा के वर्गों के नाम लिखिए।
Answer: अकशेरुकी, अपृष्ठवंशी या नॉन-कार्डेटा (Non-chordata) का वर्गीकरण - इस उप-जगत को निम्नलिखित 9 संघों में विभाजित किया गया है
1. प्रोटोजोआ (Protozoa),
2. पोरीफेरा (Porifera),
3. सीलेन्टरेटा (Coelenterata)
4. प्लैटीहेल्मेन्थीस (Platyhelminthes),
5. निमैटहेल्मिन्थीस (Nemathelminthes)
6. ऐनेलिडा (Annelida)
7. आर्थोपोडा (Arthropoda)
8. मोलस्का (Mollusca)
9. इकाइनोडर्मेटा (Echinodermata)
In simple words: अकशेरुकी जीवों को नौ मुख्य संघों में बांटा गया है: प्रोटोजोआ, पोरीफेरा, सीलेन्टरेटा, प्लैटीहेल्मेन्थीस, निमैटहेल्मिन्थीस, ऐनेलिडा, आर्थोपोडा, मोलस्का और इकाइनोडर्मेटा।
🎯 Exam Tip: इन नौ संघों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये अकशेरुकी जीवों की विशाल विविधता को दर्शाते हैं।
Question 16. संघ-पोरीफेरा के लक्षण लिखिए।
Answer: संघ-पोरीफेरा (Phylum-Porifera) के लक्षण-
1. ये जन्तु बहुकोशिकीय होते हैं।
2. ये जन्तु द्विस्तरीय (Diploblastic) होते हैं।
3. इस संघ के जन्तुओं में मुख नहीं होता, परन्तु छोटे-छोटे रन्ध्र (Ostia) ही मुख का कार्य करते हैं।
In simple words: पोरीफेरा बहुकोशिकीय और द्विस्तरीय जीव होते हैं जिनमें कोई स्पष्ट मुंह नहीं होता, बल्कि छोटे छिद्र (ऑस्टिया) भोजन और पानी के प्रवेश का कार्य करते हैं।
🎯 Exam Tip: पोरीफेरा के प्रमुख लक्षणों को याद रखें, खासकर उनके बहुकोशिकीय और द्विस्तरीय होने, और ऑस्टिया की भूमिका।
Question 17. संघ-सीलेन्टरेटा के लक्षण लिखिए।
Answer: संघ-सीलेन्टरेटा (Phylum-Coelenterata)-
1. ये जन्तु द्विस्तरीय (Diploblastic) होते हैं।
2. इनके शरीर में लम्बी केन्द्रीय गुहा होती है।
3. इन जन्तुओं की पीढ़ियों में एकान्तरण होता है।
4. ये जन्तु द्विलिंगी (Bisexual) होते हैं।
5. इनमें श्रम विभाजन पाया जाता है।
In simple words: सीलेण्टरेटा द्विस्तरीय, द्विलिंगी जीव होते हैं जिनके शरीर में एक लंबी केंद्रीय गुहा होती है, और इनमें पीढ़ी एकांतरण तथा श्रम विभाजन पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: सीलेण्टरेटा के द्विस्तरीय संगठन, केंद्रीय गुहा की उपस्थिति और पीढ़ी एकांतरण को याद रखें, जो इस संघ की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं।
अभ्यास प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. कूटपाद से गति करता है
(a) अमीबा
(b) कॉकरोच
(c) केचुआ
(d) पैरामीशियम ।
Answer:
(a) अमीबा
In simple words: अमीबा अपने आकार को बदलकर बनने वाले अस्थायी पाँव, जिन्हें कूटपाद कहते हैं, का उपयोग करके गति करता है।
🎯 Exam Tip: अमीबा में गति के लिए कूटपाद की भूमिका को याद रखें, यह एककोशिकीय जीवों की एक प्रमुख विशेषता है।
Question 2. श्रम विभाजन पाया जाता है
(a) मनुष्य में
(b) हाइड्रा में
(c) मेंढक में
(d) पक्षियों में
Answer: (b) हाइड्रा में
In simple words: श्रम विभाजन का अर्थ है जब शरीर के विभिन्न अंग या कोशिकाएं अलग-अलग कार्य करती हैं, जो हाइड्रा जैसे सरल बहुकोशिकीय जीवों में भी पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: सरल बहुकोशिकीय जीवों जैसे हाइड्रा में भी श्रम विभाजन की शुरुआत को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 3. अमीबा निम्न वर्ग का प्राणी है
(a) पोरीफेरा
(b) सीलेन्टरेटा
(c) प्रोटोजोआ
(d) प्लेटीहेल्मिन्थीस ।
Answer: (c) प्रोटोजोआ
In simple words: अमीबा एककोशिकीय सूक्ष्मजीव है और यह प्रोटोजोआ संघ से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: अमीबा का वर्गीकरण (प्रोटोजोआ) को याद रखें, क्योंकि यह एक सामान्य रूप से अध्ययन किया जाने वाला जीव है।
Question 4. ऑर्थोपोडा संघ का जन्तु है
(a) बिच्छू
(b) हाईड्रा
(c) ऑक्टोपस
(d) केंचुआ ।
Answer:
(a) बिच्छू
In simple words: बिच्छू एक आर्थ्रोपोड है, जिसकी पहचान संयुक्त पैरों और एक एक्सोस्केलेटन से होती है।
🎯 Exam Tip: आर्थोपोडा संघ के प्रमुख उदाहरणों को पहचानना सीखें, जिसमें कीट, मकड़ी और बिच्छू शामिल हैं।
Question 5. स्टारफिश में चलन होता है
(a) कूटपाद से
(b) सीलिया से
(c) टाँगों से
(d) नाल पादों से ।
Answer: (d) नाल पादों से
In simple words: स्टारफिश (तारा मछली) अपने छोटे-छोटे ट्यूब जैसे पादों का उपयोग करके चलती है, जो उसके शरीर पर पाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: इकाइनोडर्मेटा (जैसे स्टारफिश) में विशिष्ट नाल पाद प्रणाली को याद रखें, जो उनकी गति और भोजन ग्रहण करने में मदद करती है।
Question 6. सीलेण्टेरेटा फाइलम का जन्तु है
(a) सी एनीमोन
(b) स्पांज
(c) यूग्लीना
(d) टेपवर्म
Answer:
(a) सी एनीमोन
In simple words: सी एनीमोन एक सीलेण्टरेटा जीव है, जो एक स्थायी पॉलिप के रूप में पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: सीलेण्टरेटा संघ के उदाहरणों को याद रखें, जैसे हाइड्रा, जेलीफिश और समुद्री एनीमोन।
Question 7. अमीबा और पैरामीशियम हैं
(a) एनीलिड
(b) आर्थोपोड
(c) सीलेन्टरेट
(d) प्रोटिस्टा ।
Answer: (d) प्रोटिस्टा
In simple words: अमीबा और पैरामीशियम दोनों ही एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव हैं जिन्हें प्रोटिस्टा जगत में रखा गया है।
🎯 Exam Tip: प्रोटिस्टा जगत के प्रमुख उदाहरणों, जैसे अमीबा और पैरामीशियम को पहचानें, जो एककोशिकीय यूकैरियोट्स हैं।
Question 8. फाइलम प्लेटीहेलमिन्थीज का जन्तु है
(a) सी एनीमोन
(b) स्पॉन्ज
(c) यूग्लीना
(d) टेपवर्म
Answer: (d) टेपवर्म
In simple words: टेपवर्म (फीताकृमि) एक चपटा कृमि है और प्लेटीहेल्मिन्थीस संघ से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: प्लेटीहेल्मिन्थीस (चपटे कृमि) के उदाहरणों को याद रखें, जैसे टेपवर्म और फ्लूक।
Question 9. पोरीफेरा फाइलम का जन्तु है
(a) सी एनीमोन
(b) स्पॉन्ज
(c) यूग्लीना
(d) टेपवर्म (d) टपवमा
Answer: (b) स्पॉन्ज
In simple words: स्पॉन्ज एक बहुकोशिकीय जंतु है जिसमें छिद्र होते हैं और यह पोरीफेरा संघ से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: पोरीफेरा संघ के मुख्य उदाहरणों, जैसे स्पॉन्ज को याद रखें, जो सरलतम बहुकोशिकीय जीव हैं।
Question 10. एस्केहेलमिन्थीज फाइलम का जन्तु है
(a) पिन वर्म
(b) टेपवर्म
(c) फ्लेट वर्म
(d) फ्लूक ।
Answer:
(a) पिन वर्म
In simple words: पिन वर्म (गोलकृमि) एस्केहेल्मिन्थीस संघ का एक उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: एस्केहेल्मिन्थीस (गोलकृमि) के उदाहरणों को याद रखें, जैसे पिन वर्म और राउंडवर्म।
Question 11. आर्थोपोडा का उदाहरण है
(a) केचुआ ।
(b) जोंक
(c) मकड़ी ।
(d) एस्केरिस
Answer: (c) मकड़ी
In simple words: मकड़ी एक आर्थोपोड है, जिसकी विशेषता इसके आठ पैर और बाह्य कंकाल हैं।
🎯 Exam Tip: आर्थोपोडा संघ के विभिन्न उदाहरणों को पहचानें, जो सबसे बड़ा जंतु संघ है।
Question 12. कौन मोलस्क फाइलम का जन्तु है
(a) केंचुआ ।
(b) ऑक्टोपस
(c) कॉकरोच
(d) घरेलू मक्खी
Answer: (b) ऑक्टोपस
In simple words: ऑक्टोपस मोलस्का संघ का एक प्राणी है, जिसकी पहचान उसके नरम शरीर और कई भुजाओं से होती है।
🎯 Exam Tip: मोलस्का संघ के उदाहरणों को याद रखें, जैसे घोंघे, सीप और ऑक्टोपस, जिनके शरीर नरम होते हैं।
Question 13. उपफाइलम वर्टीब्रेटा का उदाहरण है
(a) डोलियोलम
(b) मेंढक
(c) ब्रान्कियोस्टोमा
(d) पायरोसोमा ।
Answer: (b) मेंढक
In simple words: मेंढक एक कशेरुकी प्राणी है क्योंकि इसके शरीर में रीढ़ की हड्डी पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: वर्टीब्रेटा के उदाहरणों को पहचानें, जिनमें मछली, उभयचर, सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी शामिल हैं।
Question 14. गिल्स के द्वारा श्वसन किसमें नहीं होता
(a) टोरपीडो में
(b) डॉगफिश में
(c) छिपकली में
(d) सी हॉर्स में ।
Answer: (c) छिपकली में
In simple words: छिपकली एक सरीसृप है जो जमीन पर रहता है और गिल्स के बजाय फेफड़ों से सांस लेता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जीवों में श्वसन के अंगों को याद रखें, जैसे कि मछली में गिल्स और जमीन पर रहने वाले कशेरुकियों में फेफड़े।
Question 15. गर्म रुधिर वाला जन्तु है
(a) गौरेया
(b) साँप
(c) मेंढक
(d) डॉग फिश
Answer:
(a) गौरेया
In simple words: गौरेया एक पक्षी है और पक्षी गर्म रुधिर वाले प्राणी होते हैं, जो अपने शरीर का तापमान स्थिर रखते हैं।
🎯 Exam Tip: गर्म रुधिर वाले जीवों (समतापी) जैसे पक्षी और स्तनधारी तथा शीत रुधिर वाले जीवों (असमतापी) जैसे मछली, उभयचर और सरीसृप के बीच अंतर को जानें।
Question 16. शीत रुधिर वाला जन्तु है
(a) कबूतर
(b) मेंढक
(c) कौआ
(d) बकरी ।
Answer: (b) मेंढक
In simple words: मेंढक एक उभयचर है और यह शीत रुधिर वाला प्राणी होता है, जिसका शरीर का तापमान बाहरी वातावरण के अनुसार बदलता रहता है।
🎯 Exam Tip: शीत रुधिर वाले जीवों (जैसे मेंढक) और गर्म रुधिर वाले जीवों (जैसे कबूतर) के बीच अंतर को समझें।
Question 17. तीन प्रकोष्ठों वाला हृदय पाया जाता है|
(a) फ्लाइंग लिजार्ड में
(b) एनावास में
(c) डॉग फिश में
(d) उपर्युक्त सभी में।
Answer:
(a) फ्लाइंग लिजार्ड में
In simple words: फ्लाइंग लिजार्ड एक सरीसृप है और अधिकांश सरीसृपों में तीन-प्रकोष्ठों वाला हृदय पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न कशेरुकी समूहों में हृदय के प्रकोष्ठों की संख्या (जैसे मछली में दो, उभयचर और अधिकांश सरीसृपों में तीन, और पक्षियों/स्तनधारियों में चार) को याद रखें।
Question 18. चार प्रकोष्ठों वाला हृदयं पाया जाता है
(a) उल्लू में
(b) चिम्पैंजी में
(c) कुत्ते में
(d) उपरोक्त सभी में ।
Answer: (d) उपरोक्त सभी में
In simple words: उल्लू, चिम्पैंजी और कुत्ते सभी गर्म रक्त वाले जीव (पक्षी और स्तनधारी) हैं, और इन सभी में चार-प्रकोष्ठों वाला हृदय होता है।
🎯 Exam Tip: पक्षियों और स्तनधारियों में चार-प्रकोष्ठों वाले हृदय की उपस्थिति एक महत्वपूर्ण विकासवादी विशेषता है, जो पूर्ण दोहरे परिसंचरण का संकेत देती है।
Question 19. स्तनधारी वर्ग का जन्तु है
(a) उल्लू
(b) चिम्पैंजी
(c) कौआ
(d) इनमें में से कोई भी नहीं।
Answer: (b) चिम्पैंजी
In simple words: चिम्पैंजी एक स्तनधारी है, जिसकी पहचान दूध पिलाने वाली ग्रंथियों और बालों की उपस्थिति से होती है।
🎯 Exam Tip: स्तनधारियों के विशिष्ट लक्षणों, जैसे बाल, स्तन ग्रंथियाँ, और बच्चे को जन्म देना (जरायुज) को याद रखें।
Question 20. मनुष्य का वैज्ञानिक नाम है
(a) एबेना
(b) होमोसेपियन्स
(c) पेन्थरालियो
(d) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (b) होमोसेपियन्स
In simple words: मनुष्य का वैज्ञानिक नाम होमो सेपियन्स है, जो द्विनाम पद्धति के अनुसार दिया गया है।
🎯 Exam Tip: सामान्य और महत्वपूर्ण जीवों के वैज्ञानिक नामों को याद रखें, और द्विनाम पद्धति के सिद्धांतों को समझें।
Question 21. द्विपदीय नाम पद्धति को शुरू किया
(a) ई. एच. हीकल ने
(b) रॉबर्ट व्हिटेकर ने
(c) केरोलस लीनियस ने
(d) डार्विन ने।
Answer: (c) केरोलस लीनियस ने
In simple words: स्वीडिश प्रकृतिवादी कैरोलस लीनियस ने जीवों के नामकरण के लिए द्विपदीय नाम पद्धति की शुरुआत की थी।
🎯 Exam Tip: कैरोलस लीनियस को वर्गीकरण का जनक माना जाता है और द्विपदीय नाम पद्धति की शुरुआत के लिए उन्हें याद रखें।
Question 22. जुड़े हुए पैर पाए जाते हैं
(a) एनीलिडा में
(b) आर्थोपोडा में
(c) सीलेण्टरेटा. में
(d) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (b) आर्थोपोडा में
In simple words: आर्थोपोडा संघ के जीवों की एक मुख्य विशेषता उनके शरीर में जुड़े हुए पैरों का पाया जाना है।
🎯 Exam Tip: आर्थोपोडा संघ की पहचान उसके खंडित शरीर और जुड़े हुए पैरों से होती है, जो इस संघ का सबसे विशिष्ट लक्षण है।
Question 23. अप्रत्यक्ष जननांगे पाये जाते हैं
(a) जिम्नोस्पर्म में
(b) एंजियोस्पर्म में
(c) टेरिडोफाइट में
(d) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (c) टेरिडोफाइट में
In simple words: टेरिडोफाइट उन पौधों में से हैं जिनमें प्रजनन अंग स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं, इसलिए उन्हें क्रिप्टोगेम्स भी कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: क्रिप्टोगेम्स (थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा) में अप्रत्यक्ष जननांगों की उपस्थिति को याद रखें, जबकि फेनरोगेम्स (जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म) में प्रत्यक्ष जननांग होते हैं।
Question 24. किसमें थैलस नहीं पाया जाता
(a) शैवाल
(b) मॉस
(c) कवक
(d) लाइकेन ।
Answer: (b) मॉस
In simple words: शैवाल, कवक और लाइकेन में थैलस (विभेदित शरीर नहीं) पाया जाता है, जबकि मॉस में जड़ जैसी संरचनाएं, तना और पत्तियां होती हैं, हालांकि ये वास्तविक जड़, तना और पत्तियां नहीं होतीं।
🎯 Exam Tip: थैलस शरीर (जड़, तना, पत्ती में अविभेदित) की अवधारणा को समझें और पहचानें कि यह किन पौधों में पाया जाता है।
Question 25. शैवाल है
(a) एस्परजीलस
(b) पेनीसिलियम
(c) एगारीकस
(d) यूलोथ्रिक्स ।
Answer: (d) यूलोथ्रिक्स
In simple words: यूलोथ्रिक्स एक प्रकार का हरा शैवाल है जो आमतौर पर ताजे पानी में पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: शैवाल के विभिन्न उदाहरणों को पहचानें, जो सरल स्वपोषी जीव हैं।
Question 26. यूलोथ्रिक्स है
(a) एल्गी
(b) कवक
(c) टेरिडोफाइट
(d) ब्रायोफाइटा
Answer:
(a) एल्गी
In simple words: यूलोथ्रिक्स एक हरा शैवाल (एल्गी) है, जो एक साधारण जलीय पौधा होता है।
🎯 Exam Tip: एल्गी को एक प्रमुख पादप समूह के रूप में पहचानें और इसके उदाहरणों को जानें।
Question 27. ब्रायोफाइटा का उदाहरण है
(a) नील हरित शैवाल
(b) जीवाणु
(c) लिवर वर्ट
(d) फर्न
Answer: (c) लिवर वर्ट
In simple words: लिवर वर्ट ब्रायोफाइटा समूह का एक पौधा है, जिसे अक्सर "पौधों का उभयचर" कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: ब्रायोफाइटा के उदाहरणों को याद रखें, जैसे मॉस और लिवर वर्ट, जिनकी विशेषता वास्तविक संवहनी ऊतकों की अनुपस्थिति है।
Question 28. टेरिडोफाइटा का उदाहरण है
(a) यूलोथिरेक्स
(b) जीवाणु
(c) लिवर वर्ट ।
(d) फर्न
Answer: (d) फर्न
In simple words: फर्न टेरिडोफाइटा समूह का एक पौधा है, जिसमें वास्तविक जड़, तना और पत्तियां होती हैं, लेकिन बीज नहीं होते।
🎯 Exam Tip: टेरिडोफाइटा के उदाहरणों को पहचानें, जैसे फर्न, जो संवहनी ऊतक वाले पहले स्थलीय पौधे हैं लेकिन बीज उत्पन्न नहीं करते।
Question 29. जिम्नोस्पर्म है
(a) हॉर्नवर्ट
(b) फर्न
(c) लिवरवर्ट
(d) साइकस ।
Answer: (d) साइकस
In simple words: साइकस एक जिम्नोस्पर्म है, जिसके बीज नग्न होते हैं, यानी फल से ढके नहीं होते।
🎯 Exam Tip: जिम्नोस्पर्म के उदाहरणों को याद रखें, जैसे पाइनस और साइकस, जिनके बीज नग्न होते हैं।
Question 30. एन्जियोस्पर्म है
(a) मटर
(b) हॉर्नवर्ट
(c) फर्न
(d) मॉस ।
Answer:
(a) मटर
In simple words: मटर एक एन्जियोस्पर्म है, जिसके बीज फल के अंदर ढके होते हैं।
🎯 Exam Tip: एंजियोस्पर्म के उदाहरणों को पहचानें, जो फूल वाले पौधे हैं और जिनके बीज फल से ढके होते हैं।
Question 31. पेनिसीलियम सदस्य है
(a) शैवाल का
(b) कवक का
(c) टेरियोफाइट का
(d) फेनरोगेम का ।
Answer: (b) कवक का
In simple words: पेनिसीलियम एक प्रकार का फंगस (कवक) है, जो आमतौर पर एंटीबायोटिक उत्पादन में उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: कवक जगत के विभिन्न उदाहरणों को याद रखें, जैसे यीस्ट, मोल्ड और मशरूम।
Question 32. प्रोटोजोआ है-
(a) सी एनीमोन ।
(b) स्पांज
(c) यूग्लीना
(d) टेपवर्म
Answer: (c) यूग्लीना
In simple words: यूग्लीना एक प्रोटोजोआ है, जिसमें पादप और जंतु दोनों के गुण पाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटोजोआ के विभिन्न उदाहरणों को पहचानें, जो एककोशिकीय यूकैरियोट्स हैं, जैसे अमीबा और यूग्लीना।
Question 33. नग्न बीज पाये जाते हैं
(a) जिम्नोस्पर्म में
(b) एंजियोस्पर्म में
(c) टेरिडोफाइट में
(d) इन सभी में ।
Answer:
(a) जिम्नोस्पर्म में
In simple words: जिम्नोस्पर्म वे पौधे होते हैं जिनके बीज किसी फल या अंडाशय से ढके नहीं होते हैं, बल्कि खुले या नग्न होते हैं।
🎯 Exam Tip: 'नग्न बीज' शब्द को जिम्नोस्पर्म से जोड़ें और समझें कि यह एंजियोस्पर्म से कैसे भिन्न है।
Question 34. बीज फल के अन्दर पाये जाते हैं
(a) जिम्नोस्पर्म में
(b) एंजियोस्पर्म में
(c) टेरिडोफाइट में
(d) इन सभी में ।
Answer: (b) एंजियोस्पर्म में
In simple words: एंजियोस्पर्म वे पौधे होते हैं जिनके बीज फल के अंदर पूरी तरह से ढके और सुरक्षित होते हैं।
🎯 Exam Tip: एंजियोस्पर्म को 'फूल वाले पौधे' के रूप में समझें, जहां बीज फल के भीतर विकसित होते हैं।
Question 35. द्विकोष्ठकीय हृदय पाया जाता है
(a) मछली में
(b) साँप में
(c) मेंढक में
(d) छिपकली में।
Answer:
(a) मछली में
In simple words: मछली में दो कक्षों वाला हृदय होता है, जिसमें एक अलिंद और एक निलय होता है, जिससे रक्त एक ही दिशा में बहता है।
🎯 Exam Tip: मछली में दो-कक्षीय हृदय को याद रखें, जो एक एकल-परिसंचरण प्रणाली को दर्शाता है।
Question 36. त्रिकोष्ठीय हृदय पाया जाता है
(a) साँप में
(b) मेंढक में
(c) छिपकली में
(d) इन सभी में
Answer: (d) इन सभी में
In simple words: साँप, मेंढक और छिपकली सभी में तीन-कक्षीय हृदय पाया जाता है, जिसमें दो अलिंद और एक आंशिक रूप से विभाजित निलय होता है।
🎯 Exam Tip: उभयचरों और अधिकांश सरीसृपों में तीन-कक्षीय हृदय की उपस्थिति को नोट करें, जो आंशिक रूप से मिश्रित रक्त परिसंचरण को दर्शाता है।
Question 37. चार कोष्ठकीय हृदय पाया जाता है
(a) मेंढक में
(b) छिपकली में
(c) मगरमच्छ में
(d) उपर्युक्त में से किसी में नहीं।
Answer: (c) मगरमच्छ में
In simple words: मगरमच्छ एक सरीसृप होते हुए भी, स्तनधारियों और पक्षियों की तरह चार-कक्षीय हृदय रखता है।
🎯 Exam Tip: मगरमच्छ का अपवाद याद रखें, जिसमें चार-कक्षीय हृदय होता है जबकि अधिकांश अन्य सरीसृपों में तीन-कक्षीय हृदय होता है।
Question 38. चार कोष्ठकीय हृदय पाया जाता है
(a) मगरमच्छ में
(b) मनुष्य में
(c) कुत्ते में
(d) उपर्युक्त सभी में ।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी में
In simple words: मगरमच्छ, मनुष्य और कुत्ते सभी में चार-कक्षीय हृदय होता है, जो ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त को पूरी तरह से अलग रखता है।
🎯 Exam Tip: पूर्ण दोहरे परिसंचरण के लिए चार-कक्षीय हृदय की आवश्यकता को समझें, जो मगरमच्छ, पक्षियों और स्तनधारियों में पाया जाता है।
Question 39. पक्षी वर्ग को जन्तु नहीं है|
(a) मोर
(b) चमगादड़
(c) कबूतर
(d) गौरैया ।
Answer: (b) चमगादड़
In simple words: चमगादड़ उड़ान भरने वाला स्तनधारी है, पक्षी नहीं, क्योंकि यह स्तन ग्रंथियों से दूध पिलाता है।
🎯 Exam Tip: चमगादड़ को एक स्तनधारी के रूप में पहचानें, न कि पक्षी के रूप में, क्योंकि यह उड़ सकता है लेकिन स्तनधारी वर्ग की सभी प्रमुख विशेषताओं को साझा करता है।
Question 40. अंडज है
(a) मछली
(b) मेंढक
(c) साँप
(d) ये सभी ।
Answer: (d) ये सभी
In simple words: मछली, मेंढक और साँप सभी अंडज प्राणी हैं, जिसका अर्थ है कि वे अंडे देते हैं जिनसे बच्चे निकलते हैं।
🎯 Exam Tip: अंडज (अंडे देने वाले) और जरायुज (बच्चे को जन्म देने वाले) जीवों के बीच के अंतर को समझें और प्रत्येक के उदाहरण याद रखें।
Question 41. शिशु को जन्म देते हैं
(a) स्तनपायी
(b) सरीसृप
(c) पक्षी
(d) ये सभी ।
Answer:(a) स्तनपायी
In simple words: स्तनपायी जीव शिशु को जन्म देते हैं और उन्हें दूध पिलाते हैं, जबकि सरीसृप और पक्षी अंडे देते हैं।
🎯 Exam Tip: स्तनधारियों की एक परिभाषित विशेषता के रूप में जरायुज प्रजनन (शिशु को जन्म देना) को याद रखें।
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