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Detailed Chapter 6 ऊतकों UP Board Solutions for Class 9 Science
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Class 9 Science Chapter 6 ऊतकों UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 6 Tissues
पाठ्य - पुस्तक के प्रश्नोत्तर
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 77)
Question 1. ऊतक क्या है ?
Answer: कोशिकाओं का ऐसा समूह जो बनावट व कार्य में समान होता है, एक ही तरह के कार्य को सम्पन्न करता है ऊतक कहलाता है।
In simple words: ऊतक समान संरचना और कार्य वाली कोशिकाओं का समूह है जो शरीर में एक विशिष्ट कार्य करता है।
🎯 Exam Tip: ऊतक की परिभाषा और उसके कार्य को स्पष्ट रूप से याद करें क्योंकि यह एक मूलभूत अवधारणा है।
Question 2. बहुकोशिकीय जीवों में ऊतकों का क्या उपयोग है ?
Answer: बहुकोशिकीय जीवों में लाखों कोशिकाएँ होतं. हैं। इनमें से अधिकतर कुछ ही कार्यों को सम्पन्न करने के लिए होती हैं। प्रत्येक विशेष कार्य कोशिकाओं के विभिन्न समूहों द्वारा किया जाता है। बहुकोशिक जीवों में श्रम विभाजन होता है। शरीर के अन्दर ऐसी कोशिकाएँ जो एक तरह के कार्य को सम्पन्न करने में दक्ष होती हैं, सदैव एक ही समूह में रहती हैं अर्थात् ऊतक बनाती हैं। रक्त, फ्लोयम ऊतक पेशी सभी ऊतक के उदाहरण हैं।
In simple words: बहुकोशिकीय जीवों में ऊतक श्रम विभाजन में मदद करते हैं, जिससे शरीर के विभिन्न अंग कुशलता से विशिष्ट कार्य कर पाते हैं।
🎯 Exam Tip: बहुकोशिकीय जीवों में ऊतकों के महत्व और श्रम विभाजन की अवधारणा को समझें, उदाहरणों के साथ।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 81)
Question 1. प्रकाश संश्लेषण के लिए किस गैस की आवश्यकता होती है ?
Answer: प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO) की आवश्यकता होती है।
In simple words: पौधों को भोजन बनाने की प्रक्रिया, प्रकाश संश्लेषण, के लिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस की आवश्यकता होती है।
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण में आवश्यक घटकों और उनके कार्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. पौधों में वाष्पोत्सर्जन के कार्यों का उल्लेख करें।
Answer: पौधों में वाष्पोत्सर्जन के कार्य निम्नलिखित हैं
(i) पौधे जमीन से पानी को वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा ऊपर खींचते हैं।
(ii) पौधा ठण्डा रहता है।
In simple words: वाष्पोत्सर्जन पौधों को मिट्टी से पानी खींचने और अपनी पत्तियों को ठंडा रखने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया और उसके प्रमुख कार्यों को बिंदुवार याद रखें।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 83)
Question 1. सरल ऊतकों के कितने प्रकार हैं ?
Answer: सरल ऊतकों के तीन प्रकार हैं
(i) मृदूतक
(ii) स्थूलकोण ऊतक
(iii) दृढ़ ऊतक ।
In simple words: सरल ऊतक तीन मुख्य प्रकार के होते हैं: मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक और दृढ़ ऊतक।
🎯 Exam Tip: सरल ऊतकों के प्रकारों और उनके हिंदी नामों को याद रखना सीधे अंकों के लिए उपयोगी है।
Question 2. प्ररोह का शीर्षस्थ विभज्योतक कहाँ पाया जाता है ?
Answer: एपिकल विभज्योतक जड़ तथा तनों की चोटी पर पाया जाता है। यह तने तथा जड़ों की वृद्धि करने में सहायता करता है।
In simple words: शीर्षस्थ विभज्योतक पौधों की जड़ों और तनों के ऊपरी सिरों पर होता है और उनकी लंबाई बढ़ाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: विभज्योतक के प्रकारों और उनके स्थान व कार्यों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. नारियल का रेशा किस ऊतक का बना होता है ?
Answer: स्कलेरेन्काइमा ऊतक।
In simple words: नारियल का कठोर रेशा दृढ़ोतक या स्क्लेरेन्काइमा ऊतक से बना होता है, जो उसे मजबूती देता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पौधों के हिस्सों में पाए जाने वाले विशिष्ट ऊतकों के उदाहरण याद रखें।
Question 4. फ्लोएम के संघटक कौन-कौन से हैं ?
Answer:
(i) छलनी नलिका,
(ii) साथी (सहचर) कोशिकाएँ,
(iii) फ्लोएम मृदूतक,
(iv) स्कलेरेन्काइमा ।
In simple words: फ्लोएम ऊतक चार मुख्य भागों से बना होता है: छलनी नलिका, साथी कोशिकाएँ, फ्लोएम मृदूतक और स्क्लेरेन्काइमा।
🎯 Exam Tip: फ्लोएम के घटकों और जाइलम के घटकों को अलग-अलग याद रखें ताकि भ्रम से बचा जा सके।
पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या - 87)
Question 1. उस ऊतक का नाम बताएँ जो हमारे शरीर में गति के लिए उत्तरदायी है।
Answer: पेशी ऊतक हमारे शरीर की गति के लिए उत्तरदायी है।
In simple words: पेशी ऊतक ही हमारे शरीर में हिलने-डुलने और गति करने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: मानव शरीर में विभिन्न ऊतकों के कार्यों को संक्षेप में याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. न्यूरॉन देखने में कैसा रुगता है ?
Answer: तंत्रिका ऊतक की कोशिकाओं को न्यूरॉन कहा जाता है। न्यूरॉन में कोशिकाएँ केन्द्रक तथा साइटोप्लाज्म होते हैं। इससे लम्बे, पतले बालों जैसी शाखाएँ निकली होती हैं। प्रायः प्रत्येक न्यूरॉन में इस तरह का एक लम्बा प्रवर्ध होता है, जिसे एक्सॉन कहते हैं और बहुत सारी छोटी शाखा वाले प्रवधू को डेन्डराइट्स कहते हैं। एक तंत्रिका कोशिका एक मीटर लम्बी हो सकती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र न्यूरॉन की संरचना को दर्शाता है, जिसमें कोशिकाकाय (सेल बॉडी), केन्द्रक, डेंड्राइट, और तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन) शामिल हैं। यह तंत्रिका ऊतक की मूल इकाई है जो संदेशों को प्रसारित करती है।
In simple words: न्यूरॉन एक तारे जैसी कोशिका होती है जिसमें एक केंद्रक, कई छोटी शाखाएँ (डेंड्राइट) और एक लंबी पूँछ जैसी संरचना (एक्सॉन) होती है, जो संदेशों को प्रसारित करती है।
🎯 Exam Tip: न्यूरॉन की संरचना और उसके मुख्य भागों (डेंड्राइट, एक्सॉन, कोशिकाकाय) को उनके कार्यों के साथ समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. हृदय पेशी के तीन लक्षणों को बताएँ।
Answer: हृदय पेशी ऊतक के तीन लक्षण निम्नलिखित हैं
1. ये अनैच्छिक पेशियाँ ही होती हैं जो सामान्य परिस्थितियों में जीवन-पर्यन्त लयबद्ध संकुचन और प्रसार करती हैं।
2. ये ऊतक बेलनाकार, कम शाखित व एक या दो केन्दलीय होते हैं।
3. इन ऊतकों पर हल्की व कम गहरी धारियाँ होती हैं।
In simple words: हृदय पेशियाँ अनैच्छिक होती हैं, बेलनाकार होती हैं, और जीवन भर लगातार संकुचित व प्रसारित होती रहती हैं।
🎯 Exam Tip: हृदय पेशी की विशिष्ट विशेषताओं जैसे अनैच्छिक प्रकृति, बेलनाकार आकार और धारियों की उपस्थिति को याद रखें।
Question 4. ऐरीओलर ऊतक के क्या कार्य हैं ?
Answer: ऐरीओलर ऊतक त्वचा व पेशीय के बीच रक्त वाहिकाओं के गिर्द, अस्थिमज्जा व तन्त्रिकाओं में पाया जाता है।
कार्य-
1. यह अंगों के मध्य स्थान की पूर्ति करता है।
2. अन्दर के अंगों को सहारा देता है।
3. यह ऊतकों की मरम्मत में भी सहायता करता है।
In simple words: ऐरीओलर ऊतक अंगों के बीच खाली जगह भरता है, आंतरिक अंगों को सहारा देता है और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: संयोजी ऊतकों के प्रकार और उनके विशिष्ट कार्यों को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ संख्या 88 - 89)
Question 1. ऊतकं को परिभाषित करें।
Answer: कोशिकाओं के ऐसे समूह को जिनकी उत्पत्ति, रचना व कार्य एक समान हो ऊतक कहते हैं।
In simple words: ऊतक ऐसी कोशिकाओं का एक समूह है जो समान दिखती हैं और एक ही काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: ऊतक की सटीक परिभाषा को याद रखना विज्ञान के मूल सिद्धांतों में से एक है।
Question 2. कितने प्रकार के तत्त्वे मिलकर जाइलम ऊतक का निर्माण करते हैं। उनके नाम बताएँ।
Answer: चार प्रकार के अवयव मिलकर जाइलम ऊतक को बनाते हैं। वे निम्न प्रकार के हैं
1. ट्रेकीड
2. वैसलस (वाहिका)
3. जाइलम पेरनकाइमा
4. जाइलम फाइबर्स ।
इनमें से वाहिकाएँ सबसे प्रमुख हैं। इनकी कोशिका भित्ति कठोर व सामान्यतया मृत होती है। वाहिकाएँ बेलनाकार होती हैं और एक नलिका-सी बनाती हैं जो पानी व खनिज लवणों को जड़ों से पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाते हैं। पेरनकाइमा भोजन संग्रहण करती है जबकि फाइबर्स दृढ़ता प्रदान करते हैं।
In simple words: जाइलम ऊतक चार मुख्य भागों (ट्रैकीड, वाहिका, जाइलम पैरेंकाइमा, जाइलम फाइबर) से मिलकर बनता है और पौधों में पानी व खनिज लवणों के परिवहन का काम करता है।
🎯 Exam Tip: जाइलम और फ्लोएम के घटकों और उनके विशिष्ट कार्यों को तालिका के रूप में याद करें।
Question 3. पौधों में सरल ऊतक जटिल ऊतक से किस प्रकार भिन्न होते हैं ?
Answer:
1. सरल ऊतक – ये ऊतक एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं जैसे विभज्योतक, पेरनकाइमा, कोलेनकाइमा व स्केलरनकाइमा ये विभिन्न कार्य करते हैं।
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2. विभज्योतक – तीव्रता से विभाजित होकर वृद्धि करते हैं, पेरनकाइमा भोजन का संग्रह करता है, कोलेनकाइमा तना, शाखाएँ व पत्तों को दृढ़ता प्रदान करके उसे यान्त्रिकी आधार देता है।
3. जटिल ऊतक – इस प्रकार के ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनते हैं। सभी कोशिकाएँ परस्पर मिलकर कोई सामान्य कार्य करती है। जैसे जाइलम व फ्लोएम । ये दोनों संवहन का कार्य करते हैं और संवहन बंडल बनाते हैं।
In simple words: सरल ऊतक एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बनते हैं, जबकि जटिल ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर एक साथ काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: सरल और जटिल ऊतकों के बीच के अंतर को उदाहरणों के साथ स्पष्ट रूप से समझें और तालिका बनाकर याद करें।
Question 4. कोशिका भित्ति के आधार पर पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा व स्क्लेरेन्काइमा के बीच भेद स्पष्ट करें।
Answer: पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा व स्क्लेरेन्काइमा में निम्नलिखित अन्तर हैं
| पैरेन्काइमा (मृदूतक) | कॉलेन्काइमा (स्थूलकोणोतक) | स्क्लेरेन्काइमा (दृढ़ोतक) |
|---|---|---|
| (1) इनकी कोशिका भित्ति पतली होती है और कोशिकाएँ समान होती हैं। | (1) इनकी कोशिका भित्ति किनारों पर सैल्यूलोज व पैक्टिन के जमाव के कारण कठोर हो जाती है। | (1) इनकी कोशिका भित्ति लिग्निन के जमने के कारण कठोर होती है। |
| (2) साइटोप्लाज्म कोशिका द्रव्य सदैव पाया जाता है। | (2) इनमें भी कोशिका द्रव्य पाया जाता है। | (2) इनकी भित्ति इतनी मोटी हो जाती है अतः सामान्यतया ये कोशिका द्रव्य से वंचित होती है। |
| (3) ये कोशिकाएँ सजीव होती हैं। | (3) ये कोशिकाएँ भी सजीव होती हैं। | (3) ये कोशिकाएँ सामान्यतया मृत होती हैं। |
| (4) इनके बीच अन्तराकोशिकीय स्थान पाया जाता है। | (4) इनमें अन्तराकोशिकीय स्थान अनुपस्थित होता है। | (4) इन कोशिकाओं के बीच में अन्तरा-कोशिकीय स्थान अनुपस्थित होता है। |
In simple words: पैरेन्काइमा की कोशिका भित्ति पतली होती है, कॉलेन्काइमा की किनारों पर मोटी होती है, जबकि स्क्लेरेन्काइमा की भित्ति लिग्निन के कारण बहुत मोटी और कठोर होती है।
🎯 Exam Tip: इन तीनों ऊतकों के बीच के मुख्य अंतरों को, विशेष रूप से कोशिका भित्ति की संरचना और जीवद्रव्य की उपस्थिति के आधार पर, तालिका के रूप में याद करें।
Question 5. रन्ध्र के क्या कार्य हैं ?
Answer: पौधों की पत्तियों में बाह्य त्वचा या एपिडर्मिस की कोशिकाओं में छोटे-छोटे रन्ध्र होते हैं उन्हें स्टोमेटा या वात-रन्ध्र कहते हैं। ये पौधे के लिए निम्न प्रकार आवश्यक हैं-
1. ये वायुमण्डल से पौधों में वायु की गैसों का आदान-प्रदान कराने में सहायक हैं अर्थात् इनकी सहायता से पौधा प्रकाश संश्लेषण क्रिया के लिए कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन बाहर निकालते हैं।
2. स्टोमेटा वाष्पोत्सर्जन की क्रिया में भी पौधे की पत्तियों द्वारा फालतू पानी को वाष्प के रूप में वायुमण्डल में उत्सर्जित करते हैं।
In simple words: रंध्र पत्तियों पर छोटे छिद्र होते हैं जो पौधों को कार्बन डाइऑक्साइड लेने और ऑक्सीजन व अतिरिक्त पानी बाहर निकालने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: रंध्रों के दो मुख्य कार्यों (गैस विनिमय और वाष्पोत्सर्जन) को स्पष्ट रूप से समझें और बिंदुवार याद रखें।
Question 6. तीनों प्रकार के पेशीय रेशों में चित्र बनाकर अन्तर स्पष्ट करें।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र पेशीय ऊतक के तीन मुख्य प्रकारों को दर्शाता है:
(a) रेखित पेशी, जिसमें धारियाँ और केन्द्रक दिखाई देते हैं,
(b) चिकनी पेशी, जिसमें केन्द्रक और धारियाँ नहीं होतीं, और
(c) कार्डियक (हृदय) पेशी, जिसमें केन्द्रक और अंतर्विष्ट पट्टियाँ होती हैं।
In simple words: पेशीय रेशे तीन प्रकार के होते हैं: रेखित (धारीदार), अरेखित (चिकनी) और हृदय पेशी, जिनमें संरचनात्मक भिन्नताएँ होती हैं जो उनके विशिष्ट कार्यों को दर्शाती हैं।
🎯 Exam Tip: पेशीय ऊतक के प्रकारों को उनके चित्रों और मुख्य विशेषताओं के साथ पहचानना और उनमें अंतर करना सीखें, क्योंकि अक्सर चित्र-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
Question 7. कार्डिक (हृदयक) पेशी का विशेष कार्य क्या है ?
Answer: हृदय पेशी ऊतक अनैच्छिक ऊतक है अतः ये जीवनपर्यन्त हृदय में लयबद्ध संकुचन व प्रसार करती रहती हैं, जिसके कारण शरीर में रुधिर का परिवहन होता है और जीवित रहते हैं।
In simple words: हृदय पेशी लगातार और अनैच्छिक रूप से सिकुड़ती और फैलती रहती है, जिससे शरीर में रक्त का संचार होता रहता है।
🎯 Exam Tip: हृदय पेशी की अनैच्छिक प्रकृति और जीवनभर निरंतर कार्य करने की क्षमता पर विशेष ध्यान दें।
Question 8. रेखित, अरेखित तथा कार्डिक (हृदयक) पेशियों में शरीर में स्थित कार्य और स्थान के आधार पर अन्तर स्पष्ट करें।
Answer: रेखित, अरेखित तथा कार्डिक (हृदयक) पेशी में निम्नलिखित अन्तर हैं-
| रेखित या ऐच्छिक | अरेखित या अनैच्छिक | हृदय पेशी |
|---|---|---|
| (1) इस ऊतक की कोशिकाएँ लंबी, बेलनाकार तथा अशाखित होती हैं। | (1) इस ऊतक की कोशिकाएँ लंबी, तुर्कुरूपी व शाखित होती हैं। | (1) कोशिकाएँ बेलनाकार तथा शाखित होती हैं।। |
| (2) इस पर हल्के व गहरे रंग के बंध एकान्तर क्रम में उपस्थित होते हैं। | (2) इन पर कोई बंध नहीं होते इसीलिए इन्हें अरेखित पेशी ऊतक कहते है | (2) आरपार बंध बहुत हल्के (कम गहरे) होते हैं। |
| (3) इनमें बहुत सारे केन्द्रक होते हैं जो पेशी के बाहर की ओर स्थित होते हैं। | (3) इन कोशिकाओं के अन्दर मध्य भाग में स्थित एक केन्द्रक होता है। | (3) प्रत्येक कोशिका के मध्य एक या कभी-कभी दो केन्द्रक भी होते हैं। |
| (4) ये ये पेशियाँ हमारी इच्छानुसार कार्य करती हैं। | (4) ये पेशियाँ हमारी इच्छा के अनुसार कार्य नहीं करती हैं। | (4) ये पेशियाँ भी हमारी इच्छा के अनुसार कार्य नहीं करती हैं। |
| (5) ये पेशियाँ हड्डियों के साथ जुड़ी होती हैं और शरीर की गति में सहायता करती हैं। | (5) ये पेशियाँ हमारे शरीर के अन्दर आमाशय, मूत्रवाहिनी आदि अंगों की भित्ति में होती हैं। | (5) सामान्य परिस्थिति में लयबद्ध संकुचन व प्रसार करती हैं इसी से शरीर में रुधिर का परिवहन होता है। |
In simple words: रेखित पेशियाँ ऐच्छिक होती हैं और हड्डियों से जुड़ी होती हैं, अरेखित पेशियाँ अनैच्छिक होती हैं और आंतरिक अंगों में पाई जाती हैं, जबकि हृदय पेशियाँ भी अनैच्छिक होती हैं और केवल हृदय में लगातार काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार की पेशियों के बीच के अंतरों को उनके स्थान, कार्य, और संरचनात्मक विशेषताओं के आधार पर तालिका बनाकर याद करें।
Question 9. न्यूरॉन का एक चिन्हित चित्र बनाएँ।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक न्यूरॉन की विस्तृत संरचना को दर्शाता है, जिसमें कोशिकाकाय, केन्द्रक, डेंड्राइट और तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन) जैसे प्रमुख भाग स्पष्ट रूप से लेबल किए गए हैं। यह तंत्रिका तंत्र की कार्यात्मक इकाई है।
In simple words: न्यूरॉन, तंत्रिका तंत्र की मूल इकाई है जो संदेशों को संचारित करती है, जिसमें एक कोशिकाकाय, डेंड्राइट और एक लंबा एक्सॉन होता है।
🎯 Exam Tip: न्यूरॉन के नामांकित चित्र का अभ्यास करें और इसके प्रत्येक भाग के कार्य को समझें।
Question 10. निम्नलिखित के नाम लिखिए
(a) ऊतक जो मुँह के भीतरी अस्तर का निर्माण करता है।
(b) ऊतक जो मनुष्य में पेशियों को अस्थि से जोड़ता है।
(c) ऊतक जो पौधों में भोजन का संवहन करता है।
(d) ऊतक जो हमारे शरीर में वसा का संचय | करता है।
(e) तरल आधात्री सहित संयोजी ऊतक ।
(f) मस्तिष्क में स्थित ऊतक।
Answer:
(a) हमारी मुख गुहिका की आन्तरिक परत बनाने वाले शल्की एपिथीलियम ऊतक है।
(b) मानव शरीर में हड्डियों के जोड़ने वाले ऊतक कन्डरा होते हैं।
(c) फ्लोएम ऊतक पौधों में भोजन का संवहन करते हैं।
(d) ऐडीपोज (वसा) ऊतक हमारे शरीर में वसा का संग्रह करते हैं।
(e) तरल आधात्री वाला योजी ऊतक रक्त है।
(f) मस्तिस्क में पाए जाने वाले ऊतक तन्त्रिका ऊतक (न्यूरॉन) हैं।
In simple words: विभिन्न ऊतक शरीर और पौधों के विशिष्ट कार्यों को करते हैं, जैसे एपिथीलियम अस्तर बनाता है, कण्डरा हड्डियों को जोड़ती है, और रक्त पोषक तत्वों का परिवहन करता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक ऊतक के नाम और उसके विशिष्ट कार्य या स्थान को याद रखना सीधे प्रश्न उत्तर में सहायक होगा।
Question 11. निम्नलिखित में ऊतक के प्रकार की पहचान करें
(1) त्वचा
(2) पौधे का वल्क
(3) अस्थि
(4) वृक्कीय नलिका अस्तर
(5) संवहन बण्डल ।
Answer:
(1) त्वचा-शल्की एपिथीलियम ऊतक।
(2) पौधे का वल्क-रक्षात्मक ऊतक।
(3) अस्थि-योजी ऊतक ।
(4) वृक्कीय नलिका अस्तर-स्तंभाकार एपिथीलियम ।
(5) संवहन बण्डल-जाइलम और फ्लोएम ।
In simple words: शरीर और पौधों के विभिन्न हिस्सों में पाए जाने वाले ऊतक विशिष्ट संरचनात्मक और कार्यात्मक भूमिकाएँ निभाते हैं, जैसे त्वचा में शल्की एपिथीलियम या पौधों में जाइलम और फ्लोएम।
🎯 Exam Tip: विभिन्न अंगों और पौधों के भागों से संबंधित ऊतकों के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 12. पैरेन्काइमा ऊतक किस क्षेत्र में स्थित होते हैं ?
Answer: पैरेन्काइमा ऊतक – ये ऊतक पौधे के विभिन्न भागों में जैसे जड़, तना, पत्तियाँ, फल, फूल इत्यादि में पाए जाते हैं। इन ऊतकों में जब क्लोरोफिल पाई जाती है। और ये पौधे का भोजन बनाती है उस स्थिति में इन्हें क्लोरनकाइमा कहते हैं।
In simple words: पैरेन्काइमा ऊतक पौधों की जड़ों, तनों, पत्तियों, फलों और फूलों जैसे कई हिस्सों में मौजूद होता है, और क्लोरोफिल होने पर भोजन भी बनाता है।
🎯 Exam Tip: पैरेन्काइमा के स्थान और उसके प्रकाश संश्लेषण में भूमिका (क्लोरनकाइमा) को याद रखें।
Question 13. पौधों में एपिडर्मिस की क्या भूमिका है?
Answer: एपिडर्मिस जो कोशिकाओं की बाह्यतम परत है वह रक्षात्मक ऊतक का कार्य करती है। ये ऊतक सामान्यतया जड़, तने, पत्तियों और फूलों की कोशिकाओं के बाहर पाए जाते हैं। यह मोटाई में एककोशिकीय होती है जिसके बाहर क्यूरिन की परत चढ़ी होती है। जैसे-जैसे पौधे की आयु बढ़ती है परिधि पर स्थित एपिडर्मिस के अन्दर की कोशिकाएँ कार्क कोशिकाओं में रूपान्तरित हो जाती हैं। इनकी कोशिका भित्ति सुबेरिन के जमाव के कारण बहुत मोटी व मृत हो जाती है। यह जल की हानि को कम करती है।
कार्य-
1. पौधे की सुरक्षा करती है।
2. इसका उपयोग रोधन व धात रोधन में करते हैं।
3. इसका उपयोग लिनोलियम व खेल का सामान बनाने में भी किया जाता है।
4. एपिडर्मिस की कोशिकाओं में बीच-बीच में छोटे रन्ध्र होते हैं जिन्हें वातरन्ध्र (स्टोमेटा) कहते हैं।
5. कुछ कार्बनिक पदार्थों के जमाव के कारण यह मोटी व जलरोधी हो जाती है।
In simple words: एपिडर्मिस पौधों को बाहरी आवरण प्रदान करती है, उन्हें पानी के नुकसान से बचाती है, गैस विनिमय में मदद करती है, और सुरक्षात्मक कार्य करती है।
🎯 Exam Tip: एपिडर्मिस के सुरक्षात्मक कार्यों, जल हानि नियंत्रण और रंध्रों की उपस्थिति पर ध्यान दें।
Question 14. छाल (कॉक) किस प्रकार सुरक्षा ऊतक के रूप में कार्य करता है ?
Answer: कॉर्क एक सुरक्षा ऊतक की तरह कार्य करता है क्योंकि
(i) इसकी कोशिकाएँ मृत होती हैं तथा बिना स्थान छोड़े लगातार परत बनाती हैं।
(ii) इसकी भित्ति पर सुबेरिन जमा होता है जो इसे गैसों के आदान-प्रदान में सहायता करने योग्य बनाता है। अतः कॉर्क ऊतकों की अत्यधिक पानी-हानि बाह्य वायुमंडल के प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करती है।
In simple words: कॉर्क एक सुरक्षात्मक ऊतक है क्योंकि इसकी मृत कोशिकाएँ एक अभेद्य परत बनाती हैं जिसमें सुबेरिन जमा होता है, जो पानी और गैसों के आदान-प्रदान को रोकता है।
🎯 Exam Tip: कॉर्क की सुरक्षात्मक विशेषताओं, विशेष रूप से मृत कोशिकाओं और सुबेरिन जमाव की भूमिका को याद रखें।
Question 15. निम्न दी गई तालिका को पूर्ण करें-
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र स्थायी ऊतकों का एक वर्गीकरण तालिका के रूप में दर्शाता है, जिसमें सरल और जटिल ऊतक प्रकारों को विभाजित किया गया है। सरल ऊतकों में कॉलेन्काइमा, पैरेन्काइमा और स्क्लेरेन्काइमा शामिल हैं, जबकि जटिल ऊतकों में जाइलम और फ्लोएम आते हैं।
| स्थायी ऊतक | ||||
| सरल | जटिल | |||
| पैरेन्काइमा | कॉलेन्काइमा | स्क्लेरेन्काइमा | जाइलम | फ़्लोएम |
In simple words: स्थायी ऊतक दो मुख्य प्रकार के होते हैं: सरल (जैसे पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा, स्क्लेरेन्काइमा) और जटिल (जैसे जाइलम, फ्लोएम)।
🎯 Exam Tip: ऊतकों के वर्गीकरण को एक स्पष्ट तालिका के रूप में याद रखें, जिसमें सरल और जटिल ऊतकों के सभी प्रकार और उनके उदाहरण शामिल हों।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. ऊतक किसे कहते हैं ?
Answer: ऊतक (Tissues)-कोशिकाओं के ऐसे समूह जिनकी उत्पत्ति, रचना एवं कार्य समान हों, ऊतक कहलाते हैं।
In simple words: ऊतक समान संरचना और कार्य वाली कोशिकाओं का एक समूह होता है।
🎯 Exam Tip: ऊतक की परिभाषा को उसके मूल घटकों – उत्पत्ति, रचना और कार्य की समानता – के साथ याद करें।
Question 2. 'अंग' किसे कहते हैं ?
Answer: अंग (Organs)-उच्च श्रेणी के जन्तुओं तथा पौधों में विभिन्न प्रकार के ऊतक तन्त्र मिलकर अंग का निर्माण करते हैं। अंग अलग-अलग निश्चित कार्य करते हैं।
In simple words: अंग विभिन्न ऊतक प्रणालियों से मिलकर बने होते हैं और शरीर में विशिष्ट कार्य करते हैं।
🎯 Exam Tip: कोशिका, ऊतक, अंग और अंग तंत्र के पदानुक्रम को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. 'अंग तन्त्र' किसे कहते हैं ?
Answer: अंग तन्त्र (Organ System)-विशेष कार्य करने वाले अंगों के समूह को अंग तन्त्र कहते हैं।
In simple words: अंग तंत्र उन अंगों का एक समूह है जो मिलकर एक विशिष्ट और बड़ा कार्य करते हैं।
🎯 Exam Tip: अंग तंत्र की परिभाषा को उदाहरणों (जैसे पाचन तंत्र) के साथ याद करें।
Question 4. पादप ऊतक की परिभाषा लिखिए ।
Answer: पादप ऊतक (Plant tissues)-पादप कोशिकाओं के ऐसे समूह जिनकी उत्पत्ति, रचना एवं कार्य समान हों, पादप ऊतक कहलाते हैं।
In simple words: पादप ऊतक पौधों में समान संरचना और कार्य वाली कोशिकाओं का समूह है।
🎯 Exam Tip: पादप ऊतक और जन्तु ऊतक की परिभाषाओं के बीच समानता और अंतर पर ध्यान दें।
Question 5. ऊतक शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किस वैज्ञानिक ने किया था ?
Answer: ऊतक शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग बिचर नामक वैज्ञानिक ने किया था।
In simple words: बिचर नामक वैज्ञानिक ने सबसे पहले 'ऊतक' शब्द का इस्तेमाल किया था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्दों के जनक या खोजकर्ता के नाम याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।
Question 6. विभज्योतक क्या है ?
Answer: विभज्योतक (Meristematic tissues) – वे ऊतक जिनकी कोशिकाएँ निरन्तर वृद्धि करके पौधों की लम्बाई एवं मोटाई में वृद्धि करती रहती हैं विभज्योतक कहलाते हैं।
In simple words: विभज्योतक पौधों में ऐसे ऊतक होते हैं जिनकी कोशिकाएँ लगातार विभाजित होकर पौधों की वृद्धि करती हैं।
🎯 Exam Tip: विभज्योतक की परिभाषा और पौधों में उनकी वृद्धि में भूमिका को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 7. दृढ़ोतक या स्क्लेरेनकाइमा का एक प्रमुख कार्य लिखिए
Answer: दृढ़ोतक या स्क्लेरेनकाइमा का एक प्रमुख कार्य पौधों को दृढ़ता प्रदान करना है।
In simple words: दृढ़ोतक पौधों को मजबूती और सहारा देता है।
🎯 Exam Tip: स्क्लेरेन्काइमा के कार्य को उसके कठोर और मृत प्रकृति के साथ जोड़कर याद रखें।
Question 8. जटिल ऊतक किसे कहते हैं ?
Answer: जटिल ऊतक (Complex tissues)-जो ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं तथा जो सभी मिलकर इकाई ऊतक के रूप में कार्य करते हैं, वे जटिल ऊतक कहलाते हैं।
In simple words: जटिल ऊतक विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनते हैं जो एक साथ एक विशिष्ट कार्य करते हैं।
🎯 Exam Tip: जटिल ऊतकों की परिभाषा को सरल ऊतकों से तुलना करते हुए समझें।
Question 9. ग्रन्थिल ऊतक क्या हैं?
Answer: ग्रन्थिल ऊतक (Glandular Tissues)- ग्रन्थियुक्त विशिष्ट स्रावी ऊतक, न्थिल ऊतक कहलाते
In simple words: ग्रन्थिल ऊतक वे विशिष्ट ऊतक होते हैं जो ग्रंथियों में पाए जाते हैं और विभिन्न पदार्थों का स्राव करते हैं।
🎯 Exam Tip: ग्रन्थिल ऊतक के स्रावी कार्य और उसके उदाहरणों को याद रखें।
Question 10. आक्षीरी ऊतक क्या है ?
Answer: आक्षीरी ऊतक (Lacticiferous tissues)-नलिकायुक्त वे विशिष्ट स्रावी ऊतक जो दुग्ध जैसे पदार्थ का स्रावण करते हैं आदी ऊतक कहलाते हैं।
In simple words: आक्षीरी ऊतक नलीदार संरचनाएँ होती हैं जो पौधों में दूधिया पदार्थ (लेटेक्स) का स्राव करती हैं।
🎯 Exam Tip: पौधों में विशिष्ट स्रावी ऊतकों के प्रकार और उनके द्वारा स्रावित पदार्थों को याद रखें।
Question 11. ग्रन्थिल ऊतक का क्या कार्य है ?
Answer: ग्रन्थिल के गोंद, रेजिन, तेल, सुगन्धित तेल एवं मकरन्द वा स्राव करते हैं।
In simple words: ग्रन्थिल ऊतक पौधों में गोंद, रेजिन, तेल और सुगंधित पदार्थों का स्राव करते हैं।
🎯 Exam Tip: पौधों में ग्रन्थिल ऊतक द्वारा स्रावित विभिन्न पदार्थों के उदाहरणों को याद रखें।
Question 12. ग्रन्थिले ऊतक किन पौधों में पाये जाते हैं?
Answer: ग्रन्थिल ऊतक, जैट्रोपा तम्बाकू, बबूल, चीड़ आदि पौधों में पाये जाते हैं।
In simple words: ग्रन्थिल ऊतक जैट्रोपा, तम्बाकू, बबूल और चीड़ जैसे पौधों में पाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: ग्रन्थिल ऊतक पाए जाने वाले पौधों के विशिष्ट उदाहरणों को याद रखें।
Question 13. आक्षीरी ऊतक किन पौधों में पाये जाते हैं?
Answer: आक्षीरी ऊतक, आक, गूलर आदि पौधों में पाये जाते हैं।
In simple words: आक्षीरी ऊतक आक और गूलर जैसे पौधों में पाए जाते हैं, जहाँ वे दूधिया स्राव उत्पन्न करते हैं।
🎯 Exam Tip: आक्षीरी ऊतक पाए जाने वाले पौधों के विशिष्ट उदाहरणों को याद रखें।
Question 14. पेशी और अस्थि को जोड़ने वाले ऊतक का नाम बताइये ।
Answer: पेशी अंग अस्थि को नोडने वाले ऊतक का नाम कण्डराएँ (Tendons) हैं।
In simple words: कण्डराएँ (टेंडन) वे ऊतक हैं जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: कण्डरा और स्नायु के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें - कण्डरा पेशी को अस्थि से और स्नायु अस्थि को अस्थि से जोड़ता है।
Question 15. पेशी को पेशी से जोड़ने वाले ऊतक का नाम लिखिए।
Answer: पेशी से पेशी को जोड़ने वाले ऊतक का नाम स्नायु (Ligament) है।
In simple words: स्नायु (लिगामेंट) आमतौर पर हड्डियों को हड्डियों से जोड़ते हैं, हालाँकि यहाँ इसे 'पेशी से पेशी' जोड़ने वाला ऊतक बताया गया है।
🎯 Exam Tip: कण्डरा मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं, जबकि स्नायु हड्डियों को हड्डियों से जोड़ते हैं। 'पेशी से पेशी' जोड़ने की बात पर अक्सर भ्रम होता है, ध्यान से समझें।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जटिल ऊतक कितने प्रकार के होते हैं ? उनके नाम लिखिए।
अथवा
जटिल ऊतक के केवल नाम लिखिए।
Answer: जटिल ऊतकों के प्रकार – जटिल ऊतक निम्न दो प्रकार के होते हैं।
1. दारू ऊतक या जाइलम (Xylem)
2. अधोवाही ऊतक या फ्लोएम (Phloem)
In simple words: जटिल ऊतक दो मुख्य प्रकार के होते हैं: जाइलम (दारू ऊतक) और फ्लोएम (अधोवाही ऊतक)।
🎯 Exam Tip: जटिल ऊतकों के दोनों प्रकारों, जाइलम और फ्लोएम, और उनके हिंदी व अंग्रेजी नामों को याद रखें।
Question 2. शीर्षस्थ विभज्योतक क्या है ?
Answer: शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical meristematic tissues) – ये ऊतक जड़ एवं तने के शिखाग्र पर स्थित रहते हैं तथा जड़ एवं तने की लम्बाई में वृद्धि करते हैं।
In simple words: शीर्षस्थ विभज्योतक पौधों की जड़ों और तनों के शीर्ष पर पाए जाते हैं और उनकी लंबाई बढ़ाने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: विभज्योतक के प्रकारों (शीर्षस्थ, अंतर्वेशी, पार्श्व) और उनके विशिष्ट स्थानों तथा वृद्धि में भूमिका को स्पष्ट करें।
Question 3. अन्तर्विष्ट विभज्योतक क्या है ?
Answer: अन्तर्विष्ट विभज्योतक (Intercalarymeristematic tissues) – ये ऊतके पौधे में पत्ती के आधार के पास अथवा पर्व के आधार के पास स्थित होते हैं। ये पौधे की लम्बाई बढ़ाने में सहयोग करते हैं।
In simple words: अंतर्वेशी विभज्योतक पत्तियों के आधार या पर्वों के पास होते हैं और पौधों की लंबाई बढ़ाने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: अंतर्वेशी विभज्योतक के स्थान (पत्ती आधार, पर्व) और कार्य (लंबाई में वृद्धि) को याद रखें।
Question 4. पाश्र्व विभज्योतक क्या है ?
Answer: पार्श्व विभज्योतक (Lateral meristematic tissues) – ये ऊतक तनों एवं जड़ों के पाश्र्व भाग में स्थित होते हैं। इनसे पौधों के तनों एवं जड़ों की मोटाई बढ़ती है।
In simple words: पार्श्व विभज्योतक पौधों के तनों और जड़ों के किनारे वाले हिस्सों में होते हैं और उनकी मोटाई बढ़ाने में सहायक होते हैं।
🎯 Exam Tip: पार्श्व विभज्योतक के स्थान और कार्य को याद रखें, खासकर इसकी पौधों की चौड़ाई बढ़ाने वाली भूमिका।
Question 5. स्थायी ऊतक किसे कहते हैं ?
Answer: स्थायी ऊतक (Permanent tissues) – विभज्योतकों से बने वे ऊतक जिनकी कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता समाप्त हो जाती है तथा जो एक निश्चित आकार ग्रहण कर लेते हैं, स्थायी ऊतक कहलाते हैं।
In simple words: स्थायी ऊतक वे ऊतक होते हैं जिनकी कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता खत्म हो जाती है और वे एक निश्चित रूप ले लेते हैं।
🎯 Exam Tip: स्थायी ऊतक और विभज्योतक ऊतक के बीच मुख्य अंतर (विभाजन क्षमता) पर ध्यान दें।
Question 6. सरल स्थायी ऊतक क्या हैं ?
Answer: सरले स्थायी ऊतक (Simple permanent tissues) – जो स्थायी ऊतक केवल एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं, वे सरल स्थायी ऊतक कहलाते हैं।
In simple words: सरल स्थायी ऊतक एक ही तरह की कोशिकाओं से मिलकर बनते हैं और पौधों में विभिन्न भूमिकाएँ निभाते हैं।
🎯 Exam Tip: सरल स्थायी ऊतकों की परिभाषा और उनके उदाहरणों (जैसे पैरेन्काइमा) को याद रखें।
Question 7. स्थूलकोण ऊतक या कॉलेनकाइमा के प्रमुख दो कार्य लिखिए।
Answer: स्थूलकोण ऊतक या कोलेनकाइमा के प्रमुख कार्य
1. ये पौधों में दृढ़ता प्रदान करते हैं।
2. क्लोरोफिल की उपस्थिति में जब ये
प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाने का कार्य करते हैं, तब इन्हें क्लोरेनकाइमा भी कहते हैं।
In simple words: कॉलेन्काइमा ऊतक पौधों को लचीली मजबूती देता है और, यदि उसमें क्लोरोफिल हो, तो भोजन बनाने में भी मदद करता है।
🎯 Exam Tip: कॉलेन्काइमा के यांत्रिक सहारा प्रदान करने और क्लोरोफिल की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण (क्लोरनकाइमा) की भूमिका को याद रखें।
Question 8. जाइलम एवं फ्लोएम में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
Answer: जाइलम एवं फ्लोएम में अन्तर-
| जाइलम (Xylem) | फ्लोएम (Phloem) |
|---|---|
| 1. जाइलम द्वारा जल और उसमें घुले लवणों का संवहन होता है। | 1. फ्लोएम से पत्तियों द्वारा निर्मित भोज्य पदार्थों का संवहन होता है। |
| 2. यह निर्जीव ऊतक है। | 2. यह सजीव ऊतक है। |
| 3. इसमें मुख्यतः संवहन नलिकाएँ होती हैं। | 3. इसमें मुख्यतः चलनी नलिकाएँ होती हैं। |
| 4. इनकी भित्ति बहुत मोटी होती है। | 4. इनकी भित्ति कम मोटी होती है। |
In simple words: जाइलम पानी और खनिज पहुंचाता है और मृत ऊतक होता है, जबकि फ्लोएम भोजन पहुंचाता है और सजीव ऊतक होता है।
🎯 Exam Tip: जाइलम और फ्लोएम के बीच के अंतरों को उनके कार्य, घटक और सजीव/निर्जीव प्रकृति के आधार पर तालिका के रूप में याद करें।
Question 9. लसिका के कार्य लिखिए।
Answer: लसिका के कार्य (Functions of Lymph)-
1. लसिका ऊतकों तक भोज्य पदार्थों का संवहन करती है।
2. ऊतक से उत्सर्जी पदार्थ एकत्रित करती है।
3. हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करके शरीर की रक्षा करती है।
4. पचे वसा का अवशोषण करके शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती है।
5. शरीर के घाव भरने में सहायक होती है।
In simple words: लसिका पोषक तत्वों का परिवहन करती है, अपशिष्ट पदार्थों को हटाती है और शरीर को संक्रमण से बचाती है।
🎯 Exam Tip: लसिका के परिवहन, अपशिष्ट निष्कासन और प्रतिरक्षा कार्यों को बिंदुवार याद रखें।
Question 10. लसिका तथा रक्त में अन्तर लिखिए ।
अथवा
रक्त एवं लसीका में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: लसिका तथा रक्त में अन्तर-
| लसिका (Lymph) | रक्त (Blood) |
|---|---|
| 1. लसिका रंगहीन द्रवीय ऊतक है। | 1. रक्त लाल रंग का द्रवीय ऊतक है। |
| 2. इसमें प्रोटीन की मात्रा कम होती है। | 2. इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। |
| 3. इसमें लाल रक्त कणिकाओं का पूर्ण अभाव होता है। | 3. इसमें लाल रक्त कणिकाएँ पायी जाती हैं। |
| 4. इसमें उत्सर्जी पदार्थ अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। | 4. इसमें उत्सर्जी पदार्थ कम मात्रा में पाये जाते हैं। |
In simple words: रक्त लाल, प्रोटीन में अधिक और लाल रक्त कणिकाओं वाला होता है, जबकि लसिका रंगहीन, प्रोटीन में कम और लाल रक्त कणिकाओं के बिना होती है।
🎯 Exam Tip: रक्त और लसिका के बीच के मुख्य अंतरों को उनके रंग, प्रोटीन सामग्री और लाल रक्त कणिकाओं की उपस्थिति के आधार पर तुलनात्मक रूप से याद करें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. पौधों में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के ऊतकों के नाम एवं उनके प्रमुख कार्य लिखिए ।
Answer: पौधों में पाये जाने वाले विभिन्न ऊतक एवं उनके प्रमुख कार्य-
| ऊतक का नाम | ऊतक के प्रमुख कार्य |
|---|---|
| (A) विभज्योतक | कोशिकाओं मेंनिरन्तर वृद्धि करके पौधों की लम्बाई एवं मोटाई में वृद्धि करना, |
| 1. शीर्षस्थ विभज्योतक | |
| 2. अन्तर्विष्ट विभज्योतक | |
| 3. पार्श्व विभज्योतक | जड़ एवं तने की लम्बाई में वृद्धि करना, पौधे की लम्बाई में वृद्धि करना, जड़ एवं तने की मोटाई में वृद्धि करना। |
| (B) स्थायी ऊतक | |
| 1. सरल स्थायी ऊतक | |
| (i) मृदूतक या पेरनकाइमा | (i) भोजन एवं अन्य अकार्बनिक पदार्थों का संचय करना। (ii) क्लोरोफिल की उपस्थिति होने पर प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन तैयार करना। |
| (ii) स्थूलकोण ऊतक या कॉलेन्काइमा | (i) पौधों में दृढ़ता प्रदान करना। (ii) क्लोरोफिल की उपस्थिति होने पर प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन तैयार करना। |
| (iii) दृढ़ोतक या स्क्लेरेन्काइमा | पौधों को दृढ़ता प्रदान करना। |
| 2. जटिल स्थायी ऊतक | |
| (i) दारू ऊतक या जाइलम | (i) पानी एवं खनिज लवणों को जड़ से पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाना। |
| (ii) अधोवाही ऊतक या फ्लोएम | (i) पौधों को दृढ़ता प्रदान करना, पत्तियों द्वारा बने भोजन को पौधों के विभिन्न भागों तक पहुँचाना। |
| 3. विशिष्ट स्थायी ऊतक | |
| (i) ग्रन्थिल स्त्रावी ऊतक | गोंद, रेजिन, तेल, सुगन्धित तेल, मकरन्द आदि का स्त्रावण करना। |
| (ii) आक्षीरी स्त्रावी ऊतक | दुग्ध जैसे पदार्थ का स्त्रावण करना। |
In simple words: पौधों में विभज्योतक ऊतक वृद्धि करते हैं, जबकि स्थायी ऊतक (सरल और जटिल) पौधे को सहारा, भोजन संचय और परिवहन प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: पौधों में पाए जाने वाले सभी मुख्य ऊतक प्रकारों (विभज्योतक, स्थायी - सरल और जटिल) को उनके कार्यों के साथ एक विस्तृत तालिका के रूप में याद रखें।
Question 2. रक्त कणिकाओं के प्रकार एवं कार्यों का सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
रक्त की संरचना (के घटकों) का विस्तृत सचित्र वर्णन कीजिए ।
अथवा
रक्त कणिकाओं के नाम और कार्य लिखिए ।
Answer: रक्त की संरचना एवं रक्त के घटक (Structure and Composition of Blood)- रक्त निम्नलिखित घटकों से
मिलकर बना होता है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र विभिन्न प्रकार की रुधिर कणिकाओं को दर्शाता है, जिनमें मेंढक और मनुष्य के इरिथ्रोसाइट्स (RBC), बेसोफिल, इओसिनोफिल, न्यूट्रोफिल, छोटी लिम्फोसाइट्स, मोनोसाइट्स, स्तनधारी प्लेटलेट्स और मेंढक की स्पिण्डिल कोशिकाएँ शामिल हैं, जो उनकी आकृतियों और प्रकारों को स्पष्ट करती हैं।
1. लाल रक्त कणिकाएँ (R.B.C.) या इरिथ्रोसाइट्स (Erythrocytes) – इनमें हीमोग्लोबिन नाम का प्रोटीन होता है जो श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन एवं कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन करता है।
2. श्वेत रक्त कणिकाएँ (W.B.C.) या ल्यूकोसाइट्स (Leucocytes) – ये हानिकारक बैक्टीरिया एवं मृत कोशिकाओं का भक्षण करके उन्हें नष्ट कर देती हैं और संक्रमण तथा आघातों से शरीर की रक्षा करती हैं।
3. रक्त पट्टिकाएँ (Blood Platelets) या थ्रोम्बोसाइट्स (Thrombocytes) – ये रक्त का थक्का जमाने में सहायक होती हैं और इस प्रकार अमूल्य रक्त को नष्ट होने से रोकती हैं।
4. प्लाज्मा (Plasma) – यह रक्त का द्रवीय भाग है जिसमें प्रोटीन, हॉर्मोन्स, ग्लूकोज, वसीय अम्ल, ऐमीनो अम्ल, खनिज लवण, भोजन के पचित भाग एवं उत्सर्जी पदार्थ होते हैं। यह रक्त के परिवहन का मुख्य माध्यम है।
In simple words: रक्त विभिन्न कणिकाओं (लाल, श्वेत, प्लेटलेट्स) और प्लाज्मा से बना एक तरल संयोजी ऊतक है जो शरीर में पदार्थों का परिवहन और सुरक्षा का कार्य करता है।
🎯 Exam Tip: रक्त के घटकों (कणिकाएँ और प्लाज्मा) और उनके कार्यों को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके सचित्र वर्णन के लिए।
Question 3. रक्त के कार्य लिखिए ।
Answer: रक्त के कार्य (Functions of Blood) रक्त के विभिन्न कार्य निम्नलिखित हैं-
1. फेफड़ों से ऊतकों तक ऑक्सीजन का परिवहन करता है।
2. विभिन्न ऊतकों में कार्बन डाइऑक्साइड को एकत्रित करके उसका फेफड़ों तक परिवहन करता है।
3. उपापचय में बने विषैले एवं हानिकारक पदार्थों | को एकत्रित करके हानिरहित बनाने के लिए यकृत में भेजता है।
4. विभिन्न प्रकार के उत्सर्जी पदार्थों को उत्सर्जन हेतु वृक्कों तक पहुँचाता है।
5. छोटी आँतों से पचित भोज्य पदार्थों का अवशोषण भी रक्त प्लाज्मा द्वारा होता है जिसे यकृत और फिर विभिन्न ऊतकों में भेज दिया जाता है।
6. विभिन्न प्रकार के हॉर्मोनों का परिवहन करता है।
7. शरीर के तापक्रम को ऊष्मा वितरण द्वारा नियन्त्रित रखता है।
In simple words: रक्त ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, पोषक तत्वों, हॉर्मोन और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है, शरीर की रक्षा करता है और तापमान को नियंत्रित करता है।
🎯 Exam Tip: रक्त के बहुमुखी कार्यों को उनके परिवहन, सुरक्षा और विनियमन भूमिकाओं के आधार पर बिंदुवार याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. रेखित पेशी एवं हृदय पेशी का नामांकित चित्र बनाइये ।
Answer:रेखित पेशी एवं हृदय पेशी का नामांकित चित्र-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तीन प्रकार के पेशीय ऊतक को दर्शाता है. (a) रेखित पेशी कोशिकाएं लंबी, बेलनाकार, अशाखित होती हैं और इनमें हल्के-गहरे बैंड तथा कई केंद्रक होते हैं. (b) चिकनी पेशी कोशिकाएं तर्कुरूपी, अशाखित और एकल केंद्रक वाली होती हैं, जिन पर कोई बैंड नहीं होते. (c) हृदय पेशी कोशिकाएं बेलनाकार, शाखित होती हैं, इनमें हल्के बैंड होते हैं और प्रत्येक कोशिका में एक या दो केंद्रक होते हैं, साथ ही अंतर्विष्ट पट्टियां भी दिखाई देती हैं.
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न प्रकार की पेशियों के चित्रों को दर्शाता है, जहाँ रेखित, चिकनी और हृदय पेशी की संरचनाओं को अलग-अलग दिखाया गया है.
🎯 Exam Tip: चित्रों को सही ढंग से लेबल करना और उनकी विशेषताओं को पहचानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर संरचनात्मक अंतर समझाने के लिए पूछे जाते हैं.
Question 5. उपकला ऊतक के प्रकारों का सचित्र वर्णन कीजिए ।
Answer: उपकला ऊतक के प्रकार-उपकला ऊतक अग्र प्रकार के होते हैं-
1. 1. सरल घनाकार उपकला ऊतक (Simple cuboidal epithelial tissue) – ये घनाकार होते हैं व लम्बाई, चौड़ाई, ऊँचाई बराबर होती है। ये स्वेद ग्रन्थियों, थायरॉइड ग्रन्थियों, यकृत, वृक्क नलिकाओं व जनदों में पाया जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र घनाकार उपकला ऊतक और स्तम्भाकार उपकला ऊतक की संरचना को दर्शाता है। (a) घनाकार उपकला कोशिकाएं घन के आकार की होती हैं, जिनमें केंद्रक होता है। (b) स्तम्भाकार उपकला कोशिकाएं लम्बी स्तंभ जैसी होती हैं, जिनमें स्वतंत्र स्तर पर सूक्ष्मांकुर होते हैं और केंद्रक निचले भाग में होता है।
1. 1. सरल स्तम्भकार ऊतक (Simple columnar epithelial tissue) – इस ऊतक की कोशिकाएँ एक-दूसरे से सटी हुई व स्तम्भ के समान दिखाई देती हैं। इनके स्वतन्त्र सिरों पर सूक्ष्मांकुर (Microvilli) पाये जाते हैं। ये अवशोषण तल को बढ़ाते हैं वे संवेदी अंगों से संवेदना ग्रहण करते हैं। पित्ताशय व पित्तवाहिनी की दीवार इसी ऊतक की बनी होती है।
2. स्तरित उपकला ऊतक (Stratified epithelial tissue) – इसमें कोशिकाएँ कई स्तरों में व्यवस्थित रहती हैं एवं स्तम्भाकार एवं जीवित होती हैं। इसमें जीवन-पर्यन्त विभाजन की क्षमता पाई जाती है। विभाजन की क्षमता होने के कारण इसे जनन स्तर कहते हैं। यह ऊतक घर्षण करने वाले स्थानों, मुखगुहा, त्वचा, एपिडर्मिस, इसोफेगस, नासा गुहा की म्यूकोसा, योनि आदि में पाया जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र स्तरित उपकला ऊतक की बहुस्तरीय संरचना को दर्शाता है। इसमें कोशिकाएं कई परतों में व्यवस्थित होती हैं, जो घर्षण वाले स्थानों पर सुरक्षा प्रदान करती हैं। निचली परत की कोशिकाएं जीवित और विभाजित होने वाली होती हैं, जबकि ऊपरी परतें मृत या चपटी हो सकती हैं।
1. 1. ग्रन्थिल उपकला ऊतक (Glandular epithelial tissue) – हमारे शरीर में कई प्रकार की ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं। इन ग्रन्थियों की स्वतन्त्र आन्तरिक सतह पर पाये जाने वाले ऊतक को ग्रन्थिल उपकला ऊतक कहते हैं। ये ग्रन्थियाँ एककोशिकीय व बहुकोशिकीय होती हैं। ये ग्रन्थियाँ त्वचा, स्वेद ग्रन्थि, स्तन ग्रन्थि, तेल ग्रन्थि, लार ग्रन्थि, जठर ग्रन्थि, अग्न्याशयी ग्रन्थि में होती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक ग्रन्थिल उपकला ऊतक की संरचना को दर्शाता है। इसमें कोशिकाएं एक डक्ट के माध्यम से स्राव उत्पन्न करती हैं, जो स्रावी अंगों जैसे ग्रंथियों में पाया जाता है। ये कोशिकाएं एककोशिकीय या बहुकोशिकीय हो सकती हैं और विभिन्न पदार्थों का स्राव करती हैं।
1. 1. सरल पक्ष्माभी उपकला ऊतक (Simple ciliated epithelial tissue) – इस ऊतक की कोशिकाएँ स्तम्भकार या घनाकार होती हैं। इसके सिरों पर छोटी-छोटी महीन धागों के समान रचनाएँ पायी जाती । हैं, जिन्हें सीलिया (Cilia) कहते हैं। ये ऊतक अण्डवाहिनी (Oviduct), मूत्रवाहिनी (Ureter), मुगुहा की श्लेष्मकला (Mucous menabrane), टिम्पैनिक गुहा, मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु की केन्द्रीय नील (Central canal) तथा श्वास नली की भीतरी सतह पर पाये जाते हैं। ये ऊतक के पक्ष्म तरफ तथा अन्य पदार्थ को ढकेलने में मदद करती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र पक्ष्माभी उपकला ऊतक की कोशिकाओं को दर्शाता है, जिनके स्वतंत्र सिरे पर छोटे, बाल जैसे सीलिया होते हैं। ये सीलिया केंद्रक युक्त कोशिकाओं की सतह पर उपस्थित होते हैं और पदार्थों को एक दिशा में धकेलने का कार्य करते हैं, जैसे श्वास नली या अंडवाहिनी में।
1. 1. सरल शल्की उपकला ऊतक (Siniple squamous epithelial tissue) – यह ऊतक शरीर की सतह की सुरक्षात्मक आवरण बनाता है। मूत्र नलिका, देहगुहा, हृदय के चारों ओर रक्षात्मक आवरण बनाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र शल्की उपकला ऊतक की चपटी, अनियमित आकार की कोशिकाओं को दर्शाता है, जिनमें एक केंद्रक और साइटोप्लाज्म होता है। ये कोशिकाएं एक पतली, चिकनी परत बनाती हैं जो सुरक्षात्मक आवरण प्रदान करती है, जैसे रक्त वाहिकाओं की परत या फेफड़ों की वायु-कोशिकाओं में।
1. 1. संवेदी उपकला ऊतक (Sensory epithelial tissue) – ये स्तम्भी उपकला ऊतक का रूपान्तरण है। इनके सिरे पर संवेदी रोम (Sensory hair) पाये जाते हैं। ये रोम तन्त्रिका तन्तु से जुड़े रहते हैं। ये ऊतक घ्राण कोष, आँख की रेटिना तथा मुखगुहा की म्यूकस झिल्ली में पाया जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र संवेदी उपकला ऊतक को दर्शाता है, जिसमें कोशिकाएं स्तंभ जैसी होती हैं और उनके ऊपरी सिरे पर संवेदी रोम (Sensory hair) होते हैं। ये रोम तंत्रिका तंतुओं से जुड़े होते हैं और बाहरी उत्तेजनाओं को ग्रहण करके मस्तिष्क तक संदेश पहुंचाते हैं, जैसे गंध या स्वाद के लिए।
In simple words: उपकला ऊतक शरीर की सतहों और अंगों की अंदरूनी परतें बनाता है, और इसके कई प्रकार (घनाकार, स्तम्भाकार, स्तरित, ग्रन्थिल, पक्ष्माभी, शल्की, संवेदी) होते हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी विशिष्ट संरचना और कार्य होते हैं, जैसे सुरक्षा, स्राव, अवशोषण या संवेदना ग्रहण करना.
🎯 Exam Tip: उपकला ऊतकों के विभिन्न प्रकारों को उनके आकार, परतों की संख्या और विशिष्ट कार्यों के आधार पर पहचानना और वर्गीकृत करना सीखें, क्योंकि यह अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछा जाता है.
Question 6. तन्त्रिकीय कोशिका के सचित्र वर्णन कीजिए ।
अथवा
तन्त्रिका ऊतक क्या है? इनकी संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए ।
Answer:तत्रिका कोशिका या तन्त्रिक ऊतक का सचित्र वर्णन तन्त्रिकीय ऊतक (Nervous tissue) – ये ऊतक सोचने, समझने, संवेदनाओं, उद्दीपन या बाह्य परिवर्तनों को ग्रहण करने की क्षमता रखता है। यह दो विशिष्ट प्रकार की कोशिका का बना होता है।
1. तन्त्रिका कोशिका (Neurons) – ये तन्त्रिका तन्त्र का निर्माण करती हैं व 4 से 136u या अधिक व्यास की कोशिकाएँ हैं। ये दो भागों की बनी होती हैं
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की विस्तृत संरचना को दर्शाता है। इसमें एक केंद्रक युक्त कोशिका काय, छोटे प्रवर्ध जिन्हें डेन्ड्राइट कहते हैं, और एक लंबा प्रवर्ध जिसे तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन) कहते हैं, शामिल हैं। एक्सॉन माइलिन शीथ से ढका होता है और आवेगों के संवहन में मदद करता है।
• कोशिकाकाय या सायटन (Cell body or Cyton) – यह तन्त्रिका का मुख्य भाग है, इसके कोशिकाद्रव्य में छोटे-छेटे निसिल्स कण (Nissils Granules) पाये जाते हैं।
• कोशिका प्रवर्ध (Cell processes) – कोशिकाकाय से एक या एक से अधिक छोटे-बड़े कोशिका द्रव्यीय प्रवर्ध निकले रहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं
(i) डेण्ड्राइट्स (Dendrites) तथा
(ii) एक्सॉन (Axon)
2. न्यूरोग्लिया (Neurogloea) – ये एक्सॉन रहित कोशिकाएँ हैं जो तन्त्रिकाओं में आवरण बनाती हैं।
In simple words: तंत्रिका ऊतक न्यूरॉन नामक कोशिकाओं से बना होता है जो सोचने, समझने और संदेशों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने का काम करता है. इसमें कोशिका काय, डेन्ड्राइट (संकेत ग्रहण करने वाले प्रवर्ध) और एक्सॉन (संकेत भेजने वाले प्रवर्ध) होते हैं, और न्यूरोग्लिया कोशिकाएं इसे सहारा देती हैं.
🎯 Exam Tip: न्यूरॉन की संरचना (कोशिका काय, डेन्ड्राइट, एक्सॉन) और उसके कार्य (संदेशों का संवहन) को स्पष्ट रूप से समझें और चित्र बनाने का अभ्यास करें. यह एक महत्वपूर्ण और अक्सर पूछा जाने वाला प्रश्न है.
Question 7. जालिकावत् एवं रेशेदार संयोजी ऊतकों के नामांकित चित्र बनाइये ।
Answer:जालिकावत् एवं रेशेदार संयोजी ऊतकों के नामांकित चित्र-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र जालिकामय ऊतक और रेशेदार संयोजी ऊतक को दर्शाता है। जालिकामय ऊतक में जालिकामय कोशिकाएं और तंतु एक मैट्रिक्स में फैले होते हैं, जो एक जाल जैसी संरचना बनाते हैं। रेशेदार संयोजी ऊतक में फाइब्रोब्लास्ट कोशिकाएं और मजबूत तंतु (जैसे कंडराएं) एक साथ मिलकर संरचनात्मक समर्थन प्रदान करते हैं, जैसे मांसपेशियों और हड्डियों को जोड़ना।
In simple words: जालिकावत् और रेशेदार संयोजी ऊतक शरीर के विभिन्न भागों को जोड़ने और सहारा देने का काम करते हैं, और इन चित्रों में उनकी विशिष्ट संरचनाएं दिखाई गई हैं.
🎯 Exam Tip: संयोजी ऊतकों के विभिन्न प्रकारों की संरचना को उनके घटकों (कोशिकाएं, तंतु, मैट्रिक्स) के साथ समझना और उनके चित्रों को सही लेबल के साथ बनाना महत्वपूर्ण है.
अभ्यास प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. शैवालों में पाया जाता है (a) असूत्री विभाजन (b) समसूत्री विभाजन (c) अर्द्धसूत्री विभाजन (d) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (a) असूत्री विभाजन
In simple words: शैवालों में आमतौर पर असूत्री विभाजन पाया जाता है, जो अलैंगिक प्रजनन का एक तरीका है.
🎯 Exam Tip: विभिन्न जीवों में कोशिका विभाजन के प्रकारों (असूत्री, समसूत्री, अर्द्धसूत्री) को उनके उदाहरणों के साथ याद रखें.
Question 2. समसूत्री विभाजन कौन-सी कोशिकाओं में होता (a) जनन (b) वसीय (c) दैहिक (d) ऊतक
Answer: (c) दैहिक
In simple words: समसूत्री विभाजन दैहिक कोशिकाओं में होता है, जिससे वृद्धि और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत होती है.
🎯 Exam Tip: समसूत्री विभाजन की प्रक्रिया और यह किन प्रकार की कोशिकाओं में होता है, यह जानना महत्वपूर्ण है. जनन कोशिकाओं में अर्द्धसूत्री विभाजन होता है.
Question 3. स्नायु और कण्डरा इसके बने होते हैं (a) उपकला ऊतक (b) पेशी ऊतक (c) उपास्थि (d) संयोजी ऊतक
Answer: (d) संयोजी ऊतक
In simple words: स्नायु (लिगामेंट) और कण्डरा (टेंडन) दोनों ही संयोजी ऊतक के उदाहरण हैं जो शरीर के अंगों को जोड़ते हैं.
🎯 Exam Tip: संयोजी ऊतकों के विभिन्न प्रकारों और उनके कार्यों को समझें, विशेषकर स्नायु (अस्थि को अस्थि से) और कण्डरा (पेशी को अस्थि से) के बीच का अंतर.
Question 4. कोलेजन को जब जल में उबालते हैं, वह इसमें परिवर्तित हो जाता है (a) जिलैटिन (b) रेटिकुलिन (c) इलास्टिन (d) मायोसिन
Answer: (a) जिलैटिन
In simple words: कोलेजन प्रोटीन को पानी में उबालने पर यह जिलेटिन में बदल जाता है, जिसका उपयोग खाद्य उत्पादों में किया जाता है.
🎯 Exam Tip: कोलेजन जैसे प्रमुख प्रोटीनों के रासायनिक गुणों और परिवर्तनों को याद रखें, विशेषकर उनके ऊष्मा के प्रति प्रतिक्रियाएं.
Question 5. अस्थिकोरकों से प्रवर्ध इसमें पाये जाते हैं (a) पटलिकाएँ। (b) सूक्ष्मनलिकाएँ (c) दुमिका (d) हैवर्स नलिका
Answer: (b) सूक्ष्मनलिकाएँ
In simple words: अस्थिकोरकों में सूक्ष्मनलिकाएँ होती हैं जो पोषक तत्वों और अपशिष्ट पदार्थों के आदान-प्रदान में मदद करती हैं.
🎯 Exam Tip: अस्थि की सूक्ष्म संरचना (ऑस्टियोसाइट्स, लैकुने, कैनालिकुली) को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर पोषक तत्वों के संचरण के संदर्भ में.
Question 6. कणिकाओं को निकाल देने के पश्चात् रुधिर को तरल अंश होता है (a) प्लाज्मा (b) लिम्फ (c) सीरम (d) वैक्सिन
Answer: (a) प्लाज्मा
In simple words: रक्त से रक्त कणिकाओं को हटाने के बाद बचा हुआ पीला तरल भाग प्लाज्मा कहलाता है, जिसमें प्रोटीन, हार्मोन और पोषक तत्व होते हैं.
🎯 Exam Tip: रक्त के विभिन्न घटकों (प्लाज्मा, लाल रक्त कणिकाएं, श्वेत रक्त कणिकाएं, प्लेटलेट्स) और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से समझें.
Question 7. रुधिर में वास्तविक कोशिकाएँ कौन-सी नहीं हैं? (a) प्लेटलेट्स (b) मोनोसाइट्स (c) बेसोफिल्स (d) न्यूट्रोफिल्स
Answer: (a) प्लेटलेट्स
In simple words: प्लेटलेट्स, जिन्हें थ्रोम्बोसाइट्स भी कहते हैं, वास्तव में कोशिकाएं नहीं बल्कि कोशिका के टुकड़े होते हैं जो रक्त के थक्के जमाने में मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: रक्त घटकों में कोशिकाओं और गैर-कोशिका घटकों के बीच के अंतर को पहचानें. प्लेटलेट्स को अक्सर कोशिका खंड के रूप में संदर्भित किया जाता है.
Question 8. इसके अत्यधिक खिंच जाने से मोच आ जाती है (a) तंत्रिका (b) कण्डरी (c) पेशी (d) स्नायु
Answer: (d) स्नायु
In simple words: स्नायु (लिगामेंट) वह संयोजी ऊतक है जो हड्डियों को जोड़ता है; इसके अत्यधिक खिंच जाने या फटने से मोच आती है.
🎯 Exam Tip: स्नायु और कण्डरा के कार्यों और चोट लगने पर उनके प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है.
Question 9. कंण्डरा एक संरचना है जो जोड़ता है (a) एक अस्थि को दूसरी अस्थि से (b) पेशी को अस्थि से (c) तंत्रिका को पेशी से (d) पेशी को पेशी से
Answer: (b) पेशी को अस्थि से
In simple words: कण्डरा (टेंडन) रेशेदार संयोजी ऊतक होते हैं जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं, जिससे गति संभव होती है.
🎯 Exam Tip: कण्डरा (टेंडन) और स्नायु (लिगामेंट) के कार्यों में अंतर स्पष्ट रूप से याद रखें - कण्डरा पेशी को अस्थि से जोड़ता है जबकि स्नायु अस्थि को अस्थि से जोड़ता है.
Question 10. चिकनी पेशियाँ इसमें पायी जाती हैं (a) गर्भाशय (b) धमनी (c) शिरा (d) ये सभी
Answer: (d) ये सभी
In simple words: चिकनी पेशियाँ शरीर के उन आंतरिक अंगों में पाई जाती हैं जिनकी गति हमारी इच्छा से नियंत्रित नहीं होती, जैसे गर्भाशय, धमनी और शिरा.
🎯 Exam Tip: चिकनी पेशियों के स्थान और कार्य को जानें, और उन्हें रेखित और हृदय पेशियों से अलग करना सीखें.
Question 11. निम्नलिखित पादप ऊतकों में से किसमें परिपक्वता पर जीवित प्रोटोप्लाज्म नहीं होता है (a) दृढ़ोतक (b) श्लेषोतक (b) ट्रेकीड्स (d) अधिचर्म
Answer: (a) दृढ़ोतक
In simple words: दृढ़ोतक, जिसे स्क्लेरेनकाइमा भी कहते हैं, परिपक्वता पर मृत कोशिकाओं से बना होता है, जिसमें जीवित प्रोटोप्लाज्म नहीं होता.
🎯 Exam Tip: पौधों में विभिन्न ऊतकों (पैरेन्काइमा, कोलेनकाइमा, स्क्लेरेनकाइमा) की संरचनात्मक विशेषताओं और उनकी जीवित या मृत प्रकृति को समझना महत्वपूर्ण है.
Question 12. संयोजी ऊतक के श्वेत तंतु इसके बने होते हैं (a) इलास्टिन (b) रेटिकुलर तन्तु (c) कोलेजन । (d) मायोसिन
Answer: (c) कोलेजन
In simple words: संयोजी ऊतक के श्वेत तंतु मुख्य रूप से कोलेजन प्रोटीन के बने होते हैं, जो इन्हें मजबूती और लचीलापन प्रदान करते हैं.
🎯 Exam Tip: संयोजी ऊतक में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के तंतुओं (कोलेजन, इलास्टिन, रेटिकुलर) और वे किन प्रोटीनों से बने होते हैं, उन्हें याद रखें.
Question 13. अस्थि ऊतक की कठोरता इनके फॉस्फेट्स तथा कार्बोनेट्स के कारण होती है (a) कैल्सियम और सोडियम (b) कैल्सियम और मैग्नीशियम (c) मैग्नीशियम और सोडियम (d) मैग्नीशियम और पोटैशियम
Answer: (b) कैल्सियम और मैग्नीशियम
In simple words: अस्थि ऊतक की कठोरता कैल्सियम और मैग्नीशियम फॉस्फेट्स और कार्बोनेट्स जैसे खनिजों के जमाव के कारण होती है.
🎯 Exam Tip: हड्डियों को कठोरता प्रदान करने वाले प्रमुख खनिज लवणों (कैल्सियम, मैग्नीशियम) को उनके रासायनिक रूपों (फॉस्फेट, कार्बोनेट) के साथ याद रखें.
Question 14. आकृति, कार्य तथा उत्पत्ति में समान कोशिकाओं का समूह कहलाता है (a) ऊतक (b) अंग (c) अंगक (d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) ऊतक
In simple words: ऊतक कोशिकाओं का एक समूह है जिनकी संरचना, कार्य और उत्पत्ति समान होती है.
🎯 Exam Tip: जीव विज्ञान में ऊतक की परिभाषा को सही ढंग से याद करें, क्योंकि यह एक मूलभूत अवधारणा है.
Question 15. पौधे की लम्बाई इसके द्वारा बढ़ती है (a) शीर्षस्थ विभज्या (b) पार्श्व विभज्या (c) बल्कुटजन (d) मृदूतक
Answer: (a) शीर्षस्थ विभज्या
In simple words: पौधों की लंबाई शीर्षस्थ विभज्योतक (एपिकल मेरिस्टेम) की वृद्धि के कारण बढ़ती है जो तने और जड़ के शीर्ष पर पाया जाता है.
🎯 Exam Tip: पौधों में विभिन्न विभज्योतकों (शीर्षस्थ, पार्श्व, अन्तर्वेशी) के स्थान और उनके द्वारा होने वाली वृद्धि (लंबाई, मोटाई) को समझें.
Question 16. कोशिका विभाजन इस तक सीमित है (a) विभज्योतक कोशिकाएँ (b) स्थायी कोशिकाएँ (c) स्रावी कोशिकाएँ (d) उपर्युक्त सभी
Answer: (a) विभज्योतक कोशिकाएँ
In simple words: पौधों में कोशिका विभाजन मुख्य रूप से विभज्योतक कोशिकाओं तक सीमित होता है, जो लगातार विभाजित होकर वृद्धि करती हैं.
🎯 Exam Tip: विभज्योतक ऊतक की विशेषता (निरंतर विभाजन) और स्थायी ऊतक से उसके अंतर को समझें.
Question 17. सक्रिय विभाजन इसकी कोशिकाओं में होता है (a) जाइलम (b) फ्लोएम (c) दृढ़ोतक (d) कैम्बियम
Answer: (d) कैम्बियम
In simple words: कैम्बियम एक विभज्योतक ऊतक है जिसकी कोशिकाएं सक्रिय रूप से विभाजित होकर पौधे की मोटाई में वृद्धि करती हैं.
🎯 Exam Tip: पौधों में सक्रिय रूप से विभाजित होने वाले ऊतकों (विभज्योतक, कैम्बियम) को पहचानें और उनके कार्यों को जानें.
Question 18. घास का तना इसकी क्रियाशीलता से लम्बाई में बढ़ता है (a) प्राथमिक विभज्या (b) द्वितीयक विभज्या (c) अंतर्वेशी विभज्या (d) शीर्षस्थ विभज्या
Answer: (c) अंतर्वेशी विभज्या
In simple words: घास जैसे पौधों में तने की लंबाई अंतर्वेशी विभज्योतक की क्रियाशीलता से बढ़ती है, जो पर्वसंधियों पर पाया जाता है.
🎯 Exam Tip: अंतर्वेशी विभज्योतक के स्थान (पर्वसंधि) और उसके कार्य (लंबाई में वृद्धि) को विशेष रूप से समझें, खासकर मोनोकॉट पौधों के संदर्भ में.
Question 19. सरल ऊतक ये हैं (a) मृदूतक, जाइलम और श्लेषोतक (b) मृदूतक, श्लेषोतक और दृढ़ोतक (c) मृदूतक, जाइलम और दृढ़ोतक (d) मृदूतक, जाइलम और फ्लोएम
Answer: (b) मृदूतक, श्लेषोतक और दृढ़ोतक
In simple words: सरल ऊतक वे होते हैं जो एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं, जैसे मृदूतक (पैरेन्काइमा), श्लेषोतक (कोलेनकाइमा) और दृढ़ोतक (स्क्लेरेनकाइमा).
🎯 Exam Tip: पौधों में सरल और जटिल ऊतकों के बीच का अंतर और उनके प्रत्येक के उदाहरणों को याद रखें.
Question 20. जटिल ऊतक इनका बना होता है- (a) समान कार्य करने वाली विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ (b) भिन्न-भिन्न कार्य करने वाली विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ (c) समान उत्पत्ति तथा समान कार्य करने वाली समान प्रकार की कोशिकाएँ। (d) समान उत्पत्ति तथा समान कार्य करने वाली विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ।
Answer: (b) भिन्न-भिन्न कार्य करने वाली विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ
In simple words: जटिल ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं, जो सभी मिलकर एक विशिष्ट कार्य करते हैं, भले ही उनकी व्यक्तिगत कार्यप्रणाली भिन्न हो.
🎯 Exam Tip: जटिल ऊतक की परिभाषा और उसके उदाहरणों (जाइलम, फ्लोएम) को स्पष्ट रूप से समझें, जहाँ विभिन्न कोशिकाएं मिलकर एक इकाई के रूप में कार्य करती हैं.
Question 21. सबसे अधिक सामान्य प्रकार का भरण ऊतक है (a) उपत्वचा (या अधिचर्म) (b) श्लेषोतक (c) दृढ़ोतक (d) मृदूतक
Answer: (d) मृदूतक
In simple words: मृदूतक (पैरेन्काइमा) सबसे सामान्य प्रकार का सरल स्थायी ऊतक है जो पौधों में अधिकांश भरण ऊतक बनाता है और विभिन्न कार्य करता है.
🎯 Exam Tip: मृदूतक की सर्वव्यापकता और उसके विविध कार्यों (भोजन संग्रहण, प्रकाश संश्लेषण, आदि) को याद रखें.
Question 22. दृढ़ोतक से श्लेषोतक इसमें भिन्न होता है (a) परिपक्वता पर कोशिकाद्रव्य धारण किये रखना (b) स्थूल भित्तियाँ रखना (c) विस्तृत अवकाशिका रखना (d) विभज्योतकी होना
Answer: (a) परिपक्वता पर कोशिकाद्रव्य धारण किये रखना
In simple words: श्लेषोतक (कोलेनकाइमा) अपनी परिपक्व अवस्था में भी जीवित प्रोटोप्लाज्म रखता है, जबकि दृढ़ोतक (स्क्लेरेनकाइमा) परिपक्वता पर मृत हो जाता है.
🎯 Exam Tip: पौधों के सरल स्थायी ऊतकों (मृदूतक, श्लेषोतक, दृढ़ोतक) के बीच प्रमुख संरचनात्मक और कार्यात्मक अंतरों को समझें, विशेषकर उनकी जीवित/मृत स्थिति और कोशिका भित्ति की विशेषताओं को.
Question 23. श्लेषोतक मुख्यतः बनाता है (a) अधश्चर्म (b) अधिचर्म (c) फ्लोएम (d) आन्तरिक बल्कुट
Answer: (a) अधश्चर्म
In simple words: श्लेषोतक (कोलेनकाइमा) पौधों में अधश्चर्म (हाइपोडर्मिस) का मुख्य घटक होता है, जो युवा तनों और पत्तियों को लचीलापन और सहारा प्रदान करता है.
🎯 Exam Tip: कोलेनकाइमा के स्थान (हाइपोडर्मिस) और उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले लचीलेपन और यांत्रिक समर्थन को याद रखें.
Question 24. किसकी जीवित कोशिकाएँ तनन तथा यान्त्रिक सामर्थ्य प्रदान करती हैं (a) श्लेषोतक (b) दृढ़ोतक (c) फ्लोएम (d) स्क्लोराइड
Answer: (a) श्लेषोतक
In simple words: श्लेषोतक (कोलेनकाइमा) की जीवित कोशिकाएं पौधों को बिना टूटे लचीलापन और यांत्रिक शक्ति प्रदान करती हैं.
🎯 Exam Tip: श्लेषोतक की विशिष्ट भूमिका को समझें जो पौधों में लचीलेपन के साथ-साथ यांत्रिक शक्ति प्रदान करता है, खासकर युवा और बढ़ते हुए भागों में.
Question 25. काष्ठीय (लिग्नीफाइड) दीर्धित निर्जीव कोशिकाएँ हैं (a) मृदूतक (b) श्लेषोतक (c) दृढ़ोतक (d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) दृढ़ोतक
In simple words: दृढ़ोतक (स्क्लेरेनकाइमा) लिग्निन-युक्त, लंबी और मृत कोशिकाओं से बना होता है जो पौधों को कठोरता और यांत्रिक शक्ति प्रदान करता है.
🎯 Exam Tip: दृढ़ोतक की विशेषता (लिग्निनयुक्त, निर्जीव कोशिकाएं) को याद रखें जो उसे पौधों के सबसे कठोर ऊतकों में से एक बनाती है.
Question 26. निम्नलिखित ऊतकों में से प्रायः कौन निर्जीव कोशिकाओं का बना होता है (a) फ्लोएम (b) अधिचर्म (c) जाइलम (d) अन्तश्चर्म
Answer: (c) जाइलम
In simple words: जाइलम मुख्य रूप से मृत कोशिकाओं (जैसे वाहिकाएं और ट्रेकीड) से बना होता है, जो पानी और खनिजों के संवहन का कार्य करता है.
🎯 Exam Tip: पौधों के जटिल ऊतकों (जाइलम और फ्लोएम) के घटकों और उनकी जीवित या मृत प्रकृति को समझें. जाइलम में अधिकांश घटक मृत होते हैं जबकि फ्लोएम में अधिकांश जीवित होते हैं.
Question 27. पौधों में फ्लोएम यह कार्य सम्पन्न करता है (a) आहार का चालन (b) जल का चालन (c) आधार प्रदान करना (d) प्रकाश-संश्लेषण
Answer: (a) आहार का चालन
In simple words: फ्लोएम पौधों में पत्तियों द्वारा बनाए गए भोजन (आहार) को पौधे के अन्य भागों तक पहुंचाता है.
🎯 Exam Tip: जाइलम (जल संवहन) और फ्लोएम (भोजन संवहन) के कार्यों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग याद रखें.
Question 28. सरल उपकला एक ऊतक है जिसमें कोशिकाएँ (a) कठोर होती हैं और अंगों को आधार प्रदान करती हैं। (b) अंग बनाने के लिए लगातार विभाजित होती रहती हैं। (c) एकल परत बनाने के लिए एक-दूसरे से सीधे चिपकी रहती हैं। (d) अनियमित परत बनाने के लिए एक-दूसरे से शिथिलता से जुड़ी रहती हैं।
Answer: (c) एकल परत बनाने के लिए एक-दूसरे से सीधे चिपकी रहती हैं।
In simple words: सरल उपकला ऊतक में कोशिकाएं एक ही परत में एक-दूसरे से मजबूती से जुड़ी होती हैं, जिससे एक चिकनी और पतली सतह बनती है.
🎯 Exam Tip: सरल उपकला और स्तरित उपकला के बीच अंतर को जानें, विशेषकर परतों की संख्या और कोशिकाओं के जुड़ाव के संदर्भ में.
Question 29. कुट्टिम उपकला इसका नाम है (a) शल्की उपकला (b) घनाभ उपकला (c) पक्ष्माभी उपकला (d) स्तम्भकार उपकला
Answer: (a) शल्की उपकला
In simple words: शल्की उपकला को कुट्टिम उपकला भी कहते हैं क्योंकि इसकी कोशिकाएं चपटी और टाइल जैसी होती हैं.
🎯 Exam Tip: विभिन्न उपकला ऊतकों के वैकल्पिक नामों को याद रखें, जैसे शल्की उपकला के लिए कुट्टिम उपकला.
Question 30. कुर्च परिवेशित उपकला इसमें पायी जाती है (a) आमाशय (b) छुद्रान्त्र (c) डिम्बवाहिनी नली (d) श्वासनली
Answer: (b) छुद्रान्त्र
In simple words: कुर्च परिवेशित उपकला, जिसमें ब्रश बॉर्डर माइक्रोविली होते हैं, छुद्रान्त्र (छोटी आंत) में पाई जाती है, जहाँ यह अवशोषण के सतह क्षेत्र को बढ़ाती है.
🎯 Exam Tip: विशिष्ट उपकला ऊतकों के स्थान और उनके विशिष्ट कार्यों (जैसे अवशोषण) को याद रखें.
Question 31. पक्ष्माभी उपकला इसमें पायी जाती है (a) जिह्वा (b) ग्रसिका । (c) श्वासनली (d) गर्भाशय
Answer: (c) श्वासनली
In simple words: पक्ष्माभी उपकला श्वासनली में पाई जाती है, जहाँ इसके सीलिया बलगम और धूल के कणों को बाहर धकेलने में मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: पक्ष्माभी उपकला के कार्य (कणों को हटाना) और उसके स्थान (श्वासनली, फैलोपियन ट्यूब) को याद रखें.
Question 32. किस प्रकार का ऊतक ग्रन्थियाँ बनाता है ? (a) उपकला (b) संयोजी (c) तन्त्रिका (d) पेशी
Answer: (a) उपकला
In simple words: उपकला ऊतक की विशिष्ट कोशिकाएं ग्रन्थियों का निर्माण करती हैं, जो विभिन्न पदार्थों का स्राव करती हैं.
🎯 Exam Tip: ग्रन्थिल उपकला ऊतक की भूमिका को समझें कि वह शरीर में ग्रंथियों के निर्माण और स्राव कार्य में कैसे शामिल होता है.
Question 33. गर्तिकामय ऊतक है (a) तंत्रिका ऊतक (b) संयोजी ऊतक (c) पेशी ऊतक (d) अस्थि ऊतक
Answer: (b) संयोजी ऊतक
In simple words: गर्तिकामय ऊतक (एरिओलर ऊतक) एक प्रकार का ढीला संयोजी ऊतक है जो अंगों को सहारा देता है और त्वचा के नीचे पाया जाता है.
🎯 Exam Tip: संयोजी ऊतक के विभिन्न प्रकारों और उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले सहारे और पैकिंग कार्यों को जानें.
Question 34. कलश कोशिकाओं का कार्य क्या है? (a) HCI का उत्पादन (b) श्लेष्मा का उत्पादन (c) एन्जाइमों का उत्पादन (d) हार्मोनों का उत्पादन
Answer: (b) श्लेष्मा का उत्पादन
In simple words: कलश कोशिकाएं (गॉब्लेट कोशिकाएं) श्लेष्मा (म्यूकस) का स्राव करती हैं जो आंतरिक सतहों को चिकना और सुरक्षित रखती हैं.
🎯 Exam Tip: कलश कोशिकाओं की पहचान और उनके विशिष्ट कार्य (श्लेष्मा स्राव) को याद रखें, विशेषकर श्वसन और पाचन पथ में.
Question 35. एक लम्बी अस्थि का सिरा, दूसरी अस्थि से इसके द्वारा जुड़ा होता है (a) स्नायु (b) कण्डरा (c) उपास्थि (d) पेशी
Answer: (a) स्नायु
In simple words: स्नायु (लिगामेंट) रेशेदार संयोजी ऊतक होते हैं जो एक हड्डी को दूसरी हड्डी से जोड़ते हैं, जिससे जोड़ों को स्थिरता मिलती है.
🎯 Exam Tip: स्नायु (लिगामेंट) के कार्य को कण्डरा (टेंडन) से अलग पहचानें, स्नायु हड्डियों को जोड़ते हैं जबकि कण्डरा मांसपेशी को हड्डी से जोड़ते हैं.
उत्तरमाला
1. (a)
2. (c)
3. (d)
4. (a)
5. (b)
6. (a)
7. (a)
8. (d)
9. (b)
10. (d)
11. (a)
12. (c)
13. (b)
14. (a)
15. (a)
16. (a)
17. (d)
18. (c)
19. (b)
20. (b)
21. (d)
22. (a)
23. (a)
24. (a)
25. (c)
26. (c)
27. (a)
28. (c)
29. (a)
30. (b)
31. (c)
32. (a)
33. (b)
34. (b)
35. (a)
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